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                <title>मानसून में फलदार वृक्षों की गुठलियाँ लगाएँ, पर्यावरण की सुरक्षा करें योगेंद्र कुमार सह अधीक्षक तिहाड़ जेल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">हम सभी जानते हैं कि फल खाने वाले पक्षियों की संख्या दिल्ली में लगातार घटती जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण फलदार वृक्षों की लगातार कम होती संख्या है। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने मित्रों के साथ वर्ष 2012 में फलदार वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की।हम अपने स्वयं के पैसों से फलदार पौधे खरीदकर लगाते थे। उस समय 3–4 फीट ऊँचे एक स्वस्थ पौधे की कीमत लगभग ₹100 से ₹150 होती थी, जिससे यह अभियान काफी खर्चीला था।फिर एक दिन मेरे मन में विचार आया कि क्यों न मानसून के दौरान फलों की</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182461/plant-kernels-of-fruit-trees-in-monsoon-and-protect-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260627-wa0005.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हम सभी जानते हैं कि फल खाने वाले पक्षियों की संख्या दिल्ली में लगातार घटती जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण फलदार वृक्षों की लगातार कम होती संख्या है। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने मित्रों के साथ वर्ष 2012 में फलदार वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की।हम अपने स्वयं के पैसों से फलदार पौधे खरीदकर लगाते थे। उस समय 3–4 फीट ऊँचे एक स्वस्थ पौधे की कीमत लगभग ₹100 से ₹150 होती थी, जिससे यह अभियान काफी खर्चीला था।फिर एक दिन मेरे मन में विचार आया कि क्यों न मानसून के दौरान फलों की गुठलियाँ और बीज ही लगाए जाएँ। हमने इस विचार को व्यवहार में उतारा और वर्षा ऋतु में बड़ी संख्या में जामुन, आम, इमली, बेर तथा अन्य फलदार वृक्षों की गुठलियाँ बोईं। अगले मानसून तक उनसे लगभग ढाई से तीन फीट ऊँचे स्वस्थ पौधे तैयार हो गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद हमने इन पौधों का निःशुल्क वितरण शुरू किया और स्वयं भी उन्हें उपयुक्त स्थानों पर रोपित किया। आज हमारा पौधारोपण अभियान पूरी तरह निःशुल्क है।मैं आप सभी से भी विनम्र आग्रह करता हूँ कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार इस मानसून में फलों की गुठलियाँ और बीज अवश्य लगाएँ। अगले वर्ष मानसून में तैयार पौधों को किसी उपयुक्त स्थान पर रोपित करें। बिना किसी बड़े खर्च के हम सभी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।पिछले वर्ष तिहाड़ जेल के बंदियों एवं स्टाफ के सहयोग से हमने बड़ी संख्या में जामुन की गुठलियाँ लगाई थीं, जो आज 2–3 फीट ऊँचे पौधों में विकसित हो चुकी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष मानसून के दौरान दिल्ली सरकार के 'वन महोत्सव' अभियान में हम इन पौधों का निःशुल्क वितरण करेंगे तथा उन्हें उपयुक्त स्थानों पर रोपित भी करेंगे।फलदार वृक्ष लगाने के अनेक लाभ हैं। ये न केवल पर्यावरण को हरा-भरा बनाते हैं, बल्कि फल खाने वाले सुंदर पक्षियों को भी पुनः उनके प्राकृतिक आवास में लौटने का अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही हमें भी बिना किसी रासायनिक प्रक्रिया के ताज़े और पौष्टिक फल प्राप्त होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त ये वृक्ष प्रदूषण कम करने, वातावरण को शुद्ध रखने तथा भरपूर ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।आइए, इस मानसून एक संकल्प लें—हर घर, हर परिवार और हर नागरिक कम से कम एक फलदार वृक्ष की गुठली अवश्य लगाए। यही छोटा-सा प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वच्छ और समृद्ध पर्यावरण की नींव बनेगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:54:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> देश के लिए संविधान उतना ही जरूरी है जितना कि किसी जीव के लिये ऑक्सीजन - कर्रार हुसैन रिज़वी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>कौशाम्बी। </strong>जनपद के करारी कस्बा स्थित डॉ० रिज़वी स्प्रिंगफील्ड स्कूल में रविवार को गणतंत्र दिवस  हर्षोल्लास से मनाया गया। छात्र छात्राओं द्वारा वीर सपूतों का अभिनय प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती एवं महापुरूषों की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलन व पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।  डॉ० रिज़वी एजुकेशन ट्रस्ट के सचिव कर्रार हुसैन रिज़वी द्वारा ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद इसके बाद उन्होंने अध्यापक और छात्रों को सम्बोधित करते हुए बताया कि किसी देश के लिए संविधान उतना ही जरूरी है जितना कि किसी जीव के लिए ऑक्सीजन।</div>
<div>  </div>
<div>दुनिया मे ऐसे भी देश है जहाँ संविधान बनाने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147912/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/img-20250127-wa0001.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>कौशाम्बी। </strong>जनपद के करारी कस्बा स्थित डॉ० रिज़वी स्प्रिंगफील्ड स्कूल में रविवार को गणतंत्र दिवस  हर्षोल्लास से मनाया गया। छात्र छात्राओं द्वारा वीर सपूतों का अभिनय प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती एवं महापुरूषों की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलन व पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।  डॉ० रिज़वी एजुकेशन ट्रस्ट के सचिव कर्रार हुसैन रिज़वी द्वारा ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद इसके बाद उन्होंने अध्यापक और छात्रों को सम्बोधित करते हुए बताया कि किसी देश के लिए संविधान उतना ही जरूरी है जितना कि किसी जीव के लिए ऑक्सीजन।</div>
<div> </div>
<div>दुनिया मे ऐसे भी देश है जहाँ संविधान बनाने में लापरवाही हुई थी आज भी वहां अशान्ति का माहौल है। संविधान देश के सभी नागरिक को उनके कर्तव्य और दायरे में रहने के लिए बाध्य करता है। जिससे देश मे सभी नागरिकों को उनका अधिकार मिल पाता है। इसके बाद कार्यक्रमों की श्रृंखला में विद्यार्थियों ने देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत देशभक्ति गीत, लघु नाटिका, काव्यपाठ, भाषण आदि प्रस्तुत किए। कार्यक्रम इतने मनमोहक रहे कि वहाँ उपस्थित सभी दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।</div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। कार्यक्रम के अन्त मे विद्यालय के प्रधानाचार्य धर्मेन्द्र कुमार ने सभी उपस्थित सभी दर्शको को धन्यवाद प्रेषित किया साथ भी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। इस मौके पर विद्यालय के अध्यापक एवम छात्र छात्राएं मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jan 2025 19:06:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>   वृक्षारोपण : अब नहीं तो कब ? </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>उस कोरोना काल को </strong><strong>याद कीजिये </strong><strong>जब कोविड प्रभावित लोग ऑक्सीजन के बिना तड़प तड़प कर मर रहे थे। पैसे ख़र्च करने पर भी ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही थी। देश के तमाम ऑक्सीजन प्लांट्स के फ़ेल होने की ख़बरें सुनाई दे रही थीं। शमशान घाट लाशों से पटे पड़े थे। नदियों में लावारिस लाशें तैरती नज़र आ रही थीं। उसी दौरान अनेक समझदार लोग ऐसे भी थे जिन्होंने  पेड़ों पर अपना डेरा बना लिया था। कोई पेड़ के ऊपर चारपाई बांध कर लेटा बैठा रहता था तो तमाम लोग शुद्ध व ताज़ी ऑक्सीजन की चाह में पेड़ों के नीचे</strong></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143424/%C2%A0%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/tree-planting.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>उस कोरोना काल को </strong><strong>याद कीजिये </strong><strong>जब कोविड प्रभावित लोग ऑक्सीजन के बिना तड़प तड़प कर मर रहे थे। पैसे ख़र्च करने पर भी ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही थी। देश के तमाम ऑक्सीजन प्लांट्स के फ़ेल होने की ख़बरें सुनाई दे रही थीं। शमशान घाट लाशों से पटे पड़े थे। नदियों में लावारिस लाशें तैरती नज़र आ रही थीं। उसी दौरान अनेक समझदार लोग ऐसे भी थे जिन्होंने  पेड़ों पर अपना डेरा बना लिया था। कोई पेड़ के ऊपर चारपाई बांध कर लेटा बैठा रहता था तो तमाम लोग शुद्ध व ताज़ी ऑक्सीजन की चाह में पेड़ों के नीचे पनाह लेने को मजबूर थे। उस दौर में देश के लाखों ग्रामीणों ने तो बग़ीचों में ही अपना लगभग स्थाई अड्डा बना लिया था। गोया महामारी जैसे संकट के उस दौर में भी प्रकृति हमें पेड़ों व दरख़्तों के माध्यम से निःशुल्क ऑक्सीजन प्रदान कर रही थी। एक युवा पेड़ हमें एक वर्ष में लगभग 7 क्विंटल ऑक्सीजन प्रदान करता है जबकि हमारे लिये हानिकारक व हमारे ही द्वारा विभिन्न माध्यमों से छोड़ी जाने वाली लगभग 20 टन कॉर्बन डाई ऑक्साइड को भी खींच (सोख ) लेता है।</strong></div>
<div> </div>
<div><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-07/tree-plantation.jpg" alt="tree plantation" width="1920" height="441"></img>आज पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग का शिकार है। गत दस वर्षों से पृथ्वी के लगातार बढ़ते तापमान के कारण पूरे विश्व में ग्लेशियर पिघलने लगे हैं।आदिवासियों से उनके जल जंगल ज़मीनों के अधिकार छीन कर उद्योगपतियों के हवाले किये जा रहे हैं। ब्राज़ील से लेकर भारत तक बड़े पैमाने पर विकास के नाम पर वृक्षों की कटाई की जा रही है।मिसाल के तौर पर मध्य भारतीय राज्य छत्तीसगढ़ में हसदेव अरण्य वन के लाखों पेड़ अडानी द्वारा संचालित परसा ईस्ट केते बासेन कोयला खदान के विस्तार के लिये स्थानीय ग्रामीणों व आदिवासियों के प्रबल विरोध के बावजूद पुलिस बल की निगरानी में काटे जा रहे हैं। जबकि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पर्यावरण दिवस पर 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान का संकल्प लिया है। प्रचार के अनुसार इसी अभियान के तहत मध्यप्रदेश में साढ़े पांच करोड़ पौधे लगाए जाएंगे और इसी क्रम में 51 लाख पौधे केवल इंदौर में लगाये जाने की योजना है। इस समय देश का शायद ही कोई ऐसा विभाग हो जिसने वृक्षारोपण को लेकर सक्रियता न दिखाई हो। </strong></div>
<div> </div>
<div><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-07/tree-planting4.webp" alt="Tree planting4" width="744" height="495"></img>इसका एक प्रमुख कारण यह है कि इस वर्ष गर्मी का जितना प्रकोप भारत सहित पूरी दुनिया ने झेला उतनी प्रचंड गर्मी पहले कभी नहीं देखनी व सहनी पड़ी। पूरे विश्व में लाखों लोग तेज़ गर्मी की तपिश सहन न करते हुये तड़प कर मर गये। इसलिये इस भीषण गर्मी में भी लोगों को वृक्षों ने आकर्षित किया तथा पेड़ों ने अपनी ज़रूरत का एहसास कराया। ग़ौरतलब है कि एक बड़े वृक्ष के नीचे औसतन चार डिग्री तापमान कम रहता है। साथ ही यही वृक्ष तेज़ धूप की तपिश से भी बचाता है। वर्तमान युग में बढ़ती गर्मी का एक कारक प्रदूषण भी है। प्रदूषण में धुएं के अतिरिक्त धूल मिटटी शोर ग़ुल यानि ध्वनि प्रदूषण का भी अहम योगदान है। परन्तु एक स्वस्थ वृक्ष एक वर्ष में न केवल 20 किलोग्राम से अधिक धूल मिट्टी अपने आप में सोख लेता है बल्कि शोर ग़ुल यानि ध्वनि प्रदूषण को भी कम करता है। इतना ही नहीं बल्कि यही वृक्ष क़रीब 1 लाख वर्ग मीटर प्रदूषित हवा का भी निस्पंदन करता है। यही वृक्ष 80 किलोग्राम पारा, लीथियम व लेड जैसी ज़हरीली धातुओं के मिश्रण को भी सोखने की क्षमता रखता है।                      </strong></div>
<div> </div>
<div><strong> पेड़ पौधों की अहमियत को वैसा तो कोविड काल ने ही लोगों को ठीक से समझा दिया था। ख़ासकर शहरी जीवन बिताने वाले लोगों को तो कुछ ज़्यादा ही। क्योंकि कोविडकाल के बाद पूरे देश में शहरी इलाक़ों में गमलों व इनमें पौधे लगाने का चलन पहले से कई गुना ज़्यादा बढ़ गया है। पक्की फ़र्श वाले मकानों में रखे हुये पर्याप्त मात्रा में गमले में लगे पौधे बेशक एक घर के तापमान को तो नियंत्रित करने व ऑक्सीजन देने की क्षमता तो रखते  ही हैं। यह कोविड काल की ही दहशत है जिसके चलते पूरे देश में प्लास्टिक,मिटटी व सीमेंट के गमलों तथा नर्सरीज़ में पौधों की बिक्री कोविड काल के बाद कई गुना अधिक हो चुकी है। </strong></div>
<div> </div>
<div><strong>वृक्षों का बादलों से भी गहरा नाता है। आम तौर पर रेगिस्तानी क्षेत्रों में बारिश इसलिए नहीं होती या अत्यधिक कम होती है क्योंकि वहां पर्याप्त संख्या में वृक्ष नहीं होते। </strong><strong>जबकि दुनिया में अनेक घने जंगलों के इलाक़े ऐसे भी हैं जहाँ घने जंगलों के कारण अत्यधिक वर्षा होती है। ऐसे घने जंगलों को वर्षावन भी कहा जाता है। गोया वृक्ष,बादल ,बारिश हरियाली मानव जीवन और ख़ुशहाली का आपस में एक दूसरे से सीधा नाता है। नदी नालों के कटाव को रोकने में भी वृक्ष अहम भूमिका अदा करते हैं। यानी बाढ़ रोकने में सहायक होते हैं। हमें अध्ययन करने से तो यहाँ तक पता चलता है कि समुद्री किनारों पर पाए जाने वाले मैंग्रोज़ के पेड़ व इन के घने जंगल सुनामी की गति को नियंत्रित करने तक का काम करते हैं। इतना ही नहीं बल्कि यह समुद्री क्षेत्र के विस्तार को भी रोकते हैं। जबकि इन पेड़ों की आधी जड़ें भी धरातल  के ऊपर होती हैं।</strong></div>
<div> </div>
<div><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-07/tree-planting5.jpg" alt="Tree planting5" width="1200" height="675"></img>बहरहाल,वृक्षारोपण को इस समय मानव जीवन के अस्तित्व से जोड़कर देखने की ज़रुरत है। किसी सरकार,शासन या प्रशासन की तरफ़ मुंह देखने के बजाये जनता को स्वयं इसे जनांदोलन के रूप में लेना होगा और अपनी आदतों में शामिल करना होगा। याद रहे कि सरकारें वृक्षारोपण का शोर कर सकती हैं,इसपर चलाये जाने वाले अभियान का प्रचार कर सकती हैं,इसके नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा सकता है। और तो और लगे लगाये दरख़्तों व जंगलों को कार्पोरेट्स के हित में कटवाने की भागीदार भी हो सकती हैं। विज्ञापनों व साक्षात्कार के माध्यम से इसके महत्व का बखान कर सकती हैं परन्तु चूँकि यह 'वोट बैंक ' से जुड़ा विषय नहीं इसलिये इसके प्रति उतनी गंभीरता नहीं दिखातीं जितनी कि ज़रूरत है। </strong></div>
<div> </div>
<div><strong>लिहाज़ा आज देश के प्रत्येक नागरिक को चाहे वह बच्चा,बूढ़ा,जवान महिला कोई भी हो उसे वृक्षारोपण को अपनी आदतों में शामिल करना होगा। स्वयं उसकी देखभाल व निगरानी करनी होगी।मां के नाम का केवल एक पेड़ ही काफ़ी नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को ख़ासतौर पर वर्षाऋतु में जहाँ और जितने हो सकें अधिकतम वृक्ष लगाने होंगे। इसी अपने जीवन की दैनिक गतिविधियों में शामिल किये जाने की ज़रुरत है। शादी विवाह,मरना जीना ,जन्मदिन मरणदिन विवाह अथवा जन्म या मृत्यु की सालगिरह बरसी प्रत्येक अवसर को यादगार बनाने हेतु हर इन अवसरों पर वृक्षारोपण करें। यदि धरती के बढ़ते तापमान के दौर में वृक्षारोपण के प्रति अब भी हम गंभीर व सक्रीय नहीं हुये तो और कब होंगे ?</strong> </div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:large;"><strong>  तनवीर जाफ़री</strong></span></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2024 16:35:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेड़ से मिलने वाली आक्सीजन जीवन का आधार,पेड़ लगाए,भविष्य के लिए आक्सीजन की व्यवस्था बनाए:राम सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[<div>यूपी के कौशाम्बी जिले के नगर पालिका परिषद भरवारी के वार्ड 25 पं दीनदयाल उपाध्याय नगर स्थित पक्का तालाब परिसर में गुरुवार को नगर पालिका प्रशासन द्वारा पर्यावरण के हित में पौधरोपण किया गया। इस मौके पर नगर पालिका ईओ राम सिंह ने नगर के लोगो से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए पौधरोपण करने की और उन्हें पेड़ के रूप में तैयार होने तक सुरक्षा करने की भी अपील की है।</div>
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<div>शासन के निर्देश पर इन दिनों जिले भर में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने को लेकर पौधरोपण अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को नगर पालिका</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143366/oxygen-provided-by-trees-is-the-basis-of-life-plant"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/screenshot_2024_0719_152303.jpg" alt=""></a><br /><div>यूपी के कौशाम्बी जिले के नगर पालिका परिषद भरवारी के वार्ड 25 पं दीनदयाल उपाध्याय नगर स्थित पक्का तालाब परिसर में गुरुवार को नगर पालिका प्रशासन द्वारा पर्यावरण के हित में पौधरोपण किया गया। इस मौके पर नगर पालिका ईओ राम सिंह ने नगर के लोगो से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए पौधरोपण करने की और उन्हें पेड़ के रूप में तैयार होने तक सुरक्षा करने की भी अपील की है।</div>
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<div>शासन के निर्देश पर इन दिनों जिले भर में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने को लेकर पौधरोपण अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को नगर पालिका परिषद भरवारी में मूरतगंज स्थित पक्का तालाब परिसर में पौधरोपण अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान तालाब परिसर में विभिन्न प्रकार के पौधों का रोपण किया गया। साथ ही लगाए गये पौधों का संवर्धन करें और प्रकृति को हरा भरा बनाए।</div>
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<div>इस दौरान ईओ रामसिंह ने कहा कि पेड़ पृथ्वी का श्रृंगार व जीवन का आधार है। हमे न केवल पौध रोपित करना चाहिए बल्कि पेड़ के रूप में तैयार कर इनकी रक्षा करने का संकल्प भी लेना चाहिए पौधा रोपण कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष कविता पासी,लेखा लिपिक बब्लू गौतम, सभासद शादाब सिद्दीकी, सभासद प्रतिनिधि घनश्याम पासी, सभासद मोहम्मद यासीन सहित नगर पालिका के तमाम कर्मचारी भी मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jul 2024 16:33:38 +0530</pubDate>
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