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                <title>neet ug 2024 - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>अदालत ने फैसला दिया न्याय की टूटी आस! </title>
                                    <description><![CDATA[<div>चार जून को मेडिकल प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट घोषित होने के बाद जिस तरह की गड़बड़ियों अनियमितताओं  हेराफेरी पेपर लीक होने के मामले एक के बाद एक सामने आए वह इस देश की सबसे महत्त्वपूर्ण मेडिकल शिक्षा में प्रवेश के लिए कई जा रही परीक्षा की शुचिता पर सवालिया निशान खड़ा करती है वरन यह कहना अधिक उचित होगा कि तमाम खामियां उजागर हो गयी हैं लेकिन बहुत विनम्रता और देश की न्यायिक व्यवस्था में पूरी आस्था व सम्मान रखते हुए पूरी जिम्मेदारी के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संविधान प्रदत्त अधिकार के तहत निवेदन करता हूं कि नीट परीक्षा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143568/the-court-gave-its-decision-hope-of-justice-is-broken%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/अदालत-ने-फैसला-दिया-न्याय-की-टूटी-आस!.gif" alt=""></a><br /><div>चार जून को मेडिकल प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट घोषित होने के बाद जिस तरह की गड़बड़ियों अनियमितताओं  हेराफेरी पेपर लीक होने के मामले एक के बाद एक सामने आए वह इस देश की सबसे महत्त्वपूर्ण मेडिकल शिक्षा में प्रवेश के लिए कई जा रही परीक्षा की शुचिता पर सवालिया निशान खड़ा करती है वरन यह कहना अधिक उचित होगा कि तमाम खामियां उजागर हो गयी हैं लेकिन बहुत विनम्रता और देश की न्यायिक व्यवस्था में पूरी आस्था व सम्मान रखते हुए पूरी जिम्मेदारी के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संविधान प्रदत्त अधिकार के तहत निवेदन करता हूं कि नीट परीक्षा में तमाम गड़बड़ी मनमानी अव्यवस्था और विभिन्न एजेंसियों की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को दरकिनार कर देश की सर्वोच्च अदालत ने जिस तरह का निर्णय दिया वह नितांत निराशा और न्याय की अवधारणा को चोटिल करने वाला प्रतीत होता है। </div>
<div> </div>
<div>आपको बता दें कि नीट यूजी परीक्षा में करीब 24 लाख अभ्यर्थियों भागीदारी की इस परीक्षा में व्यापक गड़बड़ी और अव्यवस्था देखने को मिली यहां तक कि निर्धारित तिथि से दस दिन पहले चुनाव परिणाम के आपाधापी भरे माहौल में नीट का रिजल्ट घोषित कर मेन स्ट्रीम के ध्यान से बचाव करने की कोशिश की गई। नीट के अभी तक के इतिहास में 720 में से 720 अंक हर साल सिर्फ एक या दो अभ्यर्थी ही ला पाते थे लेकिन इस बार के नीट में 67 छात्रों ने फुल मार्क्स लाकर चौका दिया। चार जून को रिजल्ट घोषित होने के बाद नीट परीक्षा में कई गई कारगुजारियों की पड़ताल शुरू हुई तो पता चला कि हरियाणा के एक ही परिक्षा केंद्र ने 720 में से 720 लाने वाले छह टापर दिए इतना ही नहीं दो ढाई हजार किलोमीटर दूर से आकर कुछ अभ्यर्थियों ने अपने ईचछित परिक्षा केंद्र पर परीक्षा दी इतना ही नहीं एक रिसाॅर्ट किराए पर लेकर परीक्षा की पहली रात कुछ अभ्यर्थियों को पेपर हल कराया गया और जांच एजेंसी ने पेपर लीक किए गए पेपर की अधजली प्रति बरामद करने में भी सफलता हासिल की। तमाम गड़बड़ी की जांच की शुरुआत बिहार से हुई. पटना पुलिस ने परीक्षा में हुई धांधली की जांच की शुरुआत की. पटना पुलिस ने प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की और 11 मई को पेपर लीक माले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया.मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. 17 मई को सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई को आयोजित नीट-यूजी 2024 में गड़बड़ियों का आरोप लगाने वाली याचिका पर केंद्र और एनटीए से जवाब मांगा.सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक समेत अन्य दूसरी गड़बड़ियों के आधार पर नए सिरे से दोबारा से परीक्षा कराने वाली याचिका पर 11 जून को केंद्र और एनटीए से जवाब मांगा। </div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने 18 जून को सुनवाई के दौरान कहा कि NEET-UG 2024 परीक्षा के संचालन में किसी की तरफ से लापरवाही हुई हो, लेकिन इससे पूरी तरह निपटा जाना चाहिए.विवाद के बीच केंद्र सरकार ने 22 जून को एनटीए के महानिदेशक सुबोध कुमार को हटा दिया और परीक्षा में हुई धांधली की जांच CBI को सौंप दी. 23 जून को CBI ने मामले में पहली FIR दर्ज की। 23 जून को अधिकारियों ने बताया कि नीट-यूजी में पहले ग्रेस मार्क्स पाने वाले 1,563 उम्मीदवारों में से 813 ने दोबारा परीक्षा दी.27 जून को नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई ने पहली गिरफ्तारी की. सीबीआई ने पटना से नीट पेपर लीक मामले के आरोपी मनीष प्रकाश और आशुतोष को गिरफ्तार किया.1 जुलाई को एनटीए ने संशोधित परिणाम घोषित किया. जिसके बाद परीक्षा में टॉप रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों की संख्या 67 से 61 हो गई। </div>
<div> </div>
<div>सीबीआई देशभर में लगातार इस मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ और छापेमारी की गई । केंद्रीय एजेंसी ने नीट यूजी पेपर लीक केस में पटना एम्स के चार मेडिकल छात्रों को भी हिरासत में लिया है. पटना एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. गोपाल कृष्ण पाल के मुताबिक सीबीआई एम्स से चार स्टूडेंट्स से पूछताछ कर रही है। इन पर सॉल्वर के तौर पर काम करने का आरोप है। यही नहीं जांच में पता चला है कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जमशेदपुर (झारखंड) के 2017 बैच के सिविल इंजीनियर पंकज कुमार उर्फ ​​​​आदित्य ने कथित तौर पर हजारीबाग में एनटीए ट्रंक से नीट-यूजी पेपर चुरा लिया था. सीबीआई ने अपनी जांच में पाया कि सात लोगों को प्रश्नपत्र हल करने का काम सौंपा गया था. इन सात लोगों को लगभग 45 मिनट में 25-25 प्रश्न हल करने का काम सौंपा गया था. अब तक ‘सॉल्वर मॉड्यूल’ के पांच लोगों को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है. नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई ने कुल 16 लोगों को गिरफ्तार किया है।</div>
<div> </div>
<div>पंकज हजारीबाग से गिरफ्तार किया गया चौथा शख्स है. सीबीआई ने इससे पहले ओएसिस स्कूल के प्रिंसिपल अहसानुल हक, वाइस प्रिंसिपल इम्तियाज आलम और एक स्थानीय पत्रकार जमालुद्दीन को यहीं से गिरफ्तार किया था. इस दौरान जांच टीम ने स्कूल में तलाशी ली थी सबूत इकट्ठा किए थे। नीट परीक्षा में गड़बड़ी को ले कर दोबारा परीक्षा पूरी शुचिता के साथ सम्पन्न कराने की मांग को लेकर 40 याचिका दायर की गई। यहां बता दें कि हर छात्र सक्षम नहीं होता है कि वह वकीलों को लाखों की फीस अदा कर सुप्रीम कोर्ट तक न्याय की गुहार करे। चालीस याचिकाकर्ता देश की सबसे बड़ी अदालत से न्याय मांगने पहुंचे। माननीय चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप हमें संतुष्ट करिए कि पेपर लीक बड़े पैमाने पर हुआ और परीक्षा रद्द होनी चाहिए।अगर आप हमारे सामने यह साबित कर देते हैं कि बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई तभी दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया जा सकता है। 24 जुलाई को तमाम ज‌द्दोजहद और कानूनी कार्रवाईयों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने नीट परीक्षा दोबारा नहीं करने का आदेश दिया है।</div>
<div> </div>
<div>यहां बता दें कि शुरू से ही सरकार का रवैया नीट धांधली को छिपाने और किसी भी तरह पर्दा डालकर प्रतिष्ठा बचाने का रहा क्योंकि सरकार पहले से ही करीब 60 प्रवेश व भर्ती परीक्षाओं में पेपरलीक व गड़बड़ी धांधली के आरोपों से घिरी है। लेकिन उम्मीद थी कि सबसे बड़ी अदालत दूध का दूध पानी का पानी करेगी लेकिन अदालत ने अपने विवेक से सरकारी एजेंसियों की चल रही कई प्रदेश में पेपरलीक संबधी तमाम जांच सबूत और गिरफ्तारियों के बावजूद याचिकाकर्ताओं से व्यापक गड़बड़ी होने के सबूत मांग कर अपनी प्रतिबद्धता और प्राथमिकता साफ कर दी। जिस मामले में बिहार झारखंड समेत कई प्रदेश में करीब पचास गिरफ्तारी की गई हैं और जांच में जला प्रश्नपत्र भी मिला है इससे अधिक सबूत बेचारे छात्र या उनके अभिभावक या अधिवक्ता कहाँ से जुटाएं? वह कोई जांच एजेंसी नहीं है न ही उनके पास किसी तरह की जांच फोर्स है।</div>
<div> </div>
<div>सरकार दोबारा नीट नहीं कराना चाहती थी अदालत ने पेपरलीक होने के बावजूद बहुत व्यापक प्रभावित होने का सबूत न होने का हवाला देते हुए दोबारा नीट परीक्षा कराने से इंकार कर दिया। देश की संस्थाओं के क्षरण के जो आरोप समय समय पर लग रहे हैं उनके लिए इसी तरह के फैसले जिम्मेदार हैं। जो मानते हैं कि बेशक दूध में मक्खी गिरी थी लेकिन बड़े पैमाने पर हैजा फैलने का कोई सबूत नहीं है इस लिए इसी दूध को इस्तेमाल किजिए।  देर सवेर सारी जांच ठंडे बस्ते में डाल कर गिरफ्तार आरोपी भी रिहा हो जाएंगे। मेहनती छात्रों के कुछ हिस्से को जरूर गड़बड़ी वाले अभ्यर्थी लूट ले गए। काश अदालत दोबारा पूरी शुचिता के साथ परीक्षा सम्पन्न करा छात्रों की न्याय में अवधारणा मजबूत करती तो बेहतर होता।</div>
<div>
<div><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
</div>
<div><strong>(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं) </strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jul 2024 16:39:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शहर और सेंटर वाइज सभी छात्रों का रिजल्ट वेबसाइट पर अपलोड करे एनटीए - सुप्रीम कोर्ट </title>
                                    <description><![CDATA[<div>NEET UG 2024 Supreme Court Hearing  सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को निर्देश दिया कि सभी छात्रों के परिणाम - शहरवार और केंद्रवार - शनिवार दोपहर 12 बजे तक ऑनलाइन अपलोड किए जाने चाहिए. कोर्ट ने सोमवार तक काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. एसजी ने कहा, 'काउंसलिंग में कुछ समय लगेगा. यह 24 जुलाई के आसपास शुरू होगी.' सीजेआई ने कहा, 'हम सोमवार को ही सुनवाई करेंगे.'</div>
<div>NEET UG परीक्षा रद्द होगी या नहीं? सुप्रीम कोर्ट में आज लंबी बहस के बाद भी 23 लाख मेडिकल एस्पिरेंट्स को इस सवाल के जवाब का इंतजार है. सुनवाई के दौरान</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143302/city-and-center-wise-results-of-all-students-should-be"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/6698b19540e44-neet-ug-2024-supreme-court-hearing-180924704-16x9.jpg" alt=""></a><br /><div>NEET UG 2024 Supreme Court Hearing  सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को निर्देश दिया कि सभी छात्रों के परिणाम - शहरवार और केंद्रवार - शनिवार दोपहर 12 बजे तक ऑनलाइन अपलोड किए जाने चाहिए. कोर्ट ने सोमवार तक काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. एसजी ने कहा, 'काउंसलिंग में कुछ समय लगेगा. यह 24 जुलाई के आसपास शुरू होगी.' सीजेआई ने कहा, 'हम सोमवार को ही सुनवाई करेंगे.'</div>
<div>NEET UG परीक्षा रद्द होगी या नहीं? सुप्रीम कोर्ट में आज लंबी बहस के बाद भी 23 लाख मेडिकल एस्पिरेंट्स को इस सवाल के जवाब का इंतजार है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के कम से कम नंबर, IIT मद्रास की रिपोर्ट, पेपर में गड़बडी कब और कैसे हुई, कितने सॉल्वर्स पकड़े गए, दोबारा जांच की मांग और पेपर में गड़बड़ी की पूरी टाइमलाइन पर चर्चा हुई. अब नीट विवाद पर उम्मीदवारों को सोमवार को होने वाली सुनवाई का इंतजार करना होगा</div>
<div> </div>
<div><strong>कोर्ट ने उम्मीदवारों के एग्जाम सेंटर बदलने पर NTA से मांगा जवाब</strong></div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने NTA से पूछा- 23.33 लाख में से कितने छात्रों ने अपना एग्जाम सेंटर बदला?  इस पर एनटीए ने जवाब दिया कि करेक्शन के नाम पर छात्रों ने सेंटर बदला है. 15,000 छात्रों ने करेक्शन विंडो का इस्तेमाल किया था. हालांकि एनटीए ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि छात्र सिर्फ शहर बदल सकते हैं और कोई भी उम्मीदवार केंद्र नहीं चुन सकता. सेंटर का चयन अलॉटमेंट सिस्टम द्वारा किया जाता है. सेंटर का अलॉक्शन परीक्षा से सिर्फ दो दिन पहले होता है, इसलिए किसी को नहीं पता कि कौन सा सेंटर मिलने वाला है.</div>
<div> </div>
<div><strong>सुप्रीम कोर्ट अब आईआईटी मद्रास की रिपोर्ट पर चर्चा</strong></div>
<div>केंद्र और एनटीए की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा गया था कि IIT मद्रास की रिपोर्ट में NEET UG 2024 परीक्षा में कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है. आईआईटी ने निष्कर्ष निकाला था कि परीक्षा के परिणामों में असामान्यता का कोई संकेत नहीं था. रिपोर्ट में कहा गया है कि "न तो किसी गड़बड़ी का संकेत था और न ही उम्मीदवारों के एक स्थानीय समूह को लाभ पहुंचाया गया था, जिससे असामान्य अंक आए."</div>
<div>चीफ जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़, जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच आज 40 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. इन याचिकाओं में परीक्षा रद्द करना, दोबारा परीक्षा कराना और NEET-UG 2024 के संचालन में कथित गड़बड़ियों की जांच करना और NEET विवाद पर विभिन्न उच्च न्यायालयों में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के खिलाफ लंबित मामलों को स्थानांतरित करना शामिल है. इससे पहले सीजीआई ने कहा था कि NEET-UG 2024 की अखंडता से समझौता हुआ है तो परीक्षा रद्द होनी चाहिए.</div>
<div> </div>
<div>सुनवाई से पहले एनटीए ने आज सुप्रीम कोर्ट में अपना लिखित जवाब दाखिल किया है. एनटीए का कहना है कि नीट परीक्षा में कोई सिस्टेमैटिक फेलियर नहीं था. बिहार की घटना एक आपराधिक गतिविधि है, जिन घटनाओं का जिक्र किया जा रहा है उनकी जांच चल रही है. एनटीए कोर्ट को बताया कि जांच बिहार पुलिस द्वारा शुरू की गई थी, जिसे ईओयू विंग को सौंप दिया गया था. इसके बाद केंद्रीय स्तर पर नीट मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को स्थानांतरित कर दी गई है. एनटीए ने कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद 17 संदिग्ध उम्मीदवारों के परिणाम रोक दिए हैं. </div>
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<div>सचिन बाजपेई </div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jul 2024 17:10:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>'पुनः परीक्षा हमारा अंतिम विकल्प है - Sc</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr"><strong>नई दिल्ली</strong> 8 जुलाई  मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने सोमवार को NEET-UG परीक्षा में कथित कदाचार और अनियमितताओं के संबंध में 38 याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। NEET UG 2024 सुनवाई लाइव अपडेट: नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में NEET UG 2024 में कथित अनियमितताओं के संबंध में सुनवाई चल रही है, जबकि छात्र बाहर इंतजार कर रहे हैं। NEET UG 2024 सुनवाई लाइव अपडेट: भारत के सर्वोच्च न्यायालय (SC) ने सोमवार को मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2024 विवाद से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142937/re-examination-is-our-last-option-sc"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/img_20240708_164757.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>नई दिल्ली</strong> 8 जुलाई  मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने सोमवार को NEET-UG परीक्षा में कथित कदाचार और अनियमितताओं के संबंध में 38 याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। NEET UG 2024 सुनवाई लाइव अपडेट: नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में NEET UG 2024 में कथित अनियमितताओं के संबंध में सुनवाई चल रही है, जबकि छात्र बाहर इंतजार कर रहे हैं। NEET UG 2024 सुनवाई लाइव अपडेट: भारत के सर्वोच्च न्यायालय (SC) ने सोमवार को मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2024 विवाद से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की, जिसमें इसे नए सिरे से आयोजित करने का निर्देश देने की मांग की गई।</p>
<p dir="ltr">मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ कुल 38 याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।  हालांकि, केंद्र सरकार और NEET-UG आयोजित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि परीक्षा रद्द करने से गोपनीयता के बड़े पैमाने पर उल्लंघन के सबूत के बिना लाखों ईमानदार उम्मीदवारों को "गंभीर रूप से खतरे में" डाला जाएगा। NTA ने केंद्र के रुख को दोहराते हुए कहा कि पूरी परीक्षा को रद्द करना बहुत ही "प्रतिकूल" और "बड़े सार्वजनिक हित के लिए हानिकारक" होगा, खासकर योग्य उम्मीदवारों के करियर की संभावनाओं के लिए।</p>
<p dir="ltr">सर्वोच्च न्यायालय ने जांच अधिकारी से कहा कि वह उसके सामने वह सामग्री पेश करे जो एकत्र की गई है और जिसका असर इस बात पर पड़ेगा कि लीक पहली बार कब हुआ और उसका तरीका क्या था। सर्वोच्च न्यायालय ने NTA से उन उम्मीदवारों की पहचान करने को कहा जिन्हें NEET-UG पेपर लीक से लाभ हुआ। सर्वोच्च न्यायालय ने NTA से उन केंद्रों/शहरों की पहचान करने को भी कहा जहां लीक हुआ था। याचिकाकर्ताओं के सभी वकील जो फिर से परीक्षा के लिए दबाव डालना चाहते हैं, उन्हें गुरुवार से पहले 10 पृष्ठों से अधिक नहीं की एक सामान्य प्रस्तुति दाखिल करनी चाहिए। NTA को आज तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है: (1) कब  प्रश्नपत्रों का लीक होना</p>
<p dir="ltr">(2) प्रश्नपत्रों के लीक होने/प्रसारित होने का तरीका</p>
<p dir="ltr">(3) लीक होने और परीक्षा के वास्तविक आयोजन के बीच का समय</p>
<p dir="ltr"><strong>सचिन बाजपेई </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jul 2024 17:07:45 +0530</pubDate>
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                <title>नीट यूजी 2024 के उच्च अंक मुख्य रूप से पाठ्यक्रम में कमी के कारण आए।</title>
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div><strong>एनटीए ने सुप्रीम कोर्ट से कहा </strong></div>
<div>नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने NEET-UG 2024 मामले में दायर अपने हलफनामे में कहा कि कुछ केंद्रों से ही स्टूडेंट के उच्च अंक प्राप्त करने के आरोप “निराधार” हैं। इसे पुख्ता करने के लिए परीक्षण एजेंसी ने शीर्ष 100 उम्मीदवारों के परिणामों के विश्लेषण का हवाला दिया। इसके आधार पर यह प्रस्तुत किया गया कि शीर्ष परिणाम 56 शहरों में स्थित 95 केंद्रों में वितरित किए गए।</div>
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<div>हलफनामे में कहा गया,“यह विविध वितरण विभिन्न क्षेत्रों और शैक्षिक पृष्ठभूमि के स्टूडेंट के बीच व्यापक भागीदारी और प्रतिस्पर्धी भावना को उजागर करता है।यह</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142914/the-high-scores-of-neet-ug-2024-mainly-came-due"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/नीट-यूजी-2024-के-उच्च-अंक-मुख्य-रूप-से-पाठ्यक्रम-में-कमी-के-कारण-आए।.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div><strong>एनटीए ने सुप्रीम कोर्ट से कहा </strong></div>
<div>नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने NEET-UG 2024 मामले में दायर अपने हलफनामे में कहा कि कुछ केंद्रों से ही स्टूडेंट के उच्च अंक प्राप्त करने के आरोप “निराधार” हैं। इसे पुख्ता करने के लिए परीक्षण एजेंसी ने शीर्ष 100 उम्मीदवारों के परिणामों के विश्लेषण का हवाला दिया। इसके आधार पर यह प्रस्तुत किया गया कि शीर्ष परिणाम 56 शहरों में स्थित 95 केंद्रों में वितरित किए गए।</div>
<div> </div>
<div>हलफनामे में कहा गया,“यह विविध वितरण विभिन्न क्षेत्रों और शैक्षिक पृष्ठभूमि के स्टूडेंट के बीच व्यापक भागीदारी और प्रतिस्पर्धी भावना को उजागर करता है।यह भी कहा कि कम किए गए पाठ्यक्रम के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में छात्रों ने पूरे अंक प्राप्त किए। हलफनामा में कहा गया,"। उम्मीदवारों के 720/720 अंक प्राप्त करने का सबसे प्रमुख कारण पाठ्यक्रम में कमी है, जो उम्मीदवारों को मूल अवधारणाओं पर ध्यान केंद्रित करने और 2019-20 में महामारी के कारण अपनी पढ़ाई पूरी करने में चुनौतियों का सामना करने वाले स्टूडेंट पर दबाव कम करने के लिए किया गया।"</div>
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<div>हलफनामे में यह भी बताया गया कि परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों की संख्या पिछले साल 20,38,596 की तुलना में बढ़कर 23,33,297 हो गई। इसे देखते हुए एनटीए ने कहा  कि उम्मीदवारों की संख्या में यह वृद्धि स्टूडेंट के बीच उच्च प्रतिशतता के कारकों में से एक थी। आगे कहा गया कि इसलिए अंकों का अंतराल नाममात्र है और केवल उम्मीदवारों की संख्या में वृद्धि के कारण है। इस संबंध में यह दिखाने के लिए ग्राफ़िकल अभ्यावेदन के रूप में तुलनात्मक विश्लेषण किया गया कि दोनों वर्षों के उम्मीदवारों की संख्या, अंकों के अंतराल के विरुद्ध नाममात्र है और केवल उम्मीदवारों की संख्या में वृद्धि के कारण है।</div>
<div> </div>
<div>कहा गया कि अन्य महत्वपूर्ण कारक पाठ्यक्रम में कमी है, जो उम्मीदवारों को मूल अवधारणाओं पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाने के लिए किया गया। इस कटौती का एक और कारण यह है कि इससे 2019-20 में महामारी के कारण चुनौतियों का सामना करने वाले छात्रों पर दबाव कम होगा।</div>
<div>8 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया,"परीक्षा को पूरी तरह से रद्द करने से 2024 में प्रश्नपत्र देने वाले लाखों ईमानदार उम्मीदवारों को गंभीर रूप से खतरा होगा।</div>
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<div><strong>"7 साल से अधिक समय तक कैद, अधिकतम सजा से अधिक": </strong></div>
<div><strong>बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठग सुकेश चंद्रशेखर को जमानत दी</strong></div>
<div>बॉम्बे हाईकोर्ट ने पोंजी योजना में निवेशकों को ठगने के आरोप में मई 2015 में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर को बृहस्पतिवार को जमानत दे दी।जस्टिस मनीष पिताले ने कहा कि चंद्रशेखर पहले ही सात साल से अधिक समय जेल में काट चुके हैं, जो दोषी पाए जाने पर उन्हें दी जाने वाली अधिकतम सजा से करीब अधिक है।</div>
<div>पीठ ने कहा कि शुरू में वह 29 मई, 2015 से 10 सितंबर, 2016 तक हिरासत में थे, जब उन्हें जमानत दी गई थी। हालांकि, बाद में उनकी जमानत रद्द कर दी गई थी क्योंकि वह जमानत देते समय उच्चतम न्यायालय द्वारा अनिवार्य कुछ राशि जमा करने में विफल रहे थे। बाद में उसे 16 अप्रैल, 2017 को एक अन्य मामले में गिरफ्तार दिखाया गया और फिर 9 अक्टूबर, 2017 को इस मामले में उसकी हिरासत के लिए एक विशेष अदालत में पेश किया गया और तब से वह हिरासत में है।</div>
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<div>क़ैद की दूसरी अवधि 9 अक्टूबर, 2017 से शुरू होने और इसे 29 मई, 2015 और 10 सितंबर, 2016 के बीच की अवधि में जोड़ने पर विचार करते हुए, आवेदक को क़ैद की कुल अवधि लगभग सात साल और दस महीने होती है। यह निश्चित रूप से आवेदक को दी जा सकने वाली सजा की अधिकतम अवधि से अधिक है, भले ही वह प्राथमिकी के तहत दर्ज अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया हो। विशेष रूप से, न्यायाधीश ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 436 ए पर विचार किया, जो एक व्यक्ति की जमानत का प्रावधान करता है, जिसने दोषसिद्धि के बाद उस पर लगाई जा सकने वाली अधिकतम सजा की आधी से अधिक सजा काट ली है।</div>
<div>चंद्रशेखर जेल से बाहर नहीं निकलेगा क्योंकि वह अन्य मामलों का भी सामना कर रहा है, जिसके लिए वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में है।</div>
<div> </div>
<div>चंद्रशेखर को मई 2015 में भारतीय दंड संहिता और महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हित संरक्षण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत एक फर्जी फर्म बनाने और निवेश योजनाएं आमंत्रित करने के लिए गिरफ्तार किया गया था, जिसमें 20 प्रतिशत मासिक रिटर्न का वादा था। उन्होंने कथित तौर पर कई निवेशकों से अपनी पोंजी योजना के माध्यम से 19 करोड़ रुपये एकत्र किए थे और बाद में वादे के अनुसार रिटर्न का भुगतान करने में विफल रहे थे। तदनुसार उसे गिरफ्तार कर लिया गया।</div>
<div> </div>
<div><strong>वैवाहिक कलह के कारण पिता को बेटी से मिलने से वंचित करना क्रूरता</strong></div>
<div><strong>: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट।</strong></div>
<div>पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैवाहिक कलह के कारण एक पिता को अपनी बेटी से मिलने से वंचित करना हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 (1) (IA) के तहत क्रूरता है।</div>
<div>जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस हर्ष बंगर की खंडपीठ ने क्रूरता के आधार पर दिए गए तलाक में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा, 'पति-पत्नी के बीच वैवाहिक कलह के कारण पिता को अपनी बेटी से उसकी मां द्वारा मिलने से वंचित करना मानसिक क्रूरता का कार्य होगा। अदालत एक पत्नी की अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें पत्नी द्वारा क्रूरता और परित्याग के आधार पर परिवार अदालत द्वारा दिए गए तलाक को चुनौती दी गई थी। पति ने अपनी तलाक याचिका में विभिन्न घटनाओं का विवरण दिया, जो उसके अनुसार, क्रूरता का गठन करती है।</div>
<div> </div>
<div>दूसरी ओर, अपीलकर्ता-पत्नी ने अन्य बातों के साथ-साथ इस दलील पर प्रस्तुत किया कि पति ने उसके खिलाफ झूठे आरोप लगाए हैं, जो प्रकृति में सामान्य हैं। यह आगे तर्क दिया गया था कि पति झूठे और निराधार आरोपों पर तलाक की मांग नहीं कर सकता है, विशेष रूप से अपनी नाबालिग बेटी पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभावों को ध्यान में रखे बिनादलीलें सुनने के बाद, अदालत ने पति द्वारा लगाए गए आरोपों पर विचार किया कि उसकी पत्नी ने तीन मौकों पर रसोई में गैस नॉब छोड़ दिया था। यह "निश्चित रूप से प्रतिवादी के मन में उसकी सुरक्षा के साथ-साथ उसके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा के संबंध में एक उचित आशंका पैदा करेगा, इसलिए, यह क्रूरता का कार्य होगा," अदालत ने कहा।</div>
<div> </div>
<div><strong>राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त चुनावी बांड दान को जब्त करें:सुप्रीम कोर्ट में याचिका।</strong></div>
<div>2018 की चुनावी बांड योजना के माध्यम से राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त धन की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसे हाल ही में एडीआर बनाम भारत संघ मामले में खारिज कर दिया गया। याचिका में तर्क दिया गया कि ये धनराशि, जिसकी राशि 16,518 करोड़ रुपये है, केवल दान नहीं थे, बल्कि ऐसे लेन-देन थे, जिनमें कथित तौर पर राजनीतिक दलों और कॉर्पोरेट दाताओं के बीच लाभ का आदान-प्रदान किया गया।एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम भारत संघ मामले में, जिसे चुनावी बांड मामले के रूप में जाना जाता है, सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मत निर्णय में चुनावी बांड योजना को असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन करने वाला माना। न्यायालय के निर्णय ने पारदर्शिता और निष्पक्षता के बारे में चिंताओं को उजागर किया और भारतीय स्टेट बैंक को ऐसे बांड जारी करने पर रोक लगाने तथा 12 अप्रैल, 2019 से बांड लेनदेन का सार्वजनिक खुलासा करने का निर्देश दिया।</div>
<div> </div>
<div>उल्लेखनीय है कि भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन करते हुए 14 मार्च को अपनी वेबसाइट पर चुनावी बांड डेटा अपलोड किया था।</div>
<div>याचिका में बताया गया कि कुल 23 राजनीतिक दलों को 1210 से अधिक दानदाताओं से इन बांडों के माध्यम से लगभग 12,516 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिनमें से 21 दानदाताओं ने 100 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दिया। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने ये विवरण उपलब्ध कराए हैं, जिससे जनता की कीमत पर दानदाताओं को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए योजना के संभावित दुरुपयोग के बारे में सवाल उठते हैं।</div>
<div> </div>
<div>याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वह संघ (प्रतिवादी नंबर 1), ECI (प्रतिवादी नंबर 2) और केंद्रीय सतर्कता आयोग (प्रतिवादी नंबर 3) को संबंधित राजनीतिक दलों द्वारा योजना के तहत प्राप्त राशि को जब्त करने का निर्देश दे। अतिरिक्त, याचिका में प्रमुख राजनीतिक दलों (प्रतिवादी नंबर 4-25) द्वारा दानदाताओं को दिए गए कथित अवैध लाभों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में समिति के गठन की मांग की गई। वैकल्पिक रूप से यह इन दलों द्वारा दावा किए गए कर छूट का पुनर्मूल्यांकन करने और प्राप्त राशि पर कर ब्याज और दंड लगाने की मांग करता है।</div>
<div> </div>
<div><strong>याचिका में निम्नलिखित निर्देश दिए जाने की मांग की गई-</strong></div>
<div>1. चुनावी बॉन्ड योजना, 2018 के तहत प्रतिवादी नंबर 4 से 25 द्वारा प्राप्त राशि को जब्त करने के लिए प्रतिवादी नंबर 1, 2 और 3 को निर्देश देने के लिए उचित रिट, निर्देश या आदेश जारी करें।</div>
<div>2. राजनीतिक दलों के कहने पर सार्वजनिक अधिकारियों द्वारा प्रतिवादी नंबर 4 से 25 द्वारा चुनावी बॉन्ड के माध्यम से प्राप्त भुगतान के कारण दानदाताओं को दिए गए अवैध लाभों की जांच करने के लिए इस माननीय न्यायालय के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करने के लिए उचित रिट, निर्देश या आदेश जारी करें।</div>
<div>3. वैकल्पिक रूप से तथा उपरोक्त के प्रतिकूल प्रभाव के बिना आयकर अधिकारियों को प्रतिवादी नंबर 4 से 25 के वित्तीय वर्ष 2018-2019 से 2023-2024 तक के कर निर्धारण को पुनः खोलने तथा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13ए के अंतर्गत उनके द्वारा दावा किए गए आयकर की छूट को अस्वीकार करने तथा चुनावी बांड के माध्यम से प्राप्त राशि पर आयकर, ब्याज तथा जुर्माना लगाने का निर्देश दिया जाए।</div>
<div>गौरतलब है कि एडीआर द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका पहले ही दायर की जा चुकी है।</div>
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                <pubDate>Sun, 07 Jul 2024 16:56:19 +0530</pubDate>
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