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                <title>womens - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>शक्ति का प्रतीक प्रतिभाशाली महिलाएं हर क्षेत्र में लहरा रही है परचम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत मे उधोग-व्यापार की दुनिया कभी मर्दो की दुनिया मानी जाती रही होंगी।इक्कीवसी सदी में पहुंच चुके भारत मे इस दुनिया पर से मर्दो का एकाधिकार टूट रहा है।और यह सम्भव किया महिलाओ ने।जिन्हें अबला माना जाता रहा है।वह अबला नही है ,सबला है।बैंकिंग, वित्त,होटल या अस्पताल चलाने का मामला हो या गाड़ी-दुपहिया और ट्रैक्टर के उत्पादन से लेकर ऊर्जा और पर्यावरण, इंजीनियरिंग और जैव प्रोधोगिकी जैसी विशेषताएं का क्षेत्र, महिलाएं आगे बढ़कर कम्पनी की कप्तान संभाल रही है।विमान उड़ाना, ट्रेन का लोकोपायलट जैसे क्षेत्र में महिलाओं ने करियर बना लिया है।अभिनय प्रयोगों से अपनी प्रतिभा के झंडे फहरा रही</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154121/talented-women-symbol-of-power-are-waving-in-every-field"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/download-(1)3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत मे उधोग-व्यापार की दुनिया कभी मर्दो की दुनिया मानी जाती रही होंगी।इक्कीवसी सदी में पहुंच चुके भारत मे इस दुनिया पर से मर्दो का एकाधिकार टूट रहा है।और यह सम्भव किया महिलाओ ने।जिन्हें अबला माना जाता रहा है।वह अबला नही है ,सबला है।बैंकिंग, वित्त,होटल या अस्पताल चलाने का मामला हो या गाड़ी-दुपहिया और ट्रैक्टर के उत्पादन से लेकर ऊर्जा और पर्यावरण, इंजीनियरिंग और जैव प्रोधोगिकी जैसी विशेषताएं का क्षेत्र, महिलाएं आगे बढ़कर कम्पनी की कप्तान संभाल रही है।विमान उड़ाना, ट्रेन का लोकोपायलट जैसे क्षेत्र में महिलाओं ने करियर बना लिया है।अभिनय प्रयोगों से अपनी प्रतिभा के झंडे फहरा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा का स्तर में सुधारात्मक दृष्टिकोण से बच्चियों की शिक्षा में वृद्धि होने और शिक्षित बनकर डॉक्टर, इंजीनियर औए वकील जैसे प्रोफेशनल व्यवसाय से जुड़ कर अपना ही नही,परिवार के लिए मददगार बनकर समाज और देश का नाम रोशन करने में सबसे आगे है।उधोग जगत में महिलाओं का वर्चस्व स्थापित करने और सहपाठी को मदद करने जैसे अभिनव प्रयोग महिलाओ के लिए वरदान साबित हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रतिभाशाली महिलाएं आज शक्ति का प्रतीक बन गई है।महिलाओ को पैर की जूती समझने वाले समाज की अवधारणा बदलती जा रही है।हरियाणा से बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ की मुहिम शुरू होने के बाद बेटियों के जीवन निर्माण में अभिभावकों की जिज्ञासा बढ़ रही है।समाज और सरकार इस तरफ विशेष ध्यान देकर बच्चियों के शिक्षा संस्कार के लिए कदमताल ठोकते नजर आ रही है।महिलाओ के लिए सरकार की  कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नैतिकता के स्तर पर हर महिलाओ का हिस्सा बना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उधमिता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने लाभकारी योजनाओ के साथ छोटे उधमियों के लिए बिना ब्याज ऋण की उपलब्धता से महिलाएं अपने बच्चो का ही नही,परिवार के लिए आर्थिक मददगार बन चुकी है।महिलाओ के साथ कटुता में वृद्धि हुई थी,वह शिक्षा और रोजगार के साथ खत्म हो गई है।महिलाएं अपने बूते उधोग-धंधे से समाज में एक मुकाम हासिल करके समाज मे ख्याति प्राप्त कर रही है।महिलाओ को शक्ति का प्रतीक बनते समाज देख रहा है।महिलाओ के फैसले अक्सर सभी पक्षो के लिए चिंता से प्रेरित पाए गए है।व्यापार जगत में काफी तादात में महिलाएं आ रही है और सफलता के परचम लहरा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डायमंड हो या कपड़ा उधोग, महिलाएं अपनी धाक कायम करने के लिए कड़ी मेहनत में लगी है।कपड़ा उधोग और कपड़ा निर्माण की बड़ी बड़ी मिलो का संचालन अब महिलाओ के हाथ मे है।महिलाएं मर्दाना खेल में माहिर हो रही है।जिसे कभी पुरूषों की बपौती माना जाता था।महिलाओ को राजनीति के फील्ड में ज्यादा अवसर देना चाहिए।राजनीति में महिलाओ का प्रवेश होने से भ्रष्टाचार में अवश्य कमी आएगी ।महिलाएं राजनीति में सम्पूर्ण जवाबदारी से कार्य करती है।जिस तरह अपने घर की सम्भाल महिलाओ के हाथ मे होती है,वैसे ही राजनीति की बागडोर महिलाओ को दी जाए,जिससे देश मे अमूलचूल परिवर्तन आने की पूरी संभावना बनी रहेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश मे ऐसी सर्वशक्तिमान महिलाए उधमी है,जिन्होंने हर क्षेत्र में अपना एकाधिकार बनाया है।जिसमे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा रही है।हिंदुस्तान टाइम्स की शोभना भरतिया सबसे आगे है।इतना ही नही , मनु छाबरिया,रेणुका रामनाथ जैसी उधमी महिलाएं व्यवसाय में अपना मुकाम हासिल किया है।ये वो महिलाएं है,जिन्होंने एक नए उधोग को  खड़ा किया है,मसलन बायोकॉन कम्पनी की अध्यक्ष व प्रबन्ध निदेशक रही किरण मजूमदार जिन्हें भारत की प्रथम बायोटेक महिला कहा जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ये महिलाएं दूसरी महिलाओ के लिए आदर्श बन गई है।जिन्होंने अपनी कम्पनी को नए रास्ते पर चलाया है।अमृता पटेल डेयरी विकास बोर्ड की अध्यक्ष जिन्होंने केरल में गायों की खतरनाक बीमारी से बचाव का अभियान चलाया था।गांवो के स्तर पर दूध का स्तर सुधारने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाया। निजी बीमा कम्पनी  की सीईओ शिखा शर्मा ने प्रूडेंशियल अभियान चला कर कीर्तिमान स्थापित कर दिया।देश मे 25 ऐसी सर्वशक्तिमान महिला उधमी है,जो भारत मे टाप 25 उधमियों की पहली पंक्ति में नाम दर्ज है।महिलाएं अब अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी है।महिलाओ को हर क्षेत्र में आगे लाने के लिए पुरुषप्रधान समाज को हाथ बटाना होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 17:23:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यदि महिलाएं राफेल उड़ा सकती हैं तो सेना की कानूनी शाखा में उनकी संख्या सीमित क्यों है उच्चतम न्यायालय का सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>उच्चतम न्यायालय- </strong>उच्चतम न्यायालय ने सेना की ‘जज एडवोकेट जनरल' (जेएजी-विधि) शाखा में 50-50 चयन मानदंड पर सवाल उठाते हुए केंद्र से पूछा कि यदि भारतीय वायुसेना में कोई महिला राफेल लड़ाकू विमान उड़ा सकती है तो सेना की जेएजी शाखा के लैंगिक रूप से तटस्थ पदों पर कम महिला अधिकारी क्यों हैं? न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने आठ मई को दो अधिकारियों अर्शनूर कौर और आस्था त्यागी की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं ने अपने कई समकक्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर क्रमश: चौथा और पांचवां स्थान प्राप्त किया था</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151891/if-women-can-blow-up-rafale-then-why-is-their"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-05/download-(12).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>उच्चतम न्यायालय- </strong>उच्चतम न्यायालय ने सेना की ‘जज एडवोकेट जनरल' (जेएजी-विधि) शाखा में 50-50 चयन मानदंड पर सवाल उठाते हुए केंद्र से पूछा कि यदि भारतीय वायुसेना में कोई महिला राफेल लड़ाकू विमान उड़ा सकती है तो सेना की जेएजी शाखा के लैंगिक रूप से तटस्थ पदों पर कम महिला अधिकारी क्यों हैं? न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने आठ मई को दो अधिकारियों अर्शनूर कौर और आस्था त्यागी की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं ने अपने कई समकक्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर क्रमश: चौथा और पांचवां स्थान प्राप्त किया था लेकिन महिलाओं के लिए कम रिक्तियां निर्धारित होने के कारण जेएजी विभाग के लिए उनका चयन नहीं किया गया। अधिकारियों ने पुरुषों और महिलाओं के लिए ‘‘असंगत'' रिक्तियों को चुनौती देते हुए कहा था कि उनका चयन नहीं किया जा सका क्योंकि कुल छह पदों में से महिलाओं के लिए केवल तीन रिक्तियां थीं। पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा, ‘‘हम याचिकाकर्ता अर्शनूर कौर द्वारा प्रस्तुत मामले से प्रथम दृष्टया संतुष्ट हैं।''</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लिंग-विशिष्ट रिक्तियां-</strong> उन्होंने कहा, ‘‘2012 से 2023 तक 70:30 (या अब 50:50) के अनुपात में पुरुष और महिला अधिकारियों की भर्ती की नीति को भेदभावपूर्ण एवं मौलिक अधिकारों का हनन कहना न केवल गलत होगा बल्कि यह कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र का भी अतिक्रमण होगा जो भारतीय सेना में पुरुष एवं महिला अधिकारियों की भर्ती के बारे में निर्णय लेने के लिए एकमात्र सक्षम प्राधिकारी है।'' शीर्ष अदालत ने सवाल किया कि पदों को लैंगिक रूप से तटस्थ क्यों बताया गया है जबकि रिक्तियां लैंगिकता के आधार पर विभाजित होने के कारण उच्च योग्यता वाली महिला उम्मीदवारों को शामिल नहीं किया जा सका। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि यदि 10 महिलाएं योग्यता के आधार पर जेएजी के लिए योग्य हैं तो क्या उन सभी को जेएजी शाखा की अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाएगा। पीठ ने कहा कि लैंगिक तटस्थता का मतलब 50:50 का अनुपात नहीं है बल्कि इसका मतलब यह है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई किस लिंग से है। भाटी ने केंद्र के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि श्रम बल आकलन और आवश्यकता के आधार पर सेना की सभी शाखाओं में लिंग-विशिष्ट रिक्तियां मौजूद हैं। भाटी ने कहा कि रक्षा सेवाओं में लैंगिक एकीकरण एक विकासशील प्रक्रिया है और यह समय-समय पर समीक्षा एवं अध्ययन का विषय है।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘हम प्रतिवादियों को निर्देश देते हैं कि ‘जज एडवोकेट जनरल' (जेएजी) के रूप में नियुक्ति के लिए अगले उपलब्ध प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में उन्हें शामिल करने के उद्देश्य से जो भी कार्रवाई आवश्यक है, उसे शुरू किया जाए।'' पीठ ने एक समाचार पत्र के लेख का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि एक महिला लड़ाकू पायलट राफेल विमान उड़ाएगी। उसने कहा कि ऐसी स्थिति में उसे युद्ध बंदी बनाए जाने का खतरा है। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति दत्ता ने केंद्र और सेना की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा, ‘‘अगर भारतीय वायुसेना में एक महिला का राफेल लड़ाकू विमान उड़ाना स्वीकार्य है तो सेना के लिए जेएजी में अधिक महिलाओं को शामिल करने की अनुमति देना इतना मुश्किल क्यों है?'' पीठ को बताया गया कि कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान दूसरी याचिकाकर्ता त्यागी भारतीय नौसेना में शामिल हो गईं। इसके बाद शीर्ष अदालत ने पदों के लैंगिक आधार पर तटस्थ होने का दावा करने के बावजूद महिलाओं के लिए सीमित पद निर्धारित करने के लिए केंद्र से सवाल किया। भाटी ने कहा कि जेएजी शाखा सहित सेना में महिला अधिकारियों की भर्ती और नियुक्ति एक प्रगतिशील प्रक्रिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 May 2025 17:18:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हमारी सोच से आगे महिलाएं, वैचारिकता बदलनें की दरकार। </title>
                                    <description><![CDATA[<div>
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<div>निश्चित तौर पर भारत में महिलाओं की मुक्ति तथा सशक्तिकरण का प्रश्न स्वतंत्रता एवं भारत की मुक्ति के साथ अनिवार्य रूप से जुड़ गया हैlनिश्चित तौर पर हर रात की सुबह होती है, और सुबह चमकदार और उजाले से भरपूर होती हैl  स्वतंत्र काल से जुड़ी हुई महिला सशक्तिकरण की यात्रा आज तक अनवरत जारी हैl अब महिलाओं को कमजोर या असक्त समझने की भूल मत करिए और अपने विचारों को नयेपन की खिड़की से ताजी हवा दीजिए, महिलाओं को सुविधाएं मिले या ना मिले अधिकार मिले या ना मिले वे अपने प्रयासों से समाज में धीरे-धीरे अपना अहम स्थान</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150273/women-need-to-change-ideology-beyond-our-thinking%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(10)4.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div>
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<div>निश्चित तौर पर भारत में महिलाओं की मुक्ति तथा सशक्तिकरण का प्रश्न स्वतंत्रता एवं भारत की मुक्ति के साथ अनिवार्य रूप से जुड़ गया हैlनिश्चित तौर पर हर रात की सुबह होती है, और सुबह चमकदार और उजाले से भरपूर होती हैl  स्वतंत्र काल से जुड़ी हुई महिला सशक्तिकरण की यात्रा आज तक अनवरत जारी हैl अब महिलाओं को कमजोर या असक्त समझने की भूल मत करिए और अपने विचारों को नयेपन की खिड़की से ताजी हवा दीजिए, महिलाओं को सुविधाएं मिले या ना मिले अधिकार मिले या ना मिले वे अपने प्रयासों से समाज में धीरे-धीरे अपना अहम स्थान बनाते जा रही हैं।</div>
<div> </div>
<div>आज भी महिलाएं सामाजिक राजनीतिक आर्थिक एवं सांस्कृतिक सभी मोर्चों और सवालों पर पुरुषों के समकक्ष संघर्ष करती नजर आ रही हैl आज राष्ट्र निर्माण में नारी अपनी भूमिका से न केवल परिचित है बल्कि उसकी गंभीर जिम्मेदारी का निर्वहन करने के लिए भी तत्पर व सक्षम हैl वर्तमान में भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक हैl भारत विकास की दर आज बड़ी से बड़ी वैश्विक शक्ति से टक्कर लेने की जद पर हैl</div>
<div> </div>
<div>विकास की गाथा में देश की आधी आबादी यानी महिलाओं की भूमिका बढ़ती जा रही हैl अनेक सामाजिक आर्थिक विसंगतियों के बावजूद आज हर मोर्चे पर महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी होती दिखाई दे रही हैl यह आत्मविश्वास उन्हें सदियों के संघर्ष के बाद हासिल हुआ है, प्राचीन काल में अपाला तथा गोसा जैसी विदुषी महिलाओं ने अपनी कीर्ति पताका फैलाई थी, भारतीय समाज में उन्हें सम्मान और बराबरी का दर्जा दिया गया है ,परंतु मध्यकाल में भारत अपनी संकुचित एवं संकट दृष्टि का शिकार हो गया था महिलाओं को घर की चारदीवारी में क्या होना पड़ा थाl</div>
<div> </div>
<div>इसी के साथ कैद हो गई थी उनकी योग्यता,ऊर्जा,शक्ति, आकांक्षाएं और व्यक्तित्व विकास की संभावनाएंl भारत एवं भारत के बाहर विदेशों में भारतीय मूल की ऐसे सैकड़ों महिलाएं हैं जिन्होंने भारत देश का नाम रोशन किया है उनके नाम की सूची बड़ी लंबी है उनका उल्लेख न करते हुए समग्र रूप से उनका नमन करते हुए यह बताना चाहूंगा कि महिलाएं निरंतर उच्च पदों पर आसीन हो रही है इन सब के साथ सबसे पुराने बजट तथा घर के अर्थशास्त्र को संभालने की भूमिका का भी कुशलतापूर्वक सदियों से प्रबंधन करती आ रही हैl</div>
<div> </div>
<div>इसके साथ ही वे अपनी शैक्षणिक योग्यता में निरंतर सुधार कर रही है जनसंख्या गणना के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं, महिलाएं जहां शिक्षा, प्रशासन,मेडिकल क्षेत्र, इंजीनियरिंग, स्पेस रिसर्च, विज्ञान टेक्नोलॉजी और उद्यानिकी ,एग्रीकल्चर, सेरीकल्चर और तमाम क्षेत्रों में असाधारण रूप से शिक्षा प्राप्त कर प्रगति कर रही और उच्च पदस्थ होकर कार्यों का कुशलता से संपादन कर रही हैंl सामाजिक कुरीतियों के विरोध में समाज को आगाह करने और उसका विरोध करने में भी महिलाएं पीछे नहीं है, फिर चाहे वह शनि सिंगनापुर हाजी अली दरगाह या तीन तलाक के मामले में इनकी सजगता ने सामाजिक परिवर्तन लाया है।</div>
<div> </div>
<div>सरकार भी इनकी इस भूमिका को स्वीकार करते हुए थल जल और वायु सेना में युद्धक की भूमिका मैं इनकी नियुक्ति कर रही है। हम यदि राजनीतिक क्षेत्र की चर्चा करें तो पंचायती स्तरों पर महिला प्रधानों ने गंभीर परिवर्तन के प्रयास किए, किंतु हमें यहां हमेशा स्मरण रखना चाहिए की देश के आर्थिक विकास में अभी भी महिलाओं को वह भागीदारी व सम्मान नहीं मिल पा रहा है जिसके लिए वह पूर्णरूपेण हकदार है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया की श्रम बल भागीदारी में महिलाओं की भागीदारी 25% से भी कम हो गई है।</div>
<div> </div>
<div>महिलाओं को अनेक सामाजिक आर्थिक सांस्कृतिक एवं मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं को समान पदों पर कार्यरत पुरुषों की तुलना में कम वेतन दिया जाता है तथा अधिकांश शीर्ष पदों पर पुरुषों का कब्जा है के अलावा दुनिया की सबसे कम तनखा वाली नौकरियों में 60% महिलाएं ही हैं। महिलाओं द्वारा अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाते हुए कार्यस्थल पर कार्य करते हुए देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है ।</div>
<div> </div>
<div>इन परिस्थितियों में महिलाओं द्वारा दिए गए सामाजिक आर्थिक विकास के योगदान को पहचानते हुए सरकार ने मातृत्व लाभ अधिनियम 2016 तथा यौन उत्पीड़न अधिनियम 2013 के माध्यम से अनुकूल वातावरण तथा महिलाओं को मातृत्व अवकाश देने के कई अच्छे प्रावधान भी उपलब्ध कराए हैं। इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड अपने आंकड़ों से स्पष्ट करता है की किस प्रकार महिलाओं की श्रमबल में अधिक भागीदारी जीडीपी में अप्रत्याशित वृद्धि करता है।</div>
<div> </div>
<div>पूरा विश्व इस बात से सहमत है की महिलाएं कोमल है पर कमजोर नहीं एवं शक्ति का नाम ही नारी है। हिंदुस्तान के विकास में सही मायने में यदि 50% भागीदारी महिलाओं की हो तो असाधारण क्षमता की धनी महिलाएं इस देश को विश्व के अन्य विकसित देशों में खड़ा कर सकती हैं, जरूरत इनकी शक्ति क्षमता एवं योग्यता को पहचानने की है। 21वीं सदी में विश्व शक्ति रूप भारत के सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक विकास में महिलाओं का सर्वांगीण विकास को आधार बनाकर आर्थिक महाशक्ति के स्वप्न को साकार किया जा सकता है।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Mar 2025 15:30:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>महिलाओं को आगे बढ़ाने की धुंधली कोशिशें।</title>
                                    <description><![CDATA[<p>निश्चित तौर पर हर रात की सुबह होती है और नई सुबह ज्यादा चमकदार और उजाले से भरपूर होती हैl भारत में महिलाओं की मुक्ति तथा सशक्तिकरण का प्रश्न स्वतंत्रता एवं भारत की मुक्ति के साथ अनिवार्य रूप से जुड़ गया हैl स्वतंत्र काल से जुड़ी हुई महिला सशक्तिकरण की यात्रा आज तक अनवरत जारी हैl आज भी महिलाएं सामाजिक राजनीतिक आर्थिक एवं सांस्कृतिक सभी मोर्चों और सवालों पर पुरुषों के समकक्ष संघर्ष करती नजर आ रही हैl आज राष्ट्र निर्माण में नारी अपनी भूमिका से न केवल परिचित है बल्कि उसकी गंभीर जिम्मेदारी का निर्वहन करने के लिए भी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148925/blurred-attempts-to-pursue-women"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download5.jpg" alt=""></a><br /><p>निश्चित तौर पर हर रात की सुबह होती है और नई सुबह ज्यादा चमकदार और उजाले से भरपूर होती हैl भारत में महिलाओं की मुक्ति तथा सशक्तिकरण का प्रश्न स्वतंत्रता एवं भारत की मुक्ति के साथ अनिवार्य रूप से जुड़ गया हैl स्वतंत्र काल से जुड़ी हुई महिला सशक्तिकरण की यात्रा आज तक अनवरत जारी हैl आज भी महिलाएं सामाजिक राजनीतिक आर्थिक एवं सांस्कृतिक सभी मोर्चों और सवालों पर पुरुषों के समकक्ष संघर्ष करती नजर आ रही हैl आज राष्ट्र निर्माण में नारी अपनी भूमिका से न केवल परिचित है बल्कि उसकी गंभीर जिम्मेदारी का निर्वहन करने के लिए भी तत्पर व सक्षम हैl</p>
<p>वर्तमान में भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक हैl भारत विकास की दर आज बड़ी से बड़ी वैश्विक शक्ति से टक्कर लेने की जद पर हैl विकास की गाथा में देश की आधी आबादी यानी महिलाओं की भूमिका बढ़ती जा रही हैl अनेक सामाजिक आर्थिक विसंगतियों के बावजूद आज हर मोर्चे पर महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी होती दिखाई दे रही हैl</p>
<p>यह आत्मविश्वास उन्हें सदियों के संघर्ष के बाद हासिल हुआ है, प्राचीन काल में अपाला तथा गोसा जैसी विदुषी महिलाओं ने अपनी कीर्ति पताका फैलाई थी, भारतीय समाज में उन्हें सम्मान और बराबरी का दर्जा दिया गया है ,परंतु मध्यकाल में भारत अपनी संकुचित एवं संकट दृष्टि का शिकार हो गया था महिलाओं को घर की चारदीवारी में क्या होना पड़ा थाl इसी के साथ कैद हो गई थी उनकी योग्यता,ऊर्जा,शक्ति, आकांक्षाएं और व्यक्तित्व विकास की संभावनाएंl</p>
<p>भारत एवं भारत के बाहर विदेशों में भारतीय मूल की ऐसे सैकड़ों महिलाएं हैं जिन्होंने भारत देश का नाम रोशन किया है उनके नाम की सूची बड़ी लंबी है उनका उल्लेख न करते हुए समग्र रूप से उनका नमन करते हुए यह बताना चाहूंगा कि महिलाएं निरंतर उच्च पदों पर आसीन हो रही है इन सब के साथ सबसे पुराने बजट तथा घर के अर्थशास्त्र को संभालने की भूमिका का भी कुशलतापूर्वक सदियों से प्रबंधन करती आ रही हैl</p>
<p>इसके साथ ही वे अपनी शैक्षणिक योग्यता में निरंतर सुधार कर रही है जनसंख्या गणना के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं, महिलाएं जहां शिक्षा, प्रशासन,मेडिकल क्षेत्र, इंजीनियरिंग, स्पेस रिसर्च, विज्ञान टेक्नोलॉजी और उद्यानिकी ,एग्रीकल्चर, सेरीकल्चर और तमाम क्षेत्रों में असाधारण रूप से शिक्षा प्राप्त कर प्रगति कर रही और उच्च पदस्थ होकर कार्यों का कुशलता से संपादन कर रही हैंl</p>
<p>सामाजिक कुरीतियों के विरोध में समाज को आगाह करने और उसका विरोध करने में भी महिलाएं पीछे नहीं है, फिर चाहे वह शनि सिंगनापुर हाजी अली दरगाह या तीन तलाक के मामले में इनकी सजगता ने सामाजिक परिवर्तन लाया है। सरकार भी इनकी इस भूमिका को स्वीकार करते हुए थल जल और वायु सेना में युद्धक की भूमिका मैं इनकी नियुक्ति कर रही है। हम यदि राजनीतिक क्षेत्र की चर्चा करें तो पंचायती स्तरों पर महिला प्रधानों ने गंभीर परिवर्तन के प्रयास किए, किंतु हमें यहां हमेशा स्मरण रखना चाहिए की देश के आर्थिक विकास में अभी भी महिलाओं को वह भागीदारी व सम्मान नहीं मिल पा रहा है जिसके लिए वह पूर्णरूपेण हकदार है।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया की श्रम बल भागीदारी में महिलाओं की भागीदारी 25% से भी कम हो गई है। महिलाओं को अनेक सामाजिक आर्थिक सांस्कृतिक एवं मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं को समान पदों पर कार्यरत पुरुषों की तुलना में कम वेतन दिया जाता है तथा अधिकांश शीर्ष पदों पर पुरुषों का कब्जा है के अलावा दुनिया की सबसे कम तनखा वाली नौकरियों में 60% महिलाएं ही हैं।</p>
<p>महिलाओं द्वारा अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाते हुए कार्यस्थल पर कार्य करते हुए देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है ।इन परिस्थितियों में महिलाओं द्वारा दिए गए सामाजिक आर्थिक विकास के योगदान को पहचानते हुए सरकार ने मातृत्व लाभ अधिनियम 2016 तथा यौन उत्पीड़न अधिनियम 2013 के माध्यम से अनुकूल वातावरण तथा महिलाओं को मातृत्व अवकाश देने के कई अच्छे प्रावधान भी उपलब्ध कराए हैं।</p>
<p>इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड अपने आंकड़ों से स्पष्ट करता है की किस प्रकार महिलाओं की श्रमबल में अधिक भागीदारी जीडीपी में अप्रत्याशित वृद्धि करता है। पूरा विश्व इस बात से सहमत है की महिलाएं कोमल है पर कमजोर नहीं एवं शक्ति का नाम ही नारी है। हिंदुस्तान के विकास में सही मायने में यदि 50% भागीदारी महिलाओं की हो तो असाधारण क्षमता की धनी महिलाएं इस देश को विश्व के अन्य विकसित देशों में खड़ा कर सकती हैं, जरूरत इनकी शक्ति क्षमता एवं योग्यता को पहचानने की है। 21वीं सदी में विश्व शक्ति रूप भारत के सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक विकास में महिलाओं का सर्वांगीण विकास को आधार बनाकर आर्थिक महाशक्ति के स्वप्न को साकार किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Feb 2025 17:26:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बलरामपुर जैसे शैक्षिक और सामाजिक रूप से पिछड़ेपन के शिकार जिलों में कहीं ना कहीं महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति उतनी नही है जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बलरामपुर </strong>जैसे शैक्षिक और सामाजिक रूप से पिछड़ेपन के शिकार जिलों में कहीं ना कहीं महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति उतनी जागरूक नहीं है, जितना उन्हें होना चाहिए। इस जागरूकता को महिलाओं व किशोरियों में पैदा करने के लिए सरकार व स्वास्थ्य महकमे द्वारा समय-समय पर कार्यक्रमों को संचालित किया जाता है।</div>
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<div>इसी कड़ी में आज बलरामपुर मुख्यालय पर स्थित गर्ल्स इंटर कॉलेज में समाजसेवी संस्था द्वारा महिलाओं को माहवारी से संबंधित दिक्कतों और परेशानियों के साथ-साथ बीमारियों और उनके बचाव से अवगत कराया गया। गर्ल्स इंटर कॉलेज में सैनिटरी नैपकिंस का वितरण किया गया और एक इंसुलेटर मशीन को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143662/in-educationally-and-socially-backward-districts-like-balrampur-women-are"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/8-(1).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बलरामपुर </strong>जैसे शैक्षिक और सामाजिक रूप से पिछड़ेपन के शिकार जिलों में कहीं ना कहीं महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति उतनी जागरूक नहीं है, जितना उन्हें होना चाहिए। इस जागरूकता को महिलाओं व किशोरियों में पैदा करने के लिए सरकार व स्वास्थ्य महकमे द्वारा समय-समय पर कार्यक्रमों को संचालित किया जाता है।</div>
<div> </div>
<div>इसी कड़ी में आज बलरामपुर मुख्यालय पर स्थित गर्ल्स इंटर कॉलेज में समाजसेवी संस्था द्वारा महिलाओं को माहवारी से संबंधित दिक्कतों और परेशानियों के साथ-साथ बीमारियों और उनके बचाव से अवगत कराया गया। गर्ल्स इंटर कॉलेज में सैनिटरी नैपकिंस का वितरण किया गया और एक इंसुलेटर मशीन को भी गर्ल्स इंटर कॉलेज में लगवाया गया।</div>
<div> </div>
<div>भारतीय मूल की अमेरिकी मीनल बहल ने महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य के लिए केंद्रित एक संस्था 'फैन फॉल' (संगिनी की दोस्त) नाम की संस्था की शुरुआत की है। जो भारत तथा अमेरिका में महिलाओं को माहवारी और उसके दौरान होने वाली बीमारियों के बारे में शिक्षित करने का काम करती है। साथ ही साथ वह महिलाओं व किशोरियों को सैनेटरी पैड व उनके रहने वाली जगहों पर इंसुलेटर मशीनों को इनस्टॉल करवाने का काम करती है।</div>
<div> </div>
<div>आज इसी संस्था और इसकी संस्थापक मीनल बहल के द्वारा व विधान परिषद सदस्य साकेत मिश्रा के तत्वावधान में जिला मुख्यालय पर स्थित गर्ल्स इंटर कॉलेज में सैंकड़ों छात्राओं/ किशोरियों को माहवारी और उससे जनित बीमारियों के बारे में सचेत किया गया। संस्था के सदस्यों के द्वारा सैंकड़ों छात्राओं को सैनेटरी नैपकिन पैड के पैकेटों का वितरण किया गया। इसके साथ ही गर्ल्स इंटर कॉलेज परिसर में एक इंसुलेटर मशीन को भी लगवाया गया है। जहां पर छात्राएं अपने सैनेटरी पैड को डिस्पोज कर सकती है।</div>
<div> </div>
<div>संस्था की संस्थापक मीनल बहल द्वारा छात्रों को वीडियो मैसेज के माध्यम से संबोधित भी किया गया। संबोधन के दौरान उन्होंने छात्राओं से माहवारी और इससे जनित रोगों के बारे में अपेक्षाकृत रूप से अधिक सजग रहने की अपील की। उन्होंने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि यदि आप माहवारी के दिनों में है तो आपको हर 6 घंटे में अपना सेनेटरी नैपकिन पैड को चेंज करना चाहिए, जिससे शरीर से निकलने वाले गंदे खून का कोई दुष्प्रभाव अनचाही जगह पर ना पढ़ सके। उन्होंने यह भी अपील की की सेनेटरी पैड का उपयोग माहवारी के दौरान जरूर किया जाए।</div>
<div> </div>
<div>इसकी जगह पर जो किशोरिया या महिलाएं साधारण कपड़े का उपयोग करती हैं। वह न केवल नुकसानदायक है बल्कि उनमें बैक्टीरिया इत्यादि भी पड़े रहते हैं, जिस कारण से आने वाले दिनों में समस्या उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने कहा कि तमाम महिलाओं और किशोरियों में यह समस्या होती है कि उन्हें वजाइनल डिजीज हो जाती है। लेकिन जानकारी के अभाव में वह इन खतरों को पहचान ही नहीं पाती और अंत में उन्हें बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कार्यक्रम के दौरान प्रबंधन समिति के प्रद्युमन सिंह परितोष सिन्हा, प्राचार्या रेखा रानी, अविनाश मिश्रा, विधान परिषद सदस्य साकेत मिश्रा के सहयोगी मनीष शुक्ला व शिक्षक उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Jul 2024 16:53:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल के संदेशखाली, की महिलाओं को लेकर दिया ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[<div dir="ltr"><strong>अलीगढ़।</strong> श्री वार्ष्णेय महिला विकास समिति की अध्यक्षा गिनीशा वार्ष्णेय ने पश्चिम बंगाल के संदेशखाली, कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर (चोपरा) में हुई घटना से अत्यंत व्यथित होकर महिलाओं के साथ हो रहे अनुचित एवं असभ्य व्यवहार के विरोध में एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से गृह मंत्री भारत सरकार को सौंपा है।</div>
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<div dir="ltr">सिटी मजिस्ट्रेट को दिए ज्ञापन में कहा है कि पश्चिम बंगाल में दिन-प्रतिदिन महिलाओं की बिगड़ती हुई स्थिति गंभीर चिंता का विषय है। कानून और व्यवस्था केवल शब्दकोष तक सिमटकर रह गए हो ऐसा प्रतीत होने लगा है। संदेशखाली, कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर (चोपरा) की घटना सभ्य समाज</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142890/memorandum-given-regarding-the-women-of-sandeshkhali-of-west-bengal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/hindi-divas30.jpg" alt=""></a><br /><div dir="ltr"><strong>अलीगढ़।</strong> श्री वार्ष्णेय महिला विकास समिति की अध्यक्षा गिनीशा वार्ष्णेय ने पश्चिम बंगाल के संदेशखाली, कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर (चोपरा) में हुई घटना से अत्यंत व्यथित होकर महिलाओं के साथ हो रहे अनुचित एवं असभ्य व्यवहार के विरोध में एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से गृह मंत्री भारत सरकार को सौंपा है।</div>
<div dir="ltr"> </div>
<div dir="ltr">सिटी मजिस्ट्रेट को दिए ज्ञापन में कहा है कि पश्चिम बंगाल में दिन-प्रतिदिन महिलाओं की बिगड़ती हुई स्थिति गंभीर चिंता का विषय है। कानून और व्यवस्था केवल शब्दकोष तक सिमटकर रह गए हो ऐसा प्रतीत होने लगा है। संदेशखाली, कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर (चोपरा) की घटना सभ्य समाज का मस्तक लज्जा से झुका देनेवाली हैं। निरीह, निरपराध नागरिकों का और विशेषतः महिलाओं का शोषण और दर्दनाक उत्पीड़न सर्वथा निनंदनीय है। भारतीय संविधान की धज्जियां उड़ानेवाली ये घटनाएं तालिबानी शासन का स्मरण कराती है।</div>
<div dir="ltr"> </div>
<div dir="ltr">एक महिला मुख्यमंत्री के होते हुए भी महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय, अत्याचार और अपमान से हम सब महिलाएं अत्यंत व्यथित है और आप से निवेदन करते है कि, आप इस पूरे मामलें में हस्तक्षेप करे तथा घटना की न्यायिक जाँच करवाएं। सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए। साथ ही आपसे अनुरोध है कि पीड़ित महिलाओं के शारीरिक और मानसिक उपचार और उनके पुनर्वसन की प्रभावी व्यवस्था की जाए। हम इस पूरे मामले की कठोर निंदा करते है और आप से निवेदन करते है कि कृपया इस अत्यंत संवेदनशील स्थिति का संज्ञान लेते हुए शीघ्रातिशीघ्र आवश्यक कार्यवाही करे।</div>
<div dir="ltr"> </div>
<div dir="ltr"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jul 2024 15:33:26 +0530</pubDate>
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