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                <title>Bhagat Singh - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Bhagat Singh RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की झांकी के साथ निकला तिरंगा यात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>शोहरतगढ़ कस्बा के सेठ रामकुमार खेतान बालिका इंटर कॉलेज की बालिकाओं व शिक्षकों के साथ विधानसभा क्षेत्र शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा के नेतृत्व में हर घर तिरंगा कार्यक्रम के तहत भव्य तिरंगा यात्रा शुक्रवार को निकाली गई। जिसमें भारत माता की जय घोष, हिंदुस्तान जिंदाबाद, वंदे मातरम का नारा लगाया गया।  तिरंगा यात्रा के दौरान विद्यालय की छात्राओं द्वारा आकर्षक झांकी भी निकाली गई, जो कि आकर्षण का केंद्र रहा।  तिरंगा यात्रा कार्यक्रम में एनसीसी के छात्राओं व महिला कांस्टेबल द्वारा विशेष सहयोग दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">विद्यालय प्रधानाचार्या अंजू मिश्रा व विधायक विनय वर्मा के साथ तहसील के निकट विद्यालय</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185287/tricolor-yatra-started-with-tableau-of-shaheed-bhagat-singh-rajguru"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1786714301599.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>शोहरतगढ़ कस्बा के सेठ रामकुमार खेतान बालिका इंटर कॉलेज की बालिकाओं व शिक्षकों के साथ विधानसभा क्षेत्र शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा के नेतृत्व में हर घर तिरंगा कार्यक्रम के तहत भव्य तिरंगा यात्रा शुक्रवार को निकाली गई। जिसमें भारत माता की जय घोष, हिंदुस्तान जिंदाबाद, वंदे मातरम का नारा लगाया गया।  तिरंगा यात्रा के दौरान विद्यालय की छात्राओं द्वारा आकर्षक झांकी भी निकाली गई, जो कि आकर्षण का केंद्र रहा।  तिरंगा यात्रा कार्यक्रम में एनसीसी के छात्राओं व महिला कांस्टेबल द्वारा विशेष सहयोग दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विद्यालय प्रधानाचार्या अंजू मिश्रा व विधायक विनय वर्मा के साथ तहसील के निकट विद्यालय से तिरंगा यात्रा चलकर रेलवे  तहसील मुख्यालय, स्टेट बैंक, पुलिस पिकेट चौराहा, तिरंगा तिराहा होते हुए नगर पंचायत शोहरतगढ़ के विभिन्न मोहल्ले का भ्रमण करते हुए कॉलेज वापस लौटी। यात्रा के दौरान हजारों छात्राएं, एनसीसी कैडेट्स व शिक्षक हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता की जय, एक भारत, श्रेष्ठ भारत, वंदे मातरम का जय घोष करते हुये नागरिकों में देश प्रेम भावना के लिए जागरूक किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विधायक विनय वर्मा ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के आह्वान पर क्षेत्र के गांव, गली- गली, घर -घर हर तरफ तिरंगा आन बान शान से लहरा रहा है। तिरंगा झंडा हमारे राष्ट्र के गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक है। यह यात्रा देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को बढ़ावा दे रहा है। कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम की अमर गाथा और बलिदान का प्रतीक है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानाचार्या अंजू मिश्रा ने कहा कि तिरंगे के तीन रंग हमें सत्य, शांति और साहस का संदेश देते हैं, जबकि अशोक चक्र हमें निरंतर प्रगति और कर्मपथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे सदैव राष्ट्रध्वज की गरिमा बनाए रखें और देशभक्ति की भावना को जीवन के हर क्षेत्र में जीवित रखें। इस दौरान प्रधानाचार्या अंजू मिश्रा, सत्य प्रकाश शुक्ला, मेघ श्याम गुप्ता, डॉक्टर विनय सिंह, विपिन कुमार सहित कॉलेज की हजारों छात्राएं मौजूद रहीं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 19:22:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> जब संसद पहुंचे अमर शहीद </title>
                                    <description><![CDATA[<div>'शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मिटने वालों का यही बाकि निशा होगा'। बेशक हम अमर शहीदों की चिताओं पे मेले तो खूब लगाते रहे परन्तु लज्जित करने का विषय है कि हम उन जांबाजो को शहीद का दर्जा आज तक नही दिला पाए हैं। बेशक उनका महान व्यक्तित्व हमारे किसी अलंकार का मोहताज नही है परन्तु स्वर्ग में बैठी उनकी पवित्र आत्माए हमारी अकृतज्ञनता पर अफसोस जरूर करती होंगी। 23 मार्च को पूरा देश शहीद दिवस के रूप में मनाता है परन्तु कितनी विडम्बना की बात है जिनके नाम पर हम शहीद दिवस मना रहे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150349/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(24)1.jpg" alt=""></a><br /><div>'शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मिटने वालों का यही बाकि निशा होगा'। बेशक हम अमर शहीदों की चिताओं पे मेले तो खूब लगाते रहे परन्तु लज्जित करने का विषय है कि हम उन जांबाजो को शहीद का दर्जा आज तक नही दिला पाए हैं। बेशक उनका महान व्यक्तित्व हमारे किसी अलंकार का मोहताज नही है परन्तु स्वर्ग में बैठी उनकी पवित्र आत्माए हमारी अकृतज्ञनता पर अफसोस जरूर करती होंगी। 23 मार्च को पूरा देश शहीद दिवस के रूप में मनाता है परन्तु कितनी विडम्बना की बात है जिनके नाम पर हम शहीद दिवस मना रहे हैं उन्हे अधिकारिक तौर पर शहीद का दर्जा तक प्राप्त नही है।</div>
<div> </div>
<div>जो व्यवहार हमारी सरकारें स्‍वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के साथ करती आई है वो किसी से छुपा नही है। आज यदि हमारे शहीद देश की हालत देखने के लिए जमीन पर उतर आए तो क्या देखेंगे एक व्यंग कथा के माध्यम से प्रस्तुत कर रहा हूं। एक दिन स्वर्ग में बैठे चंद्रशेखर आजाद, भगतसिंह ने सोचा चलो अपने आजाद भारत में घूम के आते हैं। देख के आते हैं कैसा है हमारे सपनों का देश और कैसी है आजाद भारत की राज व्यवस्था, दोनो संसद भवन के गेट पर प्रगट हुए और अंदर जाने के लिए आगे बढ़े तभी एक आवाज आई, "अरे कहां चल दिए"। दो मोटे-ताजे पुलिस वाले डंडा घुमाते हुए उनके पास आऐ।</div>
<div> </div>
<div>एक बोला,"हां भई कित जाना है अर किस तै मिलना है"। वे बोले "हम भगत सिंह और  चंद्रशेखर आजाद है। जिन्होने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लडाई लड़ी थी"। पुलिस वाले मजाक समझ हंसने लगे, फिर दूसरा पुलिस वाला कान खुजाता मुह से पान थुकर बोला,"भईया अब इहां कोई अंग्रेज नही ना है, जाओ भाई किसी और से जाकर लड़ो" कहकर दोनों फिर हसने लगे। इतने में एक आवाज आई,"ओ इना नू इधर भेज, मैं करदा गल इहना नाल", दोनो को अफसर के पास भेज दिया गया। वो बोला,"हां जी कोई परमीशन, किसी मंत्री, एम.पी की चिट्ठी है तुहाडे कोल"। वे दोनो बोले,"नही कोई चिट्ठी या परमीशन नही है"।</div>
<div> </div>
<div>वो बोला,"चलो कोई नही, लयाओ गांधी कडो"। वे बोले "गांधी कौन? महात्मा गांधी?", सुरक्षा कर्मी बोला "हां यार हरा, नीला गांधी"। यह गुफ्तगू अभी चल ही रही थी कि किसी ने संसद भवन में शोर मचा दिया कि बाहर भगत सिंह संग आजाद खड़े हैं। सारा मंत्री मण्डल, सांसद गेट की ओर टिड्डी दल से भागे और सीधे उनके चरणों में आ धड़ाम से गिरे। हर कोई दोनों को खींचते हुए अपने साथ ले जाना चाह रहा था। हर कोई कह रहा था, मैं हूं देश का असली और ईमानदार नेता बस मेरे साथ ही चलें आप।</div>
<div> </div>
<div>एक नेता बोला, यह हम हिन्दूओं के नेता हैं, एक आवाज आई नही ये सिक्खों के नेता , एक बोला इनके साथी अशफाक उला खां थे ये हमारे रहनुमा हैं। एक  बोला नही, ये तो ब्राह्मणों के नेता है। एक बोला  दलितों के हैं, कोई बोला नही ये राजपूतों के हैं। कोई यादवों का, कोई उन्हें जाटों तो कोई उन्हें मराठों का नेता बता अपने साथ चलने को कहने लगा। उनमें से उन्हें एक सीधा-साधा,भोली सूरत का देश का प्रेमी सा लगा। दोनो उसके साथ चल दिए। उसने इशारा किया एक बडी सी गाड़ी आई,पास आकर रुकी। नेता ने उन्हे गाड़ी में बिठाया। भोला दिखने वाला निकला बम का गोला।</div>
<div> </div>
<div>बोला,"प्रभु मेरा नाम बच्चू माधव है। आप यहां आराम से बैठो, यहां कोई देखने वाला नही है, उतारो आप भी देशभक्ति का चोला" और एक नोटों से भरा बैग उनकी ओर बढ़ा दिया। यह सब देख सुन शहीदों का क्रोध भड़क रहा था पर सोचा आगे देखें और क्या करतब करता है यह। नेता आगे बोला मैंने जनता का करोड़ों रुपया अंदर किया है, दस से ज्यादा कत्ल करे हैं। फिरौती- फराती तो इक आम बात है मेरे लिए, बहुत जनता है मेरे पीछे। सब मुझे अपना नेता मानते है और सब मुझेसे डरते हैं पर इन चुनावों में मेरी थोड़ी हालत खराब है। मेरे घोटाले लोगों के सामने आ गए हैं और इलाके में काम भी नही करवाया पर पैसा खूब बनाया है।</div>
<div> </div>
<div>हाथ जोड़कर बोला आपको अभी एक जनसभा में लेकर जाऊंगा, वहां मंच से बस आप ने मेरा नाम लेकर कहना है कि बच्चू माधव ही जनता का असली सेवक है। यह असली देशभक्त और कट्टर ईमानदार है, इसी को वोट देकर संसद पहुंचाओ"। उस नोटों के बैग की ओर इशारा कर बोला, "श्रीमान यह तो कुछ भी नही,मालामाल कर दूंगा आपको, सोने ,हीरे,मोती में तोल दूंगा। आज तक देखा ना होगा इतना धन दूंगा, गाडियां, घर ले दूंगा। मिलकर जनता को लूटेंगे और ऐश करेंगे। बोलिए क्या कहते हो"। इतना सुन उन्होने नेता की ओर घूर कर देखा, बच्चू माधव डर से कापने लगा और उसके प्राण पखेरू उड़ गए। दोनो खामोश थे।</div>
<div> </div>
<div>एक-दूसरे से आंख नही मिला पा रहे थे। सोच रहे थे तो बस इतना कि इन चोर उचक्कों कि खातिर ही क्या हमने स्वयं का सर्वस्व कुर्बान कर देश की आजादी के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। यह आज सोचने का विषय है। हम शहीदों को श्रद्धांजलि तो देते हैं हर साल पर क्या देश उस रास्ते पर चल पाए जिसका सपना देख महापुरुषों ने खुद का बलिदान दिया था। भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव को अदालती आदेश के मुताबिक 24 मार्च 1931 की सुबह फांसी लगाई जानी थी लेकिन 23 मार्च 1931 को ही इन तीनों को देर शाम करीब सात बजे फांसी लगा दी गई थी।</div>
<div> </div>
<div>असल में जब से तीनों वीर सपूतों को फांसी की सजा सुनाई गई थी तब से लोग भड़क गए थे और वे तीनों वीर सपूतों को देखना चाहते थे। तीनों को फांसी को लेकर जिस तरह से लोग प्रदर्शन और विरोध कर रहे थे। अंग्रेज सरकार बुरी तरह डर गई थी। माहौल बिगड़ता देखकर ही फांसी का दिन और समय बदला गया और एक दिन पहले ही फांसी दे दी गई।  करीब दो साल जेल में रहने के बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को एक साथ फांसी पर चढ़ा दिया गया था। अंग्रजों से लड़ाई लड़ते हुए भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता है। आज इन तीनों सेनानियों के बलिदान के 94 साल पूरे हो चुके हैं। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Mar 2025 14:23:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अद्वितीय क्रांतिकारी भगतसिंह</title>
                                    <description><![CDATA[<div>एक क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी जिन्हें 23 साल की उम्र में अंग्रेजों ने फांसी पर लटका दिया नाम था भगत सिंह। आज शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 117वीं जयंती पर पूरा देश नतमस्तक हो उन्हे श्रद्धांजलि अर्पित करता है। उनके किए कार्यों और उनके विचारों ने उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का राष्ट्रीय नायक बना दिया परन्तु अफसोस आजादी के 76 साल बाद भी हम अपने आजाद देश में इस महानायक को शहीद का दर्जा नही दिला पाए हैं। भगत सिंह ने जहां एक तरफ अपनी बंदूक के दम पर अंग्रेजी हकूमत के मन में भय पैदा किया वहीं दूसरी ओर अपने विचारों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145140/unique-revolutionary-bhagat-singh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/अद्वितीय-क्रांतिकारी-भगतसिंह.jpg" alt=""></a><br /><div>एक क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी जिन्हें 23 साल की उम्र में अंग्रेजों ने फांसी पर लटका दिया नाम था भगत सिंह। आज शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 117वीं जयंती पर पूरा देश नतमस्तक हो उन्हे श्रद्धांजलि अर्पित करता है। उनके किए कार्यों और उनके विचारों ने उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का राष्ट्रीय नायक बना दिया परन्तु अफसोस आजादी के 76 साल बाद भी हम अपने आजाद देश में इस महानायक को शहीद का दर्जा नही दिला पाए हैं। भगत सिंह ने जहां एक तरफ अपनी बंदूक के दम पर अंग्रेजी हकूमत के मन में भय पैदा किया वहीं दूसरी ओर अपने विचारों से आजादी के संघर्ष में अलग अलग भारतीयों को एक करने का काम किया।</div>
<div> </div>
<div>इस महान क्रांतिवीर का जन्म 28 सितंबर 1907 को सयुंक्त भारत के पश्चिमी पंजाब के लायलपुर में सरदार किशन सिंह संधू और विद्या वती के घर में हुआ था। इनके दादा अर्जन सिंह, पिता किशन सिंह और चाचा अजीत सिंह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल थे। जब भगत सिंह का जन्म हुआ तब उनके पिता और चाचा 1907 में नहर उपनिवेशीकरण विधेयक के विरोध में आंदोलन में भाग लेने के कारण जेल में थे। स.भगत सिंह ने कुछ सालों तक गांव के स्कूल में पढ़ाई करने के बाद लाहौर में आर्य समाज द्वारा संचालित एंग्लो- वैदिक स्कूल में दाखिला लिया ।</div>
<div> </div>
<div>1923 में उन्हें लाहौर के नेशनल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जिसकी स्थापना भारतीय स्वतंत्रता अंदोलन के एक और महान योद्धा लाला लाजपत राय ने की थी। दो साल पहले स्थापित यह कॉलेज महात्मा गांधी के ब्रिटिश सरकार द्वारा अनुदानित स्कूलों और कॉलेजों से दूर रहने के असहयोग के आह्वान पर बनाया गया था। स. भगत सिंह का पूरा परिवार स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय था। जब जनरल डायर ने हजारों निहत्थे प्रदर्शनकारियों की हत्या की तो कुछ घंटों बाद ही बालक भगत जलियांवाला बाग हत्याकांड स्थल पर गए थे और हजारो बेगुनाहों के बिखरे पड़े खून को देख मन ही मन आजादी के लिए संघर्ष करने की ठान ली थी।</div>
<div> </div>
<div>1928 में साइमन कमीशन की स्थापना ब्रिटिश सरकार ने भारत की राजनीतिक स्थिति पर रिपोर्ट देने के लिए की थी। भारतीयों द्वारा जॉन साइमन की अध्यक्षता वाले इस कमीशन का बहिष्कार किया गया। 30 अक्टूबर 1928 को आयोग ने लाहौर का दौरा किया,लाला लाजपत राय ने इसके खिलाफ एक मौन मार्च का नेतृत्व किया।प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए  पुलिस अधीक्षक जेम्स स्कॉट ने लाठीचार्ज का आदेश दिया जिसमें लाला जी गंभीर रूप से घायल हो गए जिसके बाद 17 नवंबर 1928 को उनकी मृत्यु हो गई थी। लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए भगत सिंह ने अपने साथियों चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव, राजगुरु व अन्य के साथ मिलकर स्काॅट की हत्या का प्लान बनाया।</div>
<div> </div>
<div>हालांकि गलत पहचान के कारण उन्होंने  17 दिसंबर 1928 को लाहौर जिला पुलिस मुख्यालय से बाहर निकलते समय ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या कर दी। इसके तुरंत बाद पुलिस द्वारा बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया गया। इस हत्या में शामिल सभी क्रांतिकारी भेष बदल लाहौर से निकलने में कामयाब हो गए। लाला लाजपत राय की हत्या का बदला राष्ट्र के सम्मान की रक्षा का प्रतीक बन गया। इस कार्य से उन सभी का खास तौर पर भगत सिंह का नाम पूरे भारत में गूंजने लगा। उन्होंने जो लोकप्रियता हासिल की वह अद्भुत थी।</div>
<div> </div>
<div>8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर असेंबली के सत्र के दौरान सार्वजनिक गैलरी से सेंट्रल हाल में दो बम फेंके। बम फेंकते समय इस बात का भी ध्यान रखा गया कि इससे किसी की जान का नुकसान न हो। जैसे ही बम फटा जोर की आवाज हुई और असेंबली हॉल में अंधेरा छा गया। पूरे भवन में अफरातफरी मच गई। घबराए लोगों ने बाहर भागना शुरू कर दिया। हालांकि बम फेंकने वाले दोनों क्रांतिकारी वहीं खड़े रहे। इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए उन्होंने कुछ पर्चे भी सदन में फेंके। इनमें लिखा था कि बहरे कानों को सुनाने के लिए धमाकों की जरूरत पड़ती है। दोनों ने बिना किसी विरोध के स्वयं को पुलिस के हवाले कर दिया। इस कारनामे के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त भारतीय युवाओं के हीरो बन गए।</div>
<div> </div>
<div>क्रांतिकारी पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल का विरोध कर रहे थे। ट्रेड डिस्प्यूट बिल पहले ही पास किया जा चुका था। जिसमें मजदूरों द्वारा की जाने वाली हर तरह की हड़ताल पर पाबंदी लगा दी गई थी। पब्लिक सेफ्टी बिल में सरकार को संदिग्धों पर बिना मुकदमा चलाए हिरासत में रखने का अधिकार दिया जाना था। दोनों बिलों का मकसद अंग्रेजी सरकार के खिलाफ उठ रही आवाजों को दबाना था। भगत सिंह के विचारों ने भारतीय लोगों को बहुत प्रभावित किया। उनका कहन था। वे मुझे मार सकते हैं, लेकिन वे मेरे विचारों को नहीं मार सकते। वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं, लेकिन वे मेरी आत्मा को नहीं कुचल पाएंगे। क्रांति मानव जाति का एक अविभाज्य अधिकार है।</div>
<div> </div>
<div>स्वतंत्रता सभी का अविनाशी जन्मसिद्ध अधिकार है।मनुष्य का कर्तव्य है प्रयास करना, सफलता संयोग और वातावरण पर निर्भर करती है। दर्शन मानवीय दुर्बलता या ज्ञान की सीमाओं का परिणाम है। निर्दयी आलोचना और स्वतंत्र सोच क्रांतिकारी सोच के दो आवश्यक लक्षण हैं। मैं एक मनुष्य हूं और मानव जाति को प्रभावित करने वाली हर चीज मुझे चिंतित करती है। यदि बहरे को सुनना है तो आवाज बहुत तेज होनी चाहिए। विद्रोह कोई क्रांति नहीं है। यह अंततः उसी लक्ष्य तक ले जा सकता है। जीवन का उद्देश्य अब मन को नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि इसे सामंजस्यपूर्ण ढंग से विकसित करना है, परलोक में मोक्ष प्राप्त करना नहीं, बल्कि यहीं इसका सर्वोत्तम उपयोग करना है।</div>
<div> </div>
<div>जो भी व्यक्ति प्रगति के पक्ष में है, उसे पुराने विश्वास के प्रत्येक पहलू की आलोचना करनी होगी, उस पर अविश्वास करना होगा तथा उसे चुनौती देनी होगी। 23 मार्च 1931 को शाम के करीब 7 बजकर 33 मिनट पर भगत सिंह तथा इनके दो साथियों सुखदेव व राजगुरु को फाँसी दे दी गई। बेशक अंग्रेजी हकूमत ने उनके शरीर को तो खत्म कर दिया परन्तु आज भी उनके विचार युवा एवंम राष्ट्रभक्तों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। संपूर्ण राष्ट्र को महान क्रांतिवीर स.भगतसिंह के जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाए। </div>
<div><strong>(नीरज शर्मा'भरथल')</strong></div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Sep 2024 17:07:37 +0530</pubDate>
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