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                <title>DPRO - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>DPRO RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वेतन भुगतान की मांग को लेकर सफाई कर्मचारियों का प्रदर्शन, डीपीआरओ पर अभद्रता का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> उत्तर प्रदेश पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ अध्यक्ष अजय आर्य ने बुधवार को जिलाधिकारी को सम्बोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपकर जिला पंचायत राज अधिकारी ‘डीपीआरओ’ पर सफाई कर्मचारियों और संगठन के पदाधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार करने, सामूहिक रूप से गाली देने का आरोप लगाया है। संघ ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">संघ के जिलाध्यक्ष अजय कुमार आर्य, जिलाकोषाध्यक्ष अशोक कुमार चौहान, संगठन मंत्री अमित कुमार चक्रवर्ती, जिला लेखा सम्प्रेक्षक भरत कुमार यादव के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन के अनुसार, जनपद में कार्यरत ग्रामीण सफाई कर्मचारियों को मई और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183038/demonstration-of-sanitation-workers-demanding-salary-payment-dpro-accused-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260709-wa0080.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> उत्तर प्रदेश पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ अध्यक्ष अजय आर्य ने बुधवार को जिलाधिकारी को सम्बोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपकर जिला पंचायत राज अधिकारी ‘डीपीआरओ’ पर सफाई कर्मचारियों और संगठन के पदाधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार करने, सामूहिक रूप से गाली देने का आरोप लगाया है। संघ ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संघ के जिलाध्यक्ष अजय कुमार आर्य, जिलाकोषाध्यक्ष अशोक कुमार चौहान, संगठन मंत्री अमित कुमार चक्रवर्ती, जिला लेखा सम्प्रेक्षक भरत कुमार यादव के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन के अनुसार, जनपद में कार्यरत ग्रामीण सफाई कर्मचारियों को मई और जून 2026 का वेतन अब तक नहीं मिला है। वेतन भुगतान की मांग को लेकर बुधवार को संगठन के पदाधिकारी और कर्मचारी जिला पंचायत राज अधिकारी के कार्यालय पहुंचे थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वेतन भुगतान का अनुरोध करने के दौरान जिला पंचायत राज अधिकारी ने कर्मचारियों एवं संगठन के पदाधिकारियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया तथा उन्हें अपमानित किया। इस घटना से कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त हो गया।संघ ने अपने आरोपों के समर्थन में जिला पंचायत राज अधिकारी के कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज से पूरे घटनाक्रम की सच्चाई स्पष्ट हो जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में जिलाधिकारी से मांग की गई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारी के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए तथा लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराया जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 10 जुलाई तक सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो संगठन आगे आंदोलन करने को बाध्य होगा। ज्ञापन देने वालों मे संजय कुमार यादव, रूद्रनरायन उर्फ रूदल, सन्तोष कुमार, लालजी निषाद, भरतराम, रामपाल भारती आदि सफाईकर्मी, पदाधिकारी शामिल रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 22:06:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>11.17 करोड़ के खर्च पर सवाल: अभिलेख न देने पर 18 सचिवों का वेतन रोका, जमीनी हकीकत पर भी उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>गोण्डा-आनंद पांडेय </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए खर्च की गई 11.17 करोड़ रुपये की धनराशि को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एक ओर जहां अभिलेख प्रस्तुत न करने पर 18 ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया गया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />जानकारी के अनुसार, पंचायत राज विभाग के तहत वर्ष 2016-17 से 2023-24 के बीच जिले की 82 ग्राम पंचायतों में कुल 11 करोड़ 17 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। इन कार्यों का ऑडिट जिला लेखा परीक्षा समिति द्वारा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173462/questions-raised-on-expenditure-of-rs-1117-crore-salary-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/bhrastachar.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>गोण्डा-आनंद पांडेय </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए खर्च की गई 11.17 करोड़ रुपये की धनराशि को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एक ओर जहां अभिलेख प्रस्तुत न करने पर 18 ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया गया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />जानकारी के अनुसार, पंचायत राज विभाग के तहत वर्ष 2016-17 से 2023-24 के बीच जिले की 82 ग्राम पंचायतों में कुल 11 करोड़ 17 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। इन कार्यों का ऑडिट जिला लेखा परीक्षा समिति द्वारा किया गया, जिसमें कई स्थानों पर संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। समिति ने इसे गंभीर मानते हुए धनराशि के दुरुपयोग की आशंका जताई और रिपोर्ट विभाग को भेजी।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />कई बार नोटिस व पत्राचार के बावजूद अभिलेख प्रस्तुत न करने पर डीपीआरओ लालजी दूबे ने 18 सचिवों के मार्च माह के वेतन पर रोक लगा दी है और स्पष्टीकरण मांगा है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इधर, क्षेत्रीय ग्रामीणों ने पूरे मामले को लेकर जमीनी हकीकत पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्य केवल कागजों में ही दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविकता में मौके पर कार्य अधूरे या न के बराबर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फर्जी बिल-वाउचर के जरिए भुगतान दर्शाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />विभागीय आंकड़ों के अनुसार खर्च की गई कुल धनराशि 11.17 करोड़ रुपये है, लेकिन अभिलेख प्रस्तुत न होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि इसमें से कितनी राशि का वास्तविक और सत्यापित हिसाब उपलब्ध है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />स्थानीय स्तर पर अब मामले की निष्पक्ष जांच और जमीनी सत्यापन की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:44:55 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जिला विकास अधिकारी अजय कुमार सिंह पर  सचिव सुधीर सिंह पड़ रहे भारी</title>
                                    <description><![CDATA[- प्रमुख सचिव (पंचायत )से शिकायत होने के बाद भी जिला विकास अधिकारी ने मामले को किया रफा दफा ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148619/secretary-sudhir-singh-falling-heavy-on-district-development-officer-ajay"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/02.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के विकासखण्ड गौर में लगातार 06 वर्षों से तैनात ग्राम विकास अधिकारी सुधीर सिंह डी० डी० ओ० अजय कुमार सिंह पर भारी पड़ रहे हैं । सचिव का अन्य ब्लाक में स्थानांतरण करना जिला विकास अधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी के लिए चुनौती बना हुआ है और यह बहुत बड़े भ्रष्टाचार का संकेतक है । स्थानांतरण नीति को ताख पर रख कर की गई तैनाती को लेकर पी जी पोर्टल पर शिकायत किया गया था । पी जी पोर्टल पर शिकायत होने पर अपर प्रमुख सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव - पंचायती राज विभाग को मामले की जांच मिली थी ।</div>
<div> </div>
<div>अपर प्रमुख सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव - पंचायती राज विभाग ने निर्देशक पंचायती राज को जांच कर कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिया था । निर्देशक पंचायती राज ने उक्त प्रकरण में डीपीआरओ  (जिला पंचायत राज अधिकारी बस्ती ) रतन कुमार से जांच आख्या मांगी थी डीपीआरओ ने जांच किया तो लेकिन जांच में पता चला कि सचिव सुधीर सिंह ग्राम विकास अधिकारी है । जो हमारे कार्य क्षेत्र में नही आता है । ग्राम विकास अधिकारियों (सचिवों ) का स्थानांतरण डीडीओ ( जिला विकास अधिकारी ) ही कर सकते हैं । डीपीआरओ मात्र ग्राम पंचायत अधिकारियों ( सचिवों ) का ही स्थानांतरण कर सकते हैं ।</div>
<div> </div>
<div>डीपीआरओ ने दिनांक - 28 -09-2024 को डीडीओ ( जिला विकास अधिकारी बस्ती ) को नोटिस जारी कर शासनादेश के खिलाफ तैनात सचिव / ग्राम विकास अधिकारी सुधीर कुमार सिंह के मामले को अवगत कराया था कि उक्त प्रकरण आपके विभाग से संबंधित है । उक्त प्रकरण में जांच कर कार्रवाई करने के लिए कहा था । डीपीआरओ रतन कुमार ने डीडीओ को रिसीव कराये गये नोटिस की सूचना निर्देशक पंचायती राज को अवगत कराया था । निर्देशक पंचायत राज ने डीपीआरओ के द्वारा जांच में उपलब्ध कराये गये नोटिस को पी जी पोर्टल पर अपलोड करके दिनांक - 10-10-2024 को मामले का निस्तारण कर दिया था ।</div>
<div> </div>
<div>डीपीआरओ रतन कुमार के द्वारा जारी नोटिस पर डीडीओ ने कोई कार्रवाई नहीं किया है और सचिव / ग्राम विकास अधिकारी सुधीर सिंह का गौर ब्लाक के अलावा अन्य ब्लाक में स्थानांतरण करने के बजाएं स्थानांतरण नीति का हवाला देकर डीडीओ ने सुधीर कुमार सिंह बचाने में पूरी ताकत झोंक दिया है । अब आप सोच सकते हैं कि योगी सरकार में अधिकारी / कर्मचारी कितने ईमानदारी / जिम्मेदारी / नियमों से अपने कार्यों का निर्वाहन कर रहे हैं । आखिर क्यों शासनादेश / स्थानांतरण नीति का पालन करने में जिम्मेदार अधिकारी कन्नी काट रहे है जिसको लेकर योगी सरकारी की छवि धूमिल हो रही है । </div>
<div> </div>
<div>सूत्रों की माने तो विकास भवन बस्ती में डीपीआरओ एवं डीडीओ से सम्बंधित अधिकारी के कार्यालय में पुरानी कहावत सिद्ध हो रही है कि *पैसा फेकों तमाशा देखों* अर्थात जो सचिव संम्बंधित अधिकारी के कार्यालय में कार्यरत बाबू को मनचाहा सुविधा शुल्क दे दे उसके लिए कोई शासनादेश / स्थानांतरण नीति नही लागू है और जो सचिव संम्बधित कार्यालय में कार्यरत बाबू को मनचाहा सुविधा शुल्क न दे उसके लिए शासनादेश / स्थानांतरण नीति लागू है । अब देखना है कि तेज तर्रार मुख्य विकास अधिकारी जय देव सीएस के द्वारा मामले को संज्ञान में लेकर सचिव सुधीर सिंह का स्थानांतरण कर पाते हैं या मामला लीपापोती तक ही सीमित रहेगा ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2025 18:56:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डीपीआरओ ने सात ग्राम पंचायत सचिवों का रोका वेतन</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में मॉडल गांवों में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज दो के तहत दिए गए धन का उपभोग प्रमाण-पत्र और कार्यपूर्ति जमा न करने पर डीपीआरओ ने सात ग्राम पंचायत सचिवों को वेतन रोक दिया है।</div>
<div>डीपीआरओ रतन कुमार ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज-टू के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 में मॉडल ग्राम बनाये जाने और ओडीएफ प्लस के लिए चयनित ग्राम पंचायतों में पीएफएमएस के माध्यम से सब्सिडी खाते में धनराशि उपलब्ध कराई गई थी।</div>
<div>  </div>
<div>इसके सापेक्ष 31 मार्च 2024 तक व्यय की गयी धनराशि का उपभोग प्रमाण-पत्र एवं व्यय धनराशि के सापेक्ष कराए गए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143700/dpro-stopped-salary-of-seven-gram-panchayat-secretaries"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-08/img-20240731-wa0153.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में मॉडल गांवों में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज दो के तहत दिए गए धन का उपभोग प्रमाण-पत्र और कार्यपूर्ति जमा न करने पर डीपीआरओ ने सात ग्राम पंचायत सचिवों को वेतन रोक दिया है।</div>
<div>डीपीआरओ रतन कुमार ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज-टू के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 में मॉडल ग्राम बनाये जाने और ओडीएफ प्लस के लिए चयनित ग्राम पंचायतों में पीएफएमएस के माध्यम से सब्सिडी खाते में धनराशि उपलब्ध कराई गई थी।</div>
<div> </div>
<div>इसके सापेक्ष 31 मार्च 2024 तक व्यय की गयी धनराशि का उपभोग प्रमाण-पत्र एवं व्यय धनराशि के सापेक्ष कराए गए कार्यों की कार्यपूर्ति प्रमाण-पत्र निर्धारित प्रारूपों पर 22 अप्रैल तक देना था। कार्यपूर्ति व उपभोक्ता प्रमाण-पत्र योजना सहायक अमित कुमार को उपलब्ध कराना था। डीपीआरओ ने कहा कि दोनों तरह के प्रपत्र जमा करने के लिए अप्रैल, मई, जुलाई में अनुस्मारक पत्र दिए गए। इसके बाद भी ग्राम पंचायत सचिवों ने व्यय विवरण और उपभोग प्रमाण-पत्र नहीं दिया।</div>
<div> </div>
<div>इस पर डीपीआरओ रतन कुमार ने बस्ती सदर के मड़वानगर में तैनात रहे ग्राम विकास अधिकारी प्रिंका चौधरी, रामनगर ब्लॉक के धवाय में तैनात ग्राम विकास अधिकारी जयेन्द्र लाल, परसा खुर्द बुजुर्ग उर्फ दरियापुर जंगल के सचिव तीरथ प्रसाद, सल्टौगा गोपालपुर के अजगैवा जंगल के सचिव अरुणेश पाल, अमरौली सुमाली के अखिलेश शुक्ला, बहादुरपुर के कलवारी मुस्तहकम के सचिव राजन चौधरी, सिकन्दरपुर परसुरामपुर के सचिव राम सुरेश यादव का वेतन रोक दिया।</div>
<div> </div>
<div>डीपीआरओ ने यह भी कहा कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में आवंटित क्रेडिट लिमिट के सापेक्ष मदवार व्यय की धनराशि, बिल बाऊचर्स, उपभोग प्रमाण-पत्र 31 जुलाई तक योजना सहायक के पास जमा कर दें। अन्यथा की दशा में कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Aug 2024 16:50:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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