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                <title>highcourt - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>highcourt RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>टोल प्लाजा चौकड़ी की वैधता पर कल हाईकोर्ट में सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>जिले के हरैया विधानसभा क्षेत्र  के चर्चित समाजसेवी व भाजपा नेता चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा’ द्वारा दायर जनहित याचिका के क्रम में कल प्रयागराज हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पीठ में टोल प्लाजा चौकड़ी की वैधता को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई सुनिश्चित हुई है। सुदामा जी वर्ष 2013-14 से एक ही राजमार्ग पर 40 किलोमीटर के भीतर स्थापित दो टोल प्लाज़ा में से एक को हटाने की मांग लगातार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह टोल मानक दूरी 60 किलोमीटर नियम का उल्लंघन करते हुए तालाब की भूमि पर बनाया गया है, जो जनहित के विरुद्ध है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/157318/hearing-in-high-court-tomorrow-on-the-validity-of-toll"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/img-20251015-wa0103.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>जिले के हरैया विधानसभा क्षेत्र  के चर्चित समाजसेवी व भाजपा नेता चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा’ द्वारा दायर जनहित याचिका के क्रम में कल प्रयागराज हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पीठ में टोल प्लाजा चौकड़ी की वैधता को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई सुनिश्चित हुई है। सुदामा जी वर्ष 2013-14 से एक ही राजमार्ग पर 40 किलोमीटर के भीतर स्थापित दो टोल प्लाज़ा में से एक को हटाने की मांग लगातार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह टोल मानक दूरी 60 किलोमीटर नियम का उल्लंघन करते हुए तालाब की भूमि पर बनाया गया है, जो जनहित के विरुद्ध है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि 2019 में टोल कर्मियों द्वारा उनके चालक पर हमला और उसके बाद उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे के बावजूद उन्होंने जनहित के इस संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटेअगस्त 2023 में कोर्ट ने इस मामले में सचिव, भू-तल परिवहन मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (नई दिल्ली व गोरखपुर) तथा जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया था। एनएचएआई द्वारा दिए गए जवाब पर सुदामा जी ने तर्क दिया है कि “राजपत्र जनता के अधिकारों को कुचलने का औजार नहीं, बल्कि जनहित का संरक्षण करने का माध्यम है।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुदामा जी ने कहाअब जबकि केस 250 नम्बर पर लगा है, मुझे पूर्ण विश्वास है कि कल सुनवाई निश्चित होगी। यदि किसी कारणवश सुनवाई लम्बित हुई तो अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में जनसहयोग के साथ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगा।उन्होंने जनता से आह्वान किया कि इस जनहित लड़ाई में साथ दें ताकि मनमाने टोल और भ्रष्ट तंत्र पर लगाम लगाई जा सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Oct 2025 17:09:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने कहा- आपराधिक मामला लंबित होने पर निरस्त नहीं कर सकते शस्त्र लाइसेंस</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि आपराधिक केस लंबित होने के आधार पर शस्त्र लाइसेंस निरस्त नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि आर्म्स एक्ट की धारा 17(3) के तहत केवल शस्त्र से लोक शांति और लोक सुरक्षा को खतरा होने पर ही लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने अनुराग जायसवाल की याचिका को‌ निस्तारित करते हुए दिया. इसी के साथ कोर्ट ने याची का शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने के डीएम जौनपुर और कमिश्नर वाराणसी के आदेशों को रद्द कर दिया. डीएम जौनपुर को दो माह में नियमानुसार आदेश</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156560/high-court-said-arms-license-cannot-be-canceled-if-criminal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/allahabad-high-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि आपराधिक केस लंबित होने के आधार पर शस्त्र लाइसेंस निरस्त नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि आर्म्स एक्ट की धारा 17(3) के तहत केवल शस्त्र से लोक शांति और लोक सुरक्षा को खतरा होने पर ही लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने अनुराग जायसवाल की याचिका को‌ निस्तारित करते हुए दिया. इसी के साथ कोर्ट ने याची का शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने के डीएम जौनपुर और कमिश्नर वाराणसी के आदेशों को रद्द कर दिया. डीएम जौनपुर को दो माह में नियमानुसार आदेश करने का निर्देश दिया है.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">याची का कहना था कि उसके खिलाफ शस्त्र के दुरुपयोग का आरोप नहीं है और न ही उसके किसी आचरण से लोक शांति और सुरक्षा को खतरे की आशंका है. वह अपनी सुरक्षा के लिए शस्त्र रखना चाहता है. ऐसे में डीएम उसके शस्त्र लाइसेंस को निरस्त नहीं कर सकते. साथ ही केवल आपराधिक केस लंबित रहना शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने का आधार नहीं हो सकता.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट ने कहा कि दो लोगों में दुश्मनी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे यह नहीं कहा जा सकता कि लोक शांति और सुरक्षा को खतरा है. सुप्रीम कोर्ट ने सुरेश सिंह यादव केस में स्पष्ट रूप से कहा है कि आपराधिक केस लंबित होना शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने का आधार नहीं हो सकता.</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 19:37:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘मां-बाप की संपत्ति से बेदखल हो सकते हैं बच्चे’, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला, बुजुर्ग को दिलाया हक</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मां बाप की जायदाद से बच्चे कभी भी बेदखल किए जा सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने पैतृक संपत्ति पर अहम फैसला सुनाया. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बैंच ने एक बुजुर्ग को मालिकाना हक दिलाया. बुजुर्ग के बेटे ने अपनी पैतृक जायदाद पर कब्जा कर लिया था और अपने पिता को भी उनमें प्रवेश की इजाजत नहीं दे रखी थी. अभागे पिता ने बेटे के खिलाफ कोर्ट का रुख किया था. सुप्रीम कोर्ट ने बेटे को पिता की संपत्ति खाली करने का आदेश दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मां-बाप के अधिकार बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156037/children-may-be-ousted-from-the-property-of-parents"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/supream-court2.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मां बाप की जायदाद से बच्चे कभी भी बेदखल किए जा सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने पैतृक संपत्ति पर अहम फैसला सुनाया. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बैंच ने एक बुजुर्ग को मालिकाना हक दिलाया. बुजुर्ग के बेटे ने अपनी पैतृक जायदाद पर कब्जा कर लिया था और अपने पिता को भी उनमें प्रवेश की इजाजत नहीं दे रखी थी. अभागे पिता ने बेटे के खिलाफ कोर्ट का रुख किया था. सुप्रीम कोर्ट ने बेटे को पिता की संपत्ति खाली करने का आदेश दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मां-बाप के अधिकार बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि परेंट्स और सीनियर सिटीजंस अपनी संपत्ति से बच्चों को कभी भी बेदखल कर सकते हैं. भरण-पोषण एवं कल्याण एक्ट </span>2007<span lang="hi" xml:lang="hi"> के तहत गठित ट्रिब्यूनल को परेंट्स और सीनियर सिटीजंस को ऐसे बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने का अधिकार देता है जो उन्हें रहने-खाने की जिम्मेदारी देने से भागें. सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के इस मामले में बड़े बेटे के खिलाफ बेदखली के आदेश को भी पलट दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">बुढ़ापे में देखभाल की जिम्मेदारी नहीं निभाने के कारण बुजुर्ग ने ट्रिब्यूनल में अपील की थी. ट्रिब्यूनल ने उनके बेटे को संपत्ति से बेदखल करने का भी आदेश दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल को अमान्य करार दिया तो केस सुप्रीम कोर्ट में चला गया था. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बैंच ने इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को पलटते हुए कहा कि </span>2007 <span lang="hi" xml:lang="hi">का कानून वृद्ध व्यक्तियों की दुर्दशा दूर करने तथा उनकी देखभाल एवं सुरक्षा के लिए बनाया गया था।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 18:28:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Haryana: हरियाणा में ADA भर्ती परीक्षा के सिलेबस में बदलाव पर विवाद, हाईकोर्ट ने सरकार को भेजा नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Haryana News: हरियाणा में असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (ADA) की भर्ती प्रक्रिया में हाल ही में किए गए बदलावों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें परीक्षा के सिलेबस को अचानक पूरी तरह बदलने को चुनौती दी गई है।</p>
<p>पहले ADA की स्क्रीनिंग परीक्षा का पाठ्यक्रम मुख्य रूप से कानून से जुड़े विषयों पर आधारित था, लेकिन अब इसे पूरी तरह सामान्य ज्ञान आधारित कर दिया गया है। नए सिलेबस में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, भारत का इतिहास, भारतीय और विश्व</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154418/controversy-over-change-in-syllabus-of-ada-recruitment-exam-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/haryana-ada-bharti.jpg" alt=""></a><br /><p>Haryana News: हरियाणा में असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (ADA) की भर्ती प्रक्रिया में हाल ही में किए गए बदलावों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें परीक्षा के सिलेबस को अचानक पूरी तरह बदलने को चुनौती दी गई है।</p>
<p>पहले ADA की स्क्रीनिंग परीक्षा का पाठ्यक्रम मुख्य रूप से कानून से जुड़े विषयों पर आधारित था, लेकिन अब इसे पूरी तरह सामान्य ज्ञान आधारित कर दिया गया है। नए सिलेबस में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, भारत का इतिहास, भारतीय और विश्व भूगोल, भारतीय संस्कृति, भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था, सामान्य मानसिक क्षमता, तर्कशक्ति, अंकगणित, डाटा इंटरप्रिटेशन और हरियाणा सामान्य ज्ञान एवं इतिहास जैसे विषय शामिल किए गए हैं, जबकि कानून से जुड़े सभी विषयों को पूरी तरह हटा दिया गया है।</p>
<p>इस बदलाव को लेकर जस्टिस संदीप मौदगिल की अदालत ने हरियाणा सरकार, हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता, जो कि विधि स्नातक हैं, ने कोर्ट में दलील दी कि परीक्षा का पैटर्न बिना किसी ठोस या तार्किक आधार के बदला गया है और यह बदलाव भर्ती नियमों और संविधान के अनुच्छेद 320 के तहत हरियाणा सरकार व एचपीएससी के बीच उचित परामर्श के बिना किया गया है।</p>
<p>याचिका में यह भी कहा गया है कि नया सिलेबस उन अधिवक्ताओं के साथ अन्याय करता है, जो कानून के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, क्योंकि उनके पास सामान्य ज्ञान या गणितीय क्षमता की उतनी तैयारी नहीं होती जितनी कि कानून विषयों की। इससे उनकी प्रतियोगिता में हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है।</p>
<p>याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि स्क्रीनिंग परीक्षा का उद्देश्य केवल योग्य उम्मीदवारों को छांटना होता है, और इसके लिए मापदंड तार्किक और न्यायसंगत होने चाहिए, लेकिन वर्तमान बदलाव इन मूलभूत सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Sep 2025 12:01:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संभल जामा मस्जिद के सर्वे का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने खारिज की मस्जिद पक्ष की याचिका।</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong> प्रयागराज। </strong>संभल जामा मस्जिद के सर्वे के आदेश के खिलाफ मस्जिद पक्ष की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर याचिका को न्यायलय ने खारिज कर दिया है. अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालय के आदेश में कोई अवैधानिकता नहीं. बता दें कि शाही जामा मस्जिद ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी. हाईकोर्ट ने सर्वे आदेश में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है. हाईकोर्ट के इस फैसले से अब सर्वे का रास्ता साफ हो गया है।</div>
<div>  </div>
<div>संभल जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी की पुनरीक्षण याचिका में संभल जिला न्यायालय में लंबित मूल वाद की आगे की अदालती कार्यवाही पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/152016/the-way-for-survey-of-sambhal-jama-masjid-is-cleared"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-05/1001076603.jpg" alt=""></a><br /><div><strong> प्रयागराज। </strong>संभल जामा मस्जिद के सर्वे के आदेश के खिलाफ मस्जिद पक्ष की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर याचिका को न्यायलय ने खारिज कर दिया है. अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालय के आदेश में कोई अवैधानिकता नहीं. बता दें कि शाही जामा मस्जिद ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी. हाईकोर्ट ने सर्वे आदेश में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है. हाईकोर्ट के इस फैसले से अब सर्वे का रास्ता साफ हो गया है।</div>
<div> </div>
<div>संभल जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी की पुनरीक्षण याचिका में संभल जिला न्यायालय में लंबित मूल वाद की आगे की अदालती कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी. इस मामले में हिंदू पक्ष के वादी ने घोषणा करने की मांग की है कि उन्हें संभल के मोहल्ला कोट पूर्वी में स्थित श्री हरिहर मंदिर में प्रवेश का अधिकार है, जो कथित तौर पर जामा मस्जिद है. उक्त मामले में न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने गत 13 मई को सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित कर लिया था।</div>
<div> </div>
<div>हरि शंकर जैन व सात अन्य ने सिविल जज सीनियर डिवीजन संभल की अदालत में मुकदमा दाखिल कर तर्क दिया है कि संभल के कोट पूर्वी स्थित जामा मस्जिद एक मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाई गई थी. वादी ने हरिहर मंदिर में प्रवेश के अधिकार की घोषणा की मांग की है. दीवानी अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए एएसआई को एडवोकेट कमिश्नर के साथ सर्वे का निर्देश दिया था और मुकदमे की पोषणीयता पर भी सवाल उठाया था. साथ ही हाईकोर्ट ने संभल की दीवानी अदालत के समक्ष लंबित मूल मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।</div>
<div> </div>
<div>जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी की पुनरीक्षण याचिका पर हाईकोर्ट ने भारतीय एएसआई को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था. कोई हलफनामा दाखिल नहीं होने पर कोर्ट ने आगे का समय दिया. यह पुनरीक्षण याचिका सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद की गई, जिसमें संभल की दीवानी अदालत के समक्ष पूरी कार्यवाही के साथ मुकदमे की पोषणीयता को चुनौती दी गई है।</div>
<div> </div>
<div>याचिका में कहा गया था कि मुकदमा 19 नवंबर 2024 की दोपहर दाखिल किया गया और कुछ ही घंटों के भीतर अदालत ने एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया. साथ ही उसे मस्जिद में प्रारंभिक सर्वेक्षण का निर्देश दिया, जो उसी दिन यानी 19 नवंबर को और फिर 24 नवंबर 2024 को किया गया था. अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि सर्वेक्षण की रिपोर्ट 29 नवंबर तक दाखिल की जाए. दीवानी अदालत ने 19 नवंबर को ही हिंदू पक्ष के इस तर्क को स्वीकार कर लिया कि मस्जिद मुगल सम्राट बाबर द्वारा 1526 में संभल में हरिहर मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाई गई थी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 May 2025 16:52:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट गेट नंबर दो के सामने कैंट एरिया में लगी आग, धुएं का गुब्बार उठते देख मचा हड़कंप!</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong> प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट नंबर दो गेट के सामने न्यू कैंट एरिया में कमांडर वर्क्स इंजीनियर के कंपाउंड में बुधवार को आग लग गई। आग परिसर में स्थित एक मंदिर में लगी और देखते ही देखते आग की लपटें उठने लगीं। परिसर में तैनात कर्मचारी और सेना के जवान आग बुझाने में जुट गए। धुएं का गुबार देखकर बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। कर्मचारियों ने कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया। सूचना पाकर फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां और सेना के दो वाहन मौके पर पहुंच गए और आग बुझाने में जुट गए।</div>
<div>  </div>
<div>न्याय मार्ग</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150446/in-front-of-the-high-court-gate-number-two-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250326-wa0184.jpg" alt=""></a><br /><div><strong> प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट नंबर दो गेट के सामने न्यू कैंट एरिया में कमांडर वर्क्स इंजीनियर के कंपाउंड में बुधवार को आग लग गई। आग परिसर में स्थित एक मंदिर में लगी और देखते ही देखते आग की लपटें उठने लगीं। परिसर में तैनात कर्मचारी और सेना के जवान आग बुझाने में जुट गए। धुएं का गुबार देखकर बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। कर्मचारियों ने कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया। सूचना पाकर फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां और सेना के दो वाहन मौके पर पहुंच गए और आग बुझाने में जुट गए।</div>
<div> </div>
<div>न्याय मार्ग पर पोलो ग्राउंड के सामने न्यू कैंट  कमांडर वर्क्स इंजीनियर के कंपाउंड में लगी आग   देखते ही देखते ऊंची- लपटें उठने लगी। आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। लोग यह अनुमान लगाते रहे कि जनरेटर की चिंगारी या कूड़े के ढेर में आग लगाने के बाद आग फैल गई है। धुएं का गुबार दिखने पर लोग मौके पर पहुंच गए। दफ्तर के कर्मचारी और यहां पर तैनात सेना के जवानों ने किसी तरह आग पर काबू पाया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Mar 2025 13:56:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्रीय मंत्री के कब्जे से खाली करायी जाएगी 15 एकड़ जमीन, जेसीबी लेकर पहुंचे अधिकारी।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>कर्नाटक में राजस्व विभाग ने हाईकोर्ट के आदेश पर केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और अन्य के खिलाफ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है. इस अभियान के तहत 12 सर्वेक्षण नंबरों में फैली 15 एकड़ जमीन को खाली कराया जाएगा, जिस पर अवैध कब्जे का आरोप है.।</div>
<div>  </div>
<div>  रामनगर के जिला मजिस्ट्रेट यशवंत वी. गुरुकर अन्य अधिकारियों के साथ कोर्ट के आदेश और सर्वे रिपोर्ट लेकर कुमारस्वामी के आवास के पास केथागनहल्ली पहुंचे. केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी से जुड़ी कथित रूप से अतिक्रमित भूमि को खाली कराने का अभियान शुरू किया गया. डिप्टी कमिश्नर गुरुकर ने मीडिया को बताया,</div>
<div> </div>
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<div><strong>कुमारस्वामी</strong></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150090/officers-arrived-with-jcb-15-acres-of-land-will-be"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(15)3.jpg" alt=""></a><br /><div>कर्नाटक में राजस्व विभाग ने हाईकोर्ट के आदेश पर केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और अन्य के खिलाफ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है. इस अभियान के तहत 12 सर्वेक्षण नंबरों में फैली 15 एकड़ जमीन को खाली कराया जाएगा, जिस पर अवैध कब्जे का आरोप है.।</div>
<div> </div>
<div> रामनगर के जिला मजिस्ट्रेट यशवंत वी. गुरुकर अन्य अधिकारियों के साथ कोर्ट के आदेश और सर्वे रिपोर्ट लेकर कुमारस्वामी के आवास के पास केथागनहल्ली पहुंचे. केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी से जुड़ी कथित रूप से अतिक्रमित भूमि को खाली कराने का अभियान शुरू किया गया. डिप्टी कमिश्नर गुरुकर ने मीडिया को बताया, "अदालत के निर्देश के अनुसार, हमने अतिक्रमित भूमि को खाली कराने का काम शुरू कर दिया है. अभियान पूरा होने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट अदालत को सौंपी जाएगी."।</div>
<div> </div>
<div> राजस्व विभाग के प्रधान सचिव ने कथित अतिक्रमण की जांच के लिए पहले एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था. सर्वेक्षण संख्या 7, 8, 9, 10, 16, 17 और 79 के अंतर्गत बिदादी के केथागनहल्ली में विभिन्न भूमि खंडों में सर्वेक्षण किया था.।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div><strong>कुमारस्वामी ने बताया राजनीतिक साजिश</strong></div>
<div> केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विवादित जमीन चार दशक पहले कानूनी तौर पर खरीदी गई थी. नई दिल्ली रवाना होने से पहले उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मैंने कभी किसी अवैध गतिविधि में भाग नहीं लिया. यह जमीन 40 साल पहले खरीदी गई थी और मैं कानूनी तरीकों से।</div>
<div> </div>
<div><strong> इस राजनीतिक साजिश का मुकाबला करूंगा."</strong></div>
<div>कर्नाटक के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके कुमारस्वामी ने मामले को लेकर सरकार के रवैये की आलोचना की. उन्होंने कहा, "कानून के अनुसार किसी भी बेदखली से पहले 15 दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य है, यहां तक कि आम नागरिक के लिए भी. हालांकि, मुझे अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है." उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मौजूदा प्रशासन उन्हें गलत तरीके से निशाना बना रहा है. बेंगलुरु के कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि भूमि संबंधी मामले में मेरे खिलाफ एसआईटी गठित की गई है।</div>
<div> </div>
<div>कुमारस्वामी ने मीडिया से रिपोर्ट करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि पिछले 40 वर्षों में इस भूमि की कई बार जांच की जा चुकी है. भूमि निकासी अभियान अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की उम्मीद है, जिसके पूरा होने पर अधिकारी न्यायालय को अंतिम रिपोर्ट सौंपेंगे. आने वाले हफ्तों में इस मामले में कानूनी और राजनीतिक बहस छिड़ने की संभावना है।</div>
<div> </div>
<div>इसके पहले अक्तूबर 24 में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी मुश्किल में घिरते नजर आ रहे हैं.कुमारस्वामी के खिलाफ जबरन वसूली और आपराधिक धमकी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस ने गुरुवार को बताया कि कुमारस्वामी के साथ-साथ, जदएस के पूर्व विधान पार्षद रमेश गौड़ा पर भी अमृतहल्ली थाने ने इस मामले में मुकदमा दर्ज किया है।</div>
<div> </div>
<div>विजय टाटा नामक एक व्यवसायी ने आज शहर के अमृतहल्ली पुलिस स्टेशन में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी और पूर्व विधान परिषद सदस्य रमेश गौड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने 50 करोड़ रुपये देने की धमकी दी. पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है।</div>
<div> </div>
<div>इससे पहले कुमारस्वामी और रमेश गौड़ा के खिलाफ एनसीआर दर्ज करने वाली पुलिस ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की और अब एफआईआर दर्ज की. एफआईआर में रमेश को पहला आरोपी और कुमारस्वामी को दूसरा आरोपी बनाया गया है. शिकायतकर्ता विजय टाटा, दशरहल्ली निवासी हैं और रियल एस्टेट व्यवसायी हैं. वे 2018 से जेडीएस पार्टी में पहचाने जाते हैं और वर्तमान में पार्टी के सोशल मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष हैं।</div>
<div> </div>
<div>शिकायतकर्ता विजय टाटा ने आरोप लगाया कि साल 2019 में वह जेडीएस के इंटरनेट मीडिया प्रभाग के उपाध्यक्ष थे. उन्होंने कहा, ‘"2019 के मांड्या लोकसभा चुनाव के दौरान मैंने जेडीएस उम्मीदवार निखिल कुमारस्वामी की ओर से सोशल मीडिया पर प्रचार किया था और इस पर व्यक्तिगत रूप से करोड़ों रुपये खर्च किए थे." विजय टाटा ने आरोप लगाया कि 24 अगस्त को पूर्व एमएलसी रमेश गौड़ा घर आए और अपने फोन से कुमारस्वामी को फोन किया. मंत्री ने उनसे कहा कि पार्टी को चन्नापटना उपचुनाव के लिए 50 करोड़ रुपये की जरूरत है।</div>
<div> </div>
<div>इस पर विजय ने तुरंत जवाब दिया, ''सर, मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं, मुझे अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पूरे करने हैं, इसलिए मैं पार्टी के काम में शामिल होने की कोशिश करूंगा.' उन्होंने कहा, कुमारस्वामी मेरी बातों से नाराज हो गए और कहा 'मुझे नहीं पता कि अगर आप 50 करोड़ रुपए तैयार नहीं करेंगे तो मैं क्या करूंगा. न केवल आप बेंगलुरु में रियल एस्टेट का कारोबार चलाएंगे, बल्कि यहां रहना भी मुश्किल हो जाएगा,' उन्होंने धमकी दी और फोन काट दिया।</div>
<div> </div>
<div>" विजय टाटा ने शिकायत में बताया, "मेरे सामने बैठे रमेश गौड़ा ने धमकी दी कि कुमारन्ना (कुमारस्वामी) के कहे अनुसार 50 करोड़ तैयार रखो और 'मैं एक मंदिर और एक स्कूल बना रहा हूं, उसके लिए 5 करोड़ दो'. उन्होंने जोर देकर कहा कि 'अगर तुम यह पैसा नहीं दोगे, तो तुम्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा.'विजय ने दावा किया कि जब उन्होंने रुपये देने में असमर्थता जताई तो कुमारस्वामी ने कथित तौर पर उन्होंने गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Mar 2025 13:43:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने संभल की जामा मस्जिद की पुताई की इजाजत दी, एक सप्ताह में पूरा कराने का निर्देश।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल स्थित जामा मस्जिद की बाहरी दीवार की रंगाई-पुताई की इजाजत दे दी है। संबद्ध पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने बुधवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को मस्जिद की बाहरी दीवार की पुताई और लाइट लगाने का काम एक सप्ताह में पूरा करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एएसआई से रिपोर्ट मांगी थी। जिस पर एएसआई ने कहा था कि मस्जिद की रंगाई-पुताई की अभी जरूरत नहीं है, साफ-सफाई कराई जा सकती है। लेकिन मस्जिद कमेटी ने बाहरी दीवार की कुछ रंगीन तस्वीरे भी पेश कीं</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149819/the-high-court-directed-to-complete-the-painting-of-sambhals"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल स्थित जामा मस्जिद की बाहरी दीवार की रंगाई-पुताई की इजाजत दे दी है। संबद्ध पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने बुधवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को मस्जिद की बाहरी दीवार की पुताई और लाइट लगाने का काम एक सप्ताह में पूरा करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एएसआई से रिपोर्ट मांगी थी। जिस पर एएसआई ने कहा था कि मस्जिद की रंगाई-पुताई की अभी जरूरत नहीं है, साफ-सफाई कराई जा सकती है। लेकिन मस्जिद कमेटी ने बाहरी दीवार की कुछ रंगीन तस्वीरे भी पेश कीं जिससे पुताई की जरूरत का पता चलता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इससे पहले सोमवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एएसआई के वकील से स्पष्ट करने को कहा था कि मस्जिद की बाहरी दीवार की पुताई को लेकर उसके क्या पूर्वाग्रह हैं। मस्जिद कमेटी के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी ने कहा था कि आज की तिथि तक एएसआई के हलफनामे में यह साफ नहीं किया गया है कि एएसआई मस्जिद की बाहरी दीवार की पुताई और सजावटी लाइट लगाने से क्यों इनकार कर रहा है। नकवी ने बाहरी दीवार की कुछ रंगीन तस्वीरे भी पेश की थीं जिससे पुताई की जरूरत का पता चलता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कहा है कि मस्जिद की बाहरी दीवार पर लाइटनिंग भी लगाई जा सकती है, लेकिन बिना किसी ढांचे को नुकसान पहुंचाए। हाईकोर्ट के इस फैसले से मुस्लिम पक्ष यानी कि जामा मस्जिद कमेटी को बड़ी राहत मिली है। अब मामले में अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रमजान शुरू होने से पहले मस्जिद कमेटी ने एएसआई और प्रशासन से जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई की इजाजत मांगी थी। लेकिन उसे खारिज कर दिया गया था। जिसके बाद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया, जिस पर हिंदू पक्ष ने विरोध किया। हिंदू पक्ष ने आरोप लगाया था कि रंगाई-पुताई के बहाने मस्जिद के निर्माण में छेड़छाड़ की जा सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एएसआई से रिपोर्ट मांगी थी। जिस पर एएसआई ने कहा था कि मस्जिद की रंगाई-पुताई की अभी जरूरत नहीं है, साफ-सफाई कराई जा सकती है। लेकिन मस्जिद कमेटी ने बाहरी दीवार की कुछ रंगीन तस्वीरे भी पेश कीं जिससे पुताई की जरूरत का पता चलता है। इसके बाद आज कोर्ट ने मस्जिद कमेटी को जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई की अनुमति दे दी है। हाईकोर्ट ने एएसआई को एक हफ्ते के भीतर मस्जिद की रंगाई-पुताई कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि है रंगाई-पुताई केवल मस्जिद के बाहरी हिस्सों में होगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Mar 2025 16:24:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हाई कोर्ट के आदेश के अधीन होगा शराब की दुकानों का आवंटन, सात अप्रैल को होगी सुनवाई!</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong> प्रयागराज - </strong><strong>इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ </strong>ने लाटरी के जरिये शराब की दुकानों के आवंटन के मामले में आदेश पारित करते हुए कहा है कि आवंटन प्रक्रिया न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई सात अप्रैल को होगी।</div>
<div>  </div>
<div>यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय व न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने सीतापुर के रामचन्द्र व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया। याचियों ने लाटरी के जरिये शराब के दुकानों का नए सिरे से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149561/allotment-of-liquor-shops-will-be-held-under-the-high"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250307-wa0178.jpg" alt=""></a><br /><div><strong> प्रयागराज - </strong><strong>इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ </strong>ने लाटरी के जरिये शराब की दुकानों के आवंटन के मामले में आदेश पारित करते हुए कहा है कि आवंटन प्रक्रिया न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई सात अप्रैल को होगी।</div>
<div> </div>
<div>यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय व न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने सीतापुर के रामचन्द्र व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया। याचियों ने लाटरी के जरिये शराब के दुकानों का नए सिरे से आवंटन करने संबंधी छह फरवरी, 2025 के शासनादेश को चुनौती दी है।</div>
<div> </div>
<div>याचिकाओं का विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता एलपी मिश्रा ने दलील दी थी कि इसी विषय पर याचिकाएं इलाहाबाद हाई कोर्ट में एकल पीठ के समक्ष विचाराधीन हैं, लिहाजा वर्तमान याचिका भी एकल पीठ द्वारा ही सुनी जानी चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>हालांकि इस आपत्ति के संबंध में न्यायालय ने संबंधित अनुभाग से रिपोर्ट मंगाई, जिसके आधार पर याचिका को खंडपीठ द्वारा ही सुने जाने योग्य करार दिया। वहीं याचियों की ओर से दलील दी गई है कि लाटरी प्रक्रिया से आवंटन का शासनादेश संबंधित नियमावली के नियम पांच के विरुद्ध है।</div>
<div> </div>
<div>कहा गया है कि राज्य सरकार ने तीन मार्च को नियमावली में संशोधन कर दिया है, लेकिन इस संशोधन से छह फरवरी का शासनादेश औचित्यपूर्ण नहीं माना जा सकता। उल्लेखनीय है कि बुधवार को न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने इसी विषय पर दाखिल दर्जनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए उन्हें खारिज कर दिया था। एकल पीठ ने कहा कि शराब का व्यवसाय सांविधानिक अधिकार नहीं है।प्रदेश के सभी उप-निबंधन कार्यालय इस माह शाम छह बजे तक रजिस्ट्री का कार्य करेंगे। अब शाम चार बजे के बजाय पांच बजे तक का स्लाट बुक किया जा सकेगा। कार्यालयों को शाम छह बजे तक रजिस्ट्री का कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।</div>
<div> </div>
<div>महानिरीक्षक निबंधन अमित गुप्ता ने गुरुवार को इसके आदेश जारी कर दिए। स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि वर्षी 2024-25 के वित्तीय समापन और मार्च में होली व नवरात्र के कारण इस माह अधिक संख्या में अचल संपत्तियों का पंजीकरण कराया जाना संभावित है।</div>
<div> </div>
<div>इस माह त्योहारों के सार्वजनिक अवकाश होने से उपलब्ध कार्य दिवस कम होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। मार्च में अवकाश के दिन व रविवार को भी उप-निबंधक कार्यालय खुले रहेंगे। उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार आम जनता को शाम चार बजे तक रजिस्ट्री के लिए स्लाट उपलब्ध कराए जाते थे और शाम पांच बजे तक रजिस्ट्री का कार्य संपादित किया जाता था।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 13:05:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लिटिल फ्लावर स्कूल में बिना मान्यता कक्ष संचालन की सुनवाई कल होगी- हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा बिना मान्यता 1-8 तक कक्ष संचालन बंद करने के नोटिस से राहत की उम्मीद लगाए बैठा है स्कूल प्रशासन ने अपने बचाव में स्कूल सुप्रिमकोर्ट के अधिवक्ता जोश इब्राहिम को नामित किया है आरटीई एक्ट 2009 के क्रम में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश का उल्लंघन कर कक्ष संचालन का विरोध शासकीय अधिवक्ता व समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामा के अधिवक्ता कन्हैया लाल तिवारी करेंगे ।</div>
<div>  </div>
<div>बेसिक शिक्षा अधिकारी बस्ती के 7 फरवरी 2025 के नोटिस के क्रम में स्कूल के स्पष्टीकरण पत्र से पता चला कि उसके पास 1-8 तक के क्लास</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149335/little-flower-school-will-hear-without-recognition-room-operations-tomorrow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250303-wa0121.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा बिना मान्यता 1-8 तक कक्ष संचालन बंद करने के नोटिस से राहत की उम्मीद लगाए बैठा है स्कूल प्रशासन ने अपने बचाव में स्कूल सुप्रिमकोर्ट के अधिवक्ता जोश इब्राहिम को नामित किया है आरटीई एक्ट 2009 के क्रम में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश का उल्लंघन कर कक्ष संचालन का विरोध शासकीय अधिवक्ता व समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामा के अधिवक्ता कन्हैया लाल तिवारी करेंगे ।</div>
<div> </div>
<div>बेसिक शिक्षा अधिकारी बस्ती के 7 फरवरी 2025 के नोटिस के क्रम में स्कूल के स्पष्टीकरण पत्र से पता चला कि उसके पास 1-8 तक के क्लास संचालन हेतु मान्यता कभी था ही नहीं*यही नहीं 18 नवम्बर 2024 के बाद उसने मान्यता हेतु आवेदन तो किया किन्तु उनका प्राथमिक शिक्षा हेतु आवेदन निरस्त कर दिया गया है व जूनियर की मान्यता पर विचार ही नहीं किया गया है आवेदन निरस्त होने के बाद भी शिक्षा विभाग के पूर्व अधिकारियों की मिलीभगत से आरटीई एक्ट का उलंघन कर छात्र हितों से खिलवाड़ करता रहा तहसील परिसर से सटा ये स्कूल।</div>
<div> </div>
<div>श्री पाण्डेय ने कहा कि अब नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले लिटिल फ्लावर स्कूल व संरक्षण दे रहे अधिकारियों का कोई हथकंडा सफल नहीं होने दिया जाएगा वो खुद हाईकोर्ट इनके विरुद्ध कल अपने अधिवक्ता के जरिए वकालतनामा प्रस्तुत कर रहे हैं समाजसेवी ने अब तक लिटिल फ्लावर स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर चुके या कर रहे छात्र छात्राओं व उनके अभिभावकों से अपील किया है कि छात्र हित में आप सब एकजुट हों आर पार की कानूनी लड़ाई हम लड़ेंगे प्रति वर्ष हजारों रुपए प्रवेश शुल्क के नाम पर लेने वाला ये स्कूल अब तक क्षेत्र के नौनिहालों को प्राथमिक व जूनियर शिक्षा बिना मान्यता ही देता रहा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Mar 2025 14:58:55 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>1984 सिख विरोधी दंगे मामले में सज्जन कुमार दोषी करार।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>राउज एवेन्यू कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को दोषी ठहराया है।यह मामला1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार इलाके में हुई हिंसा से जुड़ा है, जहां भीड़ ने जसवंत सिंह और उनके बेटे को मार दिया था। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को दो लोगों की हत्या के लिए दोषी ठहराया। अब 18 फरवरी को सज्जन कुमार की सजा को लेकर बहस होगी।</div>
<div>  </div>
<div>यह मामला 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार इलाके में पिता-पुत्र की हत्या से जुड़ा है। यहां दो सिखों, सरदार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148595/sajjan-kumar-convicted-in-1984-anti-sikh-riots-case"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download2.jpg" alt=""></a><br /><div>राउज एवेन्यू कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को दोषी ठहराया है।यह मामला1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार इलाके में हुई हिंसा से जुड़ा है, जहां भीड़ ने जसवंत सिंह और उनके बेटे को मार दिया था। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को दो लोगों की हत्या के लिए दोषी ठहराया। अब 18 फरवरी को सज्जन कुमार की सजा को लेकर बहस होगी।</div>
<div> </div>
<div>यह मामला 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार इलाके में पिता-पुत्र की हत्या से जुड़ा है। यहां दो सिखों, सरदार जसवंत सिंह और सरदार तरुण दीप सिंह, की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में सज्जन कुमार पर भीड़ का नेतृत्व करने का आरोप लगा।आरोप है कि सज्जन कुमार के उकसावे के बाद भीड़ ने बाप-बेटे को उनके घर में जिंदा जला दिया गया। भीड़ ने घर में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी भी की थी। मारपीट कर घर के अन्य लोगों को भी घायल कर दिया। </div>
<div> </div>
<div>यह मामला जसवंत सिंह की पत्नी द्वारा दर्ज करवाई गई शिकायत पर आधारित है।इस संबंध में शुरू में पंजाबी बाग थाने में मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, बाद में एक विशेष जांच दल ने जांच का जिम्मा संभाल लिया था। 16 दिसंबर, 2021 को अदालत ने कुमार के विरुद्ध आरोप तय किए। उनके खिलाफ 'प्रथम दृष्टया मामला सही पाया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, घातक हथियार लिए भीड़ ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या का बदला लेने के लिए बड़े पैमाने पर लूटपाट, आगजनी और सिखों की संपत्ति को नष्ट किया था। पहले के एक अदालत के आदेश में कहा गया था कि कुमार न केवल हिंसा में शामिल थे, बल्कि भीड़ का नेतृत्व भी कर रहे थे।</div>
<div> </div>
<div>इससे पहले 1984 के सिख विरोधी दंगों से संबंधित हत्या मामले में 7 फरवरी को अपना फैसला स्थगित कर दिया था। वर्तमान में सज्जन कुमार तिहाड़ जेल में बंद हैं। इससे पहले कुमार वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अदालत में पेश हुए।अभी सज्जन कुमार दिल्ली कैंट में एक अन्य सिख विरोधी दंगा मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। फैसला सुनाने के लिए सज्जन कुमार को तिहाड़ जेल से कोर्ट में पेश किया गया। बता दें कि 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी जिसके बाद दंगे भड़क गए थे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Feb 2025 20:29:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लखनऊ हाईकोर्ट ने कांग्रेस सांसद की जमानत याचिका की खारिज, कोर्ट ने कहा सरेंडर करें</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>सीतापुर - </strong>दुष्कर्म मामले में कांग्रेस सांसद राकेश राठौर की अग्रिम जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है हाईकोर्ट ने कहा, सांसद दो सप्ताह में निचली अदालत में सरेंडर करें और कोर्ट जमानत पर तत्काल सुनवाई करे। यह याचिका कोर्ट नंबर 11 में न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की पीठ में सुनी गई मामले में राकेश राठौर के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि वादी ने यह मुकदमा 4 साल के बाद दर्ज कराया है और उनके मुवक्किल को झूठे मामले में फंसाया गया है। </div>
<div>  </div>
<div>वहीं, वादी पक्ष के वकील ने कहा कि राकेश राठौर एक दबंग नेता</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147971/lucknow-high-court-rejected-the-bail-plea-of-%E2%80%8B%E2%80%8Bthe-congress"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/img-20250129-wa0027.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>सीतापुर - </strong>दुष्कर्म मामले में कांग्रेस सांसद राकेश राठौर की अग्रिम जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है हाईकोर्ट ने कहा, सांसद दो सप्ताह में निचली अदालत में सरेंडर करें और कोर्ट जमानत पर तत्काल सुनवाई करे। यह याचिका कोर्ट नंबर 11 में न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की पीठ में सुनी गई मामले में राकेश राठौर के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि वादी ने यह मुकदमा 4 साल के बाद दर्ज कराया है और उनके मुवक्किल को झूठे मामले में फंसाया गया है। </div>
<div> </div>
<div>वहीं, वादी पक्ष के वकील ने कहा कि राकेश राठौर एक दबंग नेता हैं जिनके डर से वादी ने मुकदमा देर से दर्ज कराया कोर्ट ने राकेश राठौर को दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत में समर्पण करने का निर्देश दिया साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि उनकी जमानत याचिका का निस्तारण बिना किसी देरी के किया जाए। इससे पहले सीतापुर की कोर्ट ने भी राठौर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी राकेश राठौर पर सीतापुर की नगर कोतवाली में दुष्कर्म का मामला दर्ज है पीड़िता ने राकेश राठौर पर शादी का झांसा देकर और राजनीतिक करियर में मदद का लालच देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है।</div>
<div> </div>
<div>याचिकाकर्ता की ओर से वकील अतुल वर्मा ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही और पीड़िता की ओर से भारत सरकार की वरिष्ठ वकील डॉ. पूजा सिंह ने पैरवी की कांग्रेस सांसद राकेश राठौर पर रेप का केस दर्ज हुआ है। एक महिला नेता का आरोप है कि सांसद ने उससे शादी का वादा किया 4 साल तक शारीरिक शोषण करता रहा शहर कोतवाली पुलिस ने महिला की शिकायत पर सांसद के खिलाफ रेप और जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज किया है तैलिक महासभा से जुड़ी पीड़िता के मुताबिक, सांसद राकेश राठौर ने उसे राजनीति में करियर बनाने का भी वादा किया।</div>
<div> </div>
<div>महिला की ओर से 15 जनवरी को पुलिस को शिकायत पत्र दिया गया था महिला और सांसद की बातचीत का ऑडियो भी सामने आया है मामला 18 जनवरी का है जब एक महिला ने सांसद राठौर पर शादी का झांसा देकर और राजनीतिक करियर बनाने का वादा कर शारीरिक शोषण करने का गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। मामले में नया मोड़ तब आया जब मंगलवार को सांसद की पत्नी मीडिया के सामने आईं और अपने पति को निर्दोष बताते हुए।</div>
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<div>न्यायपालिका पर विश्वास जताया पुलिस ने मामले की जांच में तेजी दिखाते हुए बीते मंगलवार शाम को सांसद के आवास पर शोकॉज नोटिस जारी किया है। नोटिस के अनुसार, सांसद को अगले 48 घंटों के भीतर कोतवाली में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराना होगा कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक अनूप शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि यदि पहले नोटिस के बाद सांसद बयान दर्ज कराने नहीं आते हैं तो दूसरे नोटिस के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी!!</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jan 2025 19:16:56 +0530</pubDate>
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