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                <title>organic farming - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>organic farming RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नैनो उर्वरकों के उपयोग आधारित एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ आयोजन।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इफको के नैनो उर्वरक भारतीय कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनके प्रयोग से सस्ती एवं टिकाऊ खेती करने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त बातें , डॉ.विवेक दीक्षित, प्रधानाचार्य, मोतीलाल नेहरू फार्मरस ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट कॉर्डेट इफको फूलपुर ने ग्राम  सेफ खानपुर वि.खं. बहरिया के कृषकों  हेतु दिनांक 20 जुलाई 2026 को आयोजित  एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहीं ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  उन्होंने संबोधित करते हुए बताया कि  इफको के नैनो उर्वरक जो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक क्रांतिकारी  परिवर्तन ला रहे हैं को जरूर प्रयोग करें।  प्रधानाचार्य ने उपस्थित  कृषक प्रतिभागियों को कार्डेट</div>
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<div style="text-align:justify;">दानेदार</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183869/a-one-day-farmer-training-program-based-on-the-use-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260720-wa0173.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इफको के नैनो उर्वरक भारतीय कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनके प्रयोग से सस्ती एवं टिकाऊ खेती करने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त बातें , डॉ.विवेक दीक्षित, प्रधानाचार्य, मोतीलाल नेहरू फार्मरस ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट कॉर्डेट इफको फूलपुर ने ग्राम  सेफ खानपुर वि.खं. बहरिया के कृषकों  हेतु दिनांक 20 जुलाई 2026 को आयोजित  एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहीं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> उन्होंने संबोधित करते हुए बताया कि  इफको के नैनो उर्वरक जो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक क्रांतिकारी  परिवर्तन ला रहे हैं को जरूर प्रयोग करें।  प्रधानाचार्य ने उपस्थित  कृषक प्रतिभागियों को कार्डेट एवं इफको के क्रियाकलाप से परिचित कराया तथा धान की फसल में नैनो यूरिया प्लस, नैनो कॉपर, नैनो जिंक, एवं नैनो डीएपी के प्रयोग की विस्तार से जानकारी दी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> नैनो उर्वरकों के प्रयोग से कृषि लागत में कमी आएगी साथ ही यूरिया एवं डीएपी के अत्यधिक प्रयोग से जल, मृदा एवं पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी अवगत कराया तथा फसलों में  नैनो डीएपी से बीज/जड़/कंद/सेट शोधित कर बुवाई/रोपाई करने की सलाह दी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दानेदार डीएपी की मात्रा आधी प्रयोग करें नैनो डीएपी 500 मिलीलीटर की बोतल से 100 किलोग्राम बीज को शोधित कर सकते हैं एवं मात्र ₹600 की है जो कि दानेदार डीएपी से काफी सस्ता है नैनो डीएपी के प्रयोग से लागत में कमी आएगी साथ ही उत्पादन एवं उत्पाद की गुणवत्ता भी बढ़ती है तथा नैनो यूरिया फसल की पत्तियों पर @4 ml प्रति लीटर पानी से घोल बनाकर स्प्रे करें। </div>
<div style="text-align:justify;">इसी क्रम में संस्थान की वरिष्ठ अधिकारी  सविता शुक्ला ने फल संरक्षण एवं खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि विभिन्न प्रकार के अचार मुरब्बा और जूस बनाकर के हम  अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं । </div>
<div style="text-align:justify;">समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम प्रभारी राजेश कुमार सिंह ने खेती में जैव उर्वरकों एवं जैव अप घटकों के प्रयोग की जानकारी दी।  प्रभारी प्रशिक्षण मुकेश तिवारी ने कार्यक्रम का संचालन किया एवं स्वस्थ व टिकाऊ खेती के लिए मृदा परीक्षण के महत्व को  बताया।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों  को कारडेट की विभिन्न इकाइयों का भ्रमण भी कराया गया। कार्यक्रम में  चंद्रकाली देवी , मीना कुमारी, शकुंतला, मालती , लाखन सिंह, जय सिंह , हरिश्चंद्र, अभय प्रताप सहित कॉर्डेट फूलपुर  के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 21:42:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसान समाधान दिवस में जिलाधिकारी ने सुनीं किसानों की समस्याएं, अधिकारियों को दिए त्वरित निस्तारण के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>फ़िरोजाबाद - </strong>जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता एवं मुख्य विकास अधिकारी शत्रोहन वैश्य की उपस्थिति में विकास भवन सभागार में किसान समाधान दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनपद के दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे और अपनी समस्याएं एवं शिकायतें जिलाधिकारी के समक्ष रखीं। जिलाधिकारी ने प्रत्येक किसान की समस्या को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से सुनते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के कड़े निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">किसान समाधान दिवस में कृषि, मत्स्य, पशुपालन एवं सिंचाई विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान किसानों को शासन द्वारा संचालित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183697/during-the-kisan-samadhan-diwas-the-district-magistrate-listened-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1000153563.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>फ़िरोजाबाद - </strong>जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता एवं मुख्य विकास अधिकारी शत्रोहन वैश्य की उपस्थिति में विकास भवन सभागार में किसान समाधान दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनपद के दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे और अपनी समस्याएं एवं शिकायतें जिलाधिकारी के समक्ष रखीं। जिलाधिकारी ने प्रत्येक किसान की समस्या को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से सुनते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के कड़े निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसान समाधान दिवस में कृषि, मत्स्य, पशुपालन एवं सिंचाई विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान किसानों को शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने फार्मर रजिस्ट्री, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना तथा अन्य कृषि एवं वित्तीय सहायता योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में किसानों को रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा देने, श्री अन्न (मिलेट्स) की खेती अपनाने तथा खाद-बीज के वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग के बारे में भी जागरूक किया गया। साथ ही पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन एवं बागवानी जैसे क्षेत्रों को अपनाकर किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष चर्चा की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाधान दिवस के दौरान ब्लॉक अरांव, तहसील सिरसागंज के ग्राम मुस्तफाबाद निवासी बुजुर्ग किसान साहब सिंह ने जिलाधिकारी को बताया कि उनकी खतौनी में नाम की तकनीकी त्रुटि होने के कारण किसान रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है, जिससे उन्हें मक्का बेचने और खाद प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल त्रुटि दूर कर समस्या का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त अन्य किसानों ने भी कृषि, सिंचाई, खाद, बिजली एवं अन्य विभागों से जुड़ी समस्याएं जिलाधिकारी के समक्ष रखीं। जिलाधिकारी ने सभी शिकायतों का त्वरित एवं निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी भी किसान को कृषि या अन्य विभागों से संबंधित कोई समस्या हो तो वह किसान समाधान दिवस में सीधे आकर अपनी बात रखें। प्रशासन का प्रयास है कि जनपद के किसी भी अन्नदाता को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों की शिकायतों को लंबित न रखा जाए तथा प्रत्येक प्रकरण का मौके पर सत्यापन कर पारदर्शी ढंग से समाधान सुनिश्चित किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उपनिदेशक कृषि सत्येंद्र सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी सोमेश गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी सुमित कुमार चौहान सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 13:58:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सहकार से समृद्धि सहकारिता सप्ताह अभियान के तहत किसान जागरूकता गोष्ठी का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/ </strong>विकास खंड बिथरी चैनपुर में सहकारिता सप्ताह के उपलक्ष्य में "धरती माता बचाओ अभियान" एवं "नैनो उर्वरक : महत्व एवं उपयोग" विषय पर आधारित किसान सभा एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, बरेली  बृजेश सिंह परिहार रहे। क्षेत्र अधिकारी इफको,  कार्तिक सिंह,  हरीश गंगवार,प्रबंधक इफ्को एमसी,  कृष्ण मोहन, अपर जिला सहकारी अधिकारी  सुधीश गौतम अपर जिला सहकारी अधिकारी तथा समिति के सचिव संकल्प उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के शुभारंभ उपरान्त क्षेत्र अधिकारी इफको श्री कार्तिक सिंह द्वारा किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के प्रयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि, लागत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182739/farmer-awareness-seminar-organized-under-sahakar-se-samriddhi-cooperative-week"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260704-wa0007-(2).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/ </strong>विकास खंड बिथरी चैनपुर में सहकारिता सप्ताह के उपलक्ष्य में "धरती माता बचाओ अभियान" एवं "नैनो उर्वरक : महत्व एवं उपयोग" विषय पर आधारित किसान सभा एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, बरेली  बृजेश सिंह परिहार रहे। क्षेत्र अधिकारी इफको,  कार्तिक सिंह,  हरीश गंगवार,प्रबंधक इफ्को एमसी,  कृष्ण मोहन, अपर जिला सहकारी अधिकारी  सुधीश गौतम अपर जिला सहकारी अधिकारी तथा समिति के सचिव संकल्प उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के शुभारंभ उपरान्त क्षेत्र अधिकारी इफको श्री कार्तिक सिंह द्वारा किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के प्रयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि, लागत में कमी तथा बेहतर गुणवत्ता आदि साथ ही परंपरागत उर्वरकों के अधिक उपयोग से मृदा , जल एवं वायु पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव साथ ही क्षीण हो रहे मिट्टी की उर्वरता के बारे में जानकारी दी गई एवं मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की संख्या को बढ़ाने हेतु कॉन्सर्टिया के उपयोग हेतु प्रेरित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही किसानों को नैनों उर्वरकों की विशेषता, विभिन्न फसलों में उपयोग विधि, उपयोग हेतु उचित समय, सही मात्रा आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। हरीश गंगवार  ने फसल सुरक्षा से संबंधित जानकारी दी और किसान सुरक्षा बीमा योजना के बारे में किसानों को अवगत करवाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्य अतिथि  बृजेश सिंह परिहार ने अपने संबोधन में सहकारिता सप्ताह के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सहकारी समितियां किसान हितों के लिए समर्पित संस्थाएं हैं और विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को निरंतर लाभान्वित कर रही हैं। साथ ही संतुलित उर्वरकों का प्रयोग कर नैनो उर्वरकों के प्रयोग हेतु किसानों से आग्रह किया गया एवं समितियों के द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में बताया गया। किसने की समस्याओं को सुना गया और सभी किसानों से फार्मर आईडी बनवाने के लिए अनुरोध किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182739/farmer-awareness-seminar-organized-under-sahakar-se-samriddhi-cooperative-week</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 23:04:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने दिलाया विकसित कृषि का संकल्प।।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत सभागार, प्रयागराज में शुक्रवार को "प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर किसानों की आय में भी वृद्धि करती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181676/emphasis-on-increasing-the-income-of-farmers-through-natural-farming"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0182-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत सभागार, प्रयागराज में शुक्रवार को "प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर किसानों की आय में भी वृद्धि करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने तथा कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध हो सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं, जैविक खाद के उपयोग, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। किसानों को प्राकृतिक खेती से मिलने वाले लाभों एवं सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सांसद प्रवीण पटेल, विधायकगण, विधान परिषद सदस्य (एमएलसी), भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष, महापौर सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने कृषि क्षेत्र को अधिक उन्नत, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों के हित में कार्य करने का संकल्प लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181676/emphasis-on-increasing-the-income-of-farmers-through-natural-farming</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:14:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खेत बचाओ अभियान–2026: प्राकृतिक खेती, मृदा संरक्षण एवं पोषण सुरक्षा पर किसानों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong> बस्ती जिले के सदर विकासखंड अंतर्गत खेत बचाओ अभियान–2026 के अंतर्गत ग्राम पंचायत बभनगांव एवं मझौवा दूधनाथ में किसान जागरूकता कार्यक्रम  आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल, संयुक्त कृषि निदेशक बस्ती मंडल श्रीराम बचन राम, उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार, मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य, अमित शुक्ला (पूर्व प्रदेश मंत्री, एबीवीपी), ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव, एडीओ (कृषि), एटीएम,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181012/farm-save-campaign-%E2%80%93-2026-farmers-made-aware-on-natural"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0058-(45).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong> बस्ती जिले के सदर विकासखंड अंतर्गत खेत बचाओ अभियान–2026 के अंतर्गत ग्राम पंचायत बभनगांव एवं मझौवा दूधनाथ में किसान जागरूकता कार्यक्रम  आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल, संयुक्त कृषि निदेशक बस्ती मंडल श्रीराम बचन राम, उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार, मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य, अमित शुक्ला (पूर्व प्रदेश मंत्री, एबीवीपी), ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव, एडीओ (कृषि), एटीएम, बीटीएम तथा कृषि विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल ने किसानों से मिट्टी एवं जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। संयुक्त कृषि निदेशक श्रीराम बचन राम ने मृदा परीक्षण आधारित खेती अपनाने तथा विभागीय योजनाओं का लाभ उठाने पर बल दिया। उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार ने प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण एवं जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य ने पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील की, जबकि अमित शुक्ला ने युवाओं को कृषि नवाचारों एवं आधुनिक तकनीकों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव ने किसानों से वैज्ञानिक खेती अपनाकर उत्पादन एवं आय बढ़ाने का आह्वान किया। कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती के वैज्ञानिक डॉ. वी. बी. सिंह ने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जीवामृत, घनजीवामृत, मृदा परीक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन एवं जल संरक्षण** की तकनीकों की जानकारी दी। वहीं डॉ. अंजली वर्मा ने पोषण वाटिका, श्री अन्न, संतुलित आहार, स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उपयोग तथा भोजन में तेल, नमक एवं चीनी की मात्रा कम करने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वस्थ परिवार एवं कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया | कार्यक्रम के दौरान किसानों को “मिट्टी बचाओ–खेत बचाओ, प्राकृतिक खेती अपनाओ, जल बचाओ–भविष्य बचाओ तथा स्वस्थ भोजन–स्वस्थ जीवन” का संदेश दिया गया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 19:07:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और कृषि पर संकट बढ़  रहा है, कृषि वैज्ञानिक - प्रोफेसर प्यारेलाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</p><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हिमाचल प्रदेश में राजकीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे डॉक्टर अशोक कुमार प्यारेलाल ने कहा है कि मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और किसी  पर संकट बढ़ रहा है। लगातार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मध्य नजर कृषि पर इसका क्या असर पड़ेगा इस संबंध में उन्होंने इलाहाबाद ब्यूरो के प्रमुख दयाशंकर त्रिपाठी से विस्तार से बातचीत की जिस पर उन्होंने कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणाम के कई कारण बताएं।उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण वनों की कटाई और जैव विविधता का ह्रास जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब दूर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180800/climate-change-water-shortage-soil-erosion-the-crisis-on-our"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260605-wa0071.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</p><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हिमाचल प्रदेश में राजकीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे डॉक्टर अशोक कुमार प्यारेलाल ने कहा है कि मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और किसी  पर संकट बढ़ रहा है। लगातार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मध्य नजर कृषि पर इसका क्या असर पड़ेगा इस संबंध में उन्होंने इलाहाबाद ब्यूरो के प्रमुख दयाशंकर त्रिपाठी से विस्तार से बातचीत की जिस पर उन्होंने कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणाम के कई कारण बताएं।उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण वनों की कटाई और जैव विविधता का ह्रास जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब दूर की समस्या नहीं रही यह सब सीधे हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैंजैसे अत्यधिक मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव और घटती वायु गुणवत्ता।ऐसे परिवेश में हमारे किसान और कृषि पर संकट बढता जा रहा है।</p><p style="text-align:justify;">मौसम के बदलते तेवर से  किसानों बागवानो को  जहां बहुत अधिक लाभ  नहीं होने वाला है। वहीं दूसरी तरफ इस साल का मानसून आम जनता को  भी  परेशान करेगा। एक अनुमान के अनुसार इस साल सामान्य से कम वर्षा होगी और साथ में अल नीनो का प्रभाव  बहुत  ख़तरनाक होगा सूखा और गर्मी   बढ़ेगी जिसके कारण खरीफ की फसलों का उत्पादन काम होगा विशेष तौर पर उन क्षेत्रों में जहां फसलों की सिंचाई की सुविधा नही है वहां पर बिजाई देर से होगी।और उत्पादन भी कम होगा।और देश में महंगाई बढ़ेगी । आमदनी पिछले साल की अपेक्षा इस साल कम हहोगी।<br /></p><p style="text-align:justify;">आज विश्व का हर देश ईरान इजरायल अमेरिका युद्ध से भयंकर महंगाई के मोहाने पर खड़ा हो गया है। परन्तु युद्ध लड़ने वालों को मौसम मानसून  महंगाई और जनता से सरोकार नहीं है।  बस अपने को शक्तिशाली दिखाने की होड़ विश्व पटल पर लगी है कि मैं महान विजेता हूं ।इस युद्ध से भारत भी बहुत बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है।देश में महंगाई बढ़ रही है ऊर्जा का दाम बढ़ रहा है।तो वहीं यह मानसून भारत पर अलग तरह से कहर बरपाने का संकेत देकर भारत की गरीब जनता को और गरीबी में जीने के लिए मजबूर कर रहा है</p><p style="text-align:justify;">भारत को तीन  तरफ से मार पड़ेगा ।खराब मानूसन  खाद  की कमी और ऊर्जा ।भले टी वी डिवेट  पर सरकार के समर्थक  लोग आंकड़ों के जाल में जनता को फंसाते रहे परन्तु सच्चाई इन  आंकड़ों से इतर है। युद्ध कब तक चलेगा यह अगस्त या आगे तक भी चल सकता है फिर देश में नोट बन्दी की तरह हर चीज पर प्रतिबंध जैसे बैंकों से कम रुपया निकालना तेल गैस पर प्रतिबंध हर चीज का सीमित उपयोग।आदि  क ई तरह के उपाय करने पड़ सकते हैं। खाद के संकट को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने एक जुन से तीस जुन तक खेत बचाओ अभियान शुरू करने जा रहा है जिसमे कृषि वैज्ञानिक किसानों को रासायनिक खाद का उपयोग कम करने हरी खाद को बढ़ावा देने याद गोबर की खाद का अधिक उपयोग करने के फायदे बतायेंगे ।</p><p style="text-align:justify;">किसानों को अपने खेत की कम होती उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए कौन-सा सही तरीका लाभ कारी होगा साथ में खेती में लागत कम लगे और उत्पादन बढे यह एक सही कदम है।अब किसानों को आधुनिक खेती के साथ पुरानी खेती को अपनाने की जरुरत है जिसमें हरी खाद कमृपोष्ट खाद का बहुत महत्व है परन्तु बहुत से छोटे मझोले किसानों के पास पशुधन यानि बैल गाय भैंस नहीं के बराबर है जिससे गोबर की खाद बनेऔर खेत बचे साथ में उत्पादन भी बढ़े।सत्तर के दशक में कम्पोस्ट खाद बनाने की सरकार द्वारा योजना चला ई ग ई किसानों ने  गोबर गैस  प्लांट लगवाया खाद का उपयोग किया खेती से मजदुरो का पलायन होना शुरू हुआ पशुधन कम हुए तो गोबर गैस प्लांट बंद होते गये।अब खेती ट्रैक्टर रासायनिक खाद पर निर्भर है।</p><p style="text-align:justify;">हिमाचल के साथ देश भर में पिछले दो महीने से रुक रुक कर बे मौसमी बारिश ओला तेज हवा के कारण किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है । जनहानि भी हुई है।मौसम की यह बेरूखी  ऊपरी हिमाचल में सेव  के किसानों और अन्य फल के किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है  । यह भी  एक अनुमान है कि हिमाचल प्रदेश वर्ष में 5000 से 6000 करोड़ का सेव  का कारोबार  हर साल होता है। जो इस साल  बे मौसम बरसात ओलावृष्टि से सेव का उत्पादन कम होने का अनुमान है। जिसके कारण  किसानों को 1500 से 2000 करोड़ का नुकसान होगा।  कम पैदावार का नुकसान आम जनता को भी उठाना पड़ता है कि फल सब्जियां अनाज दूध तेल सब महगे दामो  पर बिकेंगे गरीब और गरीब होता जाएगा व्यापारी अमीर होता जाएगा।<br /></p><p style="text-align:justify;">आईएमडी के अनुसार बरसात  कम हो सकती है प्रशांत महासागर  में अल नीनो का प्रभाव बढ़ रहा   है। मानसून इस साल जल्दी आयेगा ।उत्तर और मध्य भारत में कम बारिश हो सकती है खेती में फसलों के साथ फल  जैसे सेव  नाशपाती  का उत्पादन के साथ  बिजली उत्पादन कम हो सकता है।  मानसून कमजोर होने पर सीधा असर  फसलो  किसानों की आय और खाद्यान्न की कीमतों पर पड़ता है।   कमजोर मानसून से कम पैदावार होगी खरीफ की फसलों के साथ सब्जी फल  महंगें होगे। सिंचाई की लागत भी बढेगी सरकार का प्रयास रहा है कि जल संचयन को बढ़ावा  जाए।  यह प्रयास बहुत अच्छा नहीं हो पाया गांव-गांव अमृत सरोवर बन रहा है।  परंतु लाभ उतना नहीं मिलता है जितनी उम्मीद सरकार कर रही है अमृतसरोवर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है यदि किसानों को यह जानकारी पहले से हो कि मानसून कमजोर है और कम वर्षा होगी तो  अधिक पानी की फसलों की जगह कम पानी की फसलो जैसे बाजार ज्वार मक्का उड़द मूंग  तिल अन्य मिलट की फसलों की बिजाई करने से बहुत लाभ हो सकता है ।  </p><p style="text-align:justify;">सरकार को इन फसलों की खरीद  को भी सुनिश्चित करना होगा।  अरहर  मूग उड़द बाजरा के साथ मिश्रित खेती अधिक लाभकारी होगी ।जब मानसून कमजोर होता है तब इस तरह की खेती किसानों के लिए लाभदायक होती  है। इस वर्ष   ओलावृष्टि वारिस जो  हिमाचल और भारत के अन्य प्रदेशों में हो रही है।  जिसके परिणामस्वरूप  सबसे ज्यादा सेवव फल   उत्पादक किसान प्रभावित हो रहे हैं ।इस बदले मानसून से हिमाचल  मे सेव  का उत्पादन 50 से 70% कम होगा। बे मौसमी  बारिश से सेव  के पौधों में फूल काम हो गए हैं । मधुमक्खियां  से परगण भी काम हुआ है ।  हिमाचल में ढाई लाख परिवार बागवानी विशेष तौर पर सेव के ऊपर  निर्भर है।<br /></p><p style="text-align:justify;">भारत कृषि प्रधान देश है खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर  है तो दूध उत्पादन में पहले पायदान पर दुनिया में टिका हुआ है । सब्जी फल उत्पादन में भी दुनिया में अपना स्थान बनाया हुआ है।  परंतु अभी तक हमारे वैज्ञानिकों ने मौसम के अनुकूल या कम बारिश होने पर उस तरह के बीजों का ईजाद नहीं कर पाए हैं जो कम पानी में अधिक पैदावार दे सके। कुछ किस्में हैं  परन्तु उतना लाभदायक नहीं है। कमजोर मानसुन होने पर खाघानो के साथ फल सब्जियों का उत्पादन कम न हो । और देश में कम उत्पादन के कारण महंगाई न बढ़े परन्तु ऐसा नहीं हो पा रहा है।</p><p style="text-align:justify;"> किसानों को भी खेती से घाटा न हो वह भी  राहत महसुस करें कि कमजोर मानसून होने पर आय कम नहीं होंगी बस फसल बदल दे तो निश्चित ही आय होगी। यह देखा गया है कि धान लगाने वाला किसान जल्दी फसल नहीं बदलते है । वह धान पर ही टिका रहता है धान में अधिक सिंचाई के कारण लागत बढ़ जाता है।बाजार में सही मूल्य नहीं मिलता  है।तब किसानो  को नुकसान उठाना ही होता है ।अगर मानुसन के अनुरूप किसान सही फसल का चयन कर लेता है तो कभी भी किसान नुकसान में नहीं होगा बस उसके उत्पाद का सही बाजार मूल्य सरकार दे।<br /></p><p style="text-align:justify;">खरीफ के मौसम में  अधिकांश तौर पर पंजाब हरियाणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजस्थान के किसान धान की खेती करते हैं कम बारिश के कारण धान की खेती में अधिक सिंचाई की जरूरत होगी जो महंगे डीजल के कारण पैदावार में लागत  मूल्य को बढ़ाता है।बाजार में मूल्य कम मिलता है। कमजोर मानसून से होने वाले नुकसान से बचने के लिए बस मोटे अनाजों की खेती है  एक मात्र सही उपाय है।जिसमें पानी की बहुत कम जरुरत होती है। मिश्रित खेती जैसे बाजरा उड़द अरहर बाजरा अहरह उड़द की खेती लाभ कारी होगी।। </p><p style="text-align:justify;">इस तरह की खेती से डीजल और  बिजली की बचत भी हो सकती है।  साथ में रसायनिक खाद की जरुरत भी कम पड़ती है।इस वर्ष किसानों पर तीन तरह से   मार पड़ेगी पहली मार कि मानसुन कमजोर है। बारिश कम होंगी। दुसरी मार खाद भी कम मात्रा में मिलेगा।  तीसरा ऊर्जा की कमी ।कारण ईरान अमेरिका इजरायल युद्ध से देश में यूरिया के साथ साथ पोटाश फास्फोरस जैसे खादों का जो आयात होता वह भी कम होगा जिससे किसानों को खरीफ के फसलों के लिए भरपूर रसायनिक खाद नहीं मिलेगा।</p><p style="text-align:justify;">पिछले साल देश ने बड़े शोर के साथ मोटे अनाजों के उत्पादन और उपयोग पर बहुत गोष्ठी और सेमीनार करके किसानों को जागरूक किया और इन मोटे अनाजों के उपयोग से लाभ के बारे में भी खुब चर्चा हुई परन्तु उत्पादन बढ़ा कितना इस पर बात उसके बाद नही हुआ। नहीं यह बताया गया कि देश में क्या यह भोजन की थाली में आया या बस पशुचारा में गया मुफ्त अनाज योजना में मोटे अनाज को वितरित किया गया परन्तु अधिकांश परिवारो  को जो मुफ्त में दिया गया उसे बाजार में बेच दिये।अब देश को मुफ्त अनाज वितरण को बन्द करें।<br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>विचारधारा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 23:16:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर”</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dsc_0515.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर” जैसे समकालीन और अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर गहन चर्चा हुई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण करना और भविष्य के लिए टिकाऊ एवं तकनीकी समाधान प्रस्तुत करना था।</p><p style="text-align:justify;">प्रथम तकनीकी सत्र में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए पशुधन क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पशुधन की उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है, जिसका एक प्रमुख कारण देशी नस्लों पर अत्यधिक निर्भरता है। इसके अतिरिक्त चारे की कमी, पशु-चिकित्सा सुविधाओं का अभाव तथा बाजार तंत्र में बिचौलियों की भूमिका भी किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत नस्लों के विकास, चारा प्रबंधन और सुदृढ़ पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर बल दिया।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img_0564.jpg.jpeg" alt="विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण" width="1200" height="800"></img></p><p style="text-align:justify;">पोल्ट्री एवं पशुधन क्षेत्र में एंटीबायोटिक के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की गई। विशेषज्ञों ने इसे एक उभरते खतरे के रूप में चिन्हित करते हुए कहा कि एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस भविष्य में मानव और पशु स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इस दिशा में वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित दवा उपयोग तथा किसानों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">बकरी पालन, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, पर केंद्रित सत्र में उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित प्रबंधन, बेहतर नस्लों के चयन और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से इस क्षेत्र में आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को भी विशेष महत्व दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके समाधान के रूप में गोबर, गोमूत्र और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी सहायक होती है।</p><p style="text-align:justify;">मृदा स्वास्थ्य पर हुई चर्चा में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश में मृदा जैविक कार्बन का स्तर लगातार गिर रहा है, जो कृषि के लिए गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खाद, हरी खाद और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। इन उपायों से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि जल धारण क्षमता में भी सुधार होगा, जिससे जल संकट की समस्या को कम किया जा सकेगा।</p><p style="text-align:justify;">“डिजिटल एग्रीकल्चर” पर केंद्रित सत्र में आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सटीक खेती (प्रिसीजन फार्मिंग) और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किसानों को मौसम, फसल स्वास्थ्य और बाजार मूल्य की सटीक जानकारी मिल सकती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव है। यह तकनीकी हस्तक्षेप कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</p><p style="text-align:justify;">समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिनेश प्रताप सिंह (राज्यमंत्री, उद्यान, कृषि विपणन, कृषि निर्यात) उपस्थित रहे। उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और संस्थानों को सम्मानित किया। इस अवसर पर 14 एकेडमी अवार्ड, 9 फेलो अवार्ड और 7 ऑनरेरी फेलोशिप प्रदान की गईं, जो कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में यह बात कही कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल तकनीक और टिकाऊ पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।</p><p style="text-align:justify;">इस प्रकार, कृषि विज्ञान कांग्रेस का यह आयोजन न केवल वर्तमान चुनौतियों पर विचार करने का मंच बना, बल्कि भविष्य की कृषि को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 20:18:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिविर के पांचवें दिन जल संरक्षण एवं मृदा संरक्षण जागरूकता अभियान चला कर ग्रामीणों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कोरांव प्रयागराज। </strong>बलराम महाविद्यालय के पांचवें दिन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा जैविक, खेती मृदा संरक्षण तथा जल संरक्षण विषयों पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने बताया कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा होती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त मृदा संरक्षण (मिट्टी संरक्षण) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि पेड़ पौधे लगाकर खेतों में मेड बंदी करके संतुलित</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173419/on-the-fifth-day-of-the-camp-villagers-were-made"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260316-wa0137.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कोरांव प्रयागराज। </strong>बलराम महाविद्यालय के पांचवें दिन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा जैविक, खेती मृदा संरक्षण तथा जल संरक्षण विषयों पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने बताया कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त मृदा संरक्षण (मिट्टी संरक्षण) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि पेड़ पौधे लगाकर खेतों में मेड बंदी करके संतुलित खेती अपनाकर मिट्टी के कटाव को रोका जा सकता है। यह कार्यक्रम बलराम महाविद्यालय के प्रबंधिका श्रीमती उमा सिंह के निर्देशन में संचालक पूर्वक संपन्न हुआ। इस मौके कार्यक्रमाधिकारी गौरव वर्मा एसोसिएट डायरेक्टर शाश्वत मिश्रा, डिप्टी डायरेक्टर शालिनी श्रीवास्त प्राचार्य डॉ अरुण कुमार सिंह डॉ अशोक उत्तम डॉ0 वी0 पी0 सिंह, डॉ अजय सिंह, संध्या पाण्डेय, आशीष पाण्डेय, बृजेश कुमार और ग्रामीण उपस्थित रहे।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:56:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जैविक खेती से मिट्टी में उर्वरा शक्ति बनी रहती हैं: राजाराम</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर । </strong>बांसी ब्लाक के ग्राम जिगनिहवा में गुरुवार को कृषि विभाग द्वारा आत्मा योजन के तहत ग्राम स्तरीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जैविक खेती पर आधारित रहा। ए, डी, ओ, कृषि राजाराम यादव ट्रेनर द्वारा जैविक खेती  को एक पारिस्थितिकी खेती का तरीका बताया जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण भी  संतुलित रहता है। जैविक खेती में जैविक मूल के उर्वरकों जैसे कंपोस्ट खाद हरी खाद और हड्डी के चूर्ण का इस्तेमाल किया जाता है। प्राकृतिक प्रक्रियाओं जो जैव विविधता स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक काम किया जाता है।</div>
<div>  </div>
<div>जैविक खेती</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149520/rajaram-remains-fertility-in-soil-due-to-organic-farming"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/1741269351502.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर । </strong>बांसी ब्लाक के ग्राम जिगनिहवा में गुरुवार को कृषि विभाग द्वारा आत्मा योजन के तहत ग्राम स्तरीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जैविक खेती पर आधारित रहा। ए, डी, ओ, कृषि राजाराम यादव ट्रेनर द्वारा जैविक खेती  को एक पारिस्थितिकी खेती का तरीका बताया जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण भी  संतुलित रहता है। जैविक खेती में जैविक मूल के उर्वरकों जैसे कंपोस्ट खाद हरी खाद और हड्डी के चूर्ण का इस्तेमाल किया जाता है। प्राकृतिक प्रक्रियाओं जो जैव विविधता स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक काम किया जाता है।</div>
<div> </div>
<div>जैविक खेती से खरपतवार रोग और कीटों का नियंत्रण होता है। जैविक खेती से मिट्टी के सूक्ष्मजीवो की क्रिया से फसल को पोषक तत्व मिलते हैं। मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता बनी रहती है। उत्तर प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है। रासायनिक उर्वरकों के दाम किसानों के लिए संकट उत्पन्न कर रहे हैं ।किसानों को प्राचीन कृषि पद्धतियों को अपनाना चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>जैविक उर्वरक का प्रयोग ढांचा, सनई और दलहन  फसलों की खेती कर मिट्टी को स्वस्थ और उपजाऊ बनाना चाहिए सरकार किसानों को दलहन ,सनई, ढैचा के बीज सस्ती दरों पर नैडप कंपोस्ट खाद बनाने के लिए किसानों को जमीनी कार्य करना चाहिए । इस दौरान क्षेत्र के नागेंद्र, अंगद, अलगू, जैसराम, वचन, जोखन, रामायन, लक्ष्मी प्रसाद , जयकरन, नंदलाल, धर्मेंद्र, मिठाई,राम सवारे ,संतोष,कविता, नीलम, प्रभावती आदि सैकड़ो की संख्या में लोग मौजूद रहे।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Mar 2025 14:09:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि मेले में जैविक खेती व मिलेट्स के बारे में दी गयी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>ज्ञानपुर।</strong> विकास खण्ड औराई प्रांगण में मंगलवार को जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादन गोष्ठी, सिलेट्स, जैविक मेला का आयोजन किया गया।आयोजन  जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी भदोही की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी ने  लगे स्टालों का अवलोकन किया । उप कृषि निदेशक डा० अश्वनी कुमार सिंह ने कार्यक्रम को रेखांकित करते हुए बताया कि खरीफ उत्पादन गोष्ठी, कृषकों को जागरूक करने के उद्देश्य से किया जाता है। इनके द्वारा जैविक खेती के बारे में बताया कि रसायनिक खेती से लागत अधिक आती है और रसायन युक्त अन्न उत्पादन होता है, जिससे शरीर में अनेक प्रकार की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144461/information-given-about-organic-farming-and-millets-in-agricultural-fair"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/img-20240903-wa0760.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>ज्ञानपुर।</strong> विकास खण्ड औराई प्रांगण में मंगलवार को जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादन गोष्ठी, सिलेट्स, जैविक मेला का आयोजन किया गया।आयोजन  जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी भदोही की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी ने  लगे स्टालों का अवलोकन किया । उप कृषि निदेशक डा० अश्वनी कुमार सिंह ने कार्यक्रम को रेखांकित करते हुए बताया कि खरीफ उत्पादन गोष्ठी, कृषकों को जागरूक करने के उद्देश्य से किया जाता है। इनके द्वारा जैविक खेती के बारे में बताया कि रसायनिक खेती से लागत अधिक आती है और रसायन युक्त अन्न उत्पादन होता है, जिससे शरीर में अनेक प्रकार की बीमारियां हो रही है।</div>
<div> </div>
<div>मिलेटस खेती के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी।  इनके द्वारा बागवानी में आम्, अमरूद, केला की खेती की जानकारी दी गयी। डा० शिशिर कुमार कृषि वैज्ञानिक नैनी ने फसल प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दिया व बताया गया कि मोटे अनाज के सेवन से स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण भी ठीक रहता है।  सतीश कुमार पाण्डेय जिला कृषि अधिकारी ने सावा, कोदो, रागी की खेती के बारे में विस्तृत जानकारी दिया गया। इन्होंने बताया कि मोटे अनाज के उत्पाद में कम पानी और बिना रसायन के पैदा होता है। </div>
<div> </div>
<div> मुख्य विकास अधिकारी डा० शिवाकान्त द्विवेदी ने मेले के उ‌द्देश्य की जानकारी देते हुए बताया कि खरीफ उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गष्ठियों होती हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि हो सके। जैविक खेती के बारे में बताया कि सरकार रसायन युक्त उत्पाद को कम करने के उद्देश्य से जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी प्रकार मिलेट्स की खेती हेतु कृषकों को प्रेरित किया जा रहा है। मोटे अनाज से शरीर में रोग कम होता है और शरीर स्वस्थ रहता है।</div>
<div> </div>
<div>विशिष्ट अतिथि दीनानाथ भाष्कर विधायक औराई ने कृषकों से अपील किया कि जैविक खेती एवं मिलेट्स के बारे में जो भी कृषि वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी जानकारी दी जा रही है उसे सीखकर अन्य कृषकों को बतायेंगे और इसे अपनाकर स्वस्थ अनाज के रूप में इस्तेमाल करेंगे और बिकी करके अधिक लाभ कमायेंगे। इस अवसर पर अरुणेन्द्र कुमार चौबे, हृदयतोष उपाध्याय,राम अकबाल तिवारी, सहित जनपद दूर-दराज के बडी संख्या में किसान उपस्थित रहें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/144461/information-given-about-organic-farming-and-millets-in-agricultural-fair</link>
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                <pubDate>Wed, 04 Sep 2024 16:50:22 +0530</pubDate>
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