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                <title>swatantra prabhat - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>मंदिर परिसर में दानपात्र काटकर दानराशि चोरी, ग्रामीणों में आक्रोश</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सुखईपुर -अम्बेडकरनगर।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">  </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महरुआ थाना क्षेत्र के सुखईपुर गांव में स्थित मंदिर परिसर में अज्ञात चोरों ने लोहे के दानपात्र को काटकर उसमें रखी दानराशि चोरी कर ली। धार्मिक स्थल पर हुई चोरी की इस घटना से ग्रामीणों और मंदिर से जुड़े लोगों में भारी आक्रोश है। घटना के बाद शिव काली जागरण समिति ने महरुआ थाने में लिखित तहरीर देकर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और घटना का शीघ्र खुलासा किए जाने की मांग की है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">  </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिव काली जागरण समिति द्वारा सुखईपुर स्थित मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक गतिविधियों के लिए</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186151/theft-of-donations-by-cutting-donation-bins-in-the-temple"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas14.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सुखईपुर -अम्बेडकरनगर।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महरुआ थाना क्षेत्र के सुखईपुर गांव में स्थित मंदिर परिसर में अज्ञात चोरों ने लोहे के दानपात्र को काटकर उसमें रखी दानराशि चोरी कर ली। धार्मिक स्थल पर हुई चोरी की इस घटना से ग्रामीणों और मंदिर से जुड़े लोगों में भारी आक्रोश है। घटना के बाद शिव काली जागरण समिति ने महरुआ थाने में लिखित तहरीर देकर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और घटना का शीघ्र खुलासा किए जाने की मांग की है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिव काली जागरण समिति द्वारा सुखईपुर स्थित मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक गतिविधियों के लिए लोहे का दानपात्र स्थापित किया गया था। बताया गया है कि </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> की रात अज्ञात चोर मंदिर परिसर में पहुंचे और दानपात्र को काटकर उसमें रखी दानराशि लेकर फरार हो गए। चोरों ने जिस तरीके से दानपात्र को काटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे आशंका जताई जा रही है कि वारदात को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह हुई घटना की जानकारी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मंदिर परिसर में चोरी की घटना का पता </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त की सुबह करीब सात बजे ग्रामीणों को चला। दानपात्र को क्षतिग्रस्त हालत में देखकर लोगों में हड़कंप मच गया। तत्काल इसकी सूचना पुलिस सहायता नंबर </span>112<span lang="hi" xml:lang="hi"> पर दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस ने मंदिर परिसर के आसपास लगे </span>CCTV <span lang="hi" xml:lang="hi">कैमरों की रिकॉर्डिंग को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू की है। </span>CCTV <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटेज में संदिग्ध लोगों की गतिविधियां सामने आने की स्थिति में पुलिस को आरोपियों की पहचान करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मंदिर के आसपास मिले सिक्के</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच में अहम सुराग की उम्मीद</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घटना के बाद मंदिर परिसर के समीप एक घर के पास कुछ सिक्के भी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। समिति और ग्रामीणों का मानना है कि ये सिक्के चोरी की गई दानराशि से संबंधित हो सकते हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन सिक्कों का घटना से वास्तविक संबंध जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मौके से मिले सिक्कों और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ </span>CCTV <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटेज की जांच को घटना के खुलासे के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस आसपास के सभी उपलब्ध </span>CCTV <span lang="hi" xml:lang="hi">कैमरों की रिकॉर्डिंग को खंगाले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि संदिग्धों के आने-जाने के रास्ते और उनकी गतिविधियों का पता लगाया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दो से तीन लोगों के शामिल होने की आशंका</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घटना के तरीके और उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए प्रथम दृष्टया चोरी की वारदात में दो से तीन लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि आरोपियों की संख्या और उनकी पहचान की आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर परिसर में दानपात्र को काटकर चोरी किए जाने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र में पहले भी छोटी-बड़ी चोरी की घटनाएं होने की बात ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है। ऐसे में धार्मिक स्थल में हुई चोरी के बाद लोगों में अपने घरों और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक स्थल में चोरी से लोगों में नाराजगी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर परिसर लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। ऐसे स्थान पर दानपात्र काटकर दानराशि चोरी किए जाने से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। लोगों ने पुलिस से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की जल्द पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिव काली जागरण समिति ने महरुआ थाने में दी गई तहरीर में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ </span>FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्ज करने</span>, CCTV <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटेज की जांच करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौके से मिले सिक्कों एवं अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल करने तथा दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समिति ने इसके साथ ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग भी की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस जांच पर टिकी ग्रामीणों की नजर</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिलहाल घटना के बाद पुलिस द्वारा </span>CCTV <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि </span>CCTV <span lang="hi" xml:lang="hi">रिकॉर्डिंग और मौके से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस जल्द आरोपियों तक पहुंचेगी और चोरी की घटना का खुलासा करेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब देखना यह है कि पुलिस जांच में </span>CCTV <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटेज से क्या अहम सुराग सामने आते हैं और मंदिर परिसर में हुई इस चोरी की वारदात में शामिल आरोपियों तक पुलिस कितनी जल्दी पहुंच पाती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 21:40:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आजादी के 79 साल: और आम आदमी का सपना</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal">15<span lang="hi" xml:lang="hi">  अगस्त </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi">  केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं थी। वह भारत के इतिहास का वह क्षण था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब सदियों की गुलामी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बलिदान और अनगिनत सपनों के बाद देश ने स्वतंत्रता की सांस ली थी। आजादी के आंदोलन में शामिल लोगों ने केवल विदेशी शासन से मुक्ति का सपना नहीं देखा था। उनके सपने में ऐसा भारत था जहां नागरिक सम्मान के साथ जी सके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां भूख और गरीबी मजबूरी न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां शिक्षा हर बच्चे तक पहुंचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां न्याय पैसे और प्रभाव का मोहताज न हो और जहां लोकतंत्र में आम आदमी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186149/79-years-of-independence-and-the-dream-of-the-common"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas13.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal">15<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं थी। वह भारत के इतिहास का वह क्षण था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब सदियों की गुलामी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बलिदान और अनगिनत सपनों के बाद देश ने स्वतंत्रता की सांस ली थी। आजादी के आंदोलन में शामिल लोगों ने केवल विदेशी शासन से मुक्ति का सपना नहीं देखा था। उनके सपने में ऐसा भारत था जहां नागरिक सम्मान के साथ जी सके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां भूख और गरीबी मजबूरी न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां शिक्षा हर बच्चे तक पहुंचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां न्याय पैसे और प्रभाव का मोहताज न हो और जहां लोकतंत्र में आम आदमी की आवाज सबसे महत्वपूर्ण हो।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज हम स्वतंत्रता के </span>79<span lang="hi" xml:lang="hi">वें वर्ष में हैं। भारत ने इन दशकों में लंबी यात्रा तय की है। देश ने विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुनियादी ढांचे और लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत आज दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वैश्विक स्तर पर उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस उपलब्धि के बीच एक बुनियादी सवाल आज भी खड़ा है—क्या वह आम आदमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके नाम पर लोकतंत्र की पूरी व्यवस्था खड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तव में उतना स्वतंत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी पा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका सपना स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था</span>? 1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> में भारत को राजनीतिक स्वतंत्रता मिली। संविधान ने नागरिकों को समानता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता और न्याय के अधिकार दिए। हर वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार मिला। यह अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि थी। लेकिन राजनीतिक स्वतंत्रता के बाद सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता की चुनौती सामने आई। किसी गरीब परिवार का बच्चा अगर अच्छी शिक्षा नहीं पा सकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी युवा को अपनी योग्यता के बावजूद रोजगार के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी किसान को अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है या किसी गरीब व्यक्ति को इलाज के लिए अपनी जमीन और संपत्ति तक बेचनी पड़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सवाल उठता है कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ उसके जीवन में कितना उतर पाया है। आजादी का मतलब केवल यह नहीं कि देश पर विदेशी शासन न हो। वास्तविक आजादी का अर्थ यह भी है कि नागरिक भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अशिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी और अन्याय से मुक्त होकर अपना जीवन चुन सके। यह स्वीकार करना होगा कि भारत ने </span>79<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों में अभूतपूर्व विकास किया है। गांवों तक सड़कें पहुंची हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली और संचार का विस्तार हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल तकनीक ने आम नागरिक के जीवन को बदला है और करोड़ों लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विकास का दूसरा चेहरा भी है। एक तरफ आधुनिक शहर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊंची इमारतें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सप्रेसवे और डिजिटल अर्थव्यवस्था है तो दूसरी तरफ ऐसे परिवार भी हैं जिनके लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना आज भी चुनौती है। विकास का मूल्यांकन केवल बड़े प्रोजेक्टों से नहीं होना चाहिए। असली कसौटी यह होनी चाहिए कि देश का सबसे कमजोर नागरिक कितना बेहतर जीवन जी रहा है। अगर आर्थिक विकास बढ़ता है लेकिन अवसर कुछ वर्गों तक सीमित रह जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो विकास की गति के साथ सामाजिक असमानता भी बढ़ सकती है। इसलिए आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी चुनौती विकास को अधिक समावेशी बनाना है। भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है। युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत हो सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण रोजगार जरूरी है। आज लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों लगा देते हैं। कई नौकरियों के लिए लाखों आवेदन आते हैं जबकि पदों की संख्या सीमित होती है। दूसरी ओर निजी क्षेत्र में भी रोजगार के स्वरूप तेजी से बदल रहे हैं। तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विस्तार ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ पारंपरिक कामों के भविष्य को लेकर चिंता भी बढ़ी है। इसलिए केवल रोजगार की संख्या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि रोजगार की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है। ऐसा रोजगार चाहिए जिससे युवा सम्मानपूर्वक अपना भविष्य बना सके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवार चला सके और अपनी आकांक्षाओं को पूरा कर सके। स्वतंत्र भारत ने शिक्षा के क्षेत्र में लंबी दूरी तय की है। स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थानों का विस्तार हुआ है। लेकिन शिक्षा में गुणवत्ता और अवसर की समानता आज भी बड़ी चुनौती है। एक संपन्न परिवार का बच्चा महंगे स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोचिंग और डिजिटल संसाधनों का लाभ उठा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि गरीब परिवार का बच्चा कई बार मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करता है। आजादी का सपना तभी पूरा होगा जब किसी बच्चे का भविष्य उसके माता-पिता की आर्थिक स्थिति से तय न हो। शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं है। यह नागरिक को अपने अधिकार समझने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सवाल पूछने और सही-गलत में अंतर करने की क्षमता देती है। इसलिए शिक्षा में निवेश वास्तव में लोकतंत्र में निवेश है। भारत की अर्थव्यवस्था और समाज में किसान की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। कृषि में तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिंचाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार और सरकारी सहायता के विस्तार से किसानों के जीवन में कई बदलाव आए हैं। फिर भी खेती आज भी जोखिम से भरा व्यवसाय है। मौसम की अनिश्चितता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लागत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार मूल्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्ज और भंडारण जैसी समस्याएं किसान के सामने बनी रहती हैं। किसान की वास्तविक स्वतंत्रता तभी होगी जब उसे अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राकृतिक आपदा में प्रभावी सुरक्षा मिले और खेती आर्थिक रूप से टिकाऊ व्यवसाय बन सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसान को केवल चुनावी भाषणों में सम्मान देने के बजाय उसकी आय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और भविष्य पर गंभीरता से काम करना होगा। लोकतंत्र में नागरिक का सबसे बड़ा भरोसा न्याय व्यवस्था पर होता है। संविधान ने नागरिकों को अधिकार दिए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उन अधिकारों की रक्षा तभी संभव है जब न्याय समय पर मिले।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लंबित मुकदमे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगी कानूनी प्रक्रिया और वर्षों तक चलने वाली अदालती लड़ाई आम नागरिक के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। किसी निर्दोष व्यक्ति के लिए वर्षों तक मुकदमा झेलना भी एक प्रकार की पीड़ा है। किसी पीड़ित के लिए वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा करना भी न्याय व्यवस्था की परीक्षा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए न्याय केवल अदालत का फैसला नहीं है। न्याय का वास्तविक अर्थ है—समय पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निष्पक्ष और सुलभ न्याय। भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में लोकतंत्र का लगातार कायम रहना शामिल है। सत्ता परिवर्तन चुनावों के माध्यम से होता रहा है। जनता सरकारों को चुनती और बदलती रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लोकतंत्र की गुणवत्ता केवल चुनाव कराने से तय नहीं होती। लोकतंत्र में संवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असहमति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब राजनीतिक बहस जनता के वास्तविक मुद्दों से हटकर केवल आरोप-प्रत्यारोप में बदल जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब आम नागरिक के सवाल पीछे छूट जाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जनता को रोजगार चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर शिक्षा चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षित सड़कें चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसानों को बेहतर बाजार चाहिए और युवाओं को अवसर चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीति का केंद्र यदि इन सवालों से हट जाता है तो लोकतंत्र की आत्मा कमजोर होती है। किसी भी समाज की प्रगति का वास्तविक मूल्यांकन उसकी महिलाओं की स्थिति से किया जा सकता है। भारत में महिलाओं ने शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग और सेना सहित लगभग हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है। लेकिन सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समान अवसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक भेदभाव से जुड़े सवाल अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक महिला तभी वास्तव में स्वतंत्र है जब वह बिना भय के घर से बाहर निकल सके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी शिक्षा और करियर का फैसला स्वयं कर सके और समाज में उसे समान सम्मान मिले। इसलिए महिलाओं की स्वतंत्रता को केवल कानूनों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सामाजिक सोच में बदलाव भी उतना ही जरूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज का भारत डिजिटल भारत भी है। मोबाइल फोन और इंटरनेट ने सूचना तक पहुंच को आसान बनाया है। नागरिक सरकार की अनेक सेवाएं ऑनलाइन प्राप्त कर सकता है। डिजिटल भुगतान ने आर्थिक व्यवहार का तरीका बदल दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन डिजिटल युग ने नई चुनौतियां भी पैदा की हैं।साइबर अपराध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑनलाइन धोखाधड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी खबरें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निजता और डिजिटल साक्षरता जैसे सवाल लगातार महत्वपूर्ण हो रहे हैं। आज नागरिक को केवल राजनीतिक और सामाजिक रूप से ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल रूप से भी जागरूक होना पड़ेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">असली आजादी किसे कहेंगे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आखिर आजादी का अर्थ क्या है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या केवल विदेशी शासन से मुक्ति आजादी है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">निश्चित रूप से नहीं। आजादी का अर्थ है—भय से मुक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूख से मुक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अशिक्षा से मुक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्याय से मुक्ति और अवसरों की असमानता से मुक्ति। एक गरीब व्यक्ति यदि अपनी मेहनत से आगे बढ़ सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक युवा अपनी योग्यता के आधार पर रोजगार पा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक किसान अपनी फसल का उचित मूल्य प्राप्त कर सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक महिला सुरक्षित होकर अपने निर्णय ले सकती है और एक नागरिक बिना भय के सरकार से सवाल पूछ सकता है—तभी लोकतांत्रिक आजादी का अर्थ वास्तविक जीवन में दिखाई देगा। भारत ने </span>1947 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक लंबी यात्रा तय की है। इसलिए केवल कमियों की चर्चा करना भी उचित नहीं होगा। देश ने अनेक क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं। लेकिन उपलब्धियां मंजिल नहीं होतीं। वे अगली मंजिल की नींव होती हैं। आजादी की </span>79<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं वर्षगांठ हमें उत्सव के साथ आत्ममंथन का अवसर भी देती है। हमें यह पूछना चाहिए कि अगले कुछ वर्षों में भारत को कैसा बनाना है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 21:39:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या वास्तविक स्वतंत्रता पा ली है हमने</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal">15<span lang="hi" xml:lang="hi">  अगस्त </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi">  को भारत ने विदेशी शासन की बेड़ियां तोड़ी थीं। वह दिन केवल सत्ता हस्तांतरण का दिन नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए एक ऐसे भविष्य का सपना था जिसमें देश का शासन जनता की इच्छा से चलेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और हर व्यक्ति सम्मान के साथ जीवन जी सकेगा। आज स्वतंत्रता के </span>79<span lang="hi" xml:lang="hi">  वर्ष पूरे होने के अवसर पर तिरंगा पहले से अधिक ऊंचा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना चुका है और विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल व्यवस्था तथा आधारभूत ढांचे में देश ने</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186147/have-we-achieved-real-freedom"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas12.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal">15<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> को भारत ने विदेशी शासन की बेड़ियां तोड़ी थीं। वह दिन केवल सत्ता हस्तांतरण का दिन नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए एक ऐसे भविष्य का सपना था जिसमें देश का शासन जनता की इच्छा से चलेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और हर व्यक्ति सम्मान के साथ जीवन जी सकेगा। आज स्वतंत्रता के </span>79<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष पूरे होने के अवसर पर तिरंगा पहले से अधिक ऊंचा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना चुका है और विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल व्यवस्था तथा आधारभूत ढांचे में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। लेकिन इस उपलब्धि के बीच एक असहज सवाल खड़ा होता है—क्या हमने वास्तविक स्वतंत्रता भी हासिल कर ली है</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रश्न का उत्तर न तो केवल उत्सव में छिपा है और न ही केवल आलोचना में। स्वतंत्रता का मूल्यांकन भावनाओं से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस आम नागरिक की जिंदगी से होना चाहिए जिसके नाम पर लोकतंत्र और गणराज्य की पूरी व्यवस्था खड़ी है। भारत सरकार के राष्ट्रीय पोर्टल के अनुसार संविधान के चार प्रमुख लोकतांत्रिक मूल्य—न्याय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समानता और बंधुत्व—हमारे लोकतंत्र के आधार हैं।  इसलिए वास्तविक स्वतंत्रता का अर्थ केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि नागरिक को भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भेदभाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभाव और अन्याय से मुक्त वातावरण देना भी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशी शासन गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन क्या हर तरह की गुलामी गई</span>? 1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> में राजनीतिक स्वतंत्रता मिली। आज भारत अपने फैसले स्वयं करता है। हमारी संसद है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्वाचित सरकारें हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र न्यायपालिका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संविधान है और नागरिकों को मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। यह किसी भी दृष्टि से छोटी उपलब्धि नहीं है। लेकिन स्वतंत्रता की अगली सीढ़ी सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता है। जिस व्यक्ति के पास शिक्षा का अवसर नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके लिए स्वतंत्रता अधूरी है। जिस युवा के सामने योग्यता होने के बावजूद रोजगार का संकट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी स्वतंत्रता सीमित है। जिस किसान को अपनी मेहनत का उचित मूल्य पाने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके लिए स्वतंत्रता का अर्थ अलग है। जिस गरीब परिवार के लिए बीमारी पूरे परिवार को आर्थिक संकट में डाल सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके लिए स्वतंत्रता केवल संविधान की किताब में लिखी हुई अवधारणा बनकर रह सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए आज हमें यह पूछना होगा कि क्या देश की आर्थिक वृद्धि का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक उसी गति से पहुंच रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक विकास जरूरी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पर्याप्त नहीं। भारत ने पिछले दशकों में आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है। डिजिटल भुगतान से लेकर अंतरिक्ष कार्यक्रम तक देश ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। लेकिन विकास का असली पैमाना केवल जीडीपी या बड़े निर्माण कार्य नहीं हो सकते। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के अनुसार मानव विकास को केवल आर्थिक वृद्धि से नहीं मापा जाना चाहिए। स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा और सम्मानजनक जीवन स्तर भी विकास के महत्वपूर्ण आधार हैं। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> की मानव विकास रिपोर्ट में भारत का </span>HDI 2023<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>0.685<span lang="hi" xml:lang="hi"> रहा और भारत </span>193<span lang="hi" xml:lang="hi"> देशों में </span>130<span lang="hi" xml:lang="hi">वें स्थान पर था। यह प्रगति का संकेत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि मानव विकास की यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">यानी भारत आगे बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सवाल यह है कि क्या हर भारतीय उसी गति से आगे बढ़ रहा है</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा: स्वतंत्रता की पहली सीढ़ी किसी भी समाज की वास्तविक स्वतंत्रता उसकी शिक्षा व्यवस्था से पहचानी जा सकती है। शिक्षित नागरिक अपने अधिकारों को समझता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सवाल पूछता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्ता से जवाब मांगता है और अपने भविष्य के निर्णय स्वयं लेने की क्षमता विकसित करता है। भारत में शिक्षा का विस्तार हुआ है। स्कूल और विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ी है। डिजिटल शिक्षा ने नए अवसर खोले हैं। लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार से उसका संबंध और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच अभी भी गंभीर प्रश्न हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज बड़ी संख्या में युवा डिग्री लेकर निकलते हैं और फिर रोजगार की तलाश में वर्षों भटकते हैं। यह स्थिति हमें सोचने के लिए मजबूर करती है कि क्या केवल डिग्री हासिल कर लेना ही स्वतंत्रता है</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविक स्वतंत्रता तब होगी जब युवा अपनी योग्यता के अनुसार रोजगार और उद्यम का अवसर हासिल कर सके। भूख से मजबूर व्यक्ति और बेरोजगारी से परेशान युवा के लिए राजनीतिक अधिकारों का महत्व कम नहीं होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनकी प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं। एक युवा जब वर्षों की पढ़ाई के बाद भी स्थायी और सम्मानजनक रोजगार नहीं पा पाता तो उसके भीतर व्यवस्था के प्रति निराशा पैदा होती है। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की अनिश्चितता भी बड़ा प्रश्न है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए आजादी के </span>79<span lang="hi" xml:lang="hi">वें वर्ष में रोजगार को केवल आर्थिक विषय नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वतंत्रता और सम्मान का विषय मानना होगा। क्या हम भय से पूरी तरह मुक्त हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण अर्थ भय से मुक्ति भी है। एक लोकतांत्रिक समाज में नागरिक को अपनी बात कहने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सवाल पूछने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार होना चाहिए। असहमति लोकतंत्र की कमजोरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी ताकत है। लेकिन यह जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल हिंसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नफरत या झूठ फैलाने के लिए न हो। आज सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का मंच दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसी के साथ अफवाह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुष्प्रचार और डिजिटल भीड़ की समस्या भी सामने आई है। इसलिए वास्तविक स्वतंत्रता का मतलब बोलने की आजादी के साथ जिम्मेदारी की संस्कृति भी है। क्या जाति और भेदभाव से मुक्ति मिली</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत ने संविधान के माध्यम से समानता का महान आदर्श स्थापित किया। कानून की नजर में नागरिकों की समानता लोकतांत्रिक भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी सामाजिक जीवन में जाति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लिंग और आर्थिक स्थिति के आधार पर असमानता के प्रश्न पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। जब किसी व्यक्ति की पहचान उसकी प्रतिभा से पहले उसकी जाति या आर्थिक स्थिति से होने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब स्वतंत्रता का सपना अधूरा दिखाई देता है। स्वतंत्रता दिवस केवल यह याद करने का अवसर नहीं है कि अंग्रेज चले गए। यह याद करने का अवसर भी है कि हमारे समाज के भीतर मौजूद अन्याय की दीवारें कितनी टूटी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं की स्वतंत्रता भी राष्ट्र की स्वतंत्रता है</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी देश की प्रगति का सही आकलन उसकी महिलाओं की स्थिति से किया जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं ने शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग और प्रशासन सहित हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है। लेकिन सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समान अवसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक भागीदारी और सामाजिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल अभी भी महत्वपूर्ण हैं। यदि किसी महिला को अपने कपड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करियर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यात्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा या जीवन के निर्णयों के लिए समाज के अनावश्यक दबाव का सामना करना पड़े तो हमें यह स्वीकार करना होगा कि स्वतंत्रता अभी अधूरी है। जिस समाज में आधी आबादी पूरी स्वतंत्रता के साथ आगे नहीं बढ़ सकती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह पूर्ण स्वतंत्र समाज नहीं कहा जा सकता। न्याय में देरी भी स्वतंत्रता को कमजोर करती है- लोकतंत्र में नागरिक का अंतिम भरोसा न्याय व्यवस्था पर होता है। यदि किसी व्यक्ति को न्याय पाने में वर्षों लग जाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके लिए न्याय की प्रक्रिया स्वयं एक कठिन परीक्षा बन जाती है। न्याय केवल अदालत का फैसला नहीं है। न्याय का अर्थ समय पर न्याय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुलभ न्याय और ऐसा न्याय है जिस पर आम नागरिक भरोसा कर सके। इसलिए न्याय व्यवस्था को मजबूत करना केवल प्रशासनिक सुधार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वतंत्रता की रक्षा का हिस्सा है। राजनीति में नागरिक कहां है</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र में चुनाव जनता को सत्ता बदलने का अधिकार देते हैं। यह भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। लेकिन लोकतंत्र केवल चुनाव के दिन वोट डालने का नाम नहीं है। लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब नागरिक सरकार से सवाल पूछता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष अपनी भूमिका निभाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया सत्ता और विपक्ष दोनों से सवाल करता है और संस्थाएं अपने संवैधानिक दायित्वों का स्वतंत्र रूप से पालन करती हैं। राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष लोकतंत्र का हिस्सा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जब राजनीतिक बहस में रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिला सुरक्षा और न्याय जैसे मुद्दे पीछे छूट जाएं तो जनता को यह पूछना चाहिए कि राजनीति आखिर किसके लिए है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के समय सूचना का माध्यम सीमित था। आज एक मोबाइल फोन दुनिया की पूरी सूचना आपके हाथ में पहुंचा सकता है। यह अभूतपूर्व स्वतंत्रता है। लेकिन इसके साथ एक नई चुनौती भी है—डेटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निजता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी खबर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव की।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 21:38:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अतिक्रमण का जाल और रेंगती आम आदमी की जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><span style="font-size:small;">शहरों की पहचान केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों और चमकते बाजारों से नहीं होती। किसी शहर की असली तस्वीर उसकी सड़कों, फुटपाथों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई देती है। जब यही सार्वजनिक स्थान अतिक्रमण की गिरफ्त में आ जाते हैं, तो विकास की चमक के पीछे आम आदमी की जिंदगी धीरे-धीरे रेंगने लगती है। अतिक्रमण आज केवल सड़क किनारे दुकान लगाने या फुटपाथ पर सामान रखने तक सीमित समस्या नहीं रह गया है। सड़क की जमीन पर कब्जा, नालियों के ऊपर निर्माण, फुटपाथों पर स्थायी दुकानें, पार्किंग के नाम पर सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल और गलियों तक में फैलते</span></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186145/the-web-of-encroachment-and-the-creeping-life-of-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas11.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:small;">शहरों की पहचान केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों और चमकते बाजारों से नहीं होती। किसी शहर की असली तस्वीर उसकी सड़कों, फुटपाथों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई देती है। जब यही सार्वजनिक स्थान अतिक्रमण की गिरफ्त में आ जाते हैं, तो विकास की चमक के पीछे आम आदमी की जिंदगी धीरे-धीरे रेंगने लगती है। अतिक्रमण आज केवल सड़क किनारे दुकान लगाने या फुटपाथ पर सामान रखने तक सीमित समस्या नहीं रह गया है। सड़क की जमीन पर कब्जा, नालियों के ऊपर निर्माण, फुटपाथों पर स्थायी दुकानें, पार्किंग के नाम पर सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल और गलियों तक में फैलते अवैध निर्माण ने शहरों की व्यवस्था को प्रभावित किया है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा उस नागरिक को भुगतना पड़ता है, जिसके पास न ताकत है, न प्रभाव और न ही व्यवस्था से लगातार संघर्ष करने का समय।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">सड़कें छोटी, समस्याएं बड़ी</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण का सबसे सीधा असर यातायात पर पड़ता है। जिस सड़क का निर्माण वाहनों और पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए हुआ था, उसका एक बड़ा हिस्सा दुकानों, ठेलों, पार्किंग या निर्माण सामग्री की भेंट चढ़ जाता है। परिणामस्वरूप सड़क की उपयोगी चौड़ाई कम होती जाती है और यातायात का दबाव बढ़ता जाता है। कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में घंटों लगना अब कई शहरों में असामान्य नहीं है। वाहन ईंधन जलाते रहते हैं, लोग समय गंवाते हैं और प्रदूषण बढ़ता रहता है। इस पूरी व्यवस्था की कीमत अंततः आम आदमी ही चुकाता है।</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">फुटपाथ गायब, पैदल यात्री परेशान</span></div>
<div><span style="font-size:small;">फुटपाथ का उद्देश्य पैदल चलने वालों को सुरक्षित रास्ता देना है। लेकिन जब फुटपाथ पर दुकानें, वाहन, विज्ञापन बोर्ड और अस्थायी निर्माण कब्जा कर लेते हैं, तो पैदल यात्री सड़क पर चलने के लिए मजबूर हो जाता है। बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं और दिव्यांग नागरिक ऐसी स्थिति में सबसे अधिक परेशान होते हैं। सड़क पर चलते पैदल यात्री और तेज रफ्तार वाहनों का टकराव दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ाता है। सवाल यह है कि जिस नागरिक के लिए फुटपाथ बनाया गया, उसे आखिर उसी फुटपाथ से हटने के लिए क्यों मजबूर होना पड़े?</span></div>
<div><span style="font-size:small;">जलभराव की समस्या को बढ़ाता अतिक्रमण</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण का एक गंभीर और अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला परिणाम जलभराव है। नालियों और जलनिकासी के रास्तों पर निर्माण होने से बारिश का पानी अपना प्राकृतिक रास्ता नहीं पा पाता। कई जगह नालियां ढक दी जाती हैं या उनका आकार इतना छोटा कर दिया जाता है कि पानी का प्रवाह बाधित होने लगता है। बारिश होते ही सड़कें तालाब में बदल जाती हैं। घरों और दुकानों में पानी घुसता है, यातायात ठप होता है और नागरिकों को घंटों परेशानी उठानी पड़ती है। हर वर्ष जलभराव के बाद सफाई और नाला खुदाई की कवायद होती है, लेकिन यदि जलनिकासी के रास्तों पर कब्जे कायम रहें तो समस्या स्थायी रूप से कैसे समाप्त होगी?</span></div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण और भ्रष्टाचार का सवाल</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण केवल प्रशासनिक कमजोरी का परिणाम है या इसके पीछे किसी स्तर पर मिलीभगत भी है—यह सवाल बार-बार उठता है। किसी सड़क या सार्वजनिक जमीन पर एक दिन में स्थायी कब्जा नहीं हो जाता। पहले अस्थायी कब्जा होता है, फिर वह धीरे-धीरे स्थायी रूप लेता है और अंततः नागरिक उसे सामान्य स्थिति मानने लगते हैं।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">यदि नियम स्पष्ट हैं और सरकारी जमीन की निगरानी होती है तो वर्षों तक अवैध निर्माण कैसे खड़े रहते हैं? यदि कार्रवाई होती है तो कुछ समय बाद वही स्थान फिर अतिक्रमण से कैसे भर जाते हैं?</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">इन सवालों का जवाब केवल छोटे दुकानदार या ठेले वाले को दोषी ठहराकर नहीं दिया जा सकता। व्यवस्था को यह भी देखना होगा कि अतिक्रमण को पनपने का अवसर कौन देता है और कार्रवाई के बाद उसे दोबारा खड़ा होने से कौन रोकता है।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">रोजगार बनाम व्यवस्था—समस्या का कठिन पक्ष</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का दूसरा पहलू भी है। बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले और फुटपाथ पर कारोबार करने वाले लोग अपनी आजीविका के लिए सार्वजनिक स्थानों पर निर्भर हैं। अचानक सामान हटाने से उनकी रोजी-रोटी प्रभावित होती है। इसलिए समाधान केवल बुलडोजर या जबरन हटाने में नहीं है। प्रशासन को व्यवस्थित वेंडिंग जोन, वैकल्पिक बाजार और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था विकसित करनी होगी। गरीब की रोजी भी बचे और सार्वजनिक रास्ता भी—यह संतुलन ही वास्तविक प्रशासनिक सफलता होगी।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">कानून सबके लिए समान होना चाहिए</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई में सबसे बड़ी आवश्यकता समानता की है। यदि गरीब की छोटी दुकान हटाई जाए लेकिन प्रभावशाली व्यक्ति का बड़ा अवैध निर्माण वर्षों तक खड़ा रहे, तो नागरिकों का कानून और प्रशासन पर विश्वास कमजोर होता है।</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">कानून का अर्थ तभी है जब वह बिना भेदभाव लागू हो। सड़क पर कब्जा करने वाला चाहे छोटा दुकानदार हो या बड़ा कारोबारी, सार्वजनिक जमीन पर अवैध निर्माण करने वाला चाहे कोई भी हो—नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">शहर केवल वाहनों के लिए नहीं हैं</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">शहरी नियोजन में अक्सर सड़क चौड़ी करने, फ्लाईओवर बनाने और यातायात बढ़ाने पर जोर दिया जाता है, लेकिन पैदल चलने वाले नागरिक की जरूरतों को उतना महत्व नहीं मिलता। वास्तव में स्वस्थ शहर वह है जहां व्यक्ति सुरक्षित पैदल चल सके, सार्वजनिक परिवहन तक आसानी से पहुंच सके और बारिश के दिनों में जलभराव से न जूझे।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण हटाना केवल सड़क खाली कराने का अभियान नहीं होना चाहिए। यह शहर को नागरिकों के लिए वापस हासिल करने की प्रक्रिया होनी चाहिए।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">आम आदमी की जिंदगी कब तेज चलेगी?</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">आज आम नागरिक का बड़ा हिस्सा अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अनावश्यक समय यातायात, जाम, पार्किंग और जलभराव में गंवा देता है। जिस दूरी को कुछ मिनटों में पूरा होना चाहिए, वह घंटों में पूरी होती है। यही वह स्थिति है जिसे कहा जा सकता है—शहर बढ़ रहे हैं, लेकिन आम आदमी की जिंदगी रेंग रही है।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण की समस्या का स्थायी समाधान राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक ईमानदारी और बेहतर शहरी नियोजन से ही संभव है। केवल अभियान चलाकर तस्वीर नहीं बदलेगी। अतिक्रमण हटाने के बाद उस स्थान का नियमित निरीक्षण, डिजिटल रिकॉर्ड, स्पष्ट पार्किंग नीति, व्यवस्थित वेंडिंग जोन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी होगी।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">सड़कें जनता की हैं, फुटपाथ जनता के हैं, नालियां जनता के लिए हैं और सार्वजनिक जमीन भी जनता की संपत्ति है। जब इन पर कब्जा होता है तो नुकसान केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का होता है।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">जरूरत इस बात की है कि शहरों को अतिक्रमण मुक्त करने की मुहिम को केवल दिखावटी कार्रवाई न बनाया जाए। प्रशासन को गरीब की आजीविका और नागरिकों के अधिकार—दोनों के बीच संतुलन कायम करना होगा। तभी शहरों की सड़कें खुलेंगी, जलभराव घटेगा, यातायात सुधरेगा और सबसे महत्वपूर्ण—आम आदमी की जिंदगी रेंगने के बजाय आगे बढ़ सकेगी।</span></div>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186145/the-web-of-encroachment-and-the-creeping-life-of-the</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 21:36:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सड़क निर्माण की मांग को लेकर किसानों का धरना चौथे दिन भी जारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div class="yj6qo">
<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>
<div>  </div>
<div>नगराम क्षेत्र की जर्जर और कच्ची सड़कों के निर्माण की मांग को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के तत्वावधान में कुबहरा सामुदायिक मिलन केंद्र पर चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को चौथे दिन भी जारी रहा। धरने में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे सैकड़ों किसान, मजदूर और महिलाएं शामिल हुए। किसानों ने साफ कहा कि सड़कों का निर्माण शुरू होने तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।</div>
<div>  </div>
<div>शनिवार को पीडब्ल्यूडी के सर्वेयर सर्वेश मिश्रा दोबारा धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कमलापुर-विचिलखा माइनर से कुबहरा तक जाने वाले कच्चे मार्ग की लंबाई की माप की। इसके बाद उन्होंने किसानों</div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186136/farmers-protest-continues-for-the-fourth-day-demanding-road-construction"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260822-wa0070.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div class="yj6qo">
<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>
<div> </div>
<div>नगराम क्षेत्र की जर्जर और कच्ची सड़कों के निर्माण की मांग को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के तत्वावधान में कुबहरा सामुदायिक मिलन केंद्र पर चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को चौथे दिन भी जारी रहा। धरने में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे सैकड़ों किसान, मजदूर और महिलाएं शामिल हुए। किसानों ने साफ कहा कि सड़कों का निर्माण शुरू होने तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।</div>
<div> </div>
<div>शनिवार को पीडब्ल्यूडी के सर्वेयर सर्वेश मिश्रा दोबारा धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कमलापुर-विचिलखा माइनर से कुबहरा तक जाने वाले कच्चे मार्ग की लंबाई की माप की। इसके बाद उन्होंने किसानों को बताया कि विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर क्षेत्र की तीनों प्रस्तावित सड़कों की माप की जा रही है और इसकी रिपोर्ट शनिवार शाम तक अधिकारियों को उपलब्ध कराई जानी है।</div>
<div> </div>
<div>सर्वेयर ने बताया कि माप की रिपोर्ट के बाद वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी। वन विभाग की एनओसी मिलते ही तीनों सड़कों के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि विभागीय कार्रवाई की जानकारी मिलने के बावजूद किसानों ने धरना समाप्त करने से इनकार कर दिया।</div>
<div> </div>
<div>किसानों का कहना है कि सड़कों के निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। जर्जर और कच्चे मार्गों के कारण ग्रामीणों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अब आश्वासन नहीं, बल्कि मौके पर निर्माण कार्य शुरू होना चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के मंडल महामंत्री लखनऊ हरिपाल सिंह ने कहा कि किसानों की मांग पूरी होने तक संगठन आंदोलन से पीछे नहीं हटेगा। सड़क की माप कर रिपोर्ट तैयार किए जाने की कार्रवाई सकारात्मक है, लेकिन किसानों को अब निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार है।</div>
<div> </div>
<div>धरने में ब्लॉक अध्यक्ष दिनेश कुमार, राजेश कुमार, रामपाल राजपूत, राम कुमार प्रधान पति, केशव राम लोधी, पृथ्वीराज, ब्रजपाल यादव, राम-लखन, पूर्व प्रधान राजू समेत सैकड़ों किसान, मजदूर और महिलाएं मौजूद रहे। किसानों ने दोहराया कि सड़क निर्माण शुरू होने तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 21:33:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजा ऐश्वर्यराज ने जताया आभार,बस्ती आगमन पर हुआ था ऐतिहासिक स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले मे राष्ट्रीय लोकदल का प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने पर 18 अगस्त को बस्ती प्रथम आगमन पर राजा ऐश्वर्यराज सिंह के स्वागत मे पहुंचे पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं तथा सम्मानित आम जनता के प्रति मंडल अध्यक्ष राधेश्याम चौधरी ने आभार व्यक्त किया है। उन्होने प्रेस को जारी विज्ञप्ति मे कहा कि राजा ऐश्वर्यराज सिंह के स्वागत मे जिस तरह समर्थकों की भीड़ देखी गई, इससे साफ है कि बस्ती की जनता नेतृत्व परिवर्तन चाहती</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">स्वागत के दौरान समर्थकों का उत्साह देखने लायक था। बस्ती जनपद की सीमा मे प्रवेश करते ही घघौवा से लेकर राजभवन तक अनेक स्थानों पर</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186134/king-aishwaryaraj-expressed-gratitude-historic-welcome-was-given-on-arrival"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260822-wa0077.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले मे राष्ट्रीय लोकदल का प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने पर 18 अगस्त को बस्ती प्रथम आगमन पर राजा ऐश्वर्यराज सिंह के स्वागत मे पहुंचे पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं तथा सम्मानित आम जनता के प्रति मंडल अध्यक्ष राधेश्याम चौधरी ने आभार व्यक्त किया है। उन्होने प्रेस को जारी विज्ञप्ति मे कहा कि राजा ऐश्वर्यराज सिंह के स्वागत मे जिस तरह समर्थकों की भीड़ देखी गई, इससे साफ है कि बस्ती की जनता नेतृत्व परिवर्तन चाहती</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वागत के दौरान समर्थकों का उत्साह देखने लायक था। बस्ती जनपद की सीमा मे प्रवेश करते ही घघौवा से लेकर राजभवन तक अनेक स्थानों पर रालोद प्रदेश अध्यक्ष का फूल मालाओं से स्वागत हुआ। राजा ऐश्वर्यराज सिंह ने भी जनता से मिले अपार स्नेह और समर्थन के लिये हार्दिक आभार जताया है। उन्होने कहा वर्षों से बस्ती सदर विधानसभा के विकास की रफ्तार थम सी गई है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव मे जनता ने सही निर्णय लिया तो प्रदेश के अन्य जिलों की भांति बस्ती जनपद भी विकास की मुख्य धारा मे शामिल होगा।समय और कैलेंडर</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 21:10:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गंगापुर में मिट्टी खनन को लेकर उठे सवाल, कार्रवाई की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के ग्राम पंचायत गंगापुर में कथित रूप से मिट्टी का खनन किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि संबंधित क्षेत्र में मिट्टी खनन की अनुमति नहीं है, तो इसके बावजूद खनन कैसे जारी है? मामले को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से कार्रवाई की मांग उठ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि पत्रकार द्वारा खनन अधिकारी प्रशांत यादव से बातचीत कर मौके पर हो रहे मिट्टी खनन को बंद कराने तथा नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही गई। आरोप है कि सूचना दिए जाने के बावजूद अभी तक मामले</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186132/questions-raised-regarding-soil-mining-in-gangapur-demand-for-action"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260822-wa0076.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के ग्राम पंचायत गंगापुर में कथित रूप से मिट्टी का खनन किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि संबंधित क्षेत्र में मिट्टी खनन की अनुमति नहीं है, तो इसके बावजूद खनन कैसे जारी है? मामले को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से कार्रवाई की मांग उठ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि पत्रकार द्वारा खनन अधिकारी प्रशांत यादव से बातचीत कर मौके पर हो रहे मिट्टी खनन को बंद कराने तथा नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही गई। आरोप है कि सूचना दिए जाने के बावजूद अभी तक मामले में अपेक्षित कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में उपखनिजों के खनन और निस्तारण के लिए खनन विभाग की निर्धारित प्रक्रिया एवं ऑनलाइन व्यवस्था है। बस्ती जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी खनन विभाग से संबंधित जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट और खनन पट्टों से जुड़ी सूचनाएं उपलब्ध हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि गंगापुर में चल रहा मिट्टी खनन वैध अनुमति अथवा निर्धारित प्रक्रिया के तहत हो रहा है या नहीं? यदि खनन बिना अनुमति हो रहा है तो जिम्मेदार विभाग द्वारा मौके की जांच कर खनन तत्काल बंद कराने, मशीनरी/वाहनों की जांच तथा नियमानुसार कानूनी कार्रवाई किए जाने की जरूरत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने जिलाधिकारी बस्ती और खनन विभाग के उच्चाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना यह है कि शिकायत और उठाए गए सवालों पर प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186132/questions-raised-regarding-soil-mining-in-gangapur-demand-for-action</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 21:09:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुबौलिया में सनसनीखेज वारदात: प्रेमी-प्रेमिका ने मिलकर प्रेमिका के पिता की हत्या की</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के दुबौलिया थाना क्षेत्र के बभरौली गांव में शुक्रवार रात एक सनसनीखेज वारदात सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। गांव के पास नहर किनारे करीब 50 वर्षीय कृष्णा प्रसाद का शव मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक के गले और कान के पीछे धारदार हथियार से वार किए जाने के निशान पाए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कृष्णा प्रसाद ने कथित तौर पर अपनी नाबालिग बेटी को उसके प्रेमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। इसके बाद दोनों के बीच विवाद हो गया। आरोप है</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186129/sensational-incident-in-duboulia-boyfriend-and-girlfriend-together-killed-girlfriends"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260822-wa0059.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के दुबौलिया थाना क्षेत्र के बभरौली गांव में शुक्रवार रात एक सनसनीखेज वारदात सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। गांव के पास नहर किनारे करीब 50 वर्षीय कृष्णा प्रसाद का शव मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक के गले और कान के पीछे धारदार हथियार से वार किए जाने के निशान पाए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कृष्णा प्रसाद ने कथित तौर पर अपनी नाबालिग बेटी को उसके प्रेमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। इसके बाद दोनों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद के दौरान प्रेमी ने बांस में बंधे हंसिए से कृष्णा प्रसाद पर कई वार कर दिए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद शव को नहर के पास छोड़ दिए जाने की बात सामने आई है। सूचना मिलते ही दुबौलिया पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस ने मामले की जांच के दौरान प्रेमी-प्रेमिका समेत कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस हत्या के पीछे की पूरी परिस्थितियों और घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रेम प्रसंग का विरोध करने पर पिता की हत्या, बेटी और प्रेमी गिरफ्तार</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले में प्रेम प्रसंग का विरोध करने पर एक पिता की हत्या किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दुबौलिया थाना क्षेत्र के बभरौली गांव के पास नहर किनारे करीब 50 वर्षीय कृष्णा प्रसाद का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। मृतक के गले और कान के पीछे धारदार हथियार से चोट के निशान पाए गए हैं। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान मृतक की बेटी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है।पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, कृष्णा प्रसाद अपनी बेटी के प्रेम संबंध का विरोध कर रहे थे। आरोप है कि शुक्रवार को बेटी और उसके प्रेमी ने मिलकर कृष्णा प्रसाद को रास्ते से हटाने की साजिश रची। बताया जा रहा है कि पशुओं के लिए चारा काटने के दौरान नहर के पास दोनों ने कृष्णा प्रसाद पर हमला कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आरोपियों ने कथित तौर पर बांस में बंधे हंसिए से उन पर वार किया और बाद में गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी।घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। शनिवार सुबह नहर के पास शव मिलने की जानकारी ग्रामीणों ने पुलिस को दी। सूचना मिलते ही दुबौलिया पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस की जांच में बेटी और उसके प्रेमी की भूमिका सामने आने के बाद दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों की गिरफ्तारी की गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या की साजिश कब और कैसे रची गई तथा वारदात में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।</div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। वहीं गांव में भी इस वारदात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले में पुलिस अधीक्षक डॉ.यशवीर सिंह ने कहा कि प्रेम प्रसंग में बाधा बन रहे पिता को प्रेमी प्रेमिका द्वारा हंसी से मारकर और बॉडी को गांव के बाहर फेंक दिया गया | जिसमें सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है |</div>
<div style="text-align:justify;">3</div>
<div style="text-align:justify;">वारदात के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 21:08:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फव्वारा तिराहे पर फुटपाथ तक सजी प्लास्टिक की दुकानें, जाम से परेशान राहगीर; प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बस्ती | </strong>बस्ती शहर के मालवीय रोड स्थित फवारा तिराहा इन दिनों अतिक्रमण और यातायात अव्यवस्था का उदाहरण बनता नजर आ रहा है। तिराहे पर वर्षों से अस्थायी तौर पर लग रही प्लास्टिक के सामानों की दुकानें अब फुटपाथ तक फैल गई हैं। शाम होते ही दुकानों पर खरीदारों की भीड़ और सड़क से गुजरने वाले वाहनों के कारण यहां अक्सर यातायात का दबाव बढ़ जाता है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को जाम की स्थिति का सामना करना पड़ता है।</div>
<div>  </div>
<div>मौके की स्थिति को दर्शाता वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सड़क के किनारे बड़े हिस्से में प्लास्टिक के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186126/plastic-shops-decorated-till-the-footpath-at-the-fountain-intersection"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260822-wa0078.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बस्ती | </strong>बस्ती शहर के मालवीय रोड स्थित फवारा तिराहा इन दिनों अतिक्रमण और यातायात अव्यवस्था का उदाहरण बनता नजर आ रहा है। तिराहे पर वर्षों से अस्थायी तौर पर लग रही प्लास्टिक के सामानों की दुकानें अब फुटपाथ तक फैल गई हैं। शाम होते ही दुकानों पर खरीदारों की भीड़ और सड़क से गुजरने वाले वाहनों के कारण यहां अक्सर यातायात का दबाव बढ़ जाता है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को जाम की स्थिति का सामना करना पड़ता है।</div>
<div> </div>
<div>मौके की स्थिति को दर्शाता वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सड़क के किनारे बड़े हिस्से में प्लास्टिक के सामानों की दुकानें लगी दिखाई दे रही हैं। दूसरी ओर, उसी सड़क से लगातार मोटरसाइकिल, ई-रिक्शा, कार और अन्य वाहन गुजरते नजर आ रहे हैं। दुकानें और ग्राहकों की आवाजाही सड़क के किनारे यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डालती दिखाई देती है।</div>
<div> </div>
<div><strong> यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल…..</strong></div>
<div> </div>
<div>सबसे बड़ा सवाल यह है कि फव्वरा तिराहे पर यह स्थिति वर्षों से बनी हुई बताई जा रही है, इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की नजर इस ओर क्यों नहीं जाती? खास बात यह है कि इन अस्थायी दुकानों के ठीक सामने बस्ती विकास प्राधिकरण का कार्यालय भी स्थित है। इसके बावजूद सड़क और फुटपाथ पर अतिक्रमण की स्थिति बनी रहना जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।</div>
<div> </div>
<div>फुटपाथ पर खड़ी मोटरसाइकिलों का चालान करने और यातायात नियमों का पालन कराने में सक्रिय रहने वाली पुलिस की नजर सड़क किनारे लंबे समय से लगी इन अस्थायी दुकानों पर भी पड़नी चाहिए। लोगों का सवाल है कि यदि फुटपाथ और सड़क के किनारे अतिक्रमण यातायात में बाधा बन रहा है तो उसके खिलाफ भी नियमित कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?</div>
<div> </div>
<div>शाम के समय इस मार्ग पर वाहनों और राहगीरों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में सड़क किनारे दुकानें और ग्राहकों की भीड़ यातायात व्यवस्था को और प्रभावित कर सकती है। यदि समय रहते अतिक्रमण को व्यवस्थित नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यहां जाम की समस्या और गंभीर हो सकती क्यों आँख बंद कर बैठा है बस्ती विकास प्राधिकरण</div>
<div> </div>
<div>बस्ती विकास प्राधिकरण और यातायात पुलिस से मामले का संज्ञान लेते हुए फवारा तिराहे पर अतिक्रमण और यातायात व्यवस्था की जांच कराने तथा नियमानुसार कार्रवाई करते है। अब देखना यह है कि वीडियो सामने आने और लगातार बन रही जाम की स्थिति के बाद जिम्मेदार विभाग इस ओर कब तक ध्यान देते हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186126/plastic-shops-decorated-till-the-footpath-at-the-fountain-intersection</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 21:05:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर : स्टेशन पहुंचने से पहले टूटा संपर्क, मोबाइल फोन बंद, मां तीन बच्चों के साथ गायब</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div>  </div>
<div><strong>बिस्कोहर( सिद्धार्थनगर) ।</strong></div>
<div>  </div>
<div>त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के अहरौली पड़री गांव की  एक महिला तीन बच्चों समेत मुंबई से घर लौटते समय संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।</div>
<div>  </div>
<div>गांव निवासी सुजीत कुमार गौतम के अनुसार, उनकी चाची पूनम (36) अपनी बेटी आरोही (16), दिव्यांशी (2) और बेटे राजन (4) के साथ 19 अगस्त की सुबह करीब 5:30 बजे कुर्ला, मुंबई से ट्रेन से गोंडा के लिए रवाना हुई थीं।</div>
<div>  </div>
<div>20 अगस्त की सुबह करीब 8:27 बजे पूनम ने मुंबई में रह रहे पति तुलसीराम से फोन पर बातचीत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186123/contact-lost-before-reaching-siddharthnagar-station-mobile-phone-switched-off"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1787409989741.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div> </div>
<div><strong>बिस्कोहर( सिद्धार्थनगर) ।</strong></div>
<div> </div>
<div>त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के अहरौली पड़री गांव की  एक महिला तीन बच्चों समेत मुंबई से घर लौटते समय संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।</div>
<div> </div>
<div>गांव निवासी सुजीत कुमार गौतम के अनुसार, उनकी चाची पूनम (36) अपनी बेटी आरोही (16), दिव्यांशी (2) और बेटे राजन (4) के साथ 19 अगस्त की सुबह करीब 5:30 बजे कुर्ला, मुंबई से ट्रेन से गोंडा के लिए रवाना हुई थीं।</div>
<div> </div>
<div>20 अगस्त की सुबह करीब 8:27 बजे पूनम ने मुंबई में रह रहे पति तुलसीराम से फोन पर बातचीत की थी। उस समय उन्होंने गोंडा के आसपास होने की जानकारी देते हुए जल्द घर पहुंचने की बात कही थी। इसके बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया। घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने रिश्तेदारों और संभावित स्थानों पर तलाश की, लेकिन उनका पता नहीं चला। परिजन किसी अनहोनी की आशंका से परेशान हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186123/contact-lost-before-reaching-siddharthnagar-station-mobile-phone-switched-off</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 21:03:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नालियों पर ढक्कन लगाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बांसी (सिद्धार्थनगर)। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अकबरनगर वार्ड की सभासद शमा आरा ने थाना समाधान दिवस के साथ ही नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी को शिकायती पत्र देकर डा. आब्दी चौराहा से रामबाबू की दुकान तक बनी नाली पर ढक्कन लगाए जाने की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सभासद ने बताया कि उक्त मार्ग पर कई स्थानों पर नाली खुली हुई है। आगामी 26 अगस्त को जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का जुलूस इसी मार्ग से निकलना है, जिसमें हजारों लोग शामिल होंगे। जुलूस में बड़ी संख्या में झांकियां और वाहन भी शामिल रहते हैं। ऐसे में खुली नालियों के कारण दुर्घटना की आशंका बनी</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186120/demand-to-put-lid-on-drains"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1787411760219.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बांसी (सिद्धार्थनगर)। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अकबरनगर वार्ड की सभासद शमा आरा ने थाना समाधान दिवस के साथ ही नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी को शिकायती पत्र देकर डा. आब्दी चौराहा से रामबाबू की दुकान तक बनी नाली पर ढक्कन लगाए जाने की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सभासद ने बताया कि उक्त मार्ग पर कई स्थानों पर नाली खुली हुई है। आगामी 26 अगस्त को जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का जुलूस इसी मार्ग से निकलना है, जिसमें हजारों लोग शामिल होंगे। जुलूस में बड़ी संख्या में झांकियां और वाहन भी शामिल रहते हैं। ऐसे में खुली नालियों के कारण दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने मांग की कि जुलूस निकलने से पहले मार्ग पर जहां भी नाली खुली है, वहां ढक्कन लगवाए जाएं, ताकि जुलूस के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष चमन आरा राईनी ने बताया कि नालियों पर ढक्कन लगाने के लिए संबंधित सफाई प्रभारी को निर्देश दे दिया गया है। जल्द ही आवश्यक स्थानों पर ढक्कन रखवा दिए जाएंगे।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186120/demand-to-put-lid-on-drains</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 21:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
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                <title>​पुलिस जवानों के लिए नवनिर्मित भोजनालय का हुआ लोकार्पण</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिले के उसका बाजार थाना परिसर में  पुलिस जवानों के लिए बने नवनिर्मित भोजनालय का शनिवार को  डीएम शिवशरणप्पा जीएन और एसएसपी डॉ. अभिषेक महाजन ने संयुक्त रूप से  फीता काटकर उद्घाटन किया और परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस नई सुविधा से पुलिसकर्मियों को उच्च गुणवत्तायुक्त भोजन और बेहतर सहूलियतें मिल सकेंगी। पूर्व में जो रसोई घर था काफी जर्जर हो चुका था। बरसात में छत टपकती थी और लोगो मे दुर्घटना का भय भी बना रहता था। प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार तिवारी के प्रयास और देखरेख में इस नवीन रसोई घर का निर्माण</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186117/newly-constructed-restaurant-for-police-personnel-inaugurated"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1787412159063.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले के उसका बाजार थाना परिसर में  पुलिस जवानों के लिए बने नवनिर्मित भोजनालय का शनिवार को  डीएम शिवशरणप्पा जीएन और एसएसपी डॉ. अभिषेक महाजन ने संयुक्त रूप से  फीता काटकर उद्घाटन किया और परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस नई सुविधा से पुलिसकर्मियों को उच्च गुणवत्तायुक्त भोजन और बेहतर सहूलियतें मिल सकेंगी। पूर्व में जो रसोई घर था काफी जर्जर हो चुका था। बरसात में छत टपकती थी और लोगो मे दुर्घटना का भय भी बना रहता था। प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार तिवारी के प्रयास और देखरेख में इस नवीन रसोई घर का निर्माण हुआ है।इस अवसर पर उसका बाजार नगर पंचायत के अध्यक्ष प्रतिनिधि हेमंत कुमार जायसवाल ,​अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार , क्षेत्राधिकारी विश्वजीत सौरयान, प्रधान मनोज सहानी, समाजसेवी सोमनाथ मिश्र, सच्चिदानंद चौबे, राकेश आर्य, संतोष अग्रहरी, अश्वनी मिश्र, अमन आदि रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 20:59:57 +0530</pubDate>
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