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                <title>विधानसभा चुनाव - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>विधानसभा चुनाव RSS Feed</description>
                
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                <title>2027 का चुनाव: जातीय समीकरण से ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे जनता के रोजमर्रा के सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong><span style="font-size:small;">राजीव शुक्ला</span></strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:small;">उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव कभी केवल चुनाव नहीं होते। यहां चुनाव सामाजिक समीकरणों, जातीय पहचान, क्षेत्रीय प्रभाव, धार्मिक ध्रुवीकरण, नेतृत्व की लोकप्रियता और सरकार के कामकाज—इन सबका मिला-जुला परिणाम होते हैं। वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव भी इससे अलग नहीं होगा। सभी राजनीतिक दल अभी से अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में जुट गए हैं और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज होती दिखाई दे रही है। लेकिन इस बार सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल जातीय समीकरणों के सहारे सत्ता की राह आसान होगी? उत्तर प्रदेश का मतदाता पिछले कुछ वर्षों</span></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/187158/in-the-2027-elections-peoples-everyday-questions-will-be-more"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-09/images.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong><span style="font-size:small;">राजीव शुक्ला</span></strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:small;">उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव कभी केवल चुनाव नहीं होते। यहां चुनाव सामाजिक समीकरणों, जातीय पहचान, क्षेत्रीय प्रभाव, धार्मिक ध्रुवीकरण, नेतृत्व की लोकप्रियता और सरकार के कामकाज—इन सबका मिला-जुला परिणाम होते हैं। वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव भी इससे अलग नहीं होगा। सभी राजनीतिक दल अभी से अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में जुट गए हैं और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज होती दिखाई दे रही है। लेकिन इस बार सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल जातीय समीकरणों के सहारे सत्ता की राह आसान होगी? उत्तर प्रदेश का मतदाता पिछले कुछ वर्षों में कई स्तरों पर बदला है।</span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:small;"> वह जाति और समुदाय को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करता, लेकिन उसके सामने रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ऐसे सवाल भी हैं जिन्हें चुनावी भाषणों में लंबे समय तक टाला नहीं जा सकता। रोजगार चाहिए, महंगाई से राहत चाहिए, बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा चाहिए, अस्पताल में इलाज चाहिए, सुरक्षित माहौल चाहिए, किसानों को उचित आय चाहिए, छोटे व्यापारियों को कारोबार का अवसर चाहिए और सरकारी दफ्तरों में बिना सिफारिश तथा बिना अनावश्यक भागदौड़ के काम चाहिए। यही वे मुद्दे हैं जो 2027 की चुनावी बहस की असली दिशा तय कर सकते हैं।</span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:small;">जातीय समीकरण महत्वपूर्ण, लेकिन निर्णायक अकेले नहीं उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति को जातीय समीकरणों से अलग करके समझना मुश्किल है। राजनीतिक दलों के टिकट वितरण से लेकर संगठनात्मक नियुक्तियों और चुनावी रणनीति तक सामाजिक प्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हर दल अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश करेगा। लेकिन जातीय पहचान और राजनीतिक पसंद के बीच अब पहले जैसी सीधी रेखा नहीं रह गई है। एक ही जाति या समुदाय के मतदाता अलग-अलग मुद्दों के आधार पर अलग राजनीतिक विकल्प चुन सकते हैं। </span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:small;">युवा मतदाता रोजगार को प्राथमिकता दे सकता है, महिला मतदाता सुरक्षा और महंगाई को, किसान लागत और बाजार को तथा व्यापारी कारोबार और प्रशासनिक व्यवस्था को। इसलिए 2027 में जातीय समीकरण चुनाव की जमीन तैयार कर सकते हैं, लेकिन उस जमीन पर परिणाम की इमारत केवल जातीय गणित से खड़ी होगी, यह मान लेना राजनीतिक दलों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। उत्तर प्रदेश की विशाल युवा आबादी चुनावी राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण वर्ग है। युवाओं के सामने सबसे बड़ा सवाल रोजगार और भविष्य का है। सरकारी नौकरियां सीमित हैं और हर युवा सरकारी नौकरी का इंतजार नहीं कर सकता।</span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:small;"> असली चुनौती ऐसे निजी और स्थानीय रोजगार पैदा करने की है, जिनमें सम्मानजनक आय, स्थिरता और आगे बढ़ने की संभावना हो। लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, छोटे कारोबार, सेवा क्षेत्र, निर्माण गतिविधियां और स्थानीय उद्यम यदि मजबूत होते हैं तो रोजगार का बड़ा आधार तैयार हो सकता है। लेकिन यदि छोटे उद्यम लागत, बिजली, कर्ज, बाजार, नियमों और प्रशासनिक जटिलताओं के बीच कमजोर पड़ते हैं तो रोजगार का संकट और गहरा सकता है।</span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:small;">2027 में राजनीतिक दलों से केवल यह पूछना पर्याप्त नहीं होगा कि कितनी नौकरियां देने का वादा किया जा रहा है। सवाल यह भी होगा कि वे नौकरियां आएंगी कहां से, निजी क्षेत्र कैसे बढ़ेगा और छोटे शहरों तथा कस्बों में रोजगार के अवसर कैसे बनेंगे? महंगाई का राजनीतिक असर आंकड़ों से ज्यादा रसोई में दिखाई देता है। परिवार का मासिक बजट जब बिगड़ता है तो उसका असर भोजन से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और बचत तक पहुंचता है। </span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:small;">सरकारें महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अनेक नीतिगत कदम उठा सकती हैं, लेकिन आम परिवार का सवाल सीधा है—महीने के अंत में घर का खर्च कैसे चले? 2027 के चुनाव में राजनीतिक दलों को यह बताना होगा कि आम परिवार की क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए उनकी ठोस योजना क्या है। केवल राहत योजनाएं लंबे समय का समाधान नहीं हो सकतीं। स्थायी समाधान आय बढ़ाने, रोजगार पैदा करने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण की क्षमता में है।</span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:small;">किसान अब केवल समर्थन नहीं, सम्मानजनक आय चाहता है उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसान हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। लेकिन किसान की समस्या को केवल चुनावी नारों तक सीमित करना अब पर्याप्त नहीं होगा। किसान के सामने लागत बढ़ने, बाजार, सिंचाई, भंडारण, फसल के उचित मूल्य और मौसम की अनिश्चितता जैसे सवाल हैं। छोटे और सीमांत किसान के लिए खेती केवल उत्पादन का प्रश्न नहीं, परिवार की आर्थिक सुरक्षा का प्रश्न है। </span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:small;">2027 में किसान यह देखेगा कि किस राजनीतिक दल की नीतियां उसकी आय और जोखिम दोनों को समझती हैं। केवल कर्जमाफी या सहायता की घोषणा से आगे बढ़कर कृषि को टिकाऊ और लाभकारी बनाने की बहस जरूरी होगी। शिक्षा और स्वास्थ्य पर जनता का धैर्य टूट रहा है। किसी भी सरकार की वास्तविक परीक्षा स्कूल और अस्पताल में होती है। गरीब परिवार के बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है या नहीं और बीमारी की स्थिति में परिवार को आर्थिक संकट से गुजरना पड़ता है या नहीं—इन सवालों का असर किसी राजनीतिक नारे से कम नहीं है।</span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:small;">सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और उच्च शिक्षा की लागत जैसे मुद्दे युवाओं और अभिभावकों को प्रभावित करते हैं। इसी तरह सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, दवाएं, जांच सुविधाएं, आपातकालीन सेवाएं और मरीजों के साथ व्यवहार भी चुनावी मुद्दा बन सकता है। जनता अब केवल भवन नहीं देखती। वह पूछती है—भवन बन गया, लेकिन उसमें सेवा कितनी मिल रही है? कानून-व्यवस्था चुनाव का हमेशा महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगी। सरकारें अपने प्रदर्शन के आंकड़े सामने रखेंगी और विपक्ष अपने अनुभवों तथा घटनाओं को मुद्दा बनाएगा।</span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:small;"> लेकिन आम नागरिक के लिए कानून-व्यवस्था का अर्थ बहुत सरल है—उसकी शिकायत सुनी जाए, पुलिस निष्पक्ष व्यवहार करे, अपराधी के खिलाफ कार्रवाई हो और निर्दोष व्यक्ति अनावश्यक कानूनी परेशानी में न फंसे। जनता के मन में यह विश्वास होना चाहिए कि कानून सबके लिए समान है। यदि किसी व्यक्ति को न्याय पाने के लिए प्रभाव, पहचान या आर्थिक क्षमता का सहारा लेना पड़े तो व्यवस्था पर उसका भरोसा कमजोर होता है। इसलिए 2027 में कानून-व्यवस्था की बहस केवल अपराध की संख्या तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। </span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:small;">पुलिस की जवाबदेही, निष्पक्ष जांच, समयबद्ध न्याय और नागरिक अधिकार भी इसके केंद्र में होने चाहिए। छोटे व्यापारी और मध्यम वर्ग की आवाज चुनावी राजनीति में गरीब और बड़े उद्योगों की चर्चा अक्सर होती है, लेकिन छोटे व्यापारी, दुकानदार, स्वरोजगार करने वाले लोग और निम्न-मध्यम वर्ग भी बड़ी संख्या में राजनीतिक परिणाम प्रभावित करते हैं। छोटे व्यापारियों के लिए कारोबार चलाना आसान है या मुश्किल? बिजली, किराया, कर, लाइसेंस, बाजार और ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा का दबाव कितना है? स्थानीय बाजारों में ग्राहक की क्रय शक्ति कैसी है? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब चुनावी घोषणापत्रों में दिखाई देना चाहिए। </span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:small;">मध्यम वर्ग की भी अपनी चिंताएं हैं—बच्चों की फीस, मकान, स्वास्थ्य खर्च, परिवहन, रोजगार की असुरक्षा और भविष्य के लिए बचत। यह वर्ग अक्सर राजनीतिक विमर्श में दिखाई कम देता है, लेकिन मतदान के समय उसकी प्राथमिकताएं निर्णायक हो सकती हैं। उत्तर प्रदेश तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। सड़कें, एक्सप्रेसवे, मेट्रो, एयरपोर्ट और बड़े प्रोजेक्ट विकास की तस्वीर बदल रहे हैं। लेकिन विकास का दूसरा चेहरा भी है—जलभराव, यातायात, अतिक्रमण, कचरा, प्रदूषण, खराब नालियां और स्थानीय स्तर पर नागरिक सुविधाओं की कमी। गांवों में भी सड़क और बिजली से आगे रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और स्थानीय अर्थव्यवस्था के सवाल हैं। 2027 में विकास की परिभाषा केवल बड़े प्रोजेक्टों की संख्या नहीं हो सकती। सवाल यह होगा कि इन परियोजनाओं का आम आदमी की जिंदगी पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ा।</span></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 20:20:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘मैं इस्तीफा नहीं दूंगी’:क्या यह  ब्यान संवैधानिक है या लोकतांत्रिक मर्यादाओं का अतिक्रमण?”</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>लेखक:प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
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<div style="text-align:justify;">भारतीय लोकतंत्र में राजनेताओं द्वारा दिये गये ब्यान केवल शब्द या अभिव्यक्ति नहीं होते, वे व्यवस्था की दिशा भी तय करते हैं और राजनेताओं का आचरण। जब माननीय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जैसा वरिष्ठ नेतृत्व विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी और स्वयं के हार के बाद यह वक्तव्य देता है कि “मैं इस्तीफा नहीं दूंगी”, तो यह एक साधारण राजनीतिक वक्तव्य नहीं रह जाता, बल्कि संवैधानिकता, नैतिकता और लोकतांत्रिक परंपराओं पर गहन बहस का विषय बन जाता है।</div>
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<div style="text-align:justify;">भारत का शासन तंत्र संसदीय लोकतंत्र पर आधारित है और संविधान द्वारा संचालित। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की वैधता विधानसभा</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178321/%E2%80%98i-will-not-resign%E2%80%99is-this-statement-constitutional-or-a-violation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hq720.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लेखक:प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय लोकतंत्र में राजनेताओं द्वारा दिये गये ब्यान केवल शब्द या अभिव्यक्ति नहीं होते, वे व्यवस्था की दिशा भी तय करते हैं और राजनेताओं का आचरण। जब माननीय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जैसा वरिष्ठ नेतृत्व विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी और स्वयं के हार के बाद यह वक्तव्य देता है कि “मैं इस्तीफा नहीं दूंगी”, तो यह एक साधारण राजनीतिक वक्तव्य नहीं रह जाता, बल्कि संवैधानिकता, नैतिकता और लोकतांत्रिक परंपराओं पर गहन बहस का विषय बन जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत का शासन तंत्र संसदीय लोकतंत्र पर आधारित है और संविधान द्वारा संचालित। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की वैधता विधानसभा में बहुमत से निर्धारित होती है।यदि किसी दल या गठबंधन के पास बहुमत नहीं है, तो वह सरकार बनाने का नैतिक और संवैधानिक अधिकार खो देता है।ऐसी स्थिति में या तो वैकल्पिक बहुमत सिद्ध किया जाता है या पद छोड़ना पड़ता है।इस दृष्टि से “बहुमत के बिना इस्तीफा न देने” का कथन या यूं कहें बहुमत वाले दल के लिए सक्ता हस्तांतरण हेतु पद न  छोड़ने जैसे वक्तव्य संवैधानिक भावना के विपरीत प्रतीत होते हैं। भारत में इस तरह का ब्यान शायद अपने आप में पहला है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संविधान केवल प्रावधानों का दस्तावेज नहीं, बल्कि संवैधानिक नैतिकता का भी आधार है।डॉ. भीमराव आंबेडकर ने स्पष्ट कहा था कि संविधान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे लागू करने वाले लोग कितनी ईमानदारी से उसका पालन करते हैं।ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है,क्या इस तरह के ब्यान देने  की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है?क्या यह जनादेश का अपमान नहीं है?</div>
<div style="text-align:justify;">ममता दीदी पर मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान महामहिम राष्ट्रपति के प्रदेश आगमन पर उन्हें प्रोटोकॉल के अनुरूप सम्मान न देना, केन्द्रीय जांच एजेंसियों को सहयोग न करना, जांच में व्यवधान उत्पन्न करना,सघन मतदाता जांच का विरोध करना, चुनाव आयोग के अधिकारियों के कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करना, समुदाय विशेष को लाभ पहुंचाना जैसे बहुत सारे आरोप समय-समय पर लगते रहे हैं। इनमें कितने आरोप संवैधानिक रूप से सही है या नहीं यह न्यायलय का तय करना का विषय है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे प्रकरण का सबसे दिलचस्प और चिंताजनक पहलू विपक्षी दलों की ममता दीदी के इस्तीफा न देने वाले ब्यान पर प्रतिक्रिया न आना  है।जहाँ एक ओर समय-समय पर कई विपक्षी दल बार-बार यह आरोप लगाते रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी के शासन में “संविधान खतरे में है”, वहीं दूसरी ओर ममता दीदी के इस स्पष्ट बयान पर न तो विपक्षी दलों द्वारा अपेक्षित विरोध किया और न ही कोई  समझाइश दी गई अपितु 100 सीटों की चोरी के आरोप का समर्थन कर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े कर दिए, जबकि चुनाव में धांधली हुई या नहीं इसको तय करने के लिए न्यायालय, और उसकी शरण में जाना चाहिए यदि किसी प्रकार की आशंका है। चुनाव आयोग की हिंसा रहित निष्पक्ष चुनाव कराने के श्रम पर पानी फेरने से बचना चाहिए।ऐसा मौन समर्थन क्या भारतीय संविधान को खतरे में नहीं डालता? वास्तव में यह विरोधाभास कई सवाल खड़े करता है:क्या संविधान की चिंता केवल राजनीतिक सुविधा का विषय है?क्या संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का पैमाना दलगत आधार पर बदल जाता है?यदि एक ओर “संविधान खतरे में” का नरेटिव गढ़ा जाए और दूसरी ओर ऐसे बयानों पर चुप्पी साध ली जाए, तो क्या यह उस नरेटिव की विश्वसनीयता को कमजोर नहीं करता ?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकतंत्र केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं, बल्कि सिद्धांतों की निरंतरता का नाम है।जब राजनीतिक दल अपने विरोधियों के लिए एक मानक और अपने सहयोगियों के लिए दूसरा मानक अपनाते हैं तो इससे लोकतांत्रिक विमर्श का स्तर गिरता है।इस संदर्भ में यह स्पष्ट होता है कि:संविधान की रक्षा का प्रश्न चयनात्मक नहीं हो सकता;लोकतांत्रिक मूल्यों की कसौटी सभी पर समान रूप से लागू होनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मेरा ऐसा मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति से उठा यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है।“बहुमत हासिल न करने पर भी मैं इस्तीफा नहीं दूंगी” जैसा कथन-संवैधानिक रूप से संदिग्ध और लोकतांत्रिक दृष्टि से अनुपयुक्त प्रतीत होता है।</div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही विपक्ष की चुप्पी यह संकेत देती है कि भारतीय राजनीति में सिद्धांतों की बजाय सुविधा का प्रभाव बढ़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि-सत्ता या विपक्ष में कोई भी बैठे,सबके लिए संविधान सर्वोपरि रहे, और जनादेश का सम्मान अनिवार्य।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 16:54:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चुनावी भूचाल 2026: बदला नैरेटिव बदली राजनीति और उभरे नए सत्ता समीकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत के हालिया विधानसभा चुनावों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र केवल आंकड़ों का खेल नहीं है बल्कि यह भावनाओं रणनीतियों नेतृत्व और सामाजिक समीकरणों का जटिल मिश्रण है। इस बार के नतीजों ने कई स्थापित धारणाओं को तोड़ा और नए राजनीतिक ट्रेंड्स को जन्म दिया। अलग अलग राज्यों में अलग अलग वजहों से सत्ता परिवर्तन हुआ लेकिन अगर गहराई से देखा जाए तो कुछ साझा फैक्टर ऐसे रहे जिन्होंने इन नतीजों को आकार दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सबसे बड़ा बदलाव नैरेटिव के स्तर पर देखने को मिला। चुनाव अब केवल विकास या स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178209/election-earthquake-2026-changed-narrative-changed-politics-and-new-power"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/haseen.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत के हालिया विधानसभा चुनावों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र केवल आंकड़ों का खेल नहीं है बल्कि यह भावनाओं रणनीतियों नेतृत्व और सामाजिक समीकरणों का जटिल मिश्रण है। इस बार के नतीजों ने कई स्थापित धारणाओं को तोड़ा और नए राजनीतिक ट्रेंड्स को जन्म दिया। अलग अलग राज्यों में अलग अलग वजहों से सत्ता परिवर्तन हुआ लेकिन अगर गहराई से देखा जाए तो कुछ साझा फैक्टर ऐसे रहे जिन्होंने इन नतीजों को आकार दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सबसे बड़ा बदलाव नैरेटिव के स्तर पर देखने को मिला। चुनाव अब केवल विकास या स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहे बल्कि पहचान संस्कृति और भावनात्मक अपील का प्रभाव बहुत गहरा हो गया। पश्चिम बंगाल में लंबे समय से सत्ता में रही सरकार के खिलाफ माहौल बना लेकिन यह केवल एंटी इनकम्बेंसी का मामला नहीं था। यहां एक ऐसा नैरेटिव तैयार किया गया जिसमें सांस्कृतिक पहचान को राजनीतिक हथियार बना दिया गया। माछ भात और मां काली जैसे प्रतीकों के जरिए यह संदेश दिया गया कि स्थानीय परंपराओं का सम्मान केवल एक खास राजनीतिक विचारधारा ही कर सकती है। इसने मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को प्रभावित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ध्रुवीकरण इस चुनाव का एक और बड़ा फैक्टर रहा। यह केवल धार्मिक आधार पर नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान के स्तर पर भी हुआ। असम में इसका एक अलग रूप देखने को मिला जहां वोटों का बंटवारा निर्णायक साबित हुआ। विपक्षी दलों के बीच तालमेल की कमी और समुदायों के भीतर विभाजन ने सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुंचाया। यह रणनीति नई नहीं थी लेकिन इस बार इसे अधिक व्यवस्थित तरीके से लागू किया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि चुनाव जीतने के लिए केवल अपने वोटबैंक को मजबूत करना ही नहीं बल्कि विरोधी वोटों को विभाजित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरा बड़ा फैक्टर प्रशासनिक और संरचनात्मक बदलाव रहे। मतदाता सूचियों में संशोधन और परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं का असर सीधे चुनावी परिणामों पर पड़ा। पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने का मुद्दा चर्चा में रहा। वहीं असम में परिसीमन के बाद सीटों का स्वरूप बदल गया जिससे कई क्षेत्रों का राजनीतिक संतुलन प्रभावित हुआ। यह बदलाव तकनीकी लग सकते हैं लेकिन इनका असर जमीनी स्तर पर बहुत गहरा होता है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि चुनाव केवल प्रचार और रैलियों से नहीं जीते जाते बल्कि सिस्टम के भीतर होने वाले बदलाव भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नेतृत्व का प्रभाव इस बार पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट दिखा। असम में मजबूत और आक्रामक नेतृत्व ने सरकार के खिलाफ संभावित नाराजगी को दबा दिया। वहीं केरल में लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद नेतृत्व पर सवाल उठने लगे। भ्रष्टाचार के आरोप और थकान का असर साफ दिखा। यह अंतर बताता है कि केवल सत्ता में बने रहना काफी नहीं होता बल्कि जनता के बीच लगातार भरोसा बनाए रखना भी जरूरी है। जहां यह भरोसा टूटा वहां सत्ता भी हाथ से निकल गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु में जो हुआ वह भारतीय राजनीति के लिए एक दिलचस्प मोड़ है। यहां एक फिल्मी सितारे ने अपनी लोकप्रियता को राजनीतिक ताकत में बदल दिया। यह कोई नई बात नहीं है लेकिन जिस तेजी और पैमाने पर यह बदलाव हुआ उसने सबको चौंका दिया। इसका मतलब यह है कि आज का मतदाता पारंपरिक दलों से हटकर नए विकल्पों को मौका देने के लिए तैयार है। खासकर युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाता ऐसे चेहरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं जो उन्हें नया और अलग लगता है। यह बदलाव आने वाले समय में अन्य राज्यों में भी देखने को मिल सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिलाओं की भूमिका इस चुनाव में निर्णायक रही। पहले उन्हें केवल एक सहायक वोटबैंक माना जाता था लेकिन अब वे खुद एक संगठित और प्रभावशाली वर्ग बन चुकी हैं। अलग अलग राज्यों में महिलाओं को लक्षित करके योजनाएं और वादे किए गए। कहीं नकद सहायता का वादा किया गया तो कहीं सामाजिक सुरक्षा और रोजगार की बात हुई। इसका असर यह हुआ कि महिलाओं ने बड़ी संख्या में मतदान किया और कई सीटों पर परिणाम को प्रभावित किया। यह ट्रेंड भविष्य की राजनीति को भी दिशा देगा क्योंकि अब कोई भी दल इस वर्ग को नजरअंदाज नहीं कर सकता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि सत्ताधारी दलों के पारंपरिक गढ़ भी इस बार सुरक्षित नहीं रहे। पश्चिम बंगाल में जिन सीटों पर एक ही पार्टी का लंबे समय से कब्जा था वहां भी बदलाव देखने को मिला। इसका मतलब यह है कि मतदाता अब केवल परंपरा के आधार पर वोट नहीं दे रहा बल्कि वह विकल्प तलाश रहा है। इसी तरह तमिलनाडु में भी पारंपरिक दो दलों के बीच की राजनीति को एक नए खिलाड़ी ने चुनौती दी। यह बदलाव भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि सत्ता स्थायी नहीं होती और जनता समय समय पर नए विकल्प तलाशती रहती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन सभी फैक्टर्स को मिलाकर देखा जाए तो यह चुनाव केवल सरकार बदलने का मामला नहीं है बल्कि यह राजनीति के बदलते स्वरूप का संकेत है। अब चुनाव अधिक जटिल हो गए हैं जहां भावनाएं रणनीति नेतृत्व और सामाजिक समीकरण सभी एक साथ काम करते हैं। यह भी स्पष्ट है कि कोई एक फार्मूला सभी राज्यों में काम नहीं करता। हर राज्य की अपनी सामाजिक संरचना और राजनीतिक संस्कृति होती है और उसी के अनुसार रणनीति बनानी पड़ती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक दल इन ट्रेंड्स से क्या सीखते हैं। क्या वे केवल ध्रुवीकरण और नैरेटिव पर ध्यान देंगे या फिर विकास और शासन के मुद्दों को भी उतनी ही प्राथमिकता देंगे। मतदाता अब पहले से अधिक जागरूक है और वह केवल वादों से संतुष्ट नहीं होता। उसे परिणाम चाहिए और अगर उसे लगता है कि कोई और विकल्प बेहतर है तो वह बदलाव करने में संकोच नहीं करता।</div>
<div style="text-align:justify;">इस चुनाव ने एक और बात साफ कर दी है कि भारतीय लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। नए खिलाड़ी सामने आ रहे हैं और पुराने दलों को खुद को लगातार अपडेट करना पड़ रहा है। यह स्थिति लोकतंत्र के लिए अच्छी है क्योंकि इससे जवाबदेही बढ़ती है और जनता को बेहतर विकल्प मिलते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंत में कहा जा सकता है कि 2026 के चुनाव केवल राजनीतिक घटनाएं नहीं हैं बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक बदलाव का संकेत हैं। यहां से जो ट्रेंड्स उभरे हैं वे आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति को नई दिशा देंगे। जो दल इन संकेतों को समझेंगे और समय के अनुसार खुद को ढालेंगे वही भविष्य में सफल होंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">      <strong>   *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 16:31:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बनारस की अजगरा विधान सभा सीट जहां से  कभी कोई स्थानीय नेता विधायक नहीं बन पाया</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> बनारस जिला में एक अजगरा विधान सभा क्षेत्र है पहले यह सैद पुर विधान सभा के नाम पर पहचाना जाता था जबकि इस विधान सभा में अस्सी प्रतिशत वोट चोला पुर ब्लाक का था ।पर कभी भी इस सैद पुर विधान सभा क्षेत्र से चोला पुर ब्लाक का कोई नेता वह किसी भी दल का रहा हो विधायक नहीं बना बस एक बार सपा की सरकार में धरहरा से मुलायम सिंह के बहुत प्रिय राजनाथ यादव उप चुनाव जीते थे।फिर आज तक कोई नहीं दुसरा स्थानीय नेता चुनाव जीत पाया ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नये परिसीमन में सैदपुर को बाहर करकेपूर्ण</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177410/ajgra-assembly-seat-of-banaras-from-where-no-local-leader"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/rajneeti1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> बनारस जिला में एक अजगरा विधान सभा क्षेत्र है पहले यह सैद पुर विधान सभा के नाम पर पहचाना जाता था जबकि इस विधान सभा में अस्सी प्रतिशत वोट चोला पुर ब्लाक का था ।पर कभी भी इस सैद पुर विधान सभा क्षेत्र से चोला पुर ब्लाक का कोई नेता वह किसी भी दल का रहा हो विधायक नहीं बना बस एक बार सपा की सरकार में धरहरा से मुलायम सिंह के बहुत प्रिय राजनाथ यादव उप चुनाव जीते थे।फिर आज तक कोई नहीं दुसरा स्थानीय नेता चुनाव जीत पाया ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नये परिसीमन में सैदपुर को बाहर करकेपूर्ण रूप से बनारस जिले के मतदाताओं का विधानसभा अजगरा बना दिया गया और आरक्षित हैं।फिर भी कोई चोलापुर ब्लाक का मूल विधायक नहीं बन पाया है । नहीं इस ब्लाक का को को ई नेता सांसद भी बन पाया । यह विधान सभा चन्दौली संसदीय क्षेत्र में है।चन्दौली क्षेत्र में आने से पहले यह केराकत क्षेत्र में था ।चन्दौली क्षेत्र में दोबारा सांसद महेन्द्र पाण्डेय बने पर वह भी मूल पुर से बाहरी गाजीपुर जिले  से है । पर बनारस में मकान बना लिया वहीं रहते हैं।पर मूल तो नहीं है जिस कारण से विकास से उपेक्षित रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज अजगरा विधान सभा में विधायक टी राम जो कभी मायावती के खास थे।  तब वह बहुजन समाज से एकबार बने विधायक मूल पुर से केराकत के है उनके काल में भी विधान सभा में कुछ नहीं हुआ एक बार सोनकर जी शहर बनारस से जाकर विधायक बन गये तब भी कुछ नहीं हुआ।आज  बहुजनसमाज से भाजपा में  आये टी राम यानि त्रिभुवनराम विधायक हैं । पर अजगार विधानसभा में कोई कारखाना नहीं  कोई उघोग नहीं लगा पाते हैं। बस यहां की जनता का वोट लेकर मौज में है ।जगरा विधानसभा में ढंग की सड़क नहीं नहीं चोलापुर में हास्पिटल सही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जो बस साधारण मरीज का ईलाज करता है बाकी सबको शहर में भेज देता है।विधायकबस बुलाने पर पार्टी के कार्यक्रम में देखें जाते हैं इसी अजगरा विधान सभा क्षेत्र का यह दूर्भाग्य है कि यहां की जनता कभी अपनों को भोजन नहीं देती है यानि चुनाव नहीं जितने देती न जाने किस विवेक से वह हमेशा बाहरी लोगो के साथ ही खड़ा होती है जो जनता को ठग रहे हे । अगर स्थानीय विधायक रहता तो उस पर जनता का दबाव भी होता और जन हित में कार्य भी होता पर यह बहुत बड़ी विडम्बना है कि जब से अजगरा विधान सभा अस्तित्व में आया है तभी से बाहरी ही विधायक बन रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अजगरा के मतदाताओं को यह सोचना चाहिए क्यों बाहरी लोगो पर भरोसा इतना करते हैं । अपनी जमीन को  किसी और को क्यों दे रहे हैं ।क्या जनता अपने जमीर को बेच देती है या अजगरा विधान सभा में मूल अजगरा विधानसभा में कोई नेता नहीं जिस पर विश्वास नहीं और बाहरी पर एतबार हो जाता है।अब समय आ रहा है अजगरा विधानसभा के लोग जागरूक बने और अंजगरा विधानसभा के मूल निवासी को अपना विधायक चुने बाहरी हटाओ अपने को गले लगाओ की निती पर चलेंगे तभी विधान सभा के हर पंचायत गांव का विकास होगा कुछ उघोग लगेंगे ।नहीं तो बाहर के लोग आपका बनाया भोजन करके आपको ही गाली देंगे की मूर्खो को मूर्ख बनाकर सत्ता का आनन्द लेते हैं । और क्षेत्र में कोई विशेष विकास नहीं होता है। जनता बस सड़क या पंचायत भवन नहीं </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब 2027नजदीक आ रहा है तो गांव के मन्दिर को कुछ विधायक जी धन देते हैं उसी पर विधायक का चरण चुम्बक बने कर जय कारा लगाते हैं।  स्वागत करते रहते है ।कभी कोई उघोग नहीं मांगा न लगा विधान सभा में कि विधानसभा के लड़कों को रोजगार मिले ।हिमाचल का एक विधान सभा क्षेत्र भारत में बहुत प्रसिद्ध है नाम हरोली है जहां का विधायक स्थानीय है उस विधान सभा क्षेत्र में केन्द्रीय विद्यालय के साथ ट्रिपल आई आई टीसरकारी महाविद्यालय है तो उघोगा की भर मार है स्थानीय युवाओं के साथ प्रदेश व देश के लोगों को नौकरी मिली है।क्या अजगरा विधानसभा में ऐसा हो सकता है क्यों नहीं अजगरा विधानसभा में सरकारी महाविद्यालय खुला ।अगर स्थानीय विधायक होगा तो अपने लोगों के बारे में सोचेगा ‌उघोग सरकारी और निजी क्षेत्र में लायेगा पर सोच बदलें जनता अपने पर विश्वास कर अपनों को विधायक बनाये।नहीं तो उधार के सिन।दूर से अजगरा कभी सुहागन का दर्जा नहीं पायेगा।वह बस उधार वाला ही कहा जायेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब 2027नजदीक आ रहा है।चुनाव होगा ही अभी नया परिसीमन होगा नहीं तो अजगरा विधानसभा सुरक्षित विधान सभा सीट ही रहेगा या जनता चुनाव आयोग को एक मुहिम चला कर पत्र भेजे की इस विधानसभा को अब ओपेन सामान्य वर्ग के लिए किया जाये जिससे सामान्य वर्ग भी चुनाव लड सके।पर अब पुनः ,वाले वहीं पुतिन कब तक बाहरी लोगों का पैर धोयेगे आजगरा के मतदाता।क्या कोई अपना नहीं जो क्षेत्र की क्विज विधानसभा में उठा सकें क्षेत्र में उघोग लगे युवाओं कि पलायन रोका जाये नशे से मुक्ति इन युवाओं को मिल सके।इस बार अंगारा विधानसभा के लोग तय कर लें अपनी धरा पर अब बाहरी नहीं चाहे किसी भी दल का हो</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:00:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रामकृष्णनगर में चुनावी प्रचार चरम पर, बीजेपी बनाम कांग्रेस में कड़ा मुकाबले का संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि -</strong>  श्रीभूमि जिले के रामकृष्णनगर विधानसभा क्षेत्र में जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मी तेज़ होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच सीधा मुकाबला अब और भी दिलचस्प होता जा रहा है। वर्तमान के दो बार विधायक एवं बीजेपी प्रत्याशी विजय मालाकार तथा कांग्रेस प्रत्याशी, वकील और पूर्व जिला परिषद सदस्य सुरुचि राय दोनों ही सभाओं और रैलियों के जरिए जोरदार प्रचार अभियान चला रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी सुरुचि राय ने अपने जनसभाओं में शिक्षा को मुख्य मुद्दा बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के दुल्लभछड़ा,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174670/election-campaign-at-its-peak-in-ramakrishnanagar-indicating-tough-contest"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1001397049.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि -</strong> श्रीभूमि जिले के रामकृष्णनगर विधानसभा क्षेत्र में जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मी तेज़ होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच सीधा मुकाबला अब और भी दिलचस्प होता जा रहा है। वर्तमान के दो बार विधायक एवं बीजेपी प्रत्याशी विजय मालाकार तथा कांग्रेस प्रत्याशी, वकील और पूर्व जिला परिषद सदस्य सुरुचि राय दोनों ही सभाओं और रैलियों के जरिए जोरदार प्रचार अभियान चला रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी सुरुचि राय ने अपने जनसभाओं में शिक्षा को मुख्य मुद्दा बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के दुल्लभछड़ा, निविया, चेरागी और रंगपुर जैसे दूरदराज़ इलाकों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए कई किलोमीटर दूर रामकृष्णनगर जाना पड़ता है, जिससे मजदूर और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने वादा किया कि जीतने पर क्षेत्र में डिग्री कॉलेज, सर्कल ऑफिस और अन्य आवश्यक सरकारी संस्थानों की स्थापना की जाएगी। साथ ही, उन्होंने पिछले पंचायत चुनाव में अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए पारदर्शी प्रशासन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। वहीं, बीजेपी उम्मीदवार विजय मालाकार विकास के मुद्दे को केंद्र में रखकर प्रचार कर रहे हैं। उनका दावा है कि कांग्रेस के लंबे शासनकाल की तुलना में बीजेपी ने कम समय में कहीं अधिक विकास कार्य किए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पहले क्षेत्र में संचार व्यवस्था कमजोर थी और कानून-व्यवस्था भी चिंताजनक थी, जबकि वर्तमान सरकार ने इन क्षेत्रों में सुधार किया है। उन्होंने जनता से पिछले और वर्तमान हालात की तुलना करने की अपील की और अपनी जीत को लेकर आशावाद जताया। कुल मिलाकर, रामकृष्णनगर में इस बार का चुनाव विकास बनाम बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे पर केंद्रित होकर बेहद प्रतिस्पर्धी बन चुका है। अब देखना होगा कि मतदाता किसे अपना समर्थन देते हैं और इस कड़े मुकाबले में जीत किसकी होती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/174670/election-campaign-at-its-peak-in-ramakrishnanagar-indicating-tough-contest</link>
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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:33:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल में ‘दीदी बनाम मोदी’ की सीधी जंग, तमिलनाडु में द्रविड़ किले पर ‘विजय’ फैक्टर की दस्तक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश की सियासत एक बार फिर दो बड़े गैर-भाजपा शासित राज्यों,पश्चिम बंगाल और तमिलनाडुकी ओर टिकी है। दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव की आहट तेज हो चुकी है और राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। एक ओर बंगाल में ‘दीदी बनाम मोदी’ की सीधी लड़ाई आकार ले रही है, तो दूसरी ओर तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक द्वंद्व के बीच अभिनेता विजय की एंट्री ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। इन दोनों राज्यों के चुनाव न केवल क्षेत्रीय राजनीति की दिशा तय करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों पर भी गहरा असर डाल सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170839/direct-battle-of-didi-vs-modi-in-bengal-vijay-factor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/images-(4)1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश की सियासत एक बार फिर दो बड़े गैर-भाजपा शासित राज्यों,पश्चिम बंगाल और तमिलनाडुकी ओर टिकी है। दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव की आहट तेज हो चुकी है और राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। एक ओर बंगाल में ‘दीदी बनाम मोदी’ की सीधी लड़ाई आकार ले रही है, तो दूसरी ओर तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक द्वंद्व के बीच अभिनेता विजय की एंट्री ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। इन दोनों राज्यों के चुनाव न केवल क्षेत्रीय राजनीति की दिशा तय करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों पर भी गहरा असर डाल सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डेढ़ दशक से सत्ता में हैं। 34 साल तक चले वाम शासन के ‘लाल किले’ को भेदकर सत्ता में आईं ममता आज भी आक्रामक तेवर में नजर आती हैं। उनके लिए महिला मतदाता, अल्पसंख्यक समर्थन, सामाजिक योजनाएं और मजबूत बूथ कैडर चुनावी आधार की धुरी हैं। लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं ने ग्रामीण और महिला वोट बैंक में गहरी पैठ बनाई है। इसके साथ ही ममता की सड़क पर उतरकर संघर्ष करने वाली छवि पार्टी कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरती है। हाल के महीनों में भर्ती घोटाले, मंत्रियों की गिरफ्तारी, हजारों नियुक्तियों के रद्द होने और कुछ चर्चित घटनाओं ने सरकार की छवि पर सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन ममता इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए सीधे मुकाबले की रणनीति अपना रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर, भाजपा ने बंगाल में पिछले चुनाव में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की थी। 2021 के चुनाव में पार्टी ने 77 सीटें जीतकर खुद को मुख्य विपक्ष के रूप में स्थापित किया। भाजपा की रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे, ‘डबल इंजन’ सरकार के वादे और संगठित बूथ प्रबंधन पर टिकी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई केंद्रीय नेताओं के दौरे लगातार बढ़ रहे हैं। पार्टी घुसपैठ, भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अपराध और कानून-व्यवस्था को मुख्य मुद्दा बना रही है। फिर भी भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य स्तर पर ममता के कद का सर्वमान्य चेहरा खड़ा करना है। स्थानीय नेतृत्व की कमी और बंगाली अस्मिता के सवाल पर टीएमसी की आक्रामक राजनीति भाजपा के लिए कठिन परीक्षा बन सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल की राजनीति में ‘सड़क की ताकत’ को निर्णायक माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जो सड़क पर दिखता है, वही चुनावी धारणा गढ़ता है। फिलहाल ममता की सक्रियता और संगठन की जमीनी मौजूदगी उन्हें बढ़त देती दिखती है, लेकिन भाजपा का मत प्रतिशत बढ़ा है और पार्टी अपने समर्थकों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश में है कि सत्ता परिवर्तन संभव है। वाम दल और कांग्रेस अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। यदि विपक्षी वोटों का बिखराव होता है तो इसका सीधा लाभ टीएमसी को मिल सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु की तस्वीर अलग है, लेकिन उतनी ही रोचक। यहां पांच दशकों से द्रविड़ दलों का वर्चस्व कायम है। मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और विपक्षी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के बीच रहा है। 2021 में डीएमके ने बहुमत हासिल कर सत्ता में वापसी की थी। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन सामाजिक कल्याण योजनाओं, क्षेत्रीय अस्मिता और केंद्र के साथ टकराव की राजनीति को आधार बना रहे हैं। हिंदी थोपने के आरोप और संघीय ढांचे के मुद्दे को भी डीएमके जोर-शोर से उठा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एआईएडीएमके, जो कभी जे. जयललिता के नेतृत्व में मजबूत धुरी थी, उनके निधन के बाद से आंतरिक खींचतान से जूझ रही है। पार्टी भाजपा के साथ गठबंधन में है, लेकिन सीट बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है। भाजपा राज्य में अपनी स्वतंत्र पहचान मजबूत करना चाहती है और 50 से अधिक सीटों की मांग कर रही है, जबकि एआईएडीएमके सीमित साझेदारी के पक्ष में है। भाजपा की कोशिश एआईएडीएमके से अलग हुए नेताओं को फिर से साथ लाकर व्यापक एनडीए खड़ा करने की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु की राजनीति में इस बार सबसे बड़ा नया फैक्टर अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) है। युवाओं और दक्षिण तमिलनाडु में विजय की लोकप्रियता ने चुनाव को त्रिकोणीय बनाने की संभावना बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि टीवीके 10-15 प्रतिशत वोट भी हासिल करती है तो यह पारंपरिक समीकरणों को बदल सकता है। विजय खुद को भ्रष्टाचार और परिवारवाद के खिलाफ विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं। उन्होंने डीएमके और भाजपा दोनों से दूरी बनाकर तीसरे मोर्चे की संभावना खुली रखी है।कांग्रेस इस राज्य में डीएमके के साथ गठबंधन में है और अधिक सीटों की मांग कर रही है, लेकिन अंतिम फैसला सीट शेयरिंग वार्ता पर निर्भर करेगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए तमिलनाडु में विस्तार की चुनौती बरकरार है, क्योंकि यहां राष्ट्रीय दलों की भूमिका अब तक सीमित रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दोनों राज्यों में एक समान तत्व है।पहचान की राजनीति और कल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव। बंगाल में जहां महिला और अल्पसंख्यक वोट निर्णायक माने जाते हैं, वहीं तमिलनाडु में सामाजिक न्याय, भाषा और क्षेत्रीय गर्व का मुद्दा अहम है। भाजपा इन दोनों राज्यों में अपनी जड़ें गहरी करने की कोशिश में है, लेकिन उसे स्थानीय भावनाओं और मजबूत क्षेत्रीय नेतृत्व की दीवार से जूझना पड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आगामी चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन या पुनरावृत्ति का प्रश्न नहीं हैं। यह क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय राजनीति की परीक्षा भी है। बंगाल में यदि ममता फिर जीतती हैं तो उनका कद राष्ट्रीय विपक्ष की धुरी के रूप में और मजबूत होगा। वहीं भाजपा यदि सीटों में बड़ी बढ़त दर्ज करती है तो पूर्वी भारत में उसका विस्तार नया अध्याय लिखेगा। तमिलनाडु में डीएमके की वापसी द्रविड़ मॉडल की पुष्टि मानी जाएगी, जबकि एआईएडीएमके-भाजपा गठबंधन की सफलता दक्षिण भारत में भाजपा की संभावनाओं को नई ऊर्जा दे सकती है। और यदि विजय की पार्टी उल्लेखनीय प्रदर्शन करती है, तो यह राज्य की राजनीति में स्थायी बदलाव की शुरुआत हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस तरह 2026 के विधानसभा चुनाव बंगाल और तमिलनाडु में केवल सरकार चुनने का अवसर नहीं, बल्कि राजनीतिक दिशा तय करने की निर्णायक घड़ी बनते जा रहे हैं। देश की निगाहें अब इन दो राज्यों पर टिकी हैं, जहां हर रैली, हर बयान और हर गठबंधन भविष्य की राजनीति की पटकथा लिख रहा है।फिर भी कयास लगाए जा रहे है कि मतदाता जंगलराज से परेशान है ओर इसकी तैयारी कर चुकी भाजपा जीत का दावा कर परिवर्तन की पूर्ण सम्भावना बताई जा रही है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Feb 2026 18:49:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विधानसभा चुनाव से पहले मायावती का मास्टरस्ट्रोक, भतीजे आकाश आनंद के ससुर को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और सुप्रीमो मायावती ने पार्टी को मजबूत बनाने के लिए फिर से बड़े बदलाव किए हैं। ये बदलाव 2027 के विधानसभा चुनाव और अन्य राज्यों में पार्टी की स्थिति सुधारने के उद्देश्य से किए गए हैं। मायावती ने कई प्रमुख नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के बड़े मंडलों से लेकर दूसरे राज्यों तक के प्रभार शामिल हैं। पार्टी का लक्ष्य जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और संगठन को और मजबूत बनाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">मायावती ने पूर्व नेता और पूर्व मंत्री नौशाद अली को चार महत्वपूर्ण मंडलों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170367/before-the-assembly-elections-mayawatis-masterstroke-handed-over-big-responsibility"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/images10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और सुप्रीमो मायावती ने पार्टी को मजबूत बनाने के लिए फिर से बड़े बदलाव किए हैं। ये बदलाव 2027 के विधानसभा चुनाव और अन्य राज्यों में पार्टी की स्थिति सुधारने के उद्देश्य से किए गए हैं। मायावती ने कई प्रमुख नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के बड़े मंडलों से लेकर दूसरे राज्यों तक के प्रभार शामिल हैं। पार्टी का लक्ष्य जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और संगठन को और मजबूत बनाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">मायावती ने पूर्व नेता और पूर्व मंत्री नौशाद अली को चार महत्वपूर्ण मंडलों का मुख्य प्रभारी बनाया है। ये मंडल हैं- कानपुर, लखनऊ, आगरा और मेरठ। नौशाद अली को इन इलाकों में पार्टी की गतिविधियां तेज करने और संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है। ये चारों मंडल उत्तर प्रदेश में राजनीतिक रूप से बहुत अहम हैं। यहां बसपा अपनी पुरानी ताकत वापस लाने और नई उपस्थिति बनाने की कोशिश कर रही है। नौशाद अली लंबे समय से पार्टी से जुड़े हैं और मायावती के विश्वसनीय नेताओं में गिने जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पार्टी ने भतीजे आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ को भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें चार राज्यों- केरल, गुजरात, छत्तीसगढ़ और दिल्ली- का मुख्य केंद्रीय प्रभारी बनाया गया है। अशोक सिद्धार्थ हाल ही में पार्टी में वापस आए हैं। अब उन्हें इन राज्यों में बसपा की रणनीति बनाने, संगठन फैलाने और कार्यकर्ताओं को जोड़ने का काम सौंपा गया है। यह फैसला पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मायावती ने संगठन में और भी बदलाव किए हैं। पूर्व सांसद गिरीश चंद्र को उत्तराखंड का प्रभारी बनाया गया है। राजाराम को मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही, सुमरत सिंह को राजस्थान का प्रभारी नियुक्त किया गया है। ये सभी नियुक्तियां बसपा की रणनीति का हिस्सा हैं। पार्टी आगामी चुनावों के लिए तैयारियां तेज कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन बदलावों से कार्यकर्ताओं में नया जोश आएगा। जमीनी स्तर पर काम बढ़ेगा और बहुजन समाज की आवाज मजबूत होगी। मायावती का यह कदम संगठन में नई ऊर्जा भरने और विभिन्न क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ाने का प्रयास है। बसपा अब इन बदलावों के जरिए मजबूत वापसी की तैयारी में जुटी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 19:00:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समाजवादी पार्टी का पीडीए महिला सम्मेलन हुआ सम्पन्न </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="mail-message-content collapsible zoom-normal mail-show-images">
<div class="clear">
<div>
<div><strong>विनीत कुमार मिश्रा </strong></div>
<div><strong>जिला संवाददाता </strong></div>
<div>  </div>
<div><strong>लखनऊ </strong></div>
<div>राजधानी लखनऊ के गोसाईंगंज क्षेत्र स्थित आशीर्वाद लॉन,शिवलर चौराहा में समाजवादी पाटी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल के निर्देश में तीसरा पी0डी0ए0 महिला सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया गया । पी0डी0ए0 महिला सम्मेलन में मुख्य अतिथि समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल  , विशिष्ट अतिथि के रूप में सांसद आर0के0 चौधरी मौजूद रहे। </div>
<div>  </div>
<div>पीडीए महिला सम्मेेलन की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला सभा जूही सिंह ने की।  महिला सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल को चांदी का मुकुट एवं  प्रदेश उपाध्यक्ष सी0एल0 वर्मा, सांसद आर0के0 चौधरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला सभा जूही सिंह</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149127/samajwadi-partys-pda-womens-conference-held%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/img-20250228-wa0354.jpg" alt=""></a><br /><div class="mail-message-content collapsible zoom-normal mail-show-images">
<div class="clear">
<div>
<div><strong>विनीत कुमार मिश्रा </strong></div>
<div><strong>जिला संवाददाता </strong></div>
<div> </div>
<div><strong>लखनऊ </strong></div>
<div>राजधानी लखनऊ के गोसाईंगंज क्षेत्र स्थित आशीर्वाद लॉन,शिवलर चौराहा में समाजवादी पाटी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल के निर्देश में तीसरा पी0डी0ए0 महिला सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया गया । पी0डी0ए0 महिला सम्मेलन में मुख्य अतिथि समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल  , विशिष्ट अतिथि के रूप में सांसद आर0के0 चौधरी मौजूद रहे। </div>
<div> </div>
<div>पीडीए महिला सम्मेेलन की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला सभा जूही सिंह ने की।  महिला सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल को चांदी का मुकुट एवं  प्रदेश उपाध्यक्ष सी0एल0 वर्मा, सांसद आर0के0 चौधरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला सभा जूही सिंह एवं पूर्व एम0एल0सी0 डॉ मधु गुप्ता को अंगवस्त्र पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया गया और साथ ही वहां उपस्थित सभी महिलाओं को भी अंगवस्त्र भेंट किये गये।</div>
<div>पीडीए महिला सम्मेलन में मंच का संचालन जिला उपाध्यक्ष अर्चना रावत ने किया। महिला सम्मेलन में आए हुए लोगों का जिला उपाध्यक्ष अर्चना रावत ने जोरदार स्वागत किया ।</div>
<div> </div>
<div>महिला सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने कहा कि पी0डी0ए0 महिला सम्मेलन का आयोजन महिलाओं को उनके हक एवं अधिकारों के साथ ही संविधान के बारे में जानकारी देना है। आज भाजपा सरकार द्वारा महिलाओं को उनका हक पता न होने के कारण वह अपने अधिकारों से वंचित हैं। समाज में आज भी महिलाओं में शिक्षित महिलाओं का प्रतिशत बहुत कम है और वह सिर्फ एक गृहणी बन कर रह गयी हैं। सभी महिलाओं को अपने अधिकारों का ज्ञान होना आवश्यक है तभी उनका योगदान अपने परिवार के साथ ही देश-प्रदेश की तरक्की में होगा।    </div>
<div> </div>
<div>पी0डी0ए0 महिला सम्मेलन में मुख्य रूप से राष्ट्रीय प्रवक्त नाहिद लारी, जिला अध्यक्ष जयसिंह 'जयंत' पूर्व विधायक अम्बरीश सिंह पुष्कर, पूर्व एम0एल0सी0 कान्ती सिंह, रामवृक्ष यादव,  राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महिला सभा/ प्रवक्ता नेहा यादव, सोनी चौधरी, जिला महासचिव शब्बीर अहमद खान, पूर्व जिला अध्यक्ष अशोक यादव, वरिष्ठ नेता सहदेव सिंह यादव, श्रवण कुमार यादव एडवोकेट, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी राजबाला रावत,  जिला उपाध्यक्ष अर्चना रावत,  कुमकुम यादव, ललित राजपूत लोधी, ऊषा सेन ब्लॉक प्रमुख चिनहट, पूर्व ब्लॉक प्रमुख विजयलक्ष्मी, अंजू यादव, सुहागवती ,विधानसभा अध्यक्ष मोहनलालगंज उमाशंकर वर्मा, प्रदेश सचिव महताब सिंह यादव, देवकली प्रसाद रावत, रंजीत यादव, रामकिशोर रावत, अकरम उर्फ बब्लू, वरिष्ठ नेता भरत यादव, नंदकिशोर यादव, रामसमुझ रावत, जिला उपाध्यक्ष राजकुमार यादव, बचान सिंह यादव, नवनीत सिंह, उमेश वर्मा, जगरूप यादव, अरविंद गौतम, जिला मीडिया प्रभारी रमेश सिंह 'रवि', प्रदेश सचिव युवजन सभा विजय यादव, आशा यादव, ज्ञानेंद्र बहादुर सिंह, ओमप्रकाश दिवाकर, धर्मवीर पासवान, संदीप यादव लालू, गीता यादव, रेशमा रावत, कुसमा यादव, सुषमा निर्मल, सुलेखा, सुमन यादव, नगराम चेयरमेन जीनत, अमेठी चेयरमेन शहनाज बानो, मायाराम वर्मा, अखिलेश यादव, अमरेंद्र कुमार यादव, मोहम्मद सुफियान, दिलीप कुमार यादव, मोहम्मद वाहिद, विजय कुमार यादव, अतुल कुमार प्रधान, धर्मवीर पासवान, मनोज कुमार यादव, मनोज पासवान, लाइकराम यादव, बृजेश यादव पूर्व चेयरमेन, रमेश राही, अनुज यादव, राजकिशोर रावत, अरुण कुमार यादव, समरपाल यादव, संजीव यादव, दिनेश कुमार यादव, विनोद कुमार वर्मा, अमरेंद्र कुमार, पदमकृष्ण यादव, मोहम्मद रईस, मनोज पासवान, शिवम यादव गोलू, शशि कुमार रावत, प्रेम गौतम, ज्योति रावत, सुरेखा यादव, विमला रावत, ज्योति वर्मा, पुष्पा रावत, ममता रावत, कांति यादव, प्रीति रावत, सुनीता यादव, चंद्रावती रावत, सरोज यादव, मुस्कान रावत  के साथ हजारों महिलायें एवं समाजवादी पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।</div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/149127/samajwadi-partys-pda-womens-conference-held%C2%A0</link>
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                <pubDate>Fri, 28 Feb 2025 20:59:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिल्कीपुर सीट: भाजपा प्रत्याशी का आज नामांकन</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="mail-message expanded">
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<div><strong>मिल्कीपुर अयोध्या</strong>। मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में आज भाजपा प्रत्याशी चंद्रभानु पासवान अपना नामांकन दाखिल करेंगे। नामांकन से पहले मिल्कीपुर में एक विशाल नामांकन सभा का आयोजन किया गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी सुबह 11 बजे मिल्कीपुर पेट्रोल पंप के समीप स्थित मैदान में नामांकन सभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान वे प्रत्याशी के समर्थन में मतदाताओं से वोट की अपील करेंगे।</div>
<div>जनसभा के बाद दोपहर लगभग एक बजे चंद्रभानु पासवान कलेक्ट्रेट में अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता जोर-शोर से तैयारियों में जुटे हुए हैं। कार्यकर्ताओं में</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147426/nomination-of-milkipur-seat-bjp-candidate-today"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/fb_img_17365554992071.jpg" alt=""></a><br /><div class="mail-message expanded">
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<div>
<div><strong>मिल्कीपुर अयोध्या</strong>। मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में आज भाजपा प्रत्याशी चंद्रभानु पासवान अपना नामांकन दाखिल करेंगे। नामांकन से पहले मिल्कीपुर में एक विशाल नामांकन सभा का आयोजन किया गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी सुबह 11 बजे मिल्कीपुर पेट्रोल पंप के समीप स्थित मैदान में नामांकन सभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान वे प्रत्याशी के समर्थन में मतदाताओं से वोट की अपील करेंगे।</div>
<div>जनसभा के बाद दोपहर लगभग एक बजे चंद्रभानु पासवान कलेक्ट्रेट में अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता जोर-शोर से तैयारियों में जुटे हुए हैं। कार्यकर्ताओं में इस आयोजन को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। नामांकन और जनसभा के माध्यम से भाजपा मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति का संदेश देना चाहती है।</div>
<div>सभा के दौरान प्रदेश सरकार के मंत्रियों में स्वतंत्रदेव सिंह, सूर्य प्रताप शाही, जेपीएस राठौर, गिरीश चन्द्र यादव, मयंकेश्वर शरण सिंह, दयाशंकर मिश्र दयालु, सतीश शर्मा के साथ में एमएलसी अवनीश पटेल, पुष्पेन्द्र पासी सहित जिले के जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ नेता व पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।</div>
</div>
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</div>
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                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jan 2025 08:38:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बसपा का कार्यकर्ता सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने कार्यकर्ताओं से किया संवाद, भरा जोश</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मिल्कीपुर। </strong>बहुजन समाज पार्टी ने मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र के देवगांव स्थिति राजा के बाजार मैदान में कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया जिसके मुख्य अतिथि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल तथा विशिष्ट अतिथि पूर्व राज्यसभा सांसद एवं मंडल प्रभारी सालिम अंसारी रहे।</p>
<p>प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का पीडीए सिर्फ दिखावे के लिए है अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव में सिर्फ अपनें परिवार को टिकट दिया अपनें परिवार के अलावा एक भी यादव को टिकट नहीं दिया वे सिर्फ यादव वोट चाहते हैं। लेकिन बहन कुमारी मायावती ने सर्व समाज को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145580/state-president-vishwanath-pal-had-an-enthusiastic-conversation-with-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/img-20241017-wa0016.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मिल्कीपुर। </strong>बहुजन समाज पार्टी ने मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र के देवगांव स्थिति राजा के बाजार मैदान में कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया जिसके मुख्य अतिथि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल तथा विशिष्ट अतिथि पूर्व राज्यसभा सांसद एवं मंडल प्रभारी सालिम अंसारी रहे।</p>
<p>प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का पीडीए सिर्फ दिखावे के लिए है अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव में सिर्फ अपनें परिवार को टिकट दिया अपनें परिवार के अलावा एक भी यादव को टिकट नहीं दिया वे सिर्फ यादव वोट चाहते हैं। लेकिन बहन कुमारी मायावती ने सर्व समाज को टिकट देकर सदन पहुंचा है। उन्होंने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी झूठे वादे करके सत्ता में आई है । उन्होंने कहा कि पीडीए का मतलब  परिवार दल एलाइंस है। कांग्रेस ने जनता के साथ छल किया है। गरीबों और दलितों के हक को छीना है। कांग्रेस ने बाबा साहब के संविधान के नाम पर धोखा दिया है। बाबा साहब का संविधान ईमानदारी से लागू नहीं किया।उप चुनाव में करहल से अखिलेश यादव का छोटा भाई लड़ रहा है ।और मिल्कीपुर से अवधेश प्रसाद बेटा अजीत प्रसाद यह सभी परिवार का एलाइंस बनाए हैं। वही विधानसभा प्रत्याशी रामगोपाल कोरी ने कहा कि मिल्कीपुर की जनता इस बार हमें मौका दें मैं मिल्कीपुर का चौमुखी विकास करूंगा , मौजूदा सरकार डर रही है इसीलिए उन्होंने चुनाव को रोक दिया है। आप लोग बसपा वोट देकर बहन जी के हाथों को मजबूत बनाएं। इस मौके पर पूर्व राज्यसभा सांसद मंडल प्रभारी सालिम अंसारी, महेंद्र प्रताप आनंद, रवि प्रकाश मौर्य, दिलीप कुमार विमल, सर्वेंद्र अंबेडकर, मोहम्मद असद, अर्चना कोरी, लल्लन करी सहित भारी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता जनता मौजूद रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/145580/state-president-vishwanath-pal-had-an-enthusiastic-conversation-with-the</link>
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                <pubDate>Fri, 18 Oct 2024 01:13:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लापरवाह अधिकारियों पर होगी कार्रवाई -पूर्वांचल विकास बोर्ड के सदस्य बौद्ध अरविंद पटेल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अयोध्या</strong>।जिले के एक दिवसीय दौरे पर आए पूर्वांचल विकास बोर्ड के सदस्य बौद्ध अरविंद पटेल ने मिल्कीपुर क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं और विकास कार्यों की जमीनी हकीकत जानी। बौद्ध अरविंद पटेल ने मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र स्थित सीएचसी खण्डासा, मिल्कीपुर और हैरिंग्टनगंज का निरीक्षण करते हुए इमरजेंसी वार्ड ओपीडी लेबर रूम दवा वितरण कक्ष सहित दवा स्टॉक का भी निरीक्षण किया। सभी सीएससी अधीक्षकों को अस्पताल में साफ सफाई रखने के भी निर्देश दिए हैं। मिल्कीपुर ब्लॉक मुख्यालय पर ब्लाक के खंड विकास अधिकारी व पशु पालन विभाग समेत अन्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143924/action-will-be-taken-against-negligent-officers-purvanchal-development"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-08/img-20240808-wa0035.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अयोध्या</strong>।जिले के एक दिवसीय दौरे पर आए पूर्वांचल विकास बोर्ड के सदस्य बौद्ध अरविंद पटेल ने मिल्कीपुर क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं और विकास कार्यों की जमीनी हकीकत जानी। बौद्ध अरविंद पटेल ने मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र स्थित सीएचसी खण्डासा, मिल्कीपुर और हैरिंग्टनगंज का निरीक्षण करते हुए इमरजेंसी वार्ड ओपीडी लेबर रूम दवा वितरण कक्ष सहित दवा स्टॉक का भी निरीक्षण किया। सभी सीएससी अधीक्षकों को अस्पताल में साफ सफाई रखने के भी निर्देश दिए हैं। मिल्कीपुर ब्लॉक मुख्यालय पर ब्लाक के खंड विकास अधिकारी व पशु पालन विभाग समेत अन्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए उन्हें कहा कि यदि कोई पशुपालक अथवा कृषक गौशालाओं से पशु को ले जाता है, तो उसे प्रति मवेशी 50 रूपए भोजन के लिए दिया जाएगा। पूर्वांचल विकास बोर्ड के सदस्य अरविंद पटेल ने कहा कि पूर्वांचल के विकास के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। स्वास्थ्य सेवाओं और विकास कार्यों में सुधार के लिए काम कर रहे हैं। क्षेत्र के लोगों की समस्याओं का समाधान करना हमारी प्राथमिकता है। स्वास्थ्य सेवाओं और विकास कार्यों की नियमित निगरानी कर रहे हैं। अगर कोई अधिकारी कर्मचारी विकास कार्यों में लापरवाही वरतेगा तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। एक सप्ताह में दोबारा फिर दौरा क्षेत्र का करेंगे। भाजपा सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा पर जोर दे रही है, लेकिन परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन कर रहे छात्र छात्राओं को अभी तक शत प्रतिशत किताब ही उपलब्ध न हो पाने के सवाल पर उन्होंने तत्काल शिक्षा विभाग के अधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा कि किताबें क्यों नहीं पहुंची। संबंधित अधिकारी द्वारा कहा गया किताबें आ गई हैं जल्द ही सभी विद्यालयों को उपलब्ध करा दी जाएंगी। इस मौके पर ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि पवन सिंह, प्रधान अखंड पांडे, सीएससी अधीक्षक पंकज श्रीवास्तव सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/143924/action-will-be-taken-against-negligent-officers-purvanchal-development</link>
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                <pubDate>Thu, 08 Aug 2024 20:40:46 +0530</pubDate>
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