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                <title>monsoon rain - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>monsoon rain RSS Feed</description>
                
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                <title>विगत 2 दिनों से हो रही मानसूनी वर्षा से प्रखण्ड के कृषकों में दिखा हर्ष </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>पाकुड़िया/पाकुड़/झारखण्ड:- </strong>पिछले दो दिनों से रूक-रूककर होती रही रिमझिम वर्षा से प्रखण्ड के किसान हर्षित दिख रहे हैं। फिलहाल बारिश से खेतों में जहां पानी है वहां कृषक खेती में लग चुके हैं। किसानों ने बताया कि बारिश से रोपे गये धान के पौधों को लाभ तो होगा ही साथ ही खेती का काम भी होगा। हालांकि प्रखण्ड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं अधिक बारिश होने की सूचना है।</div>
<div>  </div>
<div>बहरहाल इन दिनों धान के बीज तैयार हो चुके हैं और वर्षा भी हुई है जिससे धान रोपनी में तेजी आने की सम्भावना है। किसानों का मानना है कि अभी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143810/there-was-joy-among-the-farmers-of-the-block-due"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-08/news-2.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>पाकुड़िया/पाकुड़/झारखण्ड:- </strong>पिछले दो दिनों से रूक-रूककर होती रही रिमझिम वर्षा से प्रखण्ड के किसान हर्षित दिख रहे हैं। फिलहाल बारिश से खेतों में जहां पानी है वहां कृषक खेती में लग चुके हैं। किसानों ने बताया कि बारिश से रोपे गये धान के पौधों को लाभ तो होगा ही साथ ही खेती का काम भी होगा। हालांकि प्रखण्ड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं अधिक बारिश होने की सूचना है।</div>
<div> </div>
<div>बहरहाल इन दिनों धान के बीज तैयार हो चुके हैं और वर्षा भी हुई है जिससे धान रोपनी में तेजी आने की सम्भावना है। किसानों का मानना है कि अभी बरसात का मौसम है और पानी पड़ने की सम्भावना है जिससे धान रोपनी होने की आशा है। यदि वर्षा समय पर होती रही तो धान रोपनी के बाद जोरिया, तालाब, नदी व सिंचाई कूपों में जल स्टोर होगा जिससे रब्बी फसलों व विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती होगी। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Aug 2024 16:45:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकुड़िया में मानसूनी वर्षा के बिना कृषि कार्य बाधित</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>पाकुड़िया/पाकुड़,/झारखण्ड:- </strong>बीते दस एवम ग्यारह जुलाई की संध्या को हुई 48.8 एमएम वर्षा पात होने के बाद 16 तक झमाझम मानसूनी बारिश नहीं होने से पाकुड़िया प्रखण्ड के कृषकों में गहरी चिन्ता दिख रही है।प्रखण्ड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक कहीं खेतों में पानी है तो बीज नहीं और यदि कहीं बीज तैयार है तो जल के बिना रोपनी नहीं हो पा रही है। एक ओर देश के विभिन्न प्रदेशों में भारी बारिश से जल जमाव तथा बाढ़ से लोगों की जान-माल की क्षति हो रही है जबकि पाकुड़ जिला के पाकुड़िया प्रखण्ड में,रिमझिम वर्षा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143286/agricultural-work-disrupted-without-monsoon-rain-in-pakuria"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/news-2-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>पाकुड़िया/पाकुड़,/झारखण्ड:- </strong>बीते दस एवम ग्यारह जुलाई की संध्या को हुई 48.8 एमएम वर्षा पात होने के बाद 16 तक झमाझम मानसूनी बारिश नहीं होने से पाकुड़िया प्रखण्ड के कृषकों में गहरी चिन्ता दिख रही है।प्रखण्ड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक कहीं खेतों में पानी है तो बीज नहीं और यदि कहीं बीज तैयार है तो जल के बिना रोपनी नहीं हो पा रही है। एक ओर देश के विभिन्न प्रदेशों में भारी बारिश से जल जमाव तथा बाढ़ से लोगों की जान-माल की क्षति हो रही है जबकि पाकुड़ जिला के पाकुड़िया प्रखण्ड में,रिमझिम वर्षा नहीं होने से खेती नहीं होने से किसानों की चिन्ता बढ़ने लगी है।</div>
<div> </div>
<div>खेती के विषय में पूछने पर किसानों का कहना कि फिलहाल खेती के अनुकूल वर्षा नहीं होने से बड़े पैमाने पर ‌धान रोपनी नहीं हो पा रही है। यदि बड़े पैमाने पर बारिश होगी तो धान रोपनी होगी पर फसल कम होने की सम्भावना है। किसानों का मानना है कि पाकुड़िया प्रखण्ड में अगस्त महीने तक रोपनी की जाती है। हालांकि आसमान पर काले सफेद बादल छाये रहने के बावजूद वर्षा भारी मात्रा में नहीं होना कृषकों को चकित करता रहा है।पाकुड़िया में 22 मई से 11 जुलाई तक हल्के स्तर पर कुल 206.4 मिली मीटर ही वर्षा हुई है।यद्यपि किसानों को आशा है वर्षा का समय है और वर्षा होगी और धान रोपनी भी भले देर से ही सही। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jul 2024 16:18:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मानसूनी वर्षा के अभाव में फिलहाल कृषि कार्य बाधित </title>
                                    <description><![CDATA[3 जुलाई की सर्वाधिक 31. 4 मिली-मीटर हुई बारिश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143087/agricultural-work-currently-disrupted-due-to-lack-of-monsoon-rains%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/news-12.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>पाकुड़िया/पाकुड़/झारखण्ड:- </strong>कहा जाता है भारत के मेहनती एवम ईमानदार कृषकों की खेती की निर्भरता मानसूनी वर्षा पर है। यद्यपि देश के विभिन्न राज्यों में कृषि के लिए सिंचाई के अलग-अलग स्थाई श्रोत हैं, तथापि देश के बड़े भू-भाग अब भी सिंचाई की सुविधा से वंचित है और उन्हें वर्षा पर आश्रित रहना पड़ता है। विगत दिनों देश के अनेक राज्यों में मानसूनी बारिश के प्रकोप से बाढ़ से बड़े पैमाने पर जान-माल की क्षति हो रही है।जबकि झारखण्ड राज्य के पाकुड़ जिला के पाकुड़िया प्रखण्ड में मौसमी बारिश के बिना कृषि कार्य पूर्णतः बाधित है।</div>
<div> </div>
<div>यदि एक नजर पाकुड़िया में वर्षापात पर डाली जाय तो विदित होगा कि 22 मई से 8 जुलाई तक 160.4 एमएम वर्षा हुई है जबकि तीन जुलाई को 31.4 मिली-मीटर सर्वाधिक बारिश हुई है। प्रखण्ड के किसानों को नीले आसमान और तेज धूप के बीच तैर रहे बादलों के समूह को आशा भरी दृष्टि से देख ये लगता है कि बादल बरसने वाले हैं, लेकिन किसानों के चेहरे पर उभर रही चिन्ता की रेखाओं से उन्हें कतई फर्क नहीं पड़ता दिख रहा है। हालांकि किसानों का मानना है कि आषाढ़ माह समापन की ओर है यदि अब भी मुसलधार वर्षा होगी तो धान रोपनी की जा सकेगी।</div>
<div> </div>
<div>8 जुलाई के बाद पाकुड़िया में 10 की संध्या के 4 बजे 28.4 मिली मीटर वर्षा हुई है। यद्यपि किसानों का मानना है कि निचली भूमि में जल है वहीं धान के बीज फिलहाल नहीं बढ़ने से रोपनी नहीं हो पायेगी। प्रखण्ड के प्रसिद्ध कृषक एवम पूर्व शिक्षक अमरेन्द्र घोष उर्फ़ सट्टू घोष ने वर्षा व धान रोपनी के सम्बन्ध में मंगलवार को पूछने पर कहा कि बुधवार को बारिश होने से बीज को लाभ होगा। लेकिन धान रोपनी के लिए तथा धान फसल के लिए और पानी की आवश्यकता है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि वर्षा की जरुरत है पर रोपनी में देर होने से धान की फसल कम होने की सम्भावना बनी रहती है।</div>
<div> </div>
<div>किसानों ने बताया कि फिलहाल खाली पड़ी अन्य भूमि पर अरहर, मकई आदि फसल लगाई जायेगी। यदि भारी बारिश होगी तो बीज तैयार होत ही धान की रोपनी में तेजी आयेगी। फिलहाल किसान आशान्वित हैं कि वर्षा होगी और धान की रोपनी भी की जायेगी। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jul 2024 16:12:54 +0530</pubDate>
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