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                <title>political controversy - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>political controversy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अरविंद केजरीवाल ने किया जस्टिस स्वर्णकांता के कोर्ट का बहिष्कार, कहा- न्याय की उम्मीद नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर बताया कि उनके कोर्ट के समक्ष वो खुद या वकील के जरिए पेश नहीं होंगे। मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है, इसलिए मैंने गांधीजी के सत्याग्रह पर चलने का फैसला लिया है।आप नेता ने कहा, “मैंने यह फैसला अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है।” साथ ही उन्होंने कानूनी विकल्प भी खुला रखा। पत्र में उन्होंने जोड़ा, “मैं जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार सुरक्षित रखता हूं।”</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह घटनाक्रम उन दिनों बाद आया है जब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177435/arvind-kejriwal-boycotted-justice-swarnakantas-court-and-said-there"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/justice-swarana-kanta-arvind-kejriwal-2026-04-daca29956d6964f435922dd3db6b6bc3-1200x900.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर बताया कि उनके कोर्ट के समक्ष वो खुद या वकील के जरिए पेश नहीं होंगे। मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है, इसलिए मैंने गांधीजी के सत्याग्रह पर चलने का फैसला लिया है।आप नेता ने कहा, “मैंने यह फैसला अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है।” साथ ही उन्होंने कानूनी विकल्प भी खुला रखा। पत्र में उन्होंने जोड़ा, “मैं जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार सुरक्षित रखता हूं।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह घटनाक्रम उन दिनों बाद आया है जब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद को मामले से हटाने (रिक्यूज) से इनकार कर दिया। केजरीवाल ने पूर्व में पक्षपात और हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए रिक्यूजल की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांत पर जोर दिया और निष्पक्षता पर उठाए गए सवालों को अस्वीकार किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केजरीवाल का पत्र और संदेशपत्र में केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि वे जज के न्याय देने की क्षमता पर भरोसा खो चुके हैं। उन्होंने गांधीजी के अहिंसक विरोध के रास्ते को अपनाने का फैसला लिया है। इस कदम ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी घोटाले से जुड़े मामले में उनकी कानूनी लड़ाई को नया मोड़ दे दिया है।इससे पहले हुई सुनवाई पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दिल्ली आबकारी नीति मामले से रिक्यूज करने यानी खुद को अलग करने से इनकार कर दिया था। उनके रिक्यूजल को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस शर्मा ने कहा, 'मैं इस केस से रिक्यूज़ नहीं करूंगी। मैं इस केस की सुनवाई करूंगी।' इसके साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा अन्य आरोपियों की याचिका खारिज कर दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फरवरी 2026 में ट्रायल कोर्ट ने शराब नीति मामले में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, कविता और अन्य 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने सीबीआई की जांच की भी कड़ी आलोचना की थी। सीबीआई ने हाईकोर्ट में अपील दायर की है। इस अपील की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कर रही हैं। केजरीवाल के अलावा मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक और अन्य ने भी रिक्यूजल की याचिका दायर की थी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:38:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली में पहली एफआईआर पर सियासी बखेडा,ऐसे कैसे बजेगा दंड नहीं न्याय पर जोर का नगाडा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र  प्रभात। एसडी सेठी।</strong> देशभर में1 जुलाई से लागू नए कानून की पाठशाला का सबक अभी शुरू भी नहीं हुआ कि सियासी बखेडा खडा हो गया। राजधानी दिल्ली में पहली एफआईआर कमला मार्केट थाने में रविवार की मध्य रात को दर्ज की गई। इसमें एक रेहडी वाले पर सार्वजनिक रास्ते को बाधित करने की धारा लगाई थी। लेकिन कुछ घंटे के भीतर ही इस पर विवाद हो गया। दरअसल कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पहली एफआईआर रोज कमाने वाले गरीब व्यक्ति पर की गई है।</p>
<p>इससे बुरा क्या हो सकता है? वहीं पत्रकारों से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142746/political-brouhaha-over-the-first-fir-in-delhi-how-will"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/20240702_141352.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र  प्रभात। एसडी सेठी।</strong> देशभर में1 जुलाई से लागू नए कानून की पाठशाला का सबक अभी शुरू भी नहीं हुआ कि सियासी बखेडा खडा हो गया। राजधानी दिल्ली में पहली एफआईआर कमला मार्केट थाने में रविवार की मध्य रात को दर्ज की गई। इसमें एक रेहडी वाले पर सार्वजनिक रास्ते को बाधित करने की धारा लगाई थी। लेकिन कुछ घंटे के भीतर ही इस पर विवाद हो गया। दरअसल कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पहली एफआईआर रोज कमाने वाले गरीब व्यक्ति पर की गई है।</p>
<p>इससे बुरा क्या हो सकता है? वहीं पत्रकारों से बातचीत में जब केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इसे लेकर सवाल किया गया तो उन्होने साफ किया कि नए कानून के तहत ना तो दिल्ली में पहली एफआईआर दर्ज हुई है और ना ही किसी रेहडी वाले पर ऐसा ऐसा कोई मामला दर्ज हुआ है। पुलिस सूत्रो के मुताबिक दरअसल एफआईआर  गलती से दर्ज हुई।  उसे कैंसिल करने की प्रकिया शुरू कर दी है। तो जनाब इससे तो यह ही साबित होता है कि दंड नहीं अब न्याय पर जोर के शगल का क्या होगा? अब इस सारे मामले की सच्चाई ये है कि दिल्ली के कमला मार्केट थाने में एफआईआर नंबर-267, एसआई कार्तिक मीणा की शिकायत पर की गई थी।</p>
<p>कहानी के मुताबिक सब-इंस्पेक्टर कार्तिक मीणा एवं अन्य पुलिस कर्मी देर रात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने गश्त कर रहे थे। वहां पंकज नाम का शख्स रेहडी लगाकर सिगरेट -बीडी और पान मसाला बेचता हुआ दिखाई दिया।चूंकि रेहडी सडक पर लगी थी।लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही थी। इसके बाद एसआई ने नए कानून के तहत अनिवार्य प्रक्रिया के तहत मोबाइल फोन पर इंस्टाल ई- प्रमाणन ऐप से मौके की वीडियो बनाई  और रेहडी वाले का नाम एवं पता आदि दर्ज किया।इसके बाद थाने में तहरीर दी गई।  जिस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 285 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई।</p>
<p>पुराने कानून के तहत सार्वजनिक स्थल पर आवागमन बाधित होने की धारा 283 होती थी।200 रूपये जुर्मना।  जमानती धारा। वही अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 285 के तहत 5000 रूपये जुर्माना ,जमानती।  बता दें कि इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के करीब 12 घंटे बाद ही इसे रद्द करने की प्रकिया शुरू कर दी गई। सियासी खेला की वजह से पुलिस के आला अफसर चुप्पी साधे रहे। बाद में पटल पर आए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कमला मार्केट थाने मे दर्ज यह मामला नए कानूनो के तहत किया गया है।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-07/20240702_141352.jpg" alt="20240702_141352" width="908" height="2016"></img></p>
<p>बहरहाल पुलिस ने इस एफआईआर को रद्द कर दिया है। बता दे कि अभी तो यह जमानती एफआईआर पर इतना बवाल हो गया। तो हिट एंड रन, समेत अन्य केसों पर सियासी पारा कितना हाई रहेगा, ये तो वक्त ही बताएगा।  बहरहाल अब नए कानून को लेकर थानों में लोगो की क्लास मे कानून का सबक पढाया जाने लगा है।</p>
<p>थाने में नए कानून को लेकर ज्ञान बांटा जा रहा था। तभी एक युवती ने पुलिस से सवाल दाग दिया। प्रश्नकर्ता नंदनी ने सवाल दागा कि यदि  अपराधी पुलिस को रिश्वत के तौर पर पैसे दे दे तो, क्या न्याय मिल जाएगा?  जन संवाद के दौरान पूछे गए  इस सवाल पर पुलिस के ज्ञान बांटू आलाधिकारी की जुबान बंद और शरीर पीला पड गया। दरअसल इस सवाल की जद में नए कानून का मकसद दंड नहीं अब न्याय पर जोर होगा।कैसे हल होगा?</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 02 Jul 2024 17:12:42 +0530</pubDate>
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