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                <title>political controversy - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>political controversy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>परसरामपुर के ग्राम प्रधान का मतदाता सूची से नाम गायब आयोग को शिकायत भेजी </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/जनपद </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">के विकासखंड भदपुरा की ग्राम पंचायत परसरामपुर के मौजूदा ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक अहमद ग्राम प्रधान है मतदाता सूची में जमकर हुआ खेल वर्तमान ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक  का पूर्व मतदाता सूची के अनुसार 1090 क्रम संख्या पर मकान नंबर 92 में दर्ज हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">परंतु अब मतदाता सूची बनाने में ग्राम पंचायत के वर्तमान ग्राम प्रधान मोहम्मद रफी का नाम हटा दिया गया है जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं आखिर ग्राम प्रधान का ही नाम जब मतदाता सूची से हटा दिया गया है इस खेल को करने के लिए किसका हाथ</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181563/parasrampur-village-heads-name-missing-from-voter-list-complaint-sent"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1.--------------_।------अ.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/जनपद </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">के विकासखंड भदपुरा की ग्राम पंचायत परसरामपुर के मौजूदा ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक अहमद ग्राम प्रधान है मतदाता सूची में जमकर हुआ खेल वर्तमान ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक  का पूर्व मतदाता सूची के अनुसार 1090 क्रम संख्या पर मकान नंबर 92 में दर्ज हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परंतु अब मतदाता सूची बनाने में ग्राम पंचायत के वर्तमान ग्राम प्रधान मोहम्मद रफी का नाम हटा दिया गया है जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं आखिर ग्राम प्रधान का ही नाम जब मतदाता सूची से हटा दिया गया है इस खेल को करने के लिए किसका हाथ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक अहमद के अनुसार उनका मतदाता सूची से नाम गायब होने पर उन्होंने निर्वाचन आयोग लखनऊ को शिकायत भेज कर अपना नाम जुड़वाने की मांगती है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना को लेकर तहसीलदार नवाबगंज अभिषेक तिवारी से बात की गई तो उन्होंने स्वतंत्र प्रभात से बात करते हुए कहा यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है यदि ऐसा हुआ है तो ग्राम प्रधान अपना आवेदन भर के जमा कर दें उनका वोट बन जाएगा साथ ही मतदाता सूची से ग्राम प्रधान का नाम हटाया जाना जांच का विषय है शिकायत मिलती है तो जांच करवा रकर दोषी के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:48:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल: अभिषेक बनर्जी के बाद TMC सांसद कल्याण बनर्जी पर हमला, सिर पर लगी चोट</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> प्रदर्शनकारियों ने सांसद कल्याण बनर्जी का रास्ता रोका। बड़ी संख्या में लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस दौरान कथित रूप से उनके सिर पर चोट लगी। वे थोड़ी देर बाद जमीन पर गिर गए। हमले के बाद जमीन पर लेटे कल्याण बनर्जी फोन पर बात करते हुए नजर आए। पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के बाद तृणमूल कांग्रेस के एक और सांसद पर कथित रूप से हमला हुआ है। सांसद कल्याण बनर्जी चंडीतला पुलिस स्टेशन में ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। आरोप है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और कथित तौर पर मारपीट की।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180387/tmc-mp-kalyan-banerjee-attacked-after-west-bengal-abhishek-banerjee"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/attack-on-kalyan-banerjee-1780211370965.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> प्रदर्शनकारियों ने सांसद कल्याण बनर्जी का रास्ता रोका। बड़ी संख्या में लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस दौरान कथित रूप से उनके सिर पर चोट लगी। वे थोड़ी देर बाद जमीन पर गिर गए। हमले के बाद जमीन पर लेटे कल्याण बनर्जी फोन पर बात करते हुए नजर आए। पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के बाद तृणमूल कांग्रेस के एक और सांसद पर कथित रूप से हमला हुआ है। सांसद कल्याण बनर्जी चंडीतला पुलिस स्टेशन में ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। आरोप है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और कथित तौर पर मारपीट की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों ने सांसद कल्याण बनर्जी का रास्ता रोकते हुए उन्हें काले झंडे दिखाए। तस्वीरों में नजर आया कि कल्याण बनर्जी भीड़ का सामना कर रहे थे। बड़ी संख्या में लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस दौरान कथित रूप से उनके सिर पर चोट लगी। वे थोड़ी देर बाद जमीन पर गिर गए। हमले के बाद जमीन पर लेटे कल्याण बनर्जी फोन पर बात करते हुए नजर आए। इस दौरान सुरक्षाबलों को स्थिति को संभालने का प्रयास करते हुए भी देखा गया। वहीं, टीएमसी समर्थकों ने कल्याण बनर्जी को संभाला और उन्हें भीड़ से दूर ले जाने का प्रयास किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं अकेला आ रहा था। मेरे साथ कोई नहीं था। बीजेपी सदस्यों ने गाली-गलौज की और मेरे सिर पर बॉल से मारा। मेरे सिर से खून बह रहा है।" उन्होंने कहा, "अब लोग तय करेंगे कि यह सही है या गलत कि सांसदों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इससे पहले, शनिवार को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। वे चुनाव के बाद शनिवार को हिंसा में मारे गए एक तृणमूल कार्यकर्ता के परिवार से मिलने सोनारपुर गए थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनका विरोध किया। प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने उनके काफिले पर अंडे व ईंट के टुकड़े फेंके और नारे लगाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मामले में अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को लेकर बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, "फिलहाल इलाज घर पर ही किया जाएगा। जितनी जरूरत होगी, सलाइन और ऑक्सीजन घर पर ही दी जाएगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो अभिषेक को इलाज के लिए हैदराबाद ले जाया जाएगा।"पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि हमले के बाद अभिषेक बनर्जी के सीने में ब्लड क्लॉट जम गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उस समय अभिषेक के सिर पर हेलमेट नहीं होता, तो घटना जानलेवा साबित हो सकती थी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>अन्य राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 19:06:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सनातन धर्म पर टिप्पणी को लेकर उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कार्रवाई की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अलीगंज डांडिया।</strong> सनातन धर्म को लेकर तमिलनाडु सरकार के मंत्री Udhayanidhi Stalin द्वारा दिए गए कथित बयान पर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में एक अधिवक्ता ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को शिकायत पत्र भेजकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि सनातन धर्म के विरुद्ध लगातार की जा रही कथित “हेट स्पीच” करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली है। उनका कहना है कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस प्रकार की टिप्पणी समाज में विद्वेष फैलाने का कार्य करती है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179229/demand-for-action-against-udhayanidhi-stalin-for-his-comment-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/whatsapp-image-2026-05-13-at-10.49.16-pm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अलीगंज डांडिया।</strong> सनातन धर्म को लेकर तमिलनाडु सरकार के मंत्री Udhayanidhi Stalin द्वारा दिए गए कथित बयान पर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में एक अधिवक्ता ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को शिकायत पत्र भेजकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि सनातन धर्म के विरुद्ध लगातार की जा रही कथित “हेट स्पीच” करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली है। उनका कहना है कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस प्रकार की टिप्पणी समाज में विद्वेष फैलाने का कार्य करती है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि एक सजग नागरिक और अधिवक्ता होने के नाते उन्होंने प्रधानमंत्री को औपचारिक शिकायत पत्र प्रेषित कर मामले में कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि कानून के शासन में समाज में नफरत फैलाने वालों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 17:11:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तत्कालीन BJP MLA आरसी यादव के खिलाफ 2012 के दंगा मामले को वापस लेने की हाईकोर्ट ने दी अनुमति</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें राज्य सरकार के उस आवेदन को खारिज किया गया था, जिसमें 2012 की मूर्ति विसर्जन दंगा घटना के संबंध में BJP विधायक (रुदौली से) राम चंद्र यादव के खिलाफ आपराधिक मुकदमा वापस लेने की मांग की गई थी। मुकदमा वापस लेने के राज्य का अनुरोध स्वीकार करते हुए जस्टिस राजीव सिंह की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर का आवेदन "रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद सद्भावना में" दायर किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आदेश विधायक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178543/high-court-gives-permission-to-withdraw-2012-riots-case-against"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hindi-divas1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें राज्य सरकार के उस आवेदन को खारिज किया गया था, जिसमें 2012 की मूर्ति विसर्जन दंगा घटना के संबंध में BJP विधायक (रुदौली से) राम चंद्र यादव के खिलाफ आपराधिक मुकदमा वापस लेने की मांग की गई थी। मुकदमा वापस लेने के राज्य का अनुरोध स्वीकार करते हुए जस्टिस राजीव सिंह की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर का आवेदन "रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद सद्भावना में" दायर किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आदेश विधायक यादव द्वारा दायर CrPC की धारा 482 के तहत याचिका और उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया। संक्षेप में मामला अभियोजन पक्ष के मूल मामले के अनुसार, 24 अक्टूबर, 2012 को मूर्तियां विसर्जन के लिए ले जा रहे कुछ ट्रैक्टरों के कारण रुदौली पुलिस स्टेशन के सामने ट्रैफिक जाम हो गया। हालांकि, पुलिस ने ड्राइवरों को आगे बढ़ने का निर्देश दिया, लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह दावा किया गया कि आवेदक उस समय स्थानीय विधायक थे। उन्होंने उन्हें निर्देश दिया था कि वे मूर्तियों को वहीं रोककर रखें, जब तक कि वह पुलिस स्टेशन के सामने न पहुंच जाएं। इसके कारण, घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई। इसके बाद जब विधायक यादव घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्होंने पुलिस को बताया कि जब श्रद्धालु एक मस्जिद के पास से गुजर रहे थे, तो दूसरे समुदाय का एक लड़का गलती से रंग से सराबोर हो गया। कथित तौर पर इसके कारण गाली-गलौज और झगड़ा हुआ, जिसके दौरान एक मूर्ति भी टूट गई।</p>
<p style="text-align:justify;">एफआईआर  में आरोप लगाया गया कि आवेदक ने भड़काऊ बयान दिए। यह मांग की कि जुलूस आगे बढ़ने से पहले दोषियों को दंडित किया जाए। हालांकि, बाद में उनकी सलाह पर ट्रैक्टरों की आवाजाही शुरू हो गई, लेकिन तब तक गाँव में लगभग 2,000 से 3,000 लोग जमा हो चुके थे। इसके बाद आवेदक की कथित उकसाहट पर 250-300 लोग उस गाँव की ओर बढ़ने लगे, जहां दूसरे समुदाय के लोगों के साथ विवाद हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">शुरुआत में, बेंच ने CrPC की धारा 321 के प्रावधानों के साथ-साथ इस प्रावधान पर सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों की जांच करते हुए पाया कि मुकदमा वापस लेने की अनुमति देने के लिए अंतिम मार्गदर्शक विचार हमेशा न्याय प्रशासन का हित ही होना चाहिए। बंसी लाल बनाम चंदन लाल और शिवनंदन पासवान बनाम बिहार राज्य जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि एक पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को स्वतंत्र रूप से अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए और किसी गलत मकसद से न्याय की सामान्य प्रक्रिया में दखल नहीं देना चाहिए। CrPC की धारा 482 के तहत अर्जी, मुकदमा वापस लेने की अर्जी, और साथ ही आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 22:04:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अरविंद केजरीवाल ने किया जस्टिस स्वर्णकांता के कोर्ट का बहिष्कार, कहा- न्याय की उम्मीद नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर बताया कि उनके कोर्ट के समक्ष वो खुद या वकील के जरिए पेश नहीं होंगे। मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है, इसलिए मैंने गांधीजी के सत्याग्रह पर चलने का फैसला लिया है।आप नेता ने कहा, “मैंने यह फैसला अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है।” साथ ही उन्होंने कानूनी विकल्प भी खुला रखा। पत्र में उन्होंने जोड़ा, “मैं जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार सुरक्षित रखता हूं।”</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह घटनाक्रम उन दिनों बाद आया है जब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177435/arvind-kejriwal-boycotted-justice-swarnakantas-court-and-said-there"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/justice-swarana-kanta-arvind-kejriwal-2026-04-daca29956d6964f435922dd3db6b6bc3-1200x900.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर बताया कि उनके कोर्ट के समक्ष वो खुद या वकील के जरिए पेश नहीं होंगे। मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है, इसलिए मैंने गांधीजी के सत्याग्रह पर चलने का फैसला लिया है।आप नेता ने कहा, “मैंने यह फैसला अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है।” साथ ही उन्होंने कानूनी विकल्प भी खुला रखा। पत्र में उन्होंने जोड़ा, “मैं जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार सुरक्षित रखता हूं।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह घटनाक्रम उन दिनों बाद आया है जब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद को मामले से हटाने (रिक्यूज) से इनकार कर दिया। केजरीवाल ने पूर्व में पक्षपात और हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए रिक्यूजल की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांत पर जोर दिया और निष्पक्षता पर उठाए गए सवालों को अस्वीकार किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केजरीवाल का पत्र और संदेशपत्र में केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि वे जज के न्याय देने की क्षमता पर भरोसा खो चुके हैं। उन्होंने गांधीजी के अहिंसक विरोध के रास्ते को अपनाने का फैसला लिया है। इस कदम ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी घोटाले से जुड़े मामले में उनकी कानूनी लड़ाई को नया मोड़ दे दिया है।इससे पहले हुई सुनवाई पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दिल्ली आबकारी नीति मामले से रिक्यूज करने यानी खुद को अलग करने से इनकार कर दिया था। उनके रिक्यूजल को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस शर्मा ने कहा, 'मैं इस केस से रिक्यूज़ नहीं करूंगी। मैं इस केस की सुनवाई करूंगी।' इसके साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा अन्य आरोपियों की याचिका खारिज कर दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फरवरी 2026 में ट्रायल कोर्ट ने शराब नीति मामले में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, कविता और अन्य 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने सीबीआई की जांच की भी कड़ी आलोचना की थी। सीबीआई ने हाईकोर्ट में अपील दायर की है। इस अपील की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कर रही हैं। केजरीवाल के अलावा मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक और अन्य ने भी रिक्यूजल की याचिका दायर की थी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:38:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली में पहली एफआईआर पर सियासी बखेडा,ऐसे कैसे बजेगा दंड नहीं न्याय पर जोर का नगाडा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र  प्रभात। एसडी सेठी।</strong> देशभर में1 जुलाई से लागू नए कानून की पाठशाला का सबक अभी शुरू भी नहीं हुआ कि सियासी बखेडा खडा हो गया। राजधानी दिल्ली में पहली एफआईआर कमला मार्केट थाने में रविवार की मध्य रात को दर्ज की गई। इसमें एक रेहडी वाले पर सार्वजनिक रास्ते को बाधित करने की धारा लगाई थी। लेकिन कुछ घंटे के भीतर ही इस पर विवाद हो गया। दरअसल कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पहली एफआईआर रोज कमाने वाले गरीब व्यक्ति पर की गई है।</p>
<p>इससे बुरा क्या हो सकता है? वहीं पत्रकारों से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142746/political-brouhaha-over-the-first-fir-in-delhi-how-will"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/20240702_141352.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र  प्रभात। एसडी सेठी।</strong> देशभर में1 जुलाई से लागू नए कानून की पाठशाला का सबक अभी शुरू भी नहीं हुआ कि सियासी बखेडा खडा हो गया। राजधानी दिल्ली में पहली एफआईआर कमला मार्केट थाने में रविवार की मध्य रात को दर्ज की गई। इसमें एक रेहडी वाले पर सार्वजनिक रास्ते को बाधित करने की धारा लगाई थी। लेकिन कुछ घंटे के भीतर ही इस पर विवाद हो गया। दरअसल कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पहली एफआईआर रोज कमाने वाले गरीब व्यक्ति पर की गई है।</p>
<p>इससे बुरा क्या हो सकता है? वहीं पत्रकारों से बातचीत में जब केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इसे लेकर सवाल किया गया तो उन्होने साफ किया कि नए कानून के तहत ना तो दिल्ली में पहली एफआईआर दर्ज हुई है और ना ही किसी रेहडी वाले पर ऐसा ऐसा कोई मामला दर्ज हुआ है। पुलिस सूत्रो के मुताबिक दरअसल एफआईआर  गलती से दर्ज हुई।  उसे कैंसिल करने की प्रकिया शुरू कर दी है। तो जनाब इससे तो यह ही साबित होता है कि दंड नहीं अब न्याय पर जोर के शगल का क्या होगा? अब इस सारे मामले की सच्चाई ये है कि दिल्ली के कमला मार्केट थाने में एफआईआर नंबर-267, एसआई कार्तिक मीणा की शिकायत पर की गई थी।</p>
<p>कहानी के मुताबिक सब-इंस्पेक्टर कार्तिक मीणा एवं अन्य पुलिस कर्मी देर रात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने गश्त कर रहे थे। वहां पंकज नाम का शख्स रेहडी लगाकर सिगरेट -बीडी और पान मसाला बेचता हुआ दिखाई दिया।चूंकि रेहडी सडक पर लगी थी।लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही थी। इसके बाद एसआई ने नए कानून के तहत अनिवार्य प्रक्रिया के तहत मोबाइल फोन पर इंस्टाल ई- प्रमाणन ऐप से मौके की वीडियो बनाई  और रेहडी वाले का नाम एवं पता आदि दर्ज किया।इसके बाद थाने में तहरीर दी गई।  जिस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 285 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई।</p>
<p>पुराने कानून के तहत सार्वजनिक स्थल पर आवागमन बाधित होने की धारा 283 होती थी।200 रूपये जुर्मना।  जमानती धारा। वही अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 285 के तहत 5000 रूपये जुर्माना ,जमानती।  बता दें कि इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के करीब 12 घंटे बाद ही इसे रद्द करने की प्रकिया शुरू कर दी गई। सियासी खेला की वजह से पुलिस के आला अफसर चुप्पी साधे रहे। बाद में पटल पर आए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कमला मार्केट थाने मे दर्ज यह मामला नए कानूनो के तहत किया गया है।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-07/20240702_141352.jpg" alt="20240702_141352" width="908" height="2016"></img></p>
<p>बहरहाल पुलिस ने इस एफआईआर को रद्द कर दिया है। बता दे कि अभी तो यह जमानती एफआईआर पर इतना बवाल हो गया। तो हिट एंड रन, समेत अन्य केसों पर सियासी पारा कितना हाई रहेगा, ये तो वक्त ही बताएगा।  बहरहाल अब नए कानून को लेकर थानों में लोगो की क्लास मे कानून का सबक पढाया जाने लगा है।</p>
<p>थाने में नए कानून को लेकर ज्ञान बांटा जा रहा था। तभी एक युवती ने पुलिस से सवाल दाग दिया। प्रश्नकर्ता नंदनी ने सवाल दागा कि यदि  अपराधी पुलिस को रिश्वत के तौर पर पैसे दे दे तो, क्या न्याय मिल जाएगा?  जन संवाद के दौरान पूछे गए  इस सवाल पर पुलिस के ज्ञान बांटू आलाधिकारी की जुबान बंद और शरीर पीला पड गया। दरअसल इस सवाल की जद में नए कानून का मकसद दंड नहीं अब न्याय पर जोर होगा।कैसे हल होगा?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 02 Jul 2024 17:12:42 +0530</pubDate>
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