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                <title>Bharatiya Janata Party (BJP) - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>बिहार की राजनीति- निशांत कुमार का राजनीतिक उदय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="center">  </p>
<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">- महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार की राजनीति आज उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ सत्ता के गलियारों में बदलाव की सरसराहट नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक युग के अवसान और नए नेतृत्व के अभ्युदय की पदचाप सुनाई दे रही है। पिछले दो दशकों से बिहार की नियति को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक यात्रा के उस पड़ाव पर कदम रखा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ से वापसी के रास्ते संगठन की मजबूती और उत्तराधिकार के प्रश्न पर जाकर टिक जाते हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर लंबे समय से जिस सन्नाटे को महसूस किया जा रहा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">,</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173025/political-rise-of-nishant-kumar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/mahendra_tiwari.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="center"> </p>
<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">- महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार की राजनीति आज उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ सत्ता के गलियारों में बदलाव की सरसराहट नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक युग के अवसान और नए नेतृत्व के अभ्युदय की पदचाप सुनाई दे रही है। पिछले दो दशकों से बिहार की नियति को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक यात्रा के उस पड़ाव पर कदम रखा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ से वापसी के रास्ते संगठन की मजबूती और उत्तराधिकार के प्रश्न पर जाकर टिक जाते हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर लंबे समय से जिस सन्नाटे को महसूस किया जा रहा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वह 8 मार्च 2026 को पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में नारों की गूँज के साथ टूट गया। निशांत कुमार का राजनीति में औपचारिक प्रवेश केवल एक व्यक्ति का दल में शामिल होना नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह एक क्षेत्रीय दल के अस्तित्व को बचाने की उस छटपटाहट का परिणाम है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो अक्सर </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">वन मैन शो</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वाली पार्टियों में उनके शीर्ष नेता के सक्रिय राजनीति से दूर होने पर दिखाई देती है। नीतीश कुमार ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में जिस समाजवाद और वंशवाद विरोधी विचारधारा का झंडा बुलंद किया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज उनकी पार्टी उसी वंशवाद के छाते तले खुद को सुरक्षित महसूस कर रही है। यह भारतीय राजनीति की एक कड़वी हकीकत है कि क्षेत्रीय दल विचारधारा से ज्यादा एक चेहरे से बंधे होते हैं और जब वह चेहरा धुंधला पड़ने लगता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो कार्यकर्ता किसी ऐसे नाम की तलाश करते हैं जो उस विरासत को संजो सके। निशांत कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे एक ऐसे पिता के उत्तराधिकारी बनकर आए हैं जिन्होंने अपनी शर्तों पर राजनीति की है। नीतीश कुमार वह शख्सियत रहे हैं जिन्होंने विधानसभा में संख्या बल कम होने के बावजूद गठबंधन के साथियों को अपनी उंगलियों पर नचाया और चार बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर यह साबित किया कि राजनीति में करिश्मा और चाणक्य नीति का मेल क्या होता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के विधानसभा चुनावों ने नीतीश कुमार की लोकप्रियता पर उठ रहे तमाम सवालों पर विराम लगा दिया था। उनके गिरते स्वास्थ्य और भूलने की बीमारी की चर्चाओं के बीच जब परिणाम आए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे चौंकाने वाले थे। जनता ने उन्हें न केवल वोट दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिहार के ग्रामीण अंचलों में आज भी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन बाबू</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की धमक बरकरार है। यहाँ तक कि भारतीय जनता पार्टी को मिली भारी सफलता के पीछे भी नीतीश कुमार का वह अति पिछड़ा और महिला वोट बैंक सक्रिय था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो खामोशी से उनके पक्ष में लामबंद रहता है। लेकिन अपने राजनीतिक चरमोत्कर्ष पर नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का फैसला और पार्टी की बागडोर परोक्ष रूप से निशांत कुमार के हाथों में सौंपने की तैयारी ने कार्यकर्ताओं को हतप्रभ कर दिया है। निशांत के स्वागत में लगे </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत हैं तो निश्चिंत हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नारे दरअसल कार्यकर्ताओं के उसी भय को दर्शाते हैं जो नीतीश के बिना पार्टी के बिखरने की आशंका से पैदा हुआ है। 40 वर्षीय निशांत</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो पेशे से इंजीनियर हैं और अब तक सक्रिय राजनीति की चकाचौंध से दूर रहे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिए यह डगर कांटों भरी है। राजनीति कोई इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं है जहाँ फार्मूलों से नतीजे निकाले जा सकें</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ समीकरण हर पल बदलते हैं। उनकी पहली और सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के उस मूल आधार—कुर्मी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोइरी और अति पिछड़ा वर्ग—को अपने साथ जोड़े रखने की है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो नीतीश कुमार के व्यक्तित्व के आकर्षण में जेडीयू के साथ रहा है। क्या एक सौम्य और राजनीति से दूर रहा युवा इन वर्गों की आकांक्षाओं को वह स्वर दे पाएगा जो उनके पिता ने दिया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तेजस्वी यादव और चिराग पासवान जैसे युवा नेता पहले से ही बिहार की मिट्टी में अपनी जड़ें गहरी कर चुके हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री एक ऐसे समय में हुई है जब उनके प्रतिद्वंद्वी राजनीति के मजे हुए खिलाड़ी बन चुके हैं। तेजस्वी यादव ने जहाँ लालू प्रसाद यादव की विरासत को अपनी मेहनत और संघर्ष से एक नई ऊँचाई दी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं चिराग पासवान ने भी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हनुमान</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की छवि से निकलकर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई है। इन दोनों नेताओं के विपरीत निशांत को राजनीति विरासत में मिली तो है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उन्होंने कभी अपने पिता के साथ धूप-छाँव में संघर्ष नहीं किया। वे नीतीश कुमार के उन राजनीतिक दांव-पेंचों के साक्षी नहीं रहे हैं जिन्होंने जेडीयू को बार-बार संकट से उबारा। ऐसे में पार्टी के भीतर मौजूद </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">घाघ</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और पुराने नेताओं के साथ तालमेल बिठाना उनके लिए अग्निपरीक्षा जैसा होगा। जेडीयू के भीतर कई ऐसे दिग्गज नेता हैं जो खुद को नीतीश का स्वाभाविक उत्तराधिकारी मानते रहे हैं। राजीव रंजन सिंह और संजय झा जैसे नेताओं की मौजूदगी में निशांत को अपनी स्वतंत्र पहचान बनानी होगी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वरना यह आशंका हमेशा बनी रहेगी कि वे केवल एक </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">रबर स्टैंप</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बनकर रह जाएंगे और पार्टी की दूसरी लाइन के नेता उन्हें अपने हितों के लिए इस्तेमाल करेंगे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक और गंभीर चुनौती भारतीय जनता पार्टी के साथ संबंधों को लेकर है। बिहार में बीजेपी अब वह छोटी पार्टी नहीं रही जो नीतीश कुमार के पीछे चलती थी। 2025 के नतीजों के बाद बीजेपी अब खुद को </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े भाई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की भूमिका में देख रही है। गठबंधन की राजनीति अक्सर क्रूर होती है और हर बड़ी पार्टी अपने छोटे सहयोगी को निगलने या उसे अप्रासंगिक बनाने की कोशिश करती है। बीजेपी की दीर्घकालिक रणनीति बिहार में अपना मुख्यमंत्री लाने की है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद जेडीयू के लिए जूनियर पार्टनर बनकर अपनी स्वायत्तता बचाए रखना लगभग असंभव सा कार्य होगा। बीजेपी चाहेगी कि भविष्य में जेडीयू का उसमें विलय हो जाए या फिर वह इतनी कमजोर हो जाए कि उसका अपना कोई अस्तित्व न बचे। निशांत कुमार को इस </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रवत हमले</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से पार्टी को बचाना होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि जेडीयू केवल एक चुनाव जिताने वाली मशीन न बनकर रह जाए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसका अपना वैचारिक स्टैंड भी बना रहे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत के पक्ष में एक बात यह जाती है कि वे शिक्षित हैं और उनकी छवि साफ-सुथरी है। बिहार की युवा पीढ़ी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर विकास और शिक्षा की बात करती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत में एक उम्मीद देख सकती है। लेकिन राजनीति में केवल शिक्षा और सौम्यता काफी नहीं होती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ जनमानस से जुड़ने के लिए पसीना बहाना पड़ता है। नीतीश कुमार की अनुपस्थिति में जब वे सदस्यता ले रहे थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसमें एक गहरा संदेश छिपा था। नीतीश ने शायद यह जतलाने की कोशिश की कि वे अभी भी वंशवाद के खिलाफ हैं और निशांत का आना पार्टी की इच्छा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी निजी जिद नहीं। हालांकि</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संदेश आम जनता तक किस रूप में पहुँचता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह देखने वाली बात होगी। क्या जनता इसे नीतीश की मजबूरी समझेगी या एक सोची-समझी रणनीति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि जनता के बीच यह संदेश गया कि जेडीयू अब केवल एक परिवार को बचाने की कोशिश कर रही है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो नीतीश कुमार द्वारा दशकों में कमाई गई </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की साख को धक्का लग सकता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जेडीयू की सांगठनिक स्थिति वर्तमान में नाजुक है। 2010 में 115 सीटें जीतने वाली पार्टी 2020 में 45 पर सिमट गई थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि 2025 में उसने फिर से 85 सीटों के साथ वापसी की। यह उतार-चढ़ाव दिखाता है कि पार्टी का जनाधार पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और वह गठबंधन के साथी की मजबूती पर निर्भर करता है। नीतीश कुमार का करिश्मा ही वह गोंद था जो इस गठबंधन को वजन देता था। अब जब गठबंधन की कमान निशांत की ओर झुक रही है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उन्हें साबित करना होगा कि वे केवल नीतीश के पुत्र नहीं हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक कुशल रणनीतिकार भी हैं। उन्हें उन विधायकों और नेताओं को टूटने से रोकना होगा जो सत्ता के नए केंद्रों की तलाश में दूसरी पार्टियों का रुख कर सकते हैं। अटकलें हैं कि उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है या पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष। पद चाहे जो भी मिले</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">असली चुनौती सड़क पर उतरकर कार्यकर्ताओं का विश्वास जीतने की होगी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंततः</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपने पिता के </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्गदर्शन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का उपयोग किस सीमा तक करते हैं। नीतीश कुमार ने भले ही कह दिया हो कि "मैं हूँ ना"</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन दिल्ली की राजनीति और पटना की जमीन के बीच का फासला बहुत बड़ा होता है। गठबंधन की राजनीति में सहयोगी दल अक्सर कमजोर कड़ियों की तलाश में रहते हैं। यदि निशांत ने अपनी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय जल्द नहीं दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो जेडीयू का अस्तित्व बीजेपी के बढ़ते प्रभुत्व और तेजस्वी यादव के आक्रामक विपक्ष के बीच सैंडविच बनकर रह सकता है। बिहार की राजनीति में यह एक नए अध्याय की शुरुआत है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें विरासत का बोझ है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिद्वंद्वियों की चुनौती है और एक ऐसी जनता की उम्मीदें हैं जो अब पुराने नारों से आगे निकलना चाहती है। निशांत कुमार को यह समझना होगा कि उनके पिता ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि उन्हें शिखर पर बने रहने के लिए शून्य से शुरुआत करनी है। यह चुनौती किसी भी युद्ध से बड़ी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यहाँ हारने के लिए एक पूरी विरासत है और जीतने के लिए केवल संघर्ष।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की राह में सबसे बड़ी बाधा वह </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सूडो-पॉलिटिकल</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ढांचा भी है जिसे उनके पिता ने बड़ी कुशलता से बुना था। नीतीश कुमार ने अधिकारियों के भरोसे शासन चलाया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता अक्सर खुद को उपेक्षित महसूस करते रहे। यदि निशांत भी इसी रास्ते पर चलते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो कार्यकर्ताओं का उत्साह जल्दी ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा। उन्हें पार्टी के भीतर लोकतंत्र को बहाल करना होगा और उन कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करना होगा जो अब तक केवल नीतीश के नाम पर वोट मांगते आए हैं। बिहार का भविष्य अब इस बात पर टिका है कि क्या यह नया नेतृत्व सुशासन की उस लौ को जलाए रख पाता है या फिर सत्ता की इस खींचतान में जेडीयू इतिहास के पन्नों में एक और क्षेत्रीय दल के रूप में दर्ज हो जाती है जो अपने नायक के जाने के बाद अपनी पहचान खो बैठा। 8 मार्च की वह शाम पटना के आकाश में नई उम्मीदें लेकर आई थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उन उम्मीदों को हकीकत में बदलना निशांत कुमार के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 21:17:08 +0530</pubDate>
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                <title>भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है- विधायक कंवर सिंह यादव</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के 4 स्तम्भ बताए हैं जिनमें गरीब, युवा, किसान और महिला शामिल हैं। इन 11 सालों में सिर्फ सत्ता नहीं बदली बल्कि देश के विकास की परिभाषा और दिशा बदलने का काम हमारी सरकार ने किया है। सरकार का विजन 2047 तक का है।जो दीर्घकालिक और मजबूत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/152701/india-has-become-the-fourth-largest-economy-in-the-world"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-06/1001658518.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>महेंद्रगढ़ , विनीत पंसारी । </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">केंद्र में बीजेपी सरकार के 11 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में  महेंद्रगढ़ विधानसभा के सतनाली मंडल में सकंल्प से सिद्धि कार्यक्रम पर विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सकंल्प से सिद्धि कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विधायक महेंद्रगढ़ कंवर सिंह यादव रहे ।</p>
<p style="text-align:justify;">विधायक का फूल माला और पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया। विधायक कंवर सिंह यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही केंद्र सरकार के 11 साल सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण को समर्पित रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के 4 स्तम्भ बताए हैं जिनमें गरीब, युवा, किसान और महिला शामिल हैं। इन 11 सालों में सिर्फ सत्ता नहीं बदली बल्कि देश के विकास की परिभाषा और दिशा बदलने का काम हमारी सरकार ने किया है। सरकार का विजन 2047 तक का है। जो दीर्घकालिक और मजबूत है। विधायक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कश्मीर घाटी की ट्रेन का सपना अब साकार हुआ है। घाटी के लोग अब कश्मीर से कन्याकुमारी तक जा सकते हैं। यह कार्य बहुत सराहनीय है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीजेपी सरकार ने राम मंदिर बनाने का सपना पूरा किया। ये हमारी सरकार है जिसने लोगों के सपने को साकार करने का काम किया है। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन, संकल्प और उनकी सोच के कारण संभव बना।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आत्मा को रखा सबसे ऊपर यानी गरीबों को सबसे ऊपर रखा जिसमे बिजली, पानी, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं अब सिर्फ आंकड़े नहीं हैं बल्कि सम्मान और आत्मविश्वास का आधार बन गई हैं। आज हमारे युवा विकसित भारत के विजन के साथ देश की अमृत यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान और नारी शक्ति,देश की सुरक्षा और विदेश नीति, ऑपरेशन सिंदूर और राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, नक्सलवाद, इंफ्रास्ट्रक्चर व हेल्थ केयर का विकास सहित उन तमाम मुद्दों पर विस्तार से बात कर पिछले 11 सालों में सरकार द्वारा किये गये कामों को बेहतरीन बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष पवन खैरवाल, भागीरथ शेखावत, योगेश शास्त्री, बेबी शेखावत सतनाली मंडल अध्यक्ष अशोक यादव, नांगल सिरोही मंडल अध्यक्ष, दीपिका कुमारी पाली मंडल अध्यक्ष, रवि जड़वा, दीपक महामंत्री, सुरेंद्र सिंह, मुकेश, टिंकू, धर्मवीर सरपंच, वीरपाल सरपंच डालनवास, प्रमोद सरपंच, सूबेदार साधु सिंह, रणधीर सिंह आदि भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Jun 2025 18:03:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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                <title>नरेश टिकैत के पाकिस्तान समर्थक बयान पर बवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>सुपौल-बिहार। </strong>पाकिस्तान समर्थक बयान देने के विरोध में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा सुपौल ने नरेश टिकैत का जोरदार विरोध किया। जिला अध्यक्ष नलिन जायसवाल के नेतृत्व में स्थानीय स्टेशन चौक पर टिकैत का पुतला दहन किया गया। कार्यकर्ताओं ने देशद्रोह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और नरेश टिकैत को पाकिस्तान भेजने की मांग की।</p>
<p>“देश के खिलाफ बयान, देशद्रोह से कम नहीं” — नलिन जायसवाल पुतला दहन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष नलिन जायसवाल ने कहा कि, &gt; "जब बात देश की हो, तो जाति, धर्म, क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। नरेश टिकैत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151515/ruckus-over-naresh-tikaits-pro-pakistan-statement"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-04/sup71.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सुपौल-बिहार। </strong>पाकिस्तान समर्थक बयान देने के विरोध में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा सुपौल ने नरेश टिकैत का जोरदार विरोध किया। जिला अध्यक्ष नलिन जायसवाल के नेतृत्व में स्थानीय स्टेशन चौक पर टिकैत का पुतला दहन किया गया। कार्यकर्ताओं ने देशद्रोह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और नरेश टिकैत को पाकिस्तान भेजने की मांग की।</p>
<p>“देश के खिलाफ बयान, देशद्रोह से कम नहीं” — नलिन जायसवाल पुतला दहन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष नलिन जायसवाल ने कहा कि, &gt; "जब बात देश की हो, तो जाति, धर्म, क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। नरेश टिकैत जिस तरह पाकिस्तान को पानी देने की बात कर रहे हैं, वह सीधा देशद्रोह है। सरकार से मांग है कि उन्हें पाकिस्तान भेजा जाए।"</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने “पाकिस्तान मुर्दाबाद”, “नरेश टिकैत होश में आओ”, “वंदे मातरम”, “भारत माता की जय” जैसे नारे लगाए और आक्रोश प्रकट किया। कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता हुए शामिल इस विरोध प्रदर्शन में भाजपा किसान मोर्चा के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।</p>
<p>प्रमुख उपस्थितियों में शामिल थे: शिवधर साह (जिला उपाध्यक्ष) सुनील कुमार मंडल (जिला महामंत्री) सरोज देवी, अमरनाथ ठाकुर (जिला मंत्री) सतीष कुमार शुशील (भाजपा जिला उपाध्यक्ष) रंजु झा (पूर्व उपाध्यक्ष) सुरेश कुमार सुमन (पूर्व जिला महामंत्री) सुरेन्द्र पाठक (जिला मीडिया प्रभारी) शक्ति कुमारी सारिका (महिला मोर्चा जिला महामंत्री) महामाया चौधरी, डॉ शमशाद आलम, गौरीशंकर मंडल, रामदेव मंडल, मिथिलेश झा, बैद्यनाथ चौधरी, विद्या कांत मिश्र, रंजीत कामत, रुबी जायसवाल, लक्ष्मण चौधरी, योगेन्द्र चौधरी, मोहन जायसवाल सहित दर्जनों कार्यकर्ता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Apr 2025 18:40:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
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                <title>बीजेपी की पूर्व विधायक नीलम करवरिया का निधन, सीएम योगी और केशव मौर्य ने जताया दुख!</title>
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<div>ब्यूरो प्रयागराज। प्रयागराज की मेजा विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व विधायक नीलम करवरिया का बृहस्पतिवार देर रात हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह करीब 50 वर्ष की थीं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने नीलम करवरिया के निधन पर शोक प्रकट किया है।</div>
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<div>  नीलम करवरिया करीब 10 दिन पूर्व जिगर के प्रत्यारोपण के लिए हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती हुई थीं और बृहस्पतिवार की रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्होंने बताया कि देर रात करवरिया का निधन हो गया। उनके परिवार</div>
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<div>नीलम</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145175/cm-yogi-and-keshav-maurya-expressed-grief-over-the-demise"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/img_20240927_173703.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div>ब्यूरो प्रयागराज। प्रयागराज की मेजा विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व विधायक नीलम करवरिया का बृहस्पतिवार देर रात हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह करीब 50 वर्ष की थीं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने नीलम करवरिया के निधन पर शोक प्रकट किया है।</div>
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<div> नीलम करवरिया करीब 10 दिन पूर्व जिगर के प्रत्यारोपण के लिए हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती हुई थीं और बृहस्पतिवार की रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्होंने बताया कि देर रात करवरिया का निधन हो गया। उनके परिवार में पति उदयभान करवरिया, बेटी समृद्धि और साक्षी और बेटा सक्षम है। करवरिया 2017 में मेजा सीट से भाजपा के टिकट पर निर्वाचित हुई थीं।</div>
<div> </div>
<div>नीलम करवरिया के पति और बारा विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे  उदयभान करवरिया बीते 25 जुलाई को नैनी सेंट्रल जेल से रिहा हुए थे। करीब नौ वर्ष से नैनी जेल में बंद उदयभान को राज्यपाल की अनुशंसा पर रिहा किया गया था। उदयभान को समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक जवाहर यादव की हत्या का दोषी करार दिया गया था और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। करवरिया के करीबी मनीष त्रिपाठी ने बताया कि उनका पार्थिव शरीर शुक्रवार को प्रयागराज लाया जायेगा।</div>
<div> </div>
<div>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपने एक संदेश में कहा ''मेजा विधानसभा क्षेत्र की पूर्व विधायक नीलम करवरिया जी का निधन अत्यंत दुःखद है।'' योगी ने कहा ''ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!''</div>
<div> </div>
<div>राज्य के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 'एक्स' पर अपनी एक पोस्ट में कहा ''मृदुभाषी और जनप्रिय नेता, जनपद प्रयागराज के मेजा विधानसभा से पूर्व विधायक नीलम करवरिया जी के निधन की अत्यंत दु:खद सूचना प्राप्त हुई है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों व समर्थकों को संकट की इस घड़ी में संबल प्रदान करें।''</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Sep 2024 16:47:52 +0530</pubDate>
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