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                <title>सूचना निदेशक विशाल सिंह ने पत्रकारों की सुविधाओं को दी नई रफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong></p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के हितों को ध्यान में रखते हुए सूचना विभाग ने आयुष्मान कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। सूचना निदेशक <strong>विशाल सिंह</strong> ने बताया कि पत्रकार बंधुओं को आयुष्मान कार्ड प्राप्त करने में आ रही समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं तथा शीघ्र ही उनके लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया जाएगा।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि जिन पत्रकारों ने आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन किया था, लेकिन किसी कारणवश उनका कार्ड अभी तक नहीं बन पाया है, वे <strong>beneficiary.nha.gov.in</strong> पोर्टल पर अपने आवेदन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182648/information-director-vishal-singh-gave-new-impetus-to-the-facilities"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/jaunpur-news-naya-sabera-network-4-1024x588.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong></p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के हितों को ध्यान में रखते हुए सूचना विभाग ने आयुष्मान कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। सूचना निदेशक <strong>विशाल सिंह</strong> ने बताया कि पत्रकार बंधुओं को आयुष्मान कार्ड प्राप्त करने में आ रही समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं तथा शीघ्र ही उनके लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया जाएगा।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि जिन पत्रकारों ने आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन किया था, लेकिन किसी कारणवश उनका कार्ड अभी तक नहीं बन पाया है, वे <strong>beneficiary.nha.gov.in</strong> पोर्टल पर अपने आवेदन की स्थिति की जांच कर सकते हैं। यदि पोर्टल पर उनका नाम प्रदर्शित होता है और किसी प्रकार के संशोधन की आवश्यकता होती है, तो संबंधित जनपद के मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से संपर्क कर आवश्यक सुधार कराया जा सकता है।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सूचना निदेशक ने कहा कि जिन पत्रकारों ने अभी तक आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन नहीं किया है अथवा आवेदन करने के बावजूद उनका कार्ड नहीं बन पाया है, उनकी सुविधा के लिए सूचना विभाग शीघ्र ही एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल शुरू करेगा। इस पोर्टल के माध्यम से पत्रकार अपने जनपद के जिला सूचना कार्यालय के अधिकारियों की सहायता से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पोर्टल के प्रारंभ होने की सूचना सभी संबंधित पत्रकारों को समय से उपलब्ध करा दी जाएगी।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पहल का स्वागत करते हुए <strong>उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित)</strong> के संयोजक <strong>प्रभात त्रिपाठी</strong> ने सूचना निदेशक विशाल सिंह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की समस्याओं के समाधान के लिए सूचना विभाग लगातार सकारात्मक और प्रभावी प्रयास कर रहा है। उनके अनुसार, विशाल सिंह के नेतृत्व में विभाग की कार्यशैली अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और पत्रकार हितैषी बनी है।</p><p style="text-align:justify;">प्रभात त्रिपाठी ने कहा कि सूचना निदेशक के रूप में अपने लगभग एक वर्ष के कार्यकाल में विशाल सिंह ने पत्रकार कल्याण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिनका लाभ प्रदेशभर के पत्रकारों को मिल रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद आयुष्मान कार्ड से संबंधित समस्याओं का त्वरित समाधान होगा तथा पत्रकारों को सरकारी सुविधाओं का लाभ अधिक सरलता से प्राप्त हो सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 20:49:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएमओ कार्यालय बना लूट का अड्डा</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल संचालकों से  रुपया लेकर नोटिस  किया जा रहा खारिज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144906/cmo-office-became-a-den-of-loot"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/0.0044.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>अम्बेडकरनगर। </strong>मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजकुमार, ऐ सीएमओ करतूत का हुआ खुलासा </div>
<div>जितने अवैध अस्पतालों पर छापा मार कर नोटिस दी गई अस्पताल वालों को नोटिस में भी हो रहा है। खेल जितने अवैध अस्पतालों को नोटिस मिला है सभी से पांच हजार रुपए लेकर ऐ सी एमओ नोटिस को कर रहे है निरस्त। अवैध धन और वसूली करने का नया अंदाज सीखना है तो ऐ सीएमओ से सीखो। मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं ऐ सीएमओ का वेतन लगभग 70 से 80 हजार होगा।</div>
<div> </div>
<div>सरकारी वेतन से जी नहीं भरता क्षुब्ध ऊपरी कमाई कमाने के लिए बनाया गया अनोखा तरीका अस्पतालों पर छापामारी का। छापेमारी में जिस अस्पताल संचालकों को नोटिस दी गई अस्पताल संचालकों से पांच   दस हजार रुपए देकर अपने नोटिस निरस्त करवा सकता है  और पुरानी जगह से अस्पताल हटाकर दूसरी जगह अपनी क्लीनिक चला सकता है यह मुख्य चिकित्सा अधिकारी का चमत्कार। मुख्य चिकित्सा कार्यालय के अगल-बगल दलाल घूमते रहते हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong> इस अवैध धन वसूली प्रकरण में सत्ताधारी से लेकर कथित पत्रकार भी शामिल</strong></div>
<div>इस पूरे अवैध धन वसूली के प्रकरण का वीडियो खुफिया कैमरे में कैद हो गया अस्पताल संचालक स्वयं बता रहा है‌‌। की जो नोटिस दी गई थी मुख्य चिकित्सा अधिकारी और  एसीएमओ के द्वारा अस्पताल संचालकों दिया गया इस अस्पताल संचालकों से  रुपया  लेकर नोटिस को खारिज कर दिया जा रहा है। विश्वस सूत्रों से यह भी जानकारी प्राप्त हुई की कुछ अस्पताल रजिस्ट्रेशन होने के बाद भी छापेमारी में उसको सील कर दिया गया था। आखिर क्या कारण था जब रजिस्ट्रेशन था तो सील करने की क्या आवश्यकता पड़ गई जानकारी के मुताबिक यह सब खेल अवैध धन वसूलने के लिए किया जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>सूत्रों से यह भी जानकारी मिली कि जो उसका रजिस्ट्रेशन अस्पताल का है उससे भी मांगा जा रहा है दो से ढाई लाख रुपए और उसकी फाइल जिले के दफ्तरों तक घूम रही है बताया जाता है कि फाइल पास करने में सभी  की हिस्सेदारी है। आखिर मुख्यमंत्री योगी स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार पर अंकुश कैसे लगा पाएंगे यह सवाल बना हुआ है फिलहाल जब से सीएमओ डॉक्टर राजकुमार जिले की कमान को संभाले हुए हैं तब से आए दिन सुर्खियों में धन वसूली का चल रहा है। आखिर जब रजिस्ट्रेशन नहीं है अवैध पाया जाता है फिर पकड़ कर जेल क्यों नहीं भेजा जाता। बहुत से ऐसे सवाल मन को टटोल रहे है। फिलहाल देखना यह होगा कब मुख्य चिकित्साधिकारी रजिस्ट्रेशन संचालक अस्पतालों के कागज मुआयना करते हैं।या भ्रष्टाचार का सिलसिला जारी रहेगा।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Sep 2024 16:57:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पूरी तरह से सुरक्षित है फाइलेरिया रोधी दवा:जिलाधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[लाइलाज है फाइलेरिया, दवा सेवन और मच्छरों से बचाव ही है उपाय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143971/anti-filariasis-medicine-is-completely-safe-district-magistrate"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-08/img-20240810-wa0033.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>देवरिया ।</strong> फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है। इससे बचाव के लिए शनिवार को सीएमओ कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी दिव्या मित्तल, पुलिस अधिक्षक संकल्प शर्मा और एडी हेल्थ डॉ एनपी गुप्ता के साथ सीएमओ डॉ राजेश झा ने खुद दवा का सेवन कर एमडीए अभियान का शुभारम्भ किया। इस दौरान कार्यालय में मौजूद सभी कर्मचारियों ने दवा का सेवन किया। साथ ही जिले के सभी ब्लाकों में अभियान का शुभारम्भ किया गया। </div>
<div> </div>
<div> इस दौरान जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने कहा कि फाइलेरिया क्यूलेक्स मादा मच्छर के काटने से होने वाली बीमारी से बचाव के लिए साल में एक बार पांच साल तक लगातार सर्वजन दवा सेवन अभियान के दौरान दवा का सेवन जरूरी है। कहा कि दवा खाने के बाद कुछ लोगों में हल्की मितली, सिरदर्द, चक्कर आना जैसे लक्षण आते हैं, इससे घबराना नहीं चाहिए। यह एक अच्छा संकेत है और यह तब होता है जब शरीर के भीतर मौजूद माइक्रो फाइलेरिया मरते हैं।</div>
<div> </div>
<div>एडी हेल्थ डॉ एनपी गुप्ता ने कहा कि माइक्रो फाइलेरिया के संक्रमण से लिम्फोडिमा हाथ, पैर, स्तन में सूजन और हाइड्रोसील में सूजन हो जाता है । प्रबंधन के जरिये लिम्फोडिमा को नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है। बीमारी से बचाव के लिए पांच साल तक लगातार साल में एक बार फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन आवश्यक है।</div>
<div> </div>
<div>सीएमओ डॉ राजेश झा ने कहा कि बुखार, बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग और उसके आस-पास दर्द व सूजन की समस्या होती है। चूंकि इस बीमारी में हाथ और पैरों में हाथी के पांव जैसी सूजन आ जाती है, इसलिए इस बीमारी को हाथीपांव कहा जाता है। वैसे तो फाइलेरिया का संक्रमण बचपन में ही आ जाता है, लेकिन इसके लक्षण 10 से 15 साल में नजर आते हैं। फाइलेरिया न सिर्फ व्यक्ति को विकलांग बना देती है बल्कि इससे मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।</div>
<div> </div>
<div>फाइलेरिया ऐसी बीमारी है, जो एक बार हो जाए तो कभी पूरी तरह से ठीक नहीं होती है। इस लाइलाज बीमारी से बचने के लिए साल में एक बार पांच साल तक लगातार बचाव की दवा का सेवन करना अनिवार्य है। कार्यक्रम में अर्बन नोडल अधिकारी डॉ आरपी यादव, जिला मलेरिया अधिकारी सीपी मिश्रा, डीसीपीएम राजेश गुप्ता, सहायक मलेरिया अधिकारी सुधाकर मणि, आशा कार्यकर्ताओं और आँगनबाड़ी कार्यकत्रियों सहित सीफार व पाथ संस्था के प्रतिनिधि मौजूद रहे।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Aug 2024 16:41:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी से नगर में 200 से अधिक गैर पंजीकृत सेंटर -दिलीप गहरवार </title>
                                    <description><![CDATA[सबसे खस्ता हाल है सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मड़िहान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142867/due-to-neglect-of-health-department-more-than-200-unregistered"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/hindi-divas27.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मिर्जापुर।</strong> स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से जिले में गैर पंजीकृत सेन्टरों की भरमार हो गई है। यह जानकारी मीडिया से बात करते हुए आम आदमी पार्टी के दिलीप सिंह गहरवार ने दी। दिलीप सिंह गहरवार ने बताया कि जिले के नगर में ही केवल 200 से अधिक गैर पंजीकृत सेटर संचालित हो रहे है। इसमें न के बाराबर ही सेटर सीएमओ आफिस द्वारा पंजीकृत किया गया है। जिले में अनदेखी करने वाले पैथालांजी सेंटर  एवं कलेक्शन सेटर का कारोबार तेजी से फल फूल रहा है। इसके साथ ही गांवो में कितने की संख्या में संचालित हो रहा है इसकी भी जानकारी विभाग से मिलने के बाद सभी के सामने उजागर करने का कार्य किया जायेगा।</p>
<p>यह सब पैथालाजी सेन्टर कही एक कमरे में तो कही एक सेटर में चल रहे है। अप्रशिक्षित लोगों के हाथों में सेटर की कमान है। इससे मरीजों को सही रिपोर्ट नही मिल पा रहा है। उन्होने बताया कि वर्तमान समय में एक मंडलीय चिकित्सालय, 19 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 56 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के अलावा 326 सबसेन्टरों का संचालन किया जा रहा है। सभी सरकारी केन्द्रों पर खून समेत तमाम जांच की सुविधा सरकार द्वारा निशुल्क कराये जाने की व्यवस्था है। लेकिन जिलेके तमाम केन्द्रों पर विभाग की अनदेखी के कारण तमाम खामियों के चलते जांच नही हो पा रही है।</p>
<p>इससे मरीजों का निजी चिकित्सालयों की ओर जाना पड़ रहा है। जहां प्रदेश व केन्द्र की सरकारी मरीजों को जमीनी स्तर तक उपचार देने के लिए तरह-तरह के उपचार कर रही है वही विभाग के उच्चाधिकारियों की लापरवाही के चलते सुविधा से मरीज वंचित हो जा रहे है और महगे दवाईयो व जांच के लिए मजबूर है। इस समय सबसे खस्ता हाल में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मड़िहान का है जहां पर सीएमओ द्वारा बनाये गये प्रभारी अपर मुख्य चिकित्साधिकारी कभी झांकना तक उचित नही समझा। निजी सेन्टरो पर इस समय 450-500 रूपये लिये जा रहे है।</p>
<p>इसमें केन्द्रो पर तैनात डॉक्टरों का भी कमीशन होता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर मरीजों की दवा दी जा रही है। नगर से लेकर ग्रामीण इलाको मे यह धड़ल्ले से संचालित हो रहा है। जिले में बिसुन्दरपुर, रमईपट्टी, मिशनकमाउण्ड, तरकापुर रोड, तहसील रोड, मण्डलीय चिकित्सालय रोड, रैदानी कालोनी, स्टेशन रोड, विन्ध्याचल रोड, मड़िहान सामुदायिक स्वास्थ्य के अगल बगल 40 से अधिक की संख्या, हलिया मार्ग रतेह चौराहा इसके अलावा तमाम बजारोमें भी गैर कानूनी तरीके से सेन्टर संचालित हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण विभाग के द्वारा पिछले तीन वर्षो से कार्यवाही नही किया गया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jul 2024 16:38:15 +0530</pubDate>
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