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                <title>notice - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>notice RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>एक तरफ चलती रही LDA की कार्यशाला, दूसरी तरफ सील होते रहे कोचिंग संस्थान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> एक ओर एलडीए द्वारा कार्यशालाओं का आयोजन जारी रहा, वहीं दूसरी ओर शहर में कोचिंग संस्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई भी लगातार चलती रही। इस कार्रवाई से छात्रों, अभिभावकों और कोचिंग संचालकों के बीच असमंजस, चिंता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। संचालकों का कहना है की ज्यादातर कोचिंग किराए की प्रॉपर्टी में चल रही हैं और जो एलडीए के मानक हैं उन्हें मकान मालिक पूरी करने की जगह कोचिंग वाली जगह खाली करने को बोलने लगे हैं ऐसे में जाएँ तो जाएँ कहाँ ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कम्पार्टमेंट परीक्षाओं में अब मात्र 15 दिन शेष हैं। ऐसे में अनेक विद्यार्थियों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182257/on-one-side-lda-workshops-continued-to-operate-on-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/10009980541.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> एक ओर एलडीए द्वारा कार्यशालाओं का आयोजन जारी रहा, वहीं दूसरी ओर शहर में कोचिंग संस्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई भी लगातार चलती रही। इस कार्रवाई से छात्रों, अभिभावकों और कोचिंग संचालकों के बीच असमंजस, चिंता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। संचालकों का कहना है की ज्यादातर कोचिंग किराए की प्रॉपर्टी में चल रही हैं और जो एलडीए के मानक हैं उन्हें मकान मालिक पूरी करने की जगह कोचिंग वाली जगह खाली करने को बोलने लगे हैं ऐसे में जाएँ तो जाएँ कहाँ ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कम्पार्टमेंट परीक्षाओं में अब मात्र 15 दिन शेष हैं। ऐसे में अनेक विद्यार्थियों का कहना है कि विशेषकर कमजोर छात्र ऑनलाइन माध्यम से गणित, विज्ञान और अन्य जटिल विषयों को प्रभावी ढंग से समझ नहीं पाते। उनका मानना है कि इस समय ऑफलाइन कक्षाओं का बाधित होना उनकी तैयारी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोचिंग संघ का कहना है कि लगातार हो रही कार्रवाई के कारण कई शिक्षक और संस्थान ख़त्म होने की कगार पर हैं उनका दावा है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और कोचिंग संस्थान का करियर पूरी तरह चौपट हो जाएगा । </div>
<div style="text-align:justify;">प्रशासन का पक्ष है कि शहर में संचालित संस्थानों को निर्धारित नियमों और भवन सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक है, और कार्रवाई उन्हीं मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है परंतु उत्तर प्रदेश कोचिंग संघ के अध्यक्ष बादल चोपड़ा का कहना है ऐसे संस्थान जो अत्यंत छोटे हैं और उनके पास आवश्यक उपकरण हैं उन्हें बिना निरीक्षण , नोटिस दिए सील कर देना नियम विरुद्ध है इससे सम्पूर्ण समाज प्रभावित होता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:04:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>11.17 करोड़ के खर्च पर सवाल: अभिलेख न देने पर 18 सचिवों का वेतन रोका, जमीनी हकीकत पर भी उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>गोण्डा-आनंद पांडेय </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए खर्च की गई 11.17 करोड़ रुपये की धनराशि को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एक ओर जहां अभिलेख प्रस्तुत न करने पर 18 ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया गया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />जानकारी के अनुसार, पंचायत राज विभाग के तहत वर्ष 2016-17 से 2023-24 के बीच जिले की 82 ग्राम पंचायतों में कुल 11 करोड़ 17 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। इन कार्यों का ऑडिट जिला लेखा परीक्षा समिति द्वारा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173462/questions-raised-on-expenditure-of-rs-1117-crore-salary-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/bhrastachar.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>गोण्डा-आनंद पांडेय </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए खर्च की गई 11.17 करोड़ रुपये की धनराशि को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एक ओर जहां अभिलेख प्रस्तुत न करने पर 18 ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया गया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />जानकारी के अनुसार, पंचायत राज विभाग के तहत वर्ष 2016-17 से 2023-24 के बीच जिले की 82 ग्राम पंचायतों में कुल 11 करोड़ 17 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। इन कार्यों का ऑडिट जिला लेखा परीक्षा समिति द्वारा किया गया, जिसमें कई स्थानों पर संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। समिति ने इसे गंभीर मानते हुए धनराशि के दुरुपयोग की आशंका जताई और रिपोर्ट विभाग को भेजी।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />कई बार नोटिस व पत्राचार के बावजूद अभिलेख प्रस्तुत न करने पर डीपीआरओ लालजी दूबे ने 18 सचिवों के मार्च माह के वेतन पर रोक लगा दी है और स्पष्टीकरण मांगा है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इधर, क्षेत्रीय ग्रामीणों ने पूरे मामले को लेकर जमीनी हकीकत पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्य केवल कागजों में ही दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविकता में मौके पर कार्य अधूरे या न के बराबर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फर्जी बिल-वाउचर के जरिए भुगतान दर्शाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />विभागीय आंकड़ों के अनुसार खर्च की गई कुल धनराशि 11.17 करोड़ रुपये है, लेकिन अभिलेख प्रस्तुत न होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि इसमें से कितनी राशि का वास्तविक और सत्यापित हिसाब उपलब्ध है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />स्थानीय स्तर पर अब मामले की निष्पक्ष जांच और जमीनी सत्यापन की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:44:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस्ती जिले में गबन के 29 लाख रूपये वसूलने के लिए तीन तत्कालीन ग्राम प्रधान और सचिव को डीएम ने जारी किया नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती विक्रमजोत ब्लाक क्षेत्र की तीन ग्राम पंचायतों में 29 लाख रुपये के गबन का मामला सामने में आया है। यह गबन 2013-14 में किया गया, जिसे जिला लेखा परीक्षा इकाई ने पकड़ा। ऑडिट इकाई की रिपोर्ट पर डीएम ने तीनों ग्राम पंचायतों में तत्कालीन ग्राम प्रधान और सचिव के खिलाफ वसूली की नोटिस जारी किया है। तीनों ग्राम पंचायतों के प्रधान और सचिव से गबन की आधी धनराशि वसूलने का निर्देश एडीएम और डीपीआरओ को दिया गया है। जिला लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां एवं पंचायत ने विकास खंड विक्रमजोत के लजघटा, कवलपुर और अकला में हुए 2013-14</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143510/dm-issues-notice-to-three-then-village-heads-and-secretary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/img-20240725-wa0164.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती विक्रमजोत ब्लाक क्षेत्र की तीन ग्राम पंचायतों में 29 लाख रुपये के गबन का मामला सामने में आया है। यह गबन 2013-14 में किया गया, जिसे जिला लेखा परीक्षा इकाई ने पकड़ा। ऑडिट इकाई की रिपोर्ट पर डीएम ने तीनों ग्राम पंचायतों में तत्कालीन ग्राम प्रधान और सचिव के खिलाफ वसूली की नोटिस जारी किया है। तीनों ग्राम पंचायतों के प्रधान और सचिव से गबन की आधी धनराशि वसूलने का निर्देश एडीएम और डीपीआरओ को दिया गया है। जिला लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां एवं पंचायत ने विकास खंड विक्रमजोत के लजघटा, कवलपुर और अकला में हुए 2013-14 के कार्यों की ऑडिट किया। ऑडिट इकाई ने अपनी रिपोर्ट डीएम को दी। रिपोर्ट के अनुसार तीनों ग्राम पंचायतों में बड़े पैमाने पर धन के गबन की स्थिति सामने आई।</div>
<div> </div>
<div>ग्राम पंचायत लजघटा की तत्कालीन प्रधान सरोज देवी और ग्राम पंचायत सचिव अनिल कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से ग्राम निधि प्रथम खाते से 762988 रुपये की निकासी की। ग्राम पंचायत कवलपुर में प्रधान तारा देवी और सचिव अनिल कुमार सिंह ने 986470 रुपये और ग्राम पंचायत अकला में प्रधान तुलसीराम और सचिव अनिल कुमार सिंह ने 1164991 रुपये की निकासी की थी। ऑडिट इकाई ने तीनों ग्राम पंचायतों के तत्कालीन प्रधान और तत्कालीन सचिव व्यय प्रमाणक, सामग्री क्रय से संबंधित बाऊचर, कैशबुक, एमबी रजिस्टर, भौतिक सत्यापन प्रमाण-पत्र, कार्यपूर्ति की मांग की।</div>
<div> </div>
<div>प्रधान और सचिवों ने बार-बार की मांग के बाद इसे उपलब्ध नहीं कराया। जांच के लिए अभिलेख प्राप्त नहीं होने पर ऑडिट इकाई ने संपूर्ण धनराशि को गबन माना और ग्राम प्रधान व सचिव से वसूली की संस्तुति कर दी। तीनों ग्राम पंचायतों में गबन की कुल धनराशि 29 लाख 14 हजार 459 रुपये है। ऑडिट इकाई की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने फरवरी 2023 में तीनों ग्राम पंचायतों के पूर्व प्रधान व तत्कालीन सचिव अनिल कुमार सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया। डीएम के नोटिस का भी किसी ने जवाब नहीं दिया। इससे स्पष्ट होता है कि तीनों ग्राम पंचायतों के लजघटा के प्रधान सरोज देवी, कलवपुर की तारा देवी और अकला के तुलसीराम और तीनों गांवों के सचिव अनिल कुमार सिंह ने धनराशि के गबन को स्वीकार कर लिया।</div>
<div> </div>
<div>डीएम रवीश गुप्ता ने उत्तर प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम 1947 में दिए गए प्राविधानों का प्रयोग करते हुए तीनों के ग्राम पंचायतों के पूर्व प्रधानों से गबन की धनराशि का आधा हिस्सा और तीनों के सचिवों से आधा हिस्सा जमा करने का निर्देश पारित किया है। एडीएम को दिए निर्देश में कहा गया है कि तीनों के ग्राम प्रधानों से वसूली की धनराशि भू-राजस्व के रूप में वसूला जाए। डीपीआरओ को निर्देशित किया गया है कि सचिव के वेतन से बकाया की धनराशि 12 प्रतिशत ब्याज के साथ वसूल की जाए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jul 2024 17:04:01 +0530</pubDate>
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