<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/1768/donald-trump" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Donald Trump - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/1768/rss</link>
                <description>Donald Trump RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपतियों पर जान जानलेवा हमले, अब्राहम लिंकन से लेकर डोनाल्ड ट्रंप तक सुरक्षा में चूक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अमेरिका के राष्ट्रपतियों पर जानलेवा हमलों का इतिहास लोकतांत्रिक व्यवस्था की जटिलताओं, राजनीतिक ध्रुवीकरण और सुरक्षा चुनौतियों का एक गंभीर अध्याय रहा है।जिसकी शुरुआत अब्राहम लिंकन की हत्या से मानी जाती है 14 अप्रैल 1865 को वॉशिंगटन डी.सी. के फोर्ड्स थिएटर में नाटक देखते समय अभिनेता जौंन विल्किस बूथ ने उन्हें गोली मार दी, जो गृहयुद्ध के बाद के तनावपूर्ण माहौल और दक्षिणी असंतोष का परिणाम था। इसके बाद 1881 में जेम्स ए गारफील्ड को चाल्र्स जे गेतयु ने गोली दागी थी, जिससे उनकी मृत्यु हो गई और यह घटना राजनीतिक संरक्षण  से उपजे गहरे असंतोष को दर्शाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">1901</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177387/deadly-attacks-on-american-presidents-security-lapses-from-abraham-lincoln"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/a1582dc0-4375-11ef-81b7-eb26ff9f97f3.jpg.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमेरिका के राष्ट्रपतियों पर जानलेवा हमलों का इतिहास लोकतांत्रिक व्यवस्था की जटिलताओं, राजनीतिक ध्रुवीकरण और सुरक्षा चुनौतियों का एक गंभीर अध्याय रहा है।जिसकी शुरुआत अब्राहम लिंकन की हत्या से मानी जाती है 14 अप्रैल 1865 को वॉशिंगटन डी.सी. के फोर्ड्स थिएटर में नाटक देखते समय अभिनेता जौंन विल्किस बूथ ने उन्हें गोली मार दी, जो गृहयुद्ध के बाद के तनावपूर्ण माहौल और दक्षिणी असंतोष का परिणाम था। इसके बाद 1881 में जेम्स ए गारफील्ड को चाल्र्स जे गेतयु ने गोली दागी थी, जिससे उनकी मृत्यु हो गई और यह घटना राजनीतिक संरक्षण  से उपजे गहरे असंतोष को दर्शाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">1901 में विलियम मेकंली की हत्या लिओन ज़ोलगोस द्वारा की गई, जिसने अराजकतावादी विचारधारा से प्रेरित होकर यह हमला किया था। 20वीं सदी में सबसे चर्चित घटना 1963 में जॉन एफ केनेडी की हत्या है, जब ली हार्वे ओसवाल्ड ने टेक्सास के डलास में गोली चलाई, यह घटना एसेसिनेशन का जॉन एफ कैनेडी के रूप में इतिहास में दर्ज है और आज भी इसके षड्यंत्र सिद्धांतों पर बहस जारी है। हालांकि हर हमला सफल नहीं रहा, 1912 में पूर्व राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट पर चुनाव अभियान के दौरान गोली चलाई गई लेकिन वे बच गए थे और घायल अवस्था में भाषण भी दिया, जो उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और साहस का प्रतीक बना था।</p>
<p style="text-align:justify;">1933 में राष्ट्रपति बनने से रूजवेल्ट सेकंड पर गोसीपी जेंगरा ने गोली चलाई, हालांकि निशाना चूक गया और शिकागो के मेयर की मृत्यु हो गई। 1950 में हेनरी ट्रूमैन पर प्लेयर हाउस के बाहर हमलावरों ने गोलीबारी की, जो प्यूर्टो रिकन राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े थे, लेकिन ट्रूमैन सुरक्षित बच गए । 1975 मे गेराल्ड फोर्ड पर दो अलग-अलग महिलाओं  ने हमले किए, जो उस समय के सामाजिक उथल-पुथल और अतिवादी मानसिकता को दर्शाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">1981 में रोनाल्ड रीगन पर  गोली चलाई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हुए लेकिन वे सुरक्षित बच गए थे, यह घटना मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा तंत्र की समीक्षा का कारण बनी।आधुनिक समय में भी खतरे समाप्त नहीं हुए हैं, 21वीं सदी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर चुनावी रैलियों के दौरान हमले या प्रयासों की खबरें सामने आईं, और वर्तमान में वॉशिंगटन डीसी में एक समारोह के दौरान उन पर गोलियां चलाई गई वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य सुरक्षित रहे। यह सारी घटनाएं बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण और हिंसात्मक प्रवृत्तियों का संकेत देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन घटनाओं के बीच एक महत्वपूर्ण संस्था के रूप मे अमेरिका की खुफिया एजेंसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, जिसकी स्थापना मूलतः वित्तीय अपराधों की जांच के लिए हुई थी लेकिन बाद में राष्ट्रपति सुरक्षा इसकी प्रमुख जिम्मेदारी बन गई। इन हमलों के पीछे विभिन्न कारण रहे हैं राजनीतिक असंतोष, वैचारिक चरमपंथ, मानसिक अस्थिरता, नस्लीय तनाव, और कभी-कभी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा या प्रसिद्धि पाने की चाह जो अमेरिकी समाज के भीतर मौजूद अंतर्विरोधों को उजागर करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह भी अत्यंत उल्लेखनीय है कि प्रत्येक घटना के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल और खुफिया तंत्र को और अधिक सुदृढ़ किया गया, जैसे खुले मंचों पर राष्ट्रपति की उपस्थिति को नियंत्रित करना, बुलेटप्रूफ वाहनों और जैकेट्स का उपयोग, तथा सार्वजनिक कार्यक्रमों में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू करना आदि  फिर भी लोकतांत्रिक समाज में जनता से सीधा संपर्क बनाए रखना एक चुनौती बना रहता है, क्योंकि सुरक्षा और लोकतांत्रिक खुलापन दोनों के बीच संतुलन आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका जैसे विकसित लोकतंत्र में भी सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं और यह केवल सुरक्षा का प्रश्न नहीं बल्कि समाज की वैचारिक दिशा, राजनीतिक संस्कृति और सामाजिक संतुलन का भी दर्पण है, जहां हर हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और उसके मूल्यों पर भी आघात होता ।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका जैसे शक्ति संपन्न राष्ट्र के सर्वाधिक सुरक्षित देश के प्रथम व्यक्ति राष्ट्रपति पर जानलेवा हमले हो सकते हैं और उनकी जान भी जाती रही है तो कल्पना कीजिए कि अन्य विकासशील राष्ट्रों के राष्ट्रीय प्रमुख कितने सुरक्षित हैं। वैसे भी राजनीति कांटों से भर तक माना जाता है और राजनेताओं की जिंदगी भी असुरक्षित ही मानी गई है। इसीलिए सुरक्षागत उपकरणों उपाय और सिद्धांतों को प्रथम प्राथमिकता दी जानी चाहिए।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177387/deadly-attacks-on-american-presidents-security-lapses-from-abraham-lincoln</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177387/deadly-attacks-on-american-presidents-security-lapses-from-abraham-lincoln</guid>
                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:22:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/a1582dc0-4375-11ef-81b7-eb26ff9f97f3.jpg.webp"                         length="35026"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप अपनी नीतियों से ही घिरे, अमेरिकी संसद और इजरायल ट्रंप के नियंत्रण से बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">ईरान को लेकर बढ़ते युद्धपरक माहौल मे डोनाल्ड ट्रंप आक्रामक नीतियाँ स्वयं अमेरिका के भीतर गहरे राजनीतिक और सामाजिक विरोध को जन्म दे रही हैं। जहा अमेरिकी संसद के अनेक सांसद इस आशंका को लेकर मुखर हैं कि एक और बड़े युद्ध में उलझना न केवल आर्थिक रूप से भारी पड़ेगा बल्कि अमेरिका को दीर्घकालिक सैन्य दलदल में धकेल सकता है, वहीं अमेरिकी जनता के इराक और अफगानिस्तान के अनुभवों से सीख लेते हुए नए संघर्ष के प्रति उत्साहित नहीं है बल्कि सशंकित और विरोधी रुख में दिखाई दे रही है अमेरिका की लगभग 90 लाख जनता इसके विरोध में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174664/donald-trump-surrounded-by-his-own-policies-us-parliament-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/american-president-donald-trump-bbc-apologises-.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ईरान को लेकर बढ़ते युद्धपरक माहौल मे डोनाल्ड ट्रंप आक्रामक नीतियाँ स्वयं अमेरिका के भीतर गहरे राजनीतिक और सामाजिक विरोध को जन्म दे रही हैं। जहा अमेरिकी संसद के अनेक सांसद इस आशंका को लेकर मुखर हैं कि एक और बड़े युद्ध में उलझना न केवल आर्थिक रूप से भारी पड़ेगा बल्कि अमेरिका को दीर्घकालिक सैन्य दलदल में धकेल सकता है, वहीं अमेरिकी जनता के इराक और अफगानिस्तान के अनुभवों से सीख लेते हुए नए संघर्ष के प्रति उत्साहित नहीं है बल्कि सशंकित और विरोधी रुख में दिखाई दे रही है अमेरिका की लगभग 90 लाख जनता इसके विरोध में अलग-अलग शहरों में ट्रंप की नीतियों का खुलकर विरोध कर रही है। परिणाम स्वरूप ट्रंप का आत्मविश्वास अब धीरे-धीरे डगमगाने लगा है और ट्रंप अपने बौद्धिक तथा युद्ध की नीतियों को लागू करने में घबराने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई, ऊर्जा संकट और राजनीतिक ध्रुवीकरण के बीच युद्ध की संभावनाएँ ट्रंप प्रशासन को अपेक्षाकृत अलग-थलग करती नजर आ रही हैं।दूसरी ओर मध्य पूर्व में इजरायल डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के नियंत्रण से बाहर हो गया है इजरायल की स्थिति भी बहुस्तरीय दबावों से घिरी हुई है जहाँ बेंजामिन नेतनाहू की सरकार को एक तरफ सुरक्षा बनाए रखने की चुनौती है तो दूसरी तरफ लगातार सैन्य अभियानों के कारण सैनिकों की थकान, रिजर्व बलों पर बढ़ती निर्भरता और युद्ध की लंबी अवधि से उपजा मानसिक तनाव एक गंभीर चिंता बन चुका है। कई विश्लेषण यह संकेत देते हैं कि निरंतर युद्ध जैसी परिस्थितियों ने इजराइली सैनिकों की मनोबल और कार्यक्षमता दोनों को प्रभावित किया है जिससे भविष्य के अभियानों की गति और प्रभावशीलता पर असर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं ईरान अपनी रणनीति के तहत प्रत्यक्ष टकराव से बचते हुए क्षेत्रीय सहयोगियों, प्रॉक्सी समूहों और सामरिक दबाव के माध्यम से संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। ईरान को अब हुति समूह का प्रत्यक्ष लाभ मिलना भी शुरू हो गया यह समूह लगातार इसराइल पर अलग-अलग तरीके से हमले करने लगा है। जिससे संघर्ष एक बहु-स्तरीय और अप्रत्यक्ष युद्ध का रूप लेता जा रहा है। यह स्थिति खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों के लिए भी खतरा उत्पन्न कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य वैश्विक संस्थाएँ शांति की अपील तो कर रही हैं लेकिन उनका प्रभाव सीमित होता जा रहा है जिससे कूटनीतिक प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं। इस पूरे परिदृश्य में अमेरिका का आंतरिक विरोध, इजराइल की सैन्य थकान, ईरान की रणनीतिक सक्रियता और वैश्विक शक्तियों की संतुलनकारी भूमिका मिलकर एक ऐसे जटिल भू-राजनीतिक संकट को जन्म दे रही हैं जहाँ किसी भी छोटी घटना से व्यापक युद्ध भड़कने की आशंका बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि यह टकराव नियंत्रित नहीं हुआ तो यह केवल क्षेत्रीय संघर्ष तक सीमित न रहकर वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट और सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक पुनर्संतुलन का कारण बन सकता है और यदि युद्ध परमाणु युद्ध में बदल जाता है तो वैश्विक स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी उसके परिणाम स्वरूप पूरी दुनिया में मानवता के लिए एक बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। आगामी युद्ध यदि परमाणु युद्ध में परिणत होता है तो यह युद्ध पिछले दो विश्व युद्ध और परमाणु युद्ध से ज्यादा भयानक होगा इसमें पूरे विश्व को नई मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है एवं पूरे विश्व में हाहाकार होने की संभावना बलवती हो गई है ।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/174664/donald-trump-surrounded-by-his-own-policies-us-parliament-and</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/174664/donald-trump-surrounded-by-his-own-policies-us-parliament-and</guid>
                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:21:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/american-president-donald-trump-bbc-apologises-.webp"                         length="20992"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>US–Israel–Iran War: ग्राउंड ऑपरेशन से इनकार नहीं, रक्षा सचिव बोले– लंबी लड़ाई के लिए तैयार अमेरिका</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी रक्षा सचिव <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Pete Hegseth</span></span> ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि फिलहाल ईरान की जमीन पर कोई अमेरिकी सैनिक तैनात नहीं है, लेकिन भविष्य के विकल्प खुले हैं।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की घोषणा</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">रक्षा सचिव ने बताया कि राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> के निर्देश पर “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” शुरू किया गया है। उनके मुताबिक यह अब तक के सबसे सटीक और जटिल हवाई अभियानों में से एक है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी हितों की रक्षा करना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172293/us%E2%80%93israel%E2%80%93iran-war-ground-operation-not-ruled-out-defense-secretary-said"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/iran-attack-sharjah-1772429613.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी रक्षा सचिव <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Pete Hegseth</span></span> ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि फिलहाल ईरान की जमीन पर कोई अमेरिकी सैनिक तैनात नहीं है, लेकिन भविष्य के विकल्प खुले हैं।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की घोषणा</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">रक्षा सचिव ने बताया कि राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> के निर्देश पर “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” शुरू किया गया है। उनके मुताबिक यह अब तक के सबसे सटीक और जटिल हवाई अभियानों में से एक है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी हितों की रक्षा करना और ईरान की दशकों पुरानी शत्रुता का जवाब देना है।हेगसेथ ने कहा कि सैन्य रणनीति पहले से सार्वजनिक करना समझदारी नहीं होती। “दुश्मन को यह नहीं पता होना चाहिए कि अमेरिका कब और क्या कदम उठाएगा,” उन्होंने कहा।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>ग्राउंड ऑपरेशन पर क्या बोले?</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका भविष्य में ईरान में जमीनी सेना भेज सकता है, तो उन्होंने साफ किया कि जरूरत पड़ने पर ऐसा कदम उठाया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि अमेरिका बिना सोचे-समझे कोई कार्रवाई नहीं करेगा।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>ईरानी जवाबी हमले और अमेरिकी सैनिकों की मौत</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्रवाई के बाद ईरान और उसके सहयोगी समूहों ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल पर मिसाइल हमले किए। इन हमलों में चार अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि संघर्ष और लंबा खिंच सकता है।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>47 साल की दुश्मनी का जिक्र</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">हेगसेथ ने कहा कि तेहरान का शासन पिछले 47 वर्षों से अमेरिका के खिलाफ “अप्रत्यक्ष युद्ध” करता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Islamic Revolutionary Guard Corps</span></span> और उसकी कुद्स फोर्स ने विभिन्न हमलों को समर्थन दिया।उन्होंने यह भी कहा कि “हमने यह युद्ध शुरू नहीं किया, लेकिन हम इसे खत्म करेंगे।” उनके अनुसार, यह सरकार बदलने की औपचारिक लड़ाई नहीं है, बल्कि अमेरिकी नागरिकों और हितों की सुरक्षा का सवाल है।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>‘हम जीतने के लिए लड़ते हैं’</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">रक्षा सचिव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका “जीतने के लिए लड़ता है” और लंबे समय तक अनिश्चित संघर्ष में उलझने का इरादा नहीं रखता। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी अमेरिकियों को निशाना बनाया गया, तो अमेरिका बिना हिचकिचाहट जवाब देगा।मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संघर्ष सीमित हवाई कार्रवाई तक रहेगा या जमीनी अभियान का रूप ले सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172293/us%E2%80%93israel%E2%80%93iran-war-ground-operation-not-ruled-out-defense-secretary-said</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/172293/us%E2%80%93israel%E2%80%93iran-war-ground-operation-not-ruled-out-defense-secretary-said</guid>
                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 22:05:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/iran-attack-sharjah-1772429613.jpg"                         length="127188"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान पर हमले तेज होंगे, ‘बड़ी लहर आनी बाकी’ – ट्रंप की नई चेतावनी; इस्फहान न्यूक्लियर साइट पर धमाके</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अभी और तेज हो सकती है और “बड़ी लहर आनी बाकी है।” एक इंटरव्यू में उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना चार से पांच सप्ताह तक अभियान जारी रख सकती है। इसी बीच ईरान के इस्फहान स्थित परमाणु ठिकाने पर नए धमाकों की खबरें सामने आई हैं।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>‘तीव्रता बनाए रखना मुश्किल नहीं’</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के लिए लड़ाई की तीव्रता बनाए रखना कठिन नहीं होगा। उनका दावा है कि लक्ष्य ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172291/attacks-on-iran-will-intensify-big-wave-yet-to-come"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/4a8d6460-fcf6-11f0-9c55-8bade468c676.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अभी और तेज हो सकती है और “बड़ी लहर आनी बाकी है।” एक इंटरव्यू में उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना चार से पांच सप्ताह तक अभियान जारी रख सकती है। इसी बीच ईरान के इस्फहान स्थित परमाणु ठिकाने पर नए धमाकों की खबरें सामने आई हैं।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>‘तीव्रता बनाए रखना मुश्किल नहीं’</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के लिए लड़ाई की तीव्रता बनाए रखना कठिन नहीं होगा। उनका दावा है कि लक्ष्य ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह निष्क्रिय करना है। हालांकि, उन्होंने सैन्य रणनीति के विस्तृत विवरण साझा नहीं किए।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>शासन परिवर्तन पर विरोधाभासी संकेत</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">ईरान में संभावित सत्ता परिवर्तन को लेकर ट्रंप के बयान अलग-अलग संकेत देते नजर आए। एक ओर उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान के विशेष सैन्य बल, जिनमें <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Islamic Revolutionary Guard Corps</span></span> के अधिकारी शामिल हैं, अंततः जनता के सामने हथियार डाल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अपनाया गया मॉडल “आदर्श परिदृश्य” था। उन्होंने <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Nicolás Maduro</span></span> का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय उन्होंने विशेष बलों को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि, ईरान में सर्वोच्च नेतृत्व को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके पास “तीन अच्छे विकल्प” हैं, लेकिन फिलहाल उनका खुलासा नहीं करेंगे।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>‘फैसला ईरानी जनता पर’</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार को हटाने का फैसला अंततः ईरानी जनता पर निर्भर करेगा। उनके मुताबिक, “वे वर्षों से बदलाव की बात कर रहे हैं, अब उन्हें अवसर मिलेगा।” यह बयान उनके पहले दिए गए वेनेजुएला मॉडल के संकेत से अलग माना जा रहा है।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सार्वजनिक मंच से दूरी, सोशल मीडिया पर घोषणाएं</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई से जुड़ी जानकारी मुख्य रूप से इंटरनेट मीडिया के जरिए साझा की है। तड़के जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने बड़े सैन्य हमले की घोषणा की। इसके बाद भी उनकी टिप्पणियां वीडियो संदेशों और चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत तक सीमित रहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट्स के मुताबिक, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Ali Khamenei</span></span> को लेकर आई खबरों पर भी उन्होंने कोई औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। बताया गया कि वह पाम बीच स्थित अपने निजी क्लब <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Mar-a-Lago</span></span> में मौजूद थे और वहीं सीमित दायरे में जानकारी साझा की।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>रणनीति और पारदर्शिता पर सवाल</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">हमले से पहले भी ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से विस्तृत रणनीतिक तर्क पेश नहीं किए थे। अब लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से की जा रही घोषणाओं के चलते उनकी रणनीति और पारदर्शिता को लेकर विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172291/attacks-on-iran-will-intensify-big-wave-yet-to-come</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/172291/attacks-on-iran-will-intensify-big-wave-yet-to-come</guid>
                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 21:49:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/4a8d6460-fcf6-11f0-9c55-8bade468c676.png"                         length="1353369"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया के लिए मुसीबत बन रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद अमेरिकी जनता से यूक्रेन युद्ध रुकवाने का वादा किया था. लेकिन नया साल शुरू होते ही उनके कदम दुनिया में शांति के बजाय तनाव और टकराव को बढ़ाते नजर आ रहे हैं. यूक्रेन युद्ध अभी खत्म भी नहीं हुआ कि मिडिल ईस्ट में आग भड़क चुकी है. इस बीच अब अमेरिका-रूस के बीच सीधा टकराव वैश्विक चिंता का कारण बन गया है. सवाल उठने लगा है कि क्या ट्रंप दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की तरफ धकेल रहे हैं?हाल ही में अमेरिका ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी झंडे वाले तेल टैंकर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165580/donald-trump-is-becoming-a-problem-for-the-world"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/hindi-divas1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद अमेरिकी जनता से यूक्रेन युद्ध रुकवाने का वादा किया था. लेकिन नया साल शुरू होते ही उनके कदम दुनिया में शांति के बजाय तनाव और टकराव को बढ़ाते नजर आ रहे हैं. यूक्रेन युद्ध अभी खत्म भी नहीं हुआ कि मिडिल ईस्ट में आग भड़क चुकी है. इस बीच अब अमेरिका-रूस के बीच सीधा टकराव वैश्विक चिंता का कारण बन गया है. सवाल उठने लगा है कि क्या ट्रंप दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की तरफ धकेल रहे हैं?हाल ही में अमेरिका ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी झंडे वाले तेल टैंकर ‘मरीनेरा’ को जब्त कर लिया है. यह कार्रवाई अमेरिकी कोस्ट गार्ड और सेना के संयुक्त ऑपरेशन में की गई. अमेरिकी दावा है कि यह टैंकर प्रतिबंधों का उल्लंघन कर अवैध रूप से वेनेजुएला का तेल ले जा रहा था. यह वही टैंकर है जिसका पुराना नाम ‘बेला-1’ था और जिस पर 2024 में अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए थे. बाद में इसका नाम बदलकर मरीनेरा कर दिया गया. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें अमेरिकी साम्राज्यवाद, जिसे अक्सर सैन्य विस्तार, आर्थिक प्रभुत्व और सांस्कृतिक प्रभाव के मिश्रण के रूप में समझा जाता है, आज प्रत्यक्ष उपनिवेशवाद की जगह नीतिगत दबाव, वैश्विक संस्थानों, तकनीकी व वित्तीय ताकत के जरिए संचालित होता है। भारत के संदर्भ में यह प्रश्न इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि भारत एक ओर उभरती महाशक्ति है, तो दूसरी और अपने ऐतिहासिक गुटनिरपेक्ष रुख और रणनीतिक स्वायत्तता पर गर्व करता है। बहरहाल, भारत और अमेरिका के रिश्ते इस वक्त ऐसी ढलान पर हैं जहां तनाव हर बीतते दिन के साथ गहराता जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के खिलाफ तीखी बयानबाजी और टेरिफ बढ़ाने की धमकियां अब सिर्फ जुबानी नहीं रही। बात अब अमेरिकी संसद तक पहुंच गई। दरअसल अमेरिकी सीनेट में एक ऐसा कानून आने वाला है जो भारत के लिए काफी भारी पड़ सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वो ऐसे कि अमेरिकी सीनेट में रूस पर प्रतिबंध अधिनियम 2025 लाने की तैयारी है। यह बिल अमेरिका के दो सीनेटरों- लिंसे ग्राहम और रिचर्ड लुमथन ने मिलकर तैयार किया है। जिसे व्हाइट हाउस की हरी झंडी मिल चुकी है। मकसद साफ है रूस की आर्थिक नसों को काटना। लेकिन इसकी चपेट में भारत भी आता दिखाई दे रहा है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूस से जमकर सस्ता कच्चा तेल खरीदा है। लेकिन अब अमेरिका इसे बर्दाश्त करने के मूड में नहीं। इस नए बिल के तहत एक बेहद खतरनाक प्रावधान जोड़ा गया है। अगर रूस शांति वार्ता के लिए नहीं झुकता तो रूस से तेल, गैस या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर अमेरिका 500 प्रतिशत तक का टेरिफ लगा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत पर अमेरिका ने पहले ही रूसी तेल को लेकर अतिरिक्त टेरिफ लगाए हैं। दूसरी ओर, लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता और व्यापारिक तनाव के बावजूद, ट्रंप प्रशासन ने चीन के साथ व्यवहार में सावधानी बरती है। इसका एक प्रमुख कारण दुर्लभ खनिजों, इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयुक्त महत्वपूर्ण घटकों, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरणों और नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों पर बीजिंग का प्रभुत्व है। भले ही चीन रूसी तेल का दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, लेकिन उस पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाए गए हैं। इसके बजाय, राष्ट्रपति ट्रंप ने चीनी आयात पर नए शुल्क को स्थगित कर दिया, जिससे शुल्क 30 प्रतिशत पर बना रहा, जो भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए शुल्क से काफी कम है। इसके विपरीत, भारत के पास चीन जैसी रणनीतिक ताकत नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से नई दिल्ली रियायती दरों पर रूसी तेल का एक प्रमुख खरीदार बन गया है, लेकिन महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं पर चीन की तरह उसका कोई दबदबा नहीं है। ट्रंप ने भारत की व्यापार नीतियों पर बार-बार असंतोष जताया है और नई दिल्ली पर अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च शुल्क और बाधाएं बनाए रखने का आरोप लगाया है। कुल 50 प्रतिशत के ये शुल्क भारत द्वारा रूसी तेल की भारी मात्रा में खरीद के कारण लगाए गए हैं, जिसे अमेरिका यूक्रेन संघर्ष के बीच रूस की अर्थव्यवस्था को समर्थन देने वाला मानता है। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि रूस से तेल खरीदने पर भारत पर लगाए गए उच्च शुल्क को लेकर प्रधानमंत्री मोदी नाखुश हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाउस ऑफ रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों की बैठक में ट्रंप ने कहा कि हालांकि संबंध सौहार्दपूर्ण बने हुए हैं, लेकिन शुल्क के मुद्दे ने तनाव पैदा कर दिया है। कहना न होगा कि अमेरिकी साम्राज्यवाद का स्वरूप अक्सर 'नियम-निर्माण' के माध्यम से दिखाई देता है, जिनमें व्यापार शर्तें, बौद्धिक संपदा अधिकार, डिजिटल शासन, और वित्तीय संस्थानों में प्रभाव शामिल हैं। भारत पर कभी-कभी व्यापार घाटे, डेटा स्थानीयकरण, दवा पेटेंट या मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर दबाव देखा गया है। प्रतिबंधों की राजनीति और डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था भी विकासशील देशों की नीतिगत स्वतंत्रता को सीमित कर सकती है। सांस्कृतिक स्तर पर भी अमेरिकी प्रभाव, हॉलीवुड, उपभोक्तावाद, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म-भारतीय समाज में आकांक्षाओं और जीवनशैली को प्रभावित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह प्रभाव अपने साथ अवसर और जोखिम दोनों लाता है- नवाचार, अभिव्यक्ति और वैश्विक जुड़ाव के अवसर, पर साथ ही स्थानीय भाषाओं, कलाओं और श्रम-संरचनाओं पर दबाव भी। ऐसे में, भारत की चुनौती यहां संतुलन साधने की है। एक ओर चीन जैसी आक्रामक शक्ति के बीच अमेरिका के साथ रणनीतिक सहयोग भारत की सुरक्षा चिंताओं के लिए उपयोगी है। दूसरी ओर, किसी एक शक्ति ध्रुव पर अत्यधिक निर्भरता भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को कमजोर कर सकती है। इसलिए भारत बहुध्रुवीय विश्व का समर्थक रहा है, जहां अमेरिका, यूरोप, रूस, एशिया और वैश्विक दक्षिण सभी की भूमिका हो। नीति-निर्माण में आत्मनिर्भरता, विनिर्माण क्षमता, तकनीकी नवाचार और दक्षिण-दक्षिण सहयोग जैसे कदम अमेरिकी प्रभुत्व के संभावित नकारात्मक प्रभावों को संतुलित कर सकते हैं। साथ ही, लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और मानवाधिकारों पर भारत का अपना दृष्टिकोण होना चाहिए। बदलते वैश्विक माहौल में अमेरिका खुद दुनिया के सामने मुसीबत के बीज बो रहा है और डोनाल्ड ट्रम्प इस सारे विवाद को जन्म दे रहे हैं। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/165580/donald-trump-is-becoming-a-problem-for-the-world</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/165580/donald-trump-is-becoming-a-problem-for-the-world</guid>
                <pubDate>Fri, 09 Jan 2026 18:24:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/hindi-divas1.jpg"                         length="173958"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आतंक की खतरनाक साजिश से निबटने के लिए सतर्कता जरूरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश को एक बार फिर देश में ही छिपे गद्दारों के जरिए विदेशी मदद से आतंकवाद की आग में झोंकने की बड़ी साजिश की जा रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर पदस्थ होते ही डोनाल्ड ट्रम्प ने जिस तरह भारत के खिलाफ ट्रेड टेरिफ का हथियार इस्तेमाल किया लेकिन भारत नहीं झुका इसके बाद ट्रंप की सनक बढ़ गई और उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख के साथ रिश्ते बढाकर दबे पांव भारत में अस्थिरता के बीज बोने की नाकाम कोशिश शुरू कर दी। आपको पता है कि 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में 26 हिन्दू पर्यटकों की हत्या और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160713/vigilance-is-necessary-to-deal-with-the-dangerous-conspiracy-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/आतंक-की-खतरनाक-साजिश.jpg" alt=""></a><br /><p>देश को एक बार फिर देश में ही छिपे गद्दारों के जरिए विदेशी मदद से आतंकवाद की आग में झोंकने की बड़ी साजिश की जा रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर पदस्थ होते ही डोनाल्ड ट्रम्प ने जिस तरह भारत के खिलाफ ट्रेड टेरिफ का हथियार इस्तेमाल किया लेकिन भारत नहीं झुका इसके बाद ट्रंप की सनक बढ़ गई और उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख के साथ रिश्ते बढाकर दबे पांव भारत में अस्थिरता के बीज बोने की नाकाम कोशिश शुरू कर दी। आपको पता है कि 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में 26 हिन्दू पर्यटकों की हत्या और 10 नवम्बर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के निकट आत्मघाती कार बम विस्फोट द्वारा 15 निर्दोष लोगों की हत्या का कनैक्शन 'जैश-ए-मोहम्मद' के साथ निकला है। इस बीच 15 नवम्बर को 'श्रीनगर' के 'नौगाम' पुलिस थाने में एक विस्फोट में 10 लोगों की मौत व 32 अन्य घायल हो गए। इनमें 27 पुलिस कर्मी हैं।</p>
<p>भारत में सफेद कोट माड्यूल बना कर जिस तरह एक समुदाय विशेष के दर्जनों उच्च शिक्षित डाॅक्टरों के जरिए आतंक फैलाने की बड़ी साजिश की गई जिस का समय रहते भंडाफोड़ हो गया। इसके पीछे भी विदेशी मदद का हाथ है। हाल ही में अमेरिका के प्रयास से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के तालिबान के बीच समझोता करा कर भारत में ने सिरे से कश्मीर को मुद्दा बना कर वहां के शिक्षित लोगों की भावनाओं को भड़का कर भारत में आतंकी वारदातों को अंजाम देने की साजिश रची जा रहीं हैं। तमाम आतंकी घटनाओं के बाद भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा आतंकवादियों के विरुद्ध कार्रवाई तेज कर दी गई है जिसके तहत पिछले दिनों में की गई गिरफ्तारियों तथा बरामदगियों से मामले की गंभीरता को समझा जा सकता है। </p>
<p>आपको बता दें 13 नवम्बर को कश्मीर के 'सोपोर' से 2 हाईब्रिड आतंकवादियों 'शब्बीर अहमद नाजर' तथा 'शब्बीर अहमद मीर' को गिरफ्तार करके उनसे एक पिस्तौल, एक मैगजीन, 20 जिंदा राऊंड तथा 2 हथगोले बरामद किए गए।  13 नवम्बर को ही उत्तर प्रदेश के 'हापुड़' और 'फिरोजाबाद' जिलों में 3 आरोपियों को गिरफ्तार करके उनसे 46 किलो 'हाईड्रोक्लोरिक एसिड' और 2.5 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किए गए।<br />13 नवम्बर को ही पश्चिम बंगाल के 'बीरभूम' जिले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार करके उससे जिलेटिन की 20,000 छड़ें बरामद की गईं।</p>
<p>अतः क्या आतंकवादी 'दिल्ली' की तरह 'बंगाल' को दहलाने की कोशिश कर रहे थे ? 14 नवम्बर को 'लाल किला विस्फोट' में प्रयुक्त कार के आत्मघाती ड्राइवर 'डा. उमर नबी' के पुलवामा जिले में स्थित मकान को सुरक्षा बलों ने आई.ई.डी. से विस्फोट करके उड़ा दिया।14 नवम्बर को ही अधिकारियों ने 'नूह' से 2 और मैडीकल छात्रों 'मुस्तकीम' तथा 'मोहम्मद' को हिरासत में लिया।15 नवम्बर को ही 'दिल्ली बम विस्फोट' के सिलसिले में 'पठानकोट' और 'नूह' से 2 डाक्टरों 'रईस अहमद भट्ट' तथा 'रेहान' को हिरासत में लिया गया।</p>
<p>15 नवम्बर को ही 'अहमदाबाद' (गुजरात) में 'गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते' ने एक आतंकवादी गिरोह के लिए हथियारों की तस्करी करने में शामिल 'गुरप्रीत सिंह' उर्फ 'गोपी बिल्ला' को गिरफ्तार किया 15 नवम्बर को ही 'फिरोजपुर' में भारत-पाक सीमा पर बी.एस.एफ. ने खेतों में 2 ड्रोन व पाकिस्तान से भेजी गई 549 ग्राम हैरोइन का पैकट बरामद किया। 16 नवम्बर को 'अमृतसर कमिश्नरेट' पुलिस ने पाक आधारित हथियार और नार्को नैटवर्क का पर्दाफाश करके 1.01 किलो हैरोइन और 6 आधुनिक पिस्तौलों सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया।</p>
<p>16 नवम्बर को ही सी. आई.ए. ने सफेदपोश आतंकवादी माड्यूल मामले में जम्मू-कश्मीर के 'अनंतनाग' जिले में एक महिला डाक्टर के घर पर छापेमारी की और वहां से एक मोबाइल जब्त कर अपने साथ ले गई16 नवम्बर को ही 'राष्ट्रीय जांच ब्यूरो' ने 'लाल किला' कार बम विस्फोट के हमलावर 'डा. उमर उन नबी' के साथी 'आमिर राशिद अली' तथा अगले दिन 17 नवम्बर को एक अन्य साजिशकर्त्ता 'जसीर बिलाल वानी' को गिरफ्तार किया।<br />और अब 17 नवम्बर को सुरक्षा एजेंसियों को घटनास्थल पर एक जूता मिला है जिसमें 'अमोनियम नाईट्रेट' तथा जरा सी गर्मी से फटने वाले अत्यंत खतरनाक विस्फोटक 'टी.ए.टी.पी. के अंश मिले हैं। इसे देखते हुए इस धमाके में 'जूता बम' के इस्तेमाल का भी शक व्यक्त किया जा रहा है।</p>
<p>इसे पाकिस्तान का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि अपने देश की जनता की बदहाली दूर करने के लिए प्रयास करने की बजाय इसके शासक और सेना आतंकवादियों को पाल रही है और उनकी सहायता से भारत में तबाही मचा रही है। हालत यह है कि गरीबी के कारण पाकिस्तान में 2.5 करोड़ बच्चे स्कूलों से बाहर हो गए हैं जबकि 2 लाख बच्चे तो कभी स्कूल गए ही नहीं।<br />इतना ही  नहीं, पाकिस्तान की 'शहबाज शरीफ' सरकार द्वारा फील्ड मार्शल 'असीम मुनीर' के दबाव में सुप्रीमकोर्ट की शक्तियों को कम करने वाले 'विवादास्पद 27वें संविधान संशोधन' के विरुद्ध 16 नवम्बर को वकीलों ने हड़ताल की।</p>
<p>हम मानते हैं आतंकवादियों द्वारा पहलगाम व दिल्ली आदि में मारे गए निर्दोषों की जान कभी वापस नहीं आ सकती है लेकिन इन वारदातों के बाद सरकार तथा सुरक्षा बलों ने पूरी ताकत से आतंकवादियों के विरुद्ध कार्रवाई करके अनेक लोगों का जीवन बचा लिया है।ये साजिश खत्म होने वाली नही है अभी भी खतरा टला नहीं है,देव असुर संग्राम थमने वाला नहीं है अतः आतंकवादियों तथा उनके मददगारों के विरुद्ध सफाई के अभियान को तब तक और तेजी से जारी रखा जाना चाहिए जब तक कि आतंकवादियों का समूल सफाया नहीं हो जाता वहीं देश के भीतर छिपे गद्दारों रेडिकलाइज चरम पंथी लोगों पर भी नजर रखनी होगी खासकर उन कट्टरपंथी मजहबी व्यक्तियों और संस्थानों पर जो अलफलाह यूनिवर्सिटी की तरह चरमपंथी षडयंत्र का अड्डा बन सकते हैं।</p>
<p>भारत की खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक तेज तर्रार तकनीकी युक्त प्रशिक्षण और अत्याधुनिक सुविधाओं व साधनों से समृद्ध करने की जरूरत है ताकि आतंक के बदलते चेहरे की पहचान और समय रहते खात्मा किया जाए। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं) </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/160713/vigilance-is-necessary-to-deal-with-the-dangerous-conspiracy-of</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/160713/vigilance-is-necessary-to-deal-with-the-dangerous-conspiracy-of</guid>
                <pubDate>Tue, 18 Nov 2025 18:24:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/%E0%A4%86%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%96%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%B6.jpg"                         length="6952"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया में हथियारों की खतरनाक होड़ के सूत्रधार बनेंगे ट्रंप </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फिर से परमाणु परीक्षण शुरू करने की घोषणा पर दुनिया में जबरदस्त हलचल मच गई है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 33 साल बाद परमाणु परीक्षण का आदेश दिया है. चीन और रूस की टेस्टिंग के बीच यह फैसला वैश्विक तनाव बढ़ा सकता है और एनपीटी समझौते पर सवाल खड़े करता है।</div>
<div style="text-align:justify;">ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के पास दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं, लेकिन इंटरनेशनल कैंपेन टू एबॉलिश न्यूक्लियर वेपंस  के अनुसार, रूस के पास लगभग 5,500 परमाणु वारहेड हैं, जबकि अमेरिका के पास करीब 5,044 हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हाल ही</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158673/trump-will-become-the-architect-of-dangerous-arms-race-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/whatsapp-image-2025-11-01-at-19.50.25_52c0be58.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फिर से परमाणु परीक्षण शुरू करने की घोषणा पर दुनिया में जबरदस्त हलचल मच गई है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 33 साल बाद परमाणु परीक्षण का आदेश दिया है. चीन और रूस की टेस्टिंग के बीच यह फैसला वैश्विक तनाव बढ़ा सकता है और एनपीटी समझौते पर सवाल खड़े करता है।</div>
<div style="text-align:justify;">ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के पास दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं, लेकिन इंटरनेशनल कैंपेन टू एबॉलिश न्यूक्लियर वेपंस  के अनुसार, रूस के पास लगभग 5,500 परमाणु वारहेड हैं, जबकि अमेरिका के पास करीब 5,044 हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने परमाणु हमले की तैयारी के अभ्यास का आदेश दिया था. रूसी सेना ने इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल  यार्स और सिनेवा मिसाइल का परीक्षण किया, साथ ही टीयू-95 बमवर्षक विमान से लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइल भी दागी. ट्रंप ने इन परीक्षणों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि पुतिन को युद्ध खत्म करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि मिसाइल टेस्ट करने पर। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ट्रंप के परमाणु परीक्षण के आदेश से वैश्विक स्तर पर हड़कंप मच गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम वैश्विक निरस्त्रीकरण प्रयासों को कमजोर कर सकता है और न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी का उल्लंघन भी माना जा सकता है, जिसे अमेरिका ने 1992 में साइन किया था. आपको बता दें कि इस पर तीखी प्रतिक्रिया आ रही है। ईरानी के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर एक पोस्ट लिखकर ट्रम्प के बयान की तीखी आलोचना की। उनका कहना था कि अपने रक्षा विभाग का नाम बदलकर युद्ध विभाग रखने वाला परमाणु हथियारों से लैस दबंग देश खुद परमाणु हथियारों का परीक्षण करने जा रहा है। यही दबंग देश ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को बदनाम कर रहा है और हमारे सुरक्षित परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले की धमकी दे रहा है। इससे पहले ये जानना जरूरी है कि परमाणु परीक्षण क्या है और इसके क्या नुकसान हो सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नाभिकीय अस्त्र परीक्षण या परमाण परीक्षण उन प्रयोगों को कहते हैं जो डिजाइन एवं निर्मित किए गए नाभिकीय अस्त्रों के प्रभाविकता, उत्पादकता एवं विस्फोटक क्षमता की जांच करने के लिए किए जाते हैं। परमाणु परीक्षणों से कई जानकारियां प्राप्त होतीं हैं, जैसे ये नाभिकीय हथियार कैसा काम करते है, विभिन्न स्थितियों में ये किस प्रकार का परिणाम देते है, भवन एवं अन्य संरचनाएं इन हथियारों के प्रयोग के बाद कैसा बर्ताव करतीं हैं। इसके अलावा परमाणु परीक्षणों से वैज्ञानिक, तकनीकी एवं सैनिक शक्ति का प्रदर्शन करने की कोशिश भी की जाती है। बीसवीं सदी में कई देशों ने परमाणु परीक्षण किए थे। पहला परमाणु परीक्षण अमेरिका ने 16 जुलाई, 1945 में किया था जिसमें 20 किलोटन का परीक्षण किया गया था। अब तक का सबसे बड़ा परमाणु परीक्षण सोवियत रूस में 30 अक्टूबर 1961 को किया गया था जिसमें 50 मेगाटन के हथियार का परीक्षण किया गया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">25 मई, 2009 को उत्तरी कोरिया ने परमाणु परीक्षण किया था, जिसे विश्व के अधिकांश देशों ने निंदनीय बताया है। विश्व के परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्रों ने अब तक कम से कम 2000 परमाणु परीक्षण किए हैं। हालांकि अब इस पर अंतर्राष्ट्रीय कानून बने हुए हैं, जिनका पालन करना दुनिया के हर देश का कर्तव्य है, लेकिन अब ट्रम्प ने परमाणु परीक्षण की बात कहकर दुनिया में हलचल मचा दी है। अगर अब परमाणु परीक्षण होता है, तो यह अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का घोर उल्लंघन है। इस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति ने परमाणु परीक्षण की बात कहकर इन कानूनों का उल्लंघन किया है। ईरान के विदेश मंत्री का साफ कहना था कि अमेरिका दुनिया में परमाणु प्रसार का सबसे बड़ा खतरा है। उल्लेखनीय है कि श्री ट्रम्प ने दक्षिण कोरिया में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन से इतर चीन के प्रधानमंत्री शी जिनपिंग से मुलाकात से ठीक पहले गुरुवार को अपने टूथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा था कि उन्होंने अमेरिका के रक्षा विभाग को परमाणु हथियारों के परीक्षण का आदेश दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अन्य देशों के परीक्षण कार्यक्रमों के कारण, मैंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि वे हमारे परमाणु हथियारों का समान परीक्षण शुरू करें। रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रूस ने हाल में कोई परीक्षण नहीं किया है, लेकिन अगर अमेरिका ऐसा करता है, तो रूस भी परमाणु हथियारों का परीक्षण शुरू कर देगा। सोवियत संघ ने आखिरी बार 1990 में, अमेरिका ने 1992 में और चीन ने 1996 में परमाणु हथियार का परीक्षण किया था। चीन ने हालांकि ट्रम्प के बयान पर संतुलित रुख अपनाया। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन का कहना था कि बीजिंग को उम्मीद है कि अमेरिका व्यापक परमाणु परीक्षण-प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) और परमाणु परीक्षणों पर उसके प्रतिबंधका पालन करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाले जापानी परमाणु बम पीड़ितों के समूह निहोन हिडांक्यो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की घोषणा कड़ी आलोचना की है और इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। उधर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका परीक्षण दोबारा शुरू करता है, तो यह हथियारों की नई दौड़ को जन्म दे सकता है. अमेरिकी सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा, “ट्रंप परमाणु हथियारों को खिलौना बना रहे हैं.” दुनिया भर के विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम रूस और चीन के बढ़ते परमाणु प्रभाव के जवाब में है, लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता को बड़ा झटका लग सकता है.यह स्थिति विश्व भर में हथियारों की खतरनाक होड़ को जन्म दे सकती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/158673/trump-will-become-the-architect-of-dangerous-arms-race-in</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/158673/trump-will-become-the-architect-of-dangerous-arms-race-in</guid>
                <pubDate>Sat, 01 Nov 2025 19:52:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/whatsapp-image-2025-11-01-at-19.50.25_52c0be58.jpg"                         length="246073"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन 30 साल बाद भारत में कदम रखेगा, पूरी दुनिया में मचा हड़कंप! </title>
                                    <description><![CDATA[ उसी समय आसिम मुनीर शहबाज शरीफ और पाकिस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन आमिर खान मुत्ताकी भारत में कदम रख रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156511/68e0b501daec1"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/पाकिस्तान-का-सबसे-बड़ा-दुश्मन-30-साल-बाद-भारत-में-कदम-रखेगा,-पूरी-दुनिया-में-मचा-हड़कंप! .jpg" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk</strong></p>
<p>करीब 30 साल बाद भारत में एक ऐसा शख्त कदम रखने वाला है जो कभी तो पाकिस्तान का दोस्त हुआ करता था। लेकिन अब पाकिस्तान को बर्बाद करने की कसम खा चुका है। पाकिस्तान ने पूरी कोशिश की कि ये शख्स भारत न आ पाए। लेकिन भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस शख्स को हिंदुस्तान बुलाने की ताकत ले आया।</p>
<p>पहली बार तालिबान का एक बड़ा नेता भारत में कदम रखेगा और वो भी ऐसे समय जब अमेरिका और पाकिस्तान मिलकर अफगानिस्तान पर हमले का प्लान बना रहे हैं। जिस समय डोनाल्ड ट्रंप आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ को अमेरिका बुला रहे हैं। उसी समय आसिम मुनीर शहबाज शरीफ और पाकिस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन आमिर खान मुत्ताकी भारत में कदम रख रहा है। </p>
<p>आमिर खान मुत्ताकी अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्री है। जो 9 अक्टूबर को भारत आएंगे। भारत आकर मुत्ताकी विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनएसए अजित डोभाल से मिलेंगे। तालिबान के सबसे बड़े नेता का एनएसए अजित डोभाल से मिलना पाकिस्तान की कुंडली के लिए अच्छा नहीं है। मुत्ताकी 9 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक भारत में रहेंगे। सोचिए इतने लंबे समय तक भारत में क्या क्या प्लानिंग होगी।</p>
<p>अफगानिस्तान के अंतरिम विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की संभावित भारत यात्रा को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि मुत्ताकी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से 9-16 अक्टूबर के बीच दिल्ली आने के लिए इजाजत मिल गई है। हालांकि इस यात्रा के बारे में उन्होंने और कोई जानकारी नहीं दी।</p>
<p>भारत ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है, तो मुत्ताकी को किस तरह का प्रोटेकॉल दिया जाएगा, इस पर उन्होंने कछ नहीं कहा, लेकिन दूसरे सवाल के जवाब में जायसवाल ने कहा कि 'मुत्ताकी अफगानिस्तान के विदेश मंत्री हैं।</p>
<p>जायसवाल ने मई में विदेश मंत्री एस जयशंकर और मुत्ताकी के बीच टेलीफोन कॉल का जिक्र करते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते इंगेजमेंट पर रोशनी डाली। बता दें कि मुत्ताकी पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद  बाहर यात्रा करने को लेकर बैन लगाया है, जिसे भारत यात्रा के लिए हटाया गया है। करीब 30 साल बाद भारत इस तरह से तालिबान के संपर्क में होगा। </p>
<p>मुत्ताकी को अगस्त में ही भारत आना था। लेकिन पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मुत्ताकी की शिकायत कर दी थी। जिसके बाद आमिर खान मुत्ताकी को अपनी यात्रा टालनी पड़ गई। लेकिन बाद में भारत उसी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मुत्ताकी को भारत लाने की इजाजत ले आया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/156511/68e0b501daec1</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/156511/68e0b501daec1</guid>
                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 17:56:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A8-30-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%A6%E0%A4%AE-%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE%2C-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%9A%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%AA%21%C2%A0.jpg"                         length="39243"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी कोर्ट का बड़ा फैसला, ट्रंप के अधिकांश टैरिफ को बताया अवैध</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मनमाने तरीके से दुनिया के विभिन्न देशों पर भारी-भरकम टैरिफ थोप दिया है, जिनमें भारत भी शामिल है। अब अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप की राह में रोड़े अटका दिए हैं। यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स ने शुक्रवार को अपने फैसले में कहा कि ट्रंप ने देशों पर टैरिफ लगाने के लिए अपनी शक्तियों का सीमा से आगे बढ़कर इस्तेमाल किया। संघीय अदालत ने 7-4 के फैसले से ट्रंप के टैरिफ को गलत बताया और उस पर रोक लगाने का आदेश दिया। हालांकि ये आदेश तुरंत लागू नहीं होगा और अदालत ने ट्रंप प्रशासन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154356/the-big-decision-of-the-us-court-told-most-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/trump-usa-terrif.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मनमाने तरीके से दुनिया के विभिन्न देशों पर भारी-भरकम टैरिफ थोप दिया है, जिनमें भारत भी शामिल है। अब अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप की राह में रोड़े अटका दिए हैं। यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स ने शुक्रवार को अपने फैसले में कहा कि ट्रंप ने देशों पर टैरिफ लगाने के लिए अपनी शक्तियों का सीमा से आगे बढ़कर इस्तेमाल किया। संघीय अदालत ने 7-4 के फैसले से ट्रंप के टैरिफ को गलत बताया और उस पर रोक लगाने का आदेश दिया। हालांकि ये आदेश तुरंत लागू नहीं होगा और अदालत ने ट्रंप प्रशासन को अक्तूबर तक सुप्रीम कोर्ट में अपील का समय दिया है, तब तक टैरिफ लागू रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमेरिका में संघीय अपील अदालतों में से एक ने फैसला सुनाया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए अधिकांश टैरिफ कानूनों के अनुरूप नहीं हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को पुष्टि की कि देशों पर लगाए गए सभी टैरिफ प्रभावी रहेंगे. साथ ही हाल ही में एक अत्यधिक पक्षपातपूर्ण अपील न्यायालय के फैसले को गलत बताया। ट्रंप ने कहा,'सभी टैरिफ अभी भी लागू हैं! आज एक बेहद पक्षपातपूर्ण अपील अदालत ने गलती से कहा कि हमारे टैरिफ हटा दिए जाने चाहिए, लेकिन वे जानते हैं कि अंत में जीत अमेरिका की ही होगी. अगर ये टैरिफ कभी हटा दिए गए तो यह देश के लिए पूरी तरह से विनाशकारी होगा. यह हमें आर्थिक रूप से कमजोर बना देगा, और हमें मजबूत होना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ट्रंप ने इस वर्ष की शुरुआत में कानून का इस्तेमाल किया था</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी एक संघीय अपील अदालत द्वारा यह फैसला सुनाए जाने के बाद आई है कि अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम किसी राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है. जैसा कि ट्रंप ने इस वर्ष की शुरुआत में कानून का इस्तेमाल किया था. संघीय सर्किट ने ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए यह बात कही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीएनएन के अनुसार न्यायाधीशों ने कहा कि ट्रम्प द्वारा लगाया गया अभूतपूर्व टैरिफ उनकी शक्ति का अतिक्रमण है क्योंकि टैरिफ सहित कर लगाने की क्षमता एक प्रमुख कांग्रेसी शक्ति है जो संविधान विधायी शाखा को प्रदान करता है.</div>
<div style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि उनका देश अब बड़े व्यापार घाटे या अन्य देशों द्वारा लगाए गए अनुचित टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार बाधाओं को बर्दाश्त नहीं करेगा. उन्होंने आगे कहा, 'अगर इसे ऐसे ही रहने दिया गया तो यह फैसला सचमुच अमेरिका को तबाह कर देगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को राष्ट्रपति के कदमों का बचाव किया. प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप ने विदेशी खतरों से हमारी राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए कांग्रेस द्वारा उन्हें दी गई टैरिफ शक्तियों का वैधानिक रूप से प्रयोग किया. राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए टैरिफ अभी भी प्रभावी हैं और हम इस मामले में अंतिम जीत की आशा करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण व्यापार घाटे वाले लगभग साठ देशों या व्यापार समूहों पर नए टैरिफ की एक व्यापक श्रृंखला की घोषणा की. ये लगभग 100 वर्षों में अमेरिका द्वारा की गई सबसे बड़ी टैरिफ वृद्धि थी. उन्होंने इस अवसर को मुक्ति दिवस कहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस बीच अमेरिकी बहुराष्ट्रीय निवेश बैंक और वित्तीय सेवा कंपनी जेफरीज की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका द्वारा लगाया गया 50 प्रतिशत का भारी शुल्क मुख्य रूप से भारत-पाकिस्तान विवाद में मध्यस्थता की अनुमति न दिए जाने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत नाराजगी का परिणाम है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/154356/the-big-decision-of-the-us-court-told-most-of</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/154356/the-big-decision-of-the-us-court-told-most-of</guid>
                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 15:13:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-09/trump-usa-terrif.jpg"                         length="211959"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हवाई हमलों में कम से कम 53 लोगों की मौत, यमन पर अमेरिका ने फिर बरपाया कहर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वास्थ्य मंत्रालय- </strong>यमन में हूती विद्रोहियों को निशाना बनाकर अमेरिकी द्वारा किए गए हवाई हमलों में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई और करीब 100 लोग घायल हो गए। हूती विद्रोहियों द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। अमेरिका के इन हमलों ने बाद ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी हमलों की धमकी दी है जिससे यमन में तनाव और बढ़ने की आशंका है। हूती विद्रोहियों द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अमेरिकी हमलों में पांच महिलाओं और दो बच्चों समेत कम से कम 53 लोग मारे गए हैं तथा राजधानी सना एवं सऊदी अरब</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149956/at-least-53-people-killed-in-air-strikes-america-again"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(16)2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वास्थ्य मंत्रालय- </strong>यमन में हूती विद्रोहियों को निशाना बनाकर अमेरिकी द्वारा किए गए हवाई हमलों में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई और करीब 100 लोग घायल हो गए। हूती विद्रोहियों द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। अमेरिका के इन हमलों ने बाद ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी हमलों की धमकी दी है जिससे यमन में तनाव और बढ़ने की आशंका है। हूती विद्रोहियों द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अमेरिकी हमलों में पांच महिलाओं और दो बच्चों समेत कम से कम 53 लोग मारे गए हैं तथा राजधानी सना एवं सऊदी अरब की सीमा पर विद्रोहियों के गढ़ सादा समेत अन्य प्रांतों में लगभग 100 लोग घायल हो गए हैं।</p>
<p><strong>अमेरिकी सैनिक-</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को यमन में हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों पर सिलसिलेवार हवाई हमलों का आदेश दिया था। ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान समर्थित हूती विद्रोही अहम समुद्री गलियारे पर आने-जाने वाले मालवाहक पोतों पर जब तक अपने हमले बंद नहीं कर देते, तब तक वह ‘‘पूरी ताकत से'' हमले जारी रखेंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक ‘पोस्ट' में कहा था, ‘‘हमारे बहादुर सैनिक अमेरिकी जलमार्गों, वायु और नौसेना संपत्तियों की रक्षा करने तथा नौवहन की स्वतंत्रता को बहाल करने के लिए आतंकवादियों के ठिकानों, उनके आकाओं और मिसाइल रक्षा तंत्र पर हवाई हमले कर रहे हैं।''</p>
<p>रुबियो ने कहा कि हूती विद्रोहियों के कुछ केंद्रों को नष्ट कर दिया गया है। रविवार रात प्रसारित भाषण में विद्रोहियों के नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘हम तनाव बढ़ाए जाने का जवाब तनाव बढ़ाकर देंगे।'' अल-हूती ने कहा, ‘‘हम अमेरिकी दुश्मन को हमलों, मिसाइल हमलों से और उसके विमानवाहक पोतों, उसके युद्धपोतों को निशाना बनाकर जवाब देंगे।'' हूती मीडिया कार्यालय के उप प्रमुख नसरुद्दीन आमेर ने कहा कि हवाई हमले उन्हें रोक नहीं पाएंगे और वे अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करेंगे। विद्रोहियों के एक अन्य प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुलसलाम ने ‘एक्स' पर अपने पोस्ट में ट्रंप के इस दावे को ‘‘झूठा और भ्रामक'' बताया कि हूती अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को खतरा पहुंचाते हैं। </p>
<p>उन्होंने कहा था, ‘‘कोई भी आतंकी ताकत अमेरिकी वाणिज्यिक और नौसैनिक पोतों को दुनिया के जलमार्गों पर स्वतंत्र रूप से आने-जाने से नहीं रोक पाएगी।'' ट्रंप ने ईरान को भी चेतावनी दी कि वह विद्रोही संगठन का समर्थन बंद कर दे, अन्यथा उसे उसके कृत्यों के लिए ‘‘पूरी तरह से जवाबदेह'' ठहराया जाएगा। हूती विद्रोहियों ने शनिवार शाम को सना और सादा में शनिवार तथा रविवार को हवाई हमले होने की सूचना दी। उन्होंने रविवार तड़के होदीदा, बायदा और मारिब प्रांतों में भी हवाई हमले होने की जानकारी दी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार को ‘CBS' टीवी चैनल से कहा, ‘‘हम इन लोगों को यह नियंत्रित करने नहीं देंगे कि कौन से पोत गुजर सकते हैं और कौन से नहीं।''</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/149956/at-least-53-people-killed-in-air-strikes-america-again</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/149956/at-least-53-people-killed-in-air-strikes-america-again</guid>
                <pubDate>Mon, 17 Mar 2025 15:13:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/download-%2816%292.jpg"                         length="9626"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस का आरोप- ट्रंप को खुश करने के लिए स्पेसएक्स से कराई गई एयरटेल-जियो की डील।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="adn ads">
<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>प्रयागराज। </strong>कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भारत की दिग्गज संचार कंपनियों एयरटेल और जियो द्वारा स्पेसएक्स) के 'स्टारलिंक' के साथ साझेदारी की घोषणा पर बीजेपी सरकार को घेरते हुए दावा किया कि ये करार पीएम मोदी द्वारा कराए गए हैं ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सद्भाव हासिल किया जा सके। कांग्रेस नेता ने कहा कि लेकिन कई सवाल बाकी हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है। राष्ट्रीय सुरक्षा की मांग होने पर संचार को चालू या बंद करने की शक्ति किसके पास होगी? क्या यह स्टारलिंक या उसके भारतीय भागीदार होंगे?</div>
<div>  </div>
<div>कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149884/congresss-charge-airtel-jio-deal-made-from-spacex-to-please-trump"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(9)2.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>प्रयागराज। </strong>कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भारत की दिग्गज संचार कंपनियों एयरटेल और जियो द्वारा स्पेसएक्स) के 'स्टारलिंक' के साथ साझेदारी की घोषणा पर बीजेपी सरकार को घेरते हुए दावा किया कि ये करार पीएम मोदी द्वारा कराए गए हैं ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सद्भाव हासिल किया जा सके। कांग्रेस नेता ने कहा कि लेकिन कई सवाल बाकी हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है। राष्ट्रीय सुरक्षा की मांग होने पर संचार को चालू या बंद करने की शक्ति किसके पास होगी? क्या यह स्टारलिंक या उसके भारतीय भागीदार होंगे?</div>
<div> </div>
<div>कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, "वस्तुतः 12 घंटों के भीतर एयरटेल और जियो दोनों ने स्टारलिंक के साथ साझेदारी की घोषणा की है, जबकि अब तक वे इसके भारत में आने को लेकर लगातार आपत्तियां जताते आ रहे थे।" उन्होंने दावा किया कि यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि स्टारलिंक के मालिक एलन मस्क के माध्यम से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सद्भाव हासिल करने के मकसद से ये साझेदारियां किसी और ने नहीं, बल्कि स्वयं प्रधानमंत्री मोदी द्वारा कराई गई हैं।</div>
<div> </div>
<div>कांग्रेस नेता ने कहा, "लेकिन कई सवाल बाकी हैं। शायद सबसे महत्वपूर्ण सवाल राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है। राष्ट्रीय सुरक्षा की मांग होने पर संचार को चालू या बंद करने की शक्ति किसके पास होगी? क्या यह स्टारलिंक या उसके भारतीय भागीदार होंगे? क्या अन्य उपग्रह-आधारित संचार प्रदाताओं को भी अनुमति दी जाएगी और अगर हां, तो किस आधार पर?" रमेश ने कहा कि और, निश्चित रूप से, एक बड़ा सवाल टेस्ला के भारत में निर्माण को लेकर भी है। क्या अब, जब स्टारलिंक को भारत में प्रवेश मिल गया है, टेस्ला के निर्माण को लेकर कोई प्रतिबद्धता जताई गई है?</div>
<div> </div>
<div>रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सेवा कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड ने बुधवार को घोषणा की थी कि उसने भारत में अपने ग्राहकों को स्टारलिंक की ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने के लिए स्पेसएक्स के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता स्पेसएक्स को भारत में स्टारलिंक की उपग्रह संचार-आधारित सेवाओं को बेचने के लिए मंजूरी हासिल करने के तहत है। इससे एक दिन पहले ही जियो की प्रतिद्वंद्वी भारती एयरटेल ने स्पेसएक्स के साथ इसी तरह के समझौते पर हस्ताक्षर किया है। स्पेसएक्स के मालिक अरबपति कारोबारी एलन मस्क हैं जो ट्रंप प्रशासन में प्रमुख भूमिका में हैं।</div>
<div> </div>
<div>एयरटेल के बाद जियो अर्थात  मुकेश अंबानी ने एलन मस्‍क से मिलाया हाथ, भारत में स्टारलिंक का रास्‍ता साफहो गया है  ।दरअसल मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड (जेपीएल) और एलन मस्क की स्पेसएक्स ने भारत में स्टारलिंक की ब्रॉडबैंड इंटरनेट सर्विस उपलब्ध कराने के लिए समझौता किया है। इस समझौते के बाद अब भारत के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों सहित पूरे देश में सैटेलाइट आधारित ब्रॉडबैंड सेवाएं मिलने लगेंगी। इससे उन दुर्गम इलाकों को भी आसानी से कनेक्ट किया जा सकेगा जहां कनेक्टिविटी पहुंचाना मुश्किल काम है। </div>
<div> </div>
<div>समझौते में शामिल कंपनियों में से एक जियो जहां दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल ऑपरेटर है तो वहीं स्टारलिंक दुनिया का अग्रणी लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन ऑपरेटर है। ज‍ियो से पहले मंगलवार को एयरटेल ने एलन मस्‍क की स्‍टारल‍िंंक से कोलैबरेशन करने का ऐलान क‍िया था। खास बात यह है क‍ि भारत में स्‍टारल‍िंंक के दो ही प्रमुख प्रति‍द्वंद्वी हैं। दोनों से ही स्‍टारल‍िंंक ने हाथ म‍िला ल‍िया है।</div>
<div> </div>
<div>एलन मस्क की जिस स्टारलिंक के भारत आने को लेकर पहले विरोध हो रहा था, अब देश की वही दो दिग्गज टेलीकॉम कंपनियां स्टारलिंक के साथ करार करके भारत में उसके लिए रास्ता तैयार कर रही हैं। जियो से पहले भारती एयरटेल ने भी ठीक ऐसा ही करार स्पेसएक्स के साथ किया है। इस एग्रीमेंट के मुताबिक एयरटेल और स्पेसएक्स स्टारलिंक की सैटेलाइट कनेक्टिविटी के जरिए एयरटेल की मौजूदा सेवाओं को बढ़ाने तरीकों पर मिलकर काम करेंगे।</div>
<div> </div>
<div>स्पेसएक्स और एयरटेल बिजनेसेज को स्टारलिंक इक्विपमेंट और सर्विसेज देने के लिए सहयोग करेंगे। साथ ही स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्शन भी देंगे।दोनों कंपनियां एयरटेल नेटवर्क के विस्तार और बढ़ने में मदद के लिए स्टारलिंक के तरीकों पर भी विचार करेंगी, जबकि SpaceX देश में एयरटेल के ग्राउंड नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य क्षमताओं का उपयोग करेगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"> </div>
</div>
</div>
<div class="ajx"> </div>
</div>
<div class="gA gt acV">
<div class="gB xu">
<div class="ip iq">
<div></div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/149884/congresss-charge-airtel-jio-deal-made-from-spacex-to-please-trump</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/149884/congresss-charge-airtel-jio-deal-made-from-spacex-to-please-trump</guid>
                <pubDate>Sat, 15 Mar 2025 12:46:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/download-%289%292.jpg"                         length="10358"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे तैयारी पाकिस्तानियों की एंट्री बैन करेंगे बैन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पाकिस्तान और अफगानिस्तान-</strong> डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन  पाकिस्तानी नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। इस फैसले को लेकर  अमेरिकी प्रशासन अंतिम समीक्षा कर रहा है जिसके बाद इसे जल्द ही लागू किया जा सकता है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो  पाकिस्तान और अफगानिस्तान के नागरिकों के अमेरिका में आने पर सीधा प्रतिबंध लग जाएगा।  इस बीच, अमेरिका ने  पाकिस्तान को खतरनाक देशों की सूची में डालते हुए नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। इसमें अमेरिकी नागरिकों को पाकिस्तान की यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।   </p>
<p>रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149731/us-president-donald-trump-preparations-will-ban-pakistanis-banned"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/images-(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पाकिस्तान और अफगानिस्तान-</strong> डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन  पाकिस्तानी नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। इस फैसले को लेकर  अमेरिकी प्रशासन अंतिम समीक्षा कर रहा है जिसके बाद इसे जल्द ही लागू किया जा सकता है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो  पाकिस्तान और अफगानिस्तान के नागरिकों के अमेरिका में आने पर सीधा प्रतिबंध लग जाएगा।  इस बीच, अमेरिका ने  पाकिस्तान को खतरनाक देशों की सूची में डालते हुए नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। इसमें अमेरिकी नागरिकों को पाकिस्तान की यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।   </p>
<p>रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक  ट्रंप प्रशासन का यह फैसला पाकिस्तान की  बढ़ती सुरक्षा चिंताओं और पृष्ठभूमि जांच में आने वाली दिक्कतों   को देखते हुए लिया जा रहा है। अमेरिका को लगता है कि पाकिस्तान से आने वाले नागरिकों की पूरी तरह से  सुरक्षा जांच करना मुश्किल हो सकता है। अगर यह प्रतिबंध लागू होता है, तो हजारों पाकिस्तानी नागरिकों को वीजा और प्रवास से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।  अमेरिका के इस कड़े फैसले पर अब तक पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, माना जा रहा है कि यह कदम दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव और व्यापारिक रिश्तों में नई दरार पैदा कर सकता है।  </p>
<p>अमेरिका के विदेश विभाग ने कहा है कि पाकिस्तान में आतंकवाद और सशस्त्र संघर्ष का खतरा बना हुआ है। खासतौर पर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में आतंकी गतिविधियों की आशंका अधिक है।  एडवाइजरी के मुताबिक आतंकी बिना किसी पूर्व चेतावनी के हमले कर सकते हैं।  शॉपिंग मॉल, परिवहन केंद्र, हवाई अड्डे, सैन्य प्रतिष्ठान, विश्वविद्यालय, और पूजा स्थल उनके निशाने पर हो सकते हैं।  इस्लामाबाद समेत प्रमुख शहरों की सुरक्षा स्थिति बेहद अस्थिर है। इसके अलावा,  पाकिस्तान में अमेरिकी राजनयिकों और अधिकारियों  को सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होने से रोका गया है।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/149731/us-president-donald-trump-preparations-will-ban-pakistanis-banned</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/149731/us-president-donald-trump-preparations-will-ban-pakistanis-banned</guid>
                <pubDate>Mon, 10 Mar 2025 15:10:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/images-%281%29.jpg"                         length="8116"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        