<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/17888/political-controversy" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>political controversy - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/17888/rss</link>
                <description>political controversy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वंदे मातरम् पर विवाद: राष्ट्रगीत के सम्मान से बड़ी नहीं हो सकती राजनीत</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;">स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे समय में कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर राजनीति में राष्ट्रगीत की भूमिका, उसके सम्मान और दलों के पुराने रवैये पर बहस छेड़ दी है। 15 अगस्त को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम् के गायन के समय सोनिया गांधी के कुछ हाव-भाव को लेकर भाजपा ने आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं का आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रगीत के गायन</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185453/controversy-over-vande-mataram-politics-cannot-be-bigger-than-respect"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas7.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;">स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे समय में कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर राजनीति में राष्ट्रगीत की भूमिका, उसके सम्मान और दलों के पुराने रवैये पर बहस छेड़ दी है। 15 अगस्त को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम् के गायन के समय सोनिया गांधी के कुछ हाव-भाव को लेकर भाजपा ने आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं का आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रगीत के गायन को रोकने का संकेत दिया। इस आरोप के आधार पर कर्नाटक के मंगलुरु में भाजपा नेता विकास पुत्तूर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और कार्रवाई नहीं होने पर कर्नाटक हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह मामला अभी आरोप और जांच के स्तर पर है। इसलिए किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना कानून की प्रक्रिया पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। कांग्रेस की ओर से इस पूरे आरोप को खारिज किया गया है। विवादित दृश्य को लेकर कांग्रेस का कहना है कि सोनिया गांधी मंच पर लंबे समय से खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने का संकेत दे रही थीं, न कि वंदे मातरम् रोकने का। दूसरी ओर भाजपा ने इसे राष्ट्रगीत के अपमान से जोड़ते हुए राजनीतिक और सार्वजनिक सवाल खड़े किए हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लेकिन इस विवाद का एक बड़ा पक्ष केवल 15 अगस्त की घटना तक सीमित नहीं है। वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और देश की राजनीति में बहस का इतिहास बहुत पुराना है। इसलिए आज जब राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं, तब यह समझना भी जरूरी है कि अतीत में कांग्रेस ने वंदे मातरम् के संबंध में क्या रुख अपनाया था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ गीत है। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की रचना ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि समय के साथ इसके कुछ अंशों और धार्मिक संदर्भों को लेकर मुस्लिम लीग तथा कुछ मुस्लिम नेताओं ने आपत्ति जताई। 1930 के दशक में यह विषय कांग्रेस के सामने भी आया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">1937 में मुस्लिम लीग ने वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर आपत्ति जताई थी। नेहरू अभिलेखागार में दर्ज दस्तावेजों के अनुसार, 17 अक्टूबर 1937 को मुस्लिम लीग ने कांग्रेस पर वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में थोपने का आरोप लगाया था। इसके बाद कांग्रेस के भीतर भी इस विषय पर गंभीर चर्चा हुई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">20 अक्टूबर 1937 को जवाहरलाल नेहरू ने सुभाषचंद्र बोस को लिखे पत्र में वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि और उसके कुछ हिस्सों को लेकर चर्चा की। नेहरू ने लिखा कि गीत की ‘आनंदमठ’ वाली पृष्ठभूमि मुसलमानों को असहज कर सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि वंदे मातरम् को लेकर पैदा हुआ विरोध काफी हद तक सांप्रदायिक तत्वों द्वारा निर्मित था। यानी इतिहास को केवल एक पक्ष से देखने के बजाय यह समझना जरूरी है कि उस समय कांग्रेस के भीतर भी गीत को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति ने वंदे मातरम् के इस्तेमाल पर विचार किया और 1937 में यह निर्णय सामने आया कि गीत के उन शुरुआती अंशों का इस्तेमाल किया जाए जिन पर व्यापक सहमति थी। नेहरू के अपने वक्तव्य से स्पष्ट है कि कांग्रेस ने इस विषय पर लंबे विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यहीं से आज की राजनीतिक बहस को एक ऐतिहासिक संदर्भ मिलता है। भाजपा इसे कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का उदाहरण बताती है, जबकि कांग्रेस और उसके समर्थक इसे उस समय की सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय बताते हैं। इतिहास में दर्ज तथ्यों को देखते हुए यह कहना अधिक उचित है कि वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस के भीतर उस दौर में महत्वपूर्ण राजनीतिक और वैचारिक बहस हुई थी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रगीत है, जबकि ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान है। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान होगा और स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले ‘वंदे मातरम्’ को भी समान सम्मान दिया जाएगा। इसलिए वंदे मातरम् को केवल एक राजनीतिक दल या विचारधारा से जोड़कर देखना उसके ऐतिहासिक महत्व को छोटा करना होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राष्ट्रगीत का सम्मान किसी सरकार, पार्टी या नेता की निजी संपत्ति नहीं है। यह स्वतंत्रता आंदोलन की उस विरासत का हिस्सा है जिसमें असंख्य लोगों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। यही कारण है कि इसके गायन के दौरान किसी भी प्रकार की अवमानना का आरोप गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लेकिन उतना ही जरूरी यह भी है कि आरोप को प्रमाण मान लेने के बजाय निष्पक्ष जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भाजपा लंबे समय से कांग्रेस पर तुष्टीकरण और अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीति के आरोप लगाती रही है। इसके समर्थन में वह कांग्रेस नेताओं के पुराने बयानों का भी उल्लेख करती है। उदाहरण के लिए 2010 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने ‘सैफ्रन टेररिज्म’ यानी ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इस बयान पर बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ। कांग्रेस के तत्कालीन महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने बाद में कहा था कि आतंकवाद का कोई रंग नहीं होता और भगवा रंग को आतंकवाद से जोड़ना उचित नहीं है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">2013 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के ‘हिंदू आतंकवाद’ संबंधी बयान पर भी विवाद हुआ। इसके बाद कांग्रेस ने स्वयं को उस शब्दावली से अलग करते हुए कहा था कि आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इन घटनाओं से यह जरूर स्पष्ट होता है कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के बयान समय-समय पर बड़े राजनीतिक विवादों का कारण बने हैं। हालांकि किसी नेता के बयान को पूरे दल की आधिकारिक विचारधारा मान लेना भी उचित नहीं है। राजनीति में बयान आते हैं, उन पर विवाद होता है और कई बार स्वयं दल को सफाई भी देनी पड़ती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वंदे मातरम् पर वर्तमान विवाद का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीतिक संघर्ष का हथियार बनाने की प्रवृत्ति कब समाप्त होगी। भाजपा कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के प्रति असम्मान का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस भाजपा पर राष्ट्रवाद के नाम पर राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रही है। दोनों दलों की अपनी राजनीतिक दलीलें हैं, लेकिन आम नागरिक के लिए इससे बड़ा प्रश्न राष्ट्रीय सम्मान का है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सोनिया गांधी के मामले में भी यदि कोई आपत्तिजनक व्यवहार हुआ है तो उसकी जांच होनी चाहिए और यदि आरोप गलत हैं तो यह भी स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए। लोकतंत्र में न तो किसी नेता को केवल पद के कारण कानून से ऊपर माना जा सकता है और न ही किसी राजनीतिक विरोधी पर बिना प्रमाण आरोप को अंतिम सत्य माना जा सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">देशभक्ति किसी दल की बपौती नहीं है।कांग्रेस हो या भाजपा, कोई भी राजनीतिक दल देशभक्ति का प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार नहीं रखता। भारत की आजादी किसी एक परिवार, पार्टी या संगठन की देन नहीं है। करोड़ों भारतीयों के संघर्ष, बलिदान और त्याग से देश स्वतंत्र हुआ। इसलिए ‘हमने देश आजाद कराया’ जैसी राजनीतिक मानसिकता से ऊपर उठना जरूरी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका पर सवाल उठाए जा सकते हैं। 1937 के निर्णयों और उसके पीछे की परिस्थितियों पर राजनीतिक बहस भी हो सकती है। कांग्रेस नेताओं के विवादित बयानों की आलोचना भी लोकतंत्र में स्वाभाविक है। लेकिन इस बहस का अंतिम उद्देश्य किसी दल को देशद्रोही साबित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज जैसे प्रतीकों का सम्मान राजनीतिक मतभेदों से ऊपर रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आज जरूरत इस बात की है कि वंदे मातरम् को लेकर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से आगे बढ़कर देश की नई पीढ़ी को उसके इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में उसके योगदान के बारे में बताया जाए। जो गीत स्वतंत्रता सेनानियों के भीतर राष्ट्रभावना जगाता रहा, उसके सम्मान में किसी भी प्रकार की कमी देश के लोकतांत्रिक संस्कारों के लिए उचित नहीं हो सकती। लेकिन सम्मान के साथ न्याय और तथ्य भी जरूरी हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सोनिया गांधी के खिलाफ दर्ज शिकायत अब जांच का विषय है। पुलिस और जरूरत पड़ने पर न्यायपालिका यह तय करेगी कि लगाए गए आरोपों में कितना तथ्य है। राजनीतिक दल अपनी-अपनी व्याख्या करते रहेंगे, लेकिन राष्ट्रगीत किसी दल का नहीं, पूरे राष्ट्र का है। इसलिए वंदे मातरम् का सम्मान राजनीतिक विवाद का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और लोकतांत्रिक मर्यादा का विषय होना चाहिए।</div><div style="text-align:justify;">        *कांतिलाल मांडोत*</div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="WhmR8e"></div></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/185453/controversy-over-vande-mataram-politics-cannot-be-bigger-than-respect</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/185453/controversy-over-vande-mataram-politics-cannot-be-bigger-than-respect</guid>
                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 20:08:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/hindi-divas7.jpg"                         length="173958"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संपूर्ण समाधान दिवस में 34 शिकायतों में 5 का हुआ मौके पर निस्तारण</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>महराजगंज (रायबरेली)</strong> तहसील सभागार में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में शनिवार को कुल 34 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 5 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। प्राप्त शिकायतों में राजस्व विभाग की 21, पुलिस विभाग की 5, विकास विभाग की 5 तथा अन्य विभागों से संबंधित 3 शिकायतें शामिल रहीं। शेष प्रकरणों के शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसी दौरान भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी महराजगंज चंद्र प्रकाश गौतम को सौंपा। ज्ञापन में भाजपा जिलाध्यक्ष बुद्धीलाल पासी के विरुद्ध कांग्रेस के कथित नेताओं</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184450/during-total-resolution-day-5-out-of-34-complaints-were"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260801-wa0358.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>महराजगंज (रायबरेली)</strong> तहसील सभागार में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में शनिवार को कुल 34 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 5 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। प्राप्त शिकायतों में राजस्व विभाग की 21, पुलिस विभाग की 5, विकास विभाग की 5 तथा अन्य विभागों से संबंधित 3 शिकायतें शामिल रहीं। शेष प्रकरणों के शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी दौरान भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी महराजगंज चंद्र प्रकाश गौतम को सौंपा। ज्ञापन में भाजपा जिलाध्यक्ष बुद्धीलाल पासी के विरुद्ध कांग्रेस के कथित नेताओं द्वारा सुनियोजित ढंग से असत्य एवं भ्रामक प्रचार कर उनकी सामाजिक एवं राजनीतिक छवि धूमिल करने का आरोप लगाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा के जिला महामंत्री सरोज गौतम (एडवोकेट) के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि रायबरेली में पासी समाज का भाजपा के प्रति बढ़ता समर्थन कुछ विपक्षी नेताओं को रास नहीं आ रहा है। इसी कारण कथित रूप से दुष्प्रचार कर समाज में भ्रम फैलाने तथा भाजपा जिलाध्यक्ष की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई किए जाने की मांग की गई। इस दौरान भाजपा मंडल अध्यक्ष अमित श्रीवास्तव (एडवोकेट) सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184450/during-total-resolution-day-5-out-of-34-complaints-were</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/184450/during-total-resolution-day-5-out-of-34-complaints-were</guid>
                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 19:50:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/img-20260801-wa0358.jpg"                         length="129623"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परसरामपुर के ग्राम प्रधान का मतदाता सूची से नाम गायब आयोग को शिकायत भेजी </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/जनपद </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">के विकासखंड भदपुरा की ग्राम पंचायत परसरामपुर के मौजूदा ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक अहमद ग्राम प्रधान है मतदाता सूची में जमकर हुआ खेल वर्तमान ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक  का पूर्व मतदाता सूची के अनुसार 1090 क्रम संख्या पर मकान नंबर 92 में दर्ज हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">परंतु अब मतदाता सूची बनाने में ग्राम पंचायत के वर्तमान ग्राम प्रधान मोहम्मद रफी का नाम हटा दिया गया है जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं आखिर ग्राम प्रधान का ही नाम जब मतदाता सूची से हटा दिया गया है इस खेल को करने के लिए किसका हाथ</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181563/parasrampur-village-heads-name-missing-from-voter-list-complaint-sent"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1.--------------_।------अ.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/जनपद </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">के विकासखंड भदपुरा की ग्राम पंचायत परसरामपुर के मौजूदा ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक अहमद ग्राम प्रधान है मतदाता सूची में जमकर हुआ खेल वर्तमान ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक  का पूर्व मतदाता सूची के अनुसार 1090 क्रम संख्या पर मकान नंबर 92 में दर्ज हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परंतु अब मतदाता सूची बनाने में ग्राम पंचायत के वर्तमान ग्राम प्रधान मोहम्मद रफी का नाम हटा दिया गया है जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं आखिर ग्राम प्रधान का ही नाम जब मतदाता सूची से हटा दिया गया है इस खेल को करने के लिए किसका हाथ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक अहमद के अनुसार उनका मतदाता सूची से नाम गायब होने पर उन्होंने निर्वाचन आयोग लखनऊ को शिकायत भेज कर अपना नाम जुड़वाने की मांगती है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना को लेकर तहसीलदार नवाबगंज अभिषेक तिवारी से बात की गई तो उन्होंने स्वतंत्र प्रभात से बात करते हुए कहा यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है यदि ऐसा हुआ है तो ग्राम प्रधान अपना आवेदन भर के जमा कर दें उनका वोट बन जाएगा साथ ही मतदाता सूची से ग्राम प्रधान का नाम हटाया जाना जांच का विषय है शिकायत मिलती है तो जांच करवा रकर दोषी के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181563/parasrampur-village-heads-name-missing-from-voter-list-complaint-sent</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181563/parasrampur-village-heads-name-missing-from-voter-list-complaint-sent</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:48:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1.--------------_%E0%A5%A4------%E0%A4%85.jpg"                         length="137444"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल: अभिषेक बनर्जी के बाद TMC सांसद कल्याण बनर्जी पर हमला, सिर पर लगी चोट</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> प्रदर्शनकारियों ने सांसद कल्याण बनर्जी का रास्ता रोका। बड़ी संख्या में लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस दौरान कथित रूप से उनके सिर पर चोट लगी। वे थोड़ी देर बाद जमीन पर गिर गए। हमले के बाद जमीन पर लेटे कल्याण बनर्जी फोन पर बात करते हुए नजर आए। पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के बाद तृणमूल कांग्रेस के एक और सांसद पर कथित रूप से हमला हुआ है। सांसद कल्याण बनर्जी चंडीतला पुलिस स्टेशन में ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। आरोप है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और कथित तौर पर मारपीट की।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180387/tmc-mp-kalyan-banerjee-attacked-after-west-bengal-abhishek-banerjee"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/attack-on-kalyan-banerjee-1780211370965.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> प्रदर्शनकारियों ने सांसद कल्याण बनर्जी का रास्ता रोका। बड़ी संख्या में लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस दौरान कथित रूप से उनके सिर पर चोट लगी। वे थोड़ी देर बाद जमीन पर गिर गए। हमले के बाद जमीन पर लेटे कल्याण बनर्जी फोन पर बात करते हुए नजर आए। पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के बाद तृणमूल कांग्रेस के एक और सांसद पर कथित रूप से हमला हुआ है। सांसद कल्याण बनर्जी चंडीतला पुलिस स्टेशन में ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। आरोप है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और कथित तौर पर मारपीट की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों ने सांसद कल्याण बनर्जी का रास्ता रोकते हुए उन्हें काले झंडे दिखाए। तस्वीरों में नजर आया कि कल्याण बनर्जी भीड़ का सामना कर रहे थे। बड़ी संख्या में लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस दौरान कथित रूप से उनके सिर पर चोट लगी। वे थोड़ी देर बाद जमीन पर गिर गए। हमले के बाद जमीन पर लेटे कल्याण बनर्जी फोन पर बात करते हुए नजर आए। इस दौरान सुरक्षाबलों को स्थिति को संभालने का प्रयास करते हुए भी देखा गया। वहीं, टीएमसी समर्थकों ने कल्याण बनर्जी को संभाला और उन्हें भीड़ से दूर ले जाने का प्रयास किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं अकेला आ रहा था। मेरे साथ कोई नहीं था। बीजेपी सदस्यों ने गाली-गलौज की और मेरे सिर पर बॉल से मारा। मेरे सिर से खून बह रहा है।" उन्होंने कहा, "अब लोग तय करेंगे कि यह सही है या गलत कि सांसदों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इससे पहले, शनिवार को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। वे चुनाव के बाद शनिवार को हिंसा में मारे गए एक तृणमूल कार्यकर्ता के परिवार से मिलने सोनारपुर गए थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनका विरोध किया। प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने उनके काफिले पर अंडे व ईंट के टुकड़े फेंके और नारे लगाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मामले में अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को लेकर बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, "फिलहाल इलाज घर पर ही किया जाएगा। जितनी जरूरत होगी, सलाइन और ऑक्सीजन घर पर ही दी जाएगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो अभिषेक को इलाज के लिए हैदराबाद ले जाया जाएगा।"पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि हमले के बाद अभिषेक बनर्जी के सीने में ब्लड क्लॉट जम गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उस समय अभिषेक के सिर पर हेलमेट नहीं होता, तो घटना जानलेवा साबित हो सकती थी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>अन्य राज्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180387/tmc-mp-kalyan-banerjee-attacked-after-west-bengal-abhishek-banerjee</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180387/tmc-mp-kalyan-banerjee-attacked-after-west-bengal-abhishek-banerjee</guid>
                <pubDate>Sun, 31 May 2026 19:06:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/attack-on-kalyan-banerjee-1780211370965.jpg"                         length="91266"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सनातन धर्म पर टिप्पणी को लेकर उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कार्रवाई की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अलीगंज डांडिया।</strong> सनातन धर्म को लेकर तमिलनाडु सरकार के मंत्री Udhayanidhi Stalin द्वारा दिए गए कथित बयान पर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में एक अधिवक्ता ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को शिकायत पत्र भेजकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि सनातन धर्म के विरुद्ध लगातार की जा रही कथित “हेट स्पीच” करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली है। उनका कहना है कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस प्रकार की टिप्पणी समाज में विद्वेष फैलाने का कार्य करती है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179229/demand-for-action-against-udhayanidhi-stalin-for-his-comment-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/whatsapp-image-2026-05-13-at-10.49.16-pm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अलीगंज डांडिया।</strong> सनातन धर्म को लेकर तमिलनाडु सरकार के मंत्री Udhayanidhi Stalin द्वारा दिए गए कथित बयान पर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में एक अधिवक्ता ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को शिकायत पत्र भेजकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि सनातन धर्म के विरुद्ध लगातार की जा रही कथित “हेट स्पीच” करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली है। उनका कहना है कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस प्रकार की टिप्पणी समाज में विद्वेष फैलाने का कार्य करती है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि एक सजग नागरिक और अधिवक्ता होने के नाते उन्होंने प्रधानमंत्री को औपचारिक शिकायत पत्र प्रेषित कर मामले में कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि कानून के शासन में समाज में नफरत फैलाने वालों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/179229/demand-for-action-against-udhayanidhi-stalin-for-his-comment-on</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/179229/demand-for-action-against-udhayanidhi-stalin-for-his-comment-on</guid>
                <pubDate>Thu, 14 May 2026 17:11:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/whatsapp-image-2026-05-13-at-10.49.16-pm.jpg"                         length="84179"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तत्कालीन BJP MLA आरसी यादव के खिलाफ 2012 के दंगा मामले को वापस लेने की हाईकोर्ट ने दी अनुमति</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें राज्य सरकार के उस आवेदन को खारिज किया गया था, जिसमें 2012 की मूर्ति विसर्जन दंगा घटना के संबंध में BJP विधायक (रुदौली से) राम चंद्र यादव के खिलाफ आपराधिक मुकदमा वापस लेने की मांग की गई थी। मुकदमा वापस लेने के राज्य का अनुरोध स्वीकार करते हुए जस्टिस राजीव सिंह की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर का आवेदन "रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद सद्भावना में" दायर किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आदेश विधायक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178543/high-court-gives-permission-to-withdraw-2012-riots-case-against"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hindi-divas1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें राज्य सरकार के उस आवेदन को खारिज किया गया था, जिसमें 2012 की मूर्ति विसर्जन दंगा घटना के संबंध में BJP विधायक (रुदौली से) राम चंद्र यादव के खिलाफ आपराधिक मुकदमा वापस लेने की मांग की गई थी। मुकदमा वापस लेने के राज्य का अनुरोध स्वीकार करते हुए जस्टिस राजीव सिंह की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर का आवेदन "रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद सद्भावना में" दायर किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आदेश विधायक यादव द्वारा दायर CrPC की धारा 482 के तहत याचिका और उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया। संक्षेप में मामला अभियोजन पक्ष के मूल मामले के अनुसार, 24 अक्टूबर, 2012 को मूर्तियां विसर्जन के लिए ले जा रहे कुछ ट्रैक्टरों के कारण रुदौली पुलिस स्टेशन के सामने ट्रैफिक जाम हो गया। हालांकि, पुलिस ने ड्राइवरों को आगे बढ़ने का निर्देश दिया, लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह दावा किया गया कि आवेदक उस समय स्थानीय विधायक थे। उन्होंने उन्हें निर्देश दिया था कि वे मूर्तियों को वहीं रोककर रखें, जब तक कि वह पुलिस स्टेशन के सामने न पहुंच जाएं। इसके कारण, घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई। इसके बाद जब विधायक यादव घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्होंने पुलिस को बताया कि जब श्रद्धालु एक मस्जिद के पास से गुजर रहे थे, तो दूसरे समुदाय का एक लड़का गलती से रंग से सराबोर हो गया। कथित तौर पर इसके कारण गाली-गलौज और झगड़ा हुआ, जिसके दौरान एक मूर्ति भी टूट गई।</p>
<p style="text-align:justify;">एफआईआर  में आरोप लगाया गया कि आवेदक ने भड़काऊ बयान दिए। यह मांग की कि जुलूस आगे बढ़ने से पहले दोषियों को दंडित किया जाए। हालांकि, बाद में उनकी सलाह पर ट्रैक्टरों की आवाजाही शुरू हो गई, लेकिन तब तक गाँव में लगभग 2,000 से 3,000 लोग जमा हो चुके थे। इसके बाद आवेदक की कथित उकसाहट पर 250-300 लोग उस गाँव की ओर बढ़ने लगे, जहां दूसरे समुदाय के लोगों के साथ विवाद हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">शुरुआत में, बेंच ने CrPC की धारा 321 के प्रावधानों के साथ-साथ इस प्रावधान पर सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों की जांच करते हुए पाया कि मुकदमा वापस लेने की अनुमति देने के लिए अंतिम मार्गदर्शक विचार हमेशा न्याय प्रशासन का हित ही होना चाहिए। बंसी लाल बनाम चंदन लाल और शिवनंदन पासवान बनाम बिहार राज्य जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि एक पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को स्वतंत्र रूप से अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए और किसी गलत मकसद से न्याय की सामान्य प्रक्रिया में दखल नहीं देना चाहिए। CrPC की धारा 482 के तहत अर्जी, मुकदमा वापस लेने की अर्जी, और साथ ही आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178543/high-court-gives-permission-to-withdraw-2012-riots-case-against</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/178543/high-court-gives-permission-to-withdraw-2012-riots-case-against</guid>
                <pubDate>Thu, 07 May 2026 22:04:00 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/hindi-divas1.jpg"                         length="137237"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अरविंद केजरीवाल ने किया जस्टिस स्वर्णकांता के कोर्ट का बहिष्कार, कहा- न्याय की उम्मीद नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर बताया कि उनके कोर्ट के समक्ष वो खुद या वकील के जरिए पेश नहीं होंगे। मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है, इसलिए मैंने गांधीजी के सत्याग्रह पर चलने का फैसला लिया है।आप नेता ने कहा, “मैंने यह फैसला अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है।” साथ ही उन्होंने कानूनी विकल्प भी खुला रखा। पत्र में उन्होंने जोड़ा, “मैं जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार सुरक्षित रखता हूं।”</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह घटनाक्रम उन दिनों बाद आया है जब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177435/arvind-kejriwal-boycotted-justice-swarnakantas-court-and-said-there"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/justice-swarana-kanta-arvind-kejriwal-2026-04-daca29956d6964f435922dd3db6b6bc3-1200x900.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर बताया कि उनके कोर्ट के समक्ष वो खुद या वकील के जरिए पेश नहीं होंगे। मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है, इसलिए मैंने गांधीजी के सत्याग्रह पर चलने का फैसला लिया है।आप नेता ने कहा, “मैंने यह फैसला अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है।” साथ ही उन्होंने कानूनी विकल्प भी खुला रखा। पत्र में उन्होंने जोड़ा, “मैं जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार सुरक्षित रखता हूं।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह घटनाक्रम उन दिनों बाद आया है जब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद को मामले से हटाने (रिक्यूज) से इनकार कर दिया। केजरीवाल ने पूर्व में पक्षपात और हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए रिक्यूजल की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांत पर जोर दिया और निष्पक्षता पर उठाए गए सवालों को अस्वीकार किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केजरीवाल का पत्र और संदेशपत्र में केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि वे जज के न्याय देने की क्षमता पर भरोसा खो चुके हैं। उन्होंने गांधीजी के अहिंसक विरोध के रास्ते को अपनाने का फैसला लिया है। इस कदम ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी घोटाले से जुड़े मामले में उनकी कानूनी लड़ाई को नया मोड़ दे दिया है।इससे पहले हुई सुनवाई पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दिल्ली आबकारी नीति मामले से रिक्यूज करने यानी खुद को अलग करने से इनकार कर दिया था। उनके रिक्यूजल को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस शर्मा ने कहा, 'मैं इस केस से रिक्यूज़ नहीं करूंगी। मैं इस केस की सुनवाई करूंगी।' इसके साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा अन्य आरोपियों की याचिका खारिज कर दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फरवरी 2026 में ट्रायल कोर्ट ने शराब नीति मामले में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, कविता और अन्य 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने सीबीआई की जांच की भी कड़ी आलोचना की थी। सीबीआई ने हाईकोर्ट में अपील दायर की है। इस अपील की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कर रही हैं। केजरीवाल के अलावा मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक और अन्य ने भी रिक्यूजल की याचिका दायर की थी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177435/arvind-kejriwal-boycotted-justice-swarnakantas-court-and-said-there</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177435/arvind-kejriwal-boycotted-justice-swarnakantas-court-and-said-there</guid>
                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:38:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/justice-swarana-kanta-arvind-kejriwal-2026-04-daca29956d6964f435922dd3db6b6bc3-1200x900.jpg"                         length="74704"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली में पहली एफआईआर पर सियासी बखेडा,ऐसे कैसे बजेगा दंड नहीं न्याय पर जोर का नगाडा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र  प्रभात। एसडी सेठी।</strong> देशभर में1 जुलाई से लागू नए कानून की पाठशाला का सबक अभी शुरू भी नहीं हुआ कि सियासी बखेडा खडा हो गया। राजधानी दिल्ली में पहली एफआईआर कमला मार्केट थाने में रविवार की मध्य रात को दर्ज की गई। इसमें एक रेहडी वाले पर सार्वजनिक रास्ते को बाधित करने की धारा लगाई थी। लेकिन कुछ घंटे के भीतर ही इस पर विवाद हो गया। दरअसल कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पहली एफआईआर रोज कमाने वाले गरीब व्यक्ति पर की गई है।</p>
<p>इससे बुरा क्या हो सकता है? वहीं पत्रकारों से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142746/political-brouhaha-over-the-first-fir-in-delhi-how-will"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/img-20240702-wa0025.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र  प्रभात। एसडी सेठी।</strong> देशभर में1 जुलाई से लागू नए कानून की पाठशाला का सबक अभी शुरू भी नहीं हुआ कि सियासी बखेडा खडा हो गया। राजधानी दिल्ली में पहली एफआईआर कमला मार्केट थाने में रविवार की मध्य रात को दर्ज की गई। इसमें एक रेहडी वाले पर सार्वजनिक रास्ते को बाधित करने की धारा लगाई थी। लेकिन कुछ घंटे के भीतर ही इस पर विवाद हो गया। दरअसल कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पहली एफआईआर रोज कमाने वाले गरीब व्यक्ति पर की गई है।</p>
<p>इससे बुरा क्या हो सकता है? वहीं पत्रकारों से बातचीत में जब केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इसे लेकर सवाल किया गया तो उन्होने साफ किया कि नए कानून के तहत ना तो दिल्ली में पहली एफआईआर दर्ज हुई है और ना ही किसी रेहडी वाले पर ऐसा ऐसा कोई मामला दर्ज हुआ है। पुलिस सूत्रो के मुताबिक दरअसल एफआईआर  गलती से दर्ज हुई।  उसे कैंसिल करने की प्रकिया शुरू कर दी है। तो जनाब इससे तो यह ही साबित होता है कि दंड नहीं अब न्याय पर जोर के शगल का क्या होगा? अब इस सारे मामले की सच्चाई ये है कि दिल्ली के कमला मार्केट थाने में एफआईआर नंबर-267, एसआई कार्तिक मीणा की शिकायत पर की गई थी।</p>
<p>कहानी के मुताबिक सब-इंस्पेक्टर कार्तिक मीणा एवं अन्य पुलिस कर्मी देर रात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने गश्त कर रहे थे। वहां पंकज नाम का शख्स रेहडी लगाकर सिगरेट -बीडी और पान मसाला बेचता हुआ दिखाई दिया।चूंकि रेहडी सडक पर लगी थी।लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही थी। इसके बाद एसआई ने नए कानून के तहत अनिवार्य प्रक्रिया के तहत मोबाइल फोन पर इंस्टाल ई- प्रमाणन ऐप से मौके की वीडियो बनाई  और रेहडी वाले का नाम एवं पता आदि दर्ज किया।इसके बाद थाने में तहरीर दी गई।  जिस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 285 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई।</p>
<p>पुराने कानून के तहत सार्वजनिक स्थल पर आवागमन बाधित होने की धारा 283 होती थी।200 रूपये जुर्मना।  जमानती धारा। वही अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 285 के तहत 5000 रूपये जुर्माना ,जमानती।  बता दें कि इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के करीब 12 घंटे बाद ही इसे रद्द करने की प्रकिया शुरू कर दी गई। सियासी खेला की वजह से पुलिस के आला अफसर चुप्पी साधे रहे। बाद में पटल पर आए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कमला मार्केट थाने मे दर्ज यह मामला नए कानूनो के तहत किया गया है।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-07/20240702_141352.jpg" alt="20240702_141352" width="908" height="2016"></img></p>
<p>बहरहाल पुलिस ने इस एफआईआर को रद्द कर दिया है। बता दे कि अभी तो यह जमानती एफआईआर पर इतना बवाल हो गया। तो हिट एंड रन, समेत अन्य केसों पर सियासी पारा कितना हाई रहेगा, ये तो वक्त ही बताएगा।  बहरहाल अब नए कानून को लेकर थानों में लोगो की क्लास मे कानून का सबक पढाया जाने लगा है।</p>
<p>थाने में नए कानून को लेकर ज्ञान बांटा जा रहा था। तभी एक युवती ने पुलिस से सवाल दाग दिया। प्रश्नकर्ता नंदनी ने सवाल दागा कि यदि  अपराधी पुलिस को रिश्वत के तौर पर पैसे दे दे तो, क्या न्याय मिल जाएगा?  जन संवाद के दौरान पूछे गए  इस सवाल पर पुलिस के ज्ञान बांटू आलाधिकारी की जुबान बंद और शरीर पीला पड गया। दरअसल इस सवाल की जद में नए कानून का मकसद दंड नहीं अब न्याय पर जोर होगा।कैसे हल होगा?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/142746/political-brouhaha-over-the-first-fir-in-delhi-how-will</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/142746/political-brouhaha-over-the-first-fir-in-delhi-how-will</guid>
                <pubDate>Tue, 02 Jul 2024 17:12:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-07/img-20240702-wa0025.jpg"                         length="51489"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        