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                <title>VIP darshan - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>बदइंतजामी :आस्था का मोल जान देकर चुकाते श्रद्धालु! </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश भर के धार्मिक तीर्थ स्थलों मंदिरों पर बदइंतजामी चरम पर है कमोवेश सभी जगह एक सी हालत है कुप्रबन्ध का फायदा उठा कर व्यवस्था में लगे सेवादार सुविधा शुल्क लेकर अपनी जेब भरते हैं और चोर रास्ते से लाइन तोड़ कर दर्शन कराते हैं जबकि आम श्रद्धालु घंटों भूख प्यास सह कर भी लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करता है। अधिकांश बड़े मंदिरों पर तो बाकायदा पैसे देकर वीआईपी दर्शन की सुविधा को ही वैधता दे दी गई है। बहरहाल इस सब बदइंतजामी के चलते अब आस्था का मोल श्रद्धालु अपनी जान देकर चुकाने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185535/devotees-paying-the-price-of-mismanaged-faith-with-their-lives"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img_20260727_1512391.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश भर के धार्मिक तीर्थ स्थलों मंदिरों पर बदइंतजामी चरम पर है कमोवेश सभी जगह एक सी हालत है कुप्रबन्ध का फायदा उठा कर व्यवस्था में लगे सेवादार सुविधा शुल्क लेकर अपनी जेब भरते हैं और चोर रास्ते से लाइन तोड़ कर दर्शन कराते हैं जबकि आम श्रद्धालु घंटों भूख प्यास सह कर भी लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करता है। अधिकांश बड़े मंदिरों पर तो बाकायदा पैसे देकर वीआईपी दर्शन की सुविधा को ही वैधता दे दी गई है। बहरहाल इस सब बदइंतजामी के चलते अब आस्था का मोल श्रद्धालु अपनी जान देकर चुकाने को मजबूर हैं श्रावण मास का तीसरा सोमवार 17 अगस्त 2026 श्रद्धालुओं के जीवन पर भारी पड़ गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दिन विभिन्न राज्यों में धार्मिक स्थलों पर हुई भगदड़ और हादसों में कुल 27 लोगों की मौत हो गई। बिहार के लखीसराय स्थित अशोकधाम मंदिर में भगदड़ से 7 श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि कई अन्य हादसों में कम से कम बीस जान गयीं हैं जबकि हताहतों की तादाद सैकड़ों की संख्या में है। घायल हुए। दरअसल यह हादसों की पहली बार नहीं है हिन्दू धर्म स्थानों पर कुप्रबन्ध अव्यवस्था रखरखाव में गड़बड़ी संकीर्ण गलियारे और श्रद्धालुओं की बढ़ती तादाद असंयमित व्यवहार के साथ ही अफवाहों की साजिशें हर पर्व त्योहार दर्शन स्नान मेलों में हादसों की श्रृंखला बना रहे हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि बिहार के अशोकधाम मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार पर जलाभिषेक के दौरान बिजली का खंभा गिरने और अफवाह फैलने से मची भगदड़ में 7 श्रद्धालुओं की मौत और 19 से अधिक घायल हुए। वहीं मध्य-प्रदेश में उज्जैन के महाकाल मंदिर सहित चार राज्यों में विभिन्न हादसों और भीड़ के दबाव के कारण कुल 27 लोगों की जान चली गई।अभी दो माह पहले ही महाराष्ट्र के परभणी जिले की मानवत तहसील स्थित यशवाड़ी मारुति मंदिर में शनिवार को हुआ दर्दनाक हादसा पूरे देश को झकझोर दिया । मंदिर परिसर के सामने बना सभा मंडप अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिसके कारण कई श्रद्धालु मलबे में दब गए छह लोगों की मौत हो गई थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको याद होगा कि महाकुंभ मेला, प्रयागराज जनवरी 2025 मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम में पवित्र स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु एकत्र हुए थे। अखाड़ा मार्ग पर तीर्थयात्रियों के अत्यधिक दबाव से अचानक बैरिकेड्स ढह गए। इस दर्दनाक हादसे में 30 से अधिक लोगों की मौत हुई और 60 से ज्यादा घायल हुए।इसी तरह तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर, आंध्र प्रदेश में जनवरी 2025 वैकुंठ एकादशी त्योहार के दौरान वीआईपी और सामान्य दर्शन टिकट लेने के लिए हजारों श्रद्धालुओं के बीच धक्का-मुक्की शुरू हुई। इस भीड़ के अनियंत्रित होने से मची भगदड़ में 6 श्रद्धालुओं की मौत हुई और 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वहीं हाथरस सत्संग, उत्तर प्रदेश 2 जुलाई 2024 को एक धार्मिक आयोजन में बरती गयी लापरवाही सैकड़ों श्रद्धालुओं की जान ले गयी। यह हाल के वर्षों की सबसे भीषण घटनाओं में से एक है। क्षमता से तीन गुना अधिक यानी करीब 2.5 लाख लोग एक अस्थायी टेंट में जमा हो गए थे। बाबा के जाने के बाद धूल छूने की होड़ और अत्यधिक गर्मी व उमस के कारण मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">माता वैष्णो देवी भवन जनवरी 2022 को नए साल के मौके पर जम्मू-कश्मीर के कटरा में स्थित वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच हुई रेलमपेल में 12 लोगों की जान चली गई थी।रतनगढ़ माता मंदिर, दतिया मध्य-प्रदेश में अक्टूबर 2013  नवरात्रि के दौरान मंदिर की ओर जा रहे श्रद्धालुओं के बीच पुल टूटने की अफवाह उड़ी, जिससे मची भगदड़ में 89 लोगों की मौत हुई थी। छठ घाट पर नवंबर 2012 में बिहार की राजधानी पटना में छठ पर्व के दौरान नदी घाट पर अचानक मची अफरा-तफरी के कारण 20 व्रतियों और श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी।नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश में अगस्त 2008 भूस्खलन और चट्टानें गिरने की झूठी अफवाह के बाद फैली दहशत से 162 से अधिक श्रद्धालुओं की कुचलकर मौत हो गई थी।चामुंडा देवी मंदिर, जोधपुर में सितंबर 2008 नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में बम होने की अफवाह फैलने से मची भयंकर भगदड़ में करीब 250 लोगों की जान चली गई थी।सबरीमाला, केरल जनवरी 2011 मकरज्योति के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं के बीच वाहन दुर्घटना के बाद मची भगदड़ में 104 से अधिक तीर्थयात्रियों की मौत हुई थी।मंधारदेवी मंदिर, महाराष्ट्र जनवरी 2005 में सालाना यात्रा के दौरान नारियल के पानी से सीढ़ियां फिसलनी होने के कारण लोग गिरते गए, जिसमें 340 से अधिक श्रद्धालु मारे गए थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले दिनों यूपी के वृन्दावन में इस्कॉन मंदिर के गेट पर नगर निगम द्वारा लगाए गए शॉवर कूलर में अचानक करंट उतर आया। इसकी चपेट में आने से एक 21 वर्षीय श्रद्धालु की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।  राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर में उमड़ने वाली भारी भीड़, कुप्रबंधन, और उचित कतारें न होने के कारण अक्सर भगदड़ और विवाद जैसी स्थितियां सामने आती है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में स्थित विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के समीप एक हृदयविदारक हादसा सामने आया है। मंदिर के गेट नंबर 5 के पास स्थित एक गली में अचानक एक पुराने मकान का छज्जा गिर गया, जिसकी चपेट में आने से वहां से गुजर रहे कई श्रद्धालु घायल हो गए थे। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत आस्था और श्रद्धा का देश है। यहां प्रतिदिन लाखों लोग मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों पर पहुंचते हैं। विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में इन स्थानों की संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक स्थलों पर भगदड़, दीवार गिरने, छत ढहने करेंट उतरने और अन्य दुर्घटनाओं में अनेक लोगों की जान जा चुकी है। हाल ही में महाराष्ट्र के सांगली जिले में भी मंदिर परिसर से जुड़ी एक दुर्घटना में कई श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई थी। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि समस्या किसी एक स्थान या एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक स्तर पर सुरक्षा प्रबंधन की चुनौती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वास्तविकता यह है कि अनेक धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन आधारभूत ढांचे का विस्तार और रखरखाव उसी गति से नहीं हो पा रहा। कई स्थानों पर अस्थायी शेड, मंडप और अन्य संरचनाएं बिना पर्याप्त तकनीकी परीक्षण के उपयोग में लाई जाती हैं। कई बार निर्माण कार्य स्थानीय स्तर पर करवा लिया जाता है, लेकिन इंजीनियरिंग मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण की अनदेखी हो जाती है। जब तक कोई दुर्घटना नहीं होती, तब तक इन कमियों पर गंभीर ध्यान नहीं दिया जाता। प्रत्येक घटना के बाद केवल शोक व्यक्त करना पर्याप्त नहीं होगा। आवश्यक है कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन इन हादसों की निष्पक्ष जांच कराएं और इन तमाम हादसों के पीछे के तमाम कारणों का विश्लेषण कर जिम्मेदार दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 20:49:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>'भगवान मंत्रियों का इंतजार नहीं करते, सब बराबर हैं'</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत में लगभग हर छोटे-बड़े प्रसिद्ध मंदिर में वीआईपी दर्शन के लिए एक अलग लाइन या विशेष पास की व्यवस्था होती है। कुछ तय रकम या टिकट के पैसे देने के बाद कोई भी व्यक्ति घंटों लंबी लाइनों से बचकर सीधे भगवान के गर्भगृह तक दर्शन के लिए पहुंच जाता है। हालांकि, पैसे और रसूख के दम पर मिलने वाली इस विशेष सुविधा पर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला अब मद्रास हाई कोर्ट की चौखट पर पहुंचा है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मंदिरों में पैसे और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180385/god-does-not-wait-for-ministers-all-are-equal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/vmyzo_hj.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत में लगभग हर छोटे-बड़े प्रसिद्ध मंदिर में वीआईपी दर्शन के लिए एक अलग लाइन या विशेष पास की व्यवस्था होती है। कुछ तय रकम या टिकट के पैसे देने के बाद कोई भी व्यक्ति घंटों लंबी लाइनों से बचकर सीधे भगवान के गर्भगृह तक दर्शन के लिए पहुंच जाता है। हालांकि, पैसे और रसूख के दम पर मिलने वाली इस विशेष सुविधा पर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला अब मद्रास हाई कोर्ट की चौखट पर पहुंचा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मंदिरों में पैसे और वीआईपी दर्जे के आधार पर दी जाने वाली इस विशेष सुविधा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अदालत ने दोटूक शब्दों में कहा कि भगवान के दरबार में कोई मंत्री हो या आम आदमी, उनमें कोई भेद नहीं हो सकता। ईश्वर के सामने सभी इंसान बराबर हैं, ऐसे में मंदिरों के भीतर वीआईपी दर्शन की इस कुप्रथा का कोई औचित्य नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी आर स्वामीनाथन और जस्टिस लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ (बेंच) ने इस मामले की सुनवाई के दौरान बेहद तीखे सवाल उठाए। अदालत ने मंदिरों में वीआईपी दर्शन की प्रथा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भगवान के सामने किसी रसूखदार मंत्री और एक आम नागरिक में कोई फर्क है? कोर्ट ने कड़े लहजे में कहा कि दर्शन के लिए कोई भी प्रशासनिक प्रक्रिया तय की जाए, लेकिन उससे मंदिर की कतारों में खड़े आम श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी या मानसिक ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जस्टिस जी आर स्वामीनाथन की बेंच ने वीआईपी संस्कृति पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, “मंत्रियों और विधायकों को अपने मन से यह गलतफहमी निकाल देनी चाहिए कि मंदिर में भगवान उनका इंतजार कर रहे हैं, और वे अपने रसूख के दम पर किसी भी समय मंदिर में सीधे प्रवेश कर सकते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। आखिर हमें इस वीआईपी दर्शन की क्या आवश्यकता है? जब ईश्वर के समक्ष सभी लोग पूरी तरह समान हैं, तो फिर वहां क्या मंत्री और क्या आम जनता।”।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट के इन कड़े और तीखे सवालों पर सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पी वी बालासुब्रमण्यम ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने वीआईपी दर्शन की पैरवी करते हुए दलील दी कि इस तरह की प्रथा का पालन करने से एक तरफ जहां विशिष्ट लोगों के कारण लगने वाली लंबी-लंबी कतारों से मुक्ति मिलती है, वहीं दूसरी तरफ वीआईपी टिकटों से मंदिरों को भी काफी बड़ी आय (राजस्व) प्राप्त होती है। अपनी इस दलील के साथ ही उन्होंने इस विषय पर सरकार का विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से कुछ समय की मांग की। हाई कोर्ट ने सरकार के इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए उन्हें पूरा जवाब पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल, यह पूरा कानूनी विवाद हाल ही में विजय सरकार में मंत्री बने आर निर्मल कुमार के एक मंदिर दौरे को लेकर शुरू हुआ है। मंत्री निर्मल कुमार पर बेहद गंभीर आरोप लगे थे कि जब वे दर्शन के लिए पहुंचे, तो उनके रसूख के कारण तिरुपरनकुंड्रम स्थित ऐतिहासिक सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के कपाट आम जनता के लिए पूरी तरह बंद करवा दिए गए थे। इसके बाद जब मंत्री महोदय ने आराम से दर्शन कर लिए, तब कहीं जाकर आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर को दोबारा खोला गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, विपक्ष द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों को विजय सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। मद्रास हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका विश्व हिंदू परिषद (VHP) की तमिलनाडु इकाई के वरिष्ठ नेता पी. चोकलिंगम द्वारा दायर की गई है। उन्होंने कोर्ट में दावा किया कि मंत्री निर्मल कुमार की तरह ही आए दिन कई बड़े नेता, मंत्री और विधायक मंदिरों में वीआईपी दर्शन के लिए प्रोटोकॉल का धौंस जमाते हैं, जिसकी वजह से दूर-दूर से आए आम भक्तों को घंटों धूप और कतारों में खड़े रहकर भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि सनातन धर्म किसी भी व्यक्ति के साथ धन, सामाजिक स्थिति, पद या जाति के आधार पर भेदभाव की अनुमति कतई नहीं देता है, इसलिए मंदिर के भीतर सभी भक्तों के साथ पूरी तरह समान व्यवहार किया जाना चाहिए। हालांकि, याचिकाकर्ता चोकलिंगम ने अपनी गुहार में व्यावहारिक आधार पर कुछ विशेष छूट की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, गर्भवती महिलाओं, नवविवाहित जोड़ों, मंदिर में अपनी कला की प्रस्तुति देने वाले स्थानीय कलाकारों, इसके अलावा देश के राष्ट्राध्यक्षों और संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों (जैसे राष्ट्रपति, राज्यपाल या मुख्य न्यायाधीश) को इस नियम से अलग रखकर कुछ विशेष रियायतें जरूर दी जानी चाहिए, लेकिन इसका फायदा राजनीतिक लाभ के लिए नहीं उठाया जाना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 19:03:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पत्रकारों को भी वी आई पी पंक्ति में लगकर दर्शन करने को लेकर दिया अध्यक्ष को पत्रक</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>मीरजापुर।</strong> गुरुवार  को मेरे संगठन स्वतंत्र मीडिया क्लब के बैनर तले जनपद मिर्जापुर जिलाध्यक्ष रोहित गुरु त्रिपाठी के नेतृत्व में तथा संगठन के राष्ट्रीय संयोजक रामलाल साहनी जी , वरिष्ठ पत्रकार मंगलापती द्विवेदी जी , मंडल महासचिव गुफरान अहमद जी , जिला संरक्षक रविंद्र जायसवाल जी के गरिमामई उपस्थिति में स्वतन्त्र मिडिया क्लब जनपद मिर्जापुर के एक प्रतिनिधि मंडल ने मां विंध्यवासिनी मंदिर विंध्याचल में पत्रकारों को दर्शन पूजन के दौरान सुविधा उपलब्ध कराने की मांग करते हुए एक ज्ञापन विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी जी को दिया गया।।</div>
<div>  </div>
<div>ज्ञापन लेते समय अध्यक्ष विंध्य पंडा समाज पंकज द्विवेदी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143324/a-leaflet-was-given-to-the-speaker-asking-the-journalists"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/2....,,,1.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मीरजापुर।</strong> गुरुवार  को मेरे संगठन स्वतंत्र मीडिया क्लब के बैनर तले जनपद मिर्जापुर जिलाध्यक्ष रोहित गुरु त्रिपाठी के नेतृत्व में तथा संगठन के राष्ट्रीय संयोजक रामलाल साहनी जी , वरिष्ठ पत्रकार मंगलापती द्विवेदी जी , मंडल महासचिव गुफरान अहमद जी , जिला संरक्षक रविंद्र जायसवाल जी के गरिमामई उपस्थिति में स्वतन्त्र मिडिया क्लब जनपद मिर्जापुर के एक प्रतिनिधि मंडल ने मां विंध्यवासिनी मंदिर विंध्याचल में पत्रकारों को दर्शन पूजन के दौरान सुविधा उपलब्ध कराने की मांग करते हुए एक ज्ञापन विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी जी को दिया गया।।</div>
<div> </div>
<div>ज्ञापन लेते समय अध्यक्ष विंध्य पंडा समाज पंकज द्विवेदी जी द्वारा बताया गया कि पंडा समाज के स्तर से जो भी कार्यवाही संभव होगी वो की जाएगी तथा उससे आगे की कार्यवाही के लिए जिला प्रशासन को अवगत कराते हुए पत्रकार बंधुओ को उनके मान सम्मान के दृष्टिगत दर्शन पूजन के दौरान उचित सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी तथा ये सारी बाते लिखा पढ़ी में होंगी ऐसा आश्वाशन अध्यक्ष श्री विंध्य पंडा समाज पंकज द्विवेदी के द्वारा दिया गया।।।</div>
<div> </div>
<div>ज्ञापन सौंपने के उक्त कार्यक्रम के दौरान उपरोक्त वर्णित पत्रकार/पदाधिकारी बंधुओ के अलावा सर्वश्री गुड्डू खान जी (जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष) , मनीष द्विवेदी उर्फ चक्रम काजी जी (जिला उपाध्यक्ष) , मोहित गुप्ता जी (जिला मीडिया प्रभारी) , सेराज अहमद जी (तहसील पदाधिकारी) , के साथ साथ सदस्य गण के रूप में वरिष्ठ पत्रकार निजामुद्दीन जी , टीपू सुलतान जी , सतीश सिंह जी , ब्रह्म प्रताप सिंह उर्फ बंटी जी , जिला सचिव शिवबली चौहान जी, शिवांग त्रिपाठी जी समेत लगभग बीस की संख्या में पत्रकार बंधु उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jul 2024 16:16:34 +0530</pubDate>
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