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                <title>Bribe - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>₹500 की रिश्वत पर जताई थी चिंता, अब ₹1 करोड़ के कथित रिश्वत मामले में IPS अधिकारी का नाम चर्चा में</title>
                                    <description><![CDATA[<h1><strong>₹500 की रिश्वत पर जताई थी चिंता, अब ₹1 करोड़ के कथित रिश्वत मामले में IPS अधिकारी का नाम चर्चा में</strong></h1>
<h2><strong>ईमानदारी और भ्रष्टाचार पर दिए पुराने बयान फिर चर्चा में, सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल</strong></h2>
<p><strong>खबर:अमित राघव (ब्यूरो चीफ)</strong></p>
<p><strong>रायपुर/छत्तीसगढ़।</strong> भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के <strong>2022 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के अधिकारी राहुल बंसल</strong> इन दिनों कथित तौर पर सामने आए <strong>₹1 करोड़ की रिश्वत से जुड़े मामले</strong> को लेकर चर्चा में हैं। इस प्रकरण के सामने आने के बाद उनका एक पुराना इंटरव्यू भी सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185240/%E2%82%B9500-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%A5%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BE--%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E2%82%B91-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-ips-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/screenshot_20260814_003313_whatsappbusiness.jpg" alt=""></a><br /><h1><strong>₹500 की रिश्वत पर जताई थी चिंता, अब ₹1 करोड़ के कथित रिश्वत मामले में IPS अधिकारी का नाम चर्चा में</strong></h1>
<h2><strong>ईमानदारी और भ्रष्टाचार पर दिए पुराने बयान फिर चर्चा में, सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल</strong></h2>
<p><strong>खबर:अमित राघव (ब्यूरो चीफ)</strong></p>
<p><strong>रायपुर/छत्तीसगढ़।</strong> भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के <strong>2022 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के अधिकारी राहुल बंसल</strong> इन दिनों कथित तौर पर सामने आए <strong>₹1 करोड़ की रिश्वत से जुड़े मामले</strong> को लेकर चर्चा में हैं। इस प्रकरण के सामने आने के बाद उनका एक पुराना इंटरव्यू भी सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर <strong>महज ₹500 की रिश्वत मांगे जाने पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।</strong></p>
<h2><strong>पुराने इंटरव्यू में ₹500 की रिश्वत का किया था जिक्र</strong></h2>
<p>बताया जाता है कि एक इंटरव्यू के दौरान राहुल बंसल ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा था कि <strong>किसी पंचायत अधिकारी से काम कराने के बदले उनसे ₹500 की रिश्वत मांगी गई थी।</strong> उन्होंने इस तरह की व्यवस्था पर चिंता जताते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी बात रखी थी।</p>
<p>उस समय उनका यह बयान <strong>प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख</strong> के तौर पर देखा गया था। हालांकि, अब कथित रिश्वत प्रकरण में उनका नाम सामने आने के बाद वही पुराना बयान एक बार फिर चर्चा में आ गया है।</p>
<h2><strong>अब ₹1 करोड़ की कथित रिश्वत के मामले से जुड़ा नाम</strong></h2>
<p>राहुल बंसल का नाम अब <strong>करीब ₹1 करोड़ की कथित रिश्वत के मामले</strong> से जोड़ा जा रहा है। इस प्रकरण में सामने आए आरोपों ने प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था में भ्रष्टाचार को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p>हालांकि, <strong>किसी भी अधिकारी के खिलाफ लगे आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।</strong> मामले में जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही आरोपों की वास्तविकता तय होगी।</p>
<h2><strong>कैमरे के सामने भ्रष्टाचार के खिलाफ कही थीं बड़ी बातें</strong></h2>
<p>राहुल बंसल के पुराने सार्वजनिक बयानों में <strong>भ्रष्टाचार, प्रशासनिक कमियों और व्यवस्था में सुधार</strong> जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई थी। वह भ्रष्टाचार को व्यवस्था के लिए गंभीर समस्या बताते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत पर जोर देते नजर आए थे।</p>
<p>अब जब कथित तौर पर उन्हीं पर <strong>करोड़ों रुपये की रिश्वत से जुड़े गंभीर आरोप</strong> सामने आए हैं, तो उनके पुराने बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।</p>
<h2><strong>सोशल मीडिया पर उठ रहा ‘₹500 बनाम ₹1 करोड़’ का सवाल</strong></h2>
<p>पुराने बयान और वर्तमान आरोपों को जोड़ते हुए सोशल मीडिया यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि <strong>जब ₹500 की कथित रिश्वत मांगना भ्रष्टाचार था, तो करोड़ों रुपये की कथित रिश्वत के आरोपों को किस नजर से देखा जाना चाहिए?</strong></p>
<p>हालांकि, सोशल मीडिया पर चल रही प्रतिक्रियाओं और आरोपों के बीच <strong>तथ्यों तथा आधिकारिक जांच के निष्कर्षों को प्राथमिकता देना जरूरी है।</strong> किसी भी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं है।</p>
<h2><strong>जांच के निष्कर्ष से साफ होगी पूरी तस्वीर</strong></h2>
<p>मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि <strong>₹1 करोड़ की कथित रिश्वत से जुड़े आरोपों के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं और जांच एजेंसियों के पास इसके संबंध में कौन-कौन से साक्ष्य मौजूद हैं।</strong> जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी अथवा अदालत के निष्कर्ष के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।</p>
<p>फिलहाल, <strong>पुराने ‘₹500 रिश्वत’ वाले बयान और मौजूदा ₹1 करोड़ के कथित रिश्वत प्रकरण के बीच का विरोधाभास</strong> सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 00:41:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अमित राघव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खुले आम डंके के चोट पर रिश्वत मांग रहा है लिपिक सौरभ दुबे आखिर किसके इशारे पर करता रहा अवैध वसूली।</title>
                                    <description><![CDATA[स्वीपर शनि कुमार से जीपीएफ एक लाख तीस हजार स्वीकृति के लिये माँग रहा था 20 हजार का रिश्वत में किसका कितना दोष]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143463/clerk-saurabh-dubey-is-openly-asking-for-bribe-after-being"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/1.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>निचले पायदान के कर्मचारियों के साथ हो रहा है अन्याय का आखिर है कौन जिम्मेदार।</strong></div>
<div> </div>
<div><strong>बलरामपुर </strong>जहां केंद्र और राज्य सरकार है सरकारी सेवाओं और सुविधाओं को लेकर लाखों और करोड़ों रुपए विभाग को प्रदान करती हैं जिससे तमाम व्यवस्थाएं दुरुस्त होने के साथ ही सरकारी कर्मचारियों के वेतन व अन्य सुविधाओं को लेकर भी पर्याप्त व्यवस्थाएं सरकार अपने कर्मचारियों को देती है। उसके बावजूद भी विभागों में विभागीय अधिकारियों की मनमानी और वसूली जैसे भ्रष्टाचार का खेल बराबर कायम है और इसी के चलते निम्न वर्गीय कर्मचारी को विभागीय अधिकारियों का शिकार बनना पड़ता है। जबकि पर्दे के पीछे से सारा लाभ भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को मिलता है और कमीशन के नाम पर उन अधीनस्त कर्मियों को भी कुछ हिस्सा दिया जाता है।</div>
<div> </div>
<div>जबकि किसी मामले के उजागर होने पर गाज इन कर्मियों पर ही गिरती है जिनके माध्यम से अधिकारी वसूली का खेल खेलता है ।जिसमे संबंधित विभाग के अधिकारी साफ-साफ बच जाते हैं। अगर इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग बलरामपुर की बात की जाय तो भ्रष्टाचार का बड़ा खेल लगातार विभाग के जिम्मेदार अधिकारी सीएमओ व अन्य के द्वारा खेला जा रहा है जहां पर नियुक्ति से लेकर दवाएं सप्लाई के साथ अन्य मामले में भी वसूली का खेल होता है और धन का बंदर बांट किया ही जाता है ।इसके साथ निम्न वर्ग के कर्मियों के साथ भी उनके वेतन से लेकर अन्य सुविधाओं को पाने के लिये भी चढ़ावा चढ़ाए बिना कार्य असम्भव है अगर काम करवाना है तो पैसा देना ही होगा की बात सामने आ रही है। </div>
<div> </div>
<div>जिसका एक बड़ा मामला जनपद बलरामपुर के श्री दत्तगंज विकासखंड में स्थित स्वास्थ केंद्र में उजागर हुआ है जहां पर एक सफाई कर्मी को अपना पीएफ बनवाने को लेकर संबंधित स्वास्थ्य विभाग के बाबू के द्वारा 20 हजार देने की बात कही जाती है जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही स्वास्थ्य विभाग में भूकंप आ गया है और इस मामले को लेकर आनन फानन में विभाग के अधिकारियों के द्वारा उस कर्मी का तबादला की कार्यवाही करते हुए मामले को शांत करने का प्रयास किया गया है।</div>
<div> </div>
<div>जबकि सूत्र बताते हैं कि संबंध में विभागीय जांच भी बैठाया जा चुकी है। जिसमें अवैध वसूली प्रक्रिया को लेकर जांच कर उस पर कार्रवाई करने की बात कही जा रही है। लेकिन सवाल यहां यह उठता है क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों के बिना स्वीकृति और मिलीभगत के ऐसा खेल हो सकता है जंहा बाबू इस प्रकार बेबाक रुपये की मांग करे जोकि अपने आप में एक जांच का बड़ा विषय है। </div>
<div> </div>
<div> इस बात की चर्चा मीडिया में काफी जोर शोर से होने के बाद अधिकारियों द्वारा कार्यवाही करने की बात सामने आई। जिसको लेकर मीडिया कर्मी चाहे वह टीवी चैनल का पत्रकार हो या डिजिटल मीडिया के साथ समाचार पत्र का पत्रकार हो जब वह ऐसे मामले को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों की बाइट लेने जाता है तो वहां कई घंटे बाहर बिठाने के बाद भी साहब अपना पक्ष नही बताते हुए उनको घण्टो फालतू बिठा वापस कर देते हैं।</div>
<div> </div>
<div>जबकि अक्सर समाचार चैनल में अधिकारियों का पक्ष के बिना खबर ही नहीं प्रकाशित की जाती है।वही अगर स्वास्थ्य विभाग के व्याप्त भ्रष्टाचार की बात करें तो कहीं मीडिया कर्मियों को अधिकारी पक्ष न बता विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की साजिश तो नही जिसके तहत मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी बलरामपुर पत्रकारों के सवालों से बचने के बहाने तो नहीं ढूंढ रहे है।आखिर क्या वजह है कि इस मामले में बाबू को ही दोषी ठहराया गया बाकी मुख्य घटनाक्रम के मुख्य आरोपी तक अब तक न कोई कार्रवाई हुई और न ही कोई जांच बिठाया गया है।</div>
<div> </div>
<div>पूरे मामले की बात की जाए तो जनपद बलरामपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र श्रीदत्त गंज का मामला बताया जा रहा है। जिसमे बहुत बड़े बड़े मामलों की जांच में लीपापोती होने की बात सामने आ रही है जिस कारण विभागीय भृष्टाचार के मामलों में कार्यवाही नहीं हुई। जबकि ऐसे तमाम मामले में छोटे कर्मचारी डर के कारण शिकायत तक नहीं करते और जो करते भी हैं उसमे कुछ होता नहीं के साथ सम्बन्धित विभाग के अधिकारियों से डरते हैं कि साहब कही हमारी नौकरी के लिये अभिशाप न बन जाये और हमें नौकरी से बाहर न कर दिया जाए।</div>
<div> </div>
<div>वायरल वीडियो की बात करे तो सौरभ दुबे जो लिपिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र श्रीदत्त गंज बलरामपुर में लिपिक के पद पर कार्यरत है जिनके द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मी स्वीपर से जीपीएस निकालने के लिए रिश्वत देने की बात की जारही है जिसमे एक लाख तीस हजार स्वीकृति के लिए बीस हजार की रिश्वत स्वास्थ विभाग का लिपिक मांग रहा है। और साफ साफ इसकी चर्चा है कि बिना पैसे के कार्य नही होगा साहब को देना है इस काम के लिये तब ही काम होगा ।</div>
<div> </div>
<div>मामला जब शोसल मीडिया के माध्यम से उजागर हुआ तब आनन फानन उन्ही स्वास्थ विभाग के अधिकारियों के द्वारा जिनके कमाई का माध्यम वह बाबू रहा उस पर कार्यवाही करते हुए जांच टीम गठित करने के साथ कर्मी का ट्रांसफर अन्य स्वास्थ केंद्र सादुल्ला नगर कर दिया जाता है और मामले पर बर्फ डाल दी जाती है लेकिन सवाल यह उठता है कि इस वसूली प्रकरण में मुख्य सरगना कौन है और किसके इशारे पर अवैध वसूली का खेल विभाग के कर्मियों द्वारा किया जा रहा जिसमे अपने ही विभाग के निम्न स्तर के कर्मियों को भी नही बख्शा गया।</div>
<div> </div>
<div>फिर आम जनता के साथ आखिर स्वास्थ सेवाओ को लेकर कितनी और किससे करनी है जिससे साहब का पेट भर सके। ऐसे ही बिभागीय मामलों में सम्बंधित स्वास्थ विभाग के जिम्मेदार अपना बचाव करते हुए अधिनस्त पर गाज गिरा खुद को पारसा बता रहे लेकिन ऐसे मामलों में मीडिया के सामने आने से ही उनको दहशत होती है कि कही सच न सामने आ जाये।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jul 2024 16:31:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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