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                <title>private school - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>कितने शौर्य और? यह सवाल अब देश से है</title>
                                    <description><![CDATA[[जब स्कूल पिंजरे बन जाएँ, तो बच्चों के सपने मरते हैं]]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161256/how-much-bravery-and-this-is-the-question-now-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/hindi-divas30.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक देश सचमुच तब रोता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसके बच्चों की चीखें उसकी कानों तक पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। शौर्य की मौत ने यही किया—हमारे राष्ट्रीय अंतःकरण को जड़ से पकड़कर झकझोर दिया। सोलह साल का वह बच्चा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दुनिया को समझने की दहलीज़ पर ही था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जाते-जाते अपने ही अस्तित्व से माफी माँग गया—“सॉरी मम्मी…</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मैं आखिरी बार आपका दिल तोड़ रहा हूँ।” यह शब्द किसी बेटे की अंतिम साँसें नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी सामूहिक असफलता का प्रमाण हैं—उस घाव की स्याही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सिर्फ बच्चों पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे भारत पर लगी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल</span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">के</span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">दसवीं कक्षा के छात्र शौर्य</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">की मौत सिर्फ़ एक त्रासदी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे शिक्षा-तंत्र की विफलता का निर्मम आईना है। सोलह साल का शौर्य—जिसका टखना मुड़ा हुआ था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने बस इतना कहा था कि वह डांस नहीं कर पाएगा—उसे उसी सुबह अपमानित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डांटा और इस कदर तोड़ा गया कि उसने मेट्रो स्टेशन से छलांग लगा दी। पीछे छोड़ा एक सुसाइड नोट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उसने लिखा कि “स्कूल स्टाफ ने इतना कुछ कहा कि मुझे यह करना पड़ा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और यह आखिरी विनती कि दोषियों पर कार्रवाई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि कोई और बच्चा उसकी तरह न मरे।</span>“<span lang="hi" xml:lang="hi"> एक बच्चा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अपने अंग दान करने की इच्छा लिख सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह स्कूल की बेरहमी से खुद को बचा न सका।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो किसी बच्चे की उड़ान का पहला आसमान होना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई जगह उन पिंजरों की तरह हो गए हैं—जहाँ सपने नहीं पनपते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सपनों के शव गिने जाते हैं। जिस उम्र में गिरना सीखने का हिस्सा होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ गिरना अपमान बना दिया गया। जिस उम्र में आँसू कमजोरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहज भावना होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ रोना ‘ओवरऐक्टिंग’ ठहराया गया। जिस उम्र में सबसे ज्यादा सहारा चाहिए होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ धमकी दी गई—“टीसी बना देंगे।” सोचिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चे का सबसे बड़ा अपराध बस इतना था कि वह इंसान था—महसूस करने वाला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डरने वाला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टूटने वाला। और हमारे ही शिक्षा संस्थानों ने उसी ‘इंसानियत’ पर पहला वार किया।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शौर्य</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">की घटना हमें बताती है कि हमारे स्कूल आज बच्चों को गढ़ नहीं रहे—उन्हें तोड़ रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हम अक्सर कहते हैं कि शिक्षक ईश्वर का रूप होते हैं। लेकिन क्या ईश्वर का रूप अपने ही बनाए बच्चे की रूह पर रोज़ चोट करता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या ईश्वर बच्चों को इस तरह डराता है कि वे खुद से ही माफी माँगने लगें</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">शौर्य के साथ जो हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह ‘अनुशासन’ नहीं—एक सुनियोजित मानसिक हत्या का नक्शा है। सिर्फ़ शब्दों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तानों और अपमान से किसी भी बच्चे को धीरे-धीरे भीतर से तोड़ा जा सकता है—और यही हुआ है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और यह सिर्फ़ एक स्कूल की घटना नहीं। यह हर उस स्कूल की कहानी है जहाँ बच्चों को समझने के बजाय नियंत्रित किया जाता है। जहाँ शिक्षा एक प्रक्रिया नहीं—दबाव का कारख़ाना बन चुकी है। जहाँ शिक्षक ज्ञान से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कठोरता से अपनी मौजूदगी साबित करते हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ बच्चों का डर ‘अनुशासन’ कहकर सुरक्षित रखा जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उनकी चुप्पी ‘परिपक्वता’ मान ली जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हम भूल गए हैं कि बच्चे पत्थर नहीं होते—वे हर ताना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर अपमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर धमकी को महसूस करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भीतर जमा करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जब वह बोझ असहनीय हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी कहीं एक चिट्ठी जन्म लेती है… जैसे शौर्य ने लिखी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शौर्य की चिट्ठी कोई कागज़ का टुकड़ा नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">यह उन सभी घुटी हुई आवाज़ों का विस्फोट है जो रोज़ स्कूलों में दम तोड़ देती हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह उन बच्चों का बयान है जो घर आकर चुप हो जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो रात में अचानक फूट पड़ते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनके भीतर तूफ़ान उमड़ता है पर समझने वाला कोई नहीं होता। त्रासदी यह है कि हमारा समाज बच्चों के दर्द को ‘झेलने’ लायक मान लेता है—उनकी हँसी को सज़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके आँसुओं को अपराध बना देता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और इस समाज की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि बच्चों के टूटने पर हम सहज कह देते हैं—“ये दौर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजर जाएगा।”</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सवाल यह है—कितने बच्चे गुजर जाएँगे</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अगर किसी सभ्यता का भविष्य उसके बच्चों में बसता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हमें स्वीकार करना होगा कि हमारा भविष्य खतरे में है। देश भर में छात्रों की आत्महत्याओं के आँकड़े महज़ आँकड़े नहीं—मदद की पुकार हैं। हर नंबर एक सन्नाटे में डूबी गोद है। हर घटना एक माटी हो चुके सपने का नाम है। और हर ‘दुःख प्रकट’ करने वाली प्रेस रिलीज़ हमारी बनावटी संवेदना का प्रमाण।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब इस ढहते हुए सिस्टम को सतही सुधारों से नहीं बदला जा सकता। ज़रूरत कठोर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्मम और तत्काल कदमों की है। हर स्कूल में प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता अनिवार्य हों— सिर्फ़ दिखावे के नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविक सहायता के लिए। शिक्षकों को संवेदनशीलता का अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाए—क्योंकि ज्ञान बिना करुणा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंसा बन जाता है। बुलिंग </span>(<span lang="hi" xml:lang="hi">उत्पीड़न</span>)<span lang="hi" xml:lang="hi"> पर जीरो-टॉलरेंस नीति लागू हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाहे दोषी विद्यार्थी हो या शिक्षक। स्कूलों का वातावरण ऐसा बने कि रोना शर्म न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टूटना उपहास न बने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और डरने पर न्याय मिले।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">और माता-पिता—यह चेतावनी आपके लिए भी है। बच्चों की चुप्पी को ‘अजीब व्यवहार’ मत समझिए। उनके बुझते चेहरे को ‘जिद’ मत कहिए। वे इसलिए नहीं बोलते क्योंकि उन्हें विश्वास हो चुका है कि कोई सुनेगा ही नहीं। उनकी रुलाई की काँपती आवाज़ को थाम लीजिए—इससे पहले कि वह एक चिट्ठी में बदल जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शौर्य लौटकर नहीं आएगा। उसकी जगह अब केवल एक खालीपन रहेगा—ऐसा खालीपन जो असहनीय है। मगर उसकी मौत को सिर्फ़ शोक की घटना बना देना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके प्रति दूसरी क्रूरता होगी। उसकी चिट्ठी हमें जलाने आई है—अगर अब भी न जले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न बदले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न सुधरे—तो अगली चिट्ठी भी किसी शौर्य द्वारा ही लिखी जाएगी। और तब हमारे पास रोने के सिवा कुछ नहीं बचेगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शौर्य टूट चुका है। अब फ़ैसला हमें करना है—क्या हम अगले शौर्य को बचाएँगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या उसके लिए भी केवल शोक-संदेश लिखेंगे</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 16:21:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आखिर किस दिशा मे जा रहे आज के युवा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बीते दिनों अहमदाबाद के सेवन्थ डे स्कूल में एक 9वीं कक्षा के छात्र  ने 10वीं कक्षा मे पढ़ने वाले छात्र की चाकू मारकर हत्या कर दी और उसके बाद बिना किसी पछतावे के अपने एक दोस्त व्हाट्सएप पर चैट करते हुए कह रहा कि उसने खून कर दिया है और उसे कोई परवाह नहीं है | इस घटना के बाद जहां एक तरफ पूरे स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे वही दूसरी ओर इस बात पर भी सबका ध्यान जाना चाहिए कि इतनी छोटी सी उम्र मे इतने कुत्सित कदम कैसे उठा ले रहे , आखिर परवरिश में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154120/after-all-in-which-direction-are-the-youth-of-today"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/download4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बीते दिनों अहमदाबाद के सेवन्थ डे स्कूल में एक 9वीं कक्षा के छात्र  ने 10वीं कक्षा मे पढ़ने वाले छात्र की चाकू मारकर हत्या कर दी और उसके बाद बिना किसी पछतावे के अपने एक दोस्त व्हाट्सएप पर चैट करते हुए कह रहा कि उसने खून कर दिया है और उसे कोई परवाह नहीं है | इस घटना के बाद जहां एक तरफ पूरे स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे वही दूसरी ओर इस बात पर भी सबका ध्यान जाना चाहिए कि इतनी छोटी सी उम्र मे इतने कुत्सित कदम कैसे उठा ले रहे , आखिर परवरिश में कहीं कमी है या बच्चों का समाजीकरण इस तरीके से हो रहा कि उन्हे सही और गलत के बीच का अंतर ही नहीं समझ मे आ रहा है| इस तरीके की वारदात कोई अकेली नहीं है बल्कि कुछ दिनों से लगातार ऐसी एक दो घटनाएं अपनी खबरों मे अपनी जगह बनाती जा रही हैं |</p>
<p style="text-align:justify;">इनमे से कुछ और घटनाओ पर नजर डालते हैं मसलन इसी अगस्त माह मे उत्तराखंड के काशीपुर मे ही एक 9वीं के छात्र ने अपने अध्यापक को बंदूक से गोली मार दी क्यूंकी अध्यापक ने उसे दंडित किया था , उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर जिले मे छात्रों के बीच आपस मे ही लड़ाई हों गई जिससे एक छात्र की मौत और चार छात्र घायल भी हों और हम वर्ष 2017 मे  दिल्ली के रेयॉन इंटरनेशनल स्कूल मे हुई घटना को कैसे भूल सकते है जिसने पूरे देश को झकझोर के रख दिया था महज सात वर्ष के छात्र प्रद्युम्न को 11 वीं के छात्र ने चाकू से हमला किया था और उसकी जान चली गई थी |</p>
<p style="text-align:justify;">अब सबसे अहम बात ये है कि हमारे बच्चे कहाँ सुरक्षित हैं ? क्या स्कूल में बच्चों को भेजने के बाद भी अभिभावक चैन की सांस नहीं ले सकते है ? क्या प्राइवेट स्कूल जो इतनी महंगी फीस लेने के बाद भी एक सुरक्षित वातावरण नहीं दे पा रहे हैं? वही दूसरी ओर बच्चों मे इतनी आक्रामकता क्यू बढ़ रही है इस पर भी व्यापक विचार विमर्श किए जाने की आवश्यकता है | आजकल संयुक्त परिवार की संख्या विरले ही देखने को मिलती है और शहरों मे तो यह विलुप्त ही हों गया है , ऐसे मे जब छोटी उम्र में ही बच्चों के माता पिता दोनों ही नौकरीपेशा हों और दोनों देर से ही घर आए और उसके बाद बच्चों को समय ना दे पाए और उनसे यह न पूछ पाए कि आज का दिन कैसा रहा , स्कूल मे कोई परेशानी तो नहीं हुई , किसी ने तंग तो नहीं किया, यह सब नहीं पूछ पाते हैं , और इससे कहीं ना कहीं उनके मनोविज्ञान पर असर डाल रहा | लेकिन केवल माता पिता ही जिम्मेदार नहीं हैं बल्कि कहीं ना कहीं समाज और सिनेमा भी जिम्मेदार हैं |</p>
<p style="text-align:justify;">आजकल सोशल मीडिया पर ऐसे अनगिनत मात्रा मे सामग्री मिल जाएगी जो एक दूषित प्रभाव बच्चों के ऊपर डालते हैं | ऑनलाइन गेम्स जैसे कि पब जी और ब्लू ह्वैल जैसे गेम्स मे भी हिंसा को नॉर्मल तरीके से दिखाया जाता है बच्चे काल्पनिकता मे ही सही लेकिन वे हथियरों को खरीदते हैं और दुश्मनों को उन घातक हथियारों से मरते भी हैं , देखने मे ये भले ही ये साधारण लगे लेकिन इसका परिणाम उनके व्यक्तित्व मे दिखाई देने लगता है | फिल्मों ने इस तरीके की घटनाओं को बढ़ाने मे आग मे घी का काम किया है , आजकल की फिल्मों मे इस बात की होड है कि कौन कितनी ज्यादा मार काट और हिंसा दिखा सकता है , फिल्मों को R श्रेणी मे रखा जाने लगा है जिसका मतलब ही है कि पूरी फिल्म में भर भर के खून खराबा दिखाया गया है |</p>
<p style="text-align:justify;">दर्शकों की मांग भी अब ऐसी ही फिल्मे हैं, ऐसा लगता ही कि सामाजिक और पारिवारिक फिल्मों का जमाना चला गया है और अब वह बीते दिनों की बात हों गई जिसमे कुछ संदेश छिपा हुआ रहता था | पहले फिल्मे समाज का आईना हुआ करती थी अब समाज फिल्मों का आईना हों गया है | आज ऐनमल,पुष्पा, केजीएफ और मार्को जैसी फिल्मों की भारी मांग है और इनकी कमाई अरबों मे हों रही है और कालीधर लापता, आइ वॉन्ट टू टॉक, वनवास जैसी फिल्मे कब आती है और चली जाती हैं पता ही नहीं चलता इन्हे शोज ही नहीं मिलते हैं | इसके साथ ही सोशल मीडिया ने भी बच्चों के मनोविज्ञान पर असर डाला है, किसी भी प्लेटफॉर्म की कोई निश्चित गाइडलाइंस नहीं है, अभिभावक को यह देखना चाहियर कि उनका बच्चा मोबाईल पर क्या देख रहा , कही उसके व्यवहार मे कोई परिवर्तन तो नहीं आ रहा |अतः यह आवश्यक है कि समाज के सभी जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारी समझे, जरूरत पड़े तो बच्चे की कॉउन्सलिंग करिए क्यूंकी हर एक बच्चा अनमोल है |</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/154120/after-all-in-which-direction-are-the-youth-of-today</link>
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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 17:23:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शर्मनाक :नाबालिग हिन्दू बच्चियों को टार्गेट कर रहे हैं मजहबी दरिंदे!  </title>
                                    <description><![CDATA[<div>अब राजस्थान के ब्यावर में एक बार फिर अजमेर सैक्स कांड की तर्ज स्कूली बच्चियों को ब्लेक मेल कर दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। आपको बता दें कि करीब पैंतीस साल पहले एक सौ से अधिक स्कूली छात्राओं को फोटो के जरिए ब्लेक मेल कर दुष्कर्म करने का बेहद चर्चित घिनौना कांड हुआ था अब एक बार फिर राजस्थान के ही ब्याबर में दस से अधिक नाबालिग स्कूली छात्राओं को मोबाइल देकर उन्हें दोस्ती दुष्कर्म</div>
<div>और धर्मपरिवर्तन के लिए ब्लेकमेल करने के दिल दहलाने वाले मामले का खुलासा हुआ है। </div>
<div>  </div>
<div>राजस्थान में ब्यावर जिले के बिजयनगर इलाके में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149028/67bda745dde10"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(3)6.jpg" alt=""></a><br /><div>अब राजस्थान के ब्यावर में एक बार फिर अजमेर सैक्स कांड की तर्ज स्कूली बच्चियों को ब्लेक मेल कर दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। आपको बता दें कि करीब पैंतीस साल पहले एक सौ से अधिक स्कूली छात्राओं को फोटो के जरिए ब्लेक मेल कर दुष्कर्म करने का बेहद चर्चित घिनौना कांड हुआ था अब एक बार फिर राजस्थान के ही ब्याबर में दस से अधिक नाबालिग स्कूली छात्राओं को मोबाइल देकर उन्हें दोस्ती दुष्कर्म</div>
<div>और धर्मपरिवर्तन के लिए ब्लेकमेल करने के दिल दहलाने वाले मामले का खुलासा हुआ है। </div>
<div> </div>
<div>राजस्थान में ब्यावर जिले के बिजयनगर इलाके में हिंदू लड़कियों को फुसलाकर, उनके साथ यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग करना और उन्हें आखिर में बेचने की कोशिश करने का खतरनाक प्लान सामने आया है। पिछले कुछ दिनों से मामला सुर्खियों में छाया जब 4-5 नाबालिग लड़कियों के परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अभी तक ‘मुस्लिम गिरोह’ के 10 लोगों को गिरफ्तार किया।</div>
<div>एक जानकारी के अनुसार प्राथमिक जांच में 30-35 से ज्यादा हिंदू लड़कियों को यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग के मामले में फंसाने का मामला सामने आया है।</div>
<div> </div>
<div>अभी तक इस मामले में 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। साथ ही एक पैटर्न के तहत आरोपी एक ही प्राइवेट स्कूल की लड़कियों को फंसाने का काम करते थे इसका भी खुलासा हुआ है।जांच में सामने आया है की, ‘मुस्लिम गिरोह’ के युवक मजदूरी का काम करते है, लेकिन उनके पास महंगे मोबाईल फोन, महंगी गाड़ियां कहां से आयी इस पर जांच जारी है। ये मुस्लिम गिरोह हिंदू लड़कियों को कैफे ले जाकर उनके साथ अश्लील हरकत करते थे। वहीं पर वह उनका वीडियो भी बनाए जाते। इन अश्लील वीडिओ के जरिए उन्हें ब्लैकमेल किया जाता। उनसें और भी लड़कियों को जाल में फांसने को कहा जाता।</div>
<div> </div>
<div>आपको बता दें कि राजस्थान के ब्यावर जिले से मोबाइल देकर रेप करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. आरोप है कि कुछ युवक नाबालिग लड़कियों को फोन देकर उन्हें अपने झांसे में लेते थे और फिर उन्हें अपनी हवस का शिकार बनाते थे. ऐसे अलग-अलग घटनाक्रम सामने आने के बाद सर्वसमाज के लोगों ने थाने का घेराव कर प्रदर्शन किया और नाबालिगों के साथ दुराचार करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की. पूरा घटनाक्रम बिजयनगर थाना इलाके का है.घटनाक्रम इतना बढ़ गया कि सर्वसमाज के हजारों लोग सड़कों पर निकल पड़े और थाने को घेराव कर दिया. परिस्थितियों को कंट्रोल करने के लिए मौके पर चार थानों की पुलिस के साथ बड़े अधिकारियों को भी तैनात करना पड़ा. आक्रोशित भीड़ को देखकर मसूदा डीएसपी सज्जनसिंह ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया. लेकिन लोगों में इस मामले को लेकर गहरी नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है। </div>
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<div>स्थानीय लोगों और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विशेष समुदाय के युवकों ने प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली नाबालिग बच्चियों को मोबाइल फोन दिया और अपने झांसे में फंसाकर उनका रेप किया गया. अब भी उनका यौन शोषण किया जा रहा था . इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं. लोक-लाज के डर से कई नाबालिग और उनके परिवार पुलिस थाने नहीं पहुंचते. इसी वजह से आरोपियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। </div>
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<div>बिजयनगर थाना प्रभारी करणसिंह का कहना है कि 4 से 5 नाबालिग पुलिस के सामने आई हैं. बच्चियों और उनके पेरेंट्स ने पुलिस को शिकायत दी है कि कुछ युवकों ने पहले मोबाइल दिए और उसके बाद दबाव बनाकर उनका देह शोषण किया. रिपोर्ट पर पुलिस ने 3 अलग - अलग मामले दर्ज कर 7 आरोपियों डिटेन किया है. पुलिस गंभीरता से पूछताछ कर रही है। </div>
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<div>पैंतीस साल बाद अजमेर कांड की तर्ज पर ही हिन्दू लड़कियों को टार्गेट कर उनका यौन शोषण करने के इस मामले से क्षेत्र के हर अभिभावक के दिल में दहशत और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर आशंका पैदा कर दी है। राजस्थान के बहुचर्चित साल 1992 के अजमेर सेक्स और ब्लैकमेल कांड में 32 साल अजमेर के पॉक्सो कोर्ट ने  6 आरोपियों को दोषी ठहराया था।सभी को उम्र कैद की सजा और तीस लाख जुर्माना लगाया गया। ये मामला अजमेर के प्रतिष्ठित कॉलेज की 100 से ज्यादा छात्राओं से जुड़ा है, जिनके साथ ब्लैकमेलिंग हुई थी।</div>
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<div>मौजूदा ब्लेकमेल दुष्कर्म कांड का खुलासा होने के बाद दहशत का आलम यह है कि कुछ अभिभावकों ने इस तरह के षडयंत्र के चलते अपनी लडकियों को स्कूल कालेज नहीं भेजने का फैसला भी किया है। हिन्दू समुदाय में गहरा आक्रोश है मामले को लेकर प्रदर्शन में विश्व हिंदू परिषद के सैकड़ों लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को अपराधियों की गिरफ्तारी का अल्टीमेटम दिया। </div>
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<div>प्रशासन ने विजयनगर के उस कैफे पर बुलडोजर कार्रवाई की है, जहां नाबालिग छात्राओं के साथ आरोपी मुलाकात कर उन्हें फंसाते थे. कैफे में अतिक्रमण को लेकर नोटिस जारी किया गया था, जिसके 24 घंटे बाद अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत कार्रवाई की गई।</div>
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<div>स्कूल की नाबालिग लड़कियों से रेप और उन्हें ब्लैकमेल करने का मामला 15 फरवरी को सामने आया था। बिजयनगर (ब्यावर) स्थित प्राइवेट स्कूल में पढ़ रही लड़कियों से रेप और अश्लील फोटो-वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने की जानकारी सामने आई थी। नाबालिग छात्राओं के परिवार वालों ने इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि लड़कियों को जबरन कलमा पढ़ने, रोजा रखने और धर्मांतरण के लिए विवश किया जा रहा था।</div>
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<div>इस मामले में पुलिस ने पॉक्सो सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर तीन नाबालिग को डिटेन किया गया है। पूर्व पार्षद (निर्दलीय) हकीम कुरैशी को 23 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। इसको कोटड़ा स्थित पॉक्सो कोर्ट के जज के आवास पर उसी दिन शाम को पेश किया गया था। पूर्व पार्षद को 5 दिन के रिमांड पर लिया गया था। उसपर अन्य आरोपियों का सहयोग करने का आरोप है।</div>
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<div>श्रवण (कैफे संचालक), करीम और आशिक सात दिन के रिमांड पर हैं। लुकमान उर्फ सोहेब (20), सोहेल मंसूरी (19), रिहान मोहम्मद (20) और अफराज (18) को 5 दिन के रिमांड पर दिया गया है जबकि तीन नाबालिगों को सुधार गृह मे रखा गया है।  राजस्थान की डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने बिजयनगर में स्कूली छात्राओं के साथ रेप और ब्लैकमेलिंग की घटना पर कहा कि दोषियों को सजा मिलेगी. रविवार को पुलिस ने इस गैंग के मेन लीडर को गिरफ्तार कर लिया है। </div>
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<div>बड़ी बात है कि हकीम कुरैशी, रियान मंसूरी के साथ गैंग मेन लीडर है. एक नाबालिग छात्रा ने आरोप लगाया है कि हकीम कहता था कि मैं भगाने में साथ दूंगा. अक्सर ये धमकाते थे. कुछ मिलाकर भी दिया पीने के लिए. फिर मुझे कुछ समझ नहीं आया ये जो कहते गए, मैं करती गई. मुझे बुरका पहनने के लिए टॉर्चर करने लगे. मस्जिद में 5 नमाज होती है, उसके बारे में बताया. रोजा आ रहे हैं, रोजा करने के लिए बोला. कैसे करना है, ये सब बताया. फिलहाल पुलिस ने हकीम को गिरफ्तार कर लिया है. उधर रविवार को ब्यावर में आक्रोशित लोग सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया और आक्रोश रैली निकालकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि 48 घंटे में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो राजस्थान बंद का आह्वान किया जाएगा. डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने बिजयनगर में स्कूली छात्राओं के साथ हुई ब्लैकमेलिंग की घटना पर कहा कि पुलिस मामले में कार्रवाई कर रही है और दोषियों को सजा मिलेगी। </div>
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<div>इससे पहले शनिवार को राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा था कि इस मामले में और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपाय किए जा रहे हैं. वासुदेव देवनानी ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों और अवैध रेस्टोरेंट्स पर कड़ी निगरानी रखी जाए और जरूरत पड़ने पर छापेमारी की कार्रवाई की जाए. विधानसभा अध्यक्ष ने तो बताया कि अजमेर में भी 200 से 250 बच्चे गायब हैं, जिनमें अधिकांश लड़कियां शामिल हैं आशंका है कि इन लापता बच्चियों के गायब होने के पीछे भी इसी तरह के कुछ गैंग जिम्मेदार हो सकते हैं जो नाबालिग हिन्दू बच्चियों को टार्गेट कर रहे हैं। इस की गहन व उच्च स्तरीय जांच और विवेचना की जरूरत है। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 16:57:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निजी विद्यालय में शौचालय में मिला कैमरा, छात्राओं ने किया जमकर हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>सोनभद्र। </strong>जिले के रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के एक निजी स्कूल में लड़कियों के बाथरूम से कैमरा पकड़ा गया है। इसकी जानकारी होने पर भड़की छात्राओं और अभिभावकों ने जमकर हंगामा किया। स्कूल के बगल में रहने वाले एक नाबालिग किशोर ने बाथरूम में कैमरा लगाया था और वाईफाई के जरिए अपने मोबाइल से कनेक्ट किया था। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है। संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर छानबीन में जुट गई है।रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में स्थित विद्यालय में 12वीं तक की पढ़ाई होती है। इसमें छात्राओं की संख्या अधिक है।</div>
<div>  </div>
<div>शनिवार को छात्राएं</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146377/camera-found-in-toilet-in-private-school-girl-students-created"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/1-------------------------1.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>सोनभद्र। </strong>जिले के रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के एक निजी स्कूल में लड़कियों के बाथरूम से कैमरा पकड़ा गया है। इसकी जानकारी होने पर भड़की छात्राओं और अभिभावकों ने जमकर हंगामा किया। स्कूल के बगल में रहने वाले एक नाबालिग किशोर ने बाथरूम में कैमरा लगाया था और वाईफाई के जरिए अपने मोबाइल से कनेक्ट किया था। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है। संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर छानबीन में जुट गई है।रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में स्थित विद्यालय में 12वीं तक की पढ़ाई होती है। इसमें छात्राओं की संख्या अधिक है।</div>
<div> </div>
<div>शनिवार को छात्राएं स्कूल के शौचालय की ओर गईं तो उन्हें दिवार पर छोटा कैमरा लगा दिखा।शनिवार को छात्राएं स्कूल के शौचालय की ओर गईं तो वहां उन्हें दिवार पर छोटा कैमरा लगा दिखा। शौचालय की दीवार पड़ोस में ही रहने वाले एक किशोर के घर से लगी है। छात्राओं का आरोप है कि उस लड़के ने ही शौचालय में दीवार में स्पाई कैमरा लगा दिया। जब उन्होंने हंगामा करना शुरू किया तो कैमरा हटवा दिया गया। इसकी सूचना प्रधानाचार्य और पुलिस को दी गई।छात्राओं का आरोप है कि किशोर ने स्पाई कैमरे के माध्यम से उनके वीडियो और फोटो लिए हैं। पुलिस के पहुंचने पर उसने डिलीट कर दिया। वहीं रॉबर्ट्सगंज कोतवाल सत्येंद्र राय ने पर पहुंचकर आरोपी को हिरासत में ले लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Nov 2024 16:35:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निजी स्कूलों की मनमानी से स्कूली शिक्षा हुई महंगी, अभिभावक झेल रहे दंश</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी किताबो के स्थान प्राइवेट पब्लिशर्स की मंहगी किताबो से दे रहे शिक्षा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143090/due-to-the-arbitrariness-of-private-schools-school-education-has"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/education1.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बलरामपुर </strong>जंहा सरकार सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से शिक्षा को लेकर आमजन मानस में जागरूकता फैला रही जिससे शिक्षा के प्रकाश से अज्ञानता का अंधकार दूर हो जिसके लिए तमाम स्लोगन ,यात्राएं, रंगोली,के साथ अन्य माध्यमो से जागरूकता अभियान चला आमजनता को प्रेरित किया जाता है कि अपने बच्चो को शिक्षा अवश्य दे चाहे 2 की जगह एक रोटी ही खाये पर बच्चो को अवश्य पढाये लेकिन शिक्षा को व्यवसाय बनाने वाले संस्थाओ ने शिक्षा को इतना मंहगा कर दिया कि गरीब व मध्यम वर्ग के लिए आर्थिक अभिशाप साबित हों रहा कारण सरकारी स्कूलों में शिक्षा का आभाव तो वही निजी स्कूलों में दिन-ब-दिन स्कूली शिक्षा महंगी होती जा रही है।</div>
<div> </div>
<div>इसका मुख्य कारण निजी स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर की पुस्तकें लगवाना, महंगी वर्दी और फीस बढ़ोतरी है। निजी स्कूलों की इस मनमानी से हर कोई वाकिफ है लेकिन बच्चों के भविष्य को देखते हुए कोई भी अभिभावक कुछ बोलने को तैयार नहीं है। वहीं, नियमों से बंधा प्रशासन भी कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि इस लूट से बचने के लिए लोगों को आगे आना होगा ताकि यूनियन बनाकर अपनी बात सरकार के समक्ष रखी सके।</div>
<div> </div>
<div>जनपद बलरामपुर के निजी विद्यालय की बात की जाए तो बच्चे की किताबें और स्टेशनरी की कीमत प्राथमिक कक्षाओं के भी 5 से 6 हजार रुपये से कम नही है। अभिभावक ने बताया कि स्कूल की ओर से बताई गई पुस्तकें चिन्हित दूकान व विद्यालय के अलावा शहर के किसी दुकान में नहीं मिलतीं। लेकिन अभिभावकों की मजबूरी यह कि बच्चों को शिक्षा जो दिलाना है।वही अभिभावक यह भी कहते है कि अकेले आवाज उठाना मुमकिन नहीं है।सर्व समाज को आगे आना होगा तब ही विद्यालय की मनमानी पर अंकुश लगाया जा सकता है ।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में आठवीं तक मुफ्त किताबें मिलती हैं और अन्य पुस्तकें कम रेट पर उपलब्ध होती हैं।लेकिन प्राइवेट विद्यालय की किताबो व कापियों का आलम ही अजीब है मनमाना प्रिंट करवा कर अभिभावक की जेबो पर डांका डाला जा रहा है। इसके साथ ही हर नए सीजन में किताबें बदल जाती है जिससे हर वर्ष मंहगे किताब का बोझ भी परिवार को झेलना पड़ता है जो किसी अभिशाप से कम नही। </div>
<div> जंहा सरकारी स्कूल की किताब अगर सरकारी रेट के बजाय चाहे 15 प्रतिशत अतिरिक्त पैसे ले लें लेकिन कम से कम निश्चित दाम पर तो यह मिलें।</div>
<div> </div>
<div> अभिभावक का कहना कि निजी स्कूलों द्वारा पुस्तकों और वर्दी पर चल रही लूट का सभी को पता है लेकिन इस पर कभी कार्रवाई नहीं होती। प्रशासन स्कूलों पर सख्ती बरते तो कुछ हो सकता है।लेकिन यहां तो यही लगता है कि निजी विद्यालय संचालको को सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों की मौन स्वीकृति मिली हुई है जिसके चलते उनपर कोई कार्यवाही नही होती और मनमानी अपने चरम पर पहुच चुका है ।</div>
<div> </div>
<div>अगर सरकारी निर्देशो की बात की जाय तो सीबीएसई द्वारा अधिसूचना के अनुसार निजी स्कूल गैर लाभकारी संस्थाएं हैं। सोसाइटी, ट्रस्ट या कंपनी का उद्देश्य स्कूलों को गैर लाभकारी तरीके से चलाना होना चाहिए। स्कूल को केवल इतनी फीस लेनी चाहिए, जितना उनके खर्चे निकालने के लिए पूरी हो सके। सीबीएसई की ओर से जारी दिशानिर्देश के अनुसार स्कूल अभिभावक को किसी भी बुकसेलर या खुद से पुस्तकें और वर्दी लेने के लिए नहीं कह सकते। ऐसा करने पर स्कूल पर कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही स्कूलों को हर साल फीस बढ़ाने की सीमा भी तय की गई है लेकिन इसके बावजूद निजी स्कूल शासन के निर्देशों का अंदेखा कर शिक्षा का व्यापार कर रहे हैं।जिसपर प्रशासन को नकेल कसने की जरूरत है जिससे इनकी मनमानी पर अंकुश लग सके।</div>
<div> </div>
<div>इस सम्बंध में वरिष्ठ अध्यापक मास्टर कय्यूम से बात की जाती है तो उनका कहना है कि निजी विद्यालयों की मनमानी से आम उपभोगता काफी परेशान है प्रशासन को इस बिषय पर नियमावली के अनुसार मंहगी किताबें व अन्य सामग्री जो विद्यालय अपने माध्यम से मंहगी कीमत पर बेचते है इसके साथ हर वर्ष प्राइवेट विद्यालय किताबें बदल देते है इस पर अंकुश लगना चाहिए और एनसीआरटी के नियमो के पालन के साथ सरकारी किताबो का संचालन हो जिससे हर अभिभावक को हर दूकान पर सस्ती किताबें उपलब्ध हो सके।</div>
<div> </div>
<div>इस सम्बंध में प्रदीप कुमार से बात की गई तो उनकी पीड़ा साफ निजी विद्यालयों के सम्बंध में दिखी जिनको एल केजी की किताब के लिए चिन्हित दूकान जिनका विद्यालय से सेटिंग है 35 सौ देना भारी पड़ा जिसको लेकर उन्हों ने शासन से मांग की है कि निजी विद्यालय की मनमानी पर लगाम लगे और सरकारी स्कूलों की तरह एक सरकारी मानक के अनुसार निजी विद्यालयों में भी किताबें व अन्य सामग्री उपलब्ध हो जिसको उपभोगता कही से भी खरीद सके और बिद्यालय संचालको की मनमानी पर अंकुश लग सके।</div>
<div> </div>
<div>इस सम्बंध में श्यामू सिंह ने बताया कि निजी विद्यालय संचालको की मनमानी पर अंकुश लगना चाहिये और निजी स्कूलों के किताब कापियां और अन्य विद्यालय सामग्री बेचने पर रोक लगा सार्वजनिक बिक्री के नियम का पालन करना चाहिये जिससे हर व्यक्ति को सभी दूकान पर वह सामग्री मिल सके और उचित दाम में मिल सके ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jul 2024 16:24:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों पर कार्रवाई हवा-हवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>अम्बेडकरनगर। </strong>बिना मान्यता वाले विद्यालयों पर कठोर कार्रवाई का शासन का आदेश है। यह आदेश जनपद में हवा-हवाई साबित हो रहा है। बिना मान्यता के चल रहे विद्यालयों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। मीडिया की पड़ताल में पता चला कि जनपद में अभी भी सैकड़ो स्कूल बगैर मानक पूरा किए बेरोकटोक संचालित हो रहे हैं।शिक्षा निदेशक का आदेश है कि यदि कोई व्यक्ति बिना मान्यता लिए या मान्यता वापस होने के बाद भी स्कूल चलाता है तो उस पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसके साथ ही उल्लंघन जारी रहने पर हर दिन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142983/action-is-being-taken-against-schools-running-without-recognition"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/education.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>अम्बेडकरनगर। </strong>बिना मान्यता वाले विद्यालयों पर कठोर कार्रवाई का शासन का आदेश है। यह आदेश जनपद में हवा-हवाई साबित हो रहा है। बिना मान्यता के चल रहे विद्यालयों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। मीडिया की पड़ताल में पता चला कि जनपद में अभी भी सैकड़ो स्कूल बगैर मानक पूरा किए बेरोकटोक संचालित हो रहे हैं।शिक्षा निदेशक का आदेश है कि यदि कोई व्यक्ति बिना मान्यता लिए या मान्यता वापस होने के बाद भी स्कूल चलाता है तो उस पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसके साथ ही उल्लंघन जारी रहने पर हर दिन 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।</div>
<div> </div>
<div>जनपद में लगभग 700 प्राइवेट स्कूल संचालित हैं। शिक्षा सत्र शुरू होते ही शिक्षा विभाग द्वारा शहर से लेकर गांव तक अवैध रूप से संचालित स्कूल बन्द कराने की होड़ मच जाती है।बेसिक शिक्षा विभाग बिना मान्यता के एक भी स्कूल जिले में संचालित न होने का दावा करता है। लेकिन हाल ये है कि धड़ल्ले से बिना मान्यता के स्कूल चल रहे हैं। अफसरों का दावा है कि उनके संज्ञान में ऐसा एक भी स्कूल नहीं है, जो बिना मान्यता के संचालित हो रहा है। हकीकत ये है कि बेसिक शिक्षा विभाग की नाक के नीचे जनपद मुख्यालय पर ही बिना मान्यता के स्कूल संचालित हो रहे हैं।</div>
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<div>आज तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।शिक्षा सत्र के साथ ही जिले में बड़ी संख्या में बिना मान्यता के स्कूलों का संचालन शुरू हो गया है। इसके बाद भी जिम्मेदार जानकर भी अनजान बने हुए हैं। इसके चलते बिना मान्यता के संचालित स्कूल संचालकों के मंसूबे बढ़ते जा रहे हैं। कहने के लिए विभाग हर साल बिना मान्यता के संचालित स्कूलों को बंद कराने के लिए उन्हें चिन्हित कराता है और नोटिस भी जारी करता है। लेकिन थोड़े दिन बाद फिर से ये स्कूल संचालित होने लगते हैं। इस प्रकार जनपद में शिक्षा का अवैध व्यापार प्रफुल्लित हो रहा है। इस संदर्भ में बसा से वार्ता करने का प्रयास किया गया परंतु फोन नहीं रिसीव हुआ।</div>
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                <pubDate>Wed, 10 Jul 2024 15:27:07 +0530</pubDate>
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