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                <title>monsoon - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>बदलती जलवायु का संकट और उसका प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जलवायु संकट आज मानव सभ्यता के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। यह संकट धीरे धीरे नहीं बल्कि तेजी से गहराता जा रहा है और इसके प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। वैश्विक स्तर पर तापमान में वृद्धि, वर्षा के पैटर्न में बदलाव, सूखा और बाढ़ जैसी चरम घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति इस संकट की गंभीरता को दर्शाती है। इस पूरे परिदृश्य में एल नीनो जैसी प्राकृतिक घटना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो समुद्री तापमान में बदलाव के कारण वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करती है और कई देशों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177996/the-crisis-of-changing-climate-and-its-effects"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/cover.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जलवायु संकट आज मानव सभ्यता के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। यह संकट धीरे धीरे नहीं बल्कि तेजी से गहराता जा रहा है और इसके प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। वैश्विक स्तर पर तापमान में वृद्धि, वर्षा के पैटर्न में बदलाव, सूखा और बाढ़ जैसी चरम घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति इस संकट की गंभीरता को दर्शाती है। इस पूरे परिदृश्य में एल नीनो जैसी प्राकृतिक घटना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो समुद्री तापमान में बदलाव के कारण वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करती है और कई देशों के लिए गंभीर परिणाम लेकर आती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एल नीनो एक ऐसी जलवायु प्रक्रिया है जो सामान्यतः 2 से 7 वर्षों के अंतराल पर उत्पन्न होती है और प्रशांत महासागर के मध्य तथा पूर्वी हिस्से के जल को सामान्य से अधिक गर्म कर देती है। इस गर्माहट का प्रभाव केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह वायुमंडलीय परिसंचरण को भी प्रभावित करता है, जिससे पूरी दुनिया के मौसम में असामान्य परिवर्तन देखने को मिलते हैं। भारत जैसे देशों में इसका सबसे बड़ा प्रभाव मानसून पर पड़ता है, जो कृषि और अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आंकड़ों के अनुसार 1980 के बाद से लगभग 70 प्रतिशत एल नीनो वर्षों में भारत में कमजोर मानसून दर्ज किया गया है, जिससे वर्षा में कमी देखी गई है । यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि एल नीनो और मानसून के बीच गहरा संबंध है। जब मानसून कमजोर होता है तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ता है। भारत की लगभग 50 प्रतिशत कृषि भूमि वर्षा पर निर्भर है, इसलिए थोड़ी सी भी कमी खाद्यान्न उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2026 में भी इसी तरह की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा हो सकती है, जिससे खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है । यदि वर्षा में कमी आती है तो धान, दाल और तिलहन जैसी फसलों का उत्पादन घट सकता है, जिससे खाद्य कीमतों में वृद्धि होगी और महंगाई बढ़ेगी। यह प्रभाव केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे समाज पर पड़ेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तापमान के संदर्भ में भी स्थिति चिंताजनक है। 2026 में भारत के कई हिस्सों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जो सामान्य से काफी अधिक है । यह न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। अत्यधिक गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि हो रही है। शहरी क्षेत्रों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है क्योंकि वहां कंक्रीट संरचनाएं गर्मी को अधिक समय तक बनाए रखती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जल संकट भी इस पूरे परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण पहलू है। जब वर्षा कम होती है तो जलाशयों में पानी का स्तर घट जाता है, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों प्रभावित होते हैं। कई शहरों में पहले से ही पानी की कमी की समस्या है और एल नीनो जैसी घटनाएं इसे और बढ़ा सकती हैं। उदाहरण के लिए कुछ क्षेत्रों में जलाशयों की क्षमता का केवल लगभग 28 प्रतिशत पानी ही उपलब्ध है, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वैश्विक स्तर पर भी इसके प्रभाव कम नहीं हैं। एशिया में तापमान बढ़ने से बिजली की मांग तेजी से बढ़ती है क्योंकि लोग ठंडक के लिए अधिक ऊर्जा का उपयोग करते हैं। इससे ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार एशिया में वैश्विक बिजली मांग का आधे से अधिक हिस्सा है और तापमान में वृद्धि से इस मांग में और वृद्धि होगी । दूसरी ओर, कुछ क्षेत्रों में अधिक वर्षा और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे वहां के बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एल नीनो के कारण मौसम में असंतुलन केवल वर्षा की कमी तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह वर्षा के वितरण को भी प्रभावित करता है। कहीं अत्यधिक बारिश होती है तो कहीं बिल्कुल नहीं होती। इस प्रकार की असमानता कृषि और जल प्रबंधन दोनों के लिए चुनौती पैदा करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार हाल के दशकों में चरम वर्षा की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है, जो जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर और अधिक गंभीर हो रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जलवायु परिवर्तन और एल नीनो का संयुक्त प्रभाव इस संकट को और जटिल बना देता है। जहां एल नीनो एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, वहीं जलवायु परिवर्तन मानव गतिविधियों का परिणाम है। औद्योगीकरण, वनों की कटाई और जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग ने वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ा दी है, जिससे पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। जब यह बढ़ता तापमान एल नीनो जैसी घटनाओं के साथ मिल जाता है तो इसके प्रभाव और भी तीव्र हो जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आर्थिक दृष्टि से भी यह संकट गहरा असर डालता है। कमजोर मानसून के कारण कृषि उत्पादन घटता है, जिससे ग्रामीण आय में कमी आती है और मांग घटती है। इसके साथ ही खाद्य कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मानसून और जलवायु परिवर्तन का संयुक्त प्रभाव आर्थिक विकास को भी प्रभावित कर सकता है और सामाजिक असमानताओं को बढ़ा सकता है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे परिदृश्य में सबसे अधिक प्रभावित वे लोग होते हैं जो पहले से ही कमजोर स्थिति में हैं, जैसे छोटे किसान, मजदूर और गरीब वर्ग। उनके पास संसाधनों की कमी होती है और वे प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने में सक्षम नहीं होते। इसलिए जलवायु संकट केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं है बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक असमानता का भी मुद्दा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाधान के संदर्भ में यह आवश्यक है कि वैश्विक और स्थानीय स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं। नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना, जल संरक्षण के उपाय अपनाना, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना और वनों की रक्षा करना ऐसे कदम हैं जो इस संकट को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत करना और आपदा प्रबंधन की तैयारी को बेहतर बनाना भी जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह स्पष्ट है कि जलवायु संकट एक बहुआयामी समस्या है, जिसमें प्राकृतिक और मानव दोनों कारक शामिल हैं। एल नीनो जैसी घटनाएं इस संकट को और अधिक जटिल बना देती हैं, लेकिन यह भी सच है कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाएं तो इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम इस समस्या को गंभीरता से समझें और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से एक संतुलित और सुरक्षित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 17:35:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Weather Update: देश के इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी, देखें पूरी वेदर रिपोर्ट </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p><p class="pf0"><span class="cf0">Weather Update: इस</span> <span class="cf0">साल</span> <span class="cf0">मानसून</span> <span class="cf0">ने</span> <span class="cf0">देशभर</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">जमकर</span> <span class="cf0">बरसात</span> <span class="cf0">की</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">कई</span> <span class="cf0">राज्यों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">रिकॉर्डतोड़</span> <span class="cf0">बारिश</span> <span class="cf0">हुई</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">मौसम</span> <span class="cf0">लंबे</span> <span class="cf0">समय</span> <span class="cf0">तक</span> <span class="cf0">सुहावना</span> <span class="cf0">बना</span> <span class="cf0">रहा</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">मानसून</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">बाद</span> <span class="cf0">भी</span> <span class="cf0">कई</span> <span class="cf0">क्षेत्रों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">बारिश</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">दौर</span> <span class="cf0">जारी</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">अब</span> <span class="cf0">भारतीय</span> <span class="cf0">मौसम</span> <span class="cf0">विज्ञान</span> <span class="cf0">विभाग</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">IMD) </span><span class="cf0">ने</span> <span class="cf0">चेतावनी</span> <span class="cf0">जारी</span> <span class="cf0">करते</span> <span class="cf0">हुए</span> <span class="cf0">बताया</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">कि</span><span class="cf0"> 10, 11, 12 </span><span class="cf0">और</span><span class="cf0"> 13 </span><span class="cf0">दिसंबर</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">देश</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">कई</span> <span class="cf0">राज्यों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">जोरदार</span> <span class="cf0">बारिश</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">साथ-साथ</span> <span class="cf0">कुछ</span> <span class="cf0">क्षेत्रों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">ठंड</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">शीतलहर</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">असर</span> <span class="cf0">बढ़</span> <span class="cf0">सकता</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">।</span></p><p class="pf0"><strong><span class="cf0">केरल</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">फिर</span><span class="cf0"> लौटेगी बारिश, </span><span class="cf1">IMD </span><span class="cf0">का </span><span class="cf0">ऑरेंज</span> <span class="cf0">अलर्ट</span></strong></p><p class="pf0"><span class="cf0">मानसून की पहली दस्तक की तरह विदाई के</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163085/weather-update-heavy-rain-alert-issued-in-these-states-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/weather-update-(6).jpg" alt=""></a><br /><p></p><p class="pf0"><span class="cf0">Weather Update: इस</span> <span class="cf0">साल</span> <span class="cf0">मानसून</span> <span class="cf0">ने</span> <span class="cf0">देशभर</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">जमकर</span> <span class="cf0">बरसात</span> <span class="cf0">की</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">कई</span> <span class="cf0">राज्यों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">रिकॉर्डतोड़</span> <span class="cf0">बारिश</span> <span class="cf0">हुई</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">मौसम</span> <span class="cf0">लंबे</span> <span class="cf0">समय</span> <span class="cf0">तक</span> <span class="cf0">सुहावना</span> <span class="cf0">बना</span> <span class="cf0">रहा</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">मानसून</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">बाद</span> <span class="cf0">भी</span> <span class="cf0">कई</span> <span class="cf0">क्षेत्रों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">बारिश</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">दौर</span> <span class="cf0">जारी</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">अब</span> <span class="cf0">भारतीय</span> <span class="cf0">मौसम</span> <span class="cf0">विज्ञान</span> <span class="cf0">विभाग</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">IMD) </span><span class="cf0">ने</span> <span class="cf0">चेतावनी</span> <span class="cf0">जारी</span> <span class="cf0">करते</span> <span class="cf0">हुए</span> <span class="cf0">बताया</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">कि</span><span class="cf0"> 10, 11, 12 </span><span class="cf0">और</span><span class="cf0"> 13 </span><span class="cf0">दिसंबर</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">देश</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">कई</span> <span class="cf0">राज्यों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">जोरदार</span> <span class="cf0">बारिश</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">साथ-साथ</span> <span class="cf0">कुछ</span> <span class="cf0">क्षेत्रों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">ठंड</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">शीतलहर</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">असर</span> <span class="cf0">बढ़</span> <span class="cf0">सकता</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">।</span></p><p class="pf0"><strong><span class="cf0">केरल</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">फिर</span><span class="cf0"> लौटेगी बारिश, </span><span class="cf1">IMD </span><span class="cf0">का </span><span class="cf0">ऑरेंज</span> <span class="cf0">अलर्ट</span></strong></p><p class="pf0"><span class="cf0">मानसून की पहली दस्तक की तरह विदाई के बाद भी केरल में बारिश का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब मौसम विभाग ने 10 से 13 दिसंबर तक राज्य में भारी बारिश और गरज-चमक का </span><span class="cf0">अलर्ट</span><span class="cf0"> जारी किया है। इस दौरान तेज़ </span><span class="cf0">हवाएं</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">धूलभरी</span><span class="cf0"> आंधी चलने की भी संभावना है।</span></p><p class="pf0"><strong><span class="cf0">तमिलनाडु</span><span class="cf0"> में </span><span class="cf0">झमाझम</span><span class="cf0"> बारिश के आसार</span></strong></p><p class="pf0"><span class="cf0">तमिलनाडु</span><span class="cf0"> में भी मानसून के बाद से लगातार बारिश हो रही है। </span><span class="cf1">IMD </span><span class="cf0">के अनुसार 10, 11, 12 और 13 </span><span class="cf0">दिसंबर</span><span class="cf0"> को राज्य में </span><span class="cf0">झमाझम</span><span class="cf0"> बारिश होगी। कुछ जिलों में तेज़ हवाएं चलने का भी </span><span class="cf0">अलर्ट</span><span class="cf0"> जारी किया गया है।</span></p><p class="pf0"><strong><span class="cf0">इन राज्यों में भी भारी बारिश का </span><span class="cf0">अलर्ट</span></strong></p><p class="pf0"><span class="cf0">मौसम विभाग ने बताया कि देश के </span><span class="cf0">कई</span><span class="cf0"> हिस्सों में मौसम का रुख बदलने </span><span class="cf0">वाला</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">।</span> <span class="cf0">कर्नाटक के कुछ जिले </span><span class="cf0">पुडुचेरी</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">कराईकल</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">माहे</span><span class="cf0">, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह</span> <span class="cf0">में अगले चार दिनों तक लगातार हल्की से मध्यम तथा कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।</span></p><p class="pf0"><strong><span class="cf0">राजस्थान और दिल्ली में बढ़ेगी ठंड, </span><span class="cf0">शीतलहर</span><span class="cf0"> का खतरा</span></strong></p><p class="pf0"><span class="cf0">राजस्थान और दिल्ली में मानसून के दौरान अच्छी बारिश हुई थी, लेकिन अब मौसम पूरी तरह बदल गया है। दोनों जगह ठंड में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।</span></p><p class="pf0"><span class="cf1">IMD </span><span class="cf0">ने चेतावनी दी है कि 11, 12 और 13 दिसंबर को</span> <span class="cf0">दिल्ली और राजस्थान में ठंडी हवाओं का असर तेज़ होगा। सुबह और रात के समय </span><span class="cf0">शीतलहर</span><span class="cf0"> चल सकती है। कई जिलों में पारा तेजी से लुढ़कने की संभावना है। राजस्थान के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में तापमान सामान्य से 4</span><span class="cf3">–6 </span><span class="cf0">डिग्री कम दर्ज किया जा सकता है।</span></p><p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 20:32:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Weather Update: देश के इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, पश्चिमी विक्षोभ फिर हुआ सक्रिय</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p><p><span class="cf0">Weather Update: मौसम विज्ञान विभाग ने नवंबर के पहले सप्ताह में देश के कई हिस्सों में बड़े मौसमीय बदलाव की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से हिमालय क्षेत्र और आसपास के राज्यों में भारी बारिश और बर्फबारी देखने को मिल सकती है।</span></p><p><span class="cf0">इसके असर से उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत के कई इलाकों में 5 से 8 नवंबर तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं उत्तर प्रदेश में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।</span></p><p><strong><span class="cf0">यूपी का मौसम रहेगा शुष्क, लेकिन ठंड बढ़ेगी</span></strong></p><p><span class="cf0">मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159028/weather-update-alert-of-heavy-rain-in-these-states-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/news---2025-11-05t142259.533.jpg" alt=""></a><br /><p></p><p><span class="cf0">Weather Update: मौसम विज्ञान विभाग ने नवंबर के पहले सप्ताह में देश के कई हिस्सों में बड़े मौसमीय बदलाव की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से हिमालय क्षेत्र और आसपास के राज्यों में भारी बारिश और बर्फबारी देखने को मिल सकती है।</span></p><p><span class="cf0">इसके असर से उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत के कई इलाकों में 5 से 8 नवंबर तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं उत्तर प्रदेश में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।</span></p><p><strong><span class="cf0">यूपी का मौसम रहेगा शुष्क, लेकिन ठंड बढ़ेगी</span></strong></p><p><span class="cf0">मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार से सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ का असर उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, राज्य के ज्यादातर हिस्सों में बारिश की संभावना नहीं है। 5 नवंबर तक बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है। उत्तराखंड से सटे इलाकों में पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण ठंड में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।</span></p><p><strong><span class="cf0">उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी का अलर्ट</span></strong></p><p><span class="cf0">हिमालय क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तराखंड के कई जिलों में बारिश और बर्फबारी का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने 4 से 8 नवंबर तक राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में जोरदार बारिश की संभावना जताई है। इससे तापमान में गिरावट आने और ठिठुरन बढ़ने के आसार हैं।</span></p><p><strong><span class="cf0">पूर्वोत्तर भारत में तूफान और बिजली चमकने की संभावना</span></strong></p><p><span class="cf0">पूर्वोत्तर भारत में भी मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। 4 और 5 नवंबर को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बिजली चमकने के साथ तेज हवाएं चलने और तूफान की संभावना है। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।</span></p><p><strong><span class="cf0">मध्य और पश्चिम भारत में भी बदलेगा मौसम</span></strong></p><p><span class="cf0">मध्य और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में भी मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। 4 नवंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। वहीं 5 और 6 नवंबर को कोंकण और गोवा में और 4 से 7 नवंबर के बीच मध्य महाराष्ट्र में बिजली चमकने के साथ तूफान की चेतावनी दी गई है।</span></p><p><strong><span class="cf0">दक्षिण भारत में भारी बारिश के आसार</span></strong></p><p><span class="cf0">तमिलनाडु, केरल और आसपास के दक्षिणी इलाकों में 4 से 6 नवंबर तक कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी वर्षा भी हो सकती है। मौसम विभाग ने बताया कि इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे तटीय इलाकों में सतर्कता जरूरी है।</span></p><p><strong><span class="cf0">दिल्ली में साफ आसमान लेकिन रहेगी धुंध</span></strong></p><p><span class="cf0">राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 4 नवंबर को आसमान साफ रहने की संभावना है, हालांकि शाम के समय हल्की धुंध और कोहरा छा सकता है। अधिकतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 16 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। 5 नवंबर को भी आसमान मुख्यतः साफ रहेगा, लेकिन सुबह और शाम को हल्का कोहरा देखने को मिल सकता है।</span></p><p><strong><span class="cf0">मछुआरों को चेतावनी</span></strong></p><p><span class="cf0">भारत मौसम विभाग ने 4 से 8 नवंबर के बीच अंडमान सागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में तेज लहरों और आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की है। मछुआरों को इस दौरान समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।</span></p><p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Nov 2025 14:23:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Heavy Rain Alert: 26, 27 और 28 अक्टूबर तक इन जगहों पर बारिश का अलर्ट, देखें मौसम पूर्वानुमान </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Heavy Rain Alert: </strong>26, 27 और 28 अक्टूबर तक मौसम का हाल कैसा रहने वाला है आइए जानते है मौसम विभाग द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक किन जगहों पर बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। आइए देखें मौसम पूर्वानुमान....</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण तमिलनाडु के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने 26 से 28 अक्टूबर के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और तटीय कर्नाटक में बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग ने मछुआरों को समुद्र तट पर न जाने की भी चेतावनी जारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158344/heavy-rain-alert-26-see-rain-alert-at-these-places"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/latest-news---2025-10-26t171621.836.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Heavy Rain Alert: </strong>26, 27 और 28 अक्टूबर तक मौसम का हाल कैसा रहने वाला है आइए जानते है मौसम विभाग द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक किन जगहों पर बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। आइए देखें मौसम पूर्वानुमान....</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण तमिलनाडु के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने 26 से 28 अक्टूबर के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और तटीय कर्नाटक में बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग ने मछुआरों को समुद्र तट पर न जाने की भी चेतावनी जारी की है। Heavy Rain Alert</p>
<p><strong>तमिलनाडु में मौसम पूर्वानुमान</strong></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, मौसम विभाग ने बताया की मध्य और पूर्वी बंगाल की खाड़ी के हिस्सों में निम्न दबाव सक्रिय है, जिससे तमिलनाडु के तटीय इलाकों में तेज हवाएं और लगातार बारिश हो रही है। चेन्नई, चेंगलपट्टू, तिरुवल्लुर, कांचीपुरम, रानीपेट और विलुपुरम जिलों में भारी वर्षा होने की संभावना है। साथ ही पुडुचेरी में भी जोरदार बारिश का पूर्वानुमान है। Heavy Rain Alert</p>
<p><strong>भारी बारिश का अनुमान</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, IMD के अनुसार 26 और 30 अक्टूबर को तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, 26 से 29 अक्टूबर के दौरान रायलसीमा, 27 से 30 तारीख के बीच तेलंगाना और 27 व 28 अक्टूबर को केरल में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। Heavy Rain Alert</p>
<p><strong>ये संभावना</strong></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, विभाग ने तमिलनाडु में गरज के साथ बिजली गिरने का भी अनुमान जताया है। 26 से 28 अक्टूबर के दौरान तमिलनाडु में गरज के साथ बारिश, बिजली और तेज हवा भी चलेगी। Heavy Rain Alert</p>
<p><strong>ओडिशा में मौसम पूर्वानुमान</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, 28 और 29 अक्टूबर को दक्षिण ओडिशा में अलग-अलग स्थानों पर बारिश हो सकती है। इसके अलावा 28 अक्टूबर को छत्तसीगढ़ में भी भारी बारिश का अनुमान जताया है। Heavy Rain Alert</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, 26 से 28 अक्टूबर के दौरान पश्चिम मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान क्षेत्र में गरज के साथ तूफान का भी अनुमान जताया है। Heavy Rain Alert</p>
<p><strong>‘उत्तर पश्चिम दिशा की ओर बढ़ेगी’</strong></p>
<p>मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह निम्न दबाव प्रणाली बंगाल की खाड़ी के केंद्रीय और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में बनी बड़ी परिसंचरण प्रणाली का हिस्सा है, जो अगले 24 घंटों में ज्यादा मजबूत हो सकती है। Heavy Rain Alert</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, यह प्रणाली उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ेगी, जिससे तमिलनाडु के उत्तरी तटीय जिलों और पुडुचेरी में मध्यम से भारी वर्षा हो सकती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Oct 2025 17:16:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> तरकुलवा तिवारी से डेरवा को जाने वाली सड़क बदहाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>भिटौली/महराजगंज। </strong>मुख्य सड़कों में गड्ढे हैं या गड्ढे में सड़क है, यह पहचानना मुश्किल है। इसकी वजह सिर्फ यह नहीं है कि मॉनसून के कारण सड़कें उखड़ रही हैं बल्कि इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जिला की ज्यादातर सड़कें खराब गुणवत्ता की बनायी जाती है।उखड़ी हुई सड़कें खुद ही सड़क निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की गवाही दे रही हैं। इसी क्रम में परतावल ब्लॉक के अंतर्गत तरकुलवा तिवारी से सिसवा मुंशी की तरफ जाने वाली मुख्य सड़क की दशा बेहद दयनीय है।</div>
<div>  </div>
<div>स्थानीय लोगों ने बताया कि तरकुलवा तिवारी डेरवा होते हुए आने वाला रास्ता की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144601/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/दूसरा-2,..jpg" alt=""></a><br /><div><strong>भिटौली/महराजगंज। </strong>मुख्य सड़कों में गड्ढे हैं या गड्ढे में सड़क है, यह पहचानना मुश्किल है। इसकी वजह सिर्फ यह नहीं है कि मॉनसून के कारण सड़कें उखड़ रही हैं बल्कि इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जिला की ज्यादातर सड़कें खराब गुणवत्ता की बनायी जाती है।उखड़ी हुई सड़कें खुद ही सड़क निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की गवाही दे रही हैं। इसी क्रम में परतावल ब्लॉक के अंतर्गत तरकुलवा तिवारी से सिसवा मुंशी की तरफ जाने वाली मुख्य सड़क की दशा बेहद दयनीय है।</div>
<div> </div>
<div>स्थानीय लोगों ने बताया कि तरकुलवा तिवारी डेरवा होते हुए आने वाला रास्ता की स्थिति थोड़ी सी बारिश होने पर ही नहर में तब्दील हो जाती है। आज इसी क्षेत्र  के जिला पंचायत सदस्य शमशाद आलम ने ग्रामीणों के साथ विरोध प्रदर्शन किया और कहा की भले ही मेरा त्याग पत्र ले लो लेकिन इस रास्ते को बना दो जिम्मेदारान। अब ये रास्ता मुझसे नही देखा जा रहा रहा है। कई बार इस रास्ते के लिए शासन प्रशासन ने  बात कर चुका लेकिन निर्माण नही हो रहा है।</div>
<div> </div>
<div>सड़क की इस हालत से लोग बेहद परेशान हैं। दर्जन भर गावों के लोगो का मुख्यालय जाने के  मुख्य सड़क है। स्कूली बस, दोपहिया वाहन चालकों के लिए साथ ही साथ ई-रिक्शा चालकों के लिए भी खतरे से खाली नहीं है। वाहन की बात तो दूर पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है हम यह हम लोग यह दर्द 10 सालों से झेल रहे हैं अब सहन के बाहर है शासन प्रशासन को तत्काल इस तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है। इस प्रदर्शन में मौजूद जिला पंचायत सदस्य शमशाद आलम, मोहम्मद जकी, मोहम्मद इशाक, नबी उल्लाह, निजामुद्दीन, मोहम्मद रफी, राहत अली, नूर हसन , अरविंद साहिल, अली, गुफरान, अब्दुल कलाम, इतिहास ग्रामवासी मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Sep 2024 16:57:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

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