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                <title>Swachh Bharat Mission - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Swachh Bharat Mission RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विकासखंड स्तर पर लगेंगे विशेष शिविर</title>
                                    <description><![CDATA[<h2><strong style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">फिरोजाबाद।</strong><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;"> </span></h2>
<h4><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">जनपद में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा आमजन की समस्याओं एवं कठिनाइयों के त्वरित निस्तारण के लिए सभी विकासखंड स्तर पर विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा के दौरान कुछ बिंदुओं पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।</span></h4>
<p>मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में जनपद के सभी विकासखंडों में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य जनकल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करना तथा योजनाओं के लाभ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186156/special-camps-will-be-organized-at-the-block-level-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260823-wa0031.jpg" alt=""></a><br /><h2><strong style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">फिरोजाबाद।</strong><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;"> </span></h2>
<h4><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">जनपद में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा आमजन की समस्याओं एवं कठिनाइयों के त्वरित निस्तारण के लिए सभी विकासखंड स्तर पर विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा के दौरान कुछ बिंदुओं पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।</span></h4>
<p>मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में जनपद के सभी विकासखंडों में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य जनकल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करना तथा योजनाओं के लाभ से वंचित पात्र लोगों को चिन्हित कर उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाना है।शिविरों के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन को उपलब्ध कराएंगे। साथ ही योजनाओं के सकारात्मक पहलुओं एवं पात्रता की जानकारी देते हुए लोगों को जागरूक किया जाएगा। ऐसे पात्र व्यक्ति, जिन्हें अभी तक किसी योजना का लाभ नहीं मिल सका है, उन्हें चिन्हित कर उनका विवरण पंजिका में दर्ज किया जाएगा और पात्रता के अनुसार लाभ दिलाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों को भी शिविरों में आमंत्रित किया जाएगा, ताकि योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार हो सके और अधिक से अधिक पात्र परिवार सरकारी योजनाओं से जुड़ सकें।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/img-20260823-wa0034.jpg" alt="जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विकासखंड स्तर पर लगेंगे विशेष शिविर" width="1200" height="800"></img></p>
<h3>इन तिथियों में लगेंगे शिविर</h3>
<ul>
<li><strong>टूण्डला — 24 अगस्त 2026</strong></li>
<li><strong>नारखी — 24 अगस्त 2026</strong></li>
<li><strong>जसराना — 25 अगस्त 2026</strong></li>
<li><strong>एका — 25 अगस्त 2026</strong></li>
<li><strong>फिरोजाबाद — 25 अगस्त 2026</strong></li>
<li><strong>शिकोहाबाद — 27 अगस्त 2026</strong></li>
<li><strong>हाथवंत — 27 अगस्त 2026</strong></li>
<li><strong>अरांव — 29 अगस्त 2026</strong></li>
<li><strong>मदनपुर — 29 अगस्त 2026</strong></li>
</ul>
<h3>इन योजनाओं पर रहेगा विशेष फोकस</h3>
<p>विशेष शिविरों में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, वृद्धावस्था पेंशन योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना, दिव्यांग पेंशन योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, आयुष्मान योजना, स्वच्छ भारत मिशन योजना के अंतर्गत शौचालय, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना एवं जल जीवन मिशन सहित प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।</p>
<p>अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शिविरों में आने वाले लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।</p>
<p>जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, फिरोजाबाद को निर्देशित किया गया है कि सभी संबंधित अधिकारियों से शिविरों के आयोजन की आख्या निर्धारित प्रारूप पर प्राप्त कर संकलित सूचना <strong>31 अगस्त 2026 तक मुख्यमंत्री कार्यालय</strong> को प्रेषित करना सुनिश्चित करें।</p>
<p>जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि शासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचे तथा पात्र लाभार्थियों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 20:10:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[विवेक शर्मा]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मण्डलीय जिला सूचना कार्यालय लखनऊ पिछले 09 वर्षों में पंचायती राज विभाग द्वारा जनपद लखनऊ की उल्लेखनीय प्रगति</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>(आदर अदीब पावेल बन्धु) जिला सूचना अधिकारी</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> मण्डलीय जिला सूचना कार्यालय लखनऊ।</strong></p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन की आधारशिला है। जनपद लखनऊ में पिछले 09 वर्षों के दौरान पंचायती राज विभाग ने विकास के अनेक आयामों पर उल्लेखनीय कार्य करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं, स्वच्छता, सुशासन और जनकल्याण को नई दिशा दी है। विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और परियोजनाओं ने न केवल ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार किया है, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />पिछले नौ वर्षों में पंचायती राज विभाग द्वारा जनपद लखनऊ में आधारभूत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184365/divisional-district-information-office-lucknow-remarkable-progress-of-district-lucknow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas17.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>(आदर अदीब पावेल बन्धु) जिला सूचना अधिकारी</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> मण्डलीय जिला सूचना कार्यालय लखनऊ।</strong></p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन की आधारशिला है। जनपद लखनऊ में पिछले 09 वर्षों के दौरान पंचायती राज विभाग ने विकास के अनेक आयामों पर उल्लेखनीय कार्य करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं, स्वच्छता, सुशासन और जनकल्याण को नई दिशा दी है। विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और परियोजनाओं ने न केवल ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार किया है, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />पिछले नौ वर्षों में पंचायती राज विभाग द्वारा जनपद लखनऊ में आधारभूत संरचना के विकास पर विशेष बल दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार के तहत 14.13 करोड़ रुपये की लागत से 58 अन्त्येष्टि स्थलों का निर्माण कराया गया। यह कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरिमामय अंतिम संस्कार व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा है। इन स्थलों के निर्माण से ग्रामीण जनता को सुविधा मिलने के साथ सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति भी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी प्रकार ग्रामीण प्रशासन को सुदृढ़ बनाने हेतु राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आर०जी०एस०ए०) के अंतर्गत 18.51 करोड़ रुपये की लागत से 106 पंचायत भवनों का निर्माण कराया गया। पंचायत भवन ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ होते हैं, जहां ग्राम सभाएं, विकास योजनाओं की बैठकें और प्रशासनिक गतिविधियां संचालित होती हैं। आधुनिक सुविधाओं से युक्त इन पंचायत भवनों ने ग्राम स्तर पर सुशासन को मजबूती दी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />स्वच्छता के क्षेत्र में भी जनपद लखनऊ ने उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 31.87 करोड़ रुपये की लागत से 491 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया। इन शौचालयों के निर्माण से सार्वजनिक स्वच्छता व्यवस्था मजबूत हुई और विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों तथा जरूरतमंदों को सुविधा मिली। यह कार्य ग्रामीण स्वच्छता अभियान की सफलता का प्रमुख उदाहरण है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी क्रम में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व प्रगति हुई। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 267.05 करोड रुपये की लागत से 2.22.538 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कराया गया। यह उपलब्धि खुले में शौच मुक्त (ODF) अभियान को सफल बनाने में मील का पत्थर साबित हुई। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी, महिलाओं की गरिमा सुरक्षित हुई तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी आई।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सेवाओं को सुलभ बनाने हेतु आर०जी०एस०ए० योजनान्तर्गत 3.12 करोड़ रुपये की लागत से 78 जन सेवा केन्द्रों का निर्माण कराया गया। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी सेवाएं, प्रमाणपत्र, आवेदन और योजनाओं से संबंधित जानकारी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो रही है। इससे शासन की सेवाओं की पहुंच गांव तक सुनिश्चित हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इन उपलब्धियों के अतिरिक्त पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) के माध्यम से गांवों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को गति दी। गांवों में सड़क, नाली, इंटरलॉकिंग, पंचायत भवन, पेयजल, सौर लाइट, खेल मैदान और अन्य सामुदायिक परिसंपत्तियों का विकास किया गया। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में व्यापक सुधार हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />पिछले 09 वर्षों में विभाग ने डिजिटल गवर्नेस को भी बढ़ावा दिया। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल, पंचायत लेखा प्रणाली और ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था के माध्यम से पंचायतों के कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई। पंचायत सहायकों और पंचायत सचिवालयों के माध्यम से ग्रामीण प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाया गया।महिला सशक्तिकरण भी इस प्रगति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढी है और महिला ग्राम प्रधानों ने विकास कार्यों में सक्रिय योगदान दिया है। स्वयं सहायता समूहों और पंचायतों के समन्वय से ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को बल मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मनरेगा के अंतर्गत भी पंचायती राज विभाग ने उल्लेखनीय कार्य किए। तालाबों का पुनरुद्धार, चकरोड निर्माण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों का निर्माण कराया गया। अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत जल संरक्षण को बढ़ावा दिया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन और जल संसाधनों की उपलब्धता बेहतर हुई।<br />सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायतों की भूमिका अत्यंत प्रभावी रही। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांगजन पेंशन, राशन वितरण और अन्य योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और सहायता में पंचायतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता के क्षेत्र में भी विभाग ने सराहनीय प्रगति की है। केंद्रीय और राज्य वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि का उपयोग विकास कार्यों में प्रभावी ढंग से किया गया। ऑनलाइन भुगतान प्रणाली और सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित किया गया। यदि पिछले 09 वर्षों की उपलब्धियों को समग्र रूप में देखा जाए तो पंचायती राज विभाग द्वारा केवल योजनाओं का क्रियान्वयन ही नहीं किया गया, बल्कि ग्रामीण जीवन में व्यापक परिवर्तन लाने का कार्य हुआ है। 58 अन्त्येष्टि स्थल, 106 पंचायत भवन, 491 सामुदायिक शौचालय, 2.22 लाख से अधिक व्यक्तिगत शौचालय और 78 जन सेवा केंद्र जैसी उपलब्धियां इस प्रगति को मूर्त रूप देती हैं। यह केवल आंकड़े नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की बदलती तस्वीर के प्रतीक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इन उपलब्धियों ने लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, सुशासन, सम्मानजनक जीवन, प्रशासनिक पहुंच और सामाजिक विकास को नई ऊंचाई दी है। पंचायती राज विभाग की यह प्रगति 'सशक्त पंचायत, समृद्ध गांव की अवधारणा को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। निश्चित रूप से पिछले 09 वर्षों में जनपद लखनऊ में पंचायती राज विभाग की प्रगति उल्लेखनीय, बहुआयामी और प्रेरणादायी रही है। आने वाले समय में डिजिटल पंचायत, स्मार्ट ग्राम और आत्मनिर्भर गांव की अवधारणा के साथ यह प्रगति और नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगी।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 23:44:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जन शिक्षण संस्थान ने भानपुर में निकाली भव्य स्वच्छता जागरूकता रैली</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले केनगर पंचायत द्वारा जन शिक्षण संस्थान भानपुर के तत्वावधान में आज भानपुर कस्बे में एक विशाल 'स्वच्छता जागरूकता रैली' का आयोजन किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> इस रैली का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस में स्वच्छता के प्रति चेतना जगाना और उन्हें अपने आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा रखने के लिए प्रेरित करना था। ​रैली का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ भाजपा नेता नितेश शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर किया।हरी झंडी मिलने के पश्चात रैली जन शिक्षण संस्थान के प्रांगण से शुरू होकर भानपुर कस्बे के मुख्य बाजारों, चौराहों और आवासीय बस्तियों से गुजरी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> रैली में शामिल संस्थान के स्वयंसेवकों,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184170/jan-shikshan-sansthan-organized-a-grand-cleanliness-awareness-rally-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260727-wa0079.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले केनगर पंचायत द्वारा जन शिक्षण संस्थान भानपुर के तत्वावधान में आज भानपुर कस्बे में एक विशाल 'स्वच्छता जागरूकता रैली' का आयोजन किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> इस रैली का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस में स्वच्छता के प्रति चेतना जगाना और उन्हें अपने आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा रखने के लिए प्रेरित करना था। ​रैली का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ भाजपा नेता नितेश शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर किया।हरी झंडी मिलने के पश्चात रैली जन शिक्षण संस्थान के प्रांगण से शुरू होकर भानपुर कस्बे के मुख्य बाजारों, चौराहों और आवासीय बस्तियों से गुजरी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> रैली में शामिल संस्थान के स्वयंसेवकों, छात्र-छात्राओं एवं अध्यापकों ने हाथों में स्वच्छता संदेश लिखी पट्टिकाएँ और बैनर लेकर भाग लिया। इस दौरान लोगों ने 'स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत', 'गंदगी भगाओ, देश बचाओ' और 'अपना शहर साफ हो, इसमें सबका हाथ हो' जैसे गगनभेदी नारे लगाकर पूरे कस्बे को स्वच्छता का संदेश दिया ​रैली को रवाना करने से पूर्व आयोजित स्वच्छता संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि समाजसेवी नितेश शर्मा ने स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा ​स्वच्छता केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का परम कर्तव्य है। यदि हमारा परिवेश स्वच्छ रहेगा, तो बीमारियाँ दूर रहेंगी और एक स्वस्थ समाज का निर्माण होगा। जन शिक्षण संस्थान द्वारा भानपुर में आयोजित यह रैली सराहनीय कदम है, जिससे स्थानीय लोगों में जागरूकता फैलेगी। ​</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने कस्बावासियों से अपील की कि वे अपने घरों का कचरा सड़क पर न फेंककर कूड़ेदान में ही डालें और प्लास्टिक के उपयोग से बचें।जन शिक्षण संस्थान के डायरेक्टर अजय उपाध्याय ने बताया कि संस्थान कौशल विकास के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">समय-समय पर इस प्रकार के सामाजिक अभियानों का आयोजन कर जन-सामान्य को जागरूक किया जाता रहेगा। ​इस अवसर पर जन शिक्षण संस्थान की समन्वय अरुण कुमार मिश्र, अर्चना शुक्ल, विद्यावती, अपूर्वा, आकाश चौधरी, बाबूराम चौरसिया, विपिन कुमार, रेशमा, प्रेमा, माया देवी, नीलम, अंजू , संजू, रंजना,  मंजू, प्रमिला, खुशबू, प्रदीप, कृष्ण गोपाल, संजय कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं मौजूद रही।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> रैली का समापन पुनः संस्थान प्रांगण में स्वच्छता शपथ के साथ हुआ, जहाँ सभी उपस्थित लोगों ने अपने आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया।</div></div><div class="yj6qo"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 17:04:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मलिहाबाद: प्रधान का कार्यकाल खत्म, सचिव और ब्लॉक अधिकारियों की लापरवाही से चाँदपुर गंदगी में डूबा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मलिहाबाद, लखनऊ। </strong>मलिहाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत सुरगौला के ग्राम चाँदपुर की स्थिति जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। गांव में जगह-जगह खुली नालियां, रास्तों पर फैली गंदगी और उगी झाड़ियां ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो गए हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम प्रधान से शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब प्रधान का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, जिसके</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183792/malihabad-pradhans-tenure-ends"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260719-wa0017.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मलिहाबाद, लखनऊ। </strong>मलिहाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत सुरगौला के ग्राम चाँदपुर की स्थिति जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। गांव में जगह-जगह खुली नालियां, रास्तों पर फैली गंदगी और उगी झाड़ियां ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो गए हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम प्रधान से शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब प्रधान का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, जिसके बाद सफाई व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे दिखाई दे रही है। आरोप है कि सफाईकर्मी मनमानी कर रहे हैं और नियमित सफाई नहीं की जा रही है, जिससे गांव में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने पंचायत सचिव पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सचिव गांव की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं और पंचायत का रुख करना भी पसंद नहीं करते। वहीं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों पर भी लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो निरीक्षण किया गया और न ही समस्या के समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम उठाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांव की बदहाल तस्वीरें यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि आखिर सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सफाई व्यवस्था और विकास कार्य धरातल पर क्यों दिखाई नहीं दे रहे हैं। यदि समय रहते नालियों की सफाई, झाड़ियों की कटाई और रास्तों की साफ-सफाई नहीं कराई गई तो बरसात के दौरान बीमारियों का खतरा और अधिक बढ़ सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि ग्राम चाँदपुर की स्थिति का तत्काल संज्ञान लेकर पंचायत सचिव, सफाई व्यवस्था और ब्लॉक स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा गांव में युद्धस्तर पर सफाई अभियान चलाकर लोगों को गंदगी और संभावित बीमारियों से राहत दिलाई जाए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 21:39:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बभनान मंडी में बदहाल शौचालय: दरवाजे गायब, गंदगी के बीच रखी पानी की टंकी, जिम्मेदार मौन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले केनगर पंचायत बभनान की नवीन सब्जी मंडी में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली अब एक गंभीर जनसमस्या का रूप लेती जा रही है। लाखों रुपये की लागत से विकसित की गई इस मंडी में जहां रोजाना सैकड़ों व्यापारी और ग्राहक पहुंचते हैं, वहीं मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव प्रशासनिक दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। खासकर मंडी परिसर में बने शौचालयों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोग उनका उपयोग करने से कतराने लगे हैं। मौके पर निरीक्षण के दौरान जो स्थिति सामने आई, वह बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है। शौचालयों के भीतर और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182786/bad-condition-of-toilet-in-babhnan-mandi-doors-missing-water"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260705-wa0084.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले केनगर पंचायत बभनान की नवीन सब्जी मंडी में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली अब एक गंभीर जनसमस्या का रूप लेती जा रही है। लाखों रुपये की लागत से विकसित की गई इस मंडी में जहां रोजाना सैकड़ों व्यापारी और ग्राहक पहुंचते हैं, वहीं मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव प्रशासनिक दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। खासकर मंडी परिसर में बने शौचालयों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोग उनका उपयोग करने से कतराने लगे हैं। मौके पर निरीक्षण के दौरान जो स्थिति सामने आई, वह बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है। शौचालयों के भीतर और बाहर चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। फर्श पर गंदा पानी भरा है, जिससे न केवल दुर्गंध फैल रही है बल्कि फिसलकर चोट लगने का खतरा भी बना हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जगह-जगह कूड़ा-करकट पड़ा हुआ है, जो लंबे समय से साफ-सफाई न होने का स्पष्ट संकेत देता है। शौचालयों की दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है, छत से सीलन टपक रही है और समुचित रखरखाव के अभाव में पूरी संरचना जर्जर होती जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन शौचालयों में अब तक दरवाजे तक नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में महिलाएं, बुजुर्ग और अन्य उपयोगकर्ता बेहद असहज और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि सामाजिक गरिमा और निजता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। वहीं, शौचालय परिसर में रखी पानी की टंकी भी गंदगी के बीच पड़ी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस टंकी से इस्तेमाल होने वाले पानी की स्वच्छता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे अस्वच्छ वातावरण में रखा पानी संक्रमण और बीमारियों का कारण बन सकता है। यह सीधे तौर पर आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। व्यापारियों ने बताया कि मंडी में प्रतिदिन सैकड़ों लोग आते हैं, लेकिन यहां शौचालय, और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। कई बार नगर पंचायत के अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत केवल कागजों में सफाई अभियान चलाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेती है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जल्द ही शौचालयों की मरम्मत, सफाई और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई तो वे आंदोलन और विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे। मंडी जैसे सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की अव्यवस्था न केवल नगर पंचायत की कार्यशैली पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आम जनता की बुनियादी जरूरतों को किस तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वच्छ भारत अभियान जैसे बड़े दावों के बीच इस तरह की तस्वीरें सरकारी दावों की सच्चाई उजागर करती हैं। इस संबंध में जब अधिशासी अधिकारी (ईओ) कीर्ति सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं, सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती ने बताया कि मामले की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। अब देखना यह होगा कि नगर पंचायत प्रशासन इस गंभीर समस्या को लेकर कब तक उदासीन बना रहता है और कब तक आम जनता को इस बदहाल व्यवस्था के बीच अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ेंगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 22:11:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डबल इंजन सरकार की योजनाओं से बदली पारा कला की तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>महराजगंज/रायबरेली: </strong>    करीब पांच हजार की आबादी और आठ मजरों वाली इस ग्राम पंचायत ने बीते पांच वर्षों में विकास की नई इबारत लिखी है। ग्राम प्रधान गीता के नेतृत्व में गांव में सड़क, नाली, पेयजल, शिक्षा, स्वच्छता और जनकल्याण से जुड़े अनेक कार्य कराए गए हैं, जिनकी सराहना ग्रामीण खुलकर कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">            आपको बता दें कि, ग्राम पंचायत पारा कला में पारा कला, पूरे सर्वजीत, दखिनहा, पूरे मन्नू, पूरे धौकल, कूटी, पूरे बजरंगी और पूरे अर्जुनहा सहित कुल आठ गांव शामिल हैं। यहां लगभग 1950 मतदाता निवास करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि, वर्तमान कार्यकाल में गांव</div>
<div style="text-align:justify;">       </div>
<div style="text-align:justify;">       </div>
<div style="text-align:justify;">       </div>
<div style="text-align:justify;">      </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;">      </div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182471/picture-of-mercury-changed-due-to-double-engine-government-schemes"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260626-wa0306.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>महराजगंज/रायबरेली: </strong>  करीब पांच हजार की आबादी और आठ मजरों वाली इस ग्राम पंचायत ने बीते पांच वर्षों में विकास की नई इबारत लिखी है। ग्राम प्रधान गीता के नेतृत्व में गांव में सड़क, नाली, पेयजल, शिक्षा, स्वच्छता और जनकल्याण से जुड़े अनेक कार्य कराए गए हैं, जिनकी सराहना ग्रामीण खुलकर कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">      आपको बता दें कि, ग्राम पंचायत पारा कला में पारा कला, पूरे सर्वजीत, दखिनहा, पूरे मन्नू, पूरे धौकल, कूटी, पूरे बजरंगी और पूरे अर्जुनहा सहित कुल आठ गांव शामिल हैं। यहां लगभग 1950 मतदाता निवास करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि, वर्तमान कार्यकाल में गांव के विकास को नई गति मिली है और अनेक वर्षों से लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">       प्रधान प्रतिनिधि हरिशंकर ने बातचीत के दौरान बताया कि, उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की "सबका साथ, सबका विकास" की भावना को आधार बनाकर कार्य किया है। उन्होंने कहा कि, ग्राम पंचायत में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के पात्र लोगों तक पहुंचाया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">       उन्होंने बताया कि, बीते पांच वर्षों में ग्राम पंचायत में लगभग 500 मीटर इंटरलॉकिंग सड़क, 500 मीटर खड़ंजा, 400 मीटर पक्की नालियों का निर्माण कराया गया। इसके साथ ही प्राथमिक विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों का कायाकल्प, पंचायत भवन की मरम्मत, अंत्येष्टि स्थल (शवदाह गृह) का निर्माण तथा कूड़ाघर का निर्माण भी कराया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">       प्रधान प्रतिनिधि ने बताया कि, जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्राम पंचायत में पेयजल आपूर्ति के लिए पानी की टंकी का निर्माण कराया गया, जिससे ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। उन्होंने कहा कि, ग्राम पंचायत में निर्मित एमडीएम शेड (मिड-डे मील शेड) आज भी विकास का प्रतीक माना जाता है। इस भव्य परियोजना का उद्घाटन मंडलायुक्त रोशन जैकब एवं तत्कालीन जिलाधिकारी हर्षिता माथुर द्वारा किया गया था, जिसकी चर्चा आज भी ग्रामीण गर्व के साथ करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">      उन्होंने बताया कि, ग्राम पंचायत के लगभग 100 पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाया गया। वहीं करीब 200 वृद्ध, विधवा एवं दिव्यांग लाभार्थियों को पेंशन योजनाओं से जोड़ा गया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत लगभग 3000 मीटर कच्चे मार्गों एवं अन्य विकास कार्यों को पूरा कराया गया। इसके अतिरिक्त 400 व्यक्तिगत शौचालय तथा एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराकर स्वच्छता अभियान को मजबूती प्रदान की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">        हरिशंकर ने कहा, "उनका उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि गांव का समग्र विकास रहा है। सरकार की प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचे, इसी सोच के साथ पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता से कार्य किया गया है। आगे भी ग्राम पंचायत के सर्वांगीण विकास और जनता की सेवा के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।"</div>
<div style="text-align:justify;">      ग्रामीणों का कहना है कि, विकास कार्यों के चलते पारा कला ग्राम पंचायत आज क्षेत्र की अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है। बेहतर सड़कें, सुदृढ़ जल निकासी व्यवस्था, शिक्षा संस्थानों का कायाकल्प, स्वच्छता अभियान और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने गांव की तस्वीर बदल दी है। यही कारण है कि, पारा कला आज महराजगंज विकास खंड की अग्रणी ग्राम पंचायतों में अपनी अलग पहचान बना चुकी है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:23:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी की 12 वर्षों की सत्ता और आम आदमी: वादे, बदलाव और ज़मीनी हकीकत</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181933/modis-12-years-in-power-and-common-mans-promises-change"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(3).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा बढ़ाया। उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन मिला। स्वच्छ भारत मिशन ने ग्रामीण शौचालय कवरेज को तेज़ी से बढ़ाया। आयुष्मान भारत योजना ने 5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा गरीब परिवारों तक पहुंचाया। जनधन खातों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ाया और कोविड काल में डीबीटी से करोड़ों लोगों को सीधी मदद मिली। </p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका मतलब यह हुआ कि सरकारी लाभ के लिए बिचौलियों पर निर्भरता घटी। बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट का दायरा बढ़ा, जिससे UPI आज छोटे दुकानदार से लेकर ठेले वाले तक इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>
<p><br />                हम बात करें इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल भारत की तो इसमें भी प्रगति हुई है और कई सुधार अभी भी बाकी हैं। सड़क, रेल, हवाई अड्डे और एक्सप्रेसवे के निर्माण में तेज़ी आई। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, अटल टनल, और नए वंदे भारत ट्रेनें आम यात्रियों के सफर को तेज़ और सुरक्षित बनाने की कोशिश हैं। डिजिटल इंडिया के तहत इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच गांवों तक बढ़ी। इससे शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी सेवाएं मोबाइल पर आ गईं।</p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका फायदा समय की बचत और लागत में कमी के रूप में दिखा। लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी इंटरनेट की गुणवत्ता और बिजली की आपूर्ति असमान बनी हुई है। हालांकि कर और अर्थव्यवस्था में बदलाव तो हुआ है लेकिन महंगाई के कारण अभी उतनी राहत महसूस नहीं हुई है । GST लागू होने से अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एकजुट हुई। छोटे व्यापारियों के लिए शुरू में जटिलता बढ़ी, लेकिन धीरे-धीरे फाइलिंग आसान हुई। नोटबंदी 2016 का मकसद काला धन और नकली नोट पर चोट था, लेकिन इसका तत्काल असर छोटे कारोबार और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा। महंगाई, बेरोजगारी और निजी निवेश की रफ्तार आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता बनी रही। कोरोना के बाद रिकवरी तेज़ रही, लेकिन असंगठित क्षेत्र में रोज़गार और आय अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आई है।</p>
<p><br /> राजनीतिक संवाद और छवि की बात की जाये तो इसमें मोदी सरकार का कोई जोड़ नहीं है। मोदी की सरकार ने सीधे संवाद पर ज़ोर दिया। मन की बात, सोशल मीडिया और रैलियों के ज़रिए प्रधानमंत्री खुद जनता से जुड़े रहे। “सबका साथ, सबका विकास” का नारा केंद्र में रहा। विरोधियों का आरोप रहा कि आलोचना को जगह कम मिली और मीडिया पर नियंत्रण बढ़ा। आम आदमी के लिए इसका असर यह हुआ कि सरकार की योजनाओं की जानकारी तेज़ी से पहुंची, लेकिन विपरीत राय और स्थानीय समस्याएं कई बार राष्ट्रीय बहस में जगह नहीं बना पाईं।</p>
<p><br /> अलग हम इसकी ज़मीनी हकीकत जानें और यह पता करें कि क्या बदला? तो 12 साल में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सरकार सीधे नागरिक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पहले जहां फाइलों और दफ्तरों में काम अटकता था, अब ऑनलाइन पोर्टल और ऐप्स से काम होता है। गरीबों के लिए रसोई गैस, शौचालय, बिजली और बैंक खाता पहले से ज्यादा सुलभ हुए हैं। दूसरी तरफ, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की आय और शिक्षा-स्वास्थ्य की गुणवत्ता जैसे मुद्दे अभी भी चुनौती हैं। मध्यम वर्ग टैक्स और जीवनयापन की लागत को लेकर दबाव महसूस करता है। ग्रामीण भारत में कृषि पर निर्भरता और मौसम की मार अब भी जीवन को अनिश्चित रखती है।</p>
<p>मोदी की 12 साल की सत्ता ने आम आदमी की ज़िंदगी में बुनियादी सुविधाओं और डिजिटल पहुंच के मामले में ठोस बदलाव लाए हैं। योजनाओं का लाभ पहले से ज्यादा पारदर्शी हुआ है। लेकिन रोज़गार, महंगाई और असमानता जैसे संरचनात्मक मुद्दे बने हुए हैं। आम आदमी के लिए यह कार्यकाल सुविधाओं में बढ़ोतरी और आर्थिक दबाव दोनों का मिश्रण रहा है। 2026 की सियासत इस बात पर टिकी होगी कि क्या सरकार इन बदलावों को स्थायी रोज़गार और आय में बदल पाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:41:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सामुदायिक शौचालय में 3 साल से लटक रहा ताला, लोगों को परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>गैसड़ी/बलरामपुर। </strong>स्वच्छ भारत मिशन को नगर पंचायत गैसड़ी में ठेंगा दिखाया जा रहा है। नगर पंचायत गैसड़ी के वार्ड नंबर 6 में ग्राम सभा स्तर से बना सामुदायिक शौचालय पिछले 3 वर्षों से ताले में बंद पड़ा है। नगर पंचायत बनने के बाद यह शौचालय नगर पंचायत को हैंडओवर हो गया था, लेकिन 3 साल बीतने के बाद भी इसका लाभ जनता को नहीं मिला। नतीजा, वार्डवासी आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। गुरुवार को 'हिन्दुस्तान' संवाददाता के मौके पर पहुंचने पर दर्जनों लोगों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की। ग्रामीणों का आरोप है कि नगर पंचायत के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179272/lock-hanging-in-community-toilet-for-3-years-causes-problems"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260514-wa0534.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>गैसड़ी/बलरामपुर। </strong>स्वच्छ भारत मिशन को नगर पंचायत गैसड़ी में ठेंगा दिखाया जा रहा है। नगर पंचायत गैसड़ी के वार्ड नंबर 6 में ग्राम सभा स्तर से बना सामुदायिक शौचालय पिछले 3 वर्षों से ताले में बंद पड़ा है। नगर पंचायत बनने के बाद यह शौचालय नगर पंचायत को हैंडओवर हो गया था, लेकिन 3 साल बीतने के बाद भी इसका लाभ जनता को नहीं मिला। नतीजा, वार्डवासी आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। गुरुवार को 'हिन्दुस्तान' संवाददाता के मौके पर पहुंचने पर दर्जनों लोगों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की। ग्रामीणों का आरोप है कि नगर पंचायत के कर्मचारी कभी-कभार आते हैं, शौचालय की फोटो खींचकर चले जाते हैं, लेकिन आम जनता के लिए ताला नहीं खोलते,दिव्यांग नसीम ने बताया, "शौचालय में दिव्यांगों के लिए अलग सीट लगी है, पर 3 साल से बंद है। खुले में जाना बहुत मुश्किल होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">" खातून निशा बोलीं, "जब से शौचालय बना है, तब से बंद है। हम महिलाओं को खुले में जाना मजबूरी है, वार्ड नंबर 6 के सभासद सबूर ने कहा कि शौचालय बनने के बाद से ही बंद है। नगर पंचायत में कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वार्ड 13 के सभासद प्रतिनिधि करीमुल्ला ने बताया, "3 वर्ष पहले यह शौचालय नगर पंचायत को हैंडओवर हुआ था। इसका पेमेंट भी हो रहा है, फिर भी ताला लटक रहा है। 1076 और नगर पंचायत में कंप्लेंट की, पर कार्रवाई नहीं हुई।मोहम्मद इस्माइल, जब्बार, ननके, दिलशाद, शब्बीर, राम शंकर, हुसैनी समेत दर्जनों लोगों ने प्रदर्शन कर जिलाधिकारी बलरामपुर से बंद शौचालय को तुरंत चालू कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं इस संबंध में अधिशासी अधिकारी अवनीश कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। वार्डवासियों ने सवाल उठाया कि जब 3 साल से शौचालय बंद है तो इसका पेमेंट किस आधार पर हो रहा है? जनता को मूलभूत सुविधा से वंचित रखना नगर पंचायत की बड़ी लापरवाही है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 21:46:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कानून हैं, योजनाएं हैं, फिर भी सीवर में मौतें — आखिर जिम्मेदार कौन?</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शहरों की चमक जब स्वच्छता के दावों से आत्ममुग्ध होकर दमकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी क्षण उसी चमक के भीतर छिपा अंधकार चुपचाप इंसानी जिंदगियों को निगलता चला जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">की शुरुआत में स्वच्छता के शिखर पर खड़े इंदौर में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चोइथराम मंडी गेट के पास एक सीवर चैंबर दो जिंदगियों का अंत बन गया—करण यादव और अजय डोडी जहरीली गैसों के कारण दम घुटने से काल के गाल में समा गए। बिना किसी सुरक्षा उपकरण के वे उस घातक गहराई में उतरे</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">एक के अचेत होते ही दूसरा उसे बचाने भीतर गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर दोनों ही वापस</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177486/there-are-laws-there-are-plans-yet-deaths-in-sewers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/download-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शहरों की चमक जब स्वच्छता के दावों से आत्ममुग्ध होकर दमकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी क्षण उसी चमक के भीतर छिपा अंधकार चुपचाप इंसानी जिंदगियों को निगलता चला जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">की शुरुआत में स्वच्छता के शिखर पर खड़े इंदौर में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चोइथराम मंडी गेट के पास एक सीवर चैंबर दो जिंदगियों का अंत बन गया—करण यादव और अजय डोडी जहरीली गैसों के कारण दम घुटने से काल के गाल में समा गए। बिना किसी सुरक्षा उपकरण के वे उस घातक गहराई में उतरे</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">एक के अचेत होते ही दूसरा उसे बचाने भीतर गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर दोनों ही वापस नहीं लौट सके। यह घटना महज एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस विफल व्यवस्था की कठोर सच्चाई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अपने सबसे कमजोर कर्मियों को सुरक्षित रखने में बार-बार असफल साबित हो रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पीड़ा की यह आग अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि कुछ ही सप्ताह बाद </span>15 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को हरियाणा के नूह जिले के फिरोजपुर झिरका में वही भयावह दृश्य फिर दोहराया गया। पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग के ठेकेदार ने तीन मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सीवर में उतार दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां जहरीली गैसों ने दो जीवन—राजेंद्र कुमार और अब्दुल कलाम—को निगल लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि तीसरा मजदूर गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचा। इस तरह की लगातार होती घटनाएं यह साफ संकेत देती हैं कि यह कोई अपवाद नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक खतरनाक और स्थापित होती जा रही व्यवस्था बन चुकी है। देश के अलग-अलग कोनों में फैलती यह मौतें बार-बार यह कठोर सवाल खड़ा करती हैं कि आखिर कब तक गरीब मजदूर अपनी जान की कीमत पर हमारी स्वच्छता की जिम्मेदारी ढोते रहेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संवैधानिक अधिकारों और मानव गरिमा की रक्षा के दावों के बीच भी इन घटनाओं की अनदेखी संभव नहीं रह सकी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इंदौर मामले पर </span>5 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">और नूह मामले पर </span>24 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को स्वतः संज्ञान लेते हुए अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का हवाला देकर स्पष्ट किया कि बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर में उतरना मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। रिपोर्ट में सुरक्षा उपकरणों की कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठेकेदारी व्यवस्था की खामियां और मुआवजे की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया। यह हस्तक्षेप दिखाता है कि यह समस्या केवल तकनीकी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि नैतिक और प्रशासनिक विफलता का परिणाम भी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सांख्यिकीय सच्चाइयों की परतें जैसे-जैसे खुलती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह संकट और अधिक भयावह रूप लेता है। सफाई कर्मचारी आंदोलन के अनुसार </span>2014 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच </span>859 <span lang="hi" xml:lang="hi">सफाई कर्मियों की जान सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में गई। </span>2017 <span lang="hi" xml:lang="hi">से मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक </span>622 <span lang="hi" xml:lang="hi">मौतें दर्ज हुईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">के पहले चार महीनों में ही </span>50 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक मौतें हो चुकी हैं। सरकारी आंकड़े अक्सर कम बताते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि वास्तविकता कहीं अधिक कठोर है। हर साल औसतन </span>80 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>130 <span lang="hi" xml:lang="hi">सफाई कर्मी हाइड्रोजन सल्फाइड और मीथेन जैसी जहरीली गैसों से दम घुटने के कारण जान गंवा रहे हैं। ये आंकड़े केवल संख्या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन परिवारों की टूटी हुई कहानियां हैं जिन्होंने अपने अपनों को हमेशा के लिए खो दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कानूनों और न्यायिक आदेशों की मौजूदगी के बावजूद जमीन पर बदलाव न दिखना इस व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना है। </span>2013 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मैनुअल स्कैवेंजिंग निषेध और पुनर्वास अधिनियम इस अमानवीय प्रथा पर रोक लगाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मैकेनाइज्ड सफाई अनिवार्य करते हुए मृतक परिवारों को </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। फिर भी इंदौर और नूह मामलों में मुआवजे की घोषणा के बावजूद सवाल बना रहता है कि क्या केवल आर्थिक सहायता पर्याप्त है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">ठेकेदारों की लापरवाही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा उपकरणों की कमी और कमजोर निगरानी व्यवस्था इन कानूनों को कागजों तक सीमित कर देती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घोषित नीतियों और धरातल की सच्चाई के बीच की दूरी लगातार बढ़ती जा रही है। स्वच्छ भारत मिशन-</span>2 <span lang="hi" xml:lang="hi">और ‘नामास्ते’ जैसी योजनाओं में मैकेनाइज्ड सफाई तथा सफाई कर्मियों के कल्याण पर विशेष जोर दिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके लिए हजारों करोड़ रुपये भी आवंटित किए गए हैं। इसके बावजूद इंदौर जैसे शहरों में आधुनिक मशीनें होते हुए भी उनका नियमित उपयोग नहीं किया जाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि नूह जैसे क्षेत्रों में ठेकेदार जिम्मेदारी से बच निकलते हैं। सस्ती मजदूरी के लालच में मानव जीवन को जोखिम में डाल दिया जाता है और इस पूरे तंत्र का सबसे भारी बोझ दलित समुदाय पर पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आज भी सामाजिक भेदभाव और उपेक्षा झेल रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस संकट के समाधान की मांग अब केवल आवश्यकता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अनिवार्यता बन चुकी है। अब समय है कि केवल घोषणाओं से आगे बढ़कर ठोस और कठोर कदम उठाए जाएं। हर शहर में </span>100% <span lang="hi" xml:lang="hi">मैकेनाइज्ड सफाई अनिवार्य हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि कोई मजदूर जान जोखिम में डालकर सीवर में न उतरे। ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई—भारी जुर्माना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्लैकलिस्टिंग और कानूनी दंड—तुरंत लागू किया जाए। प्रत्येक मृत्यु पर </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख रुपये मुआवजा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवार के एक सदस्य को नौकरी और बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए। साथ ही सफाई कर्मियों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीमा और प्रशिक्षण अनिवार्य हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि उनकी सुरक्षा और सम्मान वास्तविक रूप से सुनिश्चित हो सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह स्थिति हमारी सामाजिक चेतना और जिम्मेदारी पर सीधा प्रश्न उठाती है कि जब हर महीने सफाई कर्मी जान गंवा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो स्वच्छता अभियान वास्तव में किसके लिए है। इंदौर जैसे </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छता के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीक शहर और नूह जैसे क्षेत्र भी इस त्रासदी से अछूते नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो छोटे शहरों और गांवों की स्थिति सहज ही समझी जा सकती है। यदि इन अज्ञात नायकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हमारी उपलब्धियां खोखली साबित होंगी। अब समय है कि नारों से आगे बढ़कर वास्तविक कदम उठाए जाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्यथा हर मौत हमें याद दिलाती रहेगी कि स्वच्छता की कीमत किसी और की जिंदगी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:34:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेंशनधारी दरोगा ने बेटे को बीपीएल सूची में डालकर किया फ्राड निकाला शौचालय का पैसा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> जिले केसाऊँघाट विकास खण्ड की तरेता ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है बल्कि मनरेगा भ्रष्टाचार का जिन्न परत दर परत खुलता जा रहा है जिसके क्रम में ही प्रधान राम सुभाव का एक और शौचालय घोटाला सामने आया है मिली जानकारी के अनुसार साऊँघाट विकास खण्ड की ग्राम पंचायत तरेता के प्रधान राम सुभाव पेंशनधारी दरोगा हैं जिन्होनें धोखाधड़ी करके अपने लड़के को बीपीएल श्रेणी में डलवाकर शौचालय का पैसा हजम कर लिया था।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सेवानिवृत्त दरोगा व वर्तमान प्रधान राम सुभाव द्वारा मात्र शौचालय का पैसा हजम नहीं किया गया है बल्कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177400/pensioner-inspector-committed-fraud-by-putting-his-son-in-bpl"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260427-wa0052.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> जिले केसाऊँघाट विकास खण्ड की तरेता ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है बल्कि मनरेगा भ्रष्टाचार का जिन्न परत दर परत खुलता जा रहा है जिसके क्रम में ही प्रधान राम सुभाव का एक और शौचालय घोटाला सामने आया है मिली जानकारी के अनुसार साऊँघाट विकास खण्ड की ग्राम पंचायत तरेता के प्रधान राम सुभाव पेंशनधारी दरोगा हैं जिन्होनें धोखाधड़ी करके अपने लड़के को बीपीएल श्रेणी में डलवाकर शौचालय का पैसा हजम कर लिया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेवानिवृत्त दरोगा व वर्तमान प्रधान राम सुभाव द्वारा मात्र शौचालय का पैसा हजम नहीं किया गया है बल्कि अपने लड़के के साथ मिलकर घोखाधड़ी करके बीपीएल सूची में  नाम सम्मलित कराया गया है क्योंकि राम सुभाव व उनका परिवार सम्पन्न श्रेणी में है जो कि बीपीएल श्रेणी में कदापि सम्मलित नहीं हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसा नहीं कि भ्रष्टाचार केवल प्रधान रामसुभाव व उनके परिवार द्वारा किया गया है बल्कि इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन सेक्रेटरी की भी मिलीजुली भूमिका है जिनके सहयोग से इस भ्रष्टाचार की रूप रेखा तय हुई। यद्यपि प्रधान के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ हो चुका है और हड़पे गए धन से शौचालय निर्माण भी शुरु हो गया है परन्तु सुविधा सम्पन्न होते हुए भी अपने परिवार का नाम बीपीएल सूची में अंकित करवाना और प्रकरण में तत्कालीन सेक्रेटरी की संलिप्तता पर कार्यवाही अभी भी शेष है है</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:43:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शहर की सेहत ठीक नहीं—हमारी आदतें इसका रोग हैं</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शहरों की असल तस्वीर उनकी ऊंची इमारतें नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बिखरी हुई नागरिक आदतें बयान करती हैं। भागती सुबह में उड़ता कचरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लाल बत्ती को रौंदती गाड़ियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथों पर जमे वाहन और सार्वजनिक स्थानों के प्रति बेपरवाही—ये सब उस मानसिकता का खुला बयान हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अधिकार तो चाहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर कर्तव्य से बचती है। घर की चमक और बाहर की गंदगी का यह तीखा विरोध अब हमें झकझोरता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि हमने इसे सामान्य मान लिया है। यहीं सिविक सेंस दम तोड़ता है। हम व्यवस्था से उम्मीदें ऊंची रखते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसे बनाने में अपनी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176703/the-city-is-not-in-good-health%E2%80%94our-habits-are-its"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas16.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शहरों की असल तस्वीर उनकी ऊंची इमारतें नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बिखरी हुई नागरिक आदतें बयान करती हैं। भागती सुबह में उड़ता कचरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लाल बत्ती को रौंदती गाड़ियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथों पर जमे वाहन और सार्वजनिक स्थानों के प्रति बेपरवाही—ये सब उस मानसिकता का खुला बयान हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अधिकार तो चाहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर कर्तव्य से बचती है। घर की चमक और बाहर की गंदगी का यह तीखा विरोध अब हमें झकझोरता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि हमने इसे सामान्य मान लिया है। यहीं सिविक सेंस दम तोड़ता है। हम व्यवस्था से उम्मीदें ऊंची रखते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसे बनाने में अपनी जिम्मेदारी से कन्नी काट लेते हैं। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में भी यही सोच इस समस्या को जिंदा रखे हुए है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दैनिक जीवन में सिविक सेंस की कमी केवल दिखाई नहीं देती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आंकड़ों में भी साफ दर्ज है। देश के शहरी इलाके हर दिन लगभग</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>1.62 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख टन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नगरपालिका कचरा पैदा करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका बड़ा हिस्सा अब भी लैंडफिल या खुले में जा पहुंचता है—यह बताता है कि स्रोत पर अलग करना और सही निस्तारण जैसी बुनियादी आदतें अब भी हाशिए पर हैं। ट्रैफिक के मोर्चे पर स्थिति और भयावह है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>2024 <span lang="hi" xml:lang="hi">में सड़क दुर्घटनाओं में </span>1.77 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख से अधिक मौतें</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दर्ज हुईं—यानी औसतन रोज</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>485 <span lang="hi" xml:lang="hi">जिंदगियां खत्म। ओवरस्पीडिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हेलमेट और सीट बेल्ट की अनदेखी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गलत पार्किंग जैसी लापरवाहियां इस त्रासदी की मुख्य वजह रहीं। सबसे चिंताजनक वह सोच है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इन आंकड़ों के पीछे छिपी है—“दूसरे नहीं मानते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो मैं क्यों मानूं</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">यही मानसिकता सिविक सेंस को भीतर से खोखला कर रही है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समस्या सतह पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी परवरिश और सामाजिक ढांचे में जमी है। स्कूलों में सिविक सेंस सैद्धांतिक रह जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवहारिक अभ्यास लगभग गायब है। बच्चे किताबों में अनुशासन पढ़ते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर घर और सड़कों पर उसका उल्टा देखते हैं—यहीं से विरोधाभास जन्म लेता है। सफाई को “किसी और का काम” मानना और सार्वजनिक संपत्ति से दूरी इस कमी को और गहरा करते हैं। कानून तो हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर उनका प्रवर्तन न निरंतर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न सख्त</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">जुर्माना अपवाद बनकर रह जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदत नहीं बदलती। विडंबना यह कि विदेश में नियमों का पालन करने वाला नागरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने देश में लौटते ही वही पुरानी लापरवाही दोहराता है—यही दोहरापन बदलाव की सबसे बड़ी बाधा है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके दुष्परिणाम केवल दृश्य गंदगी तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थव्यवस्था और पर्यावरण—तीनों पर भारी पड़ते हैं। कचरे और अस्वच्छता से फैलने वाली बीमारियां लाखों लोगों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर गरीबों और बच्चों को प्रभावित कर रही हैं। सड़क दुर्घटनाएं परिवारों को एक झटके में आर्थिक और भावनात्मक संकट में धकेल देती हैं। पर्यावरणीय नुकसान भी गहरा है—देश की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>296 <span lang="hi" xml:lang="hi">नदियों के खंड प्रदूषित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें प्लास्टिक और औद्योगिक अपशिष्ट की बड़ी भूमिका है। कई शहरों में हवा खतरनाक स्तर पर बनी हुई है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">खुले में कचरा जलाना इसे और विषैला बनाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि अव्यवस्थित निपटान भूजल को भी दूषित करता है। इसका असर पर्यटन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेश और शहरों की छवि पर साफ दिखता है। जब नागरिक जिम्मेदारी से मुंह मोड़ते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो विकास की रफ्तार भी थमने लगती है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी स्तर पर पहलें कमजोर नहीं रहीं—स्वच्छ भारत मिशन-शहरी </span>2.0 <span lang="hi" xml:lang="hi">ने ढांचे को मजबूती दी है और नतीजे भी दिखने लगे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रसंस्करण क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई शहरों में डोर-टू-डोर संग्रह</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>90%+ <span lang="hi" xml:lang="hi">कवरेज</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंच चुका है और लीगेसी वेस्ट की सफाई ने रफ्तार पकड़ी है। इंदौर लगातार स्वच्छ सर्वेक्षण में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नंबर</span> 1 <span lang="hi" xml:lang="hi">बना हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि सूरत और नवी मुंबई जैसे शहर व्यवहार और प्रबंधन—दोनों के सफल मॉडल पेश कर रहे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">के नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों ने स्रोत पर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>4-<span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रीम सेग्रिगेशन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को अनिवार्य कर एक स्पष्ट दिशा भी तय कर दी है। फिर भी तस्वीर अधूरी है—उपलब्धियों के बावजूद आम नागरिक के व्यवहार में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आता। साफ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन निर्णायक बदलाव मानसिकता बदलने से ही आएगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक अनुभव बताते हैं कि सिविक सेंस कानून से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति से बनता है। जापान में बच्चे स्कूल की सफाई खुद करते हैं—सार्वजनिक जगह गंदा करना वहां अस्वीकार्य है। सिंगापुर ने सख्त प्रवर्तन से ऐसी आदतें विकसित कीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अब स्वाभाविक व्यवहार हैं। भारत में भी इंदौर और सूरत जैसे शहरों ने शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामुदायिक निगरानी और कड़े अमल के संयोजन से उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं। अब जरूरी है कि स्कूलों में सिविक सेंस को पाठ्य विषय नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनिवार्य व्यवहारिक अभ्यास बनाया जाए</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">युवाओं को नेतृत्व मिले और तकनीक आधारित निगरानी मजबूत हो। वास्तविक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थायी बदलाव तभी संभव है जब इसकी शुरुआत परिवार और शिक्षा—दोनों स्तरों से एक साथ हो।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समाधान किसी बड़े सूत्र में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि निरंतरता और व्यक्तिगत जिम्मेदारी की ठोस आदतों में छिपा है। कूड़ा डस्टबिन में डालना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिग्नल पर रुकना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथ खाली रखना और सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान—ये छोटे कदम जब सामूहिक व्यवहार बनते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी बड़ा बदलाव आकार लेता है। व्यवस्था को भी ढील नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दृढ़ता चाहिए—दोहराए उल्लंघनों पर लाइसेंस निलंबन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनिवार्य सामुदायिक सेवा जैसे कड़े प्रावधान लागू हों। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिम्मेदार आचरण को पहचान और प्रोत्साहन मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि सकारात्मक उदाहरण फैलें। मीडिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एनजीओ और स्थानीय समुदाय मिलकर लगातार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लक्ष्य-आधारित जागरूकता अभियान चलाएं—तभी बदलाव टिकाऊ बनेगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब मुद्दा “कब” नहीं</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">कैसे” का है। साफ सड़कें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुशासित ट्रैफिक और जिम्मेदार नागरिकता किसी एक योजना की देन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामूहिक चेतना की पहचान हैं। आंकड़े साफ चेतावनी दे रहे हैं—हर दिन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>1.62 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख टन कचरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सालाना</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>1.77 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख सड़क मौतें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और लगातार प्रदूषित होती नदियां। इसके बावजूद अगर हम बदलाव टालते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो समस्या ही हमारी आदत बन जाएगी। विकसित भारत का सपना नीतियों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे रोजमर्रा के व्यवहार से साकार होगा। सिविक सेंस कोई विचार भर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हमारी पहचान बनना चाहिए—और इसकी शुरुआत आज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे हर छोटे जिम्मेदार कदम से होनी चाहिए।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/176703/the-city-is-not-in-good-health%E2%80%94our-habits-are-its</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:26:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>स्वच्छ भारत मिशन को धता बता रहा मझगवा का सामुदायिक शौचालय, गंदगी से परेशान ग्रामीण</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सीतामढ़ी। </strong>विकासखंड डीघ के ग्राम पंचायत मझगवा में स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित सामुदायिक शौचालय इन दिनों बदहाली का शिकार है। सरकार जहां एक ओर गांवों को खुले में शौच से मुक्त और स्वच्छ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं मझगवा का यह शौचालय भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों के अनुसार शौचालय परिसर में चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे वहां जाना भी जोखिम भरा हो गया है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ लोगों ने बताया कि शौचालय में नियुक्त केयरटेकर कभी भी नियमित रूप</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175122/majhgawas-community-toilet-is-defying-the-swachh-bharat-mission-villagers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/44.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सीतामढ़ी। </strong>विकासखंड डीघ के ग्राम पंचायत मझगवा में स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित सामुदायिक शौचालय इन दिनों बदहाली का शिकार है। सरकार जहां एक ओर गांवों को खुले में शौच से मुक्त और स्वच्छ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं मझगवा का यह शौचालय भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों के अनुसार शौचालय परिसर में चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे वहां जाना भी जोखिम भरा हो गया है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ लोगों ने बताया कि शौचालय में नियुक्त केयरटेकर कभी भी नियमित रूप से नहीं आती, जिसके चलते साफ-सफाई की स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। दुर्गंध और गंदगी के कारण कोई भी ग्रामीण इसका उपयोग नहीं कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थिति यह है कि आधुनिक सुविधाएं होने के बावजूद ग्रामीण आज भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं, जो स्वच्छ भारत मिशन की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि नवागत ग्राम प्रधान द्वारा शौचालय को प्राथमिक विद्यालय परिसर के अंदर कर दिया गया है, जिससे यह बाउंड्री के भीतर सीमित हो गया है और आम लोगों की पहुंच बाधित हो गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कराते हुए शौचालय की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को इसका लाभ मिल सके और गांव को स्वच्छ बनाने का सपना साकार हो सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 21:09:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>

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