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                <title>kisan aandolan - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>आखिर कब खत्म होगा किसान आंदोलन !</title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारतीय किसान यूनियन के एक घटक द्वारा चंडीगढ़ में नये सिरे से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी के बाद पुलिस-प्रशासन की सख्ती से बुधवार को सामान्य जीवन व यातायात बुरी तरह से प्रभावित हुआ।</div>
<div>किसानों को चंडीगढ़ जाने से रोकने पर पंजाब के संगठनों में रोष व्याप्त हो गया है। अब तक केंद्र सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोलने वाले संयुक्त किसान मोर्चा ने पंजाब की भगवंत मान सरकार के खिलाफ आंदोलन का फैसला लिया है। भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के नेता हरिंदर सिंह लाखोवाल ने अब भगवंत मान सरकार के सभी विधायकों के घरों का घेराव करने की बात</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149672/when-will-the-peasant-movement-end-after-all"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(28).jpg" alt=""></a><br /><div>भारतीय किसान यूनियन के एक घटक द्वारा चंडीगढ़ में नये सिरे से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी के बाद पुलिस-प्रशासन की सख्ती से बुधवार को सामान्य जीवन व यातायात बुरी तरह से प्रभावित हुआ।</div>
<div>किसानों को चंडीगढ़ जाने से रोकने पर पंजाब के संगठनों में रोष व्याप्त हो गया है। अब तक केंद्र सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोलने वाले संयुक्त किसान मोर्चा ने पंजाब की भगवंत मान सरकार के खिलाफ आंदोलन का फैसला लिया है। भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के नेता हरिंदर सिंह लाखोवाल ने अब भगवंत मान सरकार के सभी विधायकों के घरों का घेराव करने की बात कही है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि हम 10 मार्च को पूरे प्रदेश में आम आदमी पार्टी के विधायकों के घरों का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि आगे के आंदोलन को लेकर भी हम रणनीति बना रहे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि भगवंत मान ने सही से बात नहीं की और जिस तरह से मीटिंग छोड़कर निकल गए। वह ठीक नहीं था।लाखोवाल ने कहा कि सरकार से असहमति जताने के लिए AAP के सभी विधायकों के घरों के बाहर धरना दिया जाएगा। ये धरने 10 मार्च को सुबह 10 से दोपहर तक 3 बजे तक दिए जाएंगे।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्दी ही एक ऐक्शन प्लान तैयार करेंगे। इसके अलावा 15 मार्च को चंडीगढ़ स्थित सीएम भगवंत मान के घर का भी घेराव किया जाएगा। लाखोवाल ने कहा, ‘हम इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि कैसे अपने आंदोलन को आगे बढ़ाया जाए। हम 15 मार्च को सीएम भगवंत मान को चर्चा में शामिल होने के लिए आमंत्रित करेंगे। यदि वह उस दिन उपलब्ध नहीं हैं तो फिर अपनी सुविधा के अनुसार कोई और तारीख बता सकते हैं।’</div>
<div> </div>
<div> चंडीगढ़ से लगते इलाकों में पुलिस के अवरोधों के चलते वाहन घंटों जाम में फंसे रहे। पुलिस आंदोलनकारियों से निबटने के लिये सख्त बनी रही और कई किसान नेताओं को गिरफ्तार किया गया। चंडीगढ़ के अनेक प्रवेश मार्गों को सील किया गया था और भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर शुरू हुए आंदोलन से उपजे हालात पर आम लोग कहते रहे कि जाम किसानों की तरफ से है या सरकार की तरफ से।</div>
<div> </div>
<div>दरअसल, पंजाब जो लंबे समय से कृषि क्षेत्र में उदार दृष्टिकोण रखने वाला राज्य रहा है, तंत्र की संवेदनहीनता और शासन की सख्ती के चलते अशांत नजर आता है। भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार, जिसे कभी बदलाव का अग्रदूत कहा जाता था, अब खुद को प्रमुख हितधारकों-किसानों, राजस्व अधिकारियों और नौकरशाही के साथ उलझी हुई पा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि कहां कमी रही कि कृषि क्षेत्र अशांत बना हुआ है।</div>
<div> </div>
<div>समय रहते किसानों की मांगों को पूरा न किए जाने और कारगर समाधान के लिये परामर्श न मिल पाने से निराश किसान यूनियनों ने नये सिरे से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। जिसकी परिणति चंडीगढ़ चलो मार्च के रूप में सामने आई है। किसान नेता आरोप लगा रहे हैं कि किसानों की समस्याओं के समाधान पर संवेदनशील रवैया अपनाने के बजाय दमनात्मक कदम उठाये जा रहे हैं। जिसे वे देर रात छापेमारी करके किसान नेताओं की गिरफ्तारी और चंडीगढ़ की सीमाएं सील करने के रूप में देख रहे हैं। किसान नेता आरोप लगा रहे हैं कि मुख्यमंत्री मान ने किसानों की बैठक में से नाटकीय ढंग से वॉकआउट करके अपनी हताशा</div>
<div>को ही जाहिर किया है।</div>
<div> </div>
<div>वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री का कहना है कि पंजाब में किसान संगठनों में आंदोलन करने की होड़ मची है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि पंजाब धरनों का राज्य बनता जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरदार जंग लड़ रही है। सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिये तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों सहित पंद्रह राजस्व अधिकारियों को निलंबित किया है। साथ ही अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन न करने वाले कई अन्य अधिकारियों का तबादला किया गया है।</div>
<div> </div>
<div>जिसके विरोध में राजस्व अधिकारियों ने तल्ख प्रतिक्रिया व्यक्त की। जिसके प्रत्युत्तर में राजस्व अधिकारियों ने सामूहिक अवकाश लेने का विकल्प चुना। जिसके चलते प्रशासनिक काम बुरी तरह प्रभावित हुआ। हालांकि, बुधवार शाम उन्होंने अपनी हड़ताल वापस ले ली है। वैसे एक हकीकत यह भी है कि भले ही सरकार सख्त रवैया अपनाते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई के जरिये अपनी ताकत दिखा सकती है, लेकिन प्रणालीगत भ्रष्टाचार और नौकरशाही की नाराजगी की गहरी गुत्थी अभी भी अनसुलझी है। सवाल उठाया जा रहा है कि सरकार की यह सख्ती क्या हताशा का पर्याय है?</div>
<div> </div>
<div>वहीं प्रशासन का तर्क है कि लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन से बड़े निवेशक पंजाब में निवेश करने से कतरा रहे हैं। जिससे राज्य का आर्थिक विकास बाधित हो सकता है। लेकिन सवाल यह भी कि कृषि प्रधान राज्य क्या किसानों के हितों की अनदेखी कर सकता है? जिस तरह से लंबे समय से आंदोलनरत किसानों की मांगों के प्रति उदासीनता दर्शायी जा रही है, उससे किसानों की लोकतांत्रिक भागीदारी को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं। निश्चित रूप से किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन के दमन से सामाजिक विभाजन और गहरा होता है।</div>
<div> </div>
<div>दरअसल, पंजाब का संकट सिर्फ हड़ताली अधिकारियों या फिर विरोध करने वाले किसानों को लेकर ही नहीं है। यह असंतोष शासन की रीति-नीतियों पर भी सवाल उठाता है जो आंदोलनकारियों से सहज संवाद की कला को खोता प्रतीत हो रहा है। निश्चित रूप से अपने राज्य के लोगों के साथ सख्ती का व्यवहार तंत्र की नाकामी को ही उजागर करता है। निर्विवाद रूप से निराशाजनक वातावरण को यथाशीघ्र दूर करने के प्रयास किए जाने चाहिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Mar 2025 15:25:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>हाईकोर्ट का आदेश: एक हफ्ते में शंभू बॉर्डर खुलवाए हरियाणा सरकार।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>  </div>
<div>हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया है कि शंभू बॉर्डर पर की गई बैरिकेडिंग एक हफ्ते में खुलवाई जाए। इस दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी हरियाणा और पंजाब दोनों सरकारों की होगी। वहीं आंदोलनकारी किसान प्रशासन की तरफ से चिन्हित जगहों पर आंदोलन कर सकते हैं। </div>
<div>  </div>
<div>जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस विकास बहल की खंडपीठ ने किसानों के विरोध जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य को जाग जाना चाहिए, सीमा को हमेशा के लिए बंद नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने दोनों राज्यों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि कानून और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143037/high-court-orders-haryana-government-to-open-shambhu-border-within"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/download-(2).jpg" alt=""></a><br /><div> </div>
<div>हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया है कि शंभू बॉर्डर पर की गई बैरिकेडिंग एक हफ्ते में खुलवाई जाए। इस दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी हरियाणा और पंजाब दोनों सरकारों की होगी। वहीं आंदोलनकारी किसान प्रशासन की तरफ से चिन्हित जगहों पर आंदोलन कर सकते हैं। </div>
<div> </div>
<div>जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस विकास बहल की खंडपीठ ने किसानों के विरोध जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य को जाग जाना चाहिए, सीमा को हमेशा के लिए बंद नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने दोनों राज्यों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि कानून और व्यवस्था बनी रहे और राजमार्ग को उसके मूल गौरव पर बहाल किया जाए।</div>
<div> </div>
<div>हाईकोर्ट ने किसानों को कानून व्यवस्था बनाए रखने की नसीहत भी दी। कोर्ट ने कहा कि अब शंभू बॉर्डर पर महज 500 प्रदर्शनकारी हैं, इस लिए अब यह हाईवे खोला जा सकता है। यह हाईवे पिछले पांच महीने से बंद है इसे अब और बंद नहीं रखा जा सकता है। फरवरी में किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हरियाणा सरकार ने शंभू बॉर्डर को बंद कर दिया था, जिससे पंजाब से हरियाणा में प्रवेश करने वाले प्रदर्शनकारियों को रोका जा सके।</div>
<div> </div>
<div>हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल दीपक सभरवाल ने तर्क दिया कि 400-450 प्रदर्शनकारी अभी भी पंजाब की तरफ हाईवे पर बैठे हैं। वे अंबाला में प्रवेश कर एसपी कार्यालय का घेराव कर सकते हैं।</div>
<div>इस पर जस्टिस संधावालिया ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि वर्दीधारी लोग उनसे डर नहीं सकते। हम लोकतंत्र में रह रहे हैं, किसानों को हरियाणा में प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता, उन्हें घेराव करने दें।न्यायालय ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा निवारक उपायों के कारण राजमार्ग बंद किया गया और तब से 5-6 महीने बीत चुके हैंउन्होंने कहा कि जो डायवर्जन किया गया, उससे बहुत असुविधा हो रही है परिवहन वाहनों और बसों का कोई मुक्त प्रवाह नहीं है इसलिए आम जनता को बहुत असुविधा हो रही है।</div>
<div> </div>
<div> शुभकरण की मौत मामले में एफएसएल की रिपोर्ट भी हाईकोर्ट में पेश की गई । रिपोर्ट के अनुसार शुभकरण के सिर पर शॉट गन की गोली का जख्म लगा है। इस पर कोर्ट ने झज्जर के पुलिस कमिश्नर की अध्यक्षता में एसअसईटी बना जांच के आदेश दे दिए हैं। वहीं हाईकोर्ट के आदेश के बाद शंभू बॉर्डर पर किसानों की तरफ चहलकदमी बढ़ गई है। किसानों के चेहरे पर खुशी नजर आ रही है। किसान नेताओं का कहना है कि अगर बॉर्डर खुलता है तो वह दिल्ली जाएंगे।</div>
<div> </div>
<div>हाईकोर्ट के एडवोकेट वासु रंजन शांडिल्य ने शंभू बॉर्डर खुलवाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। शांडिल्य ने बताया कि पांच महीने से नेशनल हाईवे 44 बंद है। इससे अंबाला के दुकानदार, व्यापारी, छोटे बड़े रेहड़ी फड़ी वाले भुखमरी के कगार पर आ गए है।</div>
<div> </div>
<div>शंभू बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन के कारण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को 108 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। 13 फरवरी 2024 को किसान आंदोलन के कारण शंभू टोल प्लाजा को बंद किया गया था। तब से अभी तक अंबाला लुधियाना राजमार्ग शुरू नहीं हो सका है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 11 Jul 2024 15:24:45 +0530</pubDate>
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