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                <title>Central Government - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Central Government RSS Feed</description>
                
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                <title>पेपर लीक पर सरकार को घेरा, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सदन में उठेगी आवाज : अखिलेश यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184005/akhilesh-yadav-will-raise-his-voice-in-the-house-till"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/akhilesh-yadav.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और अभ्यर्थियों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए तथा पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के दौरान पेपर लीक की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार और आरक्षण से वंचित करना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों और छात्राओं के साथ मारपीट की गई, लाठीचार्ज किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में मौजूद लोगों द्वारा लाठी चलाने की खबरें सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाने वाले लोग कौन थे। यदि इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठेंगे। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सरकार का दायित्व जनता की बात सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 21:46:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी की 12 वर्षों की सत्ता और आम आदमी: वादे, बदलाव और ज़मीनी हकीकत</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181933/modis-12-years-in-power-and-common-mans-promises-change"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(3).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा बढ़ाया। उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन मिला। स्वच्छ भारत मिशन ने ग्रामीण शौचालय कवरेज को तेज़ी से बढ़ाया। आयुष्मान भारत योजना ने 5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा गरीब परिवारों तक पहुंचाया। जनधन खातों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ाया और कोविड काल में डीबीटी से करोड़ों लोगों को सीधी मदद मिली। </p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका मतलब यह हुआ कि सरकारी लाभ के लिए बिचौलियों पर निर्भरता घटी। बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट का दायरा बढ़ा, जिससे UPI आज छोटे दुकानदार से लेकर ठेले वाले तक इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>
<p><br />                हम बात करें इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल भारत की तो इसमें भी प्रगति हुई है और कई सुधार अभी भी बाकी हैं। सड़क, रेल, हवाई अड्डे और एक्सप्रेसवे के निर्माण में तेज़ी आई। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, अटल टनल, और नए वंदे भारत ट्रेनें आम यात्रियों के सफर को तेज़ और सुरक्षित बनाने की कोशिश हैं। डिजिटल इंडिया के तहत इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच गांवों तक बढ़ी। इससे शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी सेवाएं मोबाइल पर आ गईं।</p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका फायदा समय की बचत और लागत में कमी के रूप में दिखा। लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी इंटरनेट की गुणवत्ता और बिजली की आपूर्ति असमान बनी हुई है। हालांकि कर और अर्थव्यवस्था में बदलाव तो हुआ है लेकिन महंगाई के कारण अभी उतनी राहत महसूस नहीं हुई है । GST लागू होने से अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एकजुट हुई। छोटे व्यापारियों के लिए शुरू में जटिलता बढ़ी, लेकिन धीरे-धीरे फाइलिंग आसान हुई। नोटबंदी 2016 का मकसद काला धन और नकली नोट पर चोट था, लेकिन इसका तत्काल असर छोटे कारोबार और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा। महंगाई, बेरोजगारी और निजी निवेश की रफ्तार आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता बनी रही। कोरोना के बाद रिकवरी तेज़ रही, लेकिन असंगठित क्षेत्र में रोज़गार और आय अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आई है।</p>
<p><br /> राजनीतिक संवाद और छवि की बात की जाये तो इसमें मोदी सरकार का कोई जोड़ नहीं है। मोदी की सरकार ने सीधे संवाद पर ज़ोर दिया। मन की बात, सोशल मीडिया और रैलियों के ज़रिए प्रधानमंत्री खुद जनता से जुड़े रहे। “सबका साथ, सबका विकास” का नारा केंद्र में रहा। विरोधियों का आरोप रहा कि आलोचना को जगह कम मिली और मीडिया पर नियंत्रण बढ़ा। आम आदमी के लिए इसका असर यह हुआ कि सरकार की योजनाओं की जानकारी तेज़ी से पहुंची, लेकिन विपरीत राय और स्थानीय समस्याएं कई बार राष्ट्रीय बहस में जगह नहीं बना पाईं।</p>
<p><br /> अलग हम इसकी ज़मीनी हकीकत जानें और यह पता करें कि क्या बदला? तो 12 साल में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सरकार सीधे नागरिक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पहले जहां फाइलों और दफ्तरों में काम अटकता था, अब ऑनलाइन पोर्टल और ऐप्स से काम होता है। गरीबों के लिए रसोई गैस, शौचालय, बिजली और बैंक खाता पहले से ज्यादा सुलभ हुए हैं। दूसरी तरफ, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की आय और शिक्षा-स्वास्थ्य की गुणवत्ता जैसे मुद्दे अभी भी चुनौती हैं। मध्यम वर्ग टैक्स और जीवनयापन की लागत को लेकर दबाव महसूस करता है। ग्रामीण भारत में कृषि पर निर्भरता और मौसम की मार अब भी जीवन को अनिश्चित रखती है।</p>
<p>मोदी की 12 साल की सत्ता ने आम आदमी की ज़िंदगी में बुनियादी सुविधाओं और डिजिटल पहुंच के मामले में ठोस बदलाव लाए हैं। योजनाओं का लाभ पहले से ज्यादा पारदर्शी हुआ है। लेकिन रोज़गार, महंगाई और असमानता जैसे संरचनात्मक मुद्दे बने हुए हैं। आम आदमी के लिए यह कार्यकाल सुविधाओं में बढ़ोतरी और आर्थिक दबाव दोनों का मिश्रण रहा है। 2026 की सियासत इस बात पर टिकी होगी कि क्या सरकार इन बदलावों को स्थायी रोज़गार और आय में बदल पाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:41:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                <title>बांग्लादेश डिपोर्ट किए गए कुछ लोगों को वापस भारत लाया जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179984/some-people-deported-to-bangladesh-will-be-brought-back-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260523-wa0013-960x640.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की सदस्यता वाली पीठ से कहा कि सरकार उन्हें वापस लाएगी और उसके बाद उनकी स्थिति की जांच करेगी। परिणाम के आधार पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम तदनुसार कदम उठाएंगे। शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा कि इन व्यक्तियों को भारत वापस लाने में 8-10 दिन लग सकते हैं। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख जुलाई में तय की है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उच्चतम न्यायालय केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के 26 सितंबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उच्च न्यायालय ने सुनाली खातून और अन्य को बांग्लादेश निर्वासित करने के केंद्र सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था और इसे ‘अवैध’ करार दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले साल तीन दिसंबर को शीर्ष अदालत ने ‘मानवीय आधार’ पर खातून और उनके आठ वर्षीय बच्चे को बांग्लादेश भेजे जाने के महीनों बाद भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी।अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को बच्चे की देखभाल करने का निर्देश दिया था और बीरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को गर्भवती खातून को मुफ्त प्रसव की सुविधा सहित हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायालय ने 24 अप्रैल को केंद्र सरकार को अंतिम अवसर दिया और उसके अधिवक्ता को इस मामले में निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराने को कहा। खातून के पिता भोदु शेख की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े ने कहा कि केंद्र सरकार का यह रवैया ‘कुछ हद तक अनुचित’ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने इस मामले में न्यायालय को अपने विचार नहीं बताए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">क्षेत्र के सेक्टर 26 में दो दशकों से अधिक समय से दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे इन परिवारों को पिछले साल 18 जून को बांग्लादेशी होने के संदेह में पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में 27 जून को सीमा पार धकेल दिया। कि निर्वासित किए गए छह नागरिकों को एक महीने के भीतर भारत वापस लाया जाए और आदेश पर अस्थायी रोक लगाने की सरकार की अपील को खारिज कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:31:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>New Railway Line: हरियाणा में यहां बिछाई जाएगी नई रेलवे लाइन, जमीन बन जाएगी सोना </title>
                                    <description><![CDATA[<p>New Railway Line: हरियाणा के जीटी रोड बेल्ट के लोगों के लिए जल्द ही रेल यात्रा आसान और तेज होने वाली है। केंद्र सरकार ने कैथल और अंबाला के बीच सीधी रेलवे लाइन को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सांसद नवीन जिंदल के अनुरोध पर दी है। इस प्रोजेक्ट के तहत कुरुक्षेत्र में रेलवे बाईपास के जरिए एक नई लाइन भी विकसित की जाएगी, जिससे यात्रियों को बड़ा फायदा मिलेगा।</p>
<h3><strong>ज्योतिसर के पास बनेगा नया कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन</strong></h3>
<p>नई रेलवे लाइन के साथ-साथ कुरुक्षेत्र में एक नए रेलवे स्टेशन के निर्माण का भी प्रस्ताव</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165305/new-railway-line-will-be-laid-here-in-haryana-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/new-railway-line-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>New Railway Line: हरियाणा के जीटी रोड बेल्ट के लोगों के लिए जल्द ही रेल यात्रा आसान और तेज होने वाली है। केंद्र सरकार ने कैथल और अंबाला के बीच सीधी रेलवे लाइन को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सांसद नवीन जिंदल के अनुरोध पर दी है। इस प्रोजेक्ट के तहत कुरुक्षेत्र में रेलवे बाईपास के जरिए एक नई लाइन भी विकसित की जाएगी, जिससे यात्रियों को बड़ा फायदा मिलेगा।</p>
<h3><strong>ज्योतिसर के पास बनेगा नया कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन</strong></h3>
<p>नई रेलवे लाइन के साथ-साथ कुरुक्षेत्र में एक नए रेलवे स्टेशन के निर्माण का भी प्रस्ताव है। यह स्टेशन ज्योतिसर गांव के पास बनाया जाएगा। सांसद नवीन जिंदल ने इसका प्रस्तावित नक्शा रेल मंत्री को सौंप दिया है। नया स्टेशन और बाईपास लाइन मिलकर यात्रियों को सीधी, तेज और सुविधाजनक रेल सेवा उपलब्ध कराएंगे।</p>
<h3><strong>रेल रिंग रोड की तरह काम करेगी नई लाइन</strong></h3>
<p>यह नई रेलवे लाइन कुरुक्षेत्र के लिए रेल रिंग रोड की तरह काम करेगी। इसके बनने से कुरुक्षेत्र जंक्शन पर ट्रेनों को इंजन रिवर्स करने की मजबूरी खत्म हो जाएगी। फिलहाल अंबाला से कैथल होते हुए नरवाना जाने वाली ट्रेनों को कुरुक्षेत्र जंक्शन पर दिशा बदलनी पड़ती है, जिससे यात्रियों का काफी समय खराब होता है।</p>
<h3><strong>अभी क्यों होती है देरी</strong></h3>
<p>वर्तमान में अंबाला और नरवाना के बीच कैथल होते हुए केवल दो ट्रेनें संचालित हैं। इन दोनों ट्रेनों को कुरुक्षेत्र जंक्शन पर इंजन रिवर्स करना पड़ता है, जिसके चलते ये अक्सर 30 से 50 मिनट तक लेट हो जाती हैं।</p>
<h3><strong>राजस्थान और हिसार जाने वालों को राहत</strong></h3>
<p>नई बाईपास रेलवे लाइन के बाद ट्रेनों को रिवर्स करने की जरूरत नहीं रहेगी। इससे न सिर्फ ट्रेनों की समयबद्धता सुधरेगी, बल्कि अंबाला से नरवाना होते हुए राजस्थान और हिसार जाने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की भी संभावना बनेगी।</p>
<h3><strong>अप्रैल से शुरू होगा सर्वे</strong></h3>
<p>रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के लिए अप्रैल तक सर्वे कार्य शुरू कर दिया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी के आधार पर DPR (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की जाएगी। इसके बाद निर्माण कार्य को अंतिम मंजूरी दी जाएगी।</p>
<h3><strong>जमीन के दाम बढ़ने की उम्मीद</strong></h3>
<p>कैथल से अंबाला तक सीधी रेलवे लाइन बनने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इसका सीधा असर जमीन के दामों पर भी पड़ेगा, जिनमें तेज बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।</p>
<h3><strong>इन जिलों को मिलेगा सीधा लाभ</strong></h3>
<p>इस रेलवे प्रोजेक्ट से कुरुक्षेत्र, कैथल और अंबाला के यात्रियों को सीधा फायदा होगा। साथ ही जीटी रोड बेल्ट में औद्योगिक और व्यावसायिक विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी। रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में इसे हरियाणा के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 12:10:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>New Railway Line: हरियाणा में बिछाई जाएगी ये नई रेलवे लाइन, जमीनों के रेट होंगे हाई </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">New Railway Line: हरियाणा के विकास में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने दिल्ली</span><span class="cf1">–</span><span class="cf0">सोहना</span><span class="cf1">–</span><span class="cf0">नूंह</span><span class="cf1">–</span><span class="cf0">फिरोजपुर झिरका</span><span class="cf1">–</span><span class="cf0">अलवर तक नई रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह रेल परियोजना नूंह जिले के लिए ऐतिहासिक साबित होने वाली है, क्योंकि जिले को पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना के लिए रेलवे को </span><span class="cf2">2,500 </span><span class="cf0">करोड़ की राशि जारी कर दी गई है।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">2028 तक पूरा होगा रेल लाइन का निर्माण</span></strong></p>
<p><span class="cf0">रेल मंत्रालय के अनुसार नई रेल लाइन की कुल लंबाई 104 किलोमीटर होगी और इसके साथ सात नए</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161377/new-railway-line-will-be-laid-in-haryana-land-rates"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/new-railway-line-(1).jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">New Railway Line: हरियाणा के विकास में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने दिल्ली</span><span class="cf1">–</span><span class="cf0">सोहना</span><span class="cf1">–</span><span class="cf0">नूंह</span><span class="cf1">–</span><span class="cf0">फिरोजपुर झिरका</span><span class="cf1">–</span><span class="cf0">अलवर तक नई रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह रेल परियोजना नूंह जिले के लिए ऐतिहासिक साबित होने वाली है, क्योंकि जिले को पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना के लिए रेलवे को </span><span class="cf2">2,500 </span><span class="cf0">करोड़ की राशि जारी कर दी गई है।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">2028 तक पूरा होगा रेल लाइन का निर्माण</span></strong></p>
<p><span class="cf0">रेल मंत्रालय के अनुसार नई रेल लाइन की कुल लंबाई 104 किलोमीटर होगी और इसके साथ सात नए रेलवे स्टेशन विकसित किए जाएंगे। यह कार्य अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, यानी वर्ष 2028 तक इस मार्ग पर ट्रेनें चलना शुरू हो जाएंगी। यह रेल लाइन हरियाणा और राजस्थान</span><span class="cf1">—</span><span class="cf0">दोनों राज्यों के लिए विकास का नया मार्ग प्रशस्त करेगी।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">मेवात क्षेत्र को मिलेगा विकास का नया आधार</span></strong></p>
<p><span class="cf0">नूंह, जिसे पहले मेवात के नाम से जाना जाता था, वर्ष 2005 में गुरुग्राम से अलग होकर जिला बना था। अभी तक यह जिला रेल मार्ग से नहीं जुड़ा था। इससे क्षेत्र में परिवहन, रोजगार, उद्योग और शिक्षा से जुड़े अवसर सीमित थे। नई रेल लाइन मेवात को देश के मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ेगी और यहां आर्थिक व सामाजिक विकास को मजबूती मिलेगी।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">पर्यटन और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा</span></strong></p>
<p><span class="cf0">इस रेल प्रोजेक्ट से सोहना, नूंह, फिरोजपुर झिरका और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन और औद्योगिक विकास तेज होने की उम्मीद है। यह योजना प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (</span><span class="cf3">PMJVK) </span><span class="cf0">के तहत शुरू की गई है, जिसका लक्ष्य देश के 115 पिछड़े जिलों का सर्वांगीण विकास करना है। नूंह इन्हीं जिलों में शामिल है और रेल लाइन यहां विकास की गति को तेज करेगी।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">1971 से लंबित मांग हुई पूरी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">दिल्ली</span><span class="cf1">–</span><span class="cf0">अलवर मार्ग पर इस रेल लाइन की मांग पहली बार 1971 में गुरुग्राम के तत्कालीन सांसद चौधरी तैयब हुसैन द्वारा संसद में उठाई गई थी। इसके बाद कई बार इस मुद्दे को दोहराया गया। हाल के वर्षों में भिवानी</span><span class="cf1">–</span><span class="cf0">महेंद्रगढ़ के सांसद धर्मबीर सिंह और गुरुग्राम के सांसद व केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भी इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण पहल की। आखिरकार केंद्र सरकार ने पिछले बजट में इसे मंजूरी प्रदान कर दी।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">दिल्ली से अलवर तक बनेगा सीधा रेल संपर्क</span></strong></p>
<p><span class="cf0">नई लाइन के निर्माण के बाद दिल्ली से अलवर तक सोहना, नूंह और फिरोजपुर झिरका के रास्ते सीधा रेल मार्ग तैयार हो जाएगा। इससे न केवल लोगों का सफर आसान होगा, बल्कि मेवात क्षेत्र में रोजगार, व्यापार और शिक्षा के नए अवसर भी बढ़ेंगे।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/161377/new-railway-line-will-be-laid-in-haryana-land-rates</link>
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                <pubDate>Sun, 23 Nov 2025 16:15:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>New Railway Line: हरियाणा को मिली बड़ी सौगात, केंद्र ने इस रेल लाइन को दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>New Railway Line: हरियाणा के नूंह जिले के लिए एक ऐतिहासिक विकास कार्य को केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है। दिल्ली से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित इस जिले को अब रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए नई रेल लाइन का निर्माण शुरू होने जा रहा है।</p>
<p>रेल मंत्रालय ने दिल्ली–सोहना–नूंह–फिरोजपुर झिरका–अलवर मार्ग पर लगभग 104 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी दी है, जिसके लिए 2,500 रुपये करोड़ की राशि जारी की गई है। इस परियोजना के तहत सात नए रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे और इसका निर्माण कार्य तीन वर्षों में पूरा होने का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160474/new-railway-line-haryana-got-a-big-gift-center-approved"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/new-railway-line.jpg" alt=""></a><br /><p>New Railway Line: हरियाणा के नूंह जिले के लिए एक ऐतिहासिक विकास कार्य को केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है। दिल्ली से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित इस जिले को अब रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए नई रेल लाइन का निर्माण शुरू होने जा रहा है।</p>
<p>रेल मंत्रालय ने दिल्ली–सोहना–नूंह–फिरोजपुर झिरका–अलवर मार्ग पर लगभग 104 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी दी है, जिसके लिए 2,500 रुपये करोड़ की राशि जारी की गई है। इस परियोजना के तहत सात नए रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे और इसका निर्माण कार्य तीन वर्षों में पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है, यानी इसे 2028 तक चालू करने की योजना है।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/669923-railway-track.jpg" alt="669923-railway-track" width="1280" height="720"></img></p>
<p>नूंह, जिसे पहले मेवात क्षेत्र के नाम से जाना जाता था, वर्ष 2005 में गुरुग्राम से अलग होकर एक नया जिला बना। अब तक यह जिला रेल नेटवर्क से जुड़ा नहीं था, जिससे आवागमन, रोजगार और औद्योगिक विकास में लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।</p>
<p>नई रेल लाइन से न केवल स्थानीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि औद्योगिक और सामाजिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी। यह परियोजना प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) के तहत शुरू की गई है, जिसमें देश के 115 अति पिछड़े जिलों के विकास का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नूंह भी इन जिलों में शामिल है।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/30_05_2025-rail_line_23951611.jpg" alt="30_05_2025-rail_line_23951611" width="1200" height="675"></img></p>
<p>इस रेल परियोजना की मांग सबसे पहले वर्ष 1971 में तत्कालीन गुरुग्राम सांसद चौधरी तैयब हुसैन ने संसद में उठाई थी। इसके बाद कई बार यह प्रस्ताव दोहराया गया। हाल ही में भिवानी–महेंद्रगढ़ के सांसद धर्मबीर सिंह और गुरुग्राम के सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भी इस परियोजना को आगे बढ़ाने की पहल की। आखिरकार पिछले बजट में केंद्र सरकार ने इसे औपचारिक मंजूरी दे दी।</p>
<p>नई रेल लाइन के पूरा होने पर दिल्ली से अलवर के बीच सोहना, नूंह और फिरोजपुर झिरका के रास्ते सीधा रेल संपर्क स्थापित होगा। इससे न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि यह परियोजना मेवात क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास के नए द्वार भी खोलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 22:44:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूरत-मुंबई वाया अहमदाबाद से मेवाड़ तक ट्रेन सेवा की सख्त जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई और औद्योगिक शहर सूरत में राजस्थान के लाखों प्रवासी रहते हैं, विशेषकर मेवाड़ क्षेत्र  चितौड़गढ़, राजसमंद, उदयपुर, नाथद्वारा, गोगुन्दा, भीलवाड़ा और आसपास के जिलों से। ये प्रवासी न केवल गुजरात और महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं, बल्कि अपने गृहप्रदेश राजस्थान की आर्थिक धारा में भी नियमित रूप से धन भेजकर उसे सशक्त करते हैं। सूरत सिल्क सिटी और डायमंड नगरी के नाम से जानी जाती है।यहां सालाना कपड़ा उधोग और हीरा का खरबो का व्यवसाय होता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्र सरकार को अरबो रुपये का राजस्व सूरत से मिलता है।सूरत में वर्षो से जैन समाज</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159987/there-is-a-dire-need-for-train-service-from-surat-mumbai"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई और औद्योगिक शहर सूरत में राजस्थान के लाखों प्रवासी रहते हैं, विशेषकर मेवाड़ क्षेत्र  चितौड़गढ़, राजसमंद, उदयपुर, नाथद्वारा, गोगुन्दा, भीलवाड़ा और आसपास के जिलों से। ये प्रवासी न केवल गुजरात और महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं, बल्कि अपने गृहप्रदेश राजस्थान की आर्थिक धारा में भी नियमित रूप से धन भेजकर उसे सशक्त करते हैं। सूरत सिल्क सिटी और डायमंड नगरी के नाम से जानी जाती है।यहां सालाना कपड़ा उधोग और हीरा का खरबो का व्यवसाय होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्र सरकार को अरबो रुपये का राजस्व सूरत से मिलता है।सूरत में वर्षो से जैन समाज सहित अन्य जातिवर्ग के लोग उधोग से जुड़े हुए है।इनके लिए बड़ी परेशानी आवागमन की बनी हुई है।मुम्बई ,सूरत ,वाया अहमदाबाद से उदयपुर चितौड़गढ़ के लिए एक भी ट्रेन उपलब्ध नही है।हम समझ सकते  है कि आठ लाख प्रवासियों के लिए आवाजाही की कितनी मुश्किलें पैदा होती होगी। फिर भी यह विडंबना ही है कि इतनी बड़ी संख्या में प्रवासी होने के बावजूद सूरत या मुंबई से वाया अहमदाबाद मेवाड़ तक एक भी नियमित ट्रेन सेवा उपलब्ध नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मेवाड़ से सूरत-मुंबई का गहरा संबंध</strong></div>
<div style="text-align:justify;">सदियों से मेवाड़ के लोग मेहनती, व्यापारिक और तकनीकी दक्षता के लिए जाने जाते हैं। आज सूरत के वस्त्र उद्योग, डायमंड पॉलिशिंग, और छोटे-बड़े व्यापारों में मेवाड़ियों की गहरी जड़ें हैं। अनुमान है कि सूरत और आसपास के क्षेत्रों में आठ लाख से अधिक राजस्थानी प्रवासी रहते हैं, जिनमें से अधिकांश का मूल निवास चितौड़गढ़, राजसमंद, उदयपुर, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों से है।यह वर्ग त्योहारों, शादियों, धार्मिक आयोजनों और पारिवारिक कारणों से अक्सर अपने गृहजिले जाता है। किंतु यातायात के सीमित विकल्पों के कारण उन्हें भारी आर्थिक और शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ती है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>रोज ट्रेन नहीं, केवल बसों का सहारा</strong></div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान में सूरत और मुंबई से मेवाड़ के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं चलती।लोगों को या तो अहमदाबाद, हिम्मतनगर, या उदयपुर तक पहुंचने के लिए अलग-अलग ट्रेनें पकड़नी पड़ती हैं, या फिर निजी बस सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है।हालांकि साप्ताहिक ट्रेनों का संचालन नाकाफी है।त्योहारों के सीजन में यह बस सेवाएँ ही मेवाड़ तक लोगों को पहुंचाने का मुख्य साधन बनती हैं ।परंतु समस्या यह है कि इन बसों की संख्या लगभग तीन हजार तक पहुँच जाती है, और वे प्रति व्यक्ति 2500 से 3000 रुपये तक किराया वसूलती हैं।एक सामान्य मजदूर या मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह किराया बहुत भारी पड़ता है। वहीं यात्रा में 18 से 20 घंटे तक का समय लगता है, जिसमें आराम, सुरक्षा और भोजन की कोई गारंटी नहीं होती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>रेल सेवा से क्या होगा लाभ, प्रवासी जनता को सुविधा</strong></div>
<div style="text-align:justify;">रोज़गार के सिलसिले में सूरत और मुंबई में रह रहे लाखों प्रवासी राजस्थानी एक सस्ती, सुरक्षित और तेज़ यात्रा सुविधा पा सकेंगे। राजस्थान पर्यटन को प्रोत्साहन मिल रहा है।यदि ट्रेन वाया उदयपुर, राजसमंद और चितौड़गढ़ से गुजरे, तो यह पर्यटकों के लिए भी एक बेहतर मार्ग बनेगा। मेवाड़ के ऐतिहासिक किले, झीलें और मंदिर इस मार्ग को लोकप्रिय बना देंगे। राजस्थान,गुजरात और केंद्र में भाजपा की सरकार होते हुए भी प्रवासियों को इतना बडा लम्बा इंतजार कराया जा रहा है।यह अनुचित है।</div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सूरत में व्यापार और रोजगार में वृद्धि</strong></div>
<div style="text-align:justify;">रेल सेवा से सामान का आवागमन आसान होगा। सूरत के व्यापारिक केंद्रों और मेवाड़ के हस्तशिल्प-उद्योगों के बीच बेहतर संपर्क बनेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस ऑपरेटरों की मनमानी पर रोक</strong></div>
<div style="text-align:justify;">ट्रेन शुरू होने से निजी बस संचालकों द्वारा किए जा रहे किराये के शोषण पर अंकुश लगेगा। पर्यावरणीय दृष्टि से लाभदायक है।रेल यात्रा बसों की तुलना में ईंधन की दृष्टि से अधिक किफायती और पर्यावरण-अनुकूल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कई बार उठ चुकी है मांग, पर कार्रवाई नहीं</strong></div>
<div style="text-align:justify;">प्रवासी समाज के संगठनों, विशेषकर राजस्थान मेवाड़ प्रवासी समिति सूरत, मेवाड़ ट्रस्ट मुंबई, और उदयपुर विकास मंच द्वारा पिछले कई वर्षों से यह मांग उठाई जा रही है कि मुंबई से वाया अहमदाबाद होकर चितौड़गढ़-उदयपुर के लिए एक दैनिक ट्रेन चलाई जाए।कई बार रेल मंत्री को ज्ञापन भी सौंपे गए हैं। जनप्रतिनिधियों ने संसद में प्रश्न उठाए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रेलवे का तर्क है कि अहमदाबाद से उदयपुर लाइन पर पहले से ही सीमित क्षमता है, और नई ट्रेनों के लिए पथ (path) उपलब्ध नहीं है। लेकिन अब यह कोई समस्या नही है।ब्रॉडगेज लाइन बिछी हुई है।और अहमदाबाद से साप्ताहिक ट्रेन का संचालन भी है।हालांकि, हाल के वर्षों में उदयपुर-अहमदाबाद सेक्शन का विद्युतीकरण और डबल लाइन कार्य लगभग पूरा हो चुका है, इसलिए तकनीकी रूप से अब कोई बड़ी बाधा नहीं रह गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>संभावित मार्ग और ट्रेन की जरूरत</strong></div>
<div style="text-align:justify;">सूरत ,भरुच, वडोदरा, अहमदाबाद , हिम्मतनगर  उदयपुर  चितौड़गढ़ राजसमंद – नाथद्वारा और जोकि गोगुन्दा उदयपुर का समावेश होता है।यह मार्ग गुजरात और राजस्थान के बीच न केवल सामाजिक बल्कि आर्थिक पुल का काम करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">रोजाना कम से कम दो ट्रेन चलाने से हजारों यात्रियों को राहत मिलेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सीजन में बढ़ जाती है मुश्किलें</strong></div>
<div style="text-align:justify;">नवरात्र, दीपावली, होली और गर्मियों की छुट्टियों के समय यह समस्या चरम पर होती है।</div>
<div style="text-align:justify;">बस टिकट न मिलने पर लोग ट्रेनों में खड़े होकर, किसी भी तरह सफर करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को इस यात्रा में अत्यधिक कठिनाई होती है।त्योहारों पर जब लोग अपने घर पहुंचना चाहते हैं, तो रेल मार्ग का अभाव उन्हें भावनात्मक रूप से भी आहत करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>राज्य सरकारों की भूमिका</strong></div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान और गुजरात दोनों सरकारें इस मुद्दे पर एक साझा पहल कर सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">यदि दोनों राज्य संयुक्त रूप से रेल मंत्रालय से आग्रह करें, तो रेलवे के लिए यह सेवा शुरू करना संभव होगा।</div>
<div style="text-align:justify;">उदयपुर, चितौड़गढ़ और राजसमंद के सांसदों व विधायकों को भी इस पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;">यह केवल यात्रा की सुविधा नहीं, बल्कि प्रवासी समाज के प्रति संवेदनशीलता का भी प्रतीक होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मेवाड़ी समाज जहां भी रहता है, वहाँ उसने विकास की कहानी लिखी है।सूरत, मुंबई, अहमदाबाद और पुणे में लाखों परिवारों ने अपने व्यवसाय स्थापित किए हैं।वे हर साल अपने गांवों में निवेश करते हैं । घर बनवाते हैं, स्कूलों और मंदिरों को दान देते हैं, समाजसेवा करते हैं।ऐसे लोगों को अपने गृहप्रदेश से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम रेल सेवा ही हो सकती है।राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल से भी प्रवासी मेवाड़ी समाज ने अपील की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>आर्थिक दृष्टि से भी फायदेमंद</strong></div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रेल के लिए यह नई ट्रेन घाटे का सौदा नहीं होगी।</div>
<div style="text-align:justify;">अगर आठ लाख प्रवासियों में से केवल दस प्रतिशत लोग भी महीने में एक बार यात्रा करें, तो यात्री संख्या लाखों में पहुंचेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही इस मार्ग से पर्यटन, व्यापारिक और मालवाहक ट्रेन सेवाओं का विस्तार भी संभव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सरकार से अपेक्षाएँ </strong></div>
<div style="text-align:justify;">सर्वेक्षण कर मार्ग की संभाव्यता रिपोर्ट तैयार की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">सूरत-मुंबई वाया अहमदाबाद होकर मेवाड़ के लिए दो नई दैनिक  ट्रेन की घोषणा की जाए।त्योहारों में विशेष ट्रेनें चलाई जाएँ।प्रवासी समाज के साथ संवाद कर उनकी वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">मेवाड़ से सूरत-मुंबई तक ट्रेन सेवा केवल एक यातायात का मुद्दा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, आर्थिक और मानवीय जुड़ाव का प्रतीक है।देश के किसी भी हिस्से में प्रवासी अपनी मेहनत से राष्ट्र का विकास करते हैं।सरकार का दायित्व है कि उन्हें अपने मूल से जोड़ने के लिए बेहतर सुविधाएँ दी जाएँ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज जब ‘विकसित भारत’ की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं, तब ऐसी मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी प्रवासी समाज को निराश करती है।इसलिए समय आ गया है कि रेल मंत्रालय इस लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करे और सूरत-मुंबई वाया अहमदाबाद से मेवाड़ तक दो नई ट्रेन सेवा आरंभ करे।</div>
<div style="text-align:justify;">यह सेवा न केवल लाखों यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि राज्यों के बीच भावनात्मक और आर्थिक रिश्तों को भी नई मजबूती देगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Nov 2025 16:48:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वर्तमान केंद्र सरकार ने जीएसटी घटाने के नाम पर देश की जनता के साथ छलावा किया- सपा </title>
                                    <description><![CDATA[सरकार की दमनकारी नीतियों एवं बढती महंगाई एवं भ्रष्टाचार ने जनता  का सुख चैन छीना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156547/the-present-central-government-cheated-the-people-of-the-country"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/1001239946.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नगर में जल भराव टूटी सड़के गंदगी से जनता परेशान</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>देश वा प्रदेश से रोजगार व व्यवसाय लगभग समाप्त - हाजी फजल महमूद</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> समाजवादी पार्टी कानपुर महानगर के पदाधिकारियों कार्य समिति के सदस्यों विधायकों पूर्व विधायकों विधानसभा अध्यक्षो फ्रंटल तथा प्रकोष्ठ के अध्यक्षों सपा के राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारियों फ्रंटल के राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारियों तथा पीडीए मिशन की मासिक बैठक सपा महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद की अध्यक्षता में सपा कार्यालय में आरंभ हुई। बैठक का संचालन महानगर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शैलेंद्र यादव मिन्टू ने किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> बैठक की अध्यक्षता करते हुए महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद ने कहा कि 4 अक्टूबर 1992 को समाजवादी पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा समाजवादी पार्टी की स्थापना की गई थी जिसका इतना बड़ा विस्तार हुआ कि आज समाजवादी पार्टी देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है इसकी आप सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक को संबोधित करते हुए महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद ने अपने संबोधन में आगे कहा कि वर्तमान की केंद्र सरकार ने जीएसटी घटाने के नाम पर जनता के साथ छलावा किया है क्योंकि सरकार ने कच्चे माल पर 18% जीएसटी लागू का जनता के साथ विश्वास घात किया है अब सरकार का असली चेहरा जनता के सामने आ गया है सरकार की कथनी और करनी में बहुत बड़ा अंतर है तथा आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता पूरे उत्तर प्रदेश से भाजपा का सफाया करके पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का मन बना चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> बैठक में प्रमुख रूप से महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद प्रदेश सचिव के के शुक्ला महासचिव संजय सिंह बंटी सेंगर वरिष्ठ उपाध्यक्ष शैलेंद्र यादव मिन्टू नंदलाल जयसवाल आनंद शुक्ला सत्यनारायण गहरवार फखरे आलम अंसारी रजत मिश्रा सौरभ सिंह मुमताज मंसूरी मोहम्मद सरिया आकाश यादव आदि उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/156547/the-present-central-government-cheated-the-people-of-the-country</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 18:32:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अडानी को बिहार में एक रुपये में मिली 1050 एकड़ जमीन, छिड़ा सियासी संग्राम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज - </strong>  कांग्रेस ने केंद्र सरकार और उद्योगपति गौतम अडानी पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने 15 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि बिहार के भागलपुर में अडानी ग्रुप को महज एक रुपये प्रतिवर्ष की दर से 1,050 एकड़ जमीन पावर प्लांट लगाने के लिए 33 साल की लीज़ पर दी गई है। कांग्रेस प्रवक्ता का आरोप है कि यह जमीन सिर्फ सस्ती दर पर ही नहीं, बल्कि उस पर खड़े 10 लाख से ज्यादा आम, लीची और सागौन के पेड़ों समेत अडानी को सौंप दी</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>उन्होंने</strong></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155196/adani-got-1050-acres-of-land-in-bihar-for-one"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/download2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज - </strong> कांग्रेस ने केंद्र सरकार और उद्योगपति गौतम अडानी पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने 15 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि बिहार के भागलपुर में अडानी ग्रुप को महज एक रुपये प्रतिवर्ष की दर से 1,050 एकड़ जमीन पावर प्लांट लगाने के लिए 33 साल की लीज़ पर दी गई है। कांग्रेस प्रवक्ता का आरोप है कि यह जमीन सिर्फ सस्ती दर पर ही नहीं, बल्कि उस पर खड़े 10 लाख से ज्यादा आम, लीची और सागौन के पेड़ों समेत अडानी को सौंप दी गई है। खेड़ा ने कहा कि यह सिर्फ बिहार का मामला नहीं है, बल्कि पहले भी चुनावी राज्यों में इसी तरह की सौगात अडानी को दी जाती रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>उन्होंने उदाहरण गिनाए –</strong></div>
<div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र चुनाव से पहले अडानी को पावर प्रोजेक्ट और धारावी प्रोजेक्ट मिला।</div>
<div style="text-align:justify;">झारखंड चुनाव से पहले गोड्डा पावर प्रोजेक्ट सौंपा गया।</div>
<div style="text-align:justify;">2013 छत्तीसगढ़ चुनाव से पहले हसदेव अरण्य का प्रोजेक्ट अडानी को मिला, जब राज्य में रमन सिंह की बीजेपी सरकार थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा कि इस बार भी कहानी वही है। बजट में भले इस 2,400 मेगावॉट बिजली प्रोजेक्ट की घोषणा की गई थी, लेकिन यह नहीं बताया गया कि इसे किसी निजी कंपनी को दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 21,400 करोड़ रुपये बताई जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार दौरे को भी घेरा। खेड़ा ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी के कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को ‘नज़रबंद’ किया गया ताकि वे उनके सामने विरोध दर्ज न करा सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बीजेपी का पलटवार</strong></div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस के आरोपों पर बिहार बीजेपी की ओर से जवाब आया है। पार्टी के मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने कहा कि इस प्रोजेक्ट में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। उन्होंने कहा – “टेंडर निकाला गया था। जो कंपनी सबसे कम दर पर बिजली देने को तैयार हुई, उसे प्रोजेक्ट मिला। सरकार का काम जमीन उपलब्ध कराना है, जबकि पूरा निवेश अडानी ग्रुप का है। इससे बिहार को सस्ती दर पर बिजली मिलेगी। इसमें न तो कोई घोटाला है और न ही अनियमितता।”</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:57:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पिछले 10 वर्षों में राजनीतिक नेताओं के खिलाफ दर्ज 193 ईडी मामलों में 2 दोषसिद्धि।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>केंद्र सरकार ने संसद को बताया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले 10 वर्षों में राजनीतिक नेताओं के खिलाफ 193 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें से दो मामलों में दोषसिद्धि हुई है। किसी भी मामले में गुण-दोष के आधार पर कोई बरी नहीं हुआ है।वित्त मंत्रालय ने यह बयान सीपीआई(एम) के राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम द्वारा उठाए गए प्रश्नों के उत्तर में दिया।</div>
<div>  </div>
<div>रहीम ने पिछले दस सालों में सांसदों, विधायकों और स्थानीय प्रशासन के सदस्यों के खिलाफ दर्ज ईडी मामलों की संख्या, उनकी पार्टी के साथ, राज्यवार और सालवार जानना चाहा था। जवाब में, वित्त मंत्रालय में राज्य</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150141/in-the-last-10-years-2-convicts-in-193-ed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download5.jpg" alt=""></a><br /><div>केंद्र सरकार ने संसद को बताया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले 10 वर्षों में राजनीतिक नेताओं के खिलाफ 193 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें से दो मामलों में दोषसिद्धि हुई है। किसी भी मामले में गुण-दोष के आधार पर कोई बरी नहीं हुआ है।वित्त मंत्रालय ने यह बयान सीपीआई(एम) के राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम द्वारा उठाए गए प्रश्नों के उत्तर में दिया।</div>
<div> </div>
<div>रहीम ने पिछले दस सालों में सांसदों, विधायकों और स्थानीय प्रशासन के सदस्यों के खिलाफ दर्ज ईडी मामलों की संख्या, उनकी पार्टी के साथ, राज्यवार और सालवार जानना चाहा था। जवाब में, वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सांसदों, विधायकों और स्थानीय प्रशासन के सदस्यों के साथ-साथ उनकी पार्टी के खिलाफ दर्ज ईडी मामलों का राज्यवार डेटा नहीं रखा जाता है।</div>
<div> </div>
<div>हालांकि, पिछले 10 वर्षों के दौरान मौजूदा और पूर्व सांसदों, विधायकों, एमएलसी और राजनीतिक नेताओं या किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मामलों का वर्षवार विवरण वाली एक तालिका दी गई है।जैसा कि आंकड़ों से देखा जा सकता है, 2019-2024 की अवधि के दौरान ईडी मामलों की संख्या में उछाल आया, जिसमें सबसे अधिक मामले(32) 2023-204 की अवधि में दर्ज किए गए।</div>
<div> </div>
<div>मंत्री ने जवाब दिया कि इन मामलों में दो दोषसिद्धियां सुनिश्चित की गई हैं, एक 2016-2017 और एक 2019-2020 की अवधि में। सांसद के इस प्रश्न पर कि "क्या हाल के वर्षों में विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज ईडी मामलों में वृद्धि हुई है, और यदि हां, तो इस प्रवृत्ति का औचित्य क्या है", मंत्री ने उत्तर दिया कि ऐसी कोई जानकारी नहीं रखी गई है।</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने कई मौकों पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में दोषसिद्धि की कम दरों के बारे में टिप्पणी की है। पिछले नवंबर में, टीएमसी विधायक पार्थ चटर्जी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए, कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि ईडी की दोषसिद्धि दर खराब है और पूछा कि किसी व्यक्ति को कितने समय तक अंडरट्रायल रखा जा सकता है। इससे पहले, कोर्ट ने कहा था कि पिछले दस वर्षों में ईडी द्वारा दर्ज किए गए 5000 मामलों में से केवल 40 में ही दोषसिद्धि हुई है, और ईडी को गुणवत्तापूर्ण अभियोजन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा।</div>
<div> </div>
<div>अरविंद केजरीवाल मामले में पारित निर्णय में न्यायालय ने कहा था कि पीएमएलए शिकायतों और गिरफ्तारियों के आंकड़ों से "कई सवाल उठते हैं" और गिरफ्तारियों पर एक समान नीति की आवश्यकता पर बल दिया था।</div>
<div> </div>
<div>दिसंबर 2024 में, केंद्र सरकार ने संसद को सूचित किया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान 01.01.2019 से 31.10.2024 के बीच मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए प्रवर्तन निदेशालय ("ईडी") द्वारा पंजीकृत मामलों में दर्ज 911 अभियोजन शिकायतों में से 654 मामलों में परीक्षण पूरा हो गया था और यह 42 मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित करने में सक्षम था। यानी, 6.42% दोषसिद्धि दर।</div>
<div> </div>
<div>रहीम के इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कि क्या सरकार ने ईडी जांच की पारदर्शिता और दक्षता में सुधार के लिए कोई सुधार किया है, मंत्री ने कहा:"प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भारत सरकार की एक प्रमुख कानून प्रवर्तन एजेंसी है, जिसे धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए), विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) और भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (एफईओए) के प्रशासन और प्रवर्तन का काम सौंपा गया है। ईडी विश्वसनीय साक्ष्य/सामग्री के आधार पर जांच के लिए मामलों को लेता है और राजनीतिक संबद्धता, धर्म या अन्यथा के आधार पर मामलों में अंतर नहीं करता है।</div>
<div> </div>
<div> इसके अलावा, ईडी की कार्रवाई हमेशा न्यायिक समीक्षा के लिए खुली रहती है। एजेंसी पीएमएलए, 2002; फेमा, 1999 और एफईओए, 2018 के कार्यान्वयन के दौरान की गई कार्रवाई के लिए विभिन्न न्यायिक मंचों जैसे न्यायाधिकरण, अपीलीय न्यायाधिकरण, विशेष न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के प्रति जवाबदेह है।"</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Mar 2025 13:44:55 +0530</pubDate>
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                <title>चंद्रयान-5 मिशन भारत और जापान के बीच एक संयुक्त प्रोजेक्ट, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>चंद्रयान-5 मिशन-</strong>    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष, एस. सोमनाथ ने घोषणा की है कि भारत सरकार ने चंद्रयान-5 मिशन को मंजूरी दे दी है। यह मिशन भारत और जापान के बीच एक संयुक्त परियोजना के रूप में कार्य करेगा।</p>
<p>सोमनाथ ने रविवार को बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, "हमें चंद्रयान-5 मिशन के लिए तीन दिन पहले मंजूरी मिली है। इसे हम जापान के साथ मिलकर करेंगे।" इस मिशन में चंद्रयान-3 के मुकाबले एक बड़ा और भारी रोवर भेजा जाएगा। चंद्रयान-5 का रोवर चंद्रयान-3 के रोवर 'प्रज्ञान' से दस गुना भारी होगा, जो कि 25 किलो वजन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150059/chandrayaan-5-mission-central-government-approves-a-joint-project-between-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(12)2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>चंद्रयान-5 मिशन-</strong>  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष, एस. सोमनाथ ने घोषणा की है कि भारत सरकार ने चंद्रयान-5 मिशन को मंजूरी दे दी है। यह मिशन भारत और जापान के बीच एक संयुक्त परियोजना के रूप में कार्य करेगा।</p>
<p>सोमनाथ ने रविवार को बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, "हमें चंद्रयान-5 मिशन के लिए तीन दिन पहले मंजूरी मिली है। इसे हम जापान के साथ मिलकर करेंगे।" इस मिशन में चंद्रयान-3 के मुकाबले एक बड़ा और भारी रोवर भेजा जाएगा। चंद्रयान-5 का रोवर चंद्रयान-3 के रोवर 'प्रज्ञान' से दस गुना भारी होगा, जो कि 25 किलो वजन का था। चंद्रयान-5 मिशन से पहले, चंद्रयान-4 को 2027 में लॉन्च किया जाएगा। चंद्रयान-4 का उद्देश्य चंद्रमा से नमूने इकट्ठा करना है।</p>
<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/download-(11)3.jpg" alt="चंद्रयान-5 मिशन भारत और जापान के बीच एक संयुक्त प्रोजेक्ट, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी" width="275" height="183"></img>चंद्रयान मिशन का इतिहास</strong><br />चंद्रयान मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की सतह का अध्ययन करना है। चंद्रयान-1, जिसे 2008 में सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था, ने चंद्रमा की रासायनिक, खनिज और फोटो-जीओलॉजिकल मैपिंग की थी।</p>
<p>चंद्रयान-2 मिशन (2019) 98 प्रतिशत सफल रहा था, लेकिन मिशन के अंतिम चरणों में केवल 2 प्रतिशत कार्य पूरा नहीं हो सका था। हालांकि, चंद्रयान-2 का ऑनबोर्ड उच्च-रिज़ोल्यूशन कैमरा अभी भी सैकड़ों चित्र भेजता है, जैसा कि सोमनाथ ने बताया।</p>
<p>चंद्रयान-3, जो चंद्रयान-2 का फॉलो-अप मिशन था, ने ISRO की चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग और रोविंग करने की क्षमता को प्रमाणित किया। 23 अगस्त, 2023 को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक 'सॉफ्ट लैंडिंग' की थी, जिससे भारत केवल पांचवां देश बन गया था, जिसने चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की है (अमेरिका, रूस, चीन और जापान के साथ)।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Mar 2025 15:51:05 +0530</pubDate>
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