<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/19863/raksha-bandhan" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>raksha bandhan - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/19863/rss</link>
                <description>raksha bandhan RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चलो इस बार रक्षाबंधन को राष्ट्र बंधन के रूप में मनाते हैं</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div>रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का एक अद्वितीय पर्व है, जहाँ केवल रेशमी धागा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और उत्तरदायित्व की अटूट गांठ बाँधी जाती है। यह पर्व केवल बहन-भाई के संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से एक आदर्श सामाजिक संरचना के दर्शन भी होते हैं। लेकिन क्या यह भावना मात्र पारिवारिक दायरे में सिमटी रहनी चाहिए? क्यों न इस बार रक्षाबंधन को राष्ट्र के प्रति समर्पित कर ‘राष्ट्र बंधन’ के रूप में मनाया जाए?</div>
<div>  </div>
<div>जब बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं, तो वे सिर्फ उनकी शारीरिक रक्षा का संकल्प नहीं लेतीं, बल्कि उनके जीवन में नैतिकता,</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153730/lets-celebrate-rakshabandhan-as-a-national-bond-this-time"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/download1.jpg" alt=""></a><br /><div>रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का एक अद्वितीय पर्व है, जहाँ केवल रेशमी धागा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और उत्तरदायित्व की अटूट गांठ बाँधी जाती है। यह पर्व केवल बहन-भाई के संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से एक आदर्श सामाजिक संरचना के दर्शन भी होते हैं। लेकिन क्या यह भावना मात्र पारिवारिक दायरे में सिमटी रहनी चाहिए? क्यों न इस बार रक्षाबंधन को राष्ट्र के प्रति समर्पित कर ‘राष्ट्र बंधन’ के रूप में मनाया जाए?</div>
<div> </div>
<div>जब बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं, तो वे सिर्फ उनकी शारीरिक रक्षा का संकल्प नहीं लेतीं, बल्कि उनके जीवन में नैतिकता, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की भी रक्षा का दायित्व सौंपती हैं। यदि हम इस पर्व को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की पुनःस्मृति का माध्यम बनाएं, तो यह उत्सव निजी भावना से ऊपर उठकर राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन सकता है। कल्पना कीजिए, यदि हम सब नागरिक भारत माता की कलाई पर एक संकल्प-सूत्र बाँधें, तो यह राखी मातृभूमि की सेवा, सुरक्षा और समर्पण का महापर्व बन जाएगी।</div>
<div> </div>
<div>रक्षा-सूत्र को हम केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प बना सकते हैं - एक वर्ष, राखी पर्यावरण को समर्पित कर नदियों, वनों, पर्वतों, वायु और जैव विविधता की रक्षा का व्रत ले सकते हैं; तो दूसरे वर्ष, राखी संविधान को समर्पित करें के स्वतंत्रता, समानता, और बंधुत्व की भावना को जीवंत रख सकते हैं; तीसरे वर्ष, एक राखी भारतीय सेना को समर्पित कर के सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान को प्रणाम कर सकते हैं;अगले साल एक राखी किसानों के नाम कर के अन्नदाताओं की कठिन तपस्या को सम्मान दे सकते हैं; तो कभी एक राखी सामाजिक समरसता के लिए बाँध कर जाति, धर्म, भाषा और प्रांत के भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता का संकल्प ले सकते हैं। अतः सरकार को चाहिए कि हर वर्ष इस पर्व को एक विशिष्ट राष्ट्रीय विषय से जोड़े, जैसे इस वर्ष सैनिकों के सम्मान में, अगले वर्ष स्वच्छता कर्मियों के नाम, फिर श्रमिकों के नाम, फिर वन रक्षकों, शिक्षकों, चिकित्सको ,वैज्ञानिकों या तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में योगदान देने वालों के नाम।</div>
<div> </div>
<div> भारत एक विविधताओं से भरा देश है, पर इन विविधताओं के बीच समरसता ही हमारी पहचान है। यदि रक्षाबंधन को "राष्ट्र बंधन" के रूप में मनाया जाए, तो यह पर्व केवल एक पारिवारिक रिवाज न होकर राष्ट्रीय एकता और उत्तरदायित्व का महोत्सव बन सकता है।</div>
<div> </div>
<div>आवश्यक है कि हम रक्षा सूत्र को नया अर्थ दें।आज जब राष्ट्र बाहरी खतरों से अधिक आंतरिक विघटन, वैचारिक भ्रम और सांस्कृतिक संकटों से जूझ रहा है, तब "रक्षा" का अर्थ केवल बाहरी आक्रमण से नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा,संवेदनाओं, संस्कारों और आदर्शों की रक्षा से भी जुड़ता है।ऐसे समय में रक्षा सूत्र को बहन-भाई तक सीमित न रखें। पति-पत्नी, गुरु-शिष्य, मित्र-सखी - सभी एक-दूसरे को और स्वयं को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलाते हुए यह रक्षा-सूत्र बाँधें। बहनें भाइयों की कलाई पर बाँधने के साथ अपनी कलाई पर भी भारत माता की सेवा का संकल्प सूत्र बाँधें।</div>
<div> </div>
<div> समाज में यह चेतना जागे कि राष्ट्र ही हमारा सबसे बड़ा परिवार है। भारत माता हम सबकी शक्ति, प्रेरणा और संरक्षण की केंद्रबिंदु है। जब यह भाव प्रत्येक नागरिक के हृदय में बस जाएगा, तब हर पर्व राष्ट्रीय पर्व बन जाएगा और हर संबंध राष्ट्र धर्म से जुड़ जाएगा। तो आइए, इस बार हम रक्षाबंधन को ‘राष्ट्र बंधन’ के रूप में मनाएं - जहाँ प्रेम का धागा केवल भाइयों की कलाई ही नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को भी बाँधे। यही पर्व की सच्ची सार्थकता होगी।</div>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/153730/lets-celebrate-rakshabandhan-as-a-national-bond-this-time</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/153730/lets-celebrate-rakshabandhan-as-a-national-bond-this-time</guid>
                <pubDate>Wed, 06 Aug 2025 16:05:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-08/download1.jpg"                         length="11538"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रेशमी डोर से बंधा बहनो का भाइयों पर अटूट विश्वास का पवित्र त्यौहार।</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p>रक्षाबंधन केवल बहनों द्वारा रेशमी धागों को भाइयों की कलाई में बांधने का त्यौहार ही नहीं है बल्कि देश के हर नौजवान से देश की सुरक्षा एवं राष्ट्र में निवासरत हर बहन के लिए रक्षा का वचन का त्यौहार भी है। बहन और भाइयों का यह पवित्र त्यौहार सावन की पूर्णिमा पर श्रद्धा सादगी और पवित्रता के साथ मनाया जाता है। जिस बहन ने भाई की कलाई में यह रक्षा सूत्र बांधा है भाई का यह कर्तव्य बन जाता है कि वह आजीवन अपनी बहनों की हर तरह से सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहे।</p>
<p>प्राचीन काल में यज्ञ तथा अनेक</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144084/the-sacred-festival-of-sisters-unwavering-faith-in-their-brothers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-08/rakshabandhan-2022.jpg" alt=""></a><br /><p>रक्षाबंधन केवल बहनों द्वारा रेशमी धागों को भाइयों की कलाई में बांधने का त्यौहार ही नहीं है बल्कि देश के हर नौजवान से देश की सुरक्षा एवं राष्ट्र में निवासरत हर बहन के लिए रक्षा का वचन का त्यौहार भी है। बहन और भाइयों का यह पवित्र त्यौहार सावन की पूर्णिमा पर श्रद्धा सादगी और पवित्रता के साथ मनाया जाता है। जिस बहन ने भाई की कलाई में यह रक्षा सूत्र बांधा है भाई का यह कर्तव्य बन जाता है कि वह आजीवन अपनी बहनों की हर तरह से सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहे।</p>
<p>प्राचीन काल में यज्ञ तथा अनेक धार्मिक अनुष्ठानों को करते समय इस में सम्मिलित होने वाले लोगों की कलाइयों पर मंत्रों से सुभाषित सूत्र बांधा जाता था। यह परंपरा आज भी यथावत जारी रखी गई है सूत्र को यज्ञ शक्ति का प्रतीक समझकर यज्ञ स्थल पर सूत्र धारण करने वाले व्यक्ति की हर आपदा एवं उपद्रवों से रक्षा हेतु यह सूत्र कटिबद्ध माना गया है ।कालांतर में इसी रक्षा सूत्र का नाम रक्षाबंधन पड़ गया है। रक्षाबंधन के साथ यह विश्वास तथा धारणा बलवती हो जाती है कि जिस भाई को बहना ने रेशमी धागे से रक्षा सूत्र के द्वारा रक्षाबंधन किया गया है उस भाई की नैतिक तथा सामाजिक तौर पर धार्मिक जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी बहनों की हर तरह से सुरक्षा करें इसके अलावा देश की सीमा की भी रक्षा करें इसमें उसकी बहन निवासरत है।</p>
<p>इस तरह देश और बहनों की रक्षा का यह पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन के रूप में संपूर्ण राष्ट्र में एवं विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा हर वर्ष मनाया जाता है। पौराणिक और धार्मिक स्वरूप भी है इसकी पुराण में एक कथा है भगवान विष्णु वामन का रूप लेकर दानवों के राजा बलि का सर्वस्व छीन लेते हैं। इसके पश्चात भी विष्णु भगवान राजा बलि को धर्मपरायण न होते देख प्रसन्न होकर उसे पाताल लोक प्रदान करते हैं एवं उस पाताल लोक में स्वयं द्वारपाल बन जाते हैं। इन परिस्थितियों में विष्णु भगवान की पत्नी माता लक्ष्मी उन्हें ना पाकर अत्यंत चिंतित हैं विचलित हो जाती है भगवान नारद जी लक्ष्मी जी की चिंता का निवारण करते हुए बताते हैं कि विष्णु जी पाताल लोक में द्वारपाल बने हुए हैं,</p>
<p>ऐसे में लक्ष्मी जी पाताल लोक के स्वामी बली को रक्षा सूत्र बांधकर वचन के रूप में अपने पति देव विष्णु जी को मांगती है राजा बलि रक्षाबंधन के पवित्र धागों से बंध कर भगवान विष्णु को द्वारपाल के पद से मुक्त कर देते हैं और इन परिस्थितियों में रक्षाबंधन का महत्व पूर्ण कथाओं में श्रेष्ठ बंधन के रूप में माना जाने लगा है। वैसे तो इस पवित्र धागे की रक्षा के अनेक ऐतिहासिक प्रमाण भी दिए गए हैं तब से रक्षाबंधन का यह पवित्र भाव और बहन द्वारा राखी बांधने की परंपरा जोर शोर से प्रचलित हुई है। राजनीति में भी स्वतंत्रता के पूर्व तथा स्वतंत्रता के बाद रक्षाबंधन के बदले बहनों ने भाइयों से सामाजिक सुरक्षा एवं देश की रक्षा के वचनों को मांगा है एवं भारत की स्वतंत्रता प्राप्त की है। रक्षाबंधन में बहने रक्षा सूत्र बांधकर भाइयों मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं देती है और प्रत्युत्तर में भाई उनकी मांगी हुई  मुराद पूरी करते है। आज हर त्यौहार का व्यवसायीकरण हो गया है। </p>
<p>बहने अपने धनिक भाइयों से कीमती वस्तुएं मांग लेती और भाई अपनी क्षमता के अनुसार उनकी मांग पूरी भी कर देते हैं। रक्षाबंधन पवित्रता का त्यौहार है, यह मानवीय भाव का बंधन है। यह प्रेम त्याग और कर्तव्य का बंधन भी है इस बंधन में एक बार बंध जाने के बाद इसे विस्मित किया जाना अत्यंत कठिन होता है। इंन रेशमी धागों में इतनी शक्ति होती है कि भाई बहनों और देश की रक्षा के लिए अपनी जान पर भी खेल जाते हैं। रक्षाबंधन के पर्व हमें संदेश देता है की स्त्री समाज की मुख्य अंग है और स्त्री जिस धरा, जिस भूमि पर, जिस देश में निवास करती है उस देश की भूमि की रक्षा तथा बहनों के प्रेम और सम्मान की सुरक्षा करना भाइयों का प्रथम कर्तव्य हो जाता है अतः सभी भाई बहनों को रक्षाबंधन की किस पवित्र त्यौहार की अनंत बधाइयां एवं शुभकामनाएं।</p>
<p><strong>संजीव ठाकुर, वर्ल्ड रिकार्ड धारक लेखक, चिंतक,स्तंभकार </strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/144084/the-sacred-festival-of-sisters-unwavering-faith-in-their-brothers</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/144084/the-sacred-festival-of-sisters-unwavering-faith-in-their-brothers</guid>
                <pubDate>Sat, 17 Aug 2024 16:34:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-08/rakshabandhan-2022.jpg"                         length="97607"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दस रुपये के आकर्षक लिफाफे में राखी भेज सकेंगी बहनें</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div><strong>लालगंज (रायबरेली)।</strong> रक्षाबंधन का त्यौहार आने वाला है। बाजार में रंग बिरंगी राखियों की दुकानें सज गई हैं। बहनें दूर रहने वाले अपने भाइयों के लिए राखी भेजने की तैयारी में लगी हैं। डाक विभाग इस बार भी बहनों की खुशियों को संजोने का प्रयास किया है। भाइयों को राखी भेजने के लिए मात्र दस रुपये की कीमत में प्लास्टिक कोटेड डिज़ाइनर लिफाफों की व्यवस्था की है। डाकघर के अलावा ग्रामीण डाकघर में लिफाफे उपलब्ध कराए गए हैं। आसानी से खराब न होने वाले इन लिफाफे में राखियाँ सुरक्षित रहेंगी।</div>
<div>  </div>
<div>यह लिफाफे डाकघर से प्राप्त किए जा सकते हैं। डाक</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144023/sisters-will-be-able-to-send-rakhi-in-an-attractive"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-08/download1.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>लालगंज (रायबरेली)।</strong> रक्षाबंधन का त्यौहार आने वाला है। बाजार में रंग बिरंगी राखियों की दुकानें सज गई हैं। बहनें दूर रहने वाले अपने भाइयों के लिए राखी भेजने की तैयारी में लगी हैं। डाक विभाग इस बार भी बहनों की खुशियों को संजोने का प्रयास किया है। भाइयों को राखी भेजने के लिए मात्र दस रुपये की कीमत में प्लास्टिक कोटेड डिज़ाइनर लिफाफों की व्यवस्था की है। डाकघर के अलावा ग्रामीण डाकघर में लिफाफे उपलब्ध कराए गए हैं। आसानी से खराब न होने वाले इन लिफाफे में राखियाँ सुरक्षित रहेंगी।</div>
<div> </div>
<div>यह लिफाफे डाकघर से प्राप्त किए जा सकते हैं। डाक विभाग की ओर से राखियां भेजने के लिए वाटरप्रूफ डिज़ाइनर लिफाफे बहनों को खूब पसंद आ रहे हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं इन लिफाफों में भाइयों को राखियां भेज भी रही हैं। ताकि समय से राखियां भाइयों तक पहुंच सकें।  पोस्ट मास्टर एसके बाजपेई ने बताया की प्लास्टिक कोटेड लिफाफे बेहद आकर्षक हैं। मात्र दस रुपये की कीमत में विभाग स्पीड पोस्ट के जरिए भाइयों तक राखी पहुंचाने का काम कर रहा है। बताया कि इन लिफाफों की छंटनी तेज रहती है। इसलिए साधारण लिफाफों की अपेक्षा यह लिफाफे भेजे गए पते तक द्रुतगति से पहुंचते हैं।</div>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/144023/sisters-will-be-able-to-send-rakhi-in-an-attractive</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/144023/sisters-will-be-able-to-send-rakhi-in-an-attractive</guid>
                <pubDate>Tue, 13 Aug 2024 16:38:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-08/download1.jpg"                         length="7482"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        