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                <title>xi jinping - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>xi jinping RSS Feed</description>
                
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                <title>अमेरिकी हमलों के बावजूद अडिग ईरान : मिसाइल ताकत बरकरार, दबाव के सामने झुकने को तैयार नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां हर बयान और हर सैन्य गतिविधि पूरी दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित कर रही है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब केवल दो देशों का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक प्रभुत्व की लड़ाई का रूप ले चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लगातार यह दावा कर रहे हैं कि ईरान की सैन्य क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है और अमेरिकी हमलों ने उसकी कमर तोड़ दी है। लेकिन अमेरिकी खुफिया रिपोर्टें ही अब इन दावों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179243/irans-missile-power-intact-despite-us-attacks-not-ready-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images9.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां हर बयान और हर सैन्य गतिविधि पूरी दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित कर रही है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब केवल दो देशों का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक प्रभुत्व की लड़ाई का रूप ले चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लगातार यह दावा कर रहे हैं कि ईरान की सैन्य क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है और अमेरिकी हमलों ने उसकी कमर तोड़ दी है। लेकिन अमेरिकी खुफिया रिपोर्टें ही अब इन दावों पर सवाल खड़े करती दिखाई दे रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार ईरान की मिसाइल क्षमता अब भी काफी हद तक सुरक्षित है और उसके अंडरग्राउंड नेटवर्क को अपेक्षित नुकसान नहीं पहुंचा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">खुफिया आकलनों के मुताबिक ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल जखीरे का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा बचाने में सफल रहा है। इतना ही नहीं, उसके 90 प्रतिशत भूमिगत मिसाइल स्टोरेज और लॉन्च नेटवर्क अब भी सक्रिय स्थिति में हैं। यह तथ्य इस बात का संकेत है कि ईरान ने वर्षों से जिस रणनीतिक तैयारी पर काम किया था, वह अमेरिकी हमलों के बावजूद पूरी तरह ध्वस्त नहीं हुई। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित मिसाइल ठिकानों तक ईरान ने दोबारा पहुंच बना ली है। यह वही क्षेत्र है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार गुजरता है। यदि यहां अस्थिरता बढ़ती है, तो पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उसका असर पड़ सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अमेरिका की सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती यही है कि वह तकनीकी और सैन्य रूप से दुनिया की सबसे शक्तिशाली ताकत होने के बावजूद ईरान की “असममित युद्ध नीति” को पूरी तरह समाप्त नहीं कर पा रहा। ईरान ने पारंपरिक युद्ध के बजाय ऐसे नेटवर्क तैयार किए हैं जो भूमिगत सुरंगों, मोबाइल लॉन्चरों और विकेंद्रीकृत मिसाइल ठिकानों पर आधारित हैं। यही कारण है कि अमेरिकी हमलों के बाद भी ईरान की जवाबी क्षमता खत्म नहीं हुई। रिपोर्टों के अनुसार उसके लगभग 70 प्रतिशत मोबाइल लॉन्चर सुरक्षित हैं। इन लॉन्चरों की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इन्हें किसी भी इलाके में ले जाकर अचानक हमला किया जा सकता है। इससे विरोधी देश लगातार अनिश्चितता और दबाव में रहते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ईरान की रणनीति केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं है। उसने पिछले दो दशकों में अपने रक्षा ढांचे को इस प्रकार विकसित किया है कि बाहरी हमलों की स्थिति में भी उसका कमांड और कंट्रोल सिस्टम सक्रिय बना रहे। अमेरिकी और इजरायली हमलों के खतरे को देखते हुए ईरान ने अपने मिसाइल नेटवर्क को पहाड़ों के भीतर और भूमिगत सुरंगों में स्थापित किया। यही वजह है कि अत्याधुनिक बमबारी के बावजूद अमेरिका उसकी पूरी सैन्य क्षमता को नष्ट नहीं कर पाया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राष्ट्रपति ट्रम्प का यह कहना कि “ईरान के सामने केवल दो रास्ते हैं—समझौता या पूर्ण विनाश”, राजनीतिक रूप से भले ही आक्रामक संदेश हो, लेकिन वास्तविकता कहीं अधिक जटिल दिखाई देती है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह दबाव की राजनीति के आगे झुकने वाला नहीं है। उसने समझौते के बदले युद्ध क्षतिपूर्ति, प्रतिबंधों में राहत, जब्त संपत्तियों की वापसी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता की मान्यता जैसी शर्तें रखी हैं। यह दिखाता है कि ईरान खुद को कमजोर स्थिति में नहीं मानता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ईरान की इस निडरता के पीछे केवल सैन्य तैयारी ही नहीं, बल्कि उसकी वैचारिक और राजनीतिक सोच भी जिम्मेदार है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान ने खुद को पश्चिमी दबाव के खिलाफ प्रतिरोध की शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है। अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों, राजनीतिक अलगाव और सैन्य दबाव के बावजूद उसने अपनी मिसाइल और परमाणु क्षमताओं को लगातार विकसित किया। यही कारण है कि अमेरिकी हमलों के बाद भी वहां की सत्ता व्यवस्था या सैन्य संरचना में कोई बड़ा टूटाव दिखाई नहीं देता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय पहलू भी है। ट्रम्प का चीन दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका चाहता है कि शी जिनपिंग ईरान पर दबाव डाले। चीन और ईरान के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक संबंध मजबूत रहे हैं। चीन पश्चिम एशिया में स्थिरता चाहता है क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है। ऐसे में अमेरिका चीन को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि चीन खुलकर अमेरिकी रणनीति का समर्थन करेगा, इसकी संभावना कम दिखाई देती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ईरान के मुद्दे ने वैश्विक व्यापार को भी प्रभावित किया है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। दुनिया के लगभग एक तिहाई समुद्री तेल व्यापार का रास्ता इसी क्षेत्र से गुजरता है। ईरान कई बार संकेत दे चुका है कि यदि उसके खिलाफ सैन्य दबाव बढ़ाया गया तो वह इस मार्ग को बाधित कर सकता है। यही कारण है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक दबाव बनाए रखने की नीति अपना रहे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दूसरी ओर, अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य संरचना का बचा रहना अमेरिकी रणनीति पर भी सवाल खड़े करता है। अमेरिका ने इराक, अफगानिस्तान और लीबिया जैसे देशों में बड़े सैन्य अभियान चलाए, लेकिन लंबे समय में वहां स्थिरता स्थापित नहीं कर पाया। ईरान का मामला उससे भी अधिक जटिल है, क्योंकि यहां मजबूत राष्ट्रवादी भावना, संगठित सैन्य ढांचा और क्षेत्रीय सहयोगी नेटवर्क मौजूद हैं। लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूती और इराक-सीरिया के कई सशस्त्र समूह ईरान के प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा माने जाते हैं। इसलिए ईरान पर हमला केवल एक देश के खिलाफ कार्रवाई नहीं बल्कि पूरे क्षेत्रीय समीकरण को प्रभावित कर सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ईरान की मिसाइल क्षमता का बरकरार रहना यह भी दर्शाता है कि आधुनिक युद्ध केवल हवाई हमलों से नहीं जीते जा सकते। तकनीकी श्रेष्ठता के बावजूद जमीनी तैयारी, नेटवर्क आधारित रक्षा और रणनीतिक धैर्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। ईरान ने यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि कोई देश लंबे समय तक योजनाबद्ध तरीके से अपनी रक्षा नीति तैयार करे तो वह महाशक्तियों के सामने भी टिक सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आज की स्थिति में अमेरिका सैन्य दबाव के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान अपने अस्तित्व और संप्रभुता की लड़ाई के रूप में इसे प्रस्तुत कर रहा है। यही कारण है कि अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान के भीतर भय या आत्मसमर्पण का माहौल नहीं दिखाई देता। बल्कि उसकी प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि वह लंबे संघर्ष के लिए तैयार है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में शांति फिलहाल दूर नजर आती है। यदि बातचीत का रास्ता नहीं निकला तो आने वाले समय में यह टकराव और व्यापक रूप ले सकता है। लेकिन फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अमेरिका के लगातार हमलों और धमकियों के बावजूद ईरान की सैन्य और राजनीतिक इच्छाशक्ति पूरी तरह टूटी नहीं है। उसकी मिसाइल क्षमता का बड़ा हिस्सा सुरक्षित रहना इस बात का प्रमाण है कि यह संघर्ष केवल ताकत का नहीं, बल्कि रणनीति, धैर्य और राजनीतिक संकल्प का भी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 21:11:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अरुणाचल पर भारत के सख़्त रुख से भड़का चीन, तकनीकी व निवेश सहयोग पर लगाने लगा ब्रेक</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>भारत और चीन के बीच संबंध एक बार फिर तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गए हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक भारतीय महिला को शंघाई हवाई अड्डे पर “अवैध पासपोर्ट” के आरोप में रोकने की घटना के बाद भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद बीजिंग के तेवर और भी सख्त दिखाई देने लगे हैं। इसका सीधा असर दोनों देशों के आर्थिक सहयोग, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी सेक्टर पर देखने को मिल रहा है।</p>
<h3><strong>शंघाई एयरपोर्ट पर रोक ने बढ़ाया विवाद</strong></h3>
<p>अरुणाचल प्रदेश की नागरिक पेमा वांगजोम थोंगडोक को 18 घंटे तक शंघाई एयरपोर्ट पर रोकना चीन के पुराने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161782/china-enraged-by-indias-tough-stance-on-arunachal-started-putting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/अरुणाचल-पर-भारत-के-सख़्त-रुख-से-भड़का-चीन,-तकनीकी-व-निवेश-सहयोग-पर-लगाने-लगा-ब्रेक.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>भारत और चीन के बीच संबंध एक बार फिर तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गए हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक भारतीय महिला को शंघाई हवाई अड्डे पर “अवैध पासपोर्ट” के आरोप में रोकने की घटना के बाद भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद बीजिंग के तेवर और भी सख्त दिखाई देने लगे हैं। इसका सीधा असर दोनों देशों के आर्थिक सहयोग, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी सेक्टर पर देखने को मिल रहा है।</p>
<h3><strong>शंघाई एयरपोर्ट पर रोक ने बढ़ाया विवाद</strong></h3>
<p>अरुणाचल प्रदेश की नागरिक पेमा वांगजोम थोंगडोक को 18 घंटे तक शंघाई एयरपोर्ट पर रोकना चीन के पुराने दावे—अरुणाचल को “दक्षिण तिब्बत” बताने—की एक और झलक माना जा रहा है। भारत ने घटना को अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा नियमों और चीन के अपने नियमों का उल्लंघन बताया है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि <em>अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और चीन की किसी भी टिप्पणी से यह तथ्य बदलने वाला नहीं है।</em> भारत की यह तीखी प्रतिक्रिया बीजिंग को साफ संदेश देती है कि नागरिकों की वैध पहचान पर सवाल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।</p>
<p>इसके विपरीत, चीन ने न तो हिरासत मानने को तैयार हुआ और न ही अपने विवादित दावे से पीछे हटा। विशेषज्ञों का मानना है कि पासपोर्ट संबंधी इन निर्देशों का मकसद अपने भू-राजनीतिक दावों को व्यावहारिक स्तर पर लागू करना है।</p>
<hr />
<h3><strong>भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की राह में चीन का अड़ंगा</strong></h3>
<p>तनाव केवल कूटनीतिक नहीं है; इसका असर आर्थिक सहयोग पर भी दिख रहा है। भारतीय कंपनियों की चीन से तकनीकी साझेदारी और निवेश के कई प्रस्ताव अटके पड़े हैं।</p>
<p><strong>निम्नलिखित प्रोजेक्ट महीनों से रुके हुए हैं—</strong></p>
<ul>
<li>
<p><strong>PG Electroplast</strong> की तकनीकी साझेदारी</p>
</li>
<li>
<p><strong>Hisense</strong> द्वारा भारतीय यूनिट में 26% हिस्सेदारी लेने की योजना</p>
</li>
<li>
<p><strong>Bharti Group</strong> का <strong>Haier India</strong> में 49% अधिग्रहण</p>
</li>
</ul>
<p>चीन इन प्रोजेक्ट्स पर कड़ा मूल्यांकन इसलिए कर रहा है क्योंकि 2020 की सीमा झड़पों के बाद भारत ने <em>Press Note 3</em> लागू किया था, जिसके तहत पड़ोसी देशों के निवेश पर सरकारी मंजूरी अनिवार्य है। बीजिंग इसे राजनीतिक संदेश के रूप में देखता है और अब वही सख्ती भारत के लिए अपना रहा है।</p>
<p>परिणामस्वरूप भारतीय उद्योग दोहरी मुश्किल में है—<br />एक ओर भारतीय निर्माण (Manufacturing) और वैल्यू एडिशन बढ़ाने के लिए चीन की तकनीक और मशीनरी आवश्यक है, दूसरी ओर चीन की मंजूरियों में अनिश्चितता बढ़ गई है।</p>
<hr />
<h3><strong>तनाव का बड़ा अर्थ—संबंधों में 'विश्वसनीयता' की कमी</strong></h3>
<p>ताज़ा घटनाक्रम यह स्पष्ट करता है कि भारत-चीन संबंधों में सुधार केवल बातचीत या आर्थिक प्रलोभनों से नहीं हो सकता। संप्रभुता, सुरक्षा, और राजनीतिक दावे हमेशा प्रमुख भूमिका निभाते हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मत है कि—</p>
<ul>
<li>
<p>भारत को हर ऐसे मामले को <strong>ICAO, IATA और वैश्विक मंचों</strong> पर उठाना चाहिए।</p>
</li>
<li>
<p>चीन द्वारा तकनीकी सहयोग में देरी भारत के लिए अपना <strong>स्थानीय टेक इकोसिस्टम मजबूत करने का अवसर</strong> भी है।</p>
</li>
<li>
<p>PLI स्कीम और R&amp;D निवेश को अब रणनीतिक प्राथमिकता देनी होगी।</p>
</li>
<li>
<p>कूटनीति जारी रहे, लेकिन स्पष्ट <em>लाल रेखाओं</em> के साथ।</p>
</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Nov 2025 18:10:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की बना रहे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की योजना</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>रूस-यूक्रेन युद्ध का एक वर्ष पूरा होने पर भी यूक्रेनी लड़ाके मैदान में रूसी सेना के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं। इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की योजना बना रहे हैं। इससे पहले जेलेंस्की के कार्यालय ने कहा था कि यह युद्ध और भी विनाशकारी हो सकता है और यूक्रेनी सेना इससे निपटेगी। उधर, रूस ने दोनबास के पूर्वी औद्योगिक क्षेत्र के सभी हिस्सों पर कब्जा करने के लिए अपना अभियान और तेज करते हुए लगातार गोलाबारी कर रहा है। विशेषज्ञों ने भी चेताया कि यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127635/ukrainian-president-volodymyr-zelensky-planning-to-meet-chinese-president-xi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-02/1546.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>रूस-यूक्रेन युद्ध का एक वर्ष पूरा होने पर भी यूक्रेनी लड़ाके मैदान में रूसी सेना के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं। इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की योजना बना रहे हैं। इससे पहले जेलेंस्की के कार्यालय ने कहा था कि यह युद्ध और भी विनाशकारी हो सकता है और यूक्रेनी सेना इससे निपटेगी। उधर, रूस ने दोनबास के पूर्वी औद्योगिक क्षेत्र के सभी हिस्सों पर कब्जा करने के लिए अपना अभियान और तेज करते हुए लगातार गोलाबारी कर रहा है। विशेषज्ञों ने भी चेताया कि यह युद्ध अभी वर्षों तक खिंच सकता है।</p>
<p>रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका समेत कई पश्चिमी देश भले ही पुतिन की सेना को ललकारते दिख रहे हैं, लेकिन चीन ने जो कदम उठाया है उसने इन सभी देशों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका ने कहा है कि चीन रूस को हथियारों की मदद पहुंचाने वाला है, जिससे पुतिन की सेना यूक्रेन पर और ज्यादा आक्रामक हो जाएगी।अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने जानकारी दी है कि चीन, रूस को हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है जो कि आने वाले समय में मुश्किलें खड़ी कर सकता है।</p>
<p>एंटनी ब्लिंकन ने आगे कहा कि चीन रूस की कार्रवाई की ना तो आलोचना करता है ना ही वो रूस पर यूक्रेन के हमले को गलत मानता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन की तरफ से कोई भी हथियार आपूर्ति सिर्फ पश्चिमी देशों के लिए ही नहीं दुनिया के अन्य देशों के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Feb 2023 18:25:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>चीन में लगे राष्ट्रपति शी चिनफिंग के विरोध में लगे पोस्टर-बैनर, आखिर किसका हाथ है इसके पीछे, किस लिए जनता है नाराज़ </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात <br /></strong></p>
<p><strong>चीन</strong> की राजधानी बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ लगाये गये बैनर को लेकर पूरा प्रशासन अलर्ट हो गया है। बैनर मामले के बाद इलाके में भारी पुलिस बलों की तैनाती कर दी गई है और पूरे इलाके को घेर लिया है। पुलिस, इस मामले की छानबीन कर रही है कि आखिर सीपीसी के खिलाफ बैनर किसने लगाए। सरकार ने चीन में सोशल मीडिया जिंग या हैडियन हैशटैग वाले पोस्ट को भी चीन के लोकप्रिय वीबो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तुरंत ब्लॉक कर दिया। कई लोगों ने ट्विटर पर पोस्ट शेयर कर बताया कि घटना की तस्वीरें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/125084/poster-banners-against-president-xi-jinping-in-china-who-is-behind"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-10/xi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात <br /></strong></p>
<p><strong>चीन</strong> की राजधानी बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ लगाये गये बैनर को लेकर पूरा प्रशासन अलर्ट हो गया है। बैनर मामले के बाद इलाके में भारी पुलिस बलों की तैनाती कर दी गई है और पूरे इलाके को घेर लिया है। पुलिस, इस मामले की छानबीन कर रही है कि आखिर सीपीसी के खिलाफ बैनर किसने लगाए। सरकार ने चीन में सोशल मीडिया जिंग या हैडियन हैशटैग वाले पोस्ट को भी चीन के लोकप्रिय वीबो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तुरंत ब्लॉक कर दिया। कई लोगों ने ट्विटर पर पोस्ट शेयर कर बताया कि घटना की तस्वीरें साझा करने के बाद उनके खातों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। आपको बता दें कि रविवार से बीजिंग में कम्युनिस्ट पार्टी का एक प्रमुख सम्मेलन शुरु होनेवाला है।</p>
<p><strong>आखिर  बैनर में क्या था?</strong><br />राजधानी बीजिंग में एक व्यस्त चौराहे पर बैनर लगा कर कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व की आलोचना की गई है। चीन में प्रतिबंधित ट्विटर की तस्वीरों में एक सड़क पर आग से धुंआ उठता दिख रहा है और एक बैनर नजर आ रहा है जिसमें सख्त “शून्य कोविड” नीति को खत्म करने और कम्युनिस्ट पार्टी के नेता को उखाड़ फेंकने व राष्ट्रपति शी चिनफिंग को हटाने का आह्वान किया गया है। इन बैनरों में 'क्रांतिकारी परिवर्तन' की आवश्यकता को बढ़ावा देनेवाले नारे लिखे गये थे।</p>
<p><strong>कौन है इसके पीछे?</strong><br />विरोधियों द्वारा लगाए गए बैनर को पुलिस ने हटा दिया, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी काफी चर्चा है। आपको बता दें कि चीन में राजनीतिक विरोध पर सख्ती से कार्रवाई की जाती है और आए दिन विरोधों को दबाने की खबरें सामने आती है। चीनी सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट में लोगों ने घटना का सीधे जिक्र किए बिना समर्थन किया और बैनर लगानेवाले अज्ञात शख्स के साहस की प्रशंसा की।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Oct 2022 01:06:52 +0530</pubDate>
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