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                <title>वन महोत्सव - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>वन महोत्सव RSS Feed</description>
                
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                <title>वन महोत्सव कार्यक्रम के तहत जिलाधिकारी ने किया पौधारोपण</title>
                                    <description><![CDATA[रेशम विभाग द्वारा अर्जुन के पौधे लगाने पर जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153020/district-magistrate-planted-saplings-under-van-mahotsav-program"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-07/img-20250706-wa0482.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह / राजेश तिवारी (ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र / उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">रविवार को वन महोत्सव सप्ताह में रेशम विकास विभाग द्वारा अर्जुन का वृक्षारोपण जिलाधिकारी बी एन सिंह द्वारा आवासीय परिसर में किया गया।इस अवसर पर रेशम विभाग के सहायक निदेशक नागेंद्र राम अपने कार्मिकों के साथ उपस्थित रहे। इस दौरान सहायक निदेशक रेशम नागेंद्र राम ने बताया कि रेशम विभाग के बृहद वृक्षारोपण अंतर्गत 28000 पौधे का लक्ष्य आवंटित है। जिसकी पूरी तैयारी कर ली गई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-07/img-20250706-wa0485.jpg" alt="IMG-20250706-WA0485" width="1040" height="780"></img></p>
<p style="text-align:justify;">जनपद में विभाग के 26 राजकीय रेशम फार्म है जिससे लगभगएक हजार कीटपालक जुड़े हुए है। सोनाचाल के कोन, दुद्धी, म्योरपुर, बभनी में तसर रेशम उत्पादन का ज्यादा कार्य हो रहा है। इसके अतिरिक्त नगवा,करमा एवं रॉबर्ट्सगंज में तसर रेशम उत्पादन का कार्य होता है।व्यक्तिगत क्षेत्र में 7-8 लाभार्थी बिजगार के माध्यम से भी आय अर्जित कर रहे है।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां विदित कराना है तसर के कीड़े का अर्जुन भोज्य वृक्ष है। जिससे सोनभद्र के ग्रामीणों द्वारा जंगल क्षेत्रों में उपलब्ध अर्जुन/आसन वृक्षों पर तसर कीटपालन किया जाता है। अर्जुन पौधे से कीटपालन से जीविकोपार्जन के साथ छाल से अर्जुनारिस्ठ तैयार होता है जो हृदय रोग के लिए रामबाण है। धागाकरण एवं बुनाई का कार्य करमा विकासखंड के बट में और म्योरपुर के बनवासी सेवा आश्रम तथा दुद्धी विकास खण्ड में किया जा रहा है। विभाग द्वारा अपील की गई है कि स्वेच्छा से अर्जुन का वृक्षारोपण करने विभाग से बनवासी सेवा आश्रम गोविंद पुर में स्थापित नर्सरी से पौध प्राप्त किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Jul 2025 23:38:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
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                <title>कुशीनगर : पर्यावरण लोकाचार का एक अभिन्न अंग है वृक्षारोपण – रामध्यान पांडेय </title>
                                    <description><![CDATA[संतोष जायसवाल ने हरिशंकरी पौध का रोपण कर वन महोत्सव का किया शुभारंभ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142806/tree-plantation-is-an-integral-part-of-kushinagar-environmental-ethos"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/screenshot_2024-07-05-09-14-00-363_com.whatsapp-edit.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>ब्यूरो रिपोर्ट प्रमोद रौनियार </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर ( स्वतंत्र प्रभात) । </strong>वन महोत्सव की शुरुआत भारत के केंद्रीय कृषि मंत्री एम. मुंशी के दूरदर्शी प्रयासों के कारण हुई, जिन्होंने पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में पेड़ों और जंगलों की अपरिहार्य भूमिका को उजागर करने का प्रयास किया। डॉ. एमएस रंधावा के नेतृत्व में कोडईकनाल में एक सफल वृक्षारोपण अभियान से प्रेरित होकर, मुंशी ने जुलाई 1950 में एक राष्ट्रव्यापी पहल शुरू की। तब से, वन महोत्सव भारत के पर्यावरण लोकाचार का एक अभिन्न अंग बन गया है, जिसने पूरे देश में वृक्षारोपण और संरक्षण की संस्कृति को बढ़ावा दिया है। उक्त बाते वन दरोगा रामध्यान पांडेय ने कही।</div>
<div> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि वन महोत्सव के उद्देश्य मूलतः, वन महोत्सव हमारी प्राकृतिक विरासत को पोषित करने और उसकी सुरक्षा करने का एक पवित्र संकल्प है। इसके प्राथमिक उद्देश्य हरित आवरण में वृद्धि वन महोत्सव व्यापक वृक्षारोपण अभियान को प्रोत्साहित करके और वनीकरण पहल को बढ़ावा देकर भारत के हरित आवरण का विस्तार करने का प्रयास करता है।</div>
<div> </div>
<div style="text-align:justify;">वन दरोगा ने कहा कि जागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य विभिन्न आउटरीच कार्यक्रमों और अभियानों के माध्यम से, इस महोत्सव का उद्देश्य लोगों को पेड़ों के असंख्य लाभों के बारे में शिक्षित करना है, जिसमें जलवायु परिवर्तन को कम करने, मिट्टी के कटाव को रोकने और जैव विविधता को संरक्षित करने में उनकी भूमिका शामिल है । भागीदारी को प्रोत्साहित करना: वन महोत्सव सामूहिक कार्रवाई की भावना को बढ़ावा देता है, सभी उम्र और पृष्ठभूमि के लोगों से वृक्षारोपण गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होने और पर्यावरण संरक्षण की संस्कृति को अपनाने का आग्रह करता है।</div>
<div> </div>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>संतोष जायसवाल ने हरिशंकरी पौध का रोपण कर वन महोत्सव का किया शुभारंभ</strong></span></h4>
<div style="text-align:justify;">वन महोत्सव की शुरुआत को लेकर बीते दिन शुक्रवार को पड़रौना रेंज के शाहपुर वन ब्लॉक में सदर विधायक प्रतिनिधि मनीष जायसवाल के प्रतिनिधि संतोष जायसवाल द्वारा हरिशंकरी पौध का रोपण कर वन महोत्सव का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर वन दरोगा रामध्यान पांडेय, वन रेंजर पडरौना सतेंद्र कुमार सिंह, वन रक्षक आकाश त्रिपाठी सहित दर्जनों वनकर्मी उपस्थित रहे।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jul 2024 09:30:50 +0530</pubDate>
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