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                <title>communicable disease control - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>communicable disease control RSS Feed</description>
                
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                <title>जिलाधिकारी ईशा प्रिया की अध्यक्षता में संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान की समीक्षा बैठक सम्पन्न</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर-</strong> जिलाधिकारी ईशा प्रिया की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान (जुलाई-2026) की प्रथम जनपद स्तरीय साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार भी उपस्थित रहे। बैठक में 1 जुलाई से अब तक विभिन्न विभागों द्वारा संचालित गतिविधियों की विभागवार समीक्षा की गई और अभियान को अधिक प्रभावी एवं परिणाममुखी बनाने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने सभी अधिशासी अधिकारियों एवं जिला पंचायत राज अधिकारी को संचारी रोगों की रोकथाम के लिए फॉगिंग एवं एंटी लार्वा छिड़काव को नियमित,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183046/review-meeting-of-communicable-disease-control-and-dastak-campaign-concluded"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1001069393.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर-</strong> जिलाधिकारी ईशा प्रिया की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान (जुलाई-2026) की प्रथम जनपद स्तरीय साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार भी उपस्थित रहे। बैठक में 1 जुलाई से अब तक विभिन्न विभागों द्वारा संचालित गतिविधियों की विभागवार समीक्षा की गई और अभियान को अधिक प्रभावी एवं परिणाममुखी बनाने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने सभी अधिशासी अधिकारियों एवं जिला पंचायत राज अधिकारी को संचारी रोगों की रोकथाम के लिए फॉगिंग एवं एंटी लार्वा छिड़काव को नियमित, व्यापक और प्रभावी ढंग से कराने के सख्त निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अभियान की सभी गतिविधियां विभागीय समन्वय के साथ समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति के साथ पूरी की जाएं।ईशा प्रिया ने चिकित्सा अधीक्षकों, एमओआईसी एवं चिकित्सकों को अपने दायित्वों का संवेदनशीलता एवं पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन करने को कहा। उन्होंने चिकित्सालयों में नियमित साफ-सफाई, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और जरूरी चिकित्सीय सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में जिलाधिकारी ने जिला कृषि अधिकारी को चूहों एवं छछूंदरों से फैलने वाले रोगों के प्रति किसानों को जागरूक करने, जबकि मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को सुअर पालकों का संवेदीकरण कराने,  सुअर बाड़ों की नियमित सफाई और एईएस/जेई जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।इसके अलावा, सैम एवं माम (SAM/MAM) बच्चों के समयबद्ध चिन्हांकन, उन्हें पोषण, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी सहित कृषि, पशुपालन, नगर पालिका, नगर पंचायत और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 22:36:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संचारी रोग नियंत्रण को लेकर चलाया गया जागरूकता अभियान </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में  शरीर और निवास स्थान एवं आस पास साफ सुथरा रखकर तमाम रोगों से बचा जा सकता है। इस बात की जानकारी डिप्टी सीवीओ रामनगर डॉ बी आर चौरसिया ने संचारी रोग नियंत्रण अभियान अंतर्गत रामनगर , नरखोरिया में अभियान से संबंधित जानकारी दी गई। इस दौरान उन्होंने बनाया कि मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले तमाम तरह के रोगाणु और रोगाणु को संचारण या वहन करने वाले मक्खी, मच्छर, अन्य कीट गंदगी में ही पनपते हैं।इन रोगाणु और कीट पतंगों पर नियंत्रण पाने के लिए अपने आस पास के वातावरण को स्वच्छ रखना परम आवश्यक है।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145461/awareness-campaign-launched-regarding-communicable-disease-control%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/img-20241008-wa0221.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में  शरीर और निवास स्थान एवं आस पास साफ सुथरा रखकर तमाम रोगों से बचा जा सकता है। इस बात की जानकारी डिप्टी सीवीओ रामनगर डॉ बी आर चौरसिया ने संचारी रोग नियंत्रण अभियान अंतर्गत रामनगर , नरखोरिया में अभियान से संबंधित जानकारी दी गई। इस दौरान उन्होंने बनाया कि मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले तमाम तरह के रोगाणु और रोगाणु को संचारण या वहन करने वाले मक्खी, मच्छर, अन्य कीट गंदगी में ही पनपते हैं।इन रोगाणु और कीट पतंगों पर नियंत्रण पाने के लिए अपने आस पास के वातावरण को स्वच्छ रखना परम आवश्यक है।</div>
<div> </div>
<div>बच्चों को होने वाली जापानीज इंसेफेलाइटिस या दिमागी बुखार एक विषाणु जनित संक्रामक बीमारी है। शुअर इस रोग के विषाणु का प्राकृतिक आवास है। किसी कारण से शुअर में मौजूद जे इ का वाइरस मच्छर के जरिए इंसान तक पहुंच कर बीमारी का कारण बनते हैं।  मच्छरों से बचाव के लिए अपने घर एवं घर के आस पास साफ सुथरा रखें। गंदा पानी न जमा होने दें। सोते समय मच्छर दानी लगाएं। कभी कभी शूकर बाड़े में कीटनाशक का छिड़काव करें। संभव हो तो शूकर पालन छोड़ बकरी पालन आदि अपनाएं। इस अवसर पर कीटनाशक पाउडर का छिड़काव किया गया। मौके पर सुखराम शोनकर, भूलन, रामसुमेर, विसयी, शीलादेवी  मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Oct 2024 16:46:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने देश को दिया सुरमा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आज की पीढ़ी सूरमा के बारे में तो जानती होगी लेकिन उसे सुरमा के बारे में ज्यादा पता नहीं होगा। सुरमा का इतिहास बड़ा पुराना है।  अक्सर पुराने जमाने में महिलाएं [ पुरुष भी ] सुरमा का इस्तेमाल   अपनी आँखें आंजने यानि उन्हें खूबसूरत बनाने और निरोगी बनाने के लिए करते थे। सुरमा एके तरह का रसायन है। इसे आंजना भी एक कला है।  संयोग से सुरमा को मुस्लिम समाज में बहुत तवज्जो दी गयी। अब तो बहुत कम लोग सुरमा लगते हैं ,क्योंकि एक तो ये हिन्दू-मुसलमान में बंट गया ,दूसरे आधुनिक विज्ञान ने इसकी फजीहत कर दी।</p>
<p>गोया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145102/66f53b5e183a2"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/img-20240925-wa0127.jpg" alt=""></a><br /><p>आज की पीढ़ी सूरमा के बारे में तो जानती होगी लेकिन उसे सुरमा के बारे में ज्यादा पता नहीं होगा। सुरमा का इतिहास बड़ा पुराना है।  अक्सर पुराने जमाने में महिलाएं [ पुरुष भी ] सुरमा का इस्तेमाल   अपनी आँखें आंजने यानि उन्हें खूबसूरत बनाने और निरोगी बनाने के लिए करते थे। सुरमा एके तरह का रसायन है। इसे आंजना भी एक कला है।  संयोग से सुरमा को मुस्लिम समाज में बहुत तवज्जो दी गयी। अब तो बहुत कम लोग सुरमा लगते हैं ,क्योंकि एक तो ये हिन्दू-मुसलमान में बंट गया ,दूसरे आधुनिक विज्ञान ने इसकी फजीहत कर दी।</p>
<p>गोया कि हम उस ज़माने के लोग हैं जब सुरमा लगाने वाली  स्त्रियों को बड़े सम्मान से देखा जाता था।  लोगों के पास बाकायदा एक खूबसूरत डिबिया होती थी जिसे सुरमेदानी कहा जाता था। सुरमा लगाने के लिए धातु या कांच की सलाई हुआ करती थी। सुरमे की याद मुझे अचानक तब आई जब मुझे  माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गयी एक टिप्पणी पढ़ने को मिली ,जिसमें कहा गया है कि - कोई  भी व्यक्ति [जज भी ] भारत के किसी भी हिस्से को पाकिस्तान नहीं कह सकता है. यह देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ है।  माननीय अदालत को ऐसी तल्ख टिप्पणी अपने ही एक अधीनस्थ न्यायालय के माननीय जज द्वारा की गयी टिप्पणी पर करना पड़ी।</p>
<p>आपने शायद गौर न किया हो लेकिन आपको बताये देता हूँ कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के जज की टिप्पणी को संज्ञान में लिया है और फटकार लगाई है।  सर्वोच्च न्यायालय  ने कहा, कोई भी व्यक्ति भारत के किसी भी क्षेत्र को ''पाकिस्तान' नहीं कह सकता है।  दरअसल, हाल ही में एक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के जज जस्टिस वेदव्यासाचार्य श्रीशानंद ने बेंगलुरु के एक इलाके को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की थी।  जस्टिस श्रीशानंद ने सुनवाई के दौरान एक महिला वकील पर असंवेदनशील और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। 20 सितंबर कोसुप्रीम कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लिया और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से रिपोर्ट मांगी थी।</p>
<p>हाल ही में जस्टिस श्रीशानंद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।  एक क्लिप में जज को मकान मालिक-किराएदारों के विवाद की सुनवाई के दौरान एक महिला वकील से यह कहते हुए देखा गया  कि वो विरोधी पक्ष के बारे में बहुत कुछ जानती हैं।  वो उनके अंडरगारमेंट्स का कलर भी आइडेंटिफाई कर सकती हैं।  एक अन्य क्लिप में जज को बेंगलुरु के एक मुस्लिम बहुल इलाके को 'पाकिस्तान' कहते हुए सुना गया।<br />आजाद भारत में ऐसी घ्रणित और लज्जास्पद टिप्पणियां करने वाले वेदव्यासाचार्य  अकेले नहीं हैं।</p>
<p>वेदव्यासाचार्य कि टिप्पणियां दरअसल उस समाज का प्रतिनिधित्व करतीं हैं जो आजादी के बाद भी देश में रह गए अल्पसंख्यकों को अपना मानने के लिए किसी भी सूरत में राजी नहीं हैं। ऐसी विचारधारा को राजनीतिक दलों ने हवा दी है। समाज में उन्होंने ही जहर घोला है और इतना ज्यादा घोल दिया है कि अब ये जहर देश की तमाम शिराओं से होता हुआ हमारी न्याय पालिका में भी प्रवेश कर गया है।  जस्टिस  वेदव्यासाचार्य  तो एक उदाहरण  भर है।वैसे भी केवल नाम वेदव्यास रखने से कोई वेदव्यास हो नहीं जाता। वो कुछ भी हो सकता है ,लेकिन वेदव्यास नहीं।</p>
<p>बहरहाल मुझे और आप सभी को देश कि शीर्ष अदालत का आभार मानना चाहिए   कि उसने आपने अधीनस्थ न्यायालय के न्यायाधीश की टिप्पणी पर संज्ञान लिया।  जस्टिस वेदव्यास यदि माननीय हाईकोर्ट के न्यायाधीश न होते तो मुमकिन हैकि उन्हें उनकी टिप्पणी के लिए निलंबित कर दिया जात।  कारण बताओ नोटिस दिया जाता और बाकायदा कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती, लेकिन माननीय अदालतों कि एक मर्यादा होती है। उसकी लक्ष्मण रेखाएं होतीं हैं ,उन्हें आसानी से लांघा  नहीं जा सकता।<br />ख़ुशी की बात ये है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने जस्टिस वेदव्यास के जरिये पूरे देश को ये संदेश दे दिया कि हर किसी को अपनी जबान काबू में रखना चाहिए। माननीय सर्वोच्च न्यायालय का ये निर्देश उन नेताओं के लिए ज्यादा लागू हो सकता है जो बात-बात में अपने ही नागरिकों को ही नहीं बल्कि प्रतिपक्ष के नेताओं तक को बात -बात में पाकिस्तान  जाने कि नसीहत देने से नहीं चूकते। हमारे देश के नेता ही नहीं बल्कि सरकारके मंत्री तक किसी को भी देश का आतंकी नंबर वन कह सकते  है।</p>
<p>कह चुके हैं ,लेकिन दुर्भाग्य न सुनने वालों ने संज्ञान लिया और न किसी अदालत ने। अदालत भी आखिर किस - किसका संज्ञान ले ? यहां तो पूरे कुएं  में भांग घुल चुकी है। लेकिन मुझे फिर भी यकीन है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय डरा दिया गया निर्देश संकीर्ण लोगों कि आँखों में पड़े जाले को काटने में सुरमे का काम करेगा। बहुत कम लोगों को पता है कि काजल और सुरमा दो अलग-अलग चीजें है।  दोनों आँखों को आंजती हैं। खूब सूरत और निरोगी बनाती है। सुरमा लगी आँखें जिसने देखी होंगीं वो उनकी खूबसूरती को समझ सकता है। सुरमा लगी आँखों कि खूबसूरती लफ्जों में बयां नहीं कि जा सकती।</p>
<p> मैंने बचपन में अपने आसपास रहने वाली तमाम बूढी और जवान महिलाओं को अपनी आँखों में सुरमा आँजते देखा है सुरमा पड़ते ही आँखे एकदम सुर्ख रू हो जातीं है।  कुछ देर के लिए डबडबाती भी हैं लेकिन अश्कों को सलीके से दुपट्टे से पोंछ भी लिया जाता है और फिर आँखों में जो धार आती है उसके आगे तलवार की धार भी मौथरी पड़ जाये। गीतकारों ने हालाँकि सुरमा लगी आँखों को ' सुरमयी अँखियाँ ' कहने कि कोशिश   की है।  लेकिन इसके दो अर्थ निकलते हैं। पहला सुरमा लगी आँखें और दूसरा नशीली आँखें।</p>
<p>कमाल की बात ये है कि हमारी शीर्ष अदालत मौके-बेमौके समाज कि आँखों में सुरमा लगाता रहता है।  शीर्ष अदालत के पास क़ानून की सुरमेदानी है।  उसमें तरह-तरह का सुरमा होता है।  कभी इसका असर होता है और कभी नहीं होता। लेकिन सुरमा का इस्तेमाल न समाज ने बंद किया है और न न्यायपालिका ने। आज यदि देश में बहुत कुछ खूबसूरत बचा है तो इसी सुरमे की वजह से ही ,अन्यथा एक पूरी जमात सब कुछ गुड़-गोबर करने पर आमादा है।</p>
<p>मुझे ये कहने में कोई हिचक नहीं है कि देश में यदि घर-घर श्री गणेश जी विराजते हैं तो समाज में जगह -जगह गोबर गणेश भी मिल जाते हैं। गणेश पूजा तक विवादों में घिर जाती  है।  जिस गणेश पूजा में प्रधानमंत्री कि मौजूदगी से माननीय  सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशडीवाई चंद्रचूड़  विवादों में आये थे उन्हीं चंद्रचूड़ साहब  की अध्यक्षता वाली बेंच ने इलेक्ट्रॉनिक युग में जजों के व्यवहार में बदलाव लाने का आह्वान किया है।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इस तरह के विवादों से अदालती कार्यवाही की लाइवस्ट्रीमिंग रोकने की मांग नहीं उठनी चाहिए।  अदालत ने कहा, यह सुविधा लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।</p>
<p>मजे कि बात ये है कि इस मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने उस कहावत को भी चरितार्थ किया है जिसमें कहा जाता है कि कोई अपनी मां को भट्टी नहीं कहता। माननीय अदालत ने जस्टिस वेदव्यासाचार्य को लगभग माफ़ करते हुए कहा है कि , सभी पक्षों, जजों, वकीलों, वादियों को यह पता होना चाहिए कि कार्यवाही उन दर्शकों तक पहुंचती है, जो अदालत के कैंपस से दूर बैठे हैं।  इस तरह की टिप्पणियों के व्यापक प्रभाव के बारे में पता होना चाहिए।  जजों के रूप में हम इस तथ्य के प्रति सचेत रहें कि प्रत्येक व्यक्ति के शुरुआती या बाद के अनुभवों के आधार पर पूर्वाग्रहों का एक समूह होता है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कर्नाटक हाई कोर्ट के जज जस्टिस श्रीशानंद ने कहा कि 21 सितंबर को सुनवाई के दौरान उनके द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों को संदर्भ से हटकर दिखाया गया है।  चूंकि जज ने अपनी टिप्पणी को अनजाने में कहा है, इसलिए यह समाज में किसी के लिए भी टारगेटेड नहीं थी। बहरहाल अब इस मामले का पटाक्षेप  हो चुका है इसलिए इसे यहीं छोड़ते हैं।  इस बहाने मै अपने पाठकों से जरूर कहना चाहता हूँ कि जब-जब आँखों में जला-काला उतरता दिखाई दे तब-तब आँखों में काजल या सुरमा जरूर आंजना चाहिए। आँखों में रतौंधी का आना घातक है ,यहीं से अन्धेरा बढ़ता है और जो बाद में अंध भक्ति में बदल जाता है।  जय सियाराम।</p>
<p><strong>राकेश अचल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 26 Sep 2024 16:19:40 +0530</pubDate>
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