<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/197/india-news" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>India news - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/197/rss</link>
                <description>India news RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बांग्लादेश डिपोर्ट किए गए कुछ लोगों को वापस भारत लाया जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179984/some-people-deported-to-bangladesh-will-be-brought-back-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260523-wa0013-960x640.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की सदस्यता वाली पीठ से कहा कि सरकार उन्हें वापस लाएगी और उसके बाद उनकी स्थिति की जांच करेगी। परिणाम के आधार पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम तदनुसार कदम उठाएंगे। शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा कि इन व्यक्तियों को भारत वापस लाने में 8-10 दिन लग सकते हैं। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख जुलाई में तय की है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उच्चतम न्यायालय केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के 26 सितंबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उच्च न्यायालय ने सुनाली खातून और अन्य को बांग्लादेश निर्वासित करने के केंद्र सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था और इसे ‘अवैध’ करार दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले साल तीन दिसंबर को शीर्ष अदालत ने ‘मानवीय आधार’ पर खातून और उनके आठ वर्षीय बच्चे को बांग्लादेश भेजे जाने के महीनों बाद भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी।अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को बच्चे की देखभाल करने का निर्देश दिया था और बीरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को गर्भवती खातून को मुफ्त प्रसव की सुविधा सहित हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायालय ने 24 अप्रैल को केंद्र सरकार को अंतिम अवसर दिया और उसके अधिवक्ता को इस मामले में निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराने को कहा। खातून के पिता भोदु शेख की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े ने कहा कि केंद्र सरकार का यह रवैया ‘कुछ हद तक अनुचित’ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने इस मामले में न्यायालय को अपने विचार नहीं बताए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">क्षेत्र के सेक्टर 26 में दो दशकों से अधिक समय से दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे इन परिवारों को पिछले साल 18 जून को बांग्लादेशी होने के संदेह में पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में 27 जून को सीमा पार धकेल दिया। कि निर्वासित किए गए छह नागरिकों को एक महीने के भीतर भारत वापस लाया जाए और आदेश पर अस्थायी रोक लगाने की सरकार की अपील को खारिज कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/179984/some-people-deported-to-bangladesh-will-be-brought-back-to</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/179984/some-people-deported-to-bangladesh-will-be-brought-back-to</guid>
                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:31:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/img-20260523-wa0013-960x640.jpg"                         length="61900"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक ओर यूएपीए में जमानत,दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद का मामला बड़ी पीठ को भेजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक ओर यूएपीए में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत के मामले पर अब बड़ी बेंच फैसला करेगी। इस मामले में शुक्रवार को दिन में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने ज़ोर देकर कहा था कि इस मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेजा जाए। दूसरी ओर एक दूसरे मामले में अन्य बातों के अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साढ़े चार साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी साज़िश</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले में यूएपीए के आरोपी सुहैल अहमद ठोकर को ज़मानत दे दी। यह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179982/on-one-hand-bail-in-uapa-on-the-other-hand"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images10.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक ओर यूएपीए में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत के मामले पर अब बड़ी बेंच फैसला करेगी। इस मामले में शुक्रवार को दिन में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने ज़ोर देकर कहा था कि इस मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेजा जाए। दूसरी ओर एक दूसरे मामले में अन्य बातों के अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साढ़े चार साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी साज़िश</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले में यूएपीए के आरोपी सुहैल अहमद ठोकर को ज़मानत दे दी। यह मामला संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद सामने आया था। सीजेआई सूर्यकांत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह आदेश पारित किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बीच अब सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आतंकवाद और यूएपीए यानी गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामलों में जमानत देने के नियमों पर अहम फ़ैसला सुना दिया। कोर्ट ने दिल्ली दंगे मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न देने वाले अपने पुराने फैसले पर सवाल उठाते हुए मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने यह आदेश दिया। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों- तसलीम अहमद और खालिद सैफी को 6 महीने की अंतरिम जमानत भी दे दी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में फरवरी 2020 में </span>CAA <span lang="hi" xml:lang="hi">विरोधी प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। इन दंगों में 50 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने कई लोगों पर आरोप लगाया कि उन्होंने दंगों की साज़िश रची थी। उमर खालिद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरजील इमाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तसलीम अहमद और खालिद सैफी समेत कई लोग यूएपीए के तहत गिरफ्तार किए गए थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट से कहा कि यूएपीए मामलों में जमानत के नियमों पर दोबारा विचार होना चाहिए। उन्होंने हाल के एक फ़ैसले पर सवाल उठाया। इससे पहले न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने नार्को-टेरर मामले में स्येद इफ्तिखार अंदरबी को जमानत देते हुए कहा था कि यूएपीए मामलों में भी </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">जमानत नियम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जेल अपवाद</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">। उन्होंने उमर खालिद वाले पुराने फ़ैसले पर संदेह जताया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एसजी राजू ने कहा कि यूएपीए जैसे गंभीर मामलों में सभी आरोपियों को एक जैसी छूट नहीं दी जा सकती है। हर मामले को अलग-अलग देखना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बहरहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि के ए नजीब वाले पुराने फैसले में दिए गए सिद्धांतों को लेकर अब भ्रम है। खासकर यूएपीए की धारा 43</span>D(<span lang="hi" xml:lang="hi">5) यानी जमानत के सख्त नियम और अनुच्छेद 21 यानी जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह तय करना जरूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि एक बेंच दूसरे बराबर की बेंच के फ़ैसले को आसानी से नहीं बदल सकती। क़ानून में स्पष्टता होनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए यह मुद्दा मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा जा रहा है ताकि बड़ी बेंच बने और अंतिम फैसला दे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तसलीम अहमद और खालिद सैफी को 6 महीने के लिए अंतरिम जमानत मिल गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले इनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बता दें कि उमर खालिद और शरजील इमाम को अभी जमानत नहीं मिली है। उनका मामला अब बड़ी बेंच तय करेगी।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच 2020 दिल्ली दंगे के दो आरोपियों- तसलीम अहमद और खालिद सैफी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे पहले शुक्रवार को दिन में सुनवाई के दौरान आतंकवाद और </span>UAPA <span lang="hi" xml:lang="hi">मामलों में जमानत को लेकर मतभेद के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इस मुद्दे को बड़ी बेंच को भेज दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि अलग-अलग दो-जज की बेंचों के फैसले एक-दूसरे से उलट हैं। केंद्र सरकार ने सवाल उठाया कि क्या </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बेल नियम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जेल अपवाद है</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">वाला सिद्धांत आतंकवाद जैसे गंभीर मामलों में भी लागू होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर ट्रायल में देरी हो रही हो</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने 26/11 मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब और लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद का उदाहरण दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू और वकील रजत नायर ने कोर्ट में कहा</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">अगर अजमल कसाब 7-8 साल जेल में रहने के बाद बेल मांगता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या उसे बेल दे देते</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सैकड़ों गवाह हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सबूत इकट्ठा करने में समय लगता है। इसी तरह अगर हाफिज सईद पाकिस्तान से आकर ट्रायल में 5 साल जेल में रह जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या सिर्फ देरी के आधार पर उसे बेल दे देंगे</span>?' <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का कहना है कि हर केस के तथ्यों को देखकर बेल देनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि सिर्फ जेल में कितना समय बीता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस आधार पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह फ़ैसला आने वाले समय में आतंकवाद और यूएपीए से जुड़े सभी जमानत मामलों पर असर डालेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए जमानत क़ानून को और साफ़ करने के लिए बड़े फ़ैसले की तैयारी कर ली है। दो आरोपियों को राहत मिल गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उमर खालिद समेत बड़े सवाल अब बड़ी बेंच के सामने हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक अन्य मामले में  सीजेआई सूर्यकांत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने  अन्य बातों के अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साढ़े चार साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने आज जम्मू-कश्मीर के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी साज़िश</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले में यूएपीए के आरोपी सुहैल अहमद ठोकर को ज़मानत दे दी।पीठ ने यह भी कहा कि अगर अपीलकर्ता चल रहे मुक़दमे में सहयोग करने में नाकाम रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसे दी गई राहत का दुरुपयोग माना जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">खास बात यह है कि कोर्ट ने पहले समय-समय पर आदेश जारी किए थे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि याचिकाकर्ता के खिलाफ गवाही देने वाले अहम/सुरक्षित गवाह बिना किसी डर के अपने बयान दर्ज करा सकें (याचिकाकर्ता की रिहाई से पहले)। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज की सुनवाई के दौरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने बताया कि हालांकि कुछ अहम/सुरक्षित गवाहों की जांच अभी बाकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनके बयान सह-आरोपी की भूमिका से जुड़े हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि याचिकाकर्ता से।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह देखते हुए कि कुछ सह-आरोपियों को ज़मानत मिल चुकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कि मुक़दमे के पूरा होने में समय लग सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हिरासत में पहले ही बिताई जा चुकी अवधि को ध्यान में रखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने याचिकाकर्ता को ज़मानत दे दी। ज़मानत बांड संबंधित </span>NIA <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमा करने का निर्देश दिया गया। उक्त अदालत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">याचिकाकर्ता की संबंधित पुलिस थाने में उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी मर्ज़ी के अनुसार शर्तें लगाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके वकील के अनुरोध पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने याचिकाकर्ता को </span>NIA <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत से वर्चुअली (सह-आरोपियों की तरह) पेश होने की अनुमति मांगने की भी छूट दी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">इस अनुरोध पर अदालत द्वारा कानून के अनुसार विचार किया जाएगा। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> बड़ी साज़िश का मास्टरमाइंड विभिन्न आतंकवादी संगठनों के बड़े नेता थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें लश्कर-ए-तैयबा (</span>LeT), <span lang="hi" xml:lang="hi">हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन (</span>HM), <span lang="hi" xml:lang="hi">अल-बद्र और पाकिस्तान में मौजूद अन्य संगठन शामिल थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चार्जशीट में आगे आरोप लगाया गया है कि यह साज़िश अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद रची गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका मकसद जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ भारत के अन्य हिस्सों में भी आतंकवाद की घटनाओं को फिर से भड़काना था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य एजेंसी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आतंकवादी समूह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान में मौजूद अपने मददगारों और नेताओं के साथ-साथ भारत के भीतर मौजूद अपने ओवर-ग्राउंड वर्करों (</span>OGWs) <span lang="hi" xml:lang="hi">के सहयोग से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आसानी से प्रभावित होने वाले स्थानीय युवाओं को अपने प्रभाव में लेने और उन्हें कट्टरपंथी बनाने में शामिल थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि उन्हें आतंकवाद की घटनाओं में शामिल होने के लिए भर्ती और प्रशिक्षित किया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">STF <span lang="hi" xml:lang="hi">ने बताया कि यह गैंग केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सचिवालय सुरक्षा बल और  ब राइफल्स की भर्ती परीक्षाओं में धांधली कर रहा था. आरोपियों ने ऑनलाइन परीक्षा सिस्टम को तकनीकी तरीके से प्रभावित कर उम्मीदवारों तक सही जवाब पहुंचाने की व्यवस्था बना रखी थी. बताया गया कि प्रत्येक उम्मीदवार से परीक्षा पास कराने के लिए करीब 4 लाख रुपये वसूले जाते थे.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सीधे </span>SSC <span lang="hi" xml:lang="hi">के सर्वर को हैक नहीं किया था. इसके बजाय परीक्षा केंद्र पर प्रॉक्सी सर्वर इंस्टॉल किया गया था. स्क्रीन शेयरिंग एप्लिकेशन के जरिए प्रश्नपत्र बाहर बैठे सॉल्वरों तक पहुंचाया जाता था. वहां से सवाल हल कर उम्मीदवारों को सही जवाब भेजे जाते थे.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस ने बताया कि अरुण कुमार तकनीकी काम संभालता था और वही प्रॉक्सी सर्वर सिस्टम को ऑपरेट करता था. </span>STF <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है. एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इसी तरीके का इस्तेमाल अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी किया गया था.</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/179982/on-one-hand-bail-in-uapa-on-the-other-hand</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/179982/on-one-hand-bail-in-uapa-on-the-other-hand</guid>
                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:29:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/images10.jpg"                         length="95354"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेट्रोल 87 तो डीजल 91 पैसे महंगा, 10 दिनों में तीसरी बार बढ़े दाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। शनिवार को एक बार फिर पेट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी की गई। पेट्रोल के दाम में </span>87<span lang="hi" xml:lang="hi">  पैसे प्रति लीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल में </span>91<span lang="hi" xml:lang="hi">  पैसे प्रति लीटर और सीएनजी में </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi">  रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बीते </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi">  दिनों में यह तीसरी बार है जब पेट्रोल और डीजल महंगे हुए हैं। इससे पहले </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi">  मई को पेट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और सीएनजी के दाम में </span>3-3<span lang="hi" xml:lang="hi">  रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके</span>19</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179980/petrol-became-costlier-by-87-paise-and-diesel-by-91"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/petrol-1-2.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। शनिवार को एक बार फिर पेट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी की गई। पेट्रोल के दाम में </span>87<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे प्रति लीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल में </span>91<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे प्रति लीटर और सीएनजी में </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बीते </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों में यह तीसरी बार है जब पेट्रोल और डीजल महंगे हुए हैं। इससे पहले </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को पेट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और सीएनजी के दाम में </span>3-3<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद </span>19<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को पेट्रोल </span>87<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे और डीजल </span>91<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे महंगा हुआ। लगातार बढ़ोतरी के चलते पिछले </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये तक का इजाफा हो चुका है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीएनजी के दाम भी दूसरी बार बढ़ाए गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत </span>98.64<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये से बढ़कर </span>99.51<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल का दाम </span>91.58<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये से बढ़कर </span>92.49<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। इसके अलावा सीएनजी अब </span>81.09<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लगातार बड़ रहे तेल की कीमतों को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा है। कांग्रेस ने एक पर एक पोस्ट में लिखा है कि महंगाई मैन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी ने पेट्रोल-डीजल पर </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए बढ़ा दिए। आज फिर पेट्रोल </span>94<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे और डीजल </span>95<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे महंगा कर दिया गया। मोदी को बस तेल कंपनियों के फायदे की चिंता है. एक तरफ जहां दुनियाभर की सरकारें अपनी जनता को राहत दे रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी सरकार जनता को ही लूटने में लगी है। कभी तो जनता के भले के बारे में सोच लो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कब तक पूंजीपतियों का फायदा कराते रहोगे</span>?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/179980/petrol-became-costlier-by-87-paise-and-diesel-by-91</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/179980/petrol-became-costlier-by-87-paise-and-diesel-by-91</guid>
                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:26:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/petrol-1-2.webp"                         length="56976"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज संकट और वैश्विक टकराव की नई दिशा क्या अमेरिका फंस गया है ईरान के जाल में</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में चल रहा तनाव अब एक नए और जटिल मोड़ पर पहुंच चुका है जहां अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष केवल सैन्य शक्ति का नहीं बल्कि रणनीति और वैश्विक प्रभाव का भी बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुरुआत में जिस तेजी से जीत का दावा किया था वह अब उतना स्पष्ट नहीं दिख रहा है। अब उनका फोकस ईरान को कमजोर करने से हटकर दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने पर आ गया है। यही बदलाव इस पूरे संघर्ष की दिशा और गंभीरता को दर्शाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस संघर्ष के पहले</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173425/hormuz-crisis-and-new-direction-of-global-conflict-is-america"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas10.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में चल रहा तनाव अब एक नए और जटिल मोड़ पर पहुंच चुका है जहां अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष केवल सैन्य शक्ति का नहीं बल्कि रणनीति और वैश्विक प्रभाव का भी बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुरुआत में जिस तेजी से जीत का दावा किया था वह अब उतना स्पष्ट नहीं दिख रहा है। अब उनका फोकस ईरान को कमजोर करने से हटकर दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने पर आ गया है। यही बदलाव इस पूरे संघर्ष की दिशा और गंभीरता को दर्शाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संघर्ष के पहले चरण में अमेरिका ने यह मान लिया था कि शुरुआती हमलों के बाद ईरान जल्दी झुक जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरान ने लगातार जवाबी हमले किए और वह भी कई देशों तक फैलाकर। इससे यह स्पष्ट हुआ कि ईरान केवल बचाव नहीं कर रहा बल्कि सक्रिय रणनीति के तहत क्षेत्रीय दबाव बना रहा है। अमेरिकी ठिकानों पर हमले और संचार तंत्र को नुकसान पहुंचाना इस बात का संकेत है कि ईरान तकनीकी और सैन्य स्तर पर तैयार था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार ईरान के पास अभी भी पर्याप्त संवर्धित यूरेनियम मौजूद है जिससे यह संकेत मिलता है कि वह दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका के शुरुआती हमले निर्णायक नहीं रहे।इस पूरे संघर्ष का सबसे अहम केंद्र होर्मुज स्ट्रेट बन गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की रीढ़ माना जाता है। यहां से रोजाना करोड़ों बैरल तेल और गैस गुजरती है। जब ईरान ने इस मार्ग पर नियंत्रण स्थापित किया तो वैश्विक बाजार में तुरंत असर दिखाई दिया। तेल की कीमतों में तेजी आई और कई देशों में ऊर्जा संकट गहराने लगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही वह कारण है कि ट्रम्प को अब अकेले लड़ना मुश्किल लग रहा है और उन्होंने नाटो के साथ साथ चीन और जापान जैसे देशों से मदद की अपील की है। यह कदम इस बात का संकेत है कि अमेरिका इस संकट को केवल अपनी सैन्य ताकत से हल नहीं कर पा रहा है।चीन और जापान से मदद मांगना एक रणनीतिक मजबूरी भी है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है और उसकी अर्थव्यवस्था इस मार्ग पर निर्भर है। जापान भी ऊर्जा के लिए इस रास्ते पर निर्भर करता है। इसलिए अमेरिका चाहता है कि ये देश भी इस मिशन में शामिल हों ताकि एक वैश्विक दबाव बनाया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि इन देशों की प्रतिक्रिया बहुत सतर्क रही है। कोई भी देश सीधे सैन्य हस्तक्षेप के लिए तैयार नहीं दिख रहा। इसका मुख्य कारण जोखिम है। होर्मुज स्ट्रेट बेहद संकरा मार्ग है और यहां किसी भी सैन्य कार्रवाई का मतलब सीधा खतरा है। ईरान ने यहां समुद्री माइन्स बिछाने की रणनीति अपनाई है जो किसी भी जहाज के लिए जानलेवा हो सकती है।समुद्री माइन्स को हटाना आसान काम नहीं है। आधुनिक माइन्स को पहचानना मुश्किल होता है और उन्हें निष्क्रिय करना जोखिम भरा होता है। इसके अलावा ईरान के पास मिसाइल और ड्रोन क्षमता भी है जिससे वह किसी भी ऑपरेशन को बाधित कर सकता है। इस कारण कोई भी देश अपनी नौसेना को सीधे खतरे में डालने से बच रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक और बड़ी चुनौती है कई देशों की सेनाओं का एक साथ संचालन। अलग अलग देशों की तकनीक कम्युनिकेशन और रणनीति अलग होती है। ऐसे में संयुक्त ऑपरेशन करना बेहद जटिल हो जाता है। यही वजह है कि अब तक कोई ठोस सैन्य गठबंधन सामने नहीं आया है।इस संकट का एक और पहलू है इसका वैश्विक असर। दुनिया की लगभग बीस प्रतिशत तेल सप्लाई इसी मार्ग से गुजरती है। अगर यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है तो तेल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई बढ़ेगी और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और भी संवेदनशील है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से पूरा करता है। अगर सप्लाई बाधित होती है तो इसका सीधा असर पेट्रोल डीजल और गैस की कीमतों पर पड़ेगा। इससे आम लोगों के जीवन पर असर पड़ेगा और आर्थिक दबाव बढ़ेगा।भारत ने इस पूरे मामले में संतुलित रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं ताकि भारतीय जहाज सुरक्षित रह सकें और सप्लाई बनी रहे। भारत न तो सीधे इस संघर्ष में शामिल होना चाहता है और न ही अपने हितों को नुकसान होने देना चाहता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते बल्कि आर्थिक और रणनीतिक नियंत्रण ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण करके अमेरिका को एक ऐसी स्थिति में ला दिया है जहां उसे वैश्विक समर्थन की जरूरत पड़ रही है।अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब यह है कि वह बिना युद्ध को और बढ़ाए इस मार्ग को कैसे सुरक्षित बनाए। अगर संघर्ष और बढ़ता है तो इसमें और देश शामिल हो सकते हैं जिससे स्थिति और जटिल हो जाएगी।अंत में यह कहा जा सकता है कि यह संघर्ष अभी निर्णायक स्थिति में नहीं पहुंचा है। न तो अमेरिका पूरी तरह जीत पाया है और न ही ईरान पीछे हटने को तैयार है। होर्मुज स्ट्रेट इस टकराव का केंद्र बना हुआ है और जब तक इसका समाधान नहीं निकलता तब तक वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बनी रहेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173425/hormuz-crisis-and-new-direction-of-global-conflict-is-america</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173425/hormuz-crisis-and-new-direction-of-global-conflict-is-america</guid>
                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 20:10:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/hindi-divas10.jpg"                         length="137237"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अध्ययन,मनन से संस्कार और ज्ञान के खुलते चक्षु</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मनुष्य के जीवन में अध्ययन जितना आवश्यक है उतना ही आवश्यक मनन और चिंतन भी है। केवल पुस्तक पढ़ना ही संपूर्ण मानवीय उद्देश्य ना होकर उससे प्राप्त ज्ञानामृत का मनन एवं चिंतन भी अत्यंत आवश्यक है। किसी भी पुस्तक का अध्ययन मनन एवं उस पर चिंतन मनुष्य के संस्कारों को परिष्कृत करता है एवं जीवन के उच्च आदर्शों को प्राप्त करने में सदैव सहायक सिद्ध होता है। अतः मनुष्य को सदैव निरंतर ज्ञानवर्धक पुस्तकों से न सिर्फ ज्ञान प्राप्त करना चाहिए अपितु  उसका निरंतर मनन तथा चिंतन भी करना होगा तब जाकर हमारे संस्कार,संस्कृति एवं जीवन के उद्देश्य सफल होंगे।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173421/eyes-open-to-values-and-knowledge-through-study-and-meditation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/asfsd.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मनुष्य के जीवन में अध्ययन जितना आवश्यक है उतना ही आवश्यक मनन और चिंतन भी है। केवल पुस्तक पढ़ना ही संपूर्ण मानवीय उद्देश्य ना होकर उससे प्राप्त ज्ञानामृत का मनन एवं चिंतन भी अत्यंत आवश्यक है। किसी भी पुस्तक का अध्ययन मनन एवं उस पर चिंतन मनुष्य के संस्कारों को परिष्कृत करता है एवं जीवन के उच्च आदर्शों को प्राप्त करने में सदैव सहायक सिद्ध होता है। अतः मनुष्य को सदैव निरंतर ज्ञानवर्धक पुस्तकों से न सिर्फ ज्ञान प्राप्त करना चाहिए अपितु  उसका निरंतर मनन तथा चिंतन भी करना होगा तब जाकर हमारे संस्कार,संस्कृति एवं जीवन के उद्देश्य सफल होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने कहा है कि पुराने वस्त्र पहनों पर नई पुस्तकें खरीदोl उन्होंने यह भी कहा कि पुस्तकों का महत्व रत्नों से कहीं अधिक है, क्योंकि पुस्तकें अंतःकरण को उज्जवल करती हैं। सच्चाई भी यही है कि पुस्तकें ज्ञान के अंतःकरण और सच्चाईयों का भंडार होती है। आत्मभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम भी होती हैं। जिन्होंने पुस्तके नहीं पढी हैं या जिन्हें पुस्तक पढ़ने में रूचि नहीं है वे जीवन की कई सच्चाईयों से अनभिज्ञ रह जाते हैं। पुस्तकें पढ़ने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि हम जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझने की शक्ति से परिचित हो जाते हैं,और समस्या कितनी भी बड़ी हो हम उससे जीतकर निजात पा जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कठिन से कठिन समय पर पुस्तकें हमारा मार्गदर्शन एवं दिग्दर्शन करती है। जिन मनीषियों ने पुस्तक लिखी है और जिन्हें पुस्तकें पढ़ने का शौक है उन्हें ज्ञानार्जन के लिए इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं होतीहैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे कलाम साहब ने कहा है कि एक पुस्तक कई मित्रों के बराबर होती है और पुस्तकें सर्वश्रेष्ठ मित्र होती हैं। शिक्षाविद चार्ल्स विलियम इलियट ने कहा कि पुस्तके मित्रों में सबसे शांत व स्थिर हैं, वे सलाहकारों में सबसे सुलभ और बुद्धिमान होती हैं और शिक्षकों में सबसे धैर्यवान तथा श्रेष्ठ होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">निसंदेह पुस्तकें ज्ञानार्जन करने मार्गदर्शन एवं परामर्श देने में में विशेष भूमिका निभाती है। पुस्तकें मनुष्य के मानसिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक,नैतिक, चारित्रिक, व्यवसायिक एवं राजनीतिक विकास में अत्यंत सहायक एवं सफल दोस्त का फर्ज अदा करती हैं। प्राचीन काल से ही बच्चों तथा नौनिहालों के विकास के लिए पुस्तकें लिखे जाने का चलन तथा रिवाज रहा है। 'पंचतंत्र'तथा 'हितोपदेश' इसके बहुत बड़े उदाहरण हैं। पंचतंत्र,हितोपदेश में ज्ञानार्जन के लिए एवं संस्कृति सभ्यता और शिक्षा के उपयोग की बातें जो दैनिक जीवन में अत्यंत प्रभावशाली तथा उपयोगी होती है, लिखी गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">और यही पुस्तकें इस देश की सभ्यता संस्कृति के संरक्षण तथा प्रचार प्रसार में अहम भूमिका निभाती आई है। इसी तरह की पुस्तकों ने ज्ञान का विस्तार भी किया है। विश्व की हर सभ्यता मे लेखन सामग्री का बड़ा ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पुस्तकों के माध्यम से ही धर्म जाति संस्कृति एवं शिक्षा की मार्गदर्शिका से ही समाज आगे बढ़ा है। अच्छी किताबें अच्छे मार्गदर्शक तथा शिक्षित तथा अशिक्षित समाज को चेतना तथा सद्गुणों से संचारित करती है, व्यक्ति के अंदर मानसिक क्षमता का विकास भी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐतिहासिक किताबें हमें इतिहास, धर्म, राजनीति, संस्कृति के अनेक पहलुओं से अवगत भी कराती है,जिससे व्यक्तित्व विकास में अत्यंत सहायता मिलती है। पुस्तकों के महत्व को देखते हुए डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा कि पुस्तके वह साधन है जिसके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृति एवं समाज के बीच सेतु का निर्माण कर सकते हैं। पुस्तके वह मित्र होती हैं जो हर परिस्थिति तत्काल में सहायक होती है, और यही कारण है कि अनेक लोग गुरुवाणी, हनुमान चालीसा अभी अपने पास रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान युग डिजिटल युग कहलाता है अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रिंट मीडिया के स्थान पर अपने पैर जमा लिए हैं। इस डिजिटल युग में इंटरनेट का महत्व काफी बढ़ गया है। पहले हम बचपन में चंदा मामा, नंदन, बालभारती और अन्य किताबों से ज्ञान से लेकर मनोरंजन तक प्राप्त करते थे। आज इंटरनेट के बढ़ते बाजार की दिशा में युवक पुस्तकों को विभिन्न साइटों मैं खंगाल कर पढ़ लेते हैं। अब डिजिटल किताबें भी आ गई है साथ ही डिजिटल लाइब्रेरी भी धीरे-धीरे विकसित हो रही है। पर कई कंपनियां विविध किताबों को साइट पर प्रकाशित कर बच्चों के पढ़ने के लिए उपलब्ध करा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ कर लाभान्वित हो रहे हैं। इस दिशा में भारत सरकार तथा राज्य सरकारों द्वारा डिजिटल कार्यक्रमों के अंतर्गत ई शिक्षा तथा ई पुस्तकों के पुस्तकालयों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही पठन सामग्रियां बच्चों की जिज्ञासा को शांत करने का काम कर रही है। डिजिटल किताबों तथा पुस्तकालयों से यह लाभ है कि देश विदेश में किसी भी भाग में रहकर लोग अपनी इच्छा के अनुसार पुस्तकों पत्रिकाओं आदि को पढ़ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इंटरनेट अब अध्ययन का सुलभ साधन बन गया है। पर दूसरी तरफ इससे कुछ नुकसान भी हो रहे हैं, उचित मार्गदर्शन वाली किताबें न पढ़कर भ्रामक पुस्तकों का अध्ययन कर अपने को दिग्भ्रमित कर रहे हैं और इससे बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है। इसके लिए छोटे बच्चों को अपनी निगरानी में इंटरनेट से किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना अन्यथा दिगभ्रमित साहित्य बच्चों की मानसिकता पर विकृत प्रभाव डाल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि पुस्तकें ज्ञान देने के साथ मार्गदर्शन तथा चरित्र निर्माण का सर्वोत्तम साधन है। पुस्तकों से राष्ट्र की युवा कर्ण धारों को नई दिशा दी जा सकती है तथा एकता और अखंडता का संदेश देकर एक महान और सशक्त राष्ट्र की पृष्ठभूमि रखी जा सकती है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173421/eyes-open-to-values-and-knowledge-through-study-and-meditation</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173421/eyes-open-to-values-and-knowledge-through-study-and-meditation</guid>
                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 20:01:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/asfsd.png"                         length="1026477"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बेगुनाह मासूम स्कूली बच्चियों के खून का कौन जिम्मेदार? </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ईरान में एक स्कूल में 165 बच्चियां क्लास पढ़ाई के लिए मौजूद थी लेकिन उन्हे इस बात का गुमान नही रहा होगा कि प्रभुत्व की सनक में दुनिया के कथित ताकतवर देश की अंधी मिसाइल उनके जीवन का खात्मा कर देंगी। स्कूल पर हुए मिसाइल हमले को लेकर अब पेंटागन की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि 28 फरवरी को ईरान के मिनाब शहर में स्थित शजराह तैय्यबेह स्कूल पर हुआ हमला दरअसल अमेरिकी सेना की एक गंभीर गलती का नतीजा था. जांच के मुताबिक अमेरिकी सेना उस इलाके में एक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ईरान में एक स्कूल में 165 बच्चियां क्लास पढ़ाई के लिए मौजूद थी लेकिन उन्हे इस बात का गुमान नही रहा होगा कि प्रभुत्व की सनक में दुनिया के कथित ताकतवर देश की अंधी मिसाइल उनके जीवन का खात्मा कर देंगी। स्कूल पर हुए मिसाइल हमले को लेकर अब पेंटागन की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि 28 फरवरी को ईरान के मिनाब शहर में स्थित शजराह तैय्यबेह स्कूल पर हुआ हमला दरअसल अमेरिकी सेना की एक गंभीर गलती का नतीजा था. जांच के मुताबिक अमेरिकी सेना उस इलाके में एक ईरानी नौसैनिक ठिकाने को निशाना बना रही थी. लेकिन टार्गेट तय करते समय पुराने और गलत टार्गेटिंग डेटा का इस्तेमाल किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी वजह से दागी गई टॉमहॉक क्रूज मिसाइल अपने असली लक्ष्य से भटक गई और सीधे स्कूल की इमारत से जा टकराई.माना जाता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एआइ ने जीवन के अनेक क्षेत्रों में काम को काफी आसान बना कर अच्छा अनुभव दिया है। मैडिकल, लीगल और एजुकेशन जैसे सैक्टर्स में डाटा संग्रहण और त्वरित गणना की सुविधा से कई अच्छे कार्य हो रहे हैं   लेकिन इसी बीच ईरान युद्ध के दौरान अमरीका द्वारा किए गए ए. आई. के इस्तेमाल और इस निशाने में हुई चूक के कारण हुई स्कूली बच्चियों की मौत ने दुनिया में दहशत की इबारत लिख ममदी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शुरुआती जांच में माना गया है कि यह हमला जानबूझकर नहीं किया गया था, बल्कि खुफिया जानकारी और टार्गेटिंग सिस्टम में हुई चूक के कारण यह हादसा हुआ. इस घटना के बाद अमेरिकी सैन्य तंत्र के अंदर भी टार्गेटिंग प्रक्रिया और डेटा की सटीकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं. वहीं इस हमले को लेकर जो  खुलासा सामने आ रहा है उसमे गंभीर चूक का अनुमान है पुरानी इंटेलिजेंस की वजह से शायद अमेरिका ने ईरान के एक एलिमेंट्री स्कूल पर जानलेवा मिसाइल हमला किया, जिसमें लड़ाई के शुरुआती घंटों में 165 से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमें से ज्यादातर बच्चे थे. स्कूल पर बमबारी और उसमें बच्चों की मौत युद्ध का मुख्य मुद्दा बन गई है. अगर यह कन्फर्म हो जाता है कि यह यूएस के हाथों हुआ था, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन की वजह से हुई सबसे ज्यादा आम लोगों की मौत की घटनाओं में से एक होगी.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल अग्रणी ए.आई. कंपनी एंथ्रोपिक ने इस साल जनवरी ही में पेंटागन के उस अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया, जिसके तहत अमरीकी सेना को 'सभी वैध उद्देश्यों' के लिए उसकी तकनीक तक 'असीमित पहुंच' मिल जाती। अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए, एंथ्रोपिक के सी.ई.ओ. डारियो अमोदेई ने 2 स्पष्ट शर्तें रखीं-अमरीकियों की बड़े पैमाने पर जासूसी नहीं की जाएगी और मानवीय निगरानी के बिना पूरी तरह से स्वायत्त हथियारों का इस्तेमाल युद्ध में नहीं किया जाएगा!</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस निर्णय से एंथ्रोपिक को भारी नुकसान हुआ, परन्तु प्रतिद्वंद्वी कंपनी ने तुरंत पेंटागन के साथ मानव नियंत्रण के बिना पूर्ण ए.आई. नियंत्रण के लिए समझौता कर लिया। इस समझौते के बाद अमरीका और इसराईल ने ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू कर दिया। युद्ध के पहले ही दिन 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और उनके 10 टॉप कमांडरों की हत्या उनके परिसर में कर दी गई, जिसे दोनों देशों ने ए.आई. पर्शियन हमले की एक बड़ी जीत माना।लेकिन उसी दिन, 28 फरवरी को, एक और घातक हमला मीनाब में स्थित शजराह तैयबा गर्ल्स स्कूल पर भी किया गया। 2 मिसाइलों ने 45 सैकेंड में स्कूल को नष्ट कर दिया था। मीनाब में जो हुआ, वह ए.आई. के अंधाधुंध उपयोग का सबसे भयावह उदाहरण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">'शजराह तैयबा' गर्ल्स प्राइमरी स्कूल, जिसमें 165 से अधिक मासूम बच्चियां मौत से लड़ती, चीखती-चिल्लाती रहीं, तकनीकी भाषा में इसे ' सटीक हमला' कहा गया। जबकि ट्रम्प यह दावा कर रहे हैं कि लड़कियों के स्कूल पर ईरान ने टोमहॉक मिसाइल से हमला किया था, जबकि सभी जानते हैं कि ईरान के पास यह मिसाइल नहीं है, यहां तक कि इसराईल के पास भी नहीं है, इसलिए उनके द्वारा सोशल मीडिया पर फैलाए गए झूठ से सच को छिपाने का काम किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरू में हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया, बाद में कहा कि उन्हें पक्का नहीं पता कि कौन दोषी है, और फिर कहा कि वह पेंटागन की जांच के नतीजों को मान लेंगे. यह हाल ही में यह मामला और ज्यादा पेचीदा हो गयी जब न्यूयॉर्क टाइम्स ने पहली बार रिपोर्ट किया कि शुरुआती जांच में पाया गया कि यूएस जिम्मेदार है.  शुरुआती नतीजों के बाद पेंटागन से तुरंत और जानकारी मांगी गई. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि जांच अभी भी चल रही है.   </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">28 फरवरी को शजारेह तैयबेह एलिमेंट्री स्कूल पर हुआ हमला, जो ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के पास के बेस के पास है. हमले के लिए अमेरिका की जिम्मेदारी की ओर इशारा करते हुए सबूत बढ़ रहे हैं. ऐसे कई संकेत हैं जिससे पता चलता है कि स्कूल पर हमला टाला जा सकता था. ये हमले 28 फरवरी की सुबह हुए थे. तब स्कूल की बिल्डिंग छोटे बच्चों से भरी हुई थी.  न्यूज रिपोर्ट से पता चलता है कि स्क और उसी दिन हमले वाले दूसरे टारगेट, हवा से दिखने वाली ऐसी खासियतें थीं जिनसे हमले से पहले उन्हें सिविलियन साइट के तौर पर पहचाना जा सकता था. इस हमले के वीडियो में एक्सपर्ट्स ने अमेरिका में बनी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल को मिलिट्री कंपाउंड में टकराते हुए देखा जा सकता है. जबकि उस इलाके से पहले से ही धुआं उठ रहा था जहां स्कूल था. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पब्लिक में मौजूद सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि स्कूल बिल्डिंग लगभग 2017 तक मिलिट्री कंपाउंड का हिस्सा थी, जब दोनों को अलग करने के लिए एक नई दीवार बनाई गई। प्रॉपर्टी पर एक वॉचटावर भी हटा दिया गया था. उसी समय की तस्वीरों से पता चलता है कि बिल्डिंग के चारों ओर की दीवारों पर चमकीले रंगों, खासकर नीले और गुलाबी रंग के म्यूरल बनाए गए थे. ये इतने चमकीले थे कि वे स्पेस से भी दिखाई देते हैं. स्कूल को ऑनलाइन मैप पर साफ तौर पर लेबल किया गया था और इसकी एक आसानी से मिलने वाली वेबसाइट है जिसमें स्टूडेंट्स, टीचर्स और एडमिनिस्ट्रेटर्स के बारे में जानकारी भरी हुई है. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">युद्ध को कंट्रोल करने वाला इंटरनेशनल कानून उन स्ट्रक्चर्स, गाड़ियों और लोगों पर हमले करने से रोकता है जो मिलिट्री के निशाने और लड़ाके नहीं हैं. आम लोगों के घर, स्कूल, मेडिकल और सामाजिक जगहें आम तौर पर मिलिट्री हमलों के लिए बंद रहती हैं.बताया जा रहा है कि यह सारा मामला एआइ की चूक से हुआ है दरअसल 10 साल पहले इस क्षेत्र पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आई.आर.जी.सी.) ईरानी सशस्त्र बलों का एक सैन्य परिसर था।लेकिन डाटाबेस अपडेट न होने के कारण ए.आई. को यह मालूम नहीं पड़ा कि अब उसी स्थान पर बाईं ओर एक अस्पताल और दाईं तरफ एक अलग प्रवेश द्वार वाला स्कूल मौजूद है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ए.आई. एल्गोरिद्म यह भी समझने में नाकाम रहा कि 7 से 12 साल की बच्चियां 'दुश्मन' नहीं होतीं। एक मशीन के लिए वे केवल 'कोलेटरल डैमेज' थीं। यह घटना साबित करती है कि जब हम युद्ध का पूर्ण नियंत्रण ए. आई. को देते हैं, तो हम युद्ध के मैदान से 'दया' और 'विवेक' को पूरी तरह से खत्म कर देते हैं।ए.आई. आधारित व्यापक निगरानी हमारी मौलिक स्वतंत्रताओं के लिए गंभीर और नए प्रकार के खतरे पैदा कर सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किंग्स कॉलेज लंदन की रिसर्च ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि उन्नत ए. आई. मॉडल्स युद्ध की स्थिति में 95 प्रतिशत बार परमाणु विकल्प या अत्यधिक आक्रामकता को चुनते हैं। मशीनों के लिए 'जीत' ही एकमात्र लक्ष्य है, चाहे उसकी कीमत पूरी दुनिया का विनाश ही क्यों न हो। अगर हम आज ए.आई. को रक्षा क्षेत्र और समाज में खुली छूट देते हैं, तो हम एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, जहां युद्ध का फैसला जनरल नहीं, बल्कि एक कोडिंग प्रोग्राम करेगा। लोगों की सुरक्षा ए.आई. डाटा का विश्लेषण करेगा! लेकिन 'ट्रिगर' पर उंगली और समाज का नियंत्रण हमेशा एक इंसान का ही होना चाहिए। क्या विश्व में लोकतंत्र का झंडाबरदार अमेरिका 165 बेगुनाह बच्चियों के नृशंसता पूर्ण हत्या का गुनाह कबूल करेगा? क्या इन मासूमों की हत्या का कोई अनुतोष हो सकता है? क्या यह नपुंसकता किसी देश को ताकतवर करार दे सकती है?</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173417/who-is-responsible-for-the-blood-of-these-innocent-school</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173417/who-is-responsible-for-the-blood-of-these-innocent-school</guid>
                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:52:47 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेरह साल का इंतज़ार और एक कठिन विदाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी </span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानव जीवन की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यह है कि कभी-कभी जीवन और मृत्यु के बीच की रेखा बहुत धुंधली हो जाती है। सामान्यतः हम जीवन को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जीवन को ईश्वर का सबसे बड़ा उपहार माना जाता है। लेकिन कुछ परिस्थितियाँ ऐसी भी होती हैं जब जीवन केवल सांसों का चलना भर रह जाता है और उसमें चेतना</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संवाद और मानवीय गरिमा लगभग समाप्त हो जाती है। हाल के दिनों में चर्चा में आए हरीश राणा का मामला इसी विडंबना का एक अत्यंत मार्मिक उदाहरण बनकर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173408/thirteen-years-of-waiting-and-a-difficult-farewell"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images-(1)3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानव जीवन की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यह है कि कभी-कभी जीवन और मृत्यु के बीच की रेखा बहुत धुंधली हो जाती है। सामान्यतः हम जीवन को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जीवन को ईश्वर का सबसे बड़ा उपहार माना जाता है। लेकिन कुछ परिस्थितियाँ ऐसी भी होती हैं जब जीवन केवल सांसों का चलना भर रह जाता है और उसमें चेतना</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संवाद और मानवीय गरिमा लगभग समाप्त हो जाती है। हाल के दिनों में चर्चा में आए हरीश राणा का मामला इसी विडंबना का एक अत्यंत मार्मिक उदाहरण बनकर सामने आया है। यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह चिकित्सा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कानून</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं के जटिल प्रश्नों को सामने लाने वाली घटना है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरीश राणा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले एक युवा थे। वर्ष </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2013 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में एक दुर्घटना ने उनका जीवन पूरी तरह बदल दिया। बताया जाता है कि वह पढ़ाई के दौरान एक इमारत की चौथी मंजिल से गिर गए थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके कारण उनके सिर में गंभीर चोट आई और वह स्थायी कोमा जैसी अवस्था में चले गए। इस स्थिति को चिकित्सा भाषा में </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">” </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कहा जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें व्यक्ति जीवित तो रहता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसके मस्तिष्क की चेतन क्रियाएँ लगभग समाप्त हो जाती हैं। वह न बोल सकता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न चल सकता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न अपने आसपास की दुनिया को समझ सकता है। हरीश पिछले तेरह वर्षों तक इसी अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूलते रहे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन वर्षों में उनका जीवन केवल चिकित्सा उपकरणों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दवाइयों और कृत्रिम पोषण के सहारे चल रहा था। परिवार ने उनकी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी। माता-पिता ने अपने बेटे को जीवित रखने के लिए हर संभव प्रयास किया। कई अस्पतालों में इलाज कराया गया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह ली गई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। समय बीतने के साथ-साथ यह स्पष्ट होता गया कि अब उनके ठीक होने की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी है। डॉक्टरों ने भी यही राय दी कि मस्तिष्क को हुई गंभीर क्षति के कारण उनका सामान्य जीवन में लौटना लगभग असंभव है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी माता-पिता के लिए यह स्थिति अत्यंत पीड़ादायक होती है। एक ओर उनके सामने अपने बच्चे को खो देने का भय होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर उसे इस तरह निर्जीव अवस्था में वर्षों तक देखना भी कम कष्टदायक नहीं होता। हरीश राणा के परिवार ने लगभग तेरह वर्षों तक इस पीड़ा को सहा। उन्होंने अपने बेटे की सेवा में दिन-रात बिताए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अंततः यह प्रश्न उनके सामने खड़ा हो गया कि क्या केवल सांस चलना ही जीवन कहलाता है। जब किसी व्यक्ति की चेतना समाप्त हो जाए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह अपने अस्तित्व का अनुभव भी न कर सके</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब क्या उसे कृत्रिम साधनों के सहारे जीवित रखना मानवीय है या अमानवीय</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">?</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन्हीं सवालों के साथ हरीश के परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया कि उनके बेटे को </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">इच्छा मृत्यु</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">” </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थात् पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी जाए। यह एक अत्यंत संवेदनशील और जटिल कानूनी विषय है। भारत में सक्रिय इच्छामृत्यु यानी किसी व्यक्ति को जानबूझकर दवा देकर मृत्यु देना कानूनन अवैध है। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">पैसिव यूथेनेशिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">” </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की अनुमति दी जा सकती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपचार या उपकरणों को हटाया जाता है और मरीज को प्राकृतिक रूप से मृत्यु आने दी जाती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए हरीश राणा के जीवन-रक्षक उपचार को हटाने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने यह निर्णय सुनाया। अदालत ने कहा कि व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और उसी प्रकार गरिमा के साथ मरने का अधिकार भी मानवीय अधिकारों का हिस्सा है। अदालत ने निर्देश दिया कि उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती किया जाए और चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख में पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया अपनाई जाए।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस निर्णय के बाद जब हरीश राणा को एम्स ले जाया जा रहा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब परिवार के बीच अत्यंत भावुक दृश्य देखने को मिला। परिवार के लोग उनके पास खड़े होकर उन्हें विदा दे रहे थे। एक आध्यात्मिक कार्यकर्ता ने उनके पास खड़े होकर कहा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, “</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सबको माफ करते हुए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ।</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">” </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह शब्द केवल एक व्यक्ति के लिए विदाई नहीं थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन की गहरी सच्चाइयों को व्यक्त करने वाले शब्द थे। उस क्षण में वर्षों की पीड़ा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आशा और निराशा सब एक साथ दिखाई दे रहे थे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह घटना केवल एक परिवार की निजी त्रासदी नहीं है। इसने पूरे देश में एक नई बहस को जन्म दिया है। सवाल यह है कि क्या जीवन को हर कीमत पर बनाए रखना आवश्यक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">या फिर कभी-कभी व्यक्ति की गरिमा और पीड़ा को देखते हुए उसे प्राकृतिक मृत्यु की अनुमति देना अधिक मानवीय हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान का उद्देश्य जीवन को बचाना है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जब जीवन केवल कृत्रिम उपकरणों पर निर्भर रह जाए और उसमें चेतना का कोई संकेत न हो</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब डॉक्टरों और परिवार के सामने नैतिक दुविधा खड़ी हो जाती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस मामले ने यह भी दिखाया कि चिकित्सा निर्णय केवल वैज्ञानिक नहीं होते</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनमें गहरी मानवीय संवेदनाएँ भी शामिल होती हैं। डॉक्टरों के लिए भी यह आसान निर्णय नहीं होता कि किसी मरीज के जीवन-रक्षक उपकरण हटाए जाएँ। इसलिए ऐसी स्थितियों में कई स्तरों पर चिकित्सकीय और कानूनी समीक्षा की जाती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि निर्णय पूरी तरह मानवीय</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नैतिक और कानूनी आधार पर लिया गया है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरीश राणा का मामला भारत में इच्छामृत्यु से जुड़ी बहस के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। इससे पहले भी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">अरुणा शानबाग</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">” </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे मामलों ने इस विषय पर चर्चा को जन्म दिया था। लेकिन हरीश राणा का मामला इसलिए अलग है क्योंकि इसमें अदालत ने पहली बार स्पष्ट रूप से जीवन-रक्षक उपचार हटाने की अनुमति दी और इसे </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">गरिमा के साथ मृत्यु</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">” </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के अधिकार से जोड़ा।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस घटना का सबसे मार्मिक पक्ष यह है कि इसमें किसी प्रकार की सनसनी नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि केवल मानवीय पीड़ा और करुणा है। एक परिवार ने अपने बेटे को तेरह वर्षों तक संभालकर रखा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उम्मीद की कि शायद कोई चमत्कार हो जाए। लेकिन जब यह स्पष्ट हो गया कि वह कभी सामान्य जीवन में वापस नहीं लौट पाएगा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब उन्होंने भारी मन से उसे मुक्त करने का निर्णय लिया। यह निर्णय लेना किसी भी माता-पिता के लिए शायद दुनिया का सबसे कठिन निर्णय होता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि वह अनिश्चित है। कभी-कभी जीवन हमें ऐसे मोड़ पर ला खड़ा करता है जहाँ कोई भी विकल्प आसान नहीं होता। हरीश राणा की कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जीवन केवल सांसों का नाम नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि चेतना</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अनुभव और सम्मान के साथ जीने का नाम है। जब ये सब समाप्त हो जाएँ</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब शायद मृत्यु भी एक प्रकार की मुक्ति बन जाती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस घटना ने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। यह संदेश करुणा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संवेदना और मानवीय गरिमा का है। यह हमें याद दिलाता है कि कानून और चिकित्सा के निर्णय केवल नियमों से नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि मनुष्यता की गहराई से भी जुड़े होते हैं। हरीश राणा की कहानी अंततः हमें यही सिखाती है कि जीवन की सबसे बड़ी शक्ति प्रेम है</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और कभी-कभी प्रेम का सबसे कठिन रूप किसी प्रिय व्यक्ति को शांति से विदा कर देना भी होता है।</span> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173408/thirteen-years-of-waiting-and-a-difficult-farewell</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173408/thirteen-years-of-waiting-and-a-difficult-farewell</guid>
                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:35:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/images-%281%293.jpg"                         length="71163"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>New Rule: 1 जनवरी से बदल जाएंगे ये नियम, जानें क्या पड़ेगा असर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>New Rule from 1 January: नए साल की शुरुआत के साथ ही कई चीजें बदलेंगी और कुछ नियमों में भी अहम बदलाव होंगे। 1 जनवरी 2026 से जीएसटी, पेंशन, यूपीआई लिमिट, फिक्स डिपॉजिट और वाहन कीमतों समेत कई क्षेत्रों में नए नियम लागू होंगे।</p>
<h3><strong>जीएसटी में बदलाव</strong></h3>
<p>जीएसटी काउंसिल के फैसले के मुताबिक 1 जनवरी से मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) सभी जीएसटी फाइल करने वाले करदाताओं के लिए अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य जीएसटी फाइलिंग प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाना है।</p>
<h3><strong>यूपीआई 123 पे की लिमिट बढ़ी</strong></h3>
<p>बेसिक फोन या पुश बटन फोन के जरिए बैंक अकाउंट से पैसा ट्रांसफर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164015/new-rule-these-rules-will-change-from-january-1-know"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/new-rule-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>New Rule from 1 January: नए साल की शुरुआत के साथ ही कई चीजें बदलेंगी और कुछ नियमों में भी अहम बदलाव होंगे। 1 जनवरी 2026 से जीएसटी, पेंशन, यूपीआई लिमिट, फिक्स डिपॉजिट और वाहन कीमतों समेत कई क्षेत्रों में नए नियम लागू होंगे।</p>
<h3><strong>जीएसटी में बदलाव</strong></h3>
<p>जीएसटी काउंसिल के फैसले के मुताबिक 1 जनवरी से मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) सभी जीएसटी फाइल करने वाले करदाताओं के लिए अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य जीएसटी फाइलिंग प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाना है।</p>
<h3><strong>यूपीआई 123 पे की लिमिट बढ़ी</strong></h3>
<p>बेसिक फोन या पुश बटन फोन के जरिए बैंक अकाउंट से पैसा ट्रांसफर करने वाले टेलीफोन यूजर्स के लिए UPI 123 पे की लिमिट 10,000 रुपये कर दी गई है। इससे पहले यह लिमिट 5,000 रुपये थी।</p>
<h3><strong>पेंशन नियमों में सरलता</strong></h3>
<p>1 जनवरी से ईपीएफओ ने पेंशन निकालने की प्रक्रिया आसान कर दी है। अब कर्मचारी किसी भी बैंक से अपनी पेंशन की रकम निकाल सकेंगे और इसके लिए किसी अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत नहीं होगी।</p>
<h3><strong>किसानों के लिए बिना गारंटी लोन की सीमा बढ़ी</strong></h3>
<p>रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने किसानों के लिए बिना गारंटी लोन की सीमा बढ़ा दी है। 1 जनवरी से किसान अब 2 लाख रुपये तक बिना गारंटी के कर्ज ले सकेंगे। इससे पहले यह सीमा 1.60 लाख रुपये थी।</p>
<h3><strong>फिक्स डिपॉजिट (FD) नियम</strong></h3>
<p>नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) के लिए FD से जुड़े नियमों में बदलाव होंगे। अब फिक्स डिपॉजिट में जमा रकम को परिपक्वता की तारीख से पहले निकालने से संबंधित नए नियम लागू होंगे।</p>
<h3><strong>वाहनों की कीमतों में बदलाव</strong></h3>
<p>1 जनवरी से कई वाहन निर्माता कंपनियां अपनी गाड़ियों की कीमतों में बदलाव कर सकती हैं। महिंद्रा, होंडा, मारुति सुजुकी और हुंडई जैसी कंपनियों की कारों की कीमत लगभग 3% तक बढ़ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/164015/new-rule-these-rules-will-change-from-january-1-know</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/164015/new-rule-these-rules-will-change-from-january-1-know</guid>
                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 13:22:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/new-rule-%281%29.jpg"                         length="131196"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिंगर राहुल फाजिलपुरिया पर फायरिंग का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, वारदात के बाद भागा था विदेश </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम: 26 जुलाई 2025: </strong>दिनाँक 14.07.2025 को पुलिस थाना बादशाहपुर, गुरुग्राम की पुलिस टीम को SPR रोड़ पर सिंगर राहुल फाजिलपुरिया पर फायरिंग की घटना होने के सम्बन्ध में सूचना प्राप्त हुई।  </p>
<p style="text-align:justify;">उपरोक्त सूचना पाकर पुलिस थाना बदशाहपुर, गुरुग्राम की पुलिस टीम, उच्च अधिकारियों व पुलिस की सीन-ऑफ-क्राईम व क्राईम यूनिट्स की टीमों को सूचित करते हुए सूचना में बताए गए स्थान पर पहुँची और घटनास्थल का निरिक्षण किया गया तथा घटनास्थल से एक लोहे का पोल जिस पर गोली लगने का निशान था व एक गोली का सिक्का पुलिस कब्जा में लिया गया। </p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान पीड़ित व्यक्ति राहुल फाजिलपुरिया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158340/mastermind-of-firing-on-singer-rahul-fazilpuriya-arrested-had-fled"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/latest-news---2025-10-26t161724.803.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम: 26 जुलाई 2025: </strong>दिनाँक 14.07.2025 को पुलिस थाना बादशाहपुर, गुरुग्राम की पुलिस टीम को SPR रोड़ पर सिंगर राहुल फाजिलपुरिया पर फायरिंग की घटना होने के सम्बन्ध में सूचना प्राप्त हुई।  </p>
<p style="text-align:justify;">उपरोक्त सूचना पाकर पुलिस थाना बदशाहपुर, गुरुग्राम की पुलिस टीम, उच्च अधिकारियों व पुलिस की सीन-ऑफ-क्राईम व क्राईम यूनिट्स की टीमों को सूचित करते हुए सूचना में बताए गए स्थान पर पहुँची और घटनास्थल का निरिक्षण किया गया तथा घटनास्थल से एक लोहे का पोल जिस पर गोली लगने का निशान था व एक गोली का सिक्का पुलिस कब्जा में लिया गया। </p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान पीड़ित व्यक्ति राहुल फाजिलपुरिया ने पुलिस टीम को एक लिखित शिकायत के माध्यम से बतलाया कि दिनांक 14.07.2025 को समय करिब 05.50 PM यह अपने घर गाँव फाजिलपुर से अपनी थार गाड़ी से बहरामपुर रोड से SPR रोड़ की तरफ जा रहा था। इसी दौरान SPR  पर एक सफेद रंग की टाटा पंच PUNCH कार में सवार व्यक्तियों द्वारा इस पर गोली चलाई तो गोली साईड में एक पोल पर लगी। गोली चलाने के बाद वो व्यक्ति उसी टाटा पंच कार में सवार होकर वहां से भाग गए। प्राप्त शिकायत पर पुलिस थाना बदशाहपुर, गुरुग्राम में सम्बन्धित धाराओं के तहत अभियोग अंकित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">निरीक्षक आनंद कुमार, इन्चार्ज अपराध शाखा सैक्टर-31, गुरुग्राम की पुलिस टीम ने उपरोक्त अभियोग में कार्यवाही करते हुए आज दिनाँक 26.10.2025 को 01 और आरोपी को दिल्ली एयरपोर्ट से काबू करने में बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी की पहचान सुनील उर्फ सरधानिया (उम्र-39 वर्ष) निवासी गाँव सरधाना, जिला सोनीपत (हरियाणा) के रूप में हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोपी से प्रारम्भिक पुलिस पूछताछ में ज्ञात हुआ कि यह वर्ष-2024 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त किए गए पासपोर्ट से दुबई होते हुए मध्य अमेरिका चला गया था और वहां रहकर ही यह अपने साथी आरोपियों के सम्पर्क में था। इसने अपने साथियों के साथ उपरोक्त अभियोग की वारदात सहित गुरुग्राम में रोहित शौकीन की हत्या व प्रॉपर्टी डीलर पर फायरिंग करके जनलेवा हमने करने की वारदातों को अंजाम देने की योजना बनाई थी तथा वारदातों को अंजाम देने के लिए, शूटर और वारदात में प्रयोग किए गए हथियार भी इसके (आरोपी सुनील सिंह) द्वारा ही अपने साथियों के माध्यम से उपलब्ध कराए गए थे। </p>
<p style="text-align:justify;">आरोपी से पुलिस पूछताछ में यह भी ज्ञात हुआ कि यह अभी मध्य-अमेरिका में स्थित कोस्टा-रिका देश से भारत आया था। दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुँचते ही गुरुग्राम पुलिस ने इसे गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोपी के अपराधिक रिकॉर्ड के अवलोकन से ज्ञात हुआ कि इसके खिलाफ गुरुग्राम में राहुल फाजिलपुरिया, सैक्टर-45 में प्रॉपर्टी डीलर पर गोलियां चलाकर जानलेवा हमला करने, पिछले महीने गुरुग्राम पुलिस और इनके गिरोह के सदस्यों के बीच हुई पुलिस मुठभेड़ व रोहित शौकीन की हत्या करने की वारदातों सहित हत्या, हत्या करने का प्रयास, लूट व डकैती इत्यादि संगीन अपराधिक वारदातों के कुल 24 अभियोग हरियाणा के जिला जींद, रोहतक, गुरुग्राम, झज्जर, हिसार, सोनीपत, अम्बाला, भिवानी, पंचकूला तथा उत्तर-प्रदेश के जिला बागपत व आगरा में अंकित है। आरोपी इससे पहले 02 अभियोगों में आजीवन कारावास व 10 वर्ष की सजा काट रहा है, जिसमें जिला भिवानी के केस में आजीवन सजा की अवधि के दौरान माननीय हाई कोर्ट से जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद साल-2024 में यह न्यू अशोक नगर वसुन्दरा एनक्लेव, दिल्ली के पते पर सुनील सिंह (Suneel Singh) नाम से फर्जी दस्तावेज/पासपोर्ट बनवाकर विदेश भाग गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले उपरोक्त अभियोग में गुरुग्राम पुलिस द्वारा कुल 07 आरोपियों 1. विशाल, 2. हितेश, 3. गौतम उर्फ छोटू, 4. रमनदीप उर्फ पैट्रोल, 5. शुभम उर्फ काला, 6. शक्ति पांचाल व 7. रामनिवास उर्फ कालू को गिरफ्तार किया गया था, जिनके कब्जा से वारदात को अंजाम देने में प्रयोग की गई गाड़ी व हथियार इत्यादि भी बरामद किए गए थे। अब तक उपरोक्त अभियोग में कुल 08 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस टीम द्वारा आरोपी सुनील उपरोक्त को आज दिनाँक 26.10.2025 को माननीय अदालत के सम्मुख पेश करके 05 दिन के पुलिस हिरासत रिमांड पर लिया गया है। पुलिस हिरासत रिमांड के दौरान इसके अन्य साथी आरोपियों व अन्य वारदातों के बारे में गहनता से पूछताछ की जाएगी। पुलिस पूछताछ में जो भी तथ्य समक्ष आएंगे उनके अनुसार अभियोग में नियमानुसार आगामी कार्यवाही की जाएगी। अभियोग का अनुसन्धान जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/158340/mastermind-of-firing-on-singer-rahul-fazilpuriya-arrested-had-fled</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/158340/mastermind-of-firing-on-singer-rahul-fazilpuriya-arrested-had-fled</guid>
                <pubDate>Sun, 26 Oct 2025 16:17:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/latest-news---2025-10-26t161724.803.jpg"                         length="58103"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गर्भावस्था में सलाद खाना लाभदायक या हानिकारक ?</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>  (सुभाष आनंद -विनायक फीचर्स)</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">                          आधुनिक शोधकर्ताओं के अनुसार गर्भवती महिलाओं के लिए सलाद खाना हानिकारक हो सकता है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर ब्रेन कुक का कहना है कि गर्भवती महिलाओं द्वारा ज्यादा सलाद का प्रयोग करना सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है । लेकिन इसके विपरीत भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि सलाद खाना महिलाओं के लिए लाभदायक है, इसलिए वह महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा सलाद खाने की सलाह देते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">                        अमेरिकी अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि इस बात का यह मतलब नहीं लेना चाहिए कि सलाद खाना ठीक नहीं</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">           </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>गर्भवती</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153982/eating-salad-in-pregnancy-beneficial-or-harmful"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/ezgif.com-gif-maker-11.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong> (सुभाष आनंद -विनायक फीचर्स)</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">             आधुनिक शोधकर्ताओं के अनुसार गर्भवती महिलाओं के लिए सलाद खाना हानिकारक हो सकता है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर ब्रेन कुक का कहना है कि गर्भवती महिलाओं द्वारा ज्यादा सलाद का प्रयोग करना सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है । लेकिन इसके विपरीत भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि सलाद खाना महिलाओं के लिए लाभदायक है, इसलिए वह महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा सलाद खाने की सलाह देते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">            अमेरिकी अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि इस बात का यह मतलब नहीं लेना चाहिए कि सलाद खाना ठीक नहीं होता या इससे बच्चे के जन्म होने के मामले में किसी प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकती है।    आमतौर पर यह माना जाता है कि सलाद के रूप में ताजी सब्जियां,फलों और उनके पत्तों को काटकर खाने से स्वास्थ्य ठीक रहता है क्योंकि सब्जी और फलों में सभी प्रकार के विटामिन होते हैं। आमतौर पर  डॉक्टर सभी को सलाद खाने की सलाह देते हैं। केवल डॉक्टर ब्रेन कुक ने गर्भवती महिलाओं को सलाह दी है कि वह सलाद खाने से परहेज करें और सलाद खाने के कई नुकसान है, इसका भी अभी-अभी पता चला है । डॉक्टरों का कहना है कि प्रत्येक 500 नवजात बच्चों में एक को हाइपोसपेडायस की शिकायत मिल रही है। इस बीमारी से बच्चों के शरीर का अगला हिस्सा बिल्कुल पतला हो जाता है जिससे उसका यौन जीवन नीरस हो जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">           1990-1991 में आरंभ किए गए इस सर्वेक्षण के बाद यह परिणाम उभर कर सामने आए हैं। शाकाहारी माताओं की संतानों में  हाइपोस्पेडीयास की दर मांसाहारी माताओं की अपेक्षा कम होती है। सूत्रों के अनुसार सोया सहित कुछ आहारों में फाइटो एस्ट्रोजेन नामक रसायन पाया जाता है जिसकी सरंचना महिलाओं के सेक्स हार्मोन इस्ट्रोजेन से काफी मिलती जुलती होती हैं। इसके अतिरिक्त सब्जियां और फलों में कीटनाशक एव कृत्रिम उर्वरकों का छिड़काव किए जाने के कारण ये गर्भवती महिलाओं में पल रहे बच्चे के लिए काफी हानिकारक साबित हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>गर्भवती महिलाओं को सात महीने के बाद सलाद छोड़ देने की सलाह</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">                 भारत में भी पहले  दाइयां गर्भवती महिलाओं को खीरा,टमाटर, सेब,पपीता इत्यादि खाने से परहेज करने की सलाह देती थी। यही आज अमेरिकी डॉक्टर भी कह रहे हैंं। वही मिशन अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट एंथली जान का भी कहना था कि वह गर्भवती महिलाओं को सात महीने के बाद सलाद छोड़ देने की सलाह दिया करती थी। ताकि नॉर्मल डिलीवरी के समय कोई समस्या ना आए। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         कुछ आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक से पुरुषों में जननांगों की विकृति की समस्याएं बड़ी तेजी से बढ़ रही है। आधुनिक डॉक्टरों के शोधों से पता चला है  ज्यों ज्यों  आदमी की उम्र बढ़ती जा रही है त्यों  त्यों पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की कमी आती जा रही है। अंडकोषों के ठीक ढंग से विकसित न हो पाने से अन्य समस्याएं शनै : शनै बढ़ रही है। इसी कारण अमेरिकन डॉक्टर ने  एशिया के गर्म देशों  की गर्भवती महिलाओं को सलाद से परहेज करने की सलाह दी  है। उनका मानना है कि सलाद महिलाओं के हार्मोन पर बुरा प्रभाव डालती है, गर्भवती को चार महीने के पश्चात प्रोटीन ज्यादा खाना चाहिए जैसे पनीर,अंडा, मीट और मछली इत्यादि लेकिन महिलाओं को नशे की दवाइयों और शराब के सेवन से कड़ा परहेज करना चाहिए। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>हकीमों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को गाजर और सेब के मुरब्बे अधिक मात्रा में सेवन करने चाहिए</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         पश्चिमी देशों में गर्भवती महिलाएं बड़ी मात्रा में नशे का सेवन कर रही है और सरेआम शराब पी रही है ,वहां पर बच्चों की मृत्यु दर बढ़ती जा रही है। डॉक्टर का कहना है कि महिलाओं को पूरे नौ महीने तक रेगुलर चेकअप कराना चाहिए, यदि कोई समस्या आती है तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को दूध ,दही ,पनीर का प्रयोग करना चाहिए तथा इसके साथ-साथ नारियल पानी पीना चाहिए। कोल्डड्रिंक और अन्य पेय पदार्थों की बजाय नींबू पानी को प्राथमिकता देनी चाहिए। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">       वही पी जी आई भटिंडा की गायनेकोलॉजिस्ट का कहना है कि महिलाओं को गर्भवती होते ही अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए, कोई भी समस्या आने पर नजदीक वाले अस्पताल में तैनात लेडी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए ,देसी टोटकों से दूर रहना चाहिए, गर्भवती महिलाओं को चाय से परहेज करना चाहिए । वही कुछ हकीमों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को गाजर और सेब के मुरब्बे अधिक मात्रा में सेवन करने चाहिए, इससे महिलाओं को घबराहट नहीं होती और बीपी भी स्थिर रहता है। किसी प्रकार की कमजोरी नहीं रहती, इसके अतिरिक्त महिलाएं एक्टिव रहती है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">            यह तो सभी जानते हैं कि गर्भवती महिलाओं का नौ मास का सफर संकट से भरा हुआ होता है। इस समय उन्हें सभी सावधानियां बरतनी चाहिए और अपने चिकित्सक के निर्देशों के अनुसार ही अपना आहार व्यवहार रखना चाहिए। *(विनायक फीचर्स)*</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/153982/eating-salad-in-pregnancy-beneficial-or-harmful</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/153982/eating-salad-in-pregnancy-beneficial-or-harmful</guid>
                <pubDate>Mon, 18 Aug 2025 12:47:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-08/ezgif.com-gif-maker-11.webp"                         length="36190"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान -लश्कर के गाजी का अंत… टॉप कमांडर सैफुल्लाह खालिद की पाकिस्तान में हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर रजाउल्लाह निजामानी उर्फ अबू सैफुल्लाह की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. इसको सिंध प्रांत के मटली शहर के फालकारा चौक के पास मारा गया, जहां हमलावरों ने उसे घर से निकलते ही निशाना बनाया और मौके पर ही मौत के घाट उतार दिया.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151991/the-end-of-lashkars-ghazi%E2%80%A6-top-commander-saifullah-khalid-was"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-05/whatsapp-image-2025-05-18-at-18.35.53_4af0ee13.jpg" alt=""></a><br /><p class="article-HD" style="text-align:justify;">  पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक घटना ने लश्कर-ए-तैयबा और आतंकी नेटवर्कों में हड़कंप मचा दिया है. लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर रजाउल्लाह निजामानी उर्फ सैफुल्लाह खालिद की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. इसको सिंध प्रांत के मटली शहर के फालकारा चौक के पास मारा गया, जहां हमलावरों ने उसे घर से निकलते ही निशाना बनाया और मौके पर ही मौत के घाट उतार दिया.अबू सैफुल्लाह खालिद मालन क्षेत्र का निवासी था, लंबे समय तक कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा था.</p>
<p style="text-align:justify;">कश्मीर जिहाद से लौटने के बाद लश्कर-ए-तैयबा ने उसे गाजी अबू सैफुल्लाह की उपाधि दी गई थी. हालांकि कहा जाता है कि हाल ही में संगठन ने उसे अलर्ट किया था और उसकी गतिविधियों पर सीमित रहने का निर्देश भी दिया था. साथ ही उसे सुरक्षा भी दी गई थी, लेकिन जिस दिन वह मटली शहर में अपने घर से बाहर निकला, उसी दिन हमलावरों ने उसके सिर और सीने में गोलियां दाग दीं. अबू सैफुल्लाह भारत में लश्कर के कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड था. माना जाता है कि वह भारत में कम से कम तीन आतंकी हमलों की साजिश में मुख्य भूमिका निभा चुका था.</p>
<div class="trc_related_container tbl-trecs-container trc_spotlight_widget trc_elastic trc_elastic_organic-thumbnails-mid-personalisation-desk">
<div class="trc_rbox_container">
<div>
<div class="trc_rbox organic-thumbnails-mid-personalisation-desk trc-content-hybrid">
<div class="trc_rbox_header trc_rbox_border_elm">
<div class="trc_header_ext" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="trc_header_ext">
<h3 style="text-align:justify;"><strong>इन तीन हमलों में था सैफुल्लाह का दिमाग</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हमला…</strong> साल 2001 में उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हुए आतंकी हमले की साजिश रजाउल्लाह निजमानी ने रची थी. इस हमले में आतंकियों ने भारी गोलीबारी की थी, जिसमें सात जवान शहीद हुए थे. बाद में जांच एजेंसियों ने इस हमले की प्लानिंग से जुड़े जो नाम सामने लाए, उनमें अबू सैफुल्लाह सबसे ऊपर था.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बंगलौर में मचाया था आतंक का तांडव…</strong> अबू सैफुल्लाह ने 2005 में बंगलौर में हुए सिलसिलेवार धमाकों की साजिश भी रची थी. इन धमाकों से बंगलौर शहर दहल गया था. आईटी कंपनियों और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए हमला किया गया था.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नागपुर में RSS मुख्यालय को बनाया था निशाना… </strong>साल 2006 में नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय को निशाना बनाकर एक बड़ा हमला करने की कोशिश की गई थी. हालांकि समय रहते सुरक्षाबलों ने हमलावरों को ढेर कर दिया, लेकिन जांच में साफ हुआ कि इस हमले के पीछे भी अबू सैफुल्लाह का ही दिमाग था.</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>लश्कर के लिए भर्ती व फंडिंग की जिम्मेदारी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय सूत्रों और सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, अबू सैफुल्लाह की हत्या किसी सुनियोजित टारगेट किलिंग का हिस्सा हो सकती है. अबू सैफुल्लाह जम्मू-कश्मीर में भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों का संचालन कर चुका था और पाकिस्तान लौटने के बाद वह सिंध में जमात और लश्कर के लिए भर्ती व फंडिंग जैसे अभियानों में सक्रिय था.</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आतंक की दुनिया में कहीं टकराव तो नहीं</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इस हत्या ने पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्कों के भीतर गुटबाजी और आंतरिक टकराव की आशंकाओं को भी जन्म दे दिया है. अबू सैफुल्लाह जैसे प्रशिक्षित और गाज़ी घोषित आतंकी की इस तरह हत्या, यह बताती है कि पाकिस्तान में आतंक के संरक्षक अब खुद असुरक्षित होते जा रहे हैं. साथ ही यह घटना एक और संकेत देती है कि सिंध जैसे इलाकों में भी आतंकी संगठनों के भीतर आपसी प्रतिद्वंद्विता या विरोध तेज हो चुका है.</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="adsCont Topads medium">
<div></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/151991/the-end-of-lashkars-ghazi%E2%80%A6-top-commander-saifullah-khalid-was</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/151991/the-end-of-lashkars-ghazi%E2%80%A6-top-commander-saifullah-khalid-was</guid>
                <pubDate>Sun, 18 May 2025 18:37:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-05/whatsapp-image-2025-05-18-at-18.35.53_4af0ee13.jpg"                         length="147544"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोन के लिए आईएमएफ ने पाकिस्तान के सामने 11 और शर्तें रखी, भारत के साथ तनाव को बताया सबसे बड़ा जोखिम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 7 अरब डॉलर के लोन के लिए पाकिस्तान के सामने 11 और नई शर्तें रख दी हैं। इसके साथ ही भारत के साथ तनाव को एक बड़ा जोखिम बताया है।  पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, जो नई शर्तें लगाई गई हैं उनमें 17.6 लाख करोड़ रुपए के नए बजट को मंजूरी देना, बिजली बिलों पर डेट सर्विसिंग सरचार्ज बढ़ाना और तीन साल से अधिक  पुरानी कारों के आयात पर प्रतिबंध हटाना शामिल है।</p>
<p><strong>रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पिछले दो हफ्तों में पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव काफी बढ़ गया है</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151982/for-loan-imf-laid-down-11-more-conditions-in-front"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-05/imf.jpg" alt=""></a><br /><p>अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 7 अरब डॉलर के लोन के लिए पाकिस्तान के सामने 11 और नई शर्तें रख दी हैं। इसके साथ ही भारत के साथ तनाव को एक बड़ा जोखिम बताया है।  पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, जो नई शर्तें लगाई गई हैं उनमें 17.6 लाख करोड़ रुपए के नए बजट को मंजूरी देना, बिजली बिलों पर डेट सर्विसिंग सरचार्ज बढ़ाना और तीन साल से अधिक  पुरानी कारों के आयात पर प्रतिबंध हटाना शामिल है।</p>
<p><strong>रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पिछले दो हफ्तों में पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव काफी बढ़ गया है</strong></p>
<p>शनिवार को जारी आईएमएफ की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच में अगर तनाव बढ़ता है तो पड़ोसी देश के राजकोष, विदेशी व्यापार और सुधारों पर नकारात्मक असर होगा। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पिछले दो हफ्तों में पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव काफी बढ़ गया है, लेकिन अभी तक बाजार की प्रतिक्रिया मामूली रही है और शेयर बाजार ने अपने हालिया मुनाफे को बरकरार रखा है।</p>
<p><strong>आईएमएफ ने अनुमान लगाया है कि अगले वित्त वर्ष के लिए पाकिस्तान का रक्षा बजट 2.414 लाख करोड़ रुपए हो सकता है, जो 25,200 करोड़ रुपए या 12 प्रतिशत अधिक है</strong></p>
<p>आईएमएफ ने अनुमान लगाया है कि अगले वित्त वर्ष के लिए पाकिस्तान का रक्षा बजट 2.414 लाख करोड़ रुपए हो सकता है, जो 25,200 करोड़ रुपए या 12 प्रतिशत अधिक है। आईएमएफ के अनुमान की तुलना में, सरकार ने 2.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक आवंटित करने का संकेत दिया है, जो भारत के साथ संघर्ष के बाद 18 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।</p>
<p><strong>आईएमएफ ने महज 7 अरब डॉलर के कर्ज के लिए पाकिस्तान पर 11 और शर्तें लगा दी हैं, जिससे कुल शर्तों की संख्या 50 हो गई है</strong></p>
<p>आईएमएफ ने जून 2025 के अंत तक कार्यक्रम लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आईएमएफ स्टाफ एग्रीमेंट के अनुरूप वित्त वर्ष 2026 के बजट की संसदीय मंजूरी हासिल करने की एक नई शर्त भी लगाई है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने रिपोर्ट में बताया, “आईएमएफ ने महज 7 अरब डॉलर के कर्ज के लिए पाकिस्तान पर 11 और शर्तें लगा दी हैं, जिससे कुल शर्तों की संख्या 50 हो गई है।” आईएमएफ ने बताया कि पाकिस्तान के 17.6 लाख करोड़ रुपए के बजट में से सिर्फ 1.07 लाख करोड़ रुपए विकास पर खर्च किए जाने हैं, जबकि 6.6 लाख करोड़ रुपए का राजकोषीय घाटा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/151982/for-loan-imf-laid-down-11-more-conditions-in-front</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/151982/for-loan-imf-laid-down-11-more-conditions-in-front</guid>
                <pubDate>Sun, 18 May 2025 16:40:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-05/imf.jpg"                         length="176041"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Media]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        