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                <title>assembly elections - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>assembly elections RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारीकी अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के अध्यक्षों एवं प्रतिनिधियों के साथ कलेक्टेट सभागार मेेें बैठक आयोजित की गयी ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में आगामी निर्वाचन की तैयारियों के तहत जिले में मतदेय स्थलों के संभाजन एवं पुनर्निधारण की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। इस संबंध में मंगलवार को जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती कृत्तिका ज्योत्स्ना की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के अध्यक्षों एवं प्रतिनिधियों के साथ कलेक्टेªट सभागार मेेें बैठक आयोजित की गयी । बैठक में जिलाधिकारी ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी उ.प्र. के निर्देशानुसार जिले के सभी मतदेय स्थलों का पुनः परीक्षण कराया जा रहा है। आयोग के मानको के अनुसार मतदेय स्थलों पर 1200 से अधिक मतदाता है, उनका विभाजन</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182387/a-meeting-was-organized-in-the-collectorate-auditorium-with-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260630-wa0105.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में आगामी निर्वाचन की तैयारियों के तहत जिले में मतदेय स्थलों के संभाजन एवं पुनर्निधारण की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। इस संबंध में मंगलवार को जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती कृत्तिका ज्योत्स्ना की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के अध्यक्षों एवं प्रतिनिधियों के साथ कलेक्टेªट सभागार मेेें बैठक आयोजित की गयी । बैठक में जिलाधिकारी ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी उ.प्र. के निर्देशानुसार जिले के सभी मतदेय स्थलों का पुनः परीक्षण कराया जा रहा है। आयोग के मानको के अनुसार मतदेय स्थलों पर 1200 से अधिक मतदाता है, उनका विभाजन कर नये मतदेय स्थल बनाये जायेंगे ताकि मतदान प्रक्रिया अधिक सुगम, व्यवस्थित व पारदर्शी ढंग से सम्पन्न कराया जा सकें। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि 24 जून से 31 जुलाई 2026 तक विभिन्न चरणों में भौतिक सत्यापन, मतदेय स्थलों का पुनर्निधारण, प्रारूप सूची का प्रकाशन, आपत्तियों का परीक्षण कर नियमानुसार उनका निस्तारण भी किया जायेंगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि मतदेय स्थलों का भौतिक सत्यापन, पुनर्निधारण एवं नये मतदेय स्थल स्थापित करने हेतु भवनों का चिंहॉकन 24 से 28 जून, मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर मतदेय स्थलों के प्रस्ताव तैयार करना 29 जून से 01 जुलाई, आपत्तियों एवं सुझावों हेतु मतदेय स्थलों की आलेख्य सूची का प्रकाशन तथा मतदेय स्थलों की आलेख्य सूची मा. प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराना 04 जुलाई, वर्तमान संसद सदस्यों, विधानसभा सदस्यों तथा मा. प्राप्त राजैनिक दलों के साथ बैठको के आयोजन के पश्चात् शिकायतों एवं सुझावों के निस्तारण के बाद सूची को अन्तिम रूप दिया जाना 18 जुलाई, जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा सभी संलग्नको सहित मतदेय स्थलों का प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को आयोग के अनुमोदनार्थ भेजे जाने हेतु उपलब्ध कराया जाना 25, 27 व 28 जुलाई तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा संभाजन संबंधी प्रस्ताव आयोग के अनुमोदनार्थ प्रेषित किया जाना 31 जुलाई 2026 है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में मा. प्राप्त राजनैतिक दलों के सदस्य एवं प्रतिनिधिगण, उप जिला निर्वाचन अधिकारी प्रतिपाल सिंह चौहान, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी हिमांशु कुमार, मनोज प्रकाश, सत्येन्द्र सिंह, उमाकान्त तिवारी, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी सुभाष सिंह, ओम प्रकाश सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहें।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 18:52:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा विधायक प्रत्याशी प्रवेश रतन का वर्चस्व तेज जनता का फैसला दुसरे स्थान का प्रत्याशी अब होगा पहले नम्बर पर </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>नई दिल्ली</strong> पटेल नगर जल्द ही विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने वाला है इसी बीच जनता भी प्रत्याशी की खोज बीन शुरु कर दी है अबके स्थिति में पटेल नगर विधानसभा में सबसे अधिक वर्चस्व है तो अगर किसी का है तो प्रवेश रतन का है क्योंकि वे लगातार मेहनत लगन के साथ हमेशा जनता के सुख-दुख में शामिल रहते हैं जनता के प्रति लगाव बना हुआ है विधानसभा चुनाव से पहले प्रवेश रतन का नाम तेजी से चर्चा में है प्रत्याशी के रेश में सबसे आगे चल रहे हैं</div>
<div>  </div>
<div>प्रवेश रतन एक बात यह भी तय है की जो</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146151/the-supremacy-of-bjp-mla-candidate-pravesh-ratan-is-fast"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/भाजपा-विधायक-प्रत्याशी-प्रवेश-रतन-का-वर्चस्व-तेज.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>नई दिल्ली</strong> पटेल नगर जल्द ही विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने वाला है इसी बीच जनता भी प्रत्याशी की खोज बीन शुरु कर दी है अबके स्थिति में पटेल नगर विधानसभा में सबसे अधिक वर्चस्व है तो अगर किसी का है तो प्रवेश रतन का है क्योंकि वे लगातार मेहनत लगन के साथ हमेशा जनता के सुख-दुख में शामिल रहते हैं जनता के प्रति लगाव बना हुआ है विधानसभा चुनाव से पहले प्रवेश रतन का नाम तेजी से चर्चा में है प्रत्याशी के रेश में सबसे आगे चल रहे हैं</div>
<div> </div>
<div>प्रवेश रतन एक बात यह भी तय है की जो पार्टी पटेल नगर विधानसभा जीतती है अबतक सरकार उसी की बनी है दिल्ली में अब निर्णय पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को करना है आने वाला समय बताएगा किसके सर पर ताज सजेगा मीडिया सर्वे के अनुसार भाजपा इस बार दिल्ली प्रदेश में पुर्ण बहुमत की सरकार बना रही है एक बात तोड़ता है अगर भाजपा की सरकार दिल्ली में बनी तो छोटे-मोटे में मुद्दे निपट जाएंगे जैसे दिल्ली में जल समस्या शिक्षा चिकित्सा आदि</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Nov 2024 17:15:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा में कांग्रेस की हार से सचेत रहेंगे घटक दल </title>
                                    <description><![CDATA[<div>कांग्रेस ने हरियाणा में अपनी जीती हुई बाज़ी हार में बदल ली है। और यह कार्य सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है क्योंकि जहां इनकी फाइट सीधे भारतीय जनता पार्टी से होती है वहां यह हर मुकाबला हार रहें हैं और जहां क्षेत्रीय दल मजबूत स्थिति में हैं वहां यह अधिक सीटों की मांग रखते हैं। हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के परिणामों में भारतीय जनता पार्टी  ने 90 सीटों वाली विधानसभा में 48 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। यह पार्टी के लिए लगातार तीसरी जीत है, जिसे भारतीय जनता पार्टी  ने एक ऐतिहासिक सफलता बताया। कांग्रेस पार्टी ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145542/constituents-will-be-conscious-of-congresss-defeat-in-haryana%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/hudda-selja-rahul-surjewala-kharge.webp" alt=""></a><br /><div>कांग्रेस ने हरियाणा में अपनी जीती हुई बाज़ी हार में बदल ली है। और यह कार्य सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है क्योंकि जहां इनकी फाइट सीधे भारतीय जनता पार्टी से होती है वहां यह हर मुकाबला हार रहें हैं और जहां क्षेत्रीय दल मजबूत स्थिति में हैं वहां यह अधिक सीटों की मांग रखते हैं। हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के परिणामों में भारतीय जनता पार्टी  ने 90 सीटों वाली विधानसभा में 48 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। यह पार्टी के लिए लगातार तीसरी जीत है, जिसे भारतीय जनता पार्टी  ने एक ऐतिहासिक सफलता बताया। कांग्रेस पार्टी ने यहां सिर्फ 37 सीटें जीती हैं जब कि माहौल पूरा कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दे रहा था। 3 सीटों पर निर्दलीय और 2 सीटें इंडियन नेशनल लोक दल के प्रत्याशी विजई हुए हैं। इसी साल 24 में ही सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी को करारी टक्कर दी थी और लोकसभा की दस सीटों में से 5 सीट जीत कर भारतीय जनता पार्टी को भी पांच सीटों पर सीमित कर दिया था। तब ऐसा प्रतीत हो रहा था कि हरियाणा विधानसभा चुनाव कांग्रेस आसानी से जीत सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।</div>
<div>
<div> </div>
<div>यदि हम हरियाणा में 2019 के विधानसभा चुनाव के परिणामों पर नजर डालें तो भारतीय जनता पार्टी को 40 सीटें, कांग्रेस को 31 सीटें, जननायक जनता पार्टी को 10 सीटें,  निर्दलीयों को 7 सीटें तथा अन्य को दो सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी। हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं, और बहुमत के लिए 46 सीटों की आवश्यकता होती है। 2019 में बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था लेकिन उसने जननायक जनता पार्टी और कुछ निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई थी। मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, और दुष्यंत चौटाला  से उपमुख्यमंत्री बने बने थे। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले 8 सीटें ज्यादा जीतीं और स्पष्ट बहुमत पाया। जब कि कांग्रेस पिछले बार के 31 सीटों के मुकाबले 37 सीटें ही जीत सकी। कांग्रेस ने अपनी सीटों की संख्या तो बढ़ाई लेकिन वह भारतीय जनता पार्टी को बढ़त बनाने से नहीं रोक सकी। अब यहां पर यह निश्चित हो चुका है कि कांग्रेस बिना सहयोग या गठबंधन के सत्ता में नहीं आ सकती। लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि वह गठबंधन की बागडोर अपने हाथों में ही रखना चाहते है।</div>
<div> </div>
<div>कांग्रेस के लिए यह मायने नहीं रखता कि किसी भी तरह से भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में आने से रोका जा सके बल्कि उसकी चाहत यही है कि विपक्षी दलों की बादशाहत उसी के हाथों में रहे। यदि हम उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां कांग्रेस बिना समाजवादी पार्टी के समर्थन के शून्य है लेकिन फिर भी वह सपा से अधिक से अधिक सीटों की उम्मीद रखती है। पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने जब जनता दल बनाया था तब बड़े से बड़े नेता उनके साथ उनकी छत्रछाया में आ गए थे। और जनता दल ने कांग्रेस को बुरी तरह पराजित किया था। क्यों कि उस जनता दल का मुख्य उद्देश्य कांग्रेस सरकार को सत्ता से बेदखल करना था। लेकिन 2014 से लेकर अब तक भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ कोई भी ऐसी पार्टी सामने नहीं आई जिसका लक्ष्य भाजपा को सत्ता से हटाना हो। कांग्रेस जहां मजबूत है वहां किसी के साथ गठबंधन करना नहीं चाहती लेकिन जहां कांग्रेस के पास कुछ नहीं है वहां वह अपने गठबंधन वाले दलों से अधिक से अधिक सीटें चाहती है। इसका सीधा मतलब यही है कि उनको भाजपा को सत्ता से हटाने से ज्यादा दिलचस्पी अपने आप को उन क्षेत्रों में मजबूती हासिल करना है जहां वह दशकों से गायब है। </div>
<div> </div>
<div>उत्तर प्रदेश में दस सीटों के लिए विधानसभा उपचुनाव चुनाव होने हैं। इन दस सीटों में से पहले समाजवादी पार्टी के पास पांच सीटें थीं जब कि एक सीट उसके गठबंधन सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल के पास थी। उस लिहाज से समाजवादी पार्टी ने अपने 6 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। तथा दो सीटों पर वह और अपने प्रत्याशी उतारना चाहती है जब कि कांग्रेस को वह दो सीटें देना चाहती है। लेकिन कांग्रेस इतने में राजी नहीं दिख रही है। सूत्रों की मानें तो वह कम से कम चार सीटें चाहती है और यही कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी है। वह अपने सहयोगी दलों को भी बढ़ते नहीं देखना चाहती। जब कि वहीं भारतीय जनता पार्टी सीट के हिसाब से अपने सहयोगी दलों को पूरा समर्थन करती है। इन दस सीटों में से एक सीट भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दल संजय निषाद की निषाद पार्टी के पास थी। और भारतीय जनता पार्टी ने उस सीट को निषाद पार्टी के लिए छोड़ दिया है। यदि देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में अकेले भी चुनाव लड़ सकती है और जीत भी सकती है लेकिन जातीय समीकरण बैठाने के लिए उसने अन्य छोटे दलों को हिस्सेदारी दी है जो कभी भी भविष्य में काम आ सकती है।</div>
<div><strong> जितेन्द्र सिंह पत्रकार </strong></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Oct 2024 17:10:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंडी गठबंधन के साथी ही कांग्रेस की कर रहे है फजीहत ! </title>
                                    <description><![CDATA[<div>मौजूदा दो विधानसभा चुनाव के नतीजों से कांग्रेस की फजीहत बढ़ गई है। अब इंडिया गठबंधन के घटक दल कांग्रेस की खटिया खड़ी करने पर उतर आए हैं। आपको बता दें कि लगभग सभी एग्जिट पोल में इस बार हरियाणा में कांग्रेस की भारी बहुमत से विजय की स्पष्ट भविष्यवाणी की गई थी परन्तु जम्मू-कश्मीर के चुनाव परिणामों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी कि वहां कौन जीतेगा।एग्जिट पोल के नतीजों से उत्साहित कांग्रेस को हरियाणा में 10 वर्ष बाद सरकार बनाने का भरोसा था परन्तु परिणाम एग्जिट पोल के विपरीत रहे। इन चुनावों में जहां भाजपा 48 सीटें जीत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145471/indi-alliance-partners-are-embarrassing-congress-%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/इंडी-गठबंधन-के-साथी-ही-कांग्रेस-की-कर-रहे-है-फजीहत-!.jpg" alt=""></a><br /><div>मौजूदा दो विधानसभा चुनाव के नतीजों से कांग्रेस की फजीहत बढ़ गई है। अब इंडिया गठबंधन के घटक दल कांग्रेस की खटिया खड़ी करने पर उतर आए हैं। आपको बता दें कि लगभग सभी एग्जिट पोल में इस बार हरियाणा में कांग्रेस की भारी बहुमत से विजय की स्पष्ट भविष्यवाणी की गई थी परन्तु जम्मू-कश्मीर के चुनाव परिणामों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी कि वहां कौन जीतेगा।एग्जिट पोल के नतीजों से उत्साहित कांग्रेस को हरियाणा में 10 वर्ष बाद सरकार बनाने का भरोसा था परन्तु परिणाम एग्जिट पोल के विपरीत रहे। इन चुनावों में जहां भाजपा 48 सीटें जीत कर तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है, वहीं कांग्रेस 37 सीटों पर ही सिमट गई है।कांग्रेस के कर्ताधर्ता जीत को लेकर इतना आश्वस्त थे कि विजय जलूस के लिए बारात वाले बगगी और घोड़े भी सज-धज के साथ बुकिंग कर दिया गया था लेकिन जैसे ही नतीजे आए कांग्रेस के अरमान आंसुओं में बह गए। </div>
<div> </div>
<div>चुनावों के दौरान भाजपा को सत्ता विरोधी लहर के अलावा कांग्रेस व अन्य दलों द्वारा बेरोजगारी और किसान आंदोलन आदि को लेकर आरोपों का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के शासनकाल में भ्रष्टाचार, भूमि स्कैंडलों और सरकारी नौकरियों में पक्षपात आदि का मुद्दा उठाया।कांग्रेस में हाल ही के लोकसभा चुनावों में अच्छे प्रदर्शन के चलते अति आत्मविश्वास, मुख्यमंत्री को लेकर कलह, कुमारी शैलजा की नाराजगी के प्रति हाईकमान की उदासीनता और 'आप' तथा अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ चुनावी गठबंधन न होना कांग्रेस पार्टी के पिछड़ जाने का कारण भी रहा।हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद इंडिया ब्लॉक के सहयोगी अब खुलकर कांग्रेस के विरोध में आ गए हैं. हरियाणा में मंगलवार को चुनाव में मिली हार के बाद जहां कई सहयोगी दलों ने कांग्रेस पर निशाना साधा तो वहीं कांग्रेस को अगले ही दिन दो बड़े झटके भी लगे. पहले तो आम आदमी पार्टी ने साफ कर दिया कि वो दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनाव में अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे और किसी से गठबंधन नहीं करेंगे.</div>
<div> </div>
<div>वहीं, सपा ने भी यूपी उपचुनाव को लेकर उन सीटों पर भी अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया जिसपर कांग्रेस दावा कर रही थी. हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद आदमी पार्टी ने दिल्ली चुनाव के लिए बड़ा ऐलान किया है. आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा,'हम दिल्ली (विधानसभा) चुनाव अकेले लड़ेंगे. एक तरफ ओवर कॉन्फिडेंट कांग्रेस है तो दूसरी तरफ अहंकारी भाजपा है. हमने पिछले 10 सालों में दिल्ली में जो किया है, उसके आधार पर हम चुनाव लड़ेंगे। </div>
<div>उधर, शिवसेना ने सामना में लिखा कि हरियाणा की हार से महाराष्ट्र कांग्रेस को भी सीख लेने की जरूरत है. शिवसेना ने कहा कि कांग्रेस ने हरियाणा में आप या अन्य दलों से गठबंधन नहीं किया, जिसके चलते उसे हार का सामना करना पड़ा. जबकि जम्मू-कश्मीर में गठबंधन का फायदा दिखा. शिवसेना ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस को पता है कि जीत को हार में कैसे बदलना है. शिवसेना ने कहा कि हरियाणा की हार कांग्रेस के ओवर कॉन्फिडेंस और राज्य नेतृत्व के अहंकार का नतीजा है. हुड्डा ने नॉन जाट वोटर्स को साथ नहीं लिया, जिसका खामियाजा भुगतना पड़ा। </div>
<div> </div>
<div>जहां तक जम्मू-कश्मीर का संबंध है, कश्मीर में नैशनल कान्फ्रेंस और जम्मू में भाजपा को अधिक सीटें मिली हैं। कश्मीर में नैशनल कान्फ्रेंस (42) तथा सहयोगी कांग्रेस (6) को 48 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिला है।</div>
<div>अतीत में कांग्रेस पार्टी का जम्मू क्षेत्र में मजबूत आधार रहा है परन्तु इस बार उसका आधार खिसक गया और वह जम्मू क्षेत्र में एक ही सीट जीत पाई। सबसे बड़ा झटका पी.डी.पी. को लगा है जिसे 3 सीटें ही मिली हैं।</div>
<div>जम्मू-कश्मीर के चुनावों में भाजपा को बड़े करिश्मे की उम्मीद थी परन्तु उसे 29 सीटों पर संतोष करना पड़ा। भाजपा नेताओं का अनुमान था कि कुल 35 के लगभग सीटें आने पर वे 5 नामांकित सीटों और निर्दलीयों के सहयोग से सरकार बनाने में सफल हो जाएंगे परन्तु ऐसा नहीं हो रहा।</div>
<div> </div>
<div>सरकार बनाने की कोशिश में पहाड़ी भाषी समुदाय को पिछड़ी जनजाति का दर्जा देने, धारा 370 हटाने और जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की समाप्ति तथा पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों के विरुद्ध चलाए गए 'आल आऊट' अभियान तथा मुसलमान उम्मीदवारों को टिकट देने का भी इसे कोई विशेष लाभ नहीं मिला। अलबत्ता जम्मू-कश्मीर में 'आप' को एक सफलता अवश्य मिली है जहां उसका एक उम्मीदवार चुनाव जीत गया है।</div>
<div> </div>
<div>नैकां-कांग्रेस गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने पर सरकार बनाने की राह आसान हो गई है और नैशनल कान्फ्रेंस अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला ने उमर अब्दुल्ला को मुख्यमंत्री बनाए जाने की घोषणा भी कर दी है।पी.डी.पी. सुप्रीमो महबूबा मुफ्ती ने कांग्रेस और नैशनल कांफ्रैंस की जीत पर कहा है कि "केंद्र को जम्मू-कश्मीर के निर्णायक फैसले से सबक लेना चाहिए और नैकां-कांग्रेस सरकार के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। यदि वे ऐसा करते हैं तो यह विनाशकारी होगा। मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी स्थिर सरकार को वोट देने के लिए बधाई देती हूं।"नैकां सुप्रीमो फारूक अब्दुल्ला ने भी बड़ा दिल दिखाते हुए कहा है कि, "गठबंधन सरकार में पी.डी.पी. को भी शामिल किया जाएगा।"बहरहाल, अब जबकि भाजपा द्वारा हरियाणा में और नैकां कांग्रेस गठबंधन द्वारा जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की कवायद शुरू होने जा रही है, ये चुनाव एक सबक हैं, सभी राजनीतिक दलों के लिए कि एकता में ही बल है और फूट का नतीजा हमेशा हानि में ही निकलता है।</div>
<div> </div>
<div>उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर में 2014 में अंतिम बार विधानसभा चुनाव हुए थे जिनमें पी.डी.पी. ने सर्वाधिक 28 सीटें जीती थीं तथा 25 सीटें जीतने वाली भाजपा से गठबंधन करके सरकार बनाई थी जो दोनों पार्टियों के बीच नीतिगत मतभेदों के कारण कायम न रह सकी। 2018 में महबूबा के मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र के बाद से ही जम्मू-कश्मीर का प्रशासन बिना चुनी हुई सरकार के उप-राज्यपाल द्वारा ही चलाया जा रहा था।</div>
<div>अंत में एक बात और बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जलेबी पर बांटे ज्ञान ने भी हरियाणा में कांग्रेस की लुटिया डुबो दी लोगों को अहसास हो गया कि राहुल गांधी लोकजीवन से बहुत दूर है और उन्हें जमीनी चीजों की कोई जानकारी नहीं है। अब जबकि राज्य में नैकां और कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनने जा रही है, आशा करनी चाहिए कि दोनों पार्टियां मिलकर बेहतर ढंग से राज्य का प्रशासन चलाकर इसे खुशहाली ओर ले जाएंगी।</div>
<div><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div><strong>(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Oct 2024 16:58:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आगामी विधानसभा चुनाव एवं पंचायत चुनाव को लेकर सपा ने शुरू की तैयारी जिलाध्यक्ष ने जिला कार्यालय पर प्रतिदिन उपस्थिति को उपाध्यक्षों व वरिष्ठ पदाधिकारियों की की तैनाती</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>पीलीभीत: </strong>आगामी विधानसभा 2027 व पंचायत चुनाव को और पार्टी के संगठन को मजबूती व अन्य चुनाव में मजबूत रणनीति बनाने  व जनपद पीलीभीत में होने वाली घटनाओं पर निगाह रखने हेतु व नए लोगों को जोड़ने के उद्देश्य से सभी वरिष्ठ पदाधिकारी एवं उपाध्यक्षों को कार्यालय पर आने वाले फरियादियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ वार्ता करने एवं उनकी समस्याओं को सुनकर निस्तारण करवाने के लिए समाजवादी पार्टी जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा ने दिवस बार निम्नलिखित दायित्व सौप कर पदाधिकारीयों को निर्वहन करने के निर्देश दिये है सौंपी गई</div>
<div>  </div>
<div>ज़िम्मेदारी जो की क्रमशः  इस प्रकार है सोमवार - श्रीनरेन्द्र</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145353/sp-started-preparations-for-the-upcoming-assembly-elections-and-panchayat"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/rajneeti1.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>पीलीभीत: </strong>आगामी विधानसभा 2027 व पंचायत चुनाव को और पार्टी के संगठन को मजबूती व अन्य चुनाव में मजबूत रणनीति बनाने  व जनपद पीलीभीत में होने वाली घटनाओं पर निगाह रखने हेतु व नए लोगों को जोड़ने के उद्देश्य से सभी वरिष्ठ पदाधिकारी एवं उपाध्यक्षों को कार्यालय पर आने वाले फरियादियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ वार्ता करने एवं उनकी समस्याओं को सुनकर निस्तारण करवाने के लिए समाजवादी पार्टी जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा ने दिवस बार निम्नलिखित दायित्व सौप कर पदाधिकारीयों को निर्वहन करने के निर्देश दिये है सौंपी गई</div>
<div> </div>
<div>ज़िम्मेदारी जो की क्रमशः  इस प्रकार है सोमवार - श्रीनरेन्द्र मिश्रा कट्टर और श्री मखदूम खां मंगलवार- श्री काशीराम सरोज और  श्री गयासुद्दीन मंसूरी बुधवार - श्री रुपराम कश्यप और श्री अशोक सिंह,गुरुवार - श्री बालकराम सागर और श्री नरेन्द्र मिश्रा कट्टर,शुक्रवार श्री बीडी प्रजापति और श्री काशीराम सरोज,शनिवार - पवन सिंह यादव और अकबर अंसारी इसके साथ-साथ कार्यालय की देखभाल के लिए आसिफ अली कादरी व अकबर अंसारी संयुक्त रूप से जिम्मेदारी निभाएंगे</div>
<div> </div>
<div>जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा ने निर्देश देते हुए सभी पदाधिकारीयों से कहा है की "हम आशा करते हैं कि सभी सम्मानित पदाधिकारी माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी की नीतियों का पार्टी को व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार करेंगे और कार्यालय पर आए लोगों को नीतियों के प्रति जागरूक करेंगे। साथ ही अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएंगे। सभी की प्रातः 11:00 से 3:00 बजे तक उपस्थित प्रार्थनीय  जिससे आगामी विधानसभा चुनाव एव आगामी पंचायत चुनाव मे समाजवादी पार्टी बेहतर प्रदर्शन कर सके" इस दौरान पार्टी के जिला महासचिव,उपाध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारी उपस्तिथ रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
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                <pubDate>Sat, 05 Oct 2024 17:32:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घोषणा पत्र में काश्मीर में धारा 370 की बहाली का मुद्दा क्यों ? </title>
                                    <description><![CDATA[<div>जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। सभी दलों ने अपने घोषणा पत्र जारी कर दिए हैं। लेकिन नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के चुनावी घोषणा पत्र में जिस तरह से धारा 370 की बहाली की मांग को मुद्दा बनाया गया है यह बहुत ही आश्चर्यजनक है। देश हित में अब इस मुद्दे पर विराम लगना चाहिए। नेशनल कांफ्रेंस का घोषणा पत्र पार्टी के आगामी चुनावों के लिए उनकी नीतियों, योजनाओं और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। यह घोषणा पत्र पार्टी के वादों और उद्देश्यों का दस्तावेज होता है, जिसमें पार्टी द्वारा सत्ता में आने के बाद लागू किए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144382/why-is-the-issue-of-restoration-of-article-370-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-08/add_a_subheading_-_2023-12-11t110948.337-sixteen_nine.png" alt=""></a><br /><div>जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। सभी दलों ने अपने घोषणा पत्र जारी कर दिए हैं। लेकिन नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के चुनावी घोषणा पत्र में जिस तरह से धारा 370 की बहाली की मांग को मुद्दा बनाया गया है यह बहुत ही आश्चर्यजनक है। देश हित में अब इस मुद्दे पर विराम लगना चाहिए। नेशनल कांफ्रेंस का घोषणा पत्र पार्टी के आगामी चुनावों के लिए उनकी नीतियों, योजनाओं और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। यह घोषणा पत्र पार्टी के वादों और उद्देश्यों का दस्तावेज होता है, जिसमें पार्टी द्वारा सत्ता में आने के बाद लागू किए जाने वाले कार्यक्रमों और नीतियों का विवरण दिया जाता है। </div>
<div> </div>
<div>हालांकि, हर चुनाव के लिए नेशनल कांफ्रेंस का घोषणा पत्र भिन्न होता है, लेकिन आमतौर पर इसमें कश्मीर की स्वायत्तता, अनुच्छेद 370 की बहाली, क्षेत्रीय विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों जैसे मुद्दों पर जोर दिया जाता है।पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) का घोषणा पत्र भी पार्टी के आगामी चुनावों के लिए उनकी नीतियों, योजनाओं और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। यह दस्तावेज़ पार्टी के उन वादों और उद्देश्यों का विस्तृत विवरण देता है, जिन्हें पार्टी सत्ता में आने के बाद लागू करने का इरादा रखती है।</div>
<div> </div>
<div>कश्मीर मुद्दा और शांति पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस के लिए एक ही है। साथ ही पीडीपी ने कश्मीर मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान और भारत तथा पाकिस्तान के बीच बातचीत की प्रक्रिया को बढ़ावा देने पर जोर देती है। लेकिन जब पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ जाता तब तक यह कैसे संभव हो सकता है। शांतिपूर्ण समाधान के लिए पिछले कई दशकों से बातचीत हो रही है लेकिन पाकिस्तान की करतूतों ने लगभग सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। फिर जम्मू-कश्मीर की ये दो पार्टियां इस तरह के मुद्दों को अपने घोषणा पत्र में कैसे शामिल करतीं हैं।पीडीपी के घोषणा पत्र में कहा गया है कि अनुच्छेद 370 और 35A  पार्टी अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली और जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए काम करने का वादा करती है।</div>
<div> </div>
<div>नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी की जम्मू-कश्मीर में स्वायत्तता से क्या मतलब है। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। और जिस तरह केन्द्र सरकार अन्य सभी राज्यों के विकास के लिए सोचती है वही सोच जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए रहती है। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 की बहाली और राज्य की स्वायत्तता को सीधे देश द्रोह की श्रेणी में कर देना चाहिये। क्यों कि यह पार्टियां ही हैं जो जम्मू-कश्मीर का भला नहीं चाहती, विकास नहीं चाहतीं, इनको तो बस वह मुद्दा चाहिए जिससे इनकी राजनीति चमक सके। विकास और बुनियादी ढांचा आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए योजनाएं प्रस्तुत की जाती हैं।</div>
<div> </div>
<div>जम्मू-कश्मीर में बात होनी चाहिए रोजगार के अवसर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने और बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के उपायों पर ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि वह देश के विकास के भागीदार बन सकें। गुड गवर्नेंस की बात होनी चाहिए। पीडीपी के घोषणा पत्र में भ्रष्टाचार से मुक्त शासन और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने की प्रतिबद्धता भी जताई जाती है। मानवाधिकार और न्याय के लिए मानवाधिकारों की सुरक्षा और न्यायपालिका में सुधारों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है।</div>
<div> </div>
<div>पीडीपी का हर चुनाव के लिए घोषणा पत्र अलग-अलग हो सकता है, लेकिन ये कुछ प्रमुख मुद्दे होते हैं जिन पर पार्टी अपने वादे करती है।  370 को भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 को हटा दिया था। इस धारा के हटने से जम्मू और कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले प्रावधानों को समाप्त कर दिया गया, और जम्मू और कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन 19 दिसंबर 2018 को लागू हुआ था। इससे पहले, 20 जून 2018 को राज्यपाल शासन लगाया गया था, जब भारतीय जनता पार्टी ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी  के साथ अपने गठबंधन से समर्थन वापस ले लिया, जिससे मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की सरकार गिर गई। </div>
<div> </div>
<div>राज्यपाल शासन के छह महीने पूरे होने के बाद, 19 दिसंबर 2018 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया, जो अनुच्छेद 356 के तहत लगाया गया था। राष्ट्रपति शासन तब तक जारी रहा जब तक जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित नहीं किया गया और राज्य का विशेष दर्जा खत्म नहीं किया गया। जम्मू-कश्मीर की राज्य स्तरीय पार्टियां जिस तरह की राजनीति करतीं आईं हैं वह किसी से छिपी नहीं है। एक समय था कि जम्मू-कश्मीर की अवाम के हाथों में सिर्फ पत्थर होते थे। जो कि हमारे देश के जांबाज जवानों के ऊपर फैंके जाते थे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जिस तरह से जम्मू-कश्मीर में क़दम उठाए हैं उसने इन पत्थरबाजों और पाकिस्तान के मंसूबों पर पानी फेर दिया है।</div>
<div> </div>
<div>जम्मू-कश्मीर में धारा 370 का प्रावधान और उसकी स्वयत्तता का निर्णय देश में बंटवारे के समय में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय में लिया गया था। उसके बाद किसी भी प्रधानमंत्री की हिम्मत नहीं हुई कि इसको समाप्त किया जाए। लेकिन आज जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने इसको समाप्त कर दिया है तो इस पर अब चर्चा नहीं होना चाहिए। जो चीजें देश के हित में हैं देश की अखंडता के लिए हैं उसका विरोध करने वाले देश द्रोह की श्रेणी में होने चाहिए। देश के लिए कोई भी राज्य विशेष नहीं होता न ही वहां के कानून अलग हो सकते। जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा।</div>
<div> </div>
<div><strong>जितेन्द्र सिंह पत्रकार </strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Aug 2024 17:22:59 +0530</pubDate>
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