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                <title>Finance Minister - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Finance Minister RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भाजपा नेत्री शेफाली गुप्ता ने झारखंड बजट पर व्यक्त की तिखी प्रतिक्रिया, खोखले दावे का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>हजारीबाग-</strong>झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने विधानसभा में बजट-2025 पेश किया। भाजपा नेत्री शेफाली गुप्ता ने झारखंड के बजट पर तिखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। खोखले दावे का आरोप लगाया। झारखंड सरकार को बजट पर घेरकर कई सवाल खड़े कर दी है। मौके पर भाजपा नेत्री शेफाली गुप्ता ने बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर कहा कि बजट में कोई भी विजन नही है, पूरी तरह से बजट दिशाहीन है। बजट ऊपर से भारी-भरकम भले ही दिखायी देता है, अंदर से खोखला है।</div>
<div>  </div>
<div>इसमें न तो आदिवासियों व न ही मूल वासियों के हितों की बात की गयी है।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149483/bjp-leader-shefali-gupta-expressed-a-lot-of-reaction-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/news-7.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>हजारीबाग-</strong>झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने विधानसभा में बजट-2025 पेश किया। भाजपा नेत्री शेफाली गुप्ता ने झारखंड के बजट पर तिखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। खोखले दावे का आरोप लगाया। झारखंड सरकार को बजट पर घेरकर कई सवाल खड़े कर दी है। मौके पर भाजपा नेत्री शेफाली गुप्ता ने बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर कहा कि बजट में कोई भी विजन नही है, पूरी तरह से बजट दिशाहीन है। बजट ऊपर से भारी-भरकम भले ही दिखायी देता है, अंदर से खोखला है।</div>
<div> </div>
<div>इसमें न तो आदिवासियों व न ही मूल वासियों के हितों की बात की गयी है। यह महज देखने में ही बड़ा बजट लग रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड की भोली भाली जनता को सिर्फ ठगा गया है। इसमें ना रोजगार, ना गरीबी एवं ना ही आय वृद्धि की बात गई है। झारखंड के विकास का कोई मॉडल को भी ध्यान में नहीं रखा गया है। झारखंड सरकार पूरी तरह से सरकार चलाने में विफल है। उन्होंने कहा कि लोकलुभावन वादे कर जेएमएम- कांग्रेस- राजद की राज्य में सरकार बनी लेकिन पूरी तरह से विफल है।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Mar 2025 14:58:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तालियों की गड़गड़ाहट बनाम तानों की बौछार</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जनवरी की कंपकंपाती हवा के साथ देश में एक नया जोश उमड़ने लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक नई हलचल करवट लेती है। सत्ता के गलियारों में गहमागहमी तेज़ हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थशास्त्रियों की पेशानी पर शिकन गहरी होने लगती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष स्वर तेज़ करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जनता</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">वह फिर से उम्मीदों की गठरी सिर पर उठाए बजट के पन्ने पलटने का इंतज़ार करती है। वित्त मंत्रालय के विशेषज्ञ अपनी टाई कसते हुए आँकड़ों की ऐसी जादूगरी में जुट जाते हैं कि हर घोषणा सुनहरी प्रतीत हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भले ही वह मात्र संख्याओं का छलावा हो।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर आता</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148018/blacks-of-applause"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/download.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जनवरी की कंपकंपाती हवा के साथ देश में एक नया जोश उमड़ने लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक नई हलचल करवट लेती है। सत्ता के गलियारों में गहमागहमी तेज़ हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थशास्त्रियों की पेशानी पर शिकन गहरी होने लगती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष स्वर तेज़ करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जनता</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">वह फिर से उम्मीदों की गठरी सिर पर उठाए बजट के पन्ने पलटने का इंतज़ार करती है। वित्त मंत्रालय के विशेषज्ञ अपनी टाई कसते हुए आँकड़ों की ऐसी जादूगरी में जुट जाते हैं कि हर घोषणा सुनहरी प्रतीत हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भले ही वह मात्र संख्याओं का छलावा हो।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर आता है वह बहुप्रतीक्षित दिन—</span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">फरवरी! संसद भवन के भव्य गलियारों में लाल कालीन बिछ चुके होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैमरों की चमक आसमान छूने लगती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टीवी एंकर ऊर्जावान स्वरों में अपनी भूमिका निभाने को तैयार होते हैं। वित्त मंत्री</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनके चेहरे पर इस दिन विशेष आत्मविश्वास झलकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल टैबलेट हाथ में लिए प्रवेश करती हैं। सत्ता पक्ष के सांसद उल्लास से सराबोर हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्षी खेमा बेचैनी से कुछ बड़ा पकड़ने की फिराक में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जनता</span>?—<span lang="hi" xml:lang="hi">वह अब भी गूगल पर खंगाल रही होती है</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">बजट में मेरे लिए क्या है</span>?"</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे ही वित्त मंत्री अपना भाषण प्रारंभ करती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्ता पक्ष के सांसदों में तालियाँ बजाने की होड़ मच जाती है। हर नई घोषणा के साथ तालियों का शोर मानो आसमान चीर देने को आतुर हो—"गरीबों के लिए नई योजना!"—गर्जनापूर्ण ताली। "किसानों के लिए ऐतिहासिक राहत!"—गूँजती ताली। "मध्यम वर्ग के लिए विशेष प्रावधान!"—सबसे ज़ोरदार ताली! लेकिन मध्यम वर्ग</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">वह इन घोषणाओं के बीच अपनी जेब टटोलते हुए मोबाइल पर टैक्स स्लैब खंगालने में व्यस्त हो जाता है!</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी बीच विपक्षी नेता अपनी सीटों पर बेचैनी से करवटें बदलने लगेंगे। बजट चाहे जितना भी तर्कसंगत हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका एक ही ध्येय रहेगा—निर्विवाद विरोध!</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे ही वित्त मंत्री गर्वोन्मत्त स्वर में उद्घोषणा करेंगी कि अर्थव्यवस्था</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">नए शिखरों को छू रही है"</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष की बेंचों से व्यंग्यपूर्ण ठहाकों की गूंज उठेगी। एक वरिष्ठ नेता व्यंग्य बाण छोड़ते हुए कहेंगे</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई रॉकेट की तरह उछल रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी अपने चरम पर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सरकार आत्ममुग्ध होकर विकास के स्वर्णिम सपने दिखा रही है! यह ऊँचाई नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनता की जेब से निकला आखिरी सिक्का है!"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सत्ता पक्ष इस पर ठहाके लगाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वित्त मंत्री मुस्कुराते हुए आंकड़ों की नई बाजीगरी पेश कर देंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और बजट की गाड़ी फिर आश्वासनों के पथ पर आगे बढ़ जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">बजट भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के चेहरे यूं दमकेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानो गरीबी मिट चुकी हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसान मालामाल हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हर युवा के पास दो-दो नौकरियाँ हों।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष जनता को समझाने में जुट जाएगा कि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">यह सब छलावा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंकड़ों की कलाबाजी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असली राहत तो हमारी सरकार में ही आएगी!"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जनता</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अब भी अपने टैक्स स्लैब का गणित लगाने में उलझी होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">बजट समाप्त होते ही सत्ता पक्ष के नेता बाहर आकर ऐसे वक्तव्य देंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने सिर्फ वित्तीय घोषणा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सृष्टि के गूढ़तम रहस्यों को सुलझा दिया हो।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री जी का ट्वीट आएगा—</span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">ऐतिहासिक बजट! आत्मनिर्भर भारत की दिशा में क्रांतिकारी कदम!"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समर्थकों की डिजिटल सेना इसे रीट्वीट करने में जुट जाएगी। पत्रकारों के तीखे सवालों का सामना करते हुए मंत्रीगण आत्मविश्वास भरी मुस्कान के साथ कहेंगे</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">हमने जनता को अभूतपूर्व तोहफे दिए हैं!"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पत्रकार फौरन पूछेंगे</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">सर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टैक्स स्लैब में कोई राहत</span>?" <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रीजी क्षणभर को अटकेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर राजनीतिक चातुर्य से कहेंगे</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">देखिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दीर्घकालिक दृष्टिकोण के तहत..."</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और जवाब अधर में लटक जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">उधर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में गरज उठेगा—"यह बजट किसानों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गरीबों और युवाओं के साथ एक छलावा है! यह सिर्फ बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया है!" वे यह भूल जाएंगे कि जब उनकी सरकार थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब सत्ता पक्ष के लोग भी ऐसे ही आरोप लगा रहे थे। एक नेता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वादों की बरसात करने में सिद्धहस्त हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दहाड़ेंगे—"अगर हमारी सरकार होती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हर नागरिक के खाते में हर महीने </span>10,000 - 15,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपये आते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी नाम की कोई चीज़ नहीं रहती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और रोज़मर्रा की जरूरतें हर किसी की पहुंच में होतीं!" जनता तालियां तो बजाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अगली ही सांस में गूगल पर "क्या सच में पहले महंगाई इतनी कम थी</span>?" <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्च करने लगेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया इस महाकाव्यात्मक नाटक में सबसे अधिक उत्साहित योद्धा की तरह कूद पड़ेगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यूज़ चैनलों पर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बजट विशेष</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के नाम पर बहस के अखाड़े सज जाएंगे—</span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">आम आदमी की जेब पर सीधा वार</span>?" "<span lang="hi" xml:lang="hi">किसानों की किस्मत बदलेगी या फिर ठगे जाएंगे</span>?" "<span lang="hi" xml:lang="hi">मध्यम वर्ग के लिए सौगात या सदमा</span>?" <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रेकिंग न्यूज़ की बौछार होगी—</span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">बजट के बाद सेंसेक्स में उथल-पुथल!"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ चैनल इसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थव्यवस्था के संकट का संकेत"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बताएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कुछ इसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">निवेशकों की क्षणिक घबराहट"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर दिलासा देंगे—</span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">चिंता न करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल्द ही सब पटरी पर आ जाएगा!"</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">बजट खत्म होते ही सोशल मीडिया पर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मीम्स की सुनामी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आ जाएगी। सत्ता पक्ष के समर्थक इसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">मास्टरस्ट्रोक"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर विजय पताका लहराएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि विपक्ष इसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक आपदा"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">घोषित कर देगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>X (<span lang="hi" xml:lang="hi">ट्विटर) पर ट्रेंडिंग युद्ध छिड़ जाएगा—</span> #HistoricBudget <span lang="hi" xml:lang="hi">बनाम </span>#AntiPoorBudget! <span lang="hi" xml:lang="hi">जनता अपनी भड़ास भी निकालेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यंग्य भी कसेगी और कहीं-कहीं प्रशंसा की धारा भी बहेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">दिन ढलते-ढलते जनता फिर अपनी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पुरानी दिनचर्या में लौट आएगी। अगले कुछ दिनों तक अखबारों में बजट की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जय-जयकार और कटाक्ष</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का सिलसिला जारी रहेगा। सत्ता पक्ष इसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक क्रांति"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का प्रतीक बताएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष इसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">महाघोटाला"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">करार देगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थशास्त्री इसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जटिल संख्याओं के तराजू में तोलेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जनता</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">वह फिर से अगले साल के बजट का इंतज़ार करेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उम्मीदों की वही पुरानी गठरी सिर पर उठाए हुए। क्योंकि बजट बदलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाषण बदलते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंकड़े बदलते हैं... पर जनता की उम्मीदें और हकीकतें हमेशा वैसी ही रहती हैं!</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/148018/blacks-of-applause</link>
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                <pubDate>Fri, 31 Jan 2025 16:51:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चुनावी बांड की आड़ में वसूली के आरोप। वित्त मंत्री निर्मला पर एफआईआर का आदेश।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="adn ads">
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<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ बेंगलुरु की कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड के जरिए कथित जबरन वसूली के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। ये आदेश बेंगलुरु की पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव कोर्ट ने दिया है। जनाधिकार संघर्ष परिषद (जेएसपी) के सह-अध्यक्ष आदर्श अय्यर ने बेंगलुरु की अदालत में शिकायत दर्ज कर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की थी।</div>
<div>आदर्श अय्यर ने आरोप लगाया कि चुनावी बॉन्ड के जरिए धमकी देकर जबरन वसूली की गई। जन अधिकार संघर्ष परिषद ने पिछले साल अप्रैल में 42वें एसीएम एम कोर्ट में याचिका</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145196/allegations-of-extortion-under-the-guise-of-electoral-bonds"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/download-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div class="a3s aiL">
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<div>केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ बेंगलुरु की कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड के जरिए कथित जबरन वसूली के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। ये आदेश बेंगलुरु की पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव कोर्ट ने दिया है। जनाधिकार संघर्ष परिषद (जेएसपी) के सह-अध्यक्ष आदर्श अय्यर ने बेंगलुरु की अदालत में शिकायत दर्ज कर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की थी।</div>
<div>आदर्श अय्यर ने आरोप लगाया कि चुनावी बॉन्ड के जरिए धमकी देकर जबरन वसूली की गई। जन अधिकार संघर्ष परिषद ने पिछले साल अप्रैल में 42वें एसीएम एम कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, ईडी अधिकारियों, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, पार्टी के अन्य राष्ट्रीय नेताओं, बीजेपी के तत्कालीन कर्नाटक अध्यक्ष नलिन कुमार कटील, बी वाई विजयेंद्र के खिलाफ शिकायत की थी। </div>
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<div>अदालत ने शिकायत पर सुनवाई करते हुए बेंगलुरु के तिलक नगर पुलिस थाने को चुनावी बॉन्ड के जरिए जबरन वसूली का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। चुनावी बांड को सुप्रीम कोर्ट ने अब खत्म कर दिया है। लेकिन चुनाव आयोग की साइट पर इस संबंध में जो सूची प्रकाशित की गई और जिसे सुप्रीम कोर्ट को उपलब्ध कराया गया, उसमें भाजपा सबसे ज्यादा चुनावी चंदा पाने वाली पार्टी थी। दूसरे नंबर पर ममता बनर्जी की टीएमसी थी। विपक्षी दलों ने चुनावी बांड को चुनावी रिश्वत नाम दिया था। कई कंपनियों पर ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के छापे पड़े। उन्होंने भाजपा को चुनावी चंदा दिया, उनके केस खत्म हो गए।</div>
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<div>इस संबंध में जनाधिकार संघर्ष संगठन के आदर्श अय्यर ने निर्मला सीतारमण और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चुनावी बांड के माध्यम से जबरन वसूली की गई। इसके बाद बेंगलुरु में जन प्रतिनिधियों की विशेष अदालत ने मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। पुलिस ने निर्मला सीतारमण और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।</div>
<div>फरवरी में, सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बांड योजना को "असंवैधानिक" बताते हुए रद्द कर दिया और कहा कि यह नागरिकों के सूचना के अधिकार का उल्लंघन करता है। केंद्र ने 2018 में यह योजना शुरू की थी और इसका उद्देश्य राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता में सुधार के लिए राजनीतिक दलों को चंदे के रूप में दान देना था।</div>
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<div><strong>मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस्तीफे को मांग की।</strong></div>
<div>मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने निर्मला सीतारमण के इस्तीफे की मांग की और कहा कि मामले में तीन महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपी जानी चाहिए। सीएम ने कहा- "जनप्रतिनिधियों की विशेष अदालत में निर्मला सीतारमण के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। वह कौन हैं? वह एक केंद्रीय मंत्री हैं और उनके खिलाफ भी एफआईआर है। वे चुनावी बांड के माध्यम से जबरन वसूली में शामिल थीं और उन पर एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें अपना इस्तीफा दे देना चाहिए। क्या वे (भाजपा) उनसे इस्तीफा देने के लिए कहेंगे?"</div>
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<div>सिद्धारमैया ने कहा-  "अब, धारा 17ए (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की) के अनुसार, जांच पूरी होनी चाहिए और तीन महीने के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी चाहिए। पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और आगे की जांच हो रही है।" धारा 17ए लोक सेवकों को जांच से अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है। इस धारा की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत किसी लोक सेवक के कथित अपराध की जांच या जांच करने के लिए कोर्ट की अनुमति लेना आवश्यक है।</div>
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<div>सिद्धारमैया ने कहा, "मेरे मामले में, निचली अदालत ने एक आदेश पारित किया है। राज्यपाल ने धारा 17ए के तहत जांच के लिए कहा है और अदालत ने निर्देश दिया है कि जांच पूरी की जाए और तीन महीने के भीतर एक रिपोर्ट सौंपी जाए।" विशेष रूप से, MUDA मामले में कथित अनियमितताओं के संबंध में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत सिद्धारमैया की भी जांच होगी। चुनावी चंदे के इस सबसे बड़े खेल में सबसे ज्यादा चंदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 69.86.5 करोड़ रुपये मिले।</div>
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<div>दूसरे नंबर पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) है, जिसे 1397 करोड़ रुपये मिले। कांग्रेस को 1334 करोड़ मिले। सीपीएम और सीपीआई भारत की दो ऐसी पार्टियां हैं जिन्होंने चुनावी बांड के जरिए चंदा लेने से इनकार कर दिया। दोनों ही कम्युनिस्ट दलों ने इलेक्ट्रोरल बांड के लिए अलग से कोई खाता खोलने से मना कर दिया था। तमिलनाडु की डीएमके एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने अपने डोनर्स का खुलासा किया था कि उसे कहां से कितने पैसे चंदे के रूप में मिले।</div>
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<div><strong>सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बांड खत्म कर दी।</strong></div>
<div>2018 में चुनावी बांड योजना की शुरुआत के बाद से, भाजपा को सबसे ज्यादा चंदा मिला है। यह योजना 2024 में 15 फरवरी तक प्रभावी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी को पूरी योजना रद्द कर दी। चुनावी बांड का इस्तेमाल ऐसी व्यवस्था थी जिसके जरिए कंपनियां या कोई भी व्यक्ति किसी राजनीतिक दल को चंदा देने या आर्थिक मदद देने के लिए खरीद सकता है। राजनीतिक दल बदले में धन और दान के लिए इसे भुना सकते हैं। राजनीतिक फंडिंग में कथित पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत चुनावी बॉन्ड योजना को राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नकद दान के विकल्प के रूप में पेश किया गया था।</div>
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<div>लेकिन चंदा या दान देने वालों का नाम गुप्त रहता था। चुनाव आयोग ने कभी इस पर आपत्ति नहीं की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में वकील प्रशांत भूषण और अन्य लोगों ने याचिकायें दायर कर चंदा देने वालों की पहचान बताने की मांग की। मोदी सरकार ने पूरा जोर लगाया कि चंदा देने वालों की पहचान गुप्त रहे। अभी इस मामले की सुनवाई को 10 अक्टूबर तक के लिए स्थगित किया गया है, लेकिन ये मामला कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले देश की केंद्रीय मंत्री के खिलाफ मुद्दा बन सकता है।</div>
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<div><strong>चुनावी बॉन्ड के माध्यम से डरा-धमकाकर जबरन वसूली की याचिका।</strong></div>
<div>आदर्श अय्यर ने याचिका में कहा कि वित्त मंत्री ने चुनावी बॉन्ड के माध्यम से डरा-धमकाकर जबरन वसूली की है। साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट के पास चुनावी बॉन्ड योजना को चुनौती दी गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने चार याचिकाकर्ता की बात सुनने और उनका पक्ष जानने के बाद इस पर फैसला दिया। उच्चतम न्यायालय ने चुनावी बॉन्ड योजना को ना सिर्फ असंवैधानिक माना, बल्कि इस पर पूरी तरह से रोक लगा दी। चुनावी बॉन्ड या इलेक्ट्रोरल ओ बॉन्ड के जरिए जबरन वसूली के मामले में जेएसपी के सह-अध्यक्ष आदर्श अय्यर ने पिछले साल यानी अप्रैल 2023 में 42वें एसीएमएम कोर्ट का रुख किया था।</div>
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                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Sep 2024 16:18:19 +0530</pubDate>
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                <title>पाकिस्तान की तरक्की के लिए अल्लाह जिम्मेदार-वित्त मंत्री डार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>कंगाल पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार का अजीब बयान खूब सुर्खियां बटोर रहा है।  पाकिस्तान वर्तमान में आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।इस्लामाबाद में ग्रीन लाइन ट्रेन सेवा के उद्घाटन समारोह में पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने कहा कि देश की समृद्धि एवं विकास के लिए अब अल्लाह ही जिम्मेदार   है।  डार ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि पाकिस्तान तरक्की करेगा। उन्होंने आगे कहा कि मेरे यकीन का कारण यह है कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर बना था। डार ने कहा 'पाकिस्तान को अल्लाह बना सकते हैं तो वह देश की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127117/allah-is-responsible-for-the-progress-of-pakistan-finance"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-01/1033.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>कंगाल पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार का अजीब बयान खूब सुर्खियां बटोर रहा है।  पाकिस्तान वर्तमान में आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।इस्लामाबाद में ग्रीन लाइन ट्रेन सेवा के उद्घाटन समारोह में पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने कहा कि देश की समृद्धि एवं विकास के लिए अब अल्लाह ही जिम्मेदार   है।  डार ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि पाकिस्तान तरक्की करेगा। उन्होंने आगे कहा कि मेरे यकीन का कारण यह है कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर बना था। डार ने कहा 'पाकिस्तान को अल्लाह बना सकते हैं तो वह देश की तरक्की और विकास के साथ-साथ देश को अमीर भी बना सकते हैं।</p>
<p>वित्त मंत्री डार ने कहा कि वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व में पाकिस्तान की स्थिति को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'शहबाज शरीफ की अगुवाई वाली सरकार पाकिस्तान की स्थिति सुधारने के लिए अपनी तरफ से पुरजोर कोशिश कर रही है।' पाकिस्तान की मौजूदा बदहाली के लिए पांच साल पहले शुरू हुए 'नाटक' को जिम्मेदार बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां के लोगों को अब भी भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने कहा कि इस नाटक के पहले साल 2013-17 के दौरान नवाज शरीफ के कार्यकाल में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अच्छी हालत में थी। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के शासन के दौरान पाकिस्तान तरक्की की राह पर था लेकिन उसे पटरी से हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि अब लोग आसानी से देख सकते हैं कि पिछले पांच साल में देश को कितनी बर्बादी का सामना करना पड़ा है। विदेशी मुद्रा के अभाव में पाकिस्तान के सामने जरूरी चीजों की खरीद के लिए भी भुगतान करने लायक मुद्रा नहीं रह गई है। इस समस्या से निपटने के लिए वह अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष समेत कई संस्थानों से आर्थिक पैकेज की तलाश में है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
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                <pubDate>Sat, 28 Jan 2023 20:40:30 +0530</pubDate>
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