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                <title>cyber fraud - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>cyber fraud RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>महराजगंज तराई पुलिस ने साइबर ठगी के शिकार युवक को दिलाए 65 हजार रुपये वापस</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</div>
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<div><strong>बलरामपुर। </strong>थाना महराजगंज तराई पुलिस की तत्परता और प्रभावी कार्रवाई से साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति को बड़ी राहत मिली है। पुलिस ने साइबर अपराधियों द्वारा ठगे गए 65 हजार रुपये पीड़ित के खाते में वापस कराकर सराहनीय कार्य किया है।</div>
<div>जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के ग्राम जयनगरा निवासी फिरोज खान का मोबाइल 14 मई 2026 को हैक हो गया था, जिसके बाद उनके बैंक खाते से 65 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। घटना की जानकारी होने पर पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।</div>
<div>शिकायत प्राप्त होते ही साइबर</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181507/maharajganj-terai-police-returned-65-thousand-rupees-to-a-youth"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260618-wa0621.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</div>
<div> </div>
<div><strong>बलरामपुर। </strong>थाना महराजगंज तराई पुलिस की तत्परता और प्रभावी कार्रवाई से साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति को बड़ी राहत मिली है। पुलिस ने साइबर अपराधियों द्वारा ठगे गए 65 हजार रुपये पीड़ित के खाते में वापस कराकर सराहनीय कार्य किया है।</div>
<div>जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के ग्राम जयनगरा निवासी फिरोज खान का मोबाइल 14 मई 2026 को हैक हो गया था, जिसके बाद उनके बैंक खाते से 65 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। घटना की जानकारी होने पर पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।</div>
<div>शिकायत प्राप्त होते ही साइबर हेल्पडेस्क थाना महराजगंज तराई सक्रिय हो गई। उपनिरीक्षक आदित्य कुमार यादव और आरक्षी धीरज तिवारी ने त्वरित तकनीकी जांच करते हुए संबंधित बैंक अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया। पुलिस की पहल पर ठगी गई धनराशि को आरोपी के खाते में तत्काल होल्ड कराया गया।</div>
<div>इसके बाद न्यायालय से रिलीजिंग आदेश प्राप्त कर बैंक के नोडल अधिकारी को भेजा गया। सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 65 हजार रुपये की पूरी धनराशि सफलतापूर्वक पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई।</div>
<div>धनराशि वापस मिलने पर फिरोज खान ने खुशी जताते हुए थाना महराजगंज तराई पुलिस का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता के कारण उन्हें उनकी मेहनत की कमाई वापस मिल सकी।</div>
<div>इस सराहनीय कार्रवाई में उपनिरीक्षक आदित्य कुमार यादव, आरक्षी धीरज तिवारी, आरक्षी अर्जुन प्रसाद वर्मा तथा महिला आरक्षी पूजा सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।</div>
</div>
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</div>
</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:33:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरित पुनरुद्धार की ओर बढ़ते भारत के कदम</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div dir="ltr">
<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत ने भूमि बहाली के क्षेत्र में एक ऐसी अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है जिसने पूरी दुनिया के सामने सफलता का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है। भारत ने अपने निरंतर और सुनियोजित प्रयासों से 21.76 मिलियन हेक्टेयर बंजर और खराब हो चुकी भूमि को फिर से हरा-भरा और उपजाऊ बनाने में सफलता प्राप्त की है। इस विशाल आंकड़े की गंभीरता और इसके भौगोलिक विस्तार को इस तरह समझा जा सकता है कि यह क्षेत्रफल लगभग पूरे यूनाइटेड किंगडम अर्थात ब्रिटेन के कुल भौगोलिक आकार के बराबर है।</span></p></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181455/indias-steps-towards-green-revival"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images2.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div dir="ltr">
<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत ने भूमि बहाली के क्षेत्र में एक ऐसी अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है जिसने पूरी दुनिया के सामने सफलता का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है। भारत ने अपने निरंतर और सुनियोजित प्रयासों से 21.76 मिलियन हेक्टेयर बंजर और खराब हो चुकी भूमि को फिर से हरा-भरा और उपजाऊ बनाने में सफलता प्राप्त की है। इस विशाल आंकड़े की गंभीरता और इसके भौगोलिक विस्तार को इस तरह समझा जा सकता है कि यह क्षेत्रफल लगभग पूरे यूनाइटेड किंगडम अर्थात ब्रिटेन के कुल भौगोलिक आकार के बराबर है। इतने बड़े पैमाने पर सूखी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊसर और जीवनहीन हो चुकी ज़मीन को पुनर्जीवित करना केवल एक प्रशासनिक सफलता नहीं है बल्कि यह प्रकृति के प्रति देश की गहरी प्रतिबद्धता और दूरगामी नीतियों का जीवंत परिणाम है। इस ऐतिहासिक कदम ने न केवल भारत की पारिस्थितिक सुरक्षा को मजबूत किया है बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति देश की साख को बहुत ऊंचा किया है। भूमि का इस तरह से पुनरुद्धार करना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की नींव रखने जैसा है जो सतत विकास के वैश्विक लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक सिद्ध होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरी मुहिम की वैश्विक कड़ियों को जोड़कर देखना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि भारत के ये प्रयास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे बड़े अभियानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। इसी संदर्भ में बॉन चुनौती का नाम प्रमुखता से उभर कर सामने आता है। बॉन चुनौती वास्तव में वनों की कटाई को रोकने और मरुस्थलीकरण के कारण बंजर हो चुकी भूमि को फिर से उपजाऊ और हरा-भरा बनाने का एक बहुत बड़ा वैश्विक संकल्प है। इस महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत वर्ष 2011 में जर्मनी की सरकार और इंटरनेशनल यूनियन फॉर </span>Conservation <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑफ नेचर द्वारा संयुक्त रूप से की गई थी। जब इसे वैश्विक स्तर पर शुरू किया गया था तब इसका प्राथमिक लक्ष्य रखा गया था कि वर्ष 2020 तक पूरी दुनिया में 150 मिलियन हेक्टेयर खराब हो चुकी भूमि को बहाल किया जाएगा। इसके बाद इस लक्ष्य को और अधिक विस्तारित करते हुए वर्ष 2030 तक 350 मिलियन हेक्टेयर भूमि को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया गया। भारत ने इस वैश्विक चुनौती को सहर्ष स्वीकार किया और अपनी घरेलू प्राथमिकताओं को इसके साथ इस तरह जोड़ा कि आज देश इस दिशा में मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की इस पर्यावरणीय यात्रा में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब देश ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जिम्मेदारियों को और अधिक विस्तार देने का निर्णय लिया। वर्ष 2019 में भारत की राजधानी नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय के चौदहवें सत्र का आयोजन किया गया था जिसे कॉप 14 के नाम से भी जाना जाता है। इस वैश्विक सम्मेलन में दुनिया भर के पर्यावरणविदों और नीति निर्माताओं की उपस्थिति में भारत ने अपने पुराने लक्ष्यों में बड़ा संशोधन किया। भारत ने वैश्विक मंच पर यह संकल्प लिया कि वह वर्ष 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर बंजर और निम्नीकृत भूमि को पूरी तरह से बहाल करेगा। वर्तमान समय में हासिल किया गया 21.76 मिलियन हेक्टेयर का यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत अपने लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रहा है और वह इस अत्यंत महत्वाकांक्षी लक्ष्य को निर्धारित समय सीमा से बहुत पहले ही प्राप्त करने की मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस विशाल भूभाग को दोबारा जीवन देने और उसे हरा-भरा बनाने के लिए देश में बहुआयामी रणनीतियों को अपनाया गया जिसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका वनरोपण की रही है। देश के विभिन्न राज्यों में जो जमीनें पूरी तरह से खाली थीं या जहां औद्योगिक गतिविधियों और खनन कार्यों के बाद खदानों को बंजर छोड़ दिया गया था वहां बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाए गए। इस प्रक्रिया में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि केवल पेड़ न लगाए जाएं बल्कि उन स्थानीय प्रजातियों के पौधों को चुना जाए जो वहां की मिट्टी और जलवायु के अनुकूल हों। इससे बंजर पहाड़ियों और मैदानी इलाकों में एक बार फिर से सघन हरित आवरण लौटने लगा जिसने भूमि के क्षरण को रोक दिया और मिट्टी की खोई हुई पोषक क्षमता को वापस लाने में मदद की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वनरोपण के साथ-साथ जल और मिट्टी के संरक्षण के लिए जलागम प्रबंधन तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग किया गया जो इस सफलता की रीढ़ साबित हुई। इसके अंतर्गत पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रों में वैज्ञानिक पद्धतियों से छोटे-छोटे बांधों का निर्माण किया गया जिन्हें चेक डैम कहा जाता है। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा के तेजी से बहते हुए पानी को रोका गया जिससे न केवल उपजाऊ मिट्टी का बहाव थमा बल्कि ज़मीन के भीतर पानी का स्तर भी तेजी से ऊपर उठा। भूजल स्तर में सुधार होने के कारण आसपास की सूखी और प्यासी ज़मीन को पर्याप्त नमी मिली जिससे वहां प्राकृतिक रूप से वनस्पतियों का उगना दोबारा शुरू हो गया और कई सूखी नदियां तथा जलस्रोत पुनर्जीवित हो उठे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अभियान की एक और बड़ी विशेषता कृषि वानिकी को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना रही है जिसने पारंपरिक खेती के तौर-तरीकों को सकारात्मक रूप से बदल दिया। परंपरागत रूप से किसान केवल अपनी फसलों के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करते थे लेकिन नई नीतियों के तहत उन्हें खेतों की मेड़ों पर और फसलों के बीच के खाली स्थानों में आर्थिक रूप से उपयोगी पेड़ लगाने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया गया। इससे किसानों को न केवल ईंधन और चारे के रूप में अतिरिक्त संसाधन मिले बल्कि खेतों की मिट्टी की नाइट्रोजन स्थिरीकरण क्षमता और सामान्य उर्वरता में भी भारी सुधार हुआ। कृषि वानिकी ने देश के ग्रामीण अंचलों में एक नए प्रकार के लाभदायक और टिकाऊ हरित तंत्र को जन्म दिया जिसने पर्यावरण के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को भी संबल प्रदान किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन सभी सरकारी और तकनीकी प्रयासों को वास्तविक शक्ति और गति तब मिली जब इसमें आम जनता और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को अनिवार्य बनाया गया। संयुक्त वन प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत वनों के आसपास रहने वाले स्थानीय ग्रामीण निवासियों और विशेषकर आदिवासी समुदायों को जंगलों की रक्षा करने और नए पौधे लगाने की सीधी जिम्मेदारी सौंपी गई। जब इन समुदायों को यह अहसास हुआ कि जंगलों का विकास सीधे तौर पर उनके अपने जीवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति और आजीविका से जुड़ा हुआ है तो उन्होंने इस अभियान को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया। लोगों के इस सामूहिक जुड़ाव के कारण ही नए लगाए गए पौधों की जीवित रहने की दर में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई और सामुदायिक वनों का दायरा तेजी से बढ़ने लगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस ऐतिहासिक भूमि बहाली अभियान के दूरगामी और बहुआयामी लाभ अब प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने लगे हैं जिनमें सबसे बड़ा लाभ एक विशाल कार्बन अवशोषक क्षेत्र का निर्माण होना है। जब 21.76 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर नए पेड़-पौधे और घनी वनस्पतियां विकसित होती हैं तो वे वायुमंडल से हर साल लाखों टन कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों को सोख लेती हैं। यह प्रक्रिया वैश्विक तापन के खतरों को कम करने में भारत की ओर से विश्व को दिया गया एक अमूल्य योगदान है। यह हरित क्षेत्र देश के कार्बन उत्सर्जन को संतुलित करने में एक मजबूत ढाल की तरह काम कर रहा है और वैश्विक जलवायु सुधार में अपनी महती भूमिका निभा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके साथ ही जैव विविधता की बहाली इस अभियान का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण परिणाम है क्योंकि जो क्षेत्र कभी पूरी तरह से उजाड़ और बेजान हो चुके थे वहां अब एक बार फिर से विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों को अपना खोया हुआ प्राकृतिक आवास मिल रहा है। पशु-पक्षियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कीट-पतंगों और मिट्टी के भीतर रहने वाले सूक्ष्मजीवों की संख्या में वृद्धि होने से संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र दोबारा सक्रिय हो रहा है जो प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। अंततः इस पूरी प्रक्रिया ने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई और अभूतपूर्व मजबूती प्रदान की है जो सतत विकास का सबसे बड़ा उदाहरण है। भूमि के उपजाऊ होने से जहां एक ओर कृषि उत्पादकता में सुधार हुआ है वहीं दूसरी ओर जंगलों से मिलने वाले विभिन्न उत्पादों जैसे फल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शहद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गोंद और अनेक प्रकार की दुर्लभ जड़ी-बूटियों ने स्थानीय लोगों की दैनिक आय को बढ़ाने में मदद की है। रोजगार के नए अवसर पैदा होने से ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि आई है जो यह सिद्ध करती है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को एक साथ प्राप्त किया जा सकता है।</span></p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:35:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>करोड़ों की ठगी, करोड़ों का खर्च और फिर भी नाकाफी रिकवरी; डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती बनता साइबर अपराध*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/41.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में राजस्थान में 77 हजार से अधिक लोग साइबर ठगी का शिकार हुए और ठगों ने लगभग 354 करोड़ रुपए की रकम हड़प ली। चिंताजनक बात यह है कि इस भारी-भरकम ठगी में से केवल 39 करोड़ रुपए ही रिकवर किए जा सके हैं, जबकि साइबर सुरक्षा और साइबर थानों के संचालन पर राज्य सरकार का सालाना खर्च 102 करोड़ रुपए से अधिक है।</div>
<div>यह स्थिति केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। देश के लगभग सभी राज्यों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच जितनी तेजी से बढ़ी है, उससे कहीं अधिक तेजी से साइबर अपराधियों के तौर-तरीके विकसित हुए हैं। आज अपराधी किसी बैंक डकैती या चोरी के बजाय मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे नकली निवेश योजनाओं, फर्जी कस्टमर केयर, ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी, नौकरी, टास्क फ्रॉड और क्यूआर कोड स्कैनिंग जैसे अनेक तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।</div>
<div>राजस्थान के आंकड़े बताते हैं कि हर घंटे लगभग दस लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। यह केवल आंकड़ा नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जिन्होंने वर्षों की मेहनत से अपनी बचत जमा की थी। कई मामलों में लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में उनके खातों से गायब हो गई। पीड़ितों में युवा, व्यापारी, नौकरीपेशा वर्ग, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। विशेष रूप से 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक निशाना बन रहे हैं, क्योंकि यही वर्ग डिजिटल सेवाओं का सबसे ज्यादा उपयोग करता है।</div>
<div>साइबर अपराध का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। जैसे ही पुलिस और बैंकिंग संस्थाएं किसी एक तरीके पर नियंत्रण करने का प्रयास करती हैं, ठग कोई नया तरीका खोज लेते हैं। हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फर्जी शेयर मार्केट निवेश योजनाओं के जरिए करोड़ों रुपए की ठगी सामने आई है। अपराधी स्वयं को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते हैं और फिर उनसे रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।</div>
<div>सवाल यह भी उठता है कि जब साइबर थानों और साइबर सुरक्षा तंत्र पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तब रिकवरी की दर इतनी कम क्यों है। राजस्थान में 354 करोड़ रुपए की ठगी के मुकाबले केवल 39 करोड़ रुपए की रिकवरी होना व्यवस्था की सीमाओं को दर्शाता है। इसका एक कारण यह है कि ठग रकम को तुरंत कई फर्जी खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। इन खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। रकम कई राज्यों और कई बार विदेशों तक पहुंच जाती है, जिससे उसे ट्रेस करना और वापस लाना बेहद कठिन हो जाता है। इसके अलावा साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और अंतरराज्यीय समन्वय की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी कई बार जांच को प्रभावित करती है।</div>
<div>बैंकों की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित ग्राहकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंक शामिल हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, लेकिन यह जरूर दर्शाता है कि ग्राहकों को जागरूक बनाने और संदिग्ध लेनदेन पर त्वरित कार्रवाई की दिशा में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा के अनेक स्तर मौजूद हैं, फिर भी यदि ग्राहक स्वयं सतर्क नहीं रहेगा तो अपराधी किसी न किसी तरीके से उसे भ्रमित कर सकते हैं।</div>
<div>आज साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या बैंक की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। यह प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी बन चुकी है। अधिकांश मामलों में ठग लोगों की तकनीकी कमजोरी का नहीं बल्कि उनकी भावनाओं, लालच, डर या जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। कोई व्यक्ति यदि अनजान लिंक पर क्लिक करता है, ओटीपी साझा करता है, स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करता है या फर्जी निवेश योजना में अधिक मुनाफे के लालच में पैसा लगाता है, तो वह स्वयं जोखिम बढ़ा देता है। इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।</div>
<div>सरकार और पुलिस प्रशासन भी लगातार लोगों को जागरूक करने के प्रयास कर रहे हैं। साइबर हेल्पलाइन 1930 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगी होने के बाद पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ित तुरंत हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए तो रकम को फ्रीज कराने और रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। दुर्भाग्यवश कई लोग शर्म, घबराहट या जानकारी के अभाव में शिकायत करने में देर कर देते हैं, जिससे अपराधियों को रकम निकालने का पर्याप्त समय मिल जाता है।</div>
<div>देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। सरकार कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दे रही है और करोड़ों लोग रोजाना ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बनाना होगा। केवल नए साइबर थाने खोलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और बैंकिंग संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।</div>
<div>वर्तमान समय में साइबर अपराध किसी महामारी से कम नहीं है। यह अपराध बिना हथियार, बिना हिंसा और बिना किसी भौतिक उपस्थिति के लोगों को आर्थिक रूप से तबाह कर रहा है। राजस्थान के आंकड़े इस बात की चेतावनी हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, पुलिस, बैंक, तकनीकी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर इस चुनौती का सामना करें। डिजिटल क्रांति तभी सफल मानी जाएगी जब लोगों का धन और उनका विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे। अन्यथा साइबर ठगों का यह बढ़ता साम्राज्य आम जनता की मेहनत की कमाई को इसी तरह निगलता रहेगा और सुरक्षा तंत्र पर सवाल लगातार खड़े होते रहेंगे।</div>
<div>          *कांतिलाल मांडोत*</div>
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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:31:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लोटन पुलिस द्वारा साइबर  जागरुकता अभियान के तहत लोगों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180969/lotan-police-made-people-aware-under-cyber-awareness-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781100453472-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर 1930 और एनसीआरपी  पोर्टल पर रिपोर्टिंग निर्देशों से अवगत कराया गया ।सभी ऑनलाइन खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात फोन कॉल या ईमेल पर साझा न करें।अज्ञात स्रोतों से आए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से बचें।अपने सभी उपकरणों पर एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे अपडेट रखें।सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।ऑनलाइन खरीददारी के लिए केवल सुरक्षित वेबसाइट्स का ही उपयोग करें। इस दौरान महिला कास्टेबल  पूजा वर्मा आदि उपस्थित रहे।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 20:00:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महराजगंज तराई पुलिस की तत्परता से साइबर ठगी के 3,800 रुपये पीड़ित को मिले वापस</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर,</strong>  साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना महराजगंज तराई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के 3,800 रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित ने पुलिस की संवेदनशील एवं प्रभावी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।</div>
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<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार ग्राम छतुवापुर निवासी मोहम्मद अफजल के भाई सलाउद्दीन का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया था। हैकर ने सलाउद्दीन बनकर अफजल से 3,800 रुपये की मांग की, जिसे उन्होंने अपने भाई का समझकर भेज दिया। बाद में जानकारी होने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180965/due-to-the-promptness-of-maharajganj-terai-police-the-victim"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260609-wa0508.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर,</strong> साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना महराजगंज तराई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के 3,800 रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित ने पुलिस की संवेदनशील एवं प्रभावी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार ग्राम छतुवापुर निवासी मोहम्मद अफजल के भाई सलाउद्दीन का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया था। हैकर ने सलाउद्दीन बनकर अफजल से 3,800 रुपये की मांग की, जिसे उन्होंने अपने भाई का समझकर भेज दिया। बाद में जानकारी होने पर पता चला कि व्हाट्सएप अकाउंट हैक किया गया था और उनके साथ साइबर ठगी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद पीड़ित ने 12 मई 2026 को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होने पर थाना महराजगंज तराई की साइबर हेल्पडेस्क ने तत्काल मामले को संज्ञान में लेते हुए तकनीकी जांच शुरू की और संबंधित बैंक से समन्वय स्थापित कर आरोपी के खाते में पहुंची धनराशि को होल्ड करा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित बैंक को धनराशि वापस कराने के लिए एसओपी के अनुसार पत्राचार किया गया। बैंक द्वारा कार्रवाई करते हुए ठगी गई पूरी 3,800 रुपये की रकम पीड़ित के खाते में वापस कर दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रुपये वापस मिलने पर पीड़ित ने महराजगंज तराई पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए पुलिस टीम का धन्यवाद ज्ञापित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कार्रवाई में साइबर हेल्पडेस्क के उपनिरीक्षक आदित्य कुमार, आरक्षी धीरज तिवारी तथा आरक्षी अर्जुन प्रसाद वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें अथवा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर धनराशि वापस कराई जा सके।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 19:24:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MBA और BBA स्टूडेंट साइबर ठग,निकले</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>बागपत पुलिस ने साइबर ठगी का खुलासा किया है. ये गैंग छोटा मोटा नहीं है बल्कि इस गैंग के सभी सदस्य हाई एजुकेटेड हैं. कोई एमबीए तो कोई बीबीए स्टूडेंट है. यहीं नहीं इस गैंग के कुल 8 सदस्यों में सभी अच्छे परिवारों से हैं. ये गैंग वेबसाइट के जरिए साइबर ठगी को अंजाम देता था. इस गैंग पर दो लाख की साइबर ठगी का आरोप है. पुलिस ने इनके पास से मोबाइल, लैपटॉप, तमंचे, कार, सिम समेत अन्य काफी सामान भी बरामद किया है. एएसपी ने ठगों को गिरफ्तार करने वाली टीम को 25 हजार का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175911/mba-and-bba-student-cyber-fraud"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/681ecd795fa51-cyber-fraud-105202664-16x9.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>बागपत पुलिस ने साइबर ठगी का खुलासा किया है. ये गैंग छोटा मोटा नहीं है बल्कि इस गैंग के सभी सदस्य हाई एजुकेटेड हैं. कोई एमबीए तो कोई बीबीए स्टूडेंट है. यहीं नहीं इस गैंग के कुल 8 सदस्यों में सभी अच्छे परिवारों से हैं. ये गैंग वेबसाइट के जरिए साइबर ठगी को अंजाम देता था. इस गैंग पर दो लाख की साइबर ठगी का आरोप है. पुलिस ने इनके पास से मोबाइल, लैपटॉप, तमंचे, कार, सिम समेत अन्य काफी सामान भी बरामद किया है. एएसपी ने ठगों को गिरफ्तार करने वाली टीम को 25 हजार का नगद इनाम भी दिया हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">अपर पुलिस अधीक्षक प्रवीण कुमार ने बताया कि बागपत के बलि गांव निवासी कारोबारी सन्दीप अग्रवाल ने दो लाख की साइबर ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. पुलिस इस मामले की जांच कर रही थी. कारोबारी की शिकायत पर बागपत पुलिस ने जाल बिछाकर साइबर ठग गैंग के आठ सदस्यों को दबोचा है.</p>
<p style="text-align:justify;">अपर पुलिस अधीक्षक के मुताबिक पकड़े गए गिरोह के सभी सदस्य वेल एजुकेटेड ही नहीं बिजनेस में मास्टर, स्नातक की पढ़ाई भी कर रहे हैं. इनमे तीन सदस्य एमबीए के छात्र हैं तो दो सदस्य बीबीए के छात्र है. एक सदस्य बीसीए और एक सदस्य बीएससी का छात्र है. एक सदस्य हाईस्कूल का छात्र हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में इनके द्वारा बताया गया कि उन्होंने एक वेबसाइट प्लेटफार्म पर ग्रॉसरी, सॉफ्टड्रिंक का ऐड बनाया हुआ था. इसी के माध्यम से वे ग्रॉसरी और सॉफ्टड्रिंक खरीदने-बेचने का लालच देकर लोगों को फंसाते थे. उनके मुताबिक ऑनलाइन पैसा हड़पने के बाद सायबर ठग अपना सिम बदलकर पीड़ित का नबंर ब्लॉक कर देते थे. पकड़े गए सदस्यों से 11 मोबाइल, 4 लैपटॉप, 24 सिम कार्ड, 1 टैबलेट, 2 डेबिट कार्ड, 2 वाईफाई, दो तमंचे, कारतूस, एक कार भी बरामद हुए हैं. सभी से पूछताछ की जा रही है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 21:21:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हुए व्यक्ति को मिली बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> थाना उतरांव पुलिस टीम ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हुए एक व्यक्ति की पूरी धनराशि वापस कराकर सराहनीय कार्य किया है। इस सफलता से न केवल पीड़ित परिवार को राहत मिली है, बल्कि आम जनता में भी पुलिस के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना उतरांव क्षेत्र के ग्राम सराय इस्माइल (सदरेपुर) निवासी रामचंद्र मिश्र, पुत्र स्वर्गीय रमाकांत मिश्र के बैंक खाते से दिनांक 21 जनवरी 2026 को अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी कर कुल 1,47,000 रुपये की धनराशि निकाल ली गई थी। घटना के बाद पीड़ित ने तुरंत</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173640/big-relief-to-person-who-became-victim-of-online-fraud"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260319-wa0289.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> थाना उतरांव पुलिस टीम ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हुए एक व्यक्ति की पूरी धनराशि वापस कराकर सराहनीय कार्य किया है। इस सफलता से न केवल पीड़ित परिवार को राहत मिली है, बल्कि आम जनता में भी पुलिस के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना उतरांव क्षेत्र के ग्राम सराय इस्माइल (सदरेपुर) निवासी रामचंद्र मिश्र, पुत्र स्वर्गीय रमाकांत मिश्र के बैंक खाते से दिनांक 21 जनवरी 2026 को अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी कर कुल 1,47,000 रुपये की धनराशि निकाल ली गई थी। घटना के बाद पीड़ित ने तुरंत NCRP (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसकी शिकायत संख्या 23103260049192 है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायत प्राप्त होते ही थाना उतरांव पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस टीम ने संबंधित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से ट्रांजेक्शन को ट्रैक करते हुए धनराशि को समय रहते होल्ड करवा दिया। लगातार प्रयासों और समन्वय के बाद पुलिस ने पूरी धनराशि को सुरक्षित रूप से वापस कराने में सफलता हासिल की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिनांक 19 मार्च 2026 को पूरी 1,47,000 रुपये की रकम पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई। अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने पर रामचंद्र मिश्र और उनके परिजनों ने कमिश्नरेट प्रयागराज पुलिस तथा थाना उतरांव टीम का आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस सराहनीय कार्य में पुलिसकर्मी  उपनिरीक्षक विक्की प्रसाद उपनिरीक्षक मानवेंद्र प्रसाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही वहीं पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के संदिग्ध कॉल, लिंक या ऑनलाइन लेन-देन से सतर्क रहें तथा साइबर ठगी होने पर तुरंत NCRP पोर्टल या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर नुकसान को रोका जा सके।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 20:13:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मऊआइमा पुलिस की तत्परता से साइबर फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को 25 हजार रुपये मिले वापस।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मऊआइमा। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">साइबर अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए थाना मऊआइमा पुलिस टीम ने एक सराहनीय कार्य किया है। साइबर फ्रॉड का शिकार हुए एक व्यक्ति के खाते से कटे 25,000 रुपये को पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वापस करवा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>  थाना मऊआइमा साइबर पुलिस टीम ने प्रभावी कार्रवाई की।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार फरोग महमूद अंसारी पुत्र मंजूर अहमद अंसारी निवासी मोहल्ला आजमपुर थाना मऊआइमा, कमिश्नरेट प्रयागराज के खाते से साइबर ठगों द्वारा 25,000 रुपये की धोखाधड़ी कर ली गई थी। इस संबंध में पीड़ित द्वारा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173075/due-to-the-promptness-of-mauaima-police-the-victim-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260309-wa0159.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मऊआइमा। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साइबर अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए थाना मऊआइमा पुलिस टीम ने एक सराहनीय कार्य किया है। साइबर फ्रॉड का शिकार हुए एक व्यक्ति के खाते से कटे 25,000 रुपये को पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वापस करवा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong> थाना मऊआइमा साइबर पुलिस टीम ने प्रभावी कार्रवाई की।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार फरोग महमूद अंसारी पुत्र मंजूर अहमद अंसारी निवासी मोहल्ला आजमपुर थाना मऊआइमा, कमिश्नरेट प्रयागराज के खाते से साइबर ठगों द्वारा 25,000 रुपये की धोखाधड़ी कर ली गई थी। इस संबंध में पीड़ित द्वारा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायत प्राप्त होते ही थाना मऊआइमा की साइबर पुलिस टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्यवाही करते हुए पीड़ित के खाते से कटी पूरी धनराशि 25,000 रुपये वापस करा दी। पैसा वापस मिलने पर आवेदक फरोग महमूद अंसारी ने थाना मऊआइमा पुलिस तथा प्रयागराज पुलिस का आभार व्यक्त किया।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 23:21:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संगठित अपराध और साइबर अपराध पर सख्त रुख के साथ उत्तरप्रदेश में नई पुलिसिंग की दिशा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">उत्तरप्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठित अपराध, साइबर क्राइम और महिलाओं की सुरक्षा के मामलों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लखनऊ में आयोजित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी ने इस संदेश को और मजबूत किया। इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में प्रदेश की कानून व्यवस्था की गहन समीक्षा की गई और भविष्य की पुलिसिंग के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी। सम्मेलन का मूल उद्देश्य सुरक्षा, सुशासन और अपराध पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164721/new-direction-of-policing-in-uttar-pradesh-with-strict-stance"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/hindi-divas19.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">उत्तरप्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठित अपराध, साइबर क्राइम और महिलाओं की सुरक्षा के मामलों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लखनऊ में आयोजित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी ने इस संदेश को और मजबूत किया। इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में प्रदेश की कानून व्यवस्था की गहन समीक्षा की गई और भविष्य की पुलिसिंग के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी। सम्मेलन का मूल उद्देश्य सुरक्षा, सुशासन और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण को और अधिक सुदृढ़ बनाना रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुशासन की बुनियाद मजबूत कानून व्यवस्था पर ही टिकी होती है। यदि कानून व्यवस्था कमजोर होगी तो विकास, निवेश और सामाजिक सौहार्द सभी प्रभावित होंगे। इसी सोच के तहत उत्तरप्रदेश सरकार ने बीते वर्षों में पुलिसिंग की धारणा को बदलने का प्रयास किया है और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष तकनीक और प्रशासनिक नवाचारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तुतिकरण दिए गए। आधुनिक तकनीक के उपयोग से अपराध नियंत्रण, अपराधियों की पहचान और त्वरित कार्रवाई को कैसे और प्रभावी बनाया जा सकता है, इस पर विस्तार से चर्चा हुई। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए डिजिटल निगरानी, साइबर फॉरेंसिक और विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि साइबर क्राइम आज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और इससे निपटने के लिए पुलिस को तकनीकी रूप से सक्षम और सतर्क होना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिला सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो टूक कहा कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने याद दिलाया कि उत्तरप्रदेश में महिला सुरक्षा के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं, जिनमें महिला हेल्पलाइन, एंटी रोमियो स्क्वॉड और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली शामिल हैं। इन प्रयासों के कारण प्रदेश में महिलाओं में सुरक्षा का भाव मजबूत हुआ है, लेकिन इसे और बेहतर बनाने की आवश्यकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि महिला अपराधों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी न हो। सम्मेलन में संगठित अपराध पर भी विशेष फोकस रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संगठित अपराध न केवल कानून व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचाता है। ऐसे अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की नीति को और सख्ती से लागू करने की जरूरत है। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिए कि माफिया, गिरोहबंद अपराधियों और अवैध नेटवर्क के खिलाफ लगातार और प्रभावी कार्रवाई की जाए। बीते वर्षों में माफिया के खिलाफ की गई कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश में कानून का राज स्थापित करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साइबर अपराध के साथ-साथ साम्प्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने पर भी सम्मेलन में गंभीर मंथन हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तरप्रदेश विविधताओं वाला प्रदेश है और यहां शांति एवं सौहार्द बनाए रखना पुलिस की बड़ी जिम्मेदारी है। किसी भी तरह की अफवाह, उकसावे या नफरत फैलाने वाली गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में तटस्थता और निष्पक्षता सबसे जरूरी है, ताकि जनता का भरोसा पुलिस और प्रशासन पर बना रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">त्वरित न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अहम बातें रखीं। उन्होंने कहा कि अपराध पर नियंत्रण तभी प्रभावी होगा, जब अपराधियों को समयबद्ध सजा मिले। इसके लिए पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। जांच की गुणवत्ता, साक्ष्यों का मजबूत संकलन और अदालत में प्रभावी पैरवी से ही दोषियों को सजा दिलाई जा सकती है। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में प्रशिक्षण और मॉनिटरिंग को और मजबूत करने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सम्मेलन में यह भी स्वीकार किया गया कि कानून व्यवस्था को लेकर चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। तकनीक के विकास के साथ अपराध के तरीके भी आधुनिक होते जा रहे हैं। ऐसे में पुलिस को भी अपने तौर-तरीकों में बदलाव लाना होगा। भविष्य की पुलिसिंग के लिए डेटा आधारित निर्णय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और अन्य आधुनिक संसाधनों के उपयोग पर विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक को मानव संवेदनशीलता के साथ जोड़कर ही प्रभावी पुलिसिंग संभव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर भी जोर दिया कि जनता में सुरक्षा का भाव और अधिक मजबूत किया जाए। पुलिस का व्यवहार, उसकी तत्परता और जवाबदेही सीधे तौर पर जनता के विश्वास से जुड़ी होती है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे जनता के साथ संवाद बढ़ाएं, उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समय पर समाधान सुनिश्चित करें। इससे न केवल अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी, बल्कि समाज में सकारात्मक माहौल भी बनेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तरप्रदेश में कानून व्यवस्था में हुए ठोस सुधारों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल सरकार या पुलिस की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित किया कि वे इस उपलब्धि को बनाए रखने के साथ-साथ और बेहतर करने की दिशा में काम करें। सम्मेलन में इस बात पर भी सहमति बनी कि प्रभावी रोडमैप तैयार कर उसके क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि रणनीति कागजों तक सीमित न रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुल मिलाकर यह पुलिस सम्मेलन उत्तरप्रदेश में भविष्य की पुलिसिंग की दिशा तय करने वाला साबित हुआ। संगठित अपराध, साइबर क्राइम, महिला सुरक्षा, साम्प्रदायिक सौहार्द और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया जैसे विषयों पर केंद्रित यह मंथन इस बात का संकेत है कि सरकार कानून व्यवस्था को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तरप्रदेश सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि मजबूत कानून व्यवस्था ही सुशासन की पहचान है और इसी आधार पर प्रदेश को सुरक्षित, शांत और विकासोन्मुख बनाने का संकल्प लिया गया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 20:25:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डिजिटल अरेस्ट से लाखों परिवारों के जीवन में अंधेरा पसरा </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">लाखों लोगों व परिवारों के जीवन भर की कमाई को डिजिटल अरेस्ट के जरिए लूट कर उनके जीवन में अंधेरा कर दिया गया। यह कैसी विडंबना है कि जब तक देश में कथित डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अनुमानित तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक ठगी की जा चुकी है, कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं, की साल से यह सिलसिला जारी है तब सरकार और जिम्मेदार सिस्टम की नींद खुली है और अपराधियों पर शिकंजा कसने की बड़ी मुहिम शुरू हो पा रही है। वह भी सरकार के बजाय शीर्ष अदालत की पहल पर। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इन दिनों देश में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163204/digital-arrest-brought-darkness-to-the-lives-of-millions-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/download-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">लाखों लोगों व परिवारों के जीवन भर की कमाई को डिजिटल अरेस्ट के जरिए लूट कर उनके जीवन में अंधेरा कर दिया गया। यह कैसी विडंबना है कि जब तक देश में कथित डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अनुमानित तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक ठगी की जा चुकी है, कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं, की साल से यह सिलसिला जारी है तब सरकार और जिम्मेदार सिस्टम की नींद खुली है और अपराधियों पर शिकंजा कसने की बड़ी मुहिम शुरू हो पा रही है। वह भी सरकार के बजाय शीर्ष अदालत की पहल पर। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन दिनों देश में डिजिटल अरेस्ट के कई मामले लगातार सामने आ रहे हैं. सरकार के तमाम प्रयास के बावजूद डिजिटल अरेस्ट के कारण बुजुर्गों बड़ी संख्या में ठगी का शिकार हो रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को डिजिटल अरेस्ट मामलों पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख दिखाते हुए कहा कि इस मामले में अदालत जरूरी निर्देश जारी करेगी. न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जयमाला बागची की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि हर हैरानी की बात है कि देश में पीड़ितों से लगभग 3000 करोड़ रुपये डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगे जा चुके हैं. यह सब हमारे देश में ही हो रहा है. अगर हम इस मामले में ठोस और सख्त आदेश नहीं देंगे तो समस्या और गंभीर हो जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट पर गंभीर चिंता जताते हुए सीबीआई को निर्देश दिए हैं कि वह अन्य साइबर अपराधों की जांच बाद में करें, डिजिटल अरेस्ट की जांच को अपनी प्राथमिकता बनाए। कोर्ट ने केंद्रीय बैंक से पूछा है कि क्या एआई की मदद से साइबर ठगों के खाते फ्रीज हो सकते हैं? कोर्ट ने सीबीआई से कहा है कि यदि किसी गंभीर डिजिटल अपराध का दायरा भारत से बाहर को सीमा में हो तो वह इंटरपोल की मदद ले सकती है। दुखद है कि साइबर अरेस्ट के मामलों में सबसे अधिक निशाना बुजुर्गों को ही बनाया जाता है, जिन्हें डिजिटल लेन-देन को गंभीर जानकारी नहीं होती। बुजुर्गों को निशाना बनाने का यह प्रतिशत 78 से 82 फीसदी बताया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई जगह यह प्रतिशत 99 फीसदी तक है। वहीं जनवरी से अप्रैल 2024 में साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट के 46 फीसदी मामलों के तार म्यांमार, कंबोडिया और लाओस जैसे दक्षिण पूर्व एशिया के देशों से जुड़े रहे हैं। निस्संदेह, हाल के वर्षों में डिजिटल गिरफ्तारी साइबर अपराध के सबसे कुटिल रूप में बनकर उभरी है। यह अपराध न केवल देश की वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता के लिये, बल्कि कानून प्रवर्तन तंत्र में जनता के विश्वास के लिये भी बड़ा खतरा है। ऐसे में कहा जा सकता है कि इन घोटालों की देशव्यापी जांच सीबीआई को सौंपने का सर्वोच्य न्यायालय का निर्णय समय के अनुरूप सार्थक हस्तक्षेप है। इसी क्रम में कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में अपराधों की जांच के लिये सीबीआई को सहमति दें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल, न्यायालय ने इस हकीकत को स्वीकार किया है कि साइबर अपराधी राज्यों की सीमाओं का लाभ</div>
<div style="text-align:justify;">उठाते हैं। वहीं दूसरी ओर टुकड़ों-टुकड़ों में जांच सीमा पार के साइबर अपराधियों के नेटवर्क को बढ़ावा देती है दरअसल, साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट के जरिये भोले-भाले लोगों व बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं। वे कानून प्रवर्तन अधिकारी पुलिस और जज बनकर मोटी रकम देने के लिये उन्हें ब्लेकमेल और आतंकित करते हैं।हालांकि अदालत ने कहा कि इस मामले से निपटने के लिए कठोर कदम उठाना जरूरी हो गया है. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गृह मंत्रालय ने एक अलग यूनिट की स्थापना की है और इस मामले से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय बनाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही डिजिटल अरेस्ट से निपटने के लिए कई अन्य कदम उठाए गए हैं. डिजिटल अरेस्ट को लेकर हुई सुनवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय और सीबीआई ने सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट सौंपी. केंद्र सरकार की ओर से पेश दलील के सुनने के बाद अदालत ने कहा कि मामला काफी गंभीर है और इस मामले में अदालत उचित आदेश पारित करेगी. मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी. गौरतलब है कि एक वरिष्ठ नागरिक दंपति ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के पत्र लिखकर बताया था कि 1 से 16 सितंबर के बीच उनसे 1.5 करोड़ रुपए की ठगी सीबीआई, इंटेलिजेंस ब्यूरो तो कभी न्यायपालिका के अधिकारी बनकर की गयी. धोखेबाजों ने फोन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संपर्क किया और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे वसूलने का काम किया. इतना ही नहीं उन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश दिखाए.  मामला सामने आने के बाद अंबाला में दो एफआईआर दर्ज की गयी. जांच में पाया गया कि वरिष्ठ नागरिकों को ठगी का शिकार बनाने के लिए संगठित गिरोह काम कर रहा है. अदालत ने 17 अक्टूबर को इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की और केंद्र सरकार और सीबीआई से जवाब देने को कहा. अदालत ने इस मामले में अटार्नी जनरल से भी सुझाव लेने का आदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपति से एक करोड़ रुपये कीठगी के बाद अदालत ने इस व्यापक समस्या का स्वतः संज्ञान लिया। उन्हें  धमकाने के लिये सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेशों का इस्तेमाल किया गया। यह बेहद परेशान करने वाली स्थिति है कि साइबर अपराधी सार्वजनिक संस्थाओं के प्रति लोगों के विश्वास को खतरे में डाल रहे हैं।तभी शीर्ष अदालत ने महसूस किया कि अब पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगा है, देश की केंद्रीय एजेंसी को इस मामले की तह तक तुरंत पहुंचना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट के मामलों में एफआईआर दर्ज करने और धोखाधड़ी से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज करने की पूरी छूट दी गई है। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत की जांच का अधिकार भी दिया गया। इसके अलावा दूरसंचार विभाग को भी सिम कार्ड के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के लिये कहा गया है। निश्चित रूप से कोर्ट की सार्थक पहल के बाद यदि ये सभी उपाय सिरे चढ़ते हैं तो इस गंभीर अपराध के खिलाफ एक राष्ट्रीय प्रतिक्रिया दे पाना संभव होगा। कोर्ट ने विश्वास जताया है कि केंद्रीय एजेंसी बिना किसी भय या पक्षपात के जिम्मेदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करेगी। इसमें राज्य सरकारों की सक्रियता व सजगता भी सीबीआई को अपराध की तह तक पहुंचने में मददगार साबित हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी जरूरी है कि एजेंसी की कार्रवाई में लालफीताशाही और राजनीतिक हस्तक्षेप न हो। इसके साथ ही नागरिकों को भी ऐसे अपराधों के प्रति सजग रहना होगा। जागरूकता सतर्कता उन्हें अपराधियों के चंगुल में फंसने से बचा सकती है। ऐसी किसी कॉल के आने पर उन्हें रुककर विचार करना चाहिए और हड़‌बड़ी में बैंक से जुड़ी कोई जानकारी देने से बचना चाहिए। ठग खुद को केंद्रीय एजेंसियों या पुलिस विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ितों को फर्जी आरोपों में फंसाने की धमकी देते थे। इसके बाद 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर उनसे बैंक खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर कराई जाती थी। साइबर सेल और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 35 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ये आरोपी गुजरात, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से पकड़े गए हैं। राजनांदगांव की 79 वर्षीय शीला सुवाल को आरोपितों ने सीबीआई अधिकारी और जज बनकर वीडियो कॉल के माध्यम से डराया। मनी लॉडिंग केस में फांसाने की धमकी दी। निर्दोष साबित करने रकम जज के खाते में ट्रांसफर करने को कहा। महिला ने उगों के बताए गए विभिन्न खातों में 79,69,047 रुपये ट्रांसफर कर दिए। एक अन्य मामले में ठगों ने फारेक्स व ट्रेडिंग विशेषज्ञ बताकर व्यापारी को फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग साइट का लिंक भेजा। पहले 15 हजार का छोटा मुनाफा देकर व्यापारी का विश्वास हासिल किया, फिर बड़े मुनाफे का लालच देकर 1,21,53,590 रुपये निवेश के नाम पर जमा कराए। दोनों मामलों में तीन आरापितों को पकड़ा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस का कहना है कि अधिकांश मामलों में उप विदेशी कॉल सेंटरों की तरह काम करते हुए इंटरनेट कालिंग और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करते थे। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध काल या डिजिटल अरेस्ट जैसी धमकियों पर विश्वास न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन को देशभर से सामने आए डिजिटल अरेस्ट के मामलों की पैन इंडिया जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। सोमवार को सुनवाई के दौरान सीजेआई ने सभी राज्यों को डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच में सीबीआई की मदद करने के भी निर्देश दिए। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा- डिजिटल अरेस्ट तेजी से बढ़ता साइबर क्राइम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसमें ठग खुद को पुलिस, कोर्ट या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो ऑडियो कॉल के जरिए पीड़ितों, खासकर सीनियर सिटिजन को धमकाते हैं और उनसे पैसे वसूलते हैं। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को नोटिस जारी कर पूछा कि साइबर ठगी में उपयोग हो रहे बैंक खातों को तुरंत ट्रैक और फ्रीज करने के लिए एआई और मशीन लर्निंग तकनीक का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा। इससे पहले 3 नवंबर की सुनवाई में एससी ने कहा था कि डिजिटल अरेस्ट मामलों में लगभग 3  का पता चला है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभी तक डिजिटल अरेस्ट कर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है आज भी लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रहीं हैं जिनमे लोगों को मोबाइल काल पर तरह तरह से धमका कर पैसा ठगी किया जा रहा है लोग जीवन भर की खून पसीने की कमाई चंद मिनटों में गंवा कर सुसाइड करने के लिए विवश हो रहे हैं। सरकार को ऐसे अपरोक्ष हत्यारों ठगों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 17:32:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>साइबर फ्रॉड गिरोह का शातिर लखनऊ से गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर। </strong>साइबर फ्रॉड गिरोह के एक और सक्रिय सदस्य को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी सौरभ कुमार फिरोजाबाद के सिरसा खास का रहने वाला है। लखनऊ के सेक्टर-एम, आशियाना में रहकर साइबर ठगी कर रहा था। साइबर पुलिस ने उसे यहीं से गिरफ्तार किया है। सौरभ गिरोह के सरगना सस्पियर का करीबी है। उसने कई महिलाओं को अपने जाल में फंसाया था।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">एसपी विकास कुमार ने बताया कि सौरभ गिरोह के सरगना सस्पियर की बाइनेंस आईडी के माध्यम से बड़े पैमाने पर लेनदेन करता था। जांच में अब तक कुल 85 बैंक खाते सामने आए हैं, जिनमें से 31</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154173/cyber-fraud-gang-arrested-from-vicious-lucknow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/img-20250828-wa0113-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर। </strong>साइबर फ्रॉड गिरोह के एक और सक्रिय सदस्य को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी सौरभ कुमार फिरोजाबाद के सिरसा खास का रहने वाला है। लखनऊ के सेक्टर-एम, आशियाना में रहकर साइबर ठगी कर रहा था। साइबर पुलिस ने उसे यहीं से गिरफ्तार किया है। सौरभ गिरोह के सरगना सस्पियर का करीबी है। उसने कई महिलाओं को अपने जाल में फंसाया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एसपी विकास कुमार ने बताया कि सौरभ गिरोह के सरगना सस्पियर की बाइनेंस आईडी के माध्यम से बड़े पैमाने पर लेनदेन करता था। जांच में अब तक कुल 85 बैंक खाते सामने आए हैं, जिनमें से 31 बैंक खातों के लेनदेन का विवरण प्राप्त हो चुका है। इनमें 24.29 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है। अन्य खातों की जांच अभी जारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सौरभ के मोबाइल की जांच में कई फर्जी दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। इनमें एक आधार कार्ड उसके नाम से और एक सौरभ सिंघानिया के नाम से मिला है। कई संदिग्ध इकरारनामे भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें कुछ युवतियों ने लिखित रूप में यह स्वीकार किया है कि वे शादी के लिए दबाव नहीं डालेंगी और न ही कभी शिकायत करेंगी। पुलिस इसे बेहद गंभीर और संदिग्ध मानते हुए अलग से जांच कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लड़कियों से अश्लील चैटिंग के सबूत</strong></div>
<div style="text-align:justify;">सौरभ के मोबाइल से कई लड़कियों के अश्लील चैट मिले हैं। पुलिस का मानना है कि आरोपी लड़कियों को फंसाकर उनसे भी अनुचित लाभ उठाने की कोशिश करता था। इनमें लखनऊ के साथ ही कई जिलों की महिलाएं शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ऑनलाइन ट्रेडिंग से करता था ठगी</strong></div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरोह ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश और फर्जी लिंक भेजकर लोगों को जाल में फंसाता था। शुरुआत में छोटी रकम का लालच देकर भरोसा जीतता, फिर धीरे-धीरे लाखों की ठगी करता। अब तक करोड़ों रुपये की ठगी की पुष्टि हो चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सौरभ कुमार से गहन पूछताछ जारी है। गिरोह के अन्य सदस्यों की भी पहचान की जा रही है। पुलिस विशेष टीम, साइबर सेल और अन्य जनपदों की पुलिस के साथ मिलकर पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटी है। जल्द ही गिरोह के बाकी सदस्यों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है। विकास कुमार, एसपी बलरामपुर</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 17:20:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ में अड्डा बनाकर महिलाओं की टीम खड़ी कर रहा था सौरभ</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर।</strong> साइबर फ्रॉड के मामले में गिरफ्तार सौरभ कुमार से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने राजधानी लखनऊ को ही साइबर फ्रॉड का अड्डा बना रखा था। जहां से वह बड़े पैमाने पर साइबर ठगी का नेटवर्क खड़ा कर रहा था। खास बात यह रही कि वह अपनी टीम में महिलाओं को भी शामिल करता जा रहा था ताकि फोन पर महिलाओं से बातचीत कराकर लोगों को आसानी से झांसे में लिया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस सूत्रों के मुताबिक लखनऊ में पहले से ही साइबर फ्रॉड के कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं। इन्हीं घटनाओं की कड़ी में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154212/saurabh-was-raising-a-team-of-women-by-creating-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/hindi-divas18.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर।</strong> साइबर फ्रॉड के मामले में गिरफ्तार सौरभ कुमार से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने राजधानी लखनऊ को ही साइबर फ्रॉड का अड्डा बना रखा था। जहां से वह बड़े पैमाने पर साइबर ठगी का नेटवर्क खड़ा कर रहा था। खास बात यह रही कि वह अपनी टीम में महिलाओं को भी शामिल करता जा रहा था ताकि फोन पर महिलाओं से बातचीत कराकर लोगों को आसानी से झांसे में लिया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस सूत्रों के मुताबिक लखनऊ में पहले से ही साइबर फ्रॉड के कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं। इन्हीं घटनाओं की कड़ी में अब यह खुलासा हुआ है कि सौरभ ने यहां ठगी का जाल फैलाने की ठोस रणनीति बनाई थी। उसका मकसद यह था कि महिलाओं को शामिल कर लोगों को आसानी से झांसा दिया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सौरभ के मोबाइल से मिले सबूतों में कई युवतियों के साथ की गई आपत्तिजनक चैट और ऑडियो क्लिप मिले हैं। आरोप है कि वह पहले युवतियों को शादी व रिश्तों का झांसा देकर अपने जाल में फंसाता था। जो उसकी बात मानने से इन्कार कर देतीं, उन्हें अश्लील चैट और फर्जी आधार कार्ड जैसी सूचनाओं के जरिए ब्लैकमेल करता था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस का मानना है कि इसी दबाव में कुछ युवतियों को गिरोह में शामिल करने की कोशिश की गई थी। अब तक की जांच में 85 बैंक खातों का पता चला है, जिनमें से 31 खातों से करीब 24 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन सामने आया है। पुलिस का कहना है कि यह रकम कई फर्जी खातों और अलग-अलग राज्यों के नेटवर्क में भेजी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>पुलिस की जांच का फोकस</strong></div>
<div style="text-align:justify;">एसपी की निगरानी में चल रही जांच में पुलिस टीम अब नये ढंग से जांच कर रही है। जांच टीम लखनऊ से ऑपरेट किए जा रहे संभावित ठिकानों और नेटवर्क की पहचान करने जुटी है। अब साइबर फ्राॅड के मामले में 11 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिसमें छह लोगों के ठिकाने लखनऊ में ही मिले हैं। इसके अलावा जांच में सौरभ के संपर्क में आई महिलाओं की वास्तविक भूमिका की छानबीन हो रही है। सोशल मीडिया और फर्जी दस्तावेजों के जरिए ठगी के पैटर्न की जांच के साथ ही बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का अंतरराज्यीय लिंक खंगाला जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> लखनऊ से पूरे प्रदेश में फैले नेटवर्क पर नजर</strong></div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस को शक है कि सौरभ का नेटवर्क केवल लखनऊ या बलरामपुर तक सीमित नहीं था। आशंका जताई जा रही है कि इस गिरोह की जड़ें कई जिलों और पड़ोसी राज्यों तक फैली हो सकती हैं। मोबाइल और डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि और नामों का पर्दाफाश किया जा सके। जांच टीम का कहना है कि जैसे-जैसे नए लिंक सामने आएंगे, वैसा ही एक्शन तय होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>जांच में लगाई गईं हैं टीमें</strong></div>
<div style="text-align:justify;">साइबर फ्रॉड में गिरफ्तार किए गए सौरभ से अहम जानकारियां मिलीं हैं। पुलिस टीमें प्रत्येक पहलु पर जांच कर रहीं हैं। महिलाओं से मामला जुड़ा हाेने का नया मामला है, इसकी गहराई से पड़ताल की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">विकास कुमार, पुलिस अधीक्षक</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 01 Sep 2025 18:08:45 +0530</pubDate>
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