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                <title>UPSC - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>UPSC RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा में किया बड़ा बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[ यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा में बड़ा बदलाव किया, अब सर्विस में रहते हुए बार-बार सिविल सेवा परीक्षा देने का मौका बंद कर दिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168307/upsc-made-major-changes-in-civil-services-examination"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/file_00000000f9807209abdd529abb4c8b1d.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong></p>
<p>संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए अधिसूचना जारी करते हुए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब एक बार सिविल सेवा में चयनित उम्मीदवार सेवा में रहते हुए बार-बार सिविल सेवा परीक्षा (CSE) नहीं दे सकेंगे। इस फैसले को परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, अनुशासित और निष्पक्ष बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।</p>
<p>नए नियमों के अनुसार, जिन उम्मीदवारों का चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या भारतीय वन सेवा (IFS) में हो चुका है और वे नियुक्ति पा चुके हैं, वे सेवा में रहते हुए दोबारा सिविल सेवा परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे। यदि ऐसे अधिकारी फिर से परीक्षा देना चाहते हैं, तो उन्हें पहले अपनी वर्तमान सेवा से इस्तीफा देना अनिवार्य होगा।</p>
<p>यूपीएससी ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और अन्य ग्रुप-ए सेवाओं के अधिकारियों के लिए भी नियम स्पष्ट किए हैं। ऐसे अधिकारी सीमित शर्तों के साथ परीक्षा में शामिल हो सकते हैं, लेकिन उन्हें उसी सेवा के लिए दोबारा चयन का विकल्प नहीं मिलेगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सेवा में रहते हुए बार-बार परीक्षा देकर रैंक सुधारने की व्यवस्था अब समाप्त कर दी गई है।</p>
<p>हालांकि, आयोग ने चयनित उम्मीदवारों को एक बार रैंक सुधार का अवसर देने का प्रावधान किया है। इसके तहत जो उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा 2026 में चयनित होंगे, उन्हें 2027 में एक बार बिना इस्तीफा दिए परीक्षा देने की अनुमति मिल सकती है। यह अवसर केवल एक बार के लिए होगा और इसके लिए प्रशिक्षण में शामिल होने से पहले आयोग से अनुमति लेना आवश्यक होगा। इसके बाद यदि कोई उम्मीदवार पुनः परीक्षा देना चाहता है, तो उसे अपनी सेवा से इस्तीफा देना होगा।</p>
<p>यूपीएससी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा के बाद किसी सेवा में चयनित हो जाता है, तो उसे मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। वहीं, मुख्य परीक्षा या साक्षात्कार के बाद यदि किसी अन्य सेवा में चयन होता है, तो नई अधिसूचना के अनुसार उसकी पात्रता पर निर्णय लिया जाएगा।</p>
<p>आयोग का कहना है कि पुराने नियमों के तहत कई बार ऐसा देखा गया कि चयनित अधिकारी बेहतर रैंक या पसंदीदा सेवा पाने के लिए बार-बार परीक्षा देते रहे, जिससे नए अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित होते थे। इसी असमानता को दूर करने और प्रतियोगिता को संतुलित बनाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों के लिए अवसर अधिक समान होंगे। साथ ही, चयनित अधिकारियों को अब अपने करियर को लेकर स्पष्ट और समयबद्ध निर्णय लेना होगा। माना जा रहा है कि इस बदलाव से प्रशासनिक स्थिरता भी बढ़ेगी और परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी।</p>
<p>यूपीएससी का यह नया नियम सिविल सेवा परीक्षा 2026 से प्रभावी होगा और आने वाले वर्षों में सिविल सेवा भर्ती प्रक्रिया की दिशा और स्वरूप को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 19:59:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sachin Bajpai]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: चार बार असफलता के बाद भी नहीं हारीं तृप्ति कल्हंस, 5वें प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p>
<p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167981/ias-success-story-trupti-kalhans-did-not-give-up-even"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(22).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p>
<p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>
<h5>दिल्ली यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ UPSC का सफर</h5>
<p>तृप्ति कल्हंस ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से यूपीएससी की तैयारी के लिए समर्पित कर दिया।</p>
<p>हालांकि, उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह सफर आसान नहीं होगा और उन्हें कई बार कठिन दौर से गुजरना पड़ेगा।</p>
<p>UPSC की तैयारी के दौरान तृप्ति को लगातार चार बार असफलता का सामना करना पड़ा। कभी वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में नहीं निकल पाईं, तो कभी मुख्य परीक्षा (Mains) में अटक गईं। चार प्रयासों की नाकामी किसी भी उम्मीदवार को मानसिक रूप से तोड़ सकती है, लेकिन तृप्ति ने हर हार को सीख के रूप में लिया।</p>
<p>उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान दिया और अपने वैकल्पिक विषय को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया। तृप्ति का मानना है कि यूपीएससी की तैयारी में खुद पर भरोसा बनाए रखना सबसे अहम होता है।</p>
<h5>पांचवें प्रयास में हासिल की बड़ी कामयाबी</h5>
<p>लगातार मेहनत और आत्मविश्लेषण के बाद तृप्ति कल्हंस को आखिरकार सफलता मिली। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करते हुए 199वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की दिशा दिखाने वाला एक पड़ाव होती है।</p>
<p>उनकी सफलता की खबर मिलते ही परिवार और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। आज तृप्ति की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को छोड़ने से इनकार करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 21:31:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: बिना कोचिंग पहले प्रयास में बनीं IFS अफसर, पढ़ें 22 साल की मुस्कान जिंदल की सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: जिंदगी में अगर कुछ हासिल करने का जज्बा हो तो महंगी कोचिंग या बार-बार कोशिशों की जरूरत नहीं पड़ती। खुद पर भरोसा, मेहनत के प्रति ईमानदारी और मजबूत हौसला आपको सफलता तक पहुंचा सकता है। इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की रहने वाली मुस्कान जिंदल ने, जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IFS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।</p>
<h5>हिमाचल के सोलन जिले से ताल्लुक रखती हैं मुस्कान</h5>
<p>IFS अधिकारी मुस्कान जिंदल हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नगर परिषद बद्दी के हाउसिंग बोर्ड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167337/success-story-without-coaching-she-became-an-ifsc-officer-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ifs-muskan-jindal.jpg" alt=""></a><br /><p>Success Story: जिंदगी में अगर कुछ हासिल करने का जज्बा हो तो महंगी कोचिंग या बार-बार कोशिशों की जरूरत नहीं पड़ती। खुद पर भरोसा, मेहनत के प्रति ईमानदारी और मजबूत हौसला आपको सफलता तक पहुंचा सकता है। इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की रहने वाली मुस्कान जिंदल ने, जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IFS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।</p>
<h5>हिमाचल के सोलन जिले से ताल्लुक रखती हैं मुस्कान</h5>
<p>IFS अधिकारी मुस्कान जिंदल हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नगर परिषद बद्दी के हाउसिंग बोर्ड फेज-2 की रहने वाली हैं। उनके पिता एक बिजनेसमैन हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। परिवार में दो बहनें हैं। मुस्कान का बचपन से ही पढ़ाई में रुझान रहा है।</p>
<h5>स्कूल टॉपर से UPSC तक का सफर</h5>
<p>मुस्कान ने बद्दी के एक निजी स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की। 12वीं बोर्ड परीक्षा में उन्होंने 96.4 प्रतिशत अंक हासिल कर स्कूल में पहला स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ के एसडी कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की।</p>
<h5>घर पर रहकर की UPSC की तैयारी</h5>
<p>ग्रेजुएशन के साथ ही मुस्कान ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने किसी भी तरह की कोचिंग नहीं ली, बल्कि घर पर रहकर सेल्फ-स्टडी पर पूरा फोकस किया। मुस्कान रोजाना 4 से 5 घंटे नियमित पढ़ाई करती थीं। ग्रेजुएशन पूरा होने के बाद उम्र कम होने के कारण उन्होंने एक साल का ब्रेक लिया और फिर परीक्षा के लिए आवेदन किया।</p>
<h5>पहले ही प्रयास में मिली बड़ी सफलता</h5>
<p>साल 2019 में मुस्कान जिंदल ने अपने पहले ही प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने 87वीं रैंक हासिल की और भारतीय विदेश सेवा (IFS) में चयनित हो गईं। बिना कोचिंग, बिना किसी अतिरिक्त संसाधन के यह उपलब्धि उन्हें खास बनाती है।</p>
<h5>बचपन का सपना हुआ पूरा</h5>
<p>मुस्कान जिंदल का सिविल सर्विस में जाने का सपना बचपन से ही था। स्कूल के दिनों से ही उन्होंने अपने लक्ष्य को लेकर गंभीरता दिखाई। सही रणनीति, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने अपने सपने को साकार कर दिखाया।</p>
<h5>युवाओं के लिए मिसाल बनीं मुस्कान</h5>
<p>IFS मुस्कान जिंदल आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो संसाधनों की कमी या कोचिंग न मिलने को अपनी कमजोरी मानते हैं। उनकी सफलता साबित करती है कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jan 2026 22:40:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: चार बार असफलता के बाद भी नहीं हारीं तृप्ति कल्हंस, 5वें प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p>
<p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166884/ias-success-story-trupti-kalhans-did-not-give-up-even"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(22).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p>
<p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>
<h5>दिल्ली यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ UPSC का सफर</h5>
<p>तृप्ति कल्हंस ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से यूपीएससी की तैयारी के लिए समर्पित कर दिया।</p>
<p>हालांकि, उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह सफर आसान नहीं होगा और उन्हें कई बार कठिन दौर से गुजरना पड़ेगा।</p>
<p>UPSC की तैयारी के दौरान तृप्ति को लगातार चार बार असफलता का सामना करना पड़ा। कभी वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में नहीं निकल पाईं, तो कभी मुख्य परीक्षा (Mains) में अटक गईं। चार प्रयासों की नाकामी किसी भी उम्मीदवार को मानसिक रूप से तोड़ सकती है, लेकिन तृप्ति ने हर हार को सीख के रूप में लिया।</p>
<p>उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान दिया और अपने वैकल्पिक विषय को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया। तृप्ति का मानना है कि यूपीएससी की तैयारी में खुद पर भरोसा बनाए रखना सबसे अहम होता है।</p>
<h5>पांचवें प्रयास में हासिल की बड़ी कामयाबी</h5>
<p>लगातार मेहनत और आत्मविश्लेषण के बाद तृप्ति कल्हंस को आखिरकार सफलता मिली। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करते हुए 199वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की दिशा दिखाने वाला एक पड़ाव होती है।</p>
<p>उनकी सफलता की खबर मिलते ही परिवार और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। आज तृप्ति की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को छोड़ने से इनकार करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jan 2026 14:24:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: बिना कोचिंग पहले प्रयास में बनीं IFS अफसर, पढ़ें 22 साल की मुस्कान जिंदल की सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: जिंदगी में अगर कुछ हासिल करने का जज्बा हो तो महंगी कोचिंग या बार-बार कोशिशों की जरूरत नहीं पड़ती। खुद पर भरोसा, मेहनत के प्रति ईमानदारी और मजबूत हौसला आपको सफलता तक पहुंचा सकता है। इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की रहने वाली मुस्कान जिंदल ने, जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IFS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।</p>
<h5>हिमाचल के सोलन जिले से ताल्लुक रखती हैं मुस्कान</h5>
<p>IFS अधिकारी मुस्कान जिंदल हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नगर परिषद बद्दी के हाउसिंग बोर्ड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166232/success-story-without-coaching-she-became-an-ifsc-officer-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ifs-muskan-jindal.jpg" alt=""></a><br /><p>Success Story: जिंदगी में अगर कुछ हासिल करने का जज्बा हो तो महंगी कोचिंग या बार-बार कोशिशों की जरूरत नहीं पड़ती। खुद पर भरोसा, मेहनत के प्रति ईमानदारी और मजबूत हौसला आपको सफलता तक पहुंचा सकता है। इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की रहने वाली मुस्कान जिंदल ने, जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IFS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।</p>
<h5>हिमाचल के सोलन जिले से ताल्लुक रखती हैं मुस्कान</h5>
<p>IFS अधिकारी मुस्कान जिंदल हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नगर परिषद बद्दी के हाउसिंग बोर्ड फेज-2 की रहने वाली हैं। उनके पिता एक बिजनेसमैन हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। परिवार में दो बहनें हैं। मुस्कान का बचपन से ही पढ़ाई में रुझान रहा है।</p>
<h5>स्कूल टॉपर से UPSC तक का सफर</h5>
<p>मुस्कान ने बद्दी के एक निजी स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की। 12वीं बोर्ड परीक्षा में उन्होंने 96.4 प्रतिशत अंक हासिल कर स्कूल में पहला स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ के एसडी कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की।</p>
<h5>घर पर रहकर की UPSC की तैयारी</h5>
<p>ग्रेजुएशन के साथ ही मुस्कान ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने किसी भी तरह की कोचिंग नहीं ली, बल्कि घर पर रहकर सेल्फ-स्टडी पर पूरा फोकस किया। मुस्कान रोजाना 4 से 5 घंटे नियमित पढ़ाई करती थीं। ग्रेजुएशन पूरा होने के बाद उम्र कम होने के कारण उन्होंने एक साल का ब्रेक लिया और फिर परीक्षा के लिए आवेदन किया।</p>
<h5>पहले ही प्रयास में मिली बड़ी सफलता</h5>
<p>साल 2019 में मुस्कान जिंदल ने अपने पहले ही प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने 87वीं रैंक हासिल की और भारतीय विदेश सेवा (IFS) में चयनित हो गईं। बिना कोचिंग, बिना किसी अतिरिक्त संसाधन के यह उपलब्धि उन्हें खास बनाती है।</p>
<h5>बचपन का सपना हुआ पूरा</h5>
<p>मुस्कान जिंदल का सिविल सर्विस में जाने का सपना बचपन से ही था। स्कूल के दिनों से ही उन्होंने अपने लक्ष्य को लेकर गंभीरता दिखाई। सही रणनीति, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने अपने सपने को साकार कर दिखाया।</p>
<h5>युवाओं के लिए मिसाल बनीं मुस्कान</h5>
<p>IFS मुस्कान जिंदल आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो संसाधनों की कमी या कोचिंग न मिलने को अपनी कमजोरी मानते हैं। उनकी सफलता साबित करती है कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 11:09:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: चार बार असफलता के बाद भी नहीं हारीं तृप्ति कल्हंस, 5वें प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p><p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166083/ias-success-story-trupti-kalhans-did-not-give-up-even"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(22).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p><p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p><h5>दिल्ली यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ UPSC का सफर</h5><p>तृप्ति कल्हंस ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से यूपीएससी की तैयारी के लिए समर्पित कर दिया।</p><p>हालांकि, उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह सफर आसान नहीं होगा और उन्हें कई बार कठिन दौर से गुजरना पड़ेगा।</p><p>UPSC की तैयारी के दौरान तृप्ति को लगातार चार बार असफलता का सामना करना पड़ा। कभी वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में नहीं निकल पाईं, तो कभी मुख्य परीक्षा (Mains) में अटक गईं। चार प्रयासों की नाकामी किसी भी उम्मीदवार को मानसिक रूप से तोड़ सकती है, लेकिन तृप्ति ने हर हार को सीख के रूप में लिया।</p><p>उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान दिया और अपने वैकल्पिक विषय को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया। तृप्ति का मानना है कि यूपीएससी की तैयारी में खुद पर भरोसा बनाए रखना सबसे अहम होता है।</p><h5>पांचवें प्रयास में हासिल की बड़ी कामयाबी</h5><p>लगातार मेहनत और आत्मविश्लेषण के बाद तृप्ति कल्हंस को आखिरकार सफलता मिली। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करते हुए 199वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की दिशा दिखाने वाला एक पड़ाव होती है।</p><p>उनकी सफलता की खबर मिलते ही परिवार और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। आज तृप्ति की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को छोड़ने से इनकार करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 13:34:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: संघर्ष और मेहनत की मिसाल है IAS ममता यादव, दो बार पास की UPSC परीक्षा </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: हर किसी की जिंदगी में सपने होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो विपरीत हालातों से लड़कर अपने सपनों को साकार कर दिखाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है हरियाणा के छोटे से गांव बसई की रहने वाली ममता यादव की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयासों के बल पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (</span><span class="cf1">IAS) </span><span class="cf0">में जगह बनाई। उनकी सफलता आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो साधारण परिवार से आते हैं लेकिन बड़े सपने देखते हैं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">सीमित संसाधन, लेकिन सपने बड़े</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव का सफर आसान नहीं रहा। गांव</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164939/ias-success-story-ias-mamta-yadav-is-an-example-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-mamta-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: हर किसी की जिंदगी में सपने होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो विपरीत हालातों से लड़कर अपने सपनों को साकार कर दिखाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है हरियाणा के छोटे से गांव बसई की रहने वाली ममता यादव की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयासों के बल पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (</span><span class="cf1">IAS) </span><span class="cf0">में जगह बनाई। उनकी सफलता आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो साधारण परिवार से आते हैं लेकिन बड़े सपने देखते हैं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">सीमित संसाधन, लेकिन सपने बड़े</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव का सफर आसान नहीं रहा। गांव का माहौल, सीमित संसाधन और देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी</span><span class="cf2">—</span><span class="cf0">इन सभी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहीं ममता के मन में कुछ बड़ा करने की चाह थी। उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें आईएएस अधिकारी बनना है और इसी लक्ष्य को लेकर उन्होंने लगातार चार साल तक यूपीएससी की तैयारी की।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">दिल्ली से हुई पढ़ाई, यहीं पक्का हुआ </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने का सपना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता की शुरुआती शिक्षा दिल्ली के बलवंत राय मेहता स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दिनों में ही उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना पूरी तरह स्पष्ट हो गया था, जिसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।</span></p>
<p><span class="cf0">साल 2019 में ममता ने पहली बार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की। उस समय उनकी ऑल इंडिया रैंक 556 आई थी। यह एक बड़ी उपलब्धि जरूर थी, लेकिन इस रैंक पर उन्हें आईएएस सेवा नहीं मिल पाई। जहां कई उम्मीदवार इस मोड़ पर रुक जाते हैं, वहीं ममता ने इसे असफलता नहीं, बल्कि सीख माना और खुद को और बेहतर बनाने का फैसला किया।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">दूसरी कोशिश में मिली शानदार कामयाबी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">अगले साल ममता ने दोबारा यूपीएससी परीक्षा दी। इस बार उनका आत्मविश्वास कहीं ज्यादा मजबूत था और तैयारी पहले से कहीं अधिक सटीक। उन्होंने पूरे समर्पण के साथ पढ़ाई की और हर दिन खुद को बेहतर बनाने पर काम किया। नतीजा यह रहा कि उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 5 हासिल की। यह न सिर्फ उनकी निजी जीत थी, बल्कि पूरे गांव और परिवार के लिए गर्व का क्षण बन गया। ममता अपने गांव की पहली </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी बनीं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">कड़ी मेहनत और सही रणनीति को देती हैं सफलता का श्रेय</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव वर्तमान में </span><span class="cf1">AGMUT </span><span class="cf0">कैडर की </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी हैं। एक छोटे से गांव से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे कोई बाधा टिक नहीं सकती। ममता अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, सही रणनीति और अनुशासन को देती हैं।</span></p>
<p><span class="cf0">उन्होंने बताया कि यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्होंने कोचिंग के साथ-साथ सेल्फ स्टडी पर भी बराबर ध्यान दिया। वह रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं, जबकि परीक्षा के नजदीक यह समय 10 से 12 घंटे तक पहुंच जाता था। ममता ने </span><span class="cf1">NCERT </span><span class="cf0">की किताबों को अपनी तैयारी की नींव बनाया और इसके साथ जरूरी स्टैंडर्ड बुक्स व नोट्स का सहारा लिया।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">युवाओं के लिए प्रेरणा बनी ममता यादव</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव की कहानी यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो साधारण पृष्ठभूमि भी असाधारण सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। उनकी सफलता आज देशभर के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आईएएस बनने का सपना देखते हैं।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 12:02:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: बचपन से था IAS बनने का सपना, पहले प्रयास में UPSC एग्जाम किया क्रैक </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: फोकस और कड़ी मेहनत इंसान को उसकी मंज़िल तक जरूर पहुंचाती है। इस बात को सच कर दिखाया है </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">ऑफिसर पूजा गुप्ता ने। दिल्ली की रहने वाली पूजा गुप्ता ने अपने जीवन का सिर्फ एक ही लक्ष्य तय किया था</span><span class="cf2">—</span><span class="cf1"> IAS </span><span class="cf0">ऑफिसर बनना, और इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">बचपन से था </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने का सपना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">पूजा गुप्ता का सपना शुरू से ही सिविल सेवा में जाने का था। उन्होंने ठान लिया था कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, उन्हें </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनकर ही रुकना है। इसी मजबूत इरादे ने</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164808/ias-success-story-had-a-dream-of-becoming-an-ias"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-pooja-gupta.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: फोकस और कड़ी मेहनत इंसान को उसकी मंज़िल तक जरूर पहुंचाती है। इस बात को सच कर दिखाया है </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">ऑफिसर पूजा गुप्ता ने। दिल्ली की रहने वाली पूजा गुप्ता ने अपने जीवन का सिर्फ एक ही लक्ष्य तय किया था</span><span class="cf2">—</span><span class="cf1"> IAS </span><span class="cf0">ऑफिसर बनना, और इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">बचपन से था </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने का सपना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">पूजा गुप्ता का सपना शुरू से ही सिविल सेवा में जाने का था। उन्होंने ठान लिया था कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, उन्हें </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनकर ही रुकना है। इसी मजबूत इरादे ने उन्हें बाकी अभ्यर्थियों से अलग बनाया।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">मेडिकल की पढ़ाई के साथ की </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी</span></strong></p>
<p><span class="cf1">12</span><span class="cf0">वीं कक्षा पूरी करने के बाद पूजा ने मेडिकल की पढ़ाई शुरू की। लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी भी जारी रखी। मेडिकल जैसे कठिन कोर्स के साथ </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन पूजा ने हार नहीं मानी।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">UPSC 2018 </span><span class="cf0">में बनीं </span><span class="cf1">IPS </span><span class="cf0">अधिकारी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">लगातार मेहनत का नतीजा यह रहा कि पूजा गुप्ता ने </span><span class="cf1">UPSC CSE 2018 </span><span class="cf0">की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 147 हासिल की। इस रैंक के साथ उनका चयन </span><span class="cf1">IPS </span><span class="cf0">सेवा में हुआ। हालांकि, यहां भी पूजा का सपना पूरा नहीं हुआ था, क्योंकि उनका लक्ष्य </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनना था।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">IPS </span><span class="cf0">बनने के बाद भी नहीं छोड़ा </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">का सपना</span></strong></p>
<p><span class="cf1">IPS </span><span class="cf0">बनने के बाद भी पूजा गुप्ता संतुष्ट नहीं हुईं। उन्होंने दोबारा </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">परीक्षा देने का फैसला किया। नौकरी के साथ तैयारी करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">UPSC 2020 </span><span class="cf0">में हासिल की </span><span class="cf1">AIR 42, </span><span class="cf0">बनीं </span><span class="cf1">IAS</span></strong></p>
<p><span class="cf0">पूजा गुप्ता की मेहनत रंग लाई और </span><span class="cf1">UPSC CSE 2020 </span><span class="cf0">में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 42 हासिल की। इसी के साथ उनका </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने का सपना आखिरकार पूरा हो गया। उन्होंने साबित कर दिया कि सच्ची लगन हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/164808/ias-success-story-had-a-dream-of-becoming-an-ias</link>
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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 13:11:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: बचपन से था IAS बनने का सपना, पहले प्रयास में UPSC एग्जाम किया क्रैक </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: फोकस और कड़ी मेहनत इंसान को उसकी मंज़िल तक जरूर पहुंचाती है। इस बात को सच कर दिखाया है </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">ऑफिसर पूजा गुप्ता ने। दिल्ली की रहने वाली पूजा गुप्ता ने अपने जीवन का सिर्फ एक ही लक्ष्य तय किया था</span><span class="cf2">—</span><span class="cf1"> IAS </span><span class="cf0">ऑफिसर बनना, और इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">बचपन से था </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने का सपना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">पूजा गुप्ता का सपना शुरू से ही सिविल सेवा में जाने का था। उन्होंने ठान लिया था कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, उन्हें </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनकर ही रुकना है। इसी मजबूत इरादे ने</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164329/ias-success-story-had-a-dream-of-becoming-an-ias"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-pooja-gupta.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: फोकस और कड़ी मेहनत इंसान को उसकी मंज़िल तक जरूर पहुंचाती है। इस बात को सच कर दिखाया है </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">ऑफिसर पूजा गुप्ता ने। दिल्ली की रहने वाली पूजा गुप्ता ने अपने जीवन का सिर्फ एक ही लक्ष्य तय किया था</span><span class="cf2">—</span><span class="cf1"> IAS </span><span class="cf0">ऑफिसर बनना, और इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">बचपन से था </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने का सपना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">पूजा गुप्ता का सपना शुरू से ही सिविल सेवा में जाने का था। उन्होंने ठान लिया था कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, उन्हें </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनकर ही रुकना है। इसी मजबूत इरादे ने उन्हें बाकी अभ्यर्थियों से अलग बनाया।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">मेडिकल की पढ़ाई के साथ की </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी</span></strong></p>
<p><span class="cf1">12</span><span class="cf0">वीं कक्षा पूरी करने के बाद पूजा ने मेडिकल की पढ़ाई शुरू की। लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी भी जारी रखी। मेडिकल जैसे कठिन कोर्स के साथ </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन पूजा ने हार नहीं मानी।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">UPSC 2018 </span><span class="cf0">में बनीं </span><span class="cf1">IPS </span><span class="cf0">अधिकारी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">लगातार मेहनत का नतीजा यह रहा कि पूजा गुप्ता ने </span><span class="cf1">UPSC CSE 2018 </span><span class="cf0">की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 147 हासिल की। इस रैंक के साथ उनका चयन </span><span class="cf1">IPS </span><span class="cf0">सेवा में हुआ। हालांकि, यहां भी पूजा का सपना पूरा नहीं हुआ था, क्योंकि उनका लक्ष्य </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनना था।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">IPS </span><span class="cf0">बनने के बाद भी नहीं छोड़ा </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">का सपना</span></strong></p>
<p><span class="cf1">IPS </span><span class="cf0">बनने के बाद भी पूजा गुप्ता संतुष्ट नहीं हुईं। उन्होंने दोबारा </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">परीक्षा देने का फैसला किया। नौकरी के साथ तैयारी करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">UPSC 2020 </span><span class="cf0">में हासिल की </span><span class="cf1">AIR 42, </span><span class="cf0">बनीं </span><span class="cf1">IAS</span></strong></p>
<p><span class="cf0">पूजा गुप्ता की मेहनत रंग लाई और </span><span class="cf1">UPSC CSE 2020 </span><span class="cf0">में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 42 हासिल की। इसी के साथ उनका </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने का सपना आखिरकार पूरा हो गया। उन्होंने साबित कर दिया कि सच्ची लगन हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/164329/ias-success-story-had-a-dream-of-becoming-an-ias</link>
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                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 11:54:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: अनाथालय में बीते 13 साल, अब्दुल नासर बने IAS अफसर, पढ़ें सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान खुद पर भरोसा रखे और पूरी मेहनत व लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती। ऐसी ही मिसाल हैं आईएएस बी. अब्दुल नासर, जिन्होंने संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं होता।</p>
<p>केरल के कन्नूर जिले के रहने वाले बी. अब्दुल नासर की जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन रही। महज 5 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार पर जिम्मेदारियों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164005/ias-success-story-abdul-nassar-spent-13-years-in-orphanage"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-abdul-nasar.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान खुद पर भरोसा रखे और पूरी मेहनत व लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती। ऐसी ही मिसाल हैं आईएएस बी. अब्दुल नासर, जिन्होंने संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं होता।</p>
<p>केरल के कन्नूर जिले के रहने वाले बी. अब्दुल नासर की जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन रही। महज 5 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार पर जिम्मेदारियों का बोझ आ गया। हालात ऐसे बने कि अब्दुल को अपने भाई-बहनों के साथ करीब 13 साल तक अनाथालय में रहना पड़ा। उनकी मां घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थीं, लेकिन सीमित आमदनी में परिवार चलाना आसान नहीं था।</p>
<p>बचपन से ही अब्दुल नासर ने संघर्ष को अपना साथी बना लिया। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने होटलों में बर्तन धोने, घरों में अखबार बेचने, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने और यहां तक कि फोन ऑपरेटर के तौर पर भी काम किया। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को कभी बीच में नहीं छोड़ा।</p>
<p>कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने थालास्सेरी के सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन भी हासिल किया। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें केरल स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी मिली, जिससे उनके करियर की औपचारिक शुरुआत हुई।</p>
<p>सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होंने लगातार बेहतर काम किया और 2006 के बाद राज्य सिविल सेवा में डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुंचे। अपने उत्कृष्ट कार्यों के चलते 2015 में उन्हें केरल का बेस्ट डिप्टी कलेक्टर घोषित किया गया। इसी उपलब्धि के आधार पर वे 2017 में बिना UPSC परीक्षा दिए IAS बनने के योग्य बने।</p>
<p>इसके बाद 2019 में उन्हें कोल्लम जिले का डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर नियुक्त किया गया। आज बी. अब्दुल नासर न सिर्फ एक सफल आईएएस अधिकारी हैं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा भी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को सच करने का हौसला रखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/164005/ias-success-story-abdul-nassar-spent-13-years-in-orphanage</link>
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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 11:56:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: अनाथालय में बीते 13 साल, अब्दुल नासर बने IAS अफसर, पढ़ें सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान खुद पर भरोसा रखे और पूरी मेहनत व लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती। ऐसी ही मिसाल हैं आईएएस बी. अब्दुल नासर, जिन्होंने संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं होता।</p>
<p>IAS Success Story: केरल के कन्नूर जिले के रहने वाले बी. अब्दुल नासर की जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन रही। महज 5 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार पर जिम्मेदारियों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163577/ias-success-story-abdul-nassar-spent-13-years-in-orphanage"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-abdul-nasar.jpg" alt=""></a><br /><p>कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान खुद पर भरोसा रखे और पूरी मेहनत व लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती। ऐसी ही मिसाल हैं आईएएस बी. अब्दुल नासर, जिन्होंने संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं होता।</p>
<p>IAS Success Story: केरल के कन्नूर जिले के रहने वाले बी. अब्दुल नासर की जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन रही। महज 5 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार पर जिम्मेदारियों का बोझ आ गया। हालात ऐसे बने कि अब्दुल को अपने भाई-बहनों के साथ करीब 13 साल तक अनाथालय में रहना पड़ा। उनकी मां घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थीं, लेकिन सीमित आमदनी में परिवार चलाना आसान नहीं था।</p>
<p>बचपन से ही अब्दुल नासर ने संघर्ष को अपना साथी बना लिया। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने होटलों में बर्तन धोने, घरों में अखबार बेचने, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने और यहां तक कि फोन ऑपरेटर के तौर पर भी काम किया। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को कभी बीच में नहीं छोड़ा।</p>
<p>कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने थालास्सेरी के सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन भी हासिल किया। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें केरल स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी मिली, जिससे उनके करियर की औपचारिक शुरुआत हुई।</p>
<p>सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होंने लगातार बेहतर काम किया और 2006 के बाद राज्य सिविल सेवा में डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुंचे। अपने उत्कृष्ट कार्यों के चलते 2015 में उन्हें केरल का बेस्ट डिप्टी कलेक्टर घोषित किया गया। इसी उपलब्धि के आधार पर वे 2017 में बिना UPSC परीक्षा दिए IAS बनने के योग्य बने।</p>
<p>इसके बाद 2019 में उन्हें कोल्लम जिले का डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर नियुक्त किया गया। आज बी. अब्दुल नासर न सिर्फ एक सफल आईएएस अधिकारी हैं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा भी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को सच करने का हौसला रखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/163577/ias-success-story-abdul-nassar-spent-13-years-in-orphanage</link>
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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 11:48:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 12 घंटे की ड्यूटी के बाद UPSC की तैयारी, जानें अंजलि गर्ग के डॉक्टर से आईएएस बनने तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>IAS Success Story: </strong>यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसे पास करने के लिए उम्मीदवार सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं। कई लोग अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर भी इस परीक्षा की तैयारी में जुट जाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही एक प्रेरणादायक महिला की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ NEET जैसी कठिन परीक्षा पास की, बल्कि MBBS की पढ़ाई और मेडिकल इंटर्नशिप के साथ-साथ UPSC की तैयारी कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना भी साकार किया। यह कहानी है आईएएस अंजलि गर्ग की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-rank.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Rank" width="1200" height="900" /></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग की मेहनत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163463/ias-success-story-preparation-for-upsc-after-12-hours-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-anjali-garg.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>IAS Success Story: </strong>यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसे पास करने के लिए उम्मीदवार सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं। कई लोग अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर भी इस परीक्षा की तैयारी में जुट जाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही एक प्रेरणादायक महिला की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ NEET जैसी कठिन परीक्षा पास की, बल्कि MBBS की पढ़ाई और मेडिकल इंटर्नशिप के साथ-साथ UPSC की तैयारी कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना भी साकार किया। यह कहानी है आईएएस अंजलि गर्ग की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-rank.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Rank" width="1200" height="900"></img></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग की मेहनत और लगन किसी भी युवा के लिए प्रेरणा है। उन्होंने अस्पताल में 12 घंटे की ड्यूटी करने के बाद भी यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और आखिरकार सफलता हासिल की। हालांकि यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उनके मजबूत इरादों ने उन्हें मंजिल तक पहुंचाया।</p>
<p><strong>कौन हैं आईएएस अंजलि गर्ग</strong></p>
<p>अंजलि गर्ग का जन्म 14 सितंबर 1996 को चंडीगढ़ में हुआ था। बचपन से ही उनका सपना डॉक्टर बनने का था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई चंडीगढ़ से ही पूरी की और पढ़ाई में हमेशा उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 12वीं कक्षा में उन्होंने 96 प्रतिशत अंक हासिल किए।</p>
<p>शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड के बाद अंजलि ने NEET परीक्षा की तैयारी शुरू की और सफलता हासिल कर दिल्ली के प्रतिष्ठित VMMC (वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज) एवं सफदरजंग अस्पताल में MBBS में दाखिला लिया।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-success-story.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Success-Story" width="1200" height="675"></img></p>
<p><strong>MBBS के दौरान बदला नजरिया, शुरू हुई UPSC की तैयारी</strong></p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MBBS के तीसरे वर्ष में अंजलि ने जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को करीब से देखा। यहीं से उनके मन में समाज के लिए बड़े स्तर पर काम करने की इच्छा जागी और उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का फैसला किया।</p>
<p>UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने अपनी मेडिकल इंटर्नशिप भी जारी रखी। अस्पताल में 12 घंटे की नाइट ड्यूटी के बावजूद वे कोचिंग और सेल्फ स्टडी के लिए समय निकालती रहीं। पहले प्रयास में उन्हें असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा पूरी मेहनत से तैयारी की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/2958923-ias-dr-anjali-garg-6.jpg" alt="2958923-ias-dr-anjali-garg-6" width="1200" height="900"></img></p>
<p><strong>दूसरे प्रयास में मिली सफलता</strong></p>
<p>अंजलि गर्ग ने दूसरे प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की। उन्होंने UPSC CSE 2022 में 79वीं रैंक प्राप्त की और आईएएस अधिकारी बनीं। खास बात यह है कि वे अपने बैच की मेडिकल साइंस टॉपर भी रहीं।</p>
<p><strong>शौक और निजी जीवन</strong></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग न सिर्फ पढ़ाई में बल्कि कला के क्षेत्र में भी काफी प्रतिभाशाली हैं। वे सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं और उन्हें गाना गाने का शौक है। हाल ही में उनका एक गायन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसके अलावा, आईएएस अंजलि गर्ग और आईएएस द्विज गोयल ने शादी करने का फैसला भी लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 10:41:03 +0530</pubDate>
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