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                <title>University - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय मंच पर फजीहत! तीन गलतियों के चलते Expo से बाहर हुई गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University)</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias University एक बार फिर विवादों में आ गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) Expo से यूनिवर्सिटी को बाहर किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने इस फैसले की वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि “झूठी और भ्रामक जानकारी को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं के लिए ऐसे मंच पर जगह नहीं हो सकती।”</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि यह Expo भारत की ओर से AI सेक्टर में अपनी क्षमताओं को दुनिया के सामने रखने का बड़ा मंच था। ऐसे में गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद इसे भारत की छवि के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170323/embarrassment-on-international-stage-galgotias-university-out-of-expo-due"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/galgotiya-university.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias University एक बार फिर विवादों में आ गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) Expo से यूनिवर्सिटी को बाहर किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने इस फैसले की वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि “झूठी और भ्रामक जानकारी को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं के लिए ऐसे मंच पर जगह नहीं हो सकती।”</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि यह Expo भारत की ओर से AI सेक्टर में अपनी क्षमताओं को दुनिया के सामने रखने का बड़ा मंच था। ऐसे में गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद इसे भारत की छवि के लिए भी नुकसानदायक माना गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है पूरा मामला?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के मुताबिक, गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने AI और मशीन लर्निंग से जुड़े अपने प्रोजेक्ट्स और उपलब्धियों को लेकर Expo में कुछ ऐसे दावे किए थे, जिनकी जांच में पुष्टि नहीं हो सकी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले की समीक्षा की और यूनिवर्सिटी की भागीदारी रद्द कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिकारियों का कहना है कि AI जैसे संवेदनशील और तकनीकी क्षेत्र में गलत या बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई जानकारी से अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की साख प्रभावित होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सरकार ने गिनाए तीन बड़े ब्लंडर्स</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार की प्राथमिक जांच में तीन बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं:</p>
<blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>1. उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना</strong><br />यूनिवर्सिटी पर आरोप है कि उसने अपने AI प्रोजेक्ट्स और रिसर्च को लेकर ऐसे दावे किए जो आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2. गलत डेटा और भ्रामक प्रस्तुति</strong><br />Expo में दिखाए जाने वाले कुछ मॉडल और आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठे। जांच में पाया गया कि कुछ जानकारी सत्यापित नहीं थी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>3. अंतरराष्ट्रीय मंच पर गलत प्रतिनिधित्व</strong><br />अधिकारियों के अनुसार, यूनिवर्सिटी ने खुद को कुछ प्रोजेक्ट्स का प्रमुख डेवलपर बताया, जबकि उनमें अन्य संस्थानों की भी भूमिका थी।</p>
</blockquote>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्यों अहम था यह Expo?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">यह AI Expo भारत के लिए खास माना जा रहा था क्योंकि देश AI टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और रिसर्च के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में किसी भी संस्थान द्वारा गलत जानकारी देने को गंभीरता से लिया गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>यूनिवर्सिटी की प्रतिक्रिया</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मामले पर अभी तक यूनिवर्सिटी की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी अपने पक्ष में दस्तावेज तैयार कर रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आगे क्या?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यूनिवर्सिटी के खिलाफ आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है। वहीं, AI Expo के आयोजकों ने साफ किया है कि भविष्य में केवल सत्यापित और प्रमाणित संस्थानों को ही भागीदारी दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तेजी से बढ़ रहे AI सेक्टर में संस्थानों के दावों की जांच कितनी जरूरी है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख मजबूत बनी रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 13:13:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में होगी 'भारतीय भाषा परिवार' विषय पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>  स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में आगामी 7 फरवरी को भारतीय भाषा समिति, दिल्ली तथा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें अनेक राष्ट्रीय स्तर के साहित्यकार और विद्वान सहभागिता करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय भाषा समिति की ओर से राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली (एनबीटी) से 'भारतीय भाषा परिवार' विषय पर प्रकाशित दो पुस्तकों के विशेष संदर्भ में इस संगोष्ठी में चर्चा होगी। ज्ञातव्य है कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति -२०२० की नीतियों के अनुरूप भारतीय भाषा समिति का गठन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168315/discussion-on-indian-language-family-will-be-held-in-siddharth"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1770300682597.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में आगामी 7 फरवरी को भारतीय भाषा समिति, दिल्ली तथा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें अनेक राष्ट्रीय स्तर के साहित्यकार और विद्वान सहभागिता करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय भाषा समिति की ओर से राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली (एनबीटी) से 'भारतीय भाषा परिवार' विषय पर प्रकाशित दो पुस्तकों के विशेष संदर्भ में इस संगोष्ठी में चर्चा होगी। ज्ञातव्य है कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति -२०२० की नीतियों के अनुरूप भारतीय भाषा समिति का गठन किया है, जिसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं उनके पारस्परिक समन्वयन की दिशा में काम करना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी प्रयोजन के अन्तर्गत समिति द्वारा देश-भर के मान्य भाषाविदों के सहयोग से पर्याप्त श्रम-शोध के उपरान्त दो पुस्तकों का प्रकाशन कराया गया है, जिनका उद्देश्य औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर भारतीय विचार-सरणियों के अनुसार ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में तार्किक ढंग से भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना है। इसी विचार को विस्तार देने के उद्देश्य से यह संगोष्ठी आयोजित की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करने हेतु दिल्ली से प्रोफेसर रमेश चंद्र शर्मा, गोरखपुर से प्रोफेसर विमलेश कुमार मिश्र एवं प्रोफेसर प्रत्यूष दुबे (दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर), प्रयागराज से प्रोफेसर अमरेंद्र त्रिपाठी तथा डॉ. विनम्र सेन सिंह (इलाहाबाद विश्वविद्यालय), वाराणसी से प्रोफेसर निरंजन सहाय (काशी विद्यापीठ) तथा डॉक्टर सत्य प्रकाश पाल (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) एव लखनऊ से डॉक्टर बलजीत कुमार श्रीवास्तव (बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय) सहित अनेक शिक्षक, शोधार्थी एवं अध्येता भाग लेंगे। यह जानकारी संगोष्ठी के संयोजक प्रोफेसर हरीश कुमार शर्मा ने दी है, </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 20:24:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>15 राज्यों में 40 यूनिवर्सिटी से सेटिंग और छाप डालीं 8000 फर्जी  डिग्रियां।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>उप्र एसटीएफ की आगरा यूनिट ने आगरा में फर्जी मार्कशीट और डिग्री ऑन डिमांड खेल का बड़ा खुलासा किया है. यह यूपी की अब तक की फर्जी मार्कशीट और डिग्री की सबसे बड़ी दुकान मानी जा रही है. गिरफ्तार मास्टरमाइंड धनेश मिश्रा से एसटीएफ और शाहगंज थाना पुलिस की पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. धनेश मिश्रा ने फर्जी मार्कशीट व डिग्री के गोरखधंधे का नेटवर्क 15 राज्यों में फैला रखा था. अब जांच टीम उसके एजेंटों की संख्या की सूची बना रही है।</div>
<div>  </div>
<div>एक मार्कशीट या डिग्री के लिए एजेंटों को मिश्रा पांच हजार रुपये तक का</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150193/8000-fake-degrees-in-15-states-set-up-settings-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(1)5.jpg" alt=""></a><br /><div>उप्र एसटीएफ की आगरा यूनिट ने आगरा में फर्जी मार्कशीट और डिग्री ऑन डिमांड खेल का बड़ा खुलासा किया है. यह यूपी की अब तक की फर्जी मार्कशीट और डिग्री की सबसे बड़ी दुकान मानी जा रही है. गिरफ्तार मास्टरमाइंड धनेश मिश्रा से एसटीएफ और शाहगंज थाना पुलिस की पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. धनेश मिश्रा ने फर्जी मार्कशीट व डिग्री के गोरखधंधे का नेटवर्क 15 राज्यों में फैला रखा था. अब जांच टीम उसके एजेंटों की संख्या की सूची बना रही है।</div>
<div> </div>
<div>एक मार्कशीट या डिग्री के लिए एजेंटों को मिश्रा पांच हजार रुपये तक का कमीशन देता था. अलग-अलग राज्यों की करीब 40 निजी यूनिवर्सिटी के बाबुओं और एजेंसियों से उनकी सांठगांठ थी. इनके जरिए ही ऑन डिमांड ही मार्कशीट और डिग्री सारा खेल चल रहा था. मार्कशीट या डिग्री कुरियर या ईमेल पर ही आ जाती थी. आगरा एसटीएफ और शाहगंज थाना पुलिस अब गिरफ्त में आए धनेश मिश्रा से पूछताछ करके यूनिवर्सिटी के बाबुओं, एजेंट, मार्कशीट और डिग्री लेने वालों की सूची बना रही है।</div>
<div> </div>
<div>एसटीएफ की आगरा यूनिट ने मूलत कासगंज निवासी धनेश मिश्रा को गिरफ्तार किया है. धनेश मिश्रा एलएलबी पास है. अभियुक्त धनेश मिश्रा अधिवक्ता बनना चाहता था मगर, उसने खुद का काम शुरू करने के लिए नोट पैड एजुकेशनल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई. इसके जरिए ओपन यूनिवर्सिटीज के लिए नामांकन कराने लगा. आगरा एसटीएफ यूनिट के प्रभारी निरीक्षक हुकुम सिंह ने बताया कि धीरे धीरे धनेश मिश्रा का लोगों से संपर्क बढता चला गया. उसने फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने का काम शुरू कर दिया।</div>
<div> </div>
<div>एसटीएफ के प्रभारी निरीक्षक हुकुम सिंह ने बताया कि अभियुक्त धनेश मिश्रा ने 12 हजार रुपये महीने पर अर्जुन नगर में तीन मंजिला मकान लिया. इसके भूतल पर स्थित दो कमरों में फर्जी मार्कशीट और डिग्री की दुकान संचालित होती थी. फर्जी मार्कशीट और डिग्री के कार्यालय में तीन से चार युवतियां पांच से छह हजार रुपये मासिक की नौकरी पर रखीं. यहां से सुभारती यूनिवर्सिटी, मंगलायतन यूनिवर्सिटी, सिक्किम ओपन बोर्ड और सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कराने की आड़ में फर्जी डिग्री और मार्कशीट का खेल चला रहा था. नौकरी पर रखी युवतियां ही छात्रों से बात करती थीं. प्रवेश लेने वालों को परीक्षा में भी सुविधा दिलाने का वादा करके अतिरिक्त रकम लेकर कार्यालय की युवतियाों से कॉपियां लिखवाता था. इसके बाद इन कॉपियों को संबंधित विश्वविद्यालय में भेजता था. ऐसी कॉपियां भी मिली हैं. युवतियों ने भी इस बारे में जानकारी दी है।</div>
<div> </div>
<div>40 से अधिक बाबुओं से सेंटिंग, 15 राज्यों में नेटवर्क: एसटीएफ के प्रभारी निरीक्षक हुकुम सिंह ने बताया कि अभियुक्त धनेश मिश्रा से पूछताछ और उसके कार्यालय से मिले दस्तावेज, डायरी, लेपटॉप और मोबाइल से उसके 15 राज्य में फैले नेटवर्क के सबूत मिले हैं. फर्जी मार्कशीट और डिग्री के नेटवर्क में एजेंट शामिल हैं. जिन्हें हर फर्जी मार्कशीट और डिग्री के लिए पांच हजार और इससे अधिक रुपये तक दिए जाने का अभियुक्त धनेश मिश्रा ने खुलासा किया है।</div>
<div> </div>
<div>अभियुक्त धनेश मिश्रा ने खुलासा किया है कि ऑन डिमांड डिग्री या मार्कशीट की ऑर्डर आने पर सबसे पहले दिल्ली, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में स्थित निजी विश्वविद्यालयों के 40 से अधिक बाबुओं से बात करके उन्हें फर्जी मार्कशीट और डिग्री की डिमांड देता था. निजी यूनिवर्सिटी के बाबुओं से सेटिंग करके ही फर्जी मार्कशीट और डिग्री भेजता था।</div>
<div> </div>
<div>गैंग की सूची बना रही एसटीएफ और पुलिस: फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले अभियुक्त धनेश मिश्रा से पूछताछ, उसके मोबाइल से मिले ईमेल, मोबाइल से मिले नंबर, दस्तावेज के आधार पर पूरे नेटवर्क की कुंडली बनाई जा रही है. एसटीएफ और शाहगंज पुलिस अब अभियुक्त की सेटिंग वाले निजी यूनिवर्सिटी के बाबुओं, यूनिवर्सिटी के कर्मचारी के साथ ही एजेंट की सूची बना रही है. इस सूची 300 लोग भी शामिल हैं. जिनकी फर्जी मार्कशीट और डिग्री से अलग अलग राज्यों में अलग अलग विभाग में नौकरी पाई है. इनके बारे में अभियुक्त धनेश मिश्रा ने भी जानकारी दी है।</div>
<div> </div>
<div>आगरा एसटीएफ यूनिट के प्रभारी निरीक्षक हुकुम सिंह ने बताया कि अभियुक्त धनेश मिश्रा के पास ऐसे युवा आते थे. जो किसी कारणवश पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते थे. जिन्हें अच्छी नौकरी पाने के लिए बिना परीक्षा दिए मार्कशीट चाहिए होती थी. उसने अपने नेटवर्क में शामिल ऐसे ही एजेंट के नाम बताए हैं. जो अक्सर करके प्राइवेट जॉब करने वाले लोगों के लिए फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने का काम लेकर आते थे. क्योंकि, प्राइवेट नौकरी में मार्कशीट या डिग्री का सत्यापन नहीं कराया जाता है. इसकी वजह से उसका फर्जीवाडा पकड में नहीं आ रहा था।</div>
<div> </div>
<div>आठ हजार से अधिक डिग्रियां बेचीः एसटीएफ की पूछताछ और मिले दस्तावेजों से एसटीएफ और शाहगंज थाना पुलिस का अनुमान है कि आरोपी अब तक हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, ग्रेजुएशन, एमबीए, एमसीए, डी फार्मा, बी डिप्लोमा समेत अन्य डिप्लोमा और डिग्री कोर्स की डिग्री बनाकर बेच चुका है. अब तक आठ हजार से अधिक फर्जी अंकपत्र, प्रमाणपत्र बेच चुका है. एसटीएफ निरीक्षक हुकुम सिंह ने बताया कि जनवरी 2024 में ताजगंज क्षेत्र से फर्जी मार्कशीट बेचने वाले गैंग को दबोचा था. उस गैंग में अभियुक्त धनेश मिश्रा भी शामिल था मगर, वो बच गया था. जब साथी जेल गए तो धनेश मिश्रा ने अपना अलग काम शुरू कर दिया था।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Mar 2025 13:08:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फर्जी डिग्रियां बांटते विश्वविद्यालय युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ जिम्मेदार कौन?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अलीगढ़। </strong>यूं तो शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की समाज में बहुत इज्जत होती है सम्मान मिलता है। क्योंकि शिक्षक समाज का एक ऐसा आईना है जो समाज को जिस दिशा में चाहे उस दिशा में मोड सकता है। लेकिन आजकल का उच्च शिक्षा के ठेकेदारों का चलन कुछ ऐसा हो गया है कि कहते हुए भी शर्म आती है। फर्जी लोग मिलते थे, फर्जी नौकरी वाले मिलते थे आदि आदि, आजकल देखा जा रहा है कि फर्जी डिग्री भी मिलने लगी है। उक्त बातें जुगेंद्र सिंह विद्यार्थी असिस्टेंट प्रोफेसर अलीगढ़ ने कहीं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आजकल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143590/who-is-responsible-for-universities-distributing-fake-degrees-and-playing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/28pli01.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अलीगढ़। </strong>यूं तो शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की समाज में बहुत इज्जत होती है सम्मान मिलता है। क्योंकि शिक्षक समाज का एक ऐसा आईना है जो समाज को जिस दिशा में चाहे उस दिशा में मोड सकता है। लेकिन आजकल का उच्च शिक्षा के ठेकेदारों का चलन कुछ ऐसा हो गया है कि कहते हुए भी शर्म आती है। फर्जी लोग मिलते थे, फर्जी नौकरी वाले मिलते थे आदि आदि, आजकल देखा जा रहा है कि फर्जी डिग्री भी मिलने लगी है। उक्त बातें जुगेंद्र सिंह विद्यार्थी असिस्टेंट प्रोफेसर अलीगढ़ ने कहीं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आजकल पूरे देश में एक ज्वलंत मुद्दा उठ रहा है कि आखिर फर्जी डिग्री वितरण में सरकार जिम्मेदार है, विश्वविद्यालय जिम्मेदार हैं या खुद छात्र जिम्मेदार है? लोगों ने घर गली मोहल्ले में फर्जी डिग्री बांटने के लिए अपनी-अपनी दुकानें सजा रखी है। उन दुकानों में डिग्री के हिसाब से अलग-अलग रेट भी फिक्स कर रखे हैं। हाल फिलहाल में कई विश्वविद्यालय की खबर अखबार में पढकर बड़ा अफसोस होता है कि जो शिक्षा समाज की तस्वीर और तकदीर बदलने का काम करती है। इस शिक्षा से जुड़े हुए कुछ लोग ऐसा कुकृत्य कर रहे हैं जो समाज को एक गलत दिशा में ले जा रहा है।</p>
<p>भारत में प्राचीन काल से ही गुरुओं को श्रेष्ठ समझा जाता है, और समझा भी क्यों न जाए गुरु एक दीपक के समान है जो स्वयं जलकर दूसरों के जीवन में उजाला करता है। अब जब गुरु ही अपने शिष्यों की जिंदगी से खिलवाड़ करें तब क्या हो सकता है? फर्जी डिग्रियों के खेल ने, जो मेहनतकश विद्यार्थी होते हैं, उनके भविष्य को चौपट कर दिया है। आजकल शिक्षा पैसों से खरीदी जाने लगी है। विशेषकर जो निजी विश्वविद्यालय हैं उनमें तो किसी भी छोटे-मोटे डिप्लोमा से लेकर पीएचडी और डीलिट तक की सारी डिग्रियां मोटे नोट की गड्डियों से खरीदी जा सकती है।</p>
<p>पहले विद्यार्थियों को कोई भी स्नातक या परास्नातक कोर्स करने के लिए नियमित विश्वविद्यालय में उपस्थित होना पड़ता था और कई बार परीक्षाओं के पड़ाव से गुजरने के बाद एक डिग्री हासिल होती थी तो उसकी वैल्यू भी थी लेकिन आजकल इस मुद्दे पर ना तो सरकार गंभीर है और ना ही शिक्षा विभाग से जुड़े हुए बड़े तबके के लोग। दरअसल हमारे सिस्टम में ही झोल है, पिछले कुछ दिनों में कई लोग फर्जी डिग्रियों के सहारे सरकारी नौकरी में भी चयनित हो गए।</p>
<p>लेकिन जो पकड़ा जाता है उसके ऊपर नाम मात्र की कार्यवाही हो जाती है बाकी यूं ही चल रहा है सब भगवान भरोसे। फर्जी डिग्रियों के खेल में सरकार को विचार करना चाहिए कि निजी विश्वविद्यालय की प्रशासन में कम से कम एक पदाधिकारी ऐसा हो जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रति जिम्मेदार हो और फर्जी डिग्री जारी करने वाले विश्वविद्यालय को नकेल कसने का काम सरकार करें।<br />आजकल हर कोई शॉर्टकट अपना रहा है, पैसे देकर डिग्री खरीदने के मामले आए दिन अखबारों की हेडलाइंस बनते हैं लेकिन बाद में क्या होता है यह कोई नहीं जानता। सरकार के साथ-साथ उच्च शिक्षा विभाग को भी इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और विशेषज्ञों के साथ मिलकर इसका समाधान निकालना चाहिए वरना शिक्षा विभाग का जो हाल हो रहा है उसे देश देख रहा है। आखिर कब तक विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करते रहेंगे हम इसका समाधान कब निकालेंगे</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jul 2024 16:36:10 +0530</pubDate>
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                <title>वेटरनरी कॉलेज के प्रोफेसर पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>मिल्कीपुर अयोध्या। </strong>नेहा सिंह आत्महत्या कांड में मृतका की मां की तहरीर पर प्रोफेसर पति, सासू और देवर के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न व गैर इरादतन हत्या का कुमारगंज थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है।</div>
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<div>  कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज के वेटरनरी कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर डॉ अनूप सिंह नियुक्ति हुई थी वह विश्वविद्यालय के मकान संख्या बी - 87 में अपनी पत्नी व 9 माह बेटे के साथ रह रहे थे। बीते शनिवार की देर रात उनकी पत्नी नेहा दुपट्टे के सहारे पंखे से लटक गई थी। जिससे उसकी मौत हो गई थी।</div>
<div><span style="color:rgb(51,51,51);font-family:arial, helvetica, sans-serif;">  मृतका की मां </span>ज्ञान्ति देवी निवासी धरमपुर</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142370/case-registered-against-professor-for-murder-with-ill-intentions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/img-20240616-wa00421.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मिल्कीपुर अयोध्या। </strong>नेहा सिंह आत्महत्या कांड में मृतका की मां की तहरीर पर प्रोफेसर पति, सासू और देवर के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न व गैर इरादतन हत्या का कुमारगंज थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है।</div>
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<div> कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज के वेटरनरी कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर डॉ अनूप सिंह नियुक्ति हुई थी वह विश्वविद्यालय के मकान संख्या बी - 87 में अपनी पत्नी व 9 माह बेटे के साथ रह रहे थे। बीते शनिवार की देर रात उनकी पत्नी नेहा दुपट्टे के सहारे पंखे से लटक गई थी। जिससे उसकी मौत हो गई थी।</div>
<div><span style="color:rgb(51,51,51);font-family:arial, helvetica, sans-serif;"> मृतका की मां </span>ज्ञान्ति देवी निवासी धरमपुर थाना अथमलगोला जिला पटना <span style="color:rgb(51,51,51);font-family:arial, helvetica, sans-serif;">ने पुलिस को दिए तहरीर में आरोप लगाया कि उसकी पुत्री नेहा 25 की शादी 2022 में डॉ</span> अनूप कुमार सिंह पुत्र राजेन्द्र प्रताप सिंह<span style="color:rgb(51,51,51);font-family:arial, helvetica, sans-serif;"> </span>निवासी कैली रोड वार्ड नं 02 शास्त्री नगर पंचायत जिला चन्दौली के साथ की थी। वर्तमान में पशुपालन महाविद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर थे। <span style="color:rgb(51,51,51);font-family:arial, helvetica, sans-serif;">शादी के बाद से ही दहेज के लिए बेटी को पति, सासू और देवर मानसिक शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया करते थे, जिस कारण बेटी की जान चली गई।</span></div>
<div>
<div>थाना प्रभारी निरीक्षक कुमारगंज ने बताया कि मृतका के पति डॉ अनूप सिंह पुत्र राजेन्द्र प्रताप सिंह, सासू जामवन्ती देवी पत्नी राजेन्द्र प्रताप सिंह और देवर अंशु प्रताप सिंह पुत्र राजेन्द्र प्रताप सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न एक गैर इरादतन हत्या सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। </div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Jun 2024 11:33:00 +0530</pubDate>
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