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                <title>organic farming - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर”</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dsc_0515.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर” जैसे समकालीन और अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर गहन चर्चा हुई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण करना और भविष्य के लिए टिकाऊ एवं तकनीकी समाधान प्रस्तुत करना था।</p><p style="text-align:justify;">प्रथम तकनीकी सत्र में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए पशुधन क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पशुधन की उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है, जिसका एक प्रमुख कारण देशी नस्लों पर अत्यधिक निर्भरता है। इसके अतिरिक्त चारे की कमी, पशु-चिकित्सा सुविधाओं का अभाव तथा बाजार तंत्र में बिचौलियों की भूमिका भी किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत नस्लों के विकास, चारा प्रबंधन और सुदृढ़ पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर बल दिया।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img_0564.jpg.jpeg" alt="विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण" width="1200" height="800"></img></p><p style="text-align:justify;">पोल्ट्री एवं पशुधन क्षेत्र में एंटीबायोटिक के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की गई। विशेषज्ञों ने इसे एक उभरते खतरे के रूप में चिन्हित करते हुए कहा कि एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस भविष्य में मानव और पशु स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इस दिशा में वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित दवा उपयोग तथा किसानों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">बकरी पालन, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, पर केंद्रित सत्र में उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित प्रबंधन, बेहतर नस्लों के चयन और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से इस क्षेत्र में आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को भी विशेष महत्व दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके समाधान के रूप में गोबर, गोमूत्र और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी सहायक होती है।</p><p style="text-align:justify;">मृदा स्वास्थ्य पर हुई चर्चा में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश में मृदा जैविक कार्बन का स्तर लगातार गिर रहा है, जो कृषि के लिए गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खाद, हरी खाद और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। इन उपायों से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि जल धारण क्षमता में भी सुधार होगा, जिससे जल संकट की समस्या को कम किया जा सकेगा।</p><p style="text-align:justify;">“डिजिटल एग्रीकल्चर” पर केंद्रित सत्र में आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सटीक खेती (प्रिसीजन फार्मिंग) और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किसानों को मौसम, फसल स्वास्थ्य और बाजार मूल्य की सटीक जानकारी मिल सकती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव है। यह तकनीकी हस्तक्षेप कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</p><p style="text-align:justify;">समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिनेश प्रताप सिंह (राज्यमंत्री, उद्यान, कृषि विपणन, कृषि निर्यात) उपस्थित रहे। उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और संस्थानों को सम्मानित किया। इस अवसर पर 14 एकेडमी अवार्ड, 9 फेलो अवार्ड और 7 ऑनरेरी फेलोशिप प्रदान की गईं, जो कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में यह बात कही कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल तकनीक और टिकाऊ पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।</p><p style="text-align:justify;">इस प्रकार, कृषि विज्ञान कांग्रेस का यह आयोजन न केवल वर्तमान चुनौतियों पर विचार करने का मंच बना, बल्कि भविष्य की कृषि को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 20:18:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिविर के पांचवें दिन जल संरक्षण एवं मृदा संरक्षण जागरूकता अभियान चला कर ग्रामीणों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कोरांव प्रयागराज। </strong>बलराम महाविद्यालय के पांचवें दिन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा जैविक, खेती मृदा संरक्षण तथा जल संरक्षण विषयों पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने बताया कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा होती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त मृदा संरक्षण (मिट्टी संरक्षण) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि पेड़ पौधे लगाकर खेतों में मेड बंदी करके संतुलित</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173419/on-the-fifth-day-of-the-camp-villagers-were-made"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260316-wa0137.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कोरांव प्रयागराज। </strong>बलराम महाविद्यालय के पांचवें दिन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा जैविक, खेती मृदा संरक्षण तथा जल संरक्षण विषयों पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने बताया कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त मृदा संरक्षण (मिट्टी संरक्षण) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि पेड़ पौधे लगाकर खेतों में मेड बंदी करके संतुलित खेती अपनाकर मिट्टी के कटाव को रोका जा सकता है। यह कार्यक्रम बलराम महाविद्यालय के प्रबंधिका श्रीमती उमा सिंह के निर्देशन में संचालक पूर्वक संपन्न हुआ। इस मौके कार्यक्रमाधिकारी गौरव वर्मा एसोसिएट डायरेक्टर शाश्वत मिश्रा, डिप्टी डायरेक्टर शालिनी श्रीवास्त प्राचार्य डॉ अरुण कुमार सिंह डॉ अशोक उत्तम डॉ0 वी0 पी0 सिंह, डॉ अजय सिंह, संध्या पाण्डेय, आशीष पाण्डेय, बृजेश कुमार और ग्रामीण उपस्थित रहे।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:56:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जैविक खेती से मिट्टी में उर्वरा शक्ति बनी रहती हैं: राजाराम</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर । </strong>बांसी ब्लाक के ग्राम जिगनिहवा में गुरुवार को कृषि विभाग द्वारा आत्मा योजन के तहत ग्राम स्तरीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जैविक खेती पर आधारित रहा। ए, डी, ओ, कृषि राजाराम यादव ट्रेनर द्वारा जैविक खेती  को एक पारिस्थितिकी खेती का तरीका बताया जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण भी  संतुलित रहता है। जैविक खेती में जैविक मूल के उर्वरकों जैसे कंपोस्ट खाद हरी खाद और हड्डी के चूर्ण का इस्तेमाल किया जाता है। प्राकृतिक प्रक्रियाओं जो जैव विविधता स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक काम किया जाता है।</div>
<div>  </div>
<div>जैविक खेती</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149520/rajaram-remains-fertility-in-soil-due-to-organic-farming"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/1741269351502.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर । </strong>बांसी ब्लाक के ग्राम जिगनिहवा में गुरुवार को कृषि विभाग द्वारा आत्मा योजन के तहत ग्राम स्तरीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जैविक खेती पर आधारित रहा। ए, डी, ओ, कृषि राजाराम यादव ट्रेनर द्वारा जैविक खेती  को एक पारिस्थितिकी खेती का तरीका बताया जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण भी  संतुलित रहता है। जैविक खेती में जैविक मूल के उर्वरकों जैसे कंपोस्ट खाद हरी खाद और हड्डी के चूर्ण का इस्तेमाल किया जाता है। प्राकृतिक प्रक्रियाओं जो जैव विविधता स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक काम किया जाता है।</div>
<div> </div>
<div>जैविक खेती से खरपतवार रोग और कीटों का नियंत्रण होता है। जैविक खेती से मिट्टी के सूक्ष्मजीवो की क्रिया से फसल को पोषक तत्व मिलते हैं। मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता बनी रहती है। उत्तर प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है। रासायनिक उर्वरकों के दाम किसानों के लिए संकट उत्पन्न कर रहे हैं ।किसानों को प्राचीन कृषि पद्धतियों को अपनाना चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>जैविक उर्वरक का प्रयोग ढांचा, सनई और दलहन  फसलों की खेती कर मिट्टी को स्वस्थ और उपजाऊ बनाना चाहिए सरकार किसानों को दलहन ,सनई, ढैचा के बीज सस्ती दरों पर नैडप कंपोस्ट खाद बनाने के लिए किसानों को जमीनी कार्य करना चाहिए । इस दौरान क्षेत्र के नागेंद्र, अंगद, अलगू, जैसराम, वचन, जोखन, रामायन, लक्ष्मी प्रसाद , जयकरन, नंदलाल, धर्मेंद्र, मिठाई,राम सवारे ,संतोष,कविता, नीलम, प्रभावती आदि सैकड़ो की संख्या में लोग मौजूद रहे।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Mar 2025 14:09:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि मेले में जैविक खेती व मिलेट्स के बारे में दी गयी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>ज्ञानपुर।</strong> विकास खण्ड औराई प्रांगण में मंगलवार को जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादन गोष्ठी, सिलेट्स, जैविक मेला का आयोजन किया गया।आयोजन  जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी भदोही की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी ने  लगे स्टालों का अवलोकन किया । उप कृषि निदेशक डा० अश्वनी कुमार सिंह ने कार्यक्रम को रेखांकित करते हुए बताया कि खरीफ उत्पादन गोष्ठी, कृषकों को जागरूक करने के उद्देश्य से किया जाता है। इनके द्वारा जैविक खेती के बारे में बताया कि रसायनिक खेती से लागत अधिक आती है और रसायन युक्त अन्न उत्पादन होता है, जिससे शरीर में अनेक प्रकार की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144461/information-given-about-organic-farming-and-millets-in-agricultural-fair"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/img-20240903-wa0760.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>ज्ञानपुर।</strong> विकास खण्ड औराई प्रांगण में मंगलवार को जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादन गोष्ठी, सिलेट्स, जैविक मेला का आयोजन किया गया।आयोजन  जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी भदोही की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी ने  लगे स्टालों का अवलोकन किया । उप कृषि निदेशक डा० अश्वनी कुमार सिंह ने कार्यक्रम को रेखांकित करते हुए बताया कि खरीफ उत्पादन गोष्ठी, कृषकों को जागरूक करने के उद्देश्य से किया जाता है। इनके द्वारा जैविक खेती के बारे में बताया कि रसायनिक खेती से लागत अधिक आती है और रसायन युक्त अन्न उत्पादन होता है, जिससे शरीर में अनेक प्रकार की बीमारियां हो रही है।</div>
<div> </div>
<div>मिलेटस खेती के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी।  इनके द्वारा बागवानी में आम्, अमरूद, केला की खेती की जानकारी दी गयी। डा० शिशिर कुमार कृषि वैज्ञानिक नैनी ने फसल प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दिया व बताया गया कि मोटे अनाज के सेवन से स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण भी ठीक रहता है।  सतीश कुमार पाण्डेय जिला कृषि अधिकारी ने सावा, कोदो, रागी की खेती के बारे में विस्तृत जानकारी दिया गया। इन्होंने बताया कि मोटे अनाज के उत्पाद में कम पानी और बिना रसायन के पैदा होता है। </div>
<div> </div>
<div> मुख्य विकास अधिकारी डा० शिवाकान्त द्विवेदी ने मेले के उ‌द्देश्य की जानकारी देते हुए बताया कि खरीफ उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गष्ठियों होती हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि हो सके। जैविक खेती के बारे में बताया कि सरकार रसायन युक्त उत्पाद को कम करने के उद्देश्य से जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी प्रकार मिलेट्स की खेती हेतु कृषकों को प्रेरित किया जा रहा है। मोटे अनाज से शरीर में रोग कम होता है और शरीर स्वस्थ रहता है।</div>
<div> </div>
<div>विशिष्ट अतिथि दीनानाथ भाष्कर विधायक औराई ने कृषकों से अपील किया कि जैविक खेती एवं मिलेट्स के बारे में जो भी कृषि वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी जानकारी दी जा रही है उसे सीखकर अन्य कृषकों को बतायेंगे और इसे अपनाकर स्वस्थ अनाज के रूप में इस्तेमाल करेंगे और बिकी करके अधिक लाभ कमायेंगे। इस अवसर पर अरुणेन्द्र कुमार चौबे, हृदयतोष उपाध्याय,राम अकबाल तिवारी, सहित जनपद दूर-दराज के बडी संख्या में किसान उपस्थित रहें।</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 04 Sep 2024 16:50:22 +0530</pubDate>
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