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                <title>अमेरिका-ईरान पीस डील पर हस्ताक्षर, यूएस झुका- पैसे भी देगा, होर्मुज़ खुलेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया में महीनों से जारी भीषण तनाव और सैन्य टकराव के बीच एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने दोनों देशों के बीच जारी दुश्मनी को खत्म करने के लिए एक </span>14-<span lang="hi" xml:lang="hi">सूत्रीय समझौता ज्ञापन पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर कर इसे आधिकारिक रूप से अंतिम रूप दे दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज समुद्री रास्ते का खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि दुनिया के कुल तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण जलमार्ग से होकर गुजरता है। इस समझौते</span></p></div></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181546/america-iran-peace-deal-signed-us-bowed-%E2%80%93-will-also-give"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas12.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया में महीनों से जारी भीषण तनाव और सैन्य टकराव के बीच एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने दोनों देशों के बीच जारी दुश्मनी को खत्म करने के लिए एक </span>14-<span lang="hi" xml:lang="hi">सूत्रीय समझौता ज्ञापन पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर कर इसे आधिकारिक रूप से अंतिम रूप दे दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज समुद्री रास्ते का खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि दुनिया के कुल तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण जलमार्ग से होकर गुजरता है। इस समझौते के सफल होने से न केवल तेल की वैश्विक कीमतें स्थिर होंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुराने तनाव को कूटनीतिक रास्ते से सुलझाने का एक नया रास्ता खुलेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस समझौते को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">का नाम दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन से मुलाकात के दौरान इस समझौते की हार्ड कॉपी पर भी हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर करने के बाद ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">यह साइन हो चुका है। मैंने अभी-अभी इस पर हस्ताक्षर किए हैं।" दूसरी तरफ ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियन और अन्य अधिकारियों ने भी इसे डिजिटल रूप से साइन किया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने भी इस पर बयान जारी कर कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू होगा। पहले कदम के रूप में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान तुरंत हॉर्मुज जलडमरूमध्य </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को खोल देगा और अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटा लेगा।"</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">व्हाइट हाउस और ईरानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए समझौते के मुख्य प्वाइंट इस प्रकार हैं:</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तत्काल युद्धविराम: अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान और उनके सहयोगी सभी मोर्चों (लेबनान सहित) पर तत्काल और स्थायी रूप से सैन्य अभियानों को समाप्त करने की घोषणा करते हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग की धमकी या हमला नहीं करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संप्रभुता का सम्मान: दोनों देश एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संप्रभुता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का वादा करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">60<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों की समयसीमा: दोनों पक्ष अधिकतम </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते (</span>Final Deal) <span lang="hi" xml:lang="hi">पर बातचीत पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का अंत: समझौते पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा और </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर इसे पूरी तरह खत्म कर देगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सेना की वापसी: अंतिम समझौते के </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर अमेरिका ईरान के नजदीकी इलाकों से अपनी सेनाएं हटा लेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना: ईरान शुरुआती </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के लिए फारस की खाड़ी से ओमान के समुद्र तक वाणिज्यिक जहाजों (</span>Commercial Vessels) <span lang="hi" xml:lang="hi">के सुरक्षित और मुफ्त आवागमन की व्यवस्था करेगा। </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर नौसैनिक और तकनीकी बाधाओं (जैसे बारूदी सुरंगें हटाना) को दूर किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य का प्रशासन: ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग के भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं को परिभाषित करने के लिए ओमान और अन्य तटीय देशों के साथ बातचीत करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">300<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर का पुनर्निर्माण पैकेज: अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम </span>300<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर (</span>USD $300 Billion) <span lang="hi" xml:lang="hi">की योजना विकसित करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिबंधों की समाप्ति: एक तय समय सारणी के तहत अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के खिलाफ सभी एकतरफा (प्राइमरी और सेकेंडरी) प्रतिबंधों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (</span>UNSC) <span lang="hi" xml:lang="hi">के प्रस्तावों के तहत लगाए गए प्रतिबंधों को समाप्त करने का वचन देता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">परमाणु हथियारों पर रोक: ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित या हासिल नहीं करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यूरेनियम संवर्धन का निपटारा: ईरान के समृद्ध यूरेनियम के भंडार का निपटारा अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (</span>IAEA) <span lang="hi" xml:lang="hi">की देखरेख में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑन-साइट डाउन-ब्लेंडिंग</span>' (<span lang="hi" xml:lang="hi">यूरेनियम की क्षमता कम करना) के जरिए किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यथास्थिति (</span>Status Quo) <span lang="hi" xml:lang="hi">बनाए रखना: अंतिम समझौता होने तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को मौजूदा स्तर पर ही रोके रखेगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और न ही क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक तैनात करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तेल निर्यात को छूट और फंड की बहाली: अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के लिए तत्काल छूट (</span>Waivers) <span lang="hi" xml:lang="hi">जारी करेगा। साथ ही विदेशों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरान की संपत्तियों को वापस इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निगरानी तंत्र की स्थापना: समझौते के सफल कार्यान्वयन और भविष्य के अनुपालन की निगरानी के लिए एक कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा। इस अंतिम समझौते को </span>UNSC <span lang="hi" xml:lang="hi">के एक बाध्यकारी प्रस्ताव द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस समझौते पर अंग्रेजी और फारसी (</span>Farsi) <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों भाषाओं में हस्ताक्षर किए गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि अनुवाद को लेकर भविष्य में कोई मतभेद या कोई और व्याख्या न हो। ईरान ने अपनी केंद्रीय बैंक के साथ मिलकर जब्त संपत्तियों को वापस पाने के तकनीकी तौर-तरीकों को भी अंतिम रूप दे दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:07:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान का आर्थिक संकट: रियाल की गिरावट से वैश्विक ऊर्जा संकट और भारत की नयी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p><strong>डॉ.दीपकुमार शुक्ल(स्वतन्त्र टिप्पणीकार)</strong></p>
<p>ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। आर्थिक संकट ने न केवल देश की जनता को झकझोर दिया है बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी गहरा असर डाला है। ईरानी मुद्रा रियाल की रिकॉर्ड गिरावट, महँगाई का चालीस प्रतिशत से ऊपर पहुँचना और विदेशी मुद्रा भण्डार पर दबाव ने ईरान की अर्थव्यवस्था को लगभग पंगु बना दिया है। एक डॉलर के लिए लगभग 1.42 से 1.45 मिलियन रियाल देने पड़ रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि देश की मुद्रा किस हद तक कमजोर हो</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165490/irans-economic-crisis-due-to-the-fall-of-rial-global"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/deep-shukla.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><strong>डॉ.दीपकुमार शुक्ल(स्वतन्त्र टिप्पणीकार)</strong></p>
<p>ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। आर्थिक संकट ने न केवल देश की जनता को झकझोर दिया है बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी गहरा असर डाला है। ईरानी मुद्रा रियाल की रिकॉर्ड गिरावट, महँगाई का चालीस प्रतिशत से ऊपर पहुँचना और विदेशी मुद्रा भण्डार पर दबाव ने ईरान की अर्थव्यवस्था को लगभग पंगु बना दिया है। एक डॉलर के लिए लगभग 1.42 से 1.45 मिलियन रियाल देने पड़ रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि देश की मुद्रा किस हद तक कमजोर हो चुकी है। इस स्थिति ने आयात क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है और आम जनता के लिए रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करना कठिन हो गया है। अनाप-शनाप कीमतें बढ़ने से खाद्य पदार्थों से लेकर आवश्यक वस्तुओं तक आम नागरिकों की पहुँच से बाहर होते जा रहे हैं। यही कारण है कि जनता सड़कों पर उतर आयी है| विरोध प्रदर्शन अब केवल आर्थिक सुधार की माँग तक सीमित ना रहकर शासन परिवर्तन की माँग तक पहुँच चुके हैं।</p>
<p>दिसम्बर-2025 के अन्त में व्यापारियों की हड़ताल से शुरू हुआ आन्दोलन धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया। तेहरान ग्रैंड बाज़ार और मोबाइल मार्केट्स में दुकानदारों ने कारोबार बन्द कर दिया। विश्वविद्यालयों के छात्र भी इस आन्दोलन में शामिल हो गये और धीरे-धीरे यह असन्तोष राजनीतिक विद्रोह का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारी खुले आम शासन की वैधता पर सवाल उठाते हुए “Death to the oppressor—whether Shah or Supreme Leader” जैसे नारे लगा रहे हैं। जिसका अर्थ है “अत्याचारी का नाश हो- चाहे वह शाह हो या सर्वोच्च नेता”। जनता का मानना है कि मौजूदा नेतृत्व अक्षम हो चुका है। हालात इतने बिगड़े कि मौजूदा केन्द्रीय बैंक गवर्नर को इस्तीफ़ा देना पड़ा और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने नया गवर्नर नियुक्त किया। लेकिन यह बदलाव भी जनता के गुस्से को शान्त नहीं कर पाया| क्योंकि संकट की जड़ें कहीं अधिक गहरी हैं।</p>
<p>लगातार बढ़ती महँगाई, विदेशी मुद्रा भण्डार की कमी और आयात पर अत्यधिक निर्भरता ने रियाल को बुरी तरह कमजोर कर दिया है। दरअसल सितम्बर -2025 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा “स्नैपबैक प्रतिबन्ध” लागू कर देने से तेल और गैस निर्यात पर रोक लग गयी| जिससे ईरान की विदेशी मुद्रा आय घट गयी। मध्य-पूर्व में हालिया संघर्षों ने व्यापार मार्ग और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया, जिससे निवेशकों का भरोसा घटा और पूँजी पलायन बढ़ा। राजनीतिक भ्रष्टाचार और शासन की प्राथमिकताएँ भी इस संकट के लिए जिम्मेदार हैं। सरकार ने घरेलू आर्थिक सुधारों की बजाय “एक्सिस ऑफ रजिस्टेंस” अर्थात क्षेत्रीय सैन्य गठबन्धन को फण्डिंग की  प्राथमिकता दी। इसके बाद घरेलू स्तर पर पानी और ऊर्जा संकट की उत्पादन लागत बढ़ गयी| जिसका सीधा असर उद्योग तथा कृषि पर पड़ा।</p>
<p>ईरान का संकट केवल घरेलू स्तर तक सीमित नहीं है। यह दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस उत्पादक देशों में से एक है। आर्थिक अस्थिरता और राजनीतिक संकट ने इसके निर्यात तन्त्र को कमजोर कर दिया है। अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिबन्धों और घरेलू संकट के कारण ईरान का तेल निर्यात घट रहा है। जिससे वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बढ़ गयी है। एशियाई देशों, विशेषकर भारत और चीन को वैकल्पिक सप्लाई चैन तलाशनी पड़ रही हैं। ईरान की अस्थिरता से ओपेक देशों पर दबाव बढ़ा है कि वे उत्पादन बढ़ाएँ। इससे अमेरिका और सऊदी अरब जैसे बड़े उत्पादक देशों को बाज़ार स्थिर करने का अवसर मिला है। यूरोप में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिन्ता बढ़ी है,  खासकर सर्दियों के मौसम में जब ऊर्जा की माँग अधिक होती है। इस संकट ने वैश्विक राजनीति को भी प्रभावित किया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि ईरान शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाता है या उन्हें मारता है तो अमेरिका उनकी सहायता के लिए आगे आएगा। यह बयान सीधे तौर पर ईरान के सुप्रीम लीडर को चुनौती माना जा रहा है। हालाकि ईरान ने पलटवार करते हुए ट्रम्प को हद में रहने की चेतवानी दी है| अब सबकी नज़र इस बात पर है कि चीन और रूस जैसे देश ईरान के मौजूदा हालात पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। रूस ने ईरान के ताजा हालात पर चिन्ता जतायी है, परन्तु भारत ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि उनकी सरकार सभी को धैर्यपूर्वक सुनने को तैयार है और बैंकिंग सिस्टम में सुधार लाने के प्रयास किये जा रहे हैं। लेकिन जनता का गुस्सा इतना गहरा है कि इन बयानों से हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं।</p>
<p>भारत पर इस संकट का सीधा असर पड़ रहा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। ईरान का संकट और मध्य-पूर्व की अस्थिरता से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब और रूस से तेल आयात करता है लेकिन ईरान की अस्थिरता से वैश्विक बाज़ार में कीमतें ऊपर जाएँगी। यदि ईरान “होर्मुज जलडमरूमध्य” को प्रभावित करता है तो 20 से 25 प्रतिशत वैश्विक तेल और एलएनजी सप्लाई बाधित होगी, जिससे भारत की ऊर्जा लागत बढ़ेगी। ईंधन महँगा होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ेगी। खाद्य वस्तुओं और उपभोक्ता सामानों की कीमतें ऊपर जाएँगी। डॉलर की मज़बूती से रुपया कमजोर होगा, जिससे आयात महँगा पड़ेगा। भारत-ईरान व्यापार भी प्रभावित होगा। भारत ईरान से पेट्रोकेमिकल्स और खनिज आयात करता है। ईरान के वर्तमान संकट से यह व्यापार घट सकता है। भारतीय दवाइयाँ और कृषि उत्पाद ईरान में महँगे हो सकते हैं। वैश्विक बाज़ार में अस्थिरता से भारतीय शेयर बाज़ार पर दबाव बढ़ेगा, जैसा कि हाल ही में सेंसेक्स में गिरावट देखी गयी। इस संकट से सोने की कीमतें भी बढ़ेंगी क्योंकि निवेशक सुरक्षित विकल्प चुनते हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोना आयातक है, इसलिए घरेलू बाज़ार में सोना महँगा होगा। यह संकट भारत के लिए जोखिम और अवसर दोनों लेकर आया है। जोखिम यह है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बढ़ेगा, महँगाई और व्यापार घाटा बढ़ सकता है। अवसर यह है कि भारत रूस और सऊदी अरब से आयात बढ़ाकर वैकल्पिक सप्लाई चैन मजबूत कर सकता है। घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा निवेश को तेज़ करने का भी यह सही समय है। भारत के पास विविध आयात स्रोत और मज़बूत मैक्रोइकोनॉमिक संकेतक हैं, लेकिन तेल कीमतों और डॉलर की मज़बूती से घरेलू महँगाई बढ़ने की सम्भावना  है। आने वाले महीनों में यह संकट मध्य-पूर्व की स्थिरता और अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ारों के लिए गम्भीर चुनौती बन सकता है।</p>
<p>फिलहाल ईरान में हालात सामान्य होते हुए नहीं दिखाई दे रहे हैं। बढ़ती महँगाई ने मिडिल ईस्ट के इस देश के लोगों की चिन्ता बढ़ा दी है। कारोबारी से लेकर छात्र तक आन्दोलन में शामिल हो चुके हैं। धीरे-धीरे यह प्रदर्शन ईरान के आध्यात्मिक शहर कोम तक पहुँच चुका है। कोम ईरान में इस्लाम की राह दिखाने वाला शहर है और शिया मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। वहाँ तक आन्दोलन का पहुँचना यह दर्शाता है कि जनता का असन्तोष धार्मिक और सांस्कृतिक केन्द्रों तक फैल गया है। विपक्षी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक तेहरान, इस्फाहन, लोरेस्तान, मज़नदारन, खुजेस्तान, हमदान और फार्स में विरोध प्रदर्शन की आग फैल चुकी है। प्रदर्शनकारियों की भीड़ लगातार ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह खामनेई के खिलाफ नारेबाज़ी कर रही है।</p>
<p>स्पष्ट है कि ईरान का संकट केवल घरेलू समस्या नहीं है बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा बन चुका है। यह संकट जहाँ घरेलू स्तर पर जनता की रोज़मर्रा की जिन्दगी को प्रभावित कर रहा है, राजनीतिक अस्थिरता को जन्म दे रहा है और शासन की वैधता पर सवाल खड़े कर रहा है। वहीँ अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर यह संकट ऊर्जा बाज़ार को अस्थिर कर रहा है, वैश्विक महँगाई को बढ़ा रहा है और भारत जैसे देशों की आर्थिक स्थिरता को चुनौती दे रहा है। भारत को इस संकट से निपटने के लिए अपनी ऊर्जा रणनीति को और अधिक मज़बूत करना होगा, वैकल्पिक सप्लाई चैन विकसित करनी होगी तथा नवीकरणीय ऊर्जा निवेश को तेज़ करना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 21:31:37 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान ने इजराइल के दूतावास पर किया जोरदार हमला, क्या आर-पार के मूड में आ गया- ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk</strong></p>
<p>ईरान के इजरायल पर मिसाइल अटैक के बाद मीडिल ईस्ट में टेंशन गहरा गया है। वहीं डेनमार्क में इजरायली दूतावास के पास बड़ा धमाका होने की खबर सामने आई है। कोपेनहेगन में धामके की आवाज सुनी गई है। इजरायली दूतावास के पास दो धमाके हुए हैं। यानी अब ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग की आग डेनमार्क तक जा पहुंची है। हालांकि डेनमार्क में इजरायली अबेंसी के पास हुए धमाके में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। डेनमार्क पुलिस ने दोनों ब्लास्ट को लेकर कहा है कि इसकी जांच की जाएगी। इजरायल अबेंसी के बाहर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145260/iran-launched-a-strong-attack-on-israels-embassy-have-you"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/ईरान-ने-इजराइल-के-दूतावास-पर-किया-जोरदार-हमला,-क्या-आर-पार-के-मूड-में-आ-गया--ईरान.webp" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk</strong></p>
<p>ईरान के इजरायल पर मिसाइल अटैक के बाद मीडिल ईस्ट में टेंशन गहरा गया है। वहीं डेनमार्क में इजरायली दूतावास के पास बड़ा धमाका होने की खबर सामने आई है। कोपेनहेगन में धामके की आवाज सुनी गई है। इजरायली दूतावास के पास दो धमाके हुए हैं। यानी अब ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग की आग डेनमार्क तक जा पहुंची है। हालांकि डेनमार्क में इजरायली अबेंसी के पास हुए धमाके में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। डेनमार्क पुलिस ने दोनों ब्लास्ट को लेकर कहा है कि इसकी जांच की जाएगी। इजरायल अबेंसी के बाहर हुए दो धमाकों की जांच शुरू कर दी गई है। दुनियाभर में जितने भी इजरायल के दूतावास हैं उन सभी के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। ईरान सीधे तौर पर वॉर में आ गया है। हालांकि ये हमला किसने किया है ये अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है।</p>
<p>आईडीएफ ने साफ कर दिया है कि हमले का टाइम और जगह हम निर्धारित करेंगे। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि इजरायल की तरफ से पलटवार कब और कैसे किया जाता है। हमले से कुछ घंटे पहले अमेरिका ने सचेत किया था। हमले को लेकर अमेरिका की तरफ से इजरायल को चेतवनी जारी की गई थी। बाइडन ने ईरान के मिसाइल हमले को नाकाम करने के लिए अमेरिका तथा इजराइल की सेनाओं की भी प्रशंसा की। बाइडन ने व्हाइट हाउस के अधिकारियों के साथ एक बैठक की शुरुआत में मंगलवार को कहा, ‘‘भूल में न रहें, अमेरिका पूरी, पूरी तरह इजराइल के साथ है।</p>
<p>इससे पहले तेल अवीव पर 100 से भी अधिक मिसाइलें दाग कर ईरान ने साफ कर दिया कि हमने हानिया और नसरल्लाह की मौत का बदला ले लिया है। वहीं इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया है कि ईरान को हम सबक सिखाएंगे। इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल पर ईरान का मिसाइल हमला विफल रहा और जवाबी कार्रवाई की कसम खाई। उन्होंने कहा ईरान को जल्द ही एक दर्दनाक सबक मिलेगा जैसा गाजा, लेबनान और अन्य स्थानों पर दुश्मनों को मिला है। उन्होंने कहा कि जो भी हम पर हमला करता है। हम उन पर हमला करते हैं। ईरान ने इजराइल पर कई मिसाइलें दागी हैं जिससे इजराइलियों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी लेकिन ईरान में जश्न मनाया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Oct 2024 16:54:15 +0530</pubDate>
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