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                <title>nirmala sitaraman - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>nirmala sitaraman RSS Feed</description>
                
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                <title>बजट से बेदखल किसान: दिल में तो कभी था ही नहीं, अब ज़ुबान से भी हुआ गायब</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहा करते थे कि असली भारत गांवों में बसता है।  उसी भारत के लोग—किसान—हर साल बजट के दिन इस उम्मीद में रहते हैं कि शायद इस बार सरकार उनकी सुध लेगी। लेकिन इस बार का बजट देखकर यह कहने में कोई हिचक नहीं कि सरकार को किसान फूटी आंख नहीं सुहाता।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पहले कम से कम किसान के नाम पर बजट में दिखावा तो किया जाता था—बड़ी-बड़ी बातें, भारी-भरकम योजनाएं होती थीं। लेकिन इस बार तो वह दिखावा भी छोड़ दिया गया। अगर कोई किसान नारियल, काजू, सैंडलवुड या कोको नहीं उगाता, तो इस बजट में उसके लिए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168286/the-farmer-evicted-from-the-budget-was-never-present-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/budget-2026.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहा करते थे कि असली भारत गांवों में बसता है।  उसी भारत के लोग—किसान—हर साल बजट के दिन इस उम्मीद में रहते हैं कि शायद इस बार सरकार उनकी सुध लेगी। लेकिन इस बार का बजट देखकर यह कहने में कोई हिचक नहीं कि सरकार को किसान फूटी आंख नहीं सुहाता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पहले कम से कम किसान के नाम पर बजट में दिखावा तो किया जाता था—बड़ी-बड़ी बातें, भारी-भरकम योजनाएं होती थीं। लेकिन इस बार तो वह दिखावा भी छोड़ दिया गया। अगर कोई किसान नारियल, काजू, सैंडलवुड या कोको नहीं उगाता, तो इस बजट में उसके लिए सिवाय सपने बेचने के कुछ नहीं है। हालत यह रही कि वित्त मंत्री के कृषि बजट भाषण में ‘किसान’ शब्द तक का ज़िक्र नहीं हुआ। अगर हुआ भी तो वो भी दिव्यांग जनों, फिजिकली और मेंटली चैलेंज और नार्थ ईस्ट के साथ।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश की आधी से ज़्यादा आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है, लेकिन बजट में किसान का हिस्सा लगातार सिमटता जा रहा है। साल 2019–20 में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र का हिस्सा कुल बजट का 5.44 प्रतिशत था, जो घटते-घटते 2026–27 में सिर्फ़ 3.04 प्रतिशत रह गया है। मतलब साफ़ है सरकार का कुल बजट बढ़ रहा है, लेकिन किसान के हिस्से का पैसा काटा जा रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"><br /><span><img class="CToWUd a6T" src="https://mail.google.com/mail/u/1?ui=2&amp;ik=cd56e4879f&amp;attid=0.2&amp;permmsgid=msg-f:1856276521072206516&amp;th=19c2d1a9336822b4&amp;view=fimg&amp;fur=ip&amp;permmsgid=msg-f:1856276521072206516&amp;sz=s0-l75-ft&amp;attbid=ANGjdJ9GRXcJ5ICmsVrqCoihmpX5jZT0orcKdHJ6lmbUz3f0jzxKlXBY3hdZeLFE7YiE4Ibsy2d8Df6-zSxkSLIIofI1kJe0k2I1-thr3BNlEmws_bTO8skTZQSvAK8&amp;disp=emb&amp;realattid=ii_ml7kxnfu0&amp;zw" alt="image.png" width="799" height="481"></img></span></div>
<div style="text-align:justify;">      <em><strong>कृषि+ सेक्टर के लिए वर्षवार घटता आवंटन।</strong></em></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बजट का बारीकी से विश्लेषण करने पर साफ़ होता है कि ऐसी कई योजनाएं हैं, जिन्हें पिछले साल बड़े शोर-शराबे के साथ शुरू किया गया, लेकिन ज़मीन पर उनका कोई अता-पता नहीं है। यहां हम केवल कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र के बजट पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार ने आर्थिक विकास के लिए जिन छह बड़े क्षेत्रों में हस्तक्षेप तय किए हैं, उनमें खेती का नाम तक शामिल नहीं है। यह तब है, जब सरकारी आंकड़े (PLFS) खुद बताते हैं कि शहरों से मज़दूर फिर से गांव और खेती की ओर लौट रहे हैं। यानी जिस सेक्टर पर रोजगार का दबाव बढ़ रहा है, वह नीति बजट की प्राथमिकताओं से बाहर है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>फसल बीमा योजना: किसानों की सुरक्षा पर चली सरकारी कैंची</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसान की सुरक्षा की बात करें तो तस्वीर और भी चिंताजनक है। फसल बीमा योजना सूखा, बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं में किसान का आख़िरी सहारा मानी जाती है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2024–25 में इस योजना पर सरकार ने ₹14,473 करोड़ खर्च किए, लेकिन 2025–26 के बजट में इसका प्रावधान घटाकर ₹12,242 करोड़ किया गया। हैरानी की बात यह है कि वास्तविक खर्च इस अनुमान से लगभग ₹25 करोड़ ज़्यादा रहा, फिर भी इस साल योजना का बजट बढ़ाने के बजाय सरकार ने पिछले साल के वास्तविक खर्च के मुक़ाबले इस बार ₹2,273 करोड़ की सीधी कटौती कर दी, जो लगभग 16 प्रतिशत है। साल 2026-27 के लिए फसल बीमा योजना का बजट ₹12,200 करोड़ रखा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब मौसम का मिज़ाज लगातार बिगड़ रहा है, तब किसान की सुरक्षा में की गई यह कटौती साफ़ बताती है कि सरकार की प्राथमिकता सूची में किसान की सुरक्षा सबसे नीचले पायदान पर है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>पीएम-किसान सम्मान निधि</strong> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीएम-किसान सम्मान निधि योजना में भी सरकार का रवैया साफ़ दिखता है। 2026-27 के लिए सरकार ने ₹63,500 करोड़ रखे हैं, जबकि 2024-25 में असल खर्च ₹66,121 करोड़ था। यानी असल खर्च से सीधे-सीधे ₹2,621 करोड़ कम। प्रतिशत में देखें तो यह लगभग 4% की कमी है। हैरानी की बात यह है कि पिछले 5 साल से किसान को मिलने वाली सालाना राशि ₹6,000 पर ही अटकी हुई है, जबकि इसी दौरान खाद, बीज, डीजल और मज़दूरी की लागत 30–40% तक बढ़ चुकी है। इस बार किसानों को उम्मीद थी कि यह राशि बढ़कर 10-12 हजार हो जानी चाहिए थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><a href="https://economictimes.indiatimes.com/news/economy/policy/rbi-likely-to-keep-interest-rates-steady-as-inflation-edges-up-crisil-says/articleshow/126674889.cms?from=mdr">क्रिसिल के अनुमान</a> के मुताबिक 2026–27 में महंगाई दर करीब 5% तक पहुंच सकती है। अगर महंगाई दर को ध्यान में रखकर देखें तो पीएम-किसान की राशि की असली कीमत में लगभग ₹3,175 करोड़ की और कमी बैठती है। अगर योजना के लाभार्थियों की संख्या पहले जैसी (लगभग 11 करोड़) बनी रहती, तो यह फंड कम पड़ जाता। लेकिन सरकार ने बजट पर कैंची चलाने के साथ-साथ लाभार्थियों की संख्या पर भी खूब कटौती की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>खाद सब्सिडी: ज़रूरत बढ़ी, पैसा घटा </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्र सरकार किसानों को उर्वरक (खाद) पर दो तरह से सब्सिडी देती है। पहली, न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS), जिसके तहत फॉस्फेटिक और पोटाशिक खादों— जैसे DAP, MOP, NPKS आदि पर सहायता दी जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी, यूरिया पर दी जाने वाली सब्सिडी, जो डायरेक्ट तरीके से किसानों को मिलती है, लेकिन बजट 2026–27 का विश्लेषण बताता है कि सरकार ने दोनों ही तरह की खाद सब्सिडी में कटौती का रास्ता अपनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2024–25 में एनबीएस सब्सिडी का वास्तविक खर्च 52,239 करोड़ रुपये रहा। वहीं अगले वर्ष इस सब्सिडी का आवंटन घटाकर 49,000 करोड़ कर दिया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि बाद में संशोधित अनुमान में यह रकम 11,000 करोड़ बढ़ाकर 60,000 करोड़ करनी पड़ी, करीब 22% बजट बढ़ाना पड़ा। लेकिन इस बार 2026–27 के बजट में फिर से यह आवंटन घटाकर 54,000 करोड़ कर दिया गया है, जो इस बार के संशोधित अनुमान से 6,000 करोड़ कम (लगभग 10% कटौती की गई ) है।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><br /><span><img class="CToWUd a6T" src="https://mail.google.com/mail/u/1?ui=2&amp;ik=cd56e4879f&amp;attid=0.1&amp;permmsgid=msg-f:1856276521072206516&amp;th=19c2d1a9336822b4&amp;view=fimg&amp;fur=ip&amp;permmsgid=msg-f:1856276521072206516&amp;sz=s0-l75-ft&amp;attbid=ANGjdJ-ejR4WFHEduMPbgOz5kTJFIyhcxMzVl_bhNqAQB3KoW0oQKQhsXTQJ7sB48w1_X87_NEsB-eLuDjjsKWM7_7IztrNBaf_6cPJk3KTssGgeNfS0-udkkTzuUWo&amp;disp=emb&amp;realattid=ii_ml7kykr41&amp;zw" alt="image.png" width="626" height="399"></img></span></div>
<div style="text-align:justify;">  <em><strong>जैसा कि बजट सर्वे 2025-26 भी सब्सिडी के घटते ट्रेंड को दर्शाता है। </strong></em></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी तरह यूरिया सब्सिडी में भी पिछले साल के संशोधित अनुमान से करीब 9,670 करोड़ रुपये कम रखे गए हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्ष 2025–26 में सरकार ने यूरिया सब्सिडी के लिए शुरुआत में ₹1,18,900 करोड़ का प्रावधान किया था, लेकिन खाद की बढ़ती लागत और किसानों की ज़रूरत को देखते हुए यही राशि संशोधित अनुमान में बढ़ाकर ₹1,26,475 करोड़ करनी पड़ी। यानी 7,575 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़नी पड़ी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> लेकिन इस बार के 2026-27 के बजट में सरकार ने उलटा रुख अपनाया है। पिछले साल के संशोधित अनुमान को आधार बनाने के बजाय आवंटन घटाकर 1,16,805 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे 9,670 करोड़ रुपये की सीधी कटौती हुई है, जो लगभग 7.65 प्रतिशत की कमी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह कटौती ऐसे समय में की गई है जब खुद सरकारी अनुमान के मुताबिक यूरिया की खपत 8% तक बढ़ सकती है, जैसा कि 2025–26 में देखा गया। ऐसे में आने वाले समय में फिर से संशोधित अनुमान में राशि बढ़ाने की नौबत आ सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर दोनों सब्सिडी को जोड़कर देखें, तो 2024–25 में कुल खाद सब्सिडी 1.91 लाख करोड़ थी, जो 2026–27 में घटकर करीब 1.71 लाख करोड़ रह गई। यानी लगभग 20,200 करोड़ रुपये—करीब 10.6 प्रतिशत की सीधी कटौती की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इससे साफ है कि खाद सब्सिडी में भी सरकार पहले कम आकलन करती है और बाद में मजबूरी में बढ़ाती है—लेकिन स्थायी राहत देने से बचती है। यह यकायक ही नहीं हुआ इसके पीछे आप सरकार की मंशा देखेंगे तो इरादे स्पष्ट हो जाएंगे। उर्वरकों पर दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी का खर्च लगातार बढ़ रहा है। जिसे सरकार इस सब्सिडी के बोझ को आपने माथे से कम करना चाहती है इसलिए वह एक पायलेट योजना के तहत इसकी परिपाटी तैयार करने में लगी है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कई योजनाओं के लिए खर्च नहीं हो पाया बजट </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कटौती की कहानी सिर्फ़ रकम घटाने तक सीमित नहीं है। बजट का एक और चेहरा वह है, जहां पैसा रखा तो गया, लेकिन ज़मीन पर खर्च ही नहीं हुआ। कृषि योजनाओं के लिए रखे गए कुल बजट में से ₹6,985 करोड़ रुपये, जो किसानों के नाम पर बजट में दिखाए गए, लेकिन साल भर में यह राशि खर्च नहीं हो पाई। यानी कागज़ों में योजना चली, खेतों तक नहीं पहुंची। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसकी सबसे बड़ी मिसाल है “ड्रोन दीदी” योजना, जिसे सरकार ने महिला रोज़गार और खेती के आधुनिकीकरण का बड़ा कदम बताया था। नाम इतना बड़ा रखा गया कि लगा अब खेतों में तकनीक पहुंचेगी और महिलाओं को रोज़गार मिलेगा। लेकिन हकीकत बिल्कुल उलटी निकली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2025–26 में इस योजना के लिए ₹676 करोड़ रुपये रखे गए, जबकि पूरे साल में सिर्फ़ ₹100 करोड़ ही खर्च हो पाए। मतलब करीब ₹576 करोड़ रुपये—यानी लगभग 85 प्रतिशत—राशि यूं ही पड़ी रह गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">न ड्रोन खेतों तक पहुंचे, न महिलाओं को काम मिला, और न ही किसानों को कोई ठोस लाभ हुआ। इससे साफ़ दिखता है कि योजना का मक़सद ज़्यादा हेडलाइन बनाना था, ज़मीन पर बदलाव लाना नहीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह पैटर्न दिखाता है कि योजना का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण कम और हेडलाइन मैनेजमेंट ज़्यादा है। इसके बाद तस्वीर और साफ़ हो जाती है। सवाल सिर्फ़ एक योजना या एक मद का नहीं है, बल्कि पूरे किसान बजट के रवैये का है। जहां पैसा चाहिए, वहां कटौती; और जहां पैसा रखा गया, वहां खर्च करने की इच्छाशक्ति नहीं। <em>“ड्रोन दीदी”</em> जैसी योजनाओं में यह दिखता है कि पहले बड़े नाम और बड़े दावे किए जाते हैं, फिर ज़मीन पर काम ठप पड़ जाता है और अगला बजट बिना किसी जवाबदेही के फिर वही रकम दोहरा देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही तरीका आगे <em>प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना</em> जैसी योजनाओं में भी दिखता है, जहां किसान की बुढ़ापे की सुरक्षा की बात तो की जाती है, लेकिन बजट और अमल दोनों के क्रियान्वयन में फर्क साफ दिखाई देता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2025–26 में इस योजना के लिए ₹120 करोड़ का बजट रखा गया था, लेकिन संशोधित अनुमान में इसे घटाकर सिर्फ़ ₹50 करोड़ कर दिया गया। यानी सरकार खुद मान रही है कि ₹70 करोड़, लगभग 58 प्रतिशत पैसा खर्च ही नहीं हो पाया। साफ़ है कि योजना या तो किसानों तक पहुंची ही नहीं, या फिर इतनी उलझी रही कि किसान जुड़ ही नहीं पाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर किसान बड़ी संख्या में इस योजना से जुड़ते, अगर पंजीकरण कराना किसानों के लिए आसान होता और प्रशासन सक्रिय होता, तो पैसा कम नहीं बल्कि पूरा खर्च होता। इसलिए इस बार भी पिछली बार की तरह उतना ही आवंटन(₹120 करोड़) किया गया है। सरकार यह कहकर पल्ला झाड़ लेती है कि योजना स्वैच्छिक है, लेकिन पिछले पांच-छह सालों के आंकड़े बताते हैं कि किसानों की भागीदारी बेहद धीमी रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> <strong>पिछले बजट के 6 बड़े ऐलान, बजट फाइल से गुम</strong>  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही कहानी कई दूसरी कृषि योजनाओं की भी है। पिछले किसान बजट में खेती के नाम पर 6 बड़े ऐलान किए गए थे—<em>दलहन मिशन के लिए ₹1,000 करोड़, सब्ज़ी मिशन के लिए ₹500 करोड़, मखाना बोर्ड के लिए ₹100 करोड़ और कॉटन टेक्नोलॉजी मिशन के लिए ₹500 करोड़</em>। इसके अलावा <em>प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना और नेशनल मिशन ऑन हाइब्रिड सीड्स</em> जैसी योजनाओं को किसानों के भविष्य का रास्ता बताया गया। खासकर प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के लिए तो यह कहा गया था कि छह साल तक हर साल ₹24,000 करोड़ दिए जाएंगे। लेकिन नए बजट में इन योजनाओं का नाम तक नहीं मिलता। यानी जिन योजनाओं को पिछले साल गाजे-बाजे के साथ पेश किया गया था, वे कागज़ों से बाहर ही नहीं निकल पाईं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही है आज के किसान बजट की असली तस्वीर—हर साल नई योजनाओं के नाम गिनाए जाते हैं, बड़े आंकड़े उछाले जाते हैं, उम्मीदें बोई जाती हैं, बजट के दिन योजनाएं सुर्खियां बनकर रह जाती हैं और अगले साल बजट की नई मोटी फाइल में कहीं दफ़न हो जाती हैं। न कोई हिसाब, न कोई जवाब।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खेती-किसानी आज भी उसी असुरक्षा, कर्ज़ और अनिश्चितता में खड़ी है जहां वह सालों पहले थी। न आय बढ़ी, न लागत घटी, न भविष्य को लेकर भरोसा पैदा हुआ। इस बजट की सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि किसान अब सरकार की प्राथमिकता तो दूर, उसकी औपचारिक चिंता का विषय भी नहीं रह गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रत्यक्ष मिश्रा </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><em><strong>(लेखक पब्लिक पॉलिसी रिसर्चर हैं )</strong></em></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 16:54:39 +0530</pubDate>
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                <title>गोली के घाव पर केवल मरहम पट्टी की गई,  आम बजट को लेकर मोदी सरकार पर बरसे- राहुल गांधी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अर्थव्यस्था से जुड़े संकट -</strong> कांग्रेस ने शनिवार को केंद्रीय बजट में अर्थव्यस्था से जुड़े संकट के समाधान के लिए कुछ नहीं होने का आरोप लगाया और कहा कि गोली लगने के घाव पर मरहम पट्टी की गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पेश किए गए आम बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में मोदी ने कहा कि आज देश ‘विकास भी, विरासत भी' के मंत्र को लेकर चल रहा है और इस बजट में इसके लिए बहुत महत्वपूर्ण और ठोस कदम उठाए गए हैं। बजट में नई कर व्यवस्था के तहत 12</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148079/modi-government-lashed-out-at-the-only-ointment-on-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/17_03_55420747101023-7603c8526ced4e7aa0dc48892bcbb899--0--af65e9c8a4134769ab1fc398b8201f14.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अर्थव्यस्था से जुड़े संकट -</strong> कांग्रेस ने शनिवार को केंद्रीय बजट में अर्थव्यस्था से जुड़े संकट के समाधान के लिए कुछ नहीं होने का आरोप लगाया और कहा कि गोली लगने के घाव पर मरहम पट्टी की गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पेश किए गए आम बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में मोदी ने कहा कि आज देश ‘विकास भी, विरासत भी' के मंत्र को लेकर चल रहा है और इस बजट में इसके लिए बहुत महत्वपूर्ण और ठोस कदम उठाए गए हैं। बजट में नई कर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपए तक वार्षिक आय को कर के दायरे से मुक्त रखा गया है।</p>
<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-02/17_04_546740194eee.jpg" alt="17_04_546740194eee" width="1920" height="1080"></img>जयराम रमेश ने क्या कहा </strong><br />जयराम रमेश ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘अर्थव्यवस्था इस समय स्थिर वास्तविक मजदूरी, सामूहिक उपभोग में उछाल की कमी, निजी निवेश की सुस्त दरें तथा जटिल और पेचीदा जीएसटी प्रणाली रूपी संकटों से घिरी हुई है। बजट में इन समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ नहीं है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि बिहार को घोषणाओं का खजाना मिल गया है। यह स्वाभाविक है क्योंकि साल के अंत में वहां चुनाव होने हैं।''</p>
<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-02/17_04_107975585venugopal.jpg" alt="17_04_107975585venugopal" width="640" height="420"></img>'गोली लगने के घाव के लिए एक मरहम पट्टी'<br /></strong>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘गोली लगने के घाव के लिए एक मरहम पट्टी!'' उन्होंने आरोप लगाया कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच, हमारे आर्थिक संकट को हल करने के लिए एक आदर्श बदलाव की आवश्यकता है, लेकिन यह सरकार विचारों को लेकर दिवालिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि केवल आयकरदाताओं के लिए राहत दी गई है, लेकिन अर्थव्यवस्था पर इसका वास्तविक प्रभाव क्या होगा, यह देखना अभी बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के चलते बिहार के लिए कई घोषणाएं की गई हैं, जबकि आंध्र प्रदेश की अनदेखी की गई है।</p>
<p><strong>'रोजगार बढ़ाने के लिए कोई दृष्टिकोण नहीं'</strong><br />कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘बजट भारत की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कुछ नहीं करेगा। सरकार ने समाज के गरीबों और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए कोई दृष्टिकोण या राहत नहीं होने के कारण खोखले नारे देकर जनता को धोखा देने की कोशिश की है।'' उन्होंने दावा किया कि रोजगार सृजन के लिए कोई दृष्टिकोण नहीं, भारत के निवेश माहौल में सुधार के लिए कुछ भी नहीं, किसानों के लिए कोई एमएसपी गारंटी नहीं और मध्यम वर्ग के परिवारों के बजट को नष्ट करने वाली भारी मुद्रास्फीति का मुकाबला करने के लिए कोई रणनीति नहीं।</p>
<p>वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह बजट मनरेगा को नष्ट करने का एक और प्रयास दर्शाता है क्योंकि केंद्र उस योजना के लिए आवंटित बजट को बढ़ाने में विफल रहा जो करोड़ों भारतीय नागरिकों को सुरक्षा कवच प्रदान करती है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि बजट ने यह संदेश दिया है कि यह सरकार केवल अपनी राजनीति के लिए चुनावी हथकंडे अपनाने में सक्षम है, लेकिन आज देश भर में अनुभव किए जा रहे गंभीर आर्थिक संकट का समाधान नहीं कर सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Feb 2025 17:29:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बजट सर्वव्यापी सर्वस्पर्शी एवं दूरगामी है एवं भारत को विश्व की तीसरी बड़ी शक्ति बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा - भाजपा  जिला अध्यक्ष फिरोजाबाद उदय प्रताप सिंह </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>फिरोजाबाद/टूण्डला-</strong> केंद्रीय बजट 2025-26/1 फरवरी 2025 को बजट पेश कर दिया गया है। यह लगातार आठवीं बार है जब माननीय वित्त मंत्री वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया। बजट 2025-26 में खर्च की प्राथमिकताओं और सब्सिडी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जोर दिया गया है। एक ऐतिहासिक घोषणा में वित्त मंत्री ने बताया कि 12 लाख रुपए तक की आय करमुक्त होगी, यदि व्यक्ति के पास विशेष ब्याज आय नहीं है। माननीया वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इतिहास रचते हुए केंद्रीय बजट 2025-26 बजट में विभिन्न क्षेत्रों जैसे कृषि उद्योग, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए विशेष आवंटन किया है</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148071/budget-is-universal-and-far-reaching-and-will-play-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/img-20250201-wa0005.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>फिरोजाबाद/टूण्डला-</strong> केंद्रीय बजट 2025-26/1 फरवरी 2025 को बजट पेश कर दिया गया है। यह लगातार आठवीं बार है जब माननीय वित्त मंत्री वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया। बजट 2025-26 में खर्च की प्राथमिकताओं और सब्सिडी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जोर दिया गया है। एक ऐतिहासिक घोषणा में वित्त मंत्री ने बताया कि 12 लाख रुपए तक की आय करमुक्त होगी, यदि व्यक्ति के पास विशेष ब्याज आय नहीं है। माननीया वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इतिहास रचते हुए केंद्रीय बजट 2025-26 बजट में विभिन्न क्षेत्रों जैसे कृषि उद्योग, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए विशेष आवंटन किया है जिससे आम जनता को राहत मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। 
<div>
<div> </div>
<div>वित्त मंत्री निर्मला सीता रमन ने कहा कि बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा 74% से बढ़कर 100% की जाएगी। 12 लाख तक के आय पर अब कोई आयकर नहीं होगा।वित्त मंत्री का कहना है की गरीब, युवा किसान और नारी शक्ति पर फोकस किया गया है। ऊर्जा और शहरी विकास पर फोकस किया गया है। युवाओं को रोजगार देने की प्राथमिकता है। दलहन में आत्मनिर्भरता व बिहार में मखाना बोर्ड का गठन हुआ। मछुआरों के लिए स्पेशल इकोनामी, मोबाइल बैटरी पर छूट, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक व्हीकल सस्ते होंगे। भारत में बने कपड़े सस्ते होंगे।</div>
<div> </div>
<div>एलसीडी, एलईडी टीवी सस्ते होंगे। कैंसर की 36 दवा सस्ती होगी। 82 सामानों से सेस हटा है। मेडिकल उपकरण सस्ते होंगे। भारतीय जनता पार्टी जिला फिरोजाबाद जिला अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने कहा कि बजट सर्वव्यापी सर्वस्पर्शी एवं दूरगामी है एवं भारत को विश्व की तीसरी बड़ी शक्ति बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा हर दायरे में बजट बेहतर है।</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Feb 2025 16:53:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चुनावी बांड की आड़ में वसूली के आरोप। वित्त मंत्री निर्मला पर एफआईआर का आदेश।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="adn ads">
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<div>केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ बेंगलुरु की कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड के जरिए कथित जबरन वसूली के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। ये आदेश बेंगलुरु की पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव कोर्ट ने दिया है। जनाधिकार संघर्ष परिषद (जेएसपी) के सह-अध्यक्ष आदर्श अय्यर ने बेंगलुरु की अदालत में शिकायत दर्ज कर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की थी।</div>
<div>आदर्श अय्यर ने आरोप लगाया कि चुनावी बॉन्ड के जरिए धमकी देकर जबरन वसूली की गई। जन अधिकार संघर्ष परिषद ने पिछले साल अप्रैल में 42वें एसीएम एम कोर्ट में याचिका</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145196/allegations-of-extortion-under-the-guise-of-electoral-bonds"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/download-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div>केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ बेंगलुरु की कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड के जरिए कथित जबरन वसूली के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। ये आदेश बेंगलुरु की पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव कोर्ट ने दिया है। जनाधिकार संघर्ष परिषद (जेएसपी) के सह-अध्यक्ष आदर्श अय्यर ने बेंगलुरु की अदालत में शिकायत दर्ज कर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की थी।</div>
<div>आदर्श अय्यर ने आरोप लगाया कि चुनावी बॉन्ड के जरिए धमकी देकर जबरन वसूली की गई। जन अधिकार संघर्ष परिषद ने पिछले साल अप्रैल में 42वें एसीएम एम कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, ईडी अधिकारियों, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, पार्टी के अन्य राष्ट्रीय नेताओं, बीजेपी के तत्कालीन कर्नाटक अध्यक्ष नलिन कुमार कटील, बी वाई विजयेंद्र के खिलाफ शिकायत की थी। </div>
<div> </div>
<div>अदालत ने शिकायत पर सुनवाई करते हुए बेंगलुरु के तिलक नगर पुलिस थाने को चुनावी बॉन्ड के जरिए जबरन वसूली का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। चुनावी बांड को सुप्रीम कोर्ट ने अब खत्म कर दिया है। लेकिन चुनाव आयोग की साइट पर इस संबंध में जो सूची प्रकाशित की गई और जिसे सुप्रीम कोर्ट को उपलब्ध कराया गया, उसमें भाजपा सबसे ज्यादा चुनावी चंदा पाने वाली पार्टी थी। दूसरे नंबर पर ममता बनर्जी की टीएमसी थी। विपक्षी दलों ने चुनावी बांड को चुनावी रिश्वत नाम दिया था। कई कंपनियों पर ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के छापे पड़े। उन्होंने भाजपा को चुनावी चंदा दिया, उनके केस खत्म हो गए।</div>
<div> </div>
<div>इस संबंध में जनाधिकार संघर्ष संगठन के आदर्श अय्यर ने निर्मला सीतारमण और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चुनावी बांड के माध्यम से जबरन वसूली की गई। इसके बाद बेंगलुरु में जन प्रतिनिधियों की विशेष अदालत ने मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। पुलिस ने निर्मला सीतारमण और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।</div>
<div>फरवरी में, सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बांड योजना को "असंवैधानिक" बताते हुए रद्द कर दिया और कहा कि यह नागरिकों के सूचना के अधिकार का उल्लंघन करता है। केंद्र ने 2018 में यह योजना शुरू की थी और इसका उद्देश्य राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता में सुधार के लिए राजनीतिक दलों को चंदे के रूप में दान देना था।</div>
<div> </div>
<div><strong>मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस्तीफे को मांग की।</strong></div>
<div>मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने निर्मला सीतारमण के इस्तीफे की मांग की और कहा कि मामले में तीन महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपी जानी चाहिए। सीएम ने कहा- "जनप्रतिनिधियों की विशेष अदालत में निर्मला सीतारमण के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। वह कौन हैं? वह एक केंद्रीय मंत्री हैं और उनके खिलाफ भी एफआईआर है। वे चुनावी बांड के माध्यम से जबरन वसूली में शामिल थीं और उन पर एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें अपना इस्तीफा दे देना चाहिए। क्या वे (भाजपा) उनसे इस्तीफा देने के लिए कहेंगे?"</div>
<div> </div>
<div>सिद्धारमैया ने कहा-  "अब, धारा 17ए (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की) के अनुसार, जांच पूरी होनी चाहिए और तीन महीने के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी चाहिए। पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और आगे की जांच हो रही है।" धारा 17ए लोक सेवकों को जांच से अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है। इस धारा की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत किसी लोक सेवक के कथित अपराध की जांच या जांच करने के लिए कोर्ट की अनुमति लेना आवश्यक है।</div>
<div> </div>
<div>सिद्धारमैया ने कहा, "मेरे मामले में, निचली अदालत ने एक आदेश पारित किया है। राज्यपाल ने धारा 17ए के तहत जांच के लिए कहा है और अदालत ने निर्देश दिया है कि जांच पूरी की जाए और तीन महीने के भीतर एक रिपोर्ट सौंपी जाए।" विशेष रूप से, MUDA मामले में कथित अनियमितताओं के संबंध में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत सिद्धारमैया की भी जांच होगी। चुनावी चंदे के इस सबसे बड़े खेल में सबसे ज्यादा चंदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 69.86.5 करोड़ रुपये मिले।</div>
<div> </div>
<div>दूसरे नंबर पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) है, जिसे 1397 करोड़ रुपये मिले। कांग्रेस को 1334 करोड़ मिले। सीपीएम और सीपीआई भारत की दो ऐसी पार्टियां हैं जिन्होंने चुनावी बांड के जरिए चंदा लेने से इनकार कर दिया। दोनों ही कम्युनिस्ट दलों ने इलेक्ट्रोरल बांड के लिए अलग से कोई खाता खोलने से मना कर दिया था। तमिलनाडु की डीएमके एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने अपने डोनर्स का खुलासा किया था कि उसे कहां से कितने पैसे चंदे के रूप में मिले।</div>
<div> </div>
<div><strong>सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बांड खत्म कर दी।</strong></div>
<div>2018 में चुनावी बांड योजना की शुरुआत के बाद से, भाजपा को सबसे ज्यादा चंदा मिला है। यह योजना 2024 में 15 फरवरी तक प्रभावी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी को पूरी योजना रद्द कर दी। चुनावी बांड का इस्तेमाल ऐसी व्यवस्था थी जिसके जरिए कंपनियां या कोई भी व्यक्ति किसी राजनीतिक दल को चंदा देने या आर्थिक मदद देने के लिए खरीद सकता है। राजनीतिक दल बदले में धन और दान के लिए इसे भुना सकते हैं। राजनीतिक फंडिंग में कथित पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत चुनावी बॉन्ड योजना को राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नकद दान के विकल्प के रूप में पेश किया गया था।</div>
<div> </div>
<div>लेकिन चंदा या दान देने वालों का नाम गुप्त रहता था। चुनाव आयोग ने कभी इस पर आपत्ति नहीं की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में वकील प्रशांत भूषण और अन्य लोगों ने याचिकायें दायर कर चंदा देने वालों की पहचान बताने की मांग की। मोदी सरकार ने पूरा जोर लगाया कि चंदा देने वालों की पहचान गुप्त रहे। अभी इस मामले की सुनवाई को 10 अक्टूबर तक के लिए स्थगित किया गया है, लेकिन ये मामला कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले देश की केंद्रीय मंत्री के खिलाफ मुद्दा बन सकता है।</div>
<div> </div>
<div><strong>चुनावी बॉन्ड के माध्यम से डरा-धमकाकर जबरन वसूली की याचिका।</strong></div>
<div>आदर्श अय्यर ने याचिका में कहा कि वित्त मंत्री ने चुनावी बॉन्ड के माध्यम से डरा-धमकाकर जबरन वसूली की है। साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट के पास चुनावी बॉन्ड योजना को चुनौती दी गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने चार याचिकाकर्ता की बात सुनने और उनका पक्ष जानने के बाद इस पर फैसला दिया। उच्चतम न्यायालय ने चुनावी बॉन्ड योजना को ना सिर्फ असंवैधानिक माना, बल्कि इस पर पूरी तरह से रोक लगा दी। चुनावी बॉन्ड या इलेक्ट्रोरल ओ बॉन्ड के जरिए जबरन वसूली के मामले में जेएसपी के सह-अध्यक्ष आदर्श अय्यर ने पिछले साल यानी अप्रैल 2023 में 42वें एसीएमएम कोर्ट का रुख किया था।</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 30 Sep 2024 16:18:19 +0530</pubDate>
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