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                <title>green energy - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>green energy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दासिया में बन रहे इथेनॉल प्लांट सभी मानकों का हो रहा पालन,अक्टूबर 2026 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य- निदेशक रोहन जायसवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती  जिले में रुधौली विधानसभा क्षेत्र के दासिया गांव में निर्माणाधीन अनीता डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित इथेनॉल प्लांट को लेकर सोमवार को रेलवे स्टेशन रोड स्थित एक निजी होटल में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। कंपनी के निदेशक रोहन जायसवाल और अन्य अधिकारियों ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए इसे पर्यावरण अनुकूल एवं आधुनिक तकनीक पर आधारित बताया।रोहन जायसवाल ने कहा कि प्लांट में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे किसी भी प्रकार का अशोधित या हानिकारक अपशिष्ट जल बाहर नहीं छोड़ा जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी मानकों का कड़ाई</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182879/ethanol-plants-being-built-in-dacia-are-following-all-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260706-wa0065.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती  जिले में रुधौली विधानसभा क्षेत्र के दासिया गांव में निर्माणाधीन अनीता डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित इथेनॉल प्लांट को लेकर सोमवार को रेलवे स्टेशन रोड स्थित एक निजी होटल में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। कंपनी के निदेशक रोहन जायसवाल और अन्य अधिकारियों ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए इसे पर्यावरण अनुकूल एवं आधुनिक तकनीक पर आधारित बताया।रोहन जायसवाल ने कहा कि प्लांट में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे किसी भी प्रकार का अशोधित या हानिकारक अपशिष्ट जल बाहर नहीं छोड़ा जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा तथा अपशिष्ट का वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण किया जाएगा।एनओसी संबंधी सवालों के जवाब में कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय, प्रादेशिक और स्थानीय स्तर पर आवश्यक सभी विभागीय अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किए जा चुके हैं। साथ ही जिला पंचायत एवं ग्राम पंचायत से भी अनुमति मिल चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार शिलान्यास से पूर्व मुख्य राजस्व अधिकारी की मौजूदगी में किसानों के साथ बैठक की गई थी, जिसके बाद नियमानुसार निर्माण कार्य शुरू कराया गया।कंपनी का दावा है कि परियोजना का लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और अक्टूबर 2026 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। प्लांट में किसानों से टूटे चावल, मक्का, भूसी सहित अन्य कृषि उत्पाद खरीदकर इथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब दो हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। प्रेसवार्ता के दौरान पर्यावरणीय प्रभाव, भूजल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय लोगों की आशंकाओं से जुड़े सवाल भी उठाए गए, जिनका कंपनी प्रतिनिधियों ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि परियोजना का संचालन सभी वैधानिक और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप किया जाएगा तथा संबंधित विभागों की नियमित निगरानी भी होती रहेगी। इस अवसर पर कंपनी के प्रोपराइटर सुधीर जायसवाल, यूनिट हेड आर.के. दुबे, चीफ कंसल्टेंट पी.एन. पांडेय, तकनीकी विशेषज्ञ तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि मौजूद रहे।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 21:58:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रामीण भारत की शिक्षा और स्वास्थ्य को ऊर्जा दे सकते हैं सोलर प्लांट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> भारत वर्ष </span>2047 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">श्री नरेंद्र मोदी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित ऊर्जा और आधुनिक शिक्षा जैसे अनेक महत्वाकांक्षी अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन इन सभी योजनाओं की सफलता का आधार एक ही है निर्बाध बिजली आपूर्ति।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के महानगरों और बड़े शहरों में बिजली की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए वहां डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुँच रहा है। इसके विपरीत तहसील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेज और अस्पताल आज</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182800/solar-plants-can-provide-energy-to-the-education-and-health"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/image1170x530cropped.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> भारत वर्ष </span>2047 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">श्री नरेंद्र मोदी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित ऊर्जा और आधुनिक शिक्षा जैसे अनेक महत्वाकांक्षी अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन इन सभी योजनाओं की सफलता का आधार एक ही है निर्बाध बिजली आपूर्ति।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के महानगरों और बड़े शहरों में बिजली की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए वहां डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुँच रहा है। इसके विपरीत तहसील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेज और अस्पताल आज भी बिजली की अनियमित आपूर्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कम वोल्टेज और बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में स्मार्ट क्लास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल लैब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंप्यूटर शिक्षा और आधुनिक चिकित्सा उपकरण केवल सरकारी योजनाओं की फाइलों तक सीमित होकर रह जाते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह भी है कि एक ओर सरकार सरकारी संस्थानों को हाईटेक बनाने पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर इन संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए सबसे आवश्यक संसाधन बिजली की स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। बिना बिजली के डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की कल्पना अधूरी है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी स्थिति में सरकार को एक दूरदर्शी निर्णय लेते हुए देश के सभी शासकीय स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और अस्पतालों में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रूफटॉप सोलर प्लांट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थापित करने की राष्ट्रीय योजना लागू करनी चाहिए। यह केवल वैकल्पिक ऊर्जा का उपाय नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को एक साथ मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम होगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सोलर प्लांट स्थापित होने से इन संस्थानों को दिनभर निर्बाध बिजली मिलेगी। विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना व्यवधान जारी रहेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगी तथा अस्पतालों में जीवन रक्षक उपकरण बिजली संकट से प्रभावित नहीं होंगे। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का हर वर्ष बिजली बिलों पर होने वाला करोड़ों रुपये का व्यय भी काफी हद तक कम हो जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्बन उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता केवल योजनाएं बनाने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें धरातल पर टिकाऊ बनाने की है। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि सरकार वास्तव में विकसित भारत का सपना साकार करना चाहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना होगा। शासकीय स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और अस्पतालों में सोलर प्लांट लगाने की पहल इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हो सकती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विकसित भारत की मजबूत नींव तभी रखी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब गांव का विद्यालय और अस्पताल भी शहरों की तरह रोशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक और ऊर्जा संपन्न होंगे।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 22:24:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेट्रोल में एथेनॉल: सस्ते ईंधन का सपना या गाड़ियों के लिए खतरा? लोगों में बढ़ता डर</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote><p style="text-align:justify;">कानपुर। 2020 से सरकार ने E20 यानी 20% एथेनॉल वाला पेट्रोल पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य रखा है। 2025 तक ज्यादातर शहरों में यही पेट्रोल मिल रहा है। मकसद साफ है: तेल आयात कम करना, किसानों को फायदा पहुंचाना और प्रदूषण घटाना। लेकिन सड़कों पर एक अलग बहस चल रही है - "क्या एथेनॉल मेरी गाड़ी का इंजन खराब कर देगा?" अभी तक ईरान - इजरायल युद्ध से पहले पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथेनॉल मिला कर बेचा जा रहा था।</p><p style="text-align:justify;"> एक्सपर्ट बताते हैं कि दस फीसदी मिलावट को भारत की सभी गाड़ियां सह लेंगी लेकिन जैसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181925/ethanol-in-petrol-dream-of-cheap-fuel-or-danger-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(1).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote><p style="text-align:justify;">कानपुर। 2020 से सरकार ने E20 यानी 20% एथेनॉल वाला पेट्रोल पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य रखा है। 2025 तक ज्यादातर शहरों में यही पेट्रोल मिल रहा है। मकसद साफ है: तेल आयात कम करना, किसानों को फायदा पहुंचाना और प्रदूषण घटाना। लेकिन सड़कों पर एक अलग बहस चल रही है - "क्या एथेनॉल मेरी गाड़ी का इंजन खराब कर देगा?" अभी तक ईरान - इजरायल युद्ध से पहले पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथेनॉल मिला कर बेचा जा रहा था।</p><p style="text-align:justify;"> एक्सपर्ट बताते हैं कि दस फीसदी मिलावट को भारत की सभी गाड़ियां सह लेंगी लेकिन जैसे ही ईरान - इजरायल युद्ध शुरू हुआ और देश में पेट्रोल की कमी हुई सरकार ने ई- 20 पेट्रोल सभी पेट्रोल पंप पर बेचना शुरू कर दिया। सरकार की इस नीति से लोगों में एक नई बहस छिड़ गई है। बहुत से एक्स्पर्ट बताते हैं कि ई-20 पेट्रोल 2023 से पहले की गाड़ियों के लिए ठीक नहीं है एक तो इससे माइलेज पर असल पड़ रहा है और दूसरा यह इंजन के कई पार्ट्स को भी ख़राब कर देगा।</p><p style="text-align:justify;"> केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोगों की इस बात को गलत बताया है और कहा है कि ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। ई-20 के बाद, केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ई-85 और इसके बाद 100 फीसदी एथेनॉल को भी मंजूरी दे दी। सरकार का मानना है कि इससे करोड़ों डालर का फायदा होगा जिसे हम अन्य विकास कार्यों में लगा सकते हैं।</p><p style="text-align:justify;"><br />एथेनॉल क्यों बढ़ाया जा रहा है? आर्थिक कारण - भारत हर साल 85% कच्चा तेल आयात करता है। 2024 में इस पर $180 बिलियन खर्च हुए। ई-20 से हर साल 4-5 बिलियन डॉलर की बचत का अनुमान है। किसान हित- एथेनॉल गन्ना, मक्का और अनाज से बनता है। इससे चीनी मिलों और किसानों को नया बाजार मिला है। पर्यावरण-  एथेनॉल जलने पर CO और CO2 कम निकलता है। सरकार का दावा है कि ई20 से सालाना 50 लाख टन CO2 कम होगी।</p><p style="text-align:justify;"><br />           लोगों का डर कहां से आ रहा है? सोशल मीडिया और मैकेनिकों की दुकानों पर 4 बातें सबसे ज्यादा सुनाई देती हैं: माइलेज घट रहा है- एथेनॉल की कैलोरी वैल्यू पेट्रोल से 30% कम होती है। यानी ई-20 पर गाड़ी को उतनी ही पावर के लिए ज्यादा ईंधन जलाना पड़ता है। टेस्ट में 3-6% तक माइलेज ड्रॉप दिखा है। रोज 50 km चलने वाले के लिए महीने का खर्च 200-400 रु बढ़ सकता है।<br /> रबर और प्लास्टिक पार्ट्स का खराब होना- पुरानी गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले रबर होज, सील और गैस्केट एथेनॉल से जल्दी घिसते हैं। 2010 से पहले की गाड़ियां ई-10 के लिए भी डिजाइन नहीं थीं। अगर टैंक में पानी चला गया तो एथेनॉल उसे एब्जॉर्ब कर लेता है और इंजन में जंग लग सकती है। स्टार्टिंग और परफॉर्मेंस इश्यू- ठंड में एथेनॉल ब्लेंड स्टार्ट होने में दिक्कत करता है। कुछ लोग कहते हैं कि गाड़ी "खींचती" नहीं है, खासकर पहाड़ों और हाईवे पर।</p><p style="text-align:justify;"><br />पारदर्शिता की कमी-  पंप पर अक्सर ये नहीं लिखा होता कि टैंक में E10 है या E20। लोग अनजाने में भरवा लेते हैं और बाद में दिक्कत होने पर एथेनॉल को दोष देते हैं। सरकार और ऑटो कंपनियां क्या कहती हैं? सड़क परिवहन मंत्रालय और IOC का कहना है कि 2023 के बाद बनी सभी गाड़ियां E20 कम्पैटिबल हैं। Maruti, Hyundai, Tata, Mahindra ने अपनी नई गाड़ियों को E20 Ready बताया है। पुरानी गाड़ियों के लिए सरकार ने "E20 मैटेरियल कम्पैटिबल" किट का ऑप्शन दिया है, जिसमें रबर पार्ट्स बदलने पड़ते हैं। खर्च 3,000-8,000 रु तक आ सकता है। तकनीकी हकीकत क्या है? इंजन- अगर गाड़ी E20 कम्पैटिबल है तो इंजन पर कोई फर्क नहीं पड़ता। ECU सॉफ्टवेयर एथेनॉल के हिसाब से फ्यूल मिक्स एडजस्ट कर देता है। फ्यूल सिस्टम- पुरानी गाड़ियों में नायलॉन और स्टेनलेस स्टील पार्ट्स होते हैं जो ठीक रहते हैं। लेकिन पुराने रबर वाले पार्ट्स 2-3 साल में बदलने पड़ सकते हैं। </p><p style="text-align:justify;">लॉन्ग टर्म इफेक्ट- अभी E20 देश में सिर्फ 2-3 साल हुआ है। 10 साल बाद इंजन पर क्या असर होगा, इसका बड़ा डेटा उपलब्ध नहीं है। दुनिया में क्या हो रहा है? ब्राजील 40 साल से E27 चला रहा है। वहां 90% गाड़ियां Flex Fuel हैं जो E0 से E100 तक चलती हैं। अमेरिका में E10 स्टैंडर्ड है। भारत ने सीधे E10 से E20 पर छलांग लगाई, इसलिए लोगों को झटका लगा। आम आदमी क्या करे? गाड़ी के फ्यूल लिड या मैनुअल पर लिखा होता है - E10, E20 या E20 Compatible। पुरानी गाड़ी है तो- अगर गाड़ी 2015 से पुरानी है और रोज 80-100 km चलती है, तो रबर पार्ट्स की जांच करवा लो। जरूरत लगे तो बदल दो। पंप पर पूछो भरवाने से पहले पूछ लो कि E10 है या E20।</p><p style="text-align:justify;"><br />पैनिक मत करो- 2-3% माइलेज ड्रॉप और थोड़ी मेंटेनेंस के अलावा ज्यादातर नई गाड़ियों में दिक्कत नहीं आ रही। एथेनॉल नीति देश के लिए जरूरी है - विदेशी मुद्रा बचती है, किसान को फायदा होता है, प्रदूषण घटता है। लेकिन सरकार ने कम्युनिकेशन में कमी रखी। लोगों को लगा कि उनकी 5 साल पुरानी गाड़ी एक दिन में "आउटडेटेड" हो गई। अगर ऑटो कंपनियां फ्री सर्विस कैंप लगाकर पुरानी गाड़ियों की जांच करें और पंप पर क्लियर लेबलिंग हो, तो ये डर काफी हद तक कम हो सकता है। अभी समस्या तकनीक से ज्यादा भरोसे की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:33:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिलाधिकारी ने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रगति की समीक्षा की</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी  मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में गुरूवार को संगम सभागार में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के सम्बंध में बैठक आयोजित की गयी तथा सभी सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। बैठक में सौर ऊर्जा कनेक्शन के लिए प्राप्त आवेदन, स्वीकृत आवेदन एवं लम्बित आवेदन, डिस्कॉम, बैंक एवं वेण्डर्स द्वारा आवेदन निस्तारण एवं लम्बित आवेदनों की स्थिति, विद्युत विभाग के अन्तर्गत निरीक्षण हेतु लम्बित प्रकरण एवं पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजनान्तर्गत बैंक स्तर पर लोन निर्गत/पार्शियल पेमेण्ट सम्बंधित लम्बित प्रकरणों के बारे में विस्तार से समीक्षा की गयी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">          जिलाधिकारी ने पीओनेडा से पीएम</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181029/district-magistrate-reviewed-the-progress-of-pm-suryghar-free-electricity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0121.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी  मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में गुरूवार को संगम सभागार में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के सम्बंध में बैठक आयोजित की गयी तथा सभी सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। बैठक में सौर ऊर्जा कनेक्शन के लिए प्राप्त आवेदन, स्वीकृत आवेदन एवं लम्बित आवेदन, डिस्कॉम, बैंक एवं वेण्डर्स द्वारा आवेदन निस्तारण एवं लम्बित आवेदनों की स्थिति, विद्युत विभाग के अन्तर्गत निरीक्षण हेतु लम्बित प्रकरण एवं पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजनान्तर्गत बैंक स्तर पर लोन निर्गत/पार्शियल पेमेण्ट सम्बंधित लम्बित प्रकरणों के बारे में विस्तार से समीक्षा की गयी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">     जिलाधिकारी ने पीओनेडा से पीएम सूर्यघर योजना के प्रगति के बारे में जानकारी लेते हुए निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत प्रगति सुनिश्चित किये जाने के निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिए है। उन्होंने पीओ नेडा से टॉप टेन पेण्डेंसी वाले वेण्डरों के विरूद्ध कार्रवाई हेतु शासन को पत्र प्रेषित करने के लिए कहा है। उन्होंने पीओ नेडा से सौर ऊर्जा कनेक्शन के लिए प्राप्त आवेदन, स्वीकृत आवेदन एवं लम्बित आवेदन की स्थिति की जानकारी ली, जिसपर बताया गया कि कुल 33995 आवेदन प्राप्त हुए है, जिनमें 33978 आवेदन स्वीकृत हुए है तथा 32823 आवेदन के लिए वेण्डर का सेलेक्शन हो चुका है, जिसमें से 19955 में इंस्टालेशन का कार्य पूर्ण हो चुका है। उन्होंने पीओ नेडा को विद्युत विभाग व बैंक के अधिकारियों एवं पीएम सूर्यघर योजना व क्लीन एनर्जी का वेण्डरों एवं लक्षित विभाग के साथ बैठक कर पेंडेसी को समाप्त करने और उपभोक्ताओं का चिन्हांकन करने के लिए कहा है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने  कहा कि प्रत्येक वेण्डर को पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का जो लक्ष्य तय किया गया है, उस लक्ष्य के अनुसार हर घर में सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्राथमिकता पर कार्यवाही करें।  विद्युत विभाग के सभी अधिकारियों को उनके स्तर पर पीएम सूर्यघर योजना से सम्बंधित लम्बित सभी पेण्डेंसी को अभियान चलाकर प्राथमिकता पर निस्तारित करते हुए ज्यादा से ज्यादा सोलर कनेक्शन कराये जाने के लिए कहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> बैठक में उपस्थित एलडीएम से बैंक स्तर पर लम्बित प्रकरणों की नियमित समीक्षा करते हुए जल्द से जल्द पेण्डेंसी को समाप्त कराने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्यघर योजना के वेण्डरों के द्वारा सोलर सिस्टम लगाये जाने में अच्छा काम करने वाले वेंडरों को प्रमोट करें।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने बैठक में उपस्थित एडीओ पंचायतों से प्रत्येक विकास खण्ड में एक ग्राम का सोलर ग्राम के रूप में चयन करते हुए गांव के शत-प्रतिशत घरों में सोलर कनेक्शन कराये जाने के लिए कहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने सभी आवासों में पीएम सूर्यघर योजना के तहत सोलर सिस्टम लगाये जाने के लिए निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना फ्लैगशिप स्कीम है, जिसमें घरों में सोलर कनेक्शन लगाये जाने पर सरकार के द्वारा सब्सिडी प्रदान की जा रही है और सोलर कनेक्शन होने से विद्युत खपत में कमी आयेंगी तथा विद्युत बिल में बचत भी होगी, इसलिए सभी लोग इस योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाये।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">     इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, जिला पंचायतराज अधिकारी रवि शंकर द्विवेदी, पीओ नेडा  कोमिल द्विवेदी, विद्युत विभाग के अधिकारी सहित अन्य सम्बंधित अधिकारी उपस्थित रहे।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 20:44:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पृथ्वी दिवस: पर्यावरण संरक्षण की चेतना और मानव अस्तित्व का आधार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">हर वर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला पृथ्वी दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता के लिए चेतावनी और संकल्प का प्रतीक है। यह दिन हमें यह समझाने का प्रयास करता है कि जिस पृथ्वी पर हम अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उसकी सुरक्षा और संतुलन बनाए रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आधुनिक युग में विज्ञान और तकनीक के विकास ने मानव जीवन को सरल और सुविधाजनक बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही हमने प्रकृति का अत्यधिक दोहन भी किया है, जिसके कारण आज पर्यावरण गंभीर संकट का सामना कर रहा है।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176807/earth-day-is-the-consciousness-of-environmental-protection-and-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/world-earth-day.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">हर वर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला पृथ्वी दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता के लिए चेतावनी और संकल्प का प्रतीक है। यह दिन हमें यह समझाने का प्रयास करता है कि जिस पृथ्वी पर हम अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उसकी सुरक्षा और संतुलन बनाए रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आधुनिक युग में विज्ञान और तकनीक के विकास ने मानव जीवन को सरल और सुविधाजनक बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही हमने प्रकृति का अत्यधिक दोहन भी किया है, जिसके कारण आज पर्यावरण गंभीर संकट का सामना कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पृथ्वी दिवस की शुरुआत वर्ष 1970 में अमेरिकी सीनेटर गैलॉर्ड नेल्सन द्वारा की गई थी। 1969 में कैलिफ़ोर्निया के सांता बारबरा में हुए भीषण तेल रिसाव ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया और उन्होंने महसूस किया कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उन्होंने 22 अप्रैल 1970 को एक बड़े स्तर पर "टीच-इन" कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें लाखों लोगों ने भाग लिया। इस आंदोलन को सफल बनाने में डेनिस हेज़ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह आयोजन इतना प्रभावशाली सिद्ध हुआ कि यह एक जन आंदोलन में परिवर्तित हो गया और इसके परिणामस्वरूप पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पृथ्वी दिवस मनाने का विशेष कारण आज की पर्यावरणीय परिस्थितियों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वर्तमान समय में पृथ्वी अनेक समस्याओं से जूझ रही है, जिनमें जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, वनों की कटाई, जैव विविधता का ह्रास और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन प्रमुख हैं। औद्योगिकीकरण और शहरीकरण ने जहां एक ओर विकास को गति दी है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण के संतुलन को भी बिगाड़ दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे ग्लेशियर पिघल रहे हैं और समुद्र का स्तर बढ़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक आपदाओं की संख्या और तीव्रता में वृद्धि हो रही है। ऐसी स्थिति में पृथ्वी दिवस हमें यह चेतावनी देता है कि यदि हमने समय रहते पर्यावरण की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाला भविष्य अत्यंत कठिन हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पृथ्वी दिवस का उद्देश्य केवल समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करना नहीं है, बल्कि लोगों को समाधान के लिए प्रेरित करना भी है। इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों, अभियानों और गतिविधियों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है। विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न संस्थाओं में वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान और पर्यावरण से संबंधित संगोष्ठियों का आयोजन किया जाता है। इसके माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन ला सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समय के साथ पृथ्वी दिवस एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। 1990 में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने लगा और आज यह 190 से अधिक देशों में व्यापक रूप से मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 2009 में 22 अप्रैल को "अंतर्राष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस" के रूप में मान्यता देकर इसकी वैश्विक पहचान को और सुदृढ़ किया। इसके अतिरिक्त, 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हर वर्ष पृथ्वी दिवस एक नई थीम के साथ मनाया जाता है, जो वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों को ध्यान में रखकर निर्धारित की जाती है। उदाहरण के लिए, 2025 की थीम "हमारी शक्ति, हमारा ग्रह" नवीकरणीय ऊर्जा के महत्व को रेखांकित करती है। यह हमें यह संदेश देती है कि हमें पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के स्थान पर सौर, पवन और जल ऊर्जा जैसे स्वच्छ और टिकाऊ स्रोतों को अपनाना चाहिए, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पृथ्वी दिवस का महत्व इस बात में भी निहित है कि यह हमें व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित करता है। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संगठनों का कार्य नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। हम अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करके भी पर्यावरण की रक्षा में योगदान दे सकते हैं, जैसे प्लास्टिक का कम उपयोग करना, पानी और बिजली की बचत करना, कचरे का उचित निपटान करना और अधिक से अधिक पेड़ लगाना। ये छोटे कदम मिलकर एक बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पृथ्वी दिवस हमें यह भी सिखाता है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि हम केवल विकास पर ध्यान देंगे और पर्यावरण की उपेक्षा करेंगे, तो यह विकास स्थायी नहीं रहेगा। सतत विकास की अवधारणा इसी संतुलन पर आधारित है, जिसमें वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के हितों का भी ध्यान रखा जाता है। यह दिन हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का संदेश देता है, क्योंकि यही हमारे अस्तित्व की कुंजी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज के समय में पृथ्वी दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह एक सतत आंदोलन बन चुका है, जो पूरे वर्ष लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करता है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपने कार्यों के माध्यम से पृथ्वी पर क्या प्रभाव डाल रहे हैं और हम इसे कैसे सुधार सकते हैं। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि पृथ्वी हमारी संपत्ति नहीं है, बल्कि हम इसके संरक्षक हैं और हमें इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, पृथ्वी दिवस हमें एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि यदि हम अपनी धरती को बचाना चाहते हैं, तो हमें अभी से प्रयास शुरू करने होंगे। यह केवल सरकारों या बड़े संगठनों का कार्य नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। जब हम सभी मिलकर इस दिशा में कार्य करेंगे, तभी हम एक स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण का निर्माण कर पाएंगे। यही पृथ्वी दिवस का वास्तविक उद्देश्य और सार है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:13:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय सरकार ने बनाई वित्तीय बजट में ग्रीन एनर्जी के लिए बड़ी योजना </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>भारत सरकार ग्रीन एनर्जी को लेकर ग्लोबली काम करने की इच्छुक है।  केंद्र सरकार  की कोशिश है कि ग्रीन एनर्जी को लेकर दुनिया के अन्य देशों के साथ तालमेल स्थापित किया जाए। यही कारण है कि सरकार ने अपने वित्तीय बजट में ग्रीन एनर्जी के लिए बड़ी योजना बनाई है। सरकार ने ग्रीन फ्यूल, ग्रीन फार्मिंग, ग्रीन मॉबिलिटी, ग्रीन बिल्डिंग्स और हरित उपकरण से संबंधित पहलों के लिए कई उपायों की घोषणा की है। वहीं दूसरी ओर, इस समय भारत G20 की अध्यक्षता कर रहा है, ऐसे में ग्रीन एनर्जी पर फोकस और ज्यादा रहेगा।</p>
<p>एंटनी वेस्ट हैंडलिंग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127213/indian-government-made-a-big-plan-for-green-energy-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-02/132.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>भारत सरकार ग्रीन एनर्जी को लेकर ग्लोबली काम करने की इच्छुक है।  केंद्र सरकार  की कोशिश है कि ग्रीन एनर्जी को लेकर दुनिया के अन्य देशों के साथ तालमेल स्थापित किया जाए। यही कारण है कि सरकार ने अपने वित्तीय बजट में ग्रीन एनर्जी के लिए बड़ी योजना बनाई है। सरकार ने ग्रीन फ्यूल, ग्रीन फार्मिंग, ग्रीन मॉबिलिटी, ग्रीन बिल्डिंग्स और हरित उपकरण से संबंधित पहलों के लिए कई उपायों की घोषणा की है। वहीं दूसरी ओर, इस समय भारत G20 की अध्यक्षता कर रहा है, ऐसे में ग्रीन एनर्जी पर फोकस और ज्यादा रहेगा।</p>
<p>एंटनी वेस्ट हैंडलिंग सेल के प्रबंध निदेशक जोस जैकब ने कहा, 'भारत नवंबर 2023 तक G20 की अध्यक्षता कर रहा है, हरित ऊर्जा को अपनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है और बायोसीएनजी को अच्छी तरह से बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। हम इस बात से खुश हैं कि बजट में हमारे उद्योग के लिए, विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है।'सरकार ने हाल ही में लॉन्च किए गए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिए 19,700 करोड़ रुपS के परिव्यय की घोषणा की  जिसमें कहा गया है कि यह अर्थव्यवस्था को कम कार्बन तीव्रता में बदलने की सुविधा प्रदान करेगा। इसमें 2030 तक हरित हाइड्रोजन के 500 एमएमटी (मिलियन मीट्रिक टन) के वार्षिक उत्पादन का टारगेट रखा गया है।</p>
<p>सुजलॉन एनर्जी के वाइस चेयरमैन गिरीश आर तांती ने कहा, 'केंद्रीय बजट भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। ग्रीन एनर्जी ट्रांसमिशन के लिए 35,000 करोड़ रुपए का आबंटन सही दिशा में एक कदम है और एक स्थायी भविष्य के लिए देश की इच्छा को प्रदर्शित करता है।'उन्होंने कहा, 'देश में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता सराहनीय है और कार्बन उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन शुद्ध शून्य की दिशा में हमारे प्रयासों का पूरक होगा।</p>
<p>बता दें कि भारतीय अक्षय ऊर्जा क्षेत्र दुनिया में चौथा सबसे आकर्षक अक्षय ऊर्जा बाजार है। 2020 तक भारत पवन ऊर्जा में चौथे, सौर ऊर्जा  में पांचवें और नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता में चौथे स्थान पर था। स्थापित अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता ने पिछले कुछ वर्षों में गति प्राप्त की है। इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन के अनुसार, भारत नवीकरणीय बिजली में सबसे तेज वृद्धि वाला बाजार है और 2026 तक नई क्षमता वृद्धि दोगुनी होने की उम्मीद है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Feb 2023 13:40:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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