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                <title>swatantra prabhat international news - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>swatantra prabhat international news RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच एकजुट हुए 22 देश</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>पश्चिम एशिया संकट के बीच दुनिया के 22 देशों ने मिलकर ईरान से अपील की है कि वह अपने हमले तुरंत बंद करे और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दे। इन देशों में यूएई, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी,  जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया समेत कई बड़े देश शामिल हैं। इन सभी ने एक संयुक्त बयान जारी करके ईरान की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। इन देशों का कहना है कि ईरान ने हाल ही में बिना हथियार वाले व्यापारिक जहाजों पर हमले किए, तेल और गैस से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य को</p>
<p style="text-align:justify;">एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173881/22-countries-united-amid-west-asia-crisis"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/48.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>पश्चिम एशिया संकट के बीच दुनिया के 22 देशों ने मिलकर ईरान से अपील की है कि वह अपने हमले तुरंत बंद करे और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दे। इन देशों में यूएई, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया समेत कई बड़े देश शामिल हैं। इन सभी ने एक संयुक्त बयान जारी करके ईरान की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। इन देशों का कहना है कि ईरान ने हाल ही में बिना हथियार वाले व्यापारिक जहाजों पर हमले किए, तेल और गैस से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">एक संयुक्त बयान में देशों ने कहा कि समुद्र में जहाजों की आवाजाही की आजादी अंतरराष्ट्रीय कानून का अहम हिस्सा है। ईरान की इन हरकतों का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा, खासकर गरीब और कमजोर देशों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान होगा। जिन 22 देशों ने यह पत्र लिखा है- उसमें संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, लातविया, स्लोवेनिया, एस्टोनिया, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, चेकिया, रोमानिया, बहरीन, लिथुआनिया और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का व्यापार होता है। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए थे, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई थी। ईरान के नए सर्वोच्च नेता और अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक संदेश में कहा है कि ईरान अपने मारे गए लोगों का बदला जरूर लेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने की नीति जारी रहेगी और पड़ोसी देशों को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी बंद करनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में चल रहे इस संघर्ष में भारी जानमाल का नुकसान हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, ईरान में 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, लेबनान में 1000+ मौतें और लाखों लोग बेघर हुए हैं। वहीं इस्राइल में 15 लोगों की मौत हुई है और अमेरिका में 13 सैनिकों की मौत हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 19:52:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तिब्बती पहचान पर चीन की नज़र? प्राग घोषणापत्र में दलाई लामा के उत्तराधिकार में हस्तक्षेप का कड़ा विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[<h3><strong>International Desk</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">तिब्बती बौद्ध समुदाय की स्वतंत्रता और दलाई लामा के उत्तराधिकार पर चीन के कथित हस्तक्षेप के बढ़ते विवाद के बीच, प्राग में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता या विश्वास गठबंधन (IRFBA) के पांचवें वर्षगांठ सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण घोषणापत्र जारी किया गया। इस <strong>प्राग घोषणापत्र 2025</strong> में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तिब्बती बौद्धों को अपने आध्यात्मिक नेताओं को <strong>स्वतंत्र रूप से चुनने का प्राकृतिक और धार्मिक अधिकार</strong> है—और इस प्रक्रिया में किसी भी राजनीतिक दखल की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>दलाई लामा के 90 वर्ष—आध्यात्मिक परंपरा पर वैश्विक ध्यान</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">घोषणापत्र में उल्लेख किया गया कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162063/china-eyes-tibetan-identity-prague-declaration-strongly-opposes-interference-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/प्राग-घोषणापत्र-में-दलाई-लामा-के-उत्तराधिकार-में-हस्तक्षेप-का-कड़ा-विरोध.png" alt=""></a><br /><h3><strong>International Desk</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">तिब्बती बौद्ध समुदाय की स्वतंत्रता और दलाई लामा के उत्तराधिकार पर चीन के कथित हस्तक्षेप के बढ़ते विवाद के बीच, प्राग में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता या विश्वास गठबंधन (IRFBA) के पांचवें वर्षगांठ सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण घोषणापत्र जारी किया गया। इस <strong>प्राग घोषणापत्र 2025</strong> में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तिब्बती बौद्धों को अपने आध्यात्मिक नेताओं को <strong>स्वतंत्र रूप से चुनने का प्राकृतिक और धार्मिक अधिकार</strong> है—और इस प्रक्रिया में किसी भी राजनीतिक दखल की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>दलाई लामा के 90 वर्ष—आध्यात्मिक परंपरा पर वैश्विक ध्यान</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">घोषणापत्र में उल्लेख किया गया कि 14वें दलाई लामा इस वर्ष 90 वर्ष के हो गए हैं। ‘करुणा वर्ष’ पहल के तहत दुनिया भर में उनके जीवन और योगदान का सम्मान किया जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में, उनके उत्तराधिकार से जुड़ा मुद्दा और भी संवेदनशील हो गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>चीन के हस्तक्षेप के प्रयासों पर वैश्विक फटकार</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">फयुल की रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन में जारी वक्तव्य को तिब्बती आध्यात्मिक नेतृत्व पर चीन की बढ़ती दखलअंदाज़ी के प्रति एक सीधा संदेश माना जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तिब्बती बौद्ध धर्म की पुनर्जन्म प्रणाली में सरकारी हस्तक्षेप धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>पेनपा त्सेरिंग की चेतावनी: “चीन एक कठपुतली दलाई लामा चाहता है”</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">“तिब्बती बौद्ध धर्म के धार्मिक नेता के रूप में दलाई लामा को श्रद्धांजलि” विषयक सत्र को संबोधित करते हुए <strong>सेंट्रल तिब्बetan एडमिनिस्ट्रेशन (CTA)</strong> के अध्यक्ष पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि चीन पुनर्जन्म प्रक्रिया पर प्रभाव डालकर तिब्बती धार्मिक संरचना को नियंत्रित करना चाहता है।<br />उन्होंने कहा—</p>
<blockquote>
<p>“चीन की मंशा स्पष्ट है—वे तिब्बती लोगों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए एक कठपुतली दलाई लामा नियुक्त करना चाहते हैं।”</p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;">त्सेरिंग ने <strong>अमेरिका के 2002 तिब्बत नीति अधिनियम</strong> का भी उल्लेख किया, जो चीन पर दलाई लामा के साथ संवाद फिर से शुरू करने का दबाव बनाता है और तिब्बत में वास्तविक स्वायत्तता सुनिश्चित करने पर ज़ोर देता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सात लोकतांत्रिक देशों ने जताया समर्थन</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी बताया कि 6 जुलाई को सात लोकतांत्रिक देशों ने संयुक्त रूप से तिब्बती समुदाय के अपने अगले आध्यात्मिक नेता को चुनने के अधिकार का समर्थन किया था। त्सेरिंग ने IRFBA से अपील की कि वह चीन की दखलअंदाज़ी के विरुद्ध एक <strong>वैश्विक सहमति</strong> को मजबूत करने के लिए एक सशक्त बयान जारी करे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>उच्च-स्तरीय उपस्थिति और वैश्विक संदेश</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">प्राग कैसल में आयोजित इस सम्मेलन में चेक गणराज्य के राष्ट्रपति <strong>पेट्र पावेल</strong>, संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत <strong>नाज़िला घनेया</strong>, और मानवाधिकार अधिवक्ता <strong>मुबारक बाला</strong> जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल रहीं।<br />CTA प्रतिनिधि <strong>थिनले चुक्की</strong> ने प्राग घोषणापत्र का स्वागत करते हुए कहा— “यह हमारी आध्यात्मिक परंपराओं की महत्वपूर्ण पुष्टि है और राज्य के हस्तक्षेप की स्पष्ट अस्वीकृति।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 18:35:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में ग्रेनेड विस्फोट, तीन की मौत, एक गंभीर घायल</title>
                                    <description><![CDATA[<h3><strong>International Desk </strong></h3>
<p><strong>इस्लामाबाद, 8 नवंबर 2025। </strong>पाकिस्तान के अशांत <strong>खैबर पख्तूनख्वा प्रांत</strong> में शुक्रवार को हुए एक <strong>ग्रेनेड विस्फोट</strong> में <strong>तीन लोगों की मौत</strong> हो गई, जबकि <strong>एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल</strong> हो गया। पुलिस ने शनिवार को घटना की पुष्टि की।</p>
<p>जानकारी के अनुसार, यह विस्फोट <strong>खैबर जिले की बारा तहसील</strong> में एक स्थानीय व्यक्ति के घर में हुआ। विस्फोट के समय घर में मौजूद व्यक्ति समेत <strong>तीन लोगों की मौके पर ही मौत</strong> हो गई।</p>
<p><strong>पुलिस अधिकारियों</strong> ने बताया कि <strong>घायल व्यक्ति को डोगरा अस्पताल</strong> में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159368/grenade-blast-in-khyber-pakhtunkhwa-pakistan-three-killed-one-seriously"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/पाकिस्तान-के-खैबर-पख्तूनख्वा-में-ग्रेनेड-विस्फोट,-तीन-की-मौत,-एक-गंभीर-घायल.jpg" alt=""></a><br /><h3><strong>International Desk </strong></h3>
<p><strong>इस्लामाबाद, 8 नवंबर 2025। </strong>पाकिस्तान के अशांत <strong>खैबर पख्तूनख्वा प्रांत</strong> में शुक्रवार को हुए एक <strong>ग्रेनेड विस्फोट</strong> में <strong>तीन लोगों की मौत</strong> हो गई, जबकि <strong>एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल</strong> हो गया। पुलिस ने शनिवार को घटना की पुष्टि की।</p>
<p>जानकारी के अनुसार, यह विस्फोट <strong>खैबर जिले की बारा तहसील</strong> में एक स्थानीय व्यक्ति के घर में हुआ। विस्फोट के समय घर में मौजूद व्यक्ति समेत <strong>तीन लोगों की मौके पर ही मौत</strong> हो गई।</p>
<p><strong>पुलिस अधिकारियों</strong> ने बताया कि <strong>घायल व्यक्ति को डोगरा अस्पताल</strong> में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है।<br />अधिकारियों के अनुसार, <strong>इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू</strong> कर दी गई है और विस्फोट के कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>स्थानीय सूत्रों ने बताया कि यह क्षेत्र लंबे समय से <strong>आतंकी घटनाओं और हिंसा</strong> से प्रभावित रहा है, जहाँ सुरक्षा बलों को समय-समय पर ऐसे हमलों का सामना करना पड़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Nov 2025 19:52:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कनाडा के नए PM मार्क कार्नी का ट्रंप को कड़ा संदेश- कहा, &quot;तंग करने वाले को हम छोड़ते नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मार्क कार्नी- </strong> कनाडा की सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी ने ‘बैंक ऑफ कनाडा' के पूर्व प्रमुख मार्क कार्नी को अपना नेता चुना है और अब वह देश के नए प्रधानमंत्री होंगे। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब कनाडा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार युद्ध और विलय की धमकियों का सामना कर रहा है। कार्नी (59) प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का स्थान लेंगे जिन्होंने जनवरी में पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी लेकिन अगला प्रधानमंत्री चुने जाने तक वह पद पर बने हुए हैं। कार्नी को 85.9 प्रतिशत वोट मिले हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हमने यह लड़ाई शुरू नहीं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149732/canadian-new-pm-mark-carney-of-canadas-new-message-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(33).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मार्क कार्नी- </strong> कनाडा की सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी ने ‘बैंक ऑफ कनाडा' के पूर्व प्रमुख मार्क कार्नी को अपना नेता चुना है और अब वह देश के नए प्रधानमंत्री होंगे। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब कनाडा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार युद्ध और विलय की धमकियों का सामना कर रहा है। कार्नी (59) प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का स्थान लेंगे जिन्होंने जनवरी में पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी लेकिन अगला प्रधानमंत्री चुने जाने तक वह पद पर बने हुए हैं। कार्नी को 85.9 प्रतिशत वोट मिले हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हमने यह लड़ाई शुरू नहीं की लेकिन जब कोई तंग करता है तो कनाडावासी उसे छोड़ते भी नहीं हैं।'' कार्नी ने यह भी कहा, ‘‘अमेरिकी हमारे संसाधन, हमारा पानी, हमारी ज़मीन, हमारा देश चाहते हैं। ज़रा सोचिए। अगर वे सफल हो गए तो वे हमारी जीवन शैली को नष्ट कर देंगे।'' उन्होंने कहा, "अमेरिका कनाडा नहीं है और कनाडा कभी भी किसी भी तरह से, आकार या रूप में अमेरिका का हिस्सा नहीं होगा।" कनाडा फिलहाल खाद्य और आवास की कीमतों में वृद्धि व आव्रजन की समस्या सहित कई चुनौतियों का सामना कर रहा है और इन कारणों से ट्रूडो की लोकप्रियता घट गई है।</p>
<p>ट्रंप की ओर से कनाडा पर शुल्क लगाए जाने और कनाडा को 51वां अमेरिकी राज्य बनाने की बातों से भी देश में ट्रूडो के प्रति नाराजगी है। कुछ लोग अमेरिका की अपनी यात्राएं रद्द कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग अमेरिकी सामान खरीदने से बच रहे हैं। उम्मीद है कि कार्नी देश में जल्द ही चुनाव करवाएंगे। या तो वह चुनाव की घोषणा करेंगे या फिर संसद में विपक्षी दल इस महीने के अंत में अविश्वास प्रस्ताव लाकर चुनाव करवाने के लिए सरकार को मजबूर कर सकते हैं।  </p>
<p>कार्नी ‘बैंक ऑफ कनाडा' के पूर्व प्रमुख हैं और ‘बैंक ऑफ इंग्लैंड' में अहम पद पर सेवाएं दे चुके हैं, माना जाता है कि इन अहम पदों पर रहने के कारण वह देश को आर्थिक चुनौतियों से बाहर निकालने में सफल रहेंगे। कार्नी ने कहा, ‘‘कोई है जो हमारी अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ जैसा कि हम जानते हैं डोनाल्ड ट्रंप ने हमारे द्वारा बनाए गए उत्पादों, हमारे द्वारा बेची जाने वाली वस्तुओं और हमारे जीवनयापन के साधनों पर अनुचित शुल्क लगा दिए हैं। वह कनाडाई परिवारों, श्रमिकों और व्यवसायों पर हमला कर रहे हैं लेकिन हम उन्हें सफल नहीं होने दे सकते।'' कार्नी ने कहा कि कनाडा तब तक जवाबी शुल्क लागू रखेगा जब तक "अमेरिकी इसे जारी रखता है।"</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Mar 2025 15:20:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे तैयारी पाकिस्तानियों की एंट्री बैन करेंगे बैन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पाकिस्तान और अफगानिस्तान-</strong> डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन  पाकिस्तानी नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। इस फैसले को लेकर  अमेरिकी प्रशासन अंतिम समीक्षा कर रहा है जिसके बाद इसे जल्द ही लागू किया जा सकता है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो  पाकिस्तान और अफगानिस्तान के नागरिकों के अमेरिका में आने पर सीधा प्रतिबंध लग जाएगा।  इस बीच, अमेरिका ने  पाकिस्तान को खतरनाक देशों की सूची में डालते हुए नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। इसमें अमेरिकी नागरिकों को पाकिस्तान की यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।   </p>
<p>रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149731/us-president-donald-trump-preparations-will-ban-pakistanis-banned"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/images-(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पाकिस्तान और अफगानिस्तान-</strong> डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन  पाकिस्तानी नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। इस फैसले को लेकर  अमेरिकी प्रशासन अंतिम समीक्षा कर रहा है जिसके बाद इसे जल्द ही लागू किया जा सकता है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो  पाकिस्तान और अफगानिस्तान के नागरिकों के अमेरिका में आने पर सीधा प्रतिबंध लग जाएगा।  इस बीच, अमेरिका ने  पाकिस्तान को खतरनाक देशों की सूची में डालते हुए नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। इसमें अमेरिकी नागरिकों को पाकिस्तान की यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।   </p>
<p>रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक  ट्रंप प्रशासन का यह फैसला पाकिस्तान की  बढ़ती सुरक्षा चिंताओं और पृष्ठभूमि जांच में आने वाली दिक्कतों   को देखते हुए लिया जा रहा है। अमेरिका को लगता है कि पाकिस्तान से आने वाले नागरिकों की पूरी तरह से  सुरक्षा जांच करना मुश्किल हो सकता है। अगर यह प्रतिबंध लागू होता है, तो हजारों पाकिस्तानी नागरिकों को वीजा और प्रवास से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।  अमेरिका के इस कड़े फैसले पर अब तक पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, माना जा रहा है कि यह कदम दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव और व्यापारिक रिश्तों में नई दरार पैदा कर सकता है।  </p>
<p>अमेरिका के विदेश विभाग ने कहा है कि पाकिस्तान में आतंकवाद और सशस्त्र संघर्ष का खतरा बना हुआ है। खासतौर पर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में आतंकी गतिविधियों की आशंका अधिक है।  एडवाइजरी के मुताबिक आतंकी बिना किसी पूर्व चेतावनी के हमले कर सकते हैं।  शॉपिंग मॉल, परिवहन केंद्र, हवाई अड्डे, सैन्य प्रतिष्ठान, विश्वविद्यालय, और पूजा स्थल उनके निशाने पर हो सकते हैं।  इस्लामाबाद समेत प्रमुख शहरों की सुरक्षा स्थिति बेहद अस्थिर है। इसके अलावा,  पाकिस्तान में अमेरिकी राजनयिकों और अधिकारियों  को सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होने से रोका गया है।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Mar 2025 15:10:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बशर अल-अस्साद- 'सीरिया नहीं छोड़ना चाहता था, लड़ना चाहता था, लेकिन रूसियों ने मुझे बाहर निकालने का फैसला किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk</strong></p>
<p>सीरिया के अपदस्थ नेता बशर असद ने कहा कि एक सप्ताह पहले सरकार के पतन के बाद देश छोड़ने की उनकी कोई योजना नहीं थी, लेकिन पश्चिमी सीरिया में उनके अड्डे पर हमला होने के बाद रूसी सेना ने उन्हें वहां से बाहर निकालने का निर्णय लिया। विद्रोही समूहों द्वारा सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद असद की यह पहली टिप्पणी है।</p>
<p>असद ने ‘फेसबुक’ पर एक बयान में कहा कि आठ दिसंबर की सुबह जब विद्रोहियों ने राजधानी पर हमला किया तब उन्होंने दमिश्क छोड़ दिया। उन्होंने  कहा कि वे रूसी सहयोगियों के साथ समन्वय कर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147046/bashar-al-assad-did-not-want-to-leave-syria-wanted"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-12/बशर-अल-अस्साद--&#039;सीरिया-नहीं-छोड़ना-चाहता-था,-लड़ना-चाहता-था.png" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk</strong></p>
<p>सीरिया के अपदस्थ नेता बशर असद ने कहा कि एक सप्ताह पहले सरकार के पतन के बाद देश छोड़ने की उनकी कोई योजना नहीं थी, लेकिन पश्चिमी सीरिया में उनके अड्डे पर हमला होने के बाद रूसी सेना ने उन्हें वहां से बाहर निकालने का निर्णय लिया। विद्रोही समूहों द्वारा सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद असद की यह पहली टिप्पणी है।</p>
<p>असद ने ‘फेसबुक’ पर एक बयान में कहा कि आठ दिसंबर की सुबह जब विद्रोहियों ने राजधानी पर हमला किया तब उन्होंने दमिश्क छोड़ दिया। उन्होंने  कहा कि वे रूसी सहयोगियों के साथ समन्वय कर तटीय प्रांत लताकिया में रूसी आधार शिविर के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने लड़ाई जारी रखने की योजना बनाई। असद ने कहा कि ड्रोन से रूसी आधार शिविर पर हमला होने के बाद रूसियों ने आठ दिसंबर की रात उन्हें रूस ले जाने का फैसला किया।</p>
<p>असद ने कहा, “मैंने किसी योजना के तहत देश नहीं छोड़ा जैसा कि पूर्व में बताया जा रहा था।” उन्होंने कहा, “इन घटनाओं के दौरान किसी भी समय मैंने पद छोड़ने या शरण लेने के बारे में नहीं सोचा और न ही किसी व्यक्ति या पार्टी द्वारा ऐसा कोई प्रस्ताव रखा गया था। कार्रवाई का एकमात्र तरीका आतंकवादी हमले के खिलाफ लड़ाई जारी रखना था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Dec 2024 16:30:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाइजीरिया की एक नदी में नाव पलटने से हुआ बड़ा हादसा 27 लोगों की मौत, 100 से ज़्यादा लोग लापता</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Internationa Desk </strong></p>
<p>स्थानीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी ने शुक्रवार को बताया कि मध्य नाइजीरिया में नाइजर नदी के किनारे एक नाव पलटने से कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि महिलाओं समेत 100 से ज़्यादा लोग लापता हैं। राष्ट्रीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के प्रवक्ता ने बताया कि यह दुर्घटना गुरुवार देर रात हुई, जब मध्य कोगी राज्य के मिसा समुदाय के ज़्यादातर व्यापारियों को लेकर नाव पड़ोसी नाइजर राज्य में एक साप्ताहिक बाज़ार जा रही थी।</p>
<p>जानकारी के अनुसार, कोगी राज्य आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी की प्रवक्ता सैंड्रा मूसा ने बताया कि दुर्घटना में मरने वालों की अंतिम संख्या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146751/major-accident-due-to-boat-capsizing-in-a-river-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/ नाइजीरिया-की-एक-नदी-में-नाव-पलटने-से-हुआ-बड़ा-हादसा-27-लोगों-की-मौत,-100-से-ज़्यादा-लोग-लापता.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Internationa Desk </strong></p>
<p>स्थानीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी ने शुक्रवार को बताया कि मध्य नाइजीरिया में नाइजर नदी के किनारे एक नाव पलटने से कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि महिलाओं समेत 100 से ज़्यादा लोग लापता हैं। राष्ट्रीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के प्रवक्ता ने बताया कि यह दुर्घटना गुरुवार देर रात हुई, जब मध्य कोगी राज्य के मिसा समुदाय के ज़्यादातर व्यापारियों को लेकर नाव पड़ोसी नाइजर राज्य में एक साप्ताहिक बाज़ार जा रही थी।</p>
<p>जानकारी के अनुसार, कोगी राज्य आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी की प्रवक्ता सैंड्रा मूसा ने बताया कि दुर्घटना में मरने वालों की अंतिम संख्या खोज और बचाव अभियान समाप्त होने के बाद ही पता चलेगी। मूसा ने कहा, "अब तक 27 शव बरामद किए जा चुके हैं, लेकिन बचाव अभियान अभी भी जारी है।" प्रवक्ता ने बताया कि किसी भी यात्री ने लाइफ़ जैकेट नहीं पहनी हुई थी, जिससे मौत का जोखिम काफ़ी बढ़ गया।</p>
<p><strong>कोई भी जीवित नहीं मिला</strong></p>
<p>एपी की एक रिपोर्ट के अनुसार, नाव पर लगभग 200 यात्री सवार थे। मूसा ने बताया कि बचाव दल ने शुक्रवार तक नदी से 27 शवों को निकालने में कामयाबी हासिल कर ली थी, लेकिन घटना के करीब 12 घंटे बाद भी कोई जीवित नहीं मिला। यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि डूबने का कारण क्या था, लेकिन स्थानीय मीडिया रिपोर्टों ने सुझाव दिया कि इसका कारण ओवरलोडिंग हो सकता है। उल्लेखनीय रूप से, नाइजीरिया के दूरदराज के इलाकों में नावों पर भीड़भाड़ और ओवरलोडिंग आम बात है, जहां अच्छी सड़कों की कमी के कारण कई लोगों के पास कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है।</p>
<p>यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि इस तरह की घटनाएं सबसे अधिक आबादी वाले अफ्रीकी देश के लिए चिंता का विषय बन रही हैं। अधिकांश दुर्घटनाएं भीड़भाड़ के कारण हुई हैं, जबकि जल परिवहन के लिए सुरक्षा उपायों और नियमों को ठीक से लागू नहीं किया गया है।</p>
<p><strong>100 से अधिक लोगों की इसी तरह की घटना में मौत हुई थी </strong></p>
<p>इससे पहले मई 2021 में, नाइजीरिया में महिलाओं और बच्चों सहित 165 से अधिक यात्रियों वाली एक नाव के टूटने और डूबने से 100 से अधिक लोग लापता हो गए थे और उनके मारे जाने की आशंका थी। 22 लोगों को बचा लिया गया था। अधिकारियों के अनुसार, जब दुर्घटना हुई, तब नाव नाइजीरिया के उत्तरी केब्बी राज्य में यात्रा कर रही थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/146751/major-accident-due-to-boat-capsizing-in-a-river-in</link>
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                <pubDate>Sat, 30 Nov 2024 17:38:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका Election में खेल पलटते ही सोशल मीडिया पर मच गई खलबली, एलन मस्क ने कर दिया नया धमाका  </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk </strong></p>
<p>रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प ने उत्तरी कैरोलिना, जॉर्जिया और पेंसिल्वेनिया के प्रमुख युद्ध के मैदानों में डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी कमला हैरिस को पछाड़ दिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में दूसरे कार्यकाल के करीब पहुंच गए। एलन मस्क ने एक फोटो ट्वीट की है। मस्क की शेयर की गई फोटो में वो ट्रंप के साथ नजर आ रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप फ्लोरिडा पहुंचे हैं।</p>
<p>ट्रंप अपने समर्थकों के साथ नतीजे देख रहे हैं। इससे पहले एलन मस्क ने डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि वो चाहते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ही अमेरिकी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145972/there-was-a-stir-on-social-media-as-soon-as"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/us-election-में-खेल-पलटते-ही-एलन-मस्क-ने-कर-दिया-नया-धमाका,-सोशल-मीडिया-पर-मच-गई-खलबली.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk </strong></p>
<p>रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प ने उत्तरी कैरोलिना, जॉर्जिया और पेंसिल्वेनिया के प्रमुख युद्ध के मैदानों में डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी कमला हैरिस को पछाड़ दिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में दूसरे कार्यकाल के करीब पहुंच गए। एलन मस्क ने एक फोटो ट्वीट की है। मस्क की शेयर की गई फोटो में वो ट्रंप के साथ नजर आ रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप फ्लोरिडा पहुंचे हैं।</p>
<p>ट्रंप अपने समर्थकों के साथ नतीजे देख रहे हैं। इससे पहले एलन मस्क ने डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि वो चाहते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ही अमेरिकी राष्ट्रपति बने। उन्होेंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर अमेरिका में अर्थव्यवस्था की हालत बहुत ही खस्ता हो जाएगी। अब एलन मस्क ने एक तस्वीर पोस्ट की है। इसमें वो ट्रंप के साथ नजर आ रहे हैं। इस तरह की कई सारी तस्वीरें इस चुनाव के दौरान देखने को मिली थी। आज जब वोटों की गिनकी हो रही है तब भी इस तरह की तस्वीर चर्चा का विषय बनी हुई है।</p>
<p>अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विंग  राज्य जॉर्जिया में जीत हासिल की। ट्रंप की इस जीत के साथ 16 निर्वाचक मंडल वोट रिपब्लिकन पार्टी की झोली में फिर से आ गए। ‘स्विंग’ राज्य उन्हें कहा जाता है जहां मतदाताओं की राय बदलती रहती है। राष्ट्रपति जो बाइडन ने 2020 में जॉर्जिया में बेहद कम अंतर से जीत हासिल की थी। हालांकि 1996 के बाद से हर दूसरे राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी जॉर्जिया में जीतती आई है। ट्रंप ने जॉर्जिया में अपनी 2020 की हार को पलटने की कोशिश की थी जिससे एक राजनीतिक और कानूनी संघर्ष शुरू हो गया और राज्य में उनके खिलाफ अभियोग चलाया गया। </p>
<p>एलन मस्क लगातार ट्रंप के पक्ष में बोलते नजर आएं हैं। उन्होंने कहा कि ये जीत अमेरिका में होनी बहुत जरूरी है और ये लोकतंत्र के लिए व देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद जरूरी है। जैसे जैसे ट्रेंड सामने आने लगे शेयर बाजार में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। सेंसेक्स 80 हजार के आंकड़े को पार कर चुका है। अब इसे बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के नतीजे और ट्रेंड को देखने के बाद का वो रिफलेक्शन है। तो अंतरराष्ट्रीय बाजार किस ओर जाएगा और इसका भारतीय शेयर बाजार पर कितना होगा इन बातों पर भी सबकी नजर है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Nov 2024 17:03:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूएस राष्ट्रपति चुनाव में तीन शहरों में मतपेटियां जलाईं गयीं?</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>International Desk</strong></div>
<div>अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ऐतिहासिक उथल-पुथल के बावजूद, चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक उप राष्ट्रपति हैरिस और रिपब्लिकन पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कांटे का टक्कर है। चुनाव 5 नवंबर को होना है।आखिरी हफ्ते में दोनों उम्मीदवार मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए सभी तरह की कोशिशें कर रहे हैं।  60 वर्षीय हैरिस मंगलवार को उसी जगह पर भाषण देंगी जहां ट्रंप ने 2020 में चुनाव हारने के विरोध में समर्थकों को इकट्ठा किया था। यह घटना 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी संसद पर हमले से पहले हुई थी।</div>
<div>78 वर्षीय ट्रंप भी प्रतीकों पर भरोसा कर रहे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145859/ballot-boxes-were-burnt-in-three-cities-in-the-us"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/us.png" alt=""></a><br /><div><strong>International Desk</strong></div>
<div>अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ऐतिहासिक उथल-पुथल के बावजूद, चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक उप राष्ट्रपति हैरिस और रिपब्लिकन पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कांटे का टक्कर है। चुनाव 5 नवंबर को होना है।आखिरी हफ्ते में दोनों उम्मीदवार मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए सभी तरह की कोशिशें कर रहे हैं।  60 वर्षीय हैरिस मंगलवार को उसी जगह पर भाषण देंगी जहां ट्रंप ने 2020 में चुनाव हारने के विरोध में समर्थकों को इकट्ठा किया था। यह घटना 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी संसद पर हमले से पहले हुई थी।</div>
<div>78 वर्षीय ट्रंप भी प्रतीकों पर भरोसा कर रहे हैं. उन्होंने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन में एक बड़ी रैली की, जो उनकी अंतिम कोशिश की शुरुआत है।इस बीच ओरेगॉन के पोर्टलैंड क्षेत्र में दो मतपत्र ड्रॉप बॉक्स में आग लगी  के साथ-साथ वैंकूवर, वाशिंगटन में हुई इसी तरह की घटना हुई है। अमेरिकी जांच एजेंसियां इसकी जांच कर रही  हैं।</div>
<div> </div>
<div>अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के इतिहास में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई। पोर्टलैंड पुलिस ब्यूरो ने बताया कि अधिकारियों को ओरेगॉन में स्थानीय समयानुसार सोमवार सुबह लगभग 3:30 बजे मतपेटी में आग लगने की घटना के लिए बुलाया गया था। वहां "आग लगाने वाले उपकरण" का इस्तेमाल किया गया था। सुरक्षाकर्मियों ने आग पर फौरन काबू पा लिया।</div>
<div> </div>
<div>सीएनएन के मुताबिक मल्टनोमाह काउंटी चुनाव निदेशक टिम स्कॉट ने पुष्टि की कि बॉक्स के अंदर तीन हिस्से जल गये। अब अधिकारी इनकी जगह दूसरे मतपत्र देने के लिए उन मतदाताओं से संपर्क करेंगे। मतपेटी बॉक्स के जरिये ऐसे मतदाताओं की पहचान कर ली गई है। जिन मतदाताओं के मतपत्र जल गये हैं, उनके वोट की गिनती की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने अपील की है कि जिन लोगों ने शनिवार और रविवार को अपने मतपत्र यहां जमा कराये थे, उन्हें आगे आकर उस बारे में बताना चाहिए। उनके वोट गिने जाएंगे।</div>
<div>वैंकूवर में सोमवार तड़के एक बस स्टेशन के पास पोलिंग बूथ में मतपेटी में आग लगा दी गई। वैंकूवर पुलिस जांच कर रही है। जलती हुई मतपेटी के बगल में एक "संदिग्ध उपकरण" मिला। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, क्लार्क काउंटी चुनाव कार्यालय ने कहा कि सैकड़ों मतपत्र जल गये हैं।</div>
<div>डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अपने समर्थकों से कहा कि वह "नाज़ी नहीं हैं।" उन्होंने अपनी अथॉरिटी को सर्वोच्च मानने के आरोपों को खारिज कर दिया। सेना के एक पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ ने ट्रंप को फासीवादी करार दिया था।</div>
<div> </div>
<div>ट्रंप ने अटलांटा रैली में कहा, "कमला और उनके अभियान की सबसे नई लाइन यह है कि जो कोई भी उन्हें वोट नहीं दे रहा है, वह नाज़ी है। लेकिन मैं नाज़ी नहीं हूं। मैं नाज़ी के खिलाफ हूं।" यह टिप्पणी ट्रंप को इसलिए करना पड़ी, क्योंकि न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध मैडिसन स्क्वायर गार्डन में एक मेगा-रैली के दौरान उनके सहयोगियों ने नस्लवादी टिप्पणियां की थीं। जिसकी व्यापक निंदा हो रही है।</div>
<div>न्यूयॉर्क टाइम्स को दिये गये इंटरव्यू में ट्रंप कार्यकाल के दौरान और बाद में सबसे लंबे समय तक सेवारत रहे व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ, जनरल जॉन केली ने कई सनसनीखेज जानकारियां दीं। केली ने बताया कि ट्रंप ने टिप्पणी की थी कि "हिटलर ने भी कुछ अच्छे काम किए थे" और ट्रंप अमेरिकी सेना में "एडॉल्फ हिटलर जैसे जनरलों को चाहते थे।"</div>
<div> </div>
<div>दरअसल यूएस चुनाव में तनाव चरम पर है। बयानबाजी तेज हो चुकी है। चुनाव सर्वे से पता चल रहा है कि कमला हैरिस और ट्रंप दौड़ में बहुत करीब चल रहे हैं। लोगों में डर यह है कि पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप 2020 की तरह फिर से हार मानने से इनकार न कर दें। अपने राजनीतिक विरोधियों को धमकी देने वाली अपनी कठोर बयानबाजी से ट्रंप पीछे नहीं हट रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>कमला हैरिस ने सोमवार को पत्रकारों से कहा- "कल रात, मैडिसन स्क्वायर गार्डन में डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यक्रम ने वास्तव में उस बिंदु को उजागर किया जो मैं इस पूरे अभियान के दौरान उठाती रही हूं। ट्रंप का ध्यान खुद पर और हमारे देश को विभाजित करने पर केंद्रित है। यह सब किसी भी तरह से ऐसा कुछ नहीं है जो अमेरिकी परिवार, अमेरिकी लोगों को मजबूत करेगा।"</div>
<div> </div>
<div>चुनाव के आखिरी दौर में हैरिस और ट्रंप दोनों के लिए चुनौती मुख्य समर्थकों को सक्रिय करना और मतदाताओं को अपनी ओर खींचना है। क्योंकि सात स्विंग राज्यों में कड़ी टक्कर है। एक एक वोट का महत्व है। कमला हैरिस ने सोमवार को मिशिगन में तीन कार्यक्रम आयोजित किए, जबकि ट्रंप ने जॉर्जिया में दो कार्यक्रमों की मेजबानी की। अब चुनाव तक दोनों का जोर सात स्विंग राज्यों पर ही होगा।</div>
<div>मंगलवार को वाशिंगटन में, कमला हैरिस व्हाइट हाउस के पास उसी स्थान से भाषण देने जा रही  हैं, जिसे उनके अभियान का "समापन भाषण" माना जाएगा। जहां ट्रंप को ऐसे नेता के रूप में पेश किया जा सकता है जो अराजकता पसंद करता है। यह वही जगह है, जहां तत्कालीन राष्ट्रपति ट्रंप ने 6 जनवरी, 2021 को अपने समर्थकों को यूएस कैपिटल पर हिंसक हमला करने के लिए उकसाया था। इतिहास में वो घटना ट्रंप को अराजकतावाद को बढ़ावा देने वाले शख्स के रूप में दर्ज हो चुकी है।</div>
<div> </div>
<div>सीएनएन ने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ट्रम्प द्वारा किए गए 16 झूठे दावों का पर्दाफाश किया है।पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने न्यूयॉर्क शहर के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में रविवार शाम को आयोजित एक रैली में अपने भाषण में आव्रजन और अन्य विषयों के बारे में कई झूठे दावे दोहराए, जिनमें से कई का लंबे समय से खंडन किया जा चुका है। इसमें फेमा और उत्तरी कैरोलिना,फेमा  और प्रवासी, ट्रम्प का पसंदीदा आव्रजन चार्ट शामिल हैं ।ट्रम्प ने अपने लंबे समय से खारिज किए गए झूठे दावे को दोहराया   कि दक्षिणी सीमा पर प्रवासन संख्याओं के बारे में उनका पसंदीदा चार्ट जिसमें उन्होंने कहा, जब अमेरिका में "इतिहास में अब तक का सबसे कम अवैध आव्रजन था।चार्ट में ऐसा नहीं दिखाया गया है। </div>
<div> </div>
<div>ट्रम्प ने उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के बारे में ये झूठे दावे दोहराए: "वह सीमा की ज़ार थीं। वह सीमा की प्रभारी थीं।" हैरिस कभी भी "सीमा ज़ार" नहीं थीं, एक ऐसा लेबल जिस पर व्हाइट हाउस ने हमेशा ज़ोर दिया है कि यह गलत है, और वह कभी भी सीमा सुरक्षा की प्रभारी नहीं थीं, जो कि होमलैंड सुरक्षा सचिव एलेजांद्रो मयोरकास की ज़िम्मेदारी है।  वास्तव में , राष्ट्रपति जो बिडेन ने हैरिस को 2021 में एक अधिक सीमित आव्रजन-संबंधी कार्यभार दिया, जिसमें उन्हें अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला और होंडुरास के साथ कूटनीति का नेतृत्व करने के लिए कहा गया, ताकि उन परिस्थितियों को संबोधित किया जा सके, जिन्होंने उनके नागरिकों को संयुक्त राज्य में प्रवास करने का प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। प्रवासी, शहर और कस्बे : ट्रम्प ने अपनी प्रतिज्ञा दोहराई कि अगर वे चुने गए तो वे हर उस “शहर और कस्बे को आज़ाद करा देंगे जिस पर प्रवासियों ने आक्रमण किया है और कब्ज़ा कर लिया है।” यह बकवास है; अमेरिका का कोई भी शहर प्रवासियों द्वारा कब्ज़ा नहीं किया गया है।</div>
<div> </div>
<div>स्प्रिंगफील्ड, ओहियो में प्रवासी के बारे में ट्रम्प ने झूठा दावा किया। "आप स्प्रिंगफील्ड, ओहियो पर नज़र डालें, इसके बारे में सोचें - जहां, इसके बारे में सोचें, जहां 30,000 अवैध प्रवासियों को 50,000 लोगों के शहर में डाल दिया गया था।"यह एक से ज़्यादा तरीकों से झूठ है।  ट्रम्प ने अपने नियमित झूठे दावे को दोहराया कि, हैरिस की वजह से, “325,000 बच्चे लापता हैं, मर चुके हैं, सेक्स गुलाम या दास हैं। वे खुली सीमा के ज़रिए आए और चले गए। उनके माता-पिता शायद ही उन्हें फिर कभी देख पाएँ, लगभग उनमें से कोई भी।”ट्रम्प संघीय आंकड़ों को बुरी तरह से विकृत कर रहे थे।</div>
<div> </div>
<div>ट्रम्प ने अपना झूठा दावा दोहराया कि उन्होंने रूस से जर्मनी तक नॉर्ड स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइन को “खत्म” कर दिया है, और कहा, “यह खत्म हो चुकी थी।” ट्रम्प ने पाइपलाइन को खत्म नहीं किया। उन्होंने अपने राष्ट्रपति पद के लगभग तीन साल बाद परियोजना से संबंधित प्रतिबंधों को कानून में हस्ताक्षरित किया, जब पाइपलाइन पहले से ही लगभग 90% पूरी हो चुकी थी, और परियोजना के पीछे सरकारी स्वामित्व वाली रूसी कंपनी ने  दिसंबर 2020 में घोषणा की  कि निर्माण फिर से शुरू हो रहा है।</div>
<div> </div>
<div>ट्रम्प ने अपना झूठा दावा दोहराया कि आईएसआईएस आतंकी समूह को हराने में "हमें चार सप्ताह लगे", जबकि जनरलों ने उनसे कहा था कि इसमें पाँच साल लगेंगे। ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के दो साल से ज़्यादा समय बाद आईएसआईएस "खिलाफत" को पूरी तरह से आज़ाद घोषित कर दिया गया।ट्रम्प ने झूठा दावा किया कि, जब वह राष्ट्रपति थे, "हमारे पास कोई मुद्रास्फीति नहीं थी।" ट्रम्प के राष्ट्रपतित्व के दौरान संचयी मुद्रास्फीति  लगभग 8% थी।</div>
<div> </div>
<div>ट्रम्प ने झूठा दावा किया कि अमेरिकी सीनेट में विधायी संबंधों को तोड़ने के लिए हैरिस के वोटों ने "हमारे देश के इतिहास में सबसे खराब मुद्रास्फीति का कारण बना।" हैरिस की भूमिका के बारे में दावे के अलावा, यह सच नहीं है कि बिडेन प्रशासन के दौरान अमेरिका में अब तक की सबसे खराब मुद्रास्फीति रही है; ट्रम्प निष्पक्ष रूप से कह सकते हैं कि जून 2022 में अमेरिकी  मुद्रास्फीति दर 40 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई, जब यह 9.1% थी, लेकिन यह 1920 में स्थापित 23.7% के   सर्वकालिक  रिकॉर्ड  के करीब नहीं थी। </div>
<div> </div>
<div>ट्रम्प ने पुलिस अधिकारियों और कानून प्रवर्तन संगठनों से अपने समर्थन का दावा किया, फिर हैरिस के बारे में झूठ बोला: "मुझे नहीं लगता कि उनके पास एक भी पुलिस वाला है। वे सिर्फ एक पुलिस वाले की तलाश कर रहे हैं।"   ट्रम्प ने अपने झूठे दावे को दोहराया कि “मैंने हमारी सेना का पुनर्निर्माण किया, कुल मिलाकर - हमारी सभी सेनाओं का पुनर्निर्माण किया।” ट्रम्प ने अपने झूठे दावे को दोहराया कि उनके विरोधियों ने 2020 के चुनाव में “धोखा देने के लिए कोविड का इस्तेमाल किया”। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
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                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Oct 2024 17:35:22 +0530</pubDate>
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                <title>हैती के गैंग्स ने भुखमरी, पैसे की कमी जैसी आपदा को अवसर में किया तब्दील, बच्चों को बड़े पैमाने पर रिक्रूट कर रहा</title>
                                    <description><![CDATA[
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<div class="col-md-6 main-body-part px-1 main-content sidebar"><span style="text-align:justify;">हैती के गैंग अपने गिरोह के सदस्यों की संख्या बढ़ाने में लगा है। इसके लिए वो बड़े पैमाने पर बच्चों को रिक्रूट कर रहा है। ह्यूमन राइट्स वॉच की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि हैती के सशस्त्र गैंग तेजी से बच्चों को अपने समूह में रिक्रूट कर रहे हैं। अकाल की स्थिति लड़कों को बंदूक उठाने के लिए प्रेरित करती है। वहीं रिपोर्ट में लड़कियों के यौन शोषण और उन्हें घरेलू काम करने के लिए मजबूर किए जाने की बात कही गई है। विश्व स्तर पर मानवाधिकारों के मुद्दों पर निगरानी करने वाले ह्यूमन राइट्स वॉच ने</span></div></div></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145463/draft-add-your-title-haitis-gangs-turned-a-disaster-like"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/हैती-के-गैंग्सबच्चों-को-बड़े-पैमाने-पर-रिक्रूट-कर-रहा.jpg" alt=""></a><br />
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<div class="news-description my-2">
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<div class="col-md-6 main-body-part px-1 main-content sidebar"><span style="text-align:justify;">हैती के गैंग अपने गिरोह के सदस्यों की संख्या बढ़ाने में लगा है। इसके लिए वो बड़े पैमाने पर बच्चों को रिक्रूट कर रहा है। ह्यूमन राइट्स वॉच की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि हैती के सशस्त्र गैंग तेजी से बच्चों को अपने समूह में रिक्रूट कर रहे हैं। अकाल की स्थिति लड़कों को बंदूक उठाने के लिए प्रेरित करती है। वहीं रिपोर्ट में लड़कियों के यौन शोषण और उन्हें घरेलू काम करने के लिए मजबूर किए जाने की बात कही गई है। विश्व स्तर पर मानवाधिकारों के मुद्दों पर निगरानी करने वाले ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि उसने हाल ही में गिरोहों में शामिल छह बच्चों से बात की थी, जिनमें से सभी ने वे भूख और भोजन, आश्रय व पैसे के एकमात्र सोत्र होने की वजह से इसमें शामिल हुए थे। </span></div>
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<p style="text-align:justify;">हैती के शक्तिशाली गिरोह हाल के वर्षों में अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं जबकि राज्य संस्थाएँ धन की कमी और राजनीतिक संकटों के कारण पंगु हो गई हैं। गिरोह अब उस क्षेत्र को नियंत्रित करते हैं जहां 2.7 मिलियन लोग रहते हैं, जिनमें आधे मिलियन बच्चे भी शामिल हैं। एचआरडब्ल्यू ने कहा कि जैसे-जैसे वे बड़े हुए हैं, गिरोहों ने बच्चों की भर्ती में तेजी ला दी है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, गिरोह के लगभग एक तिहाई सदस्य बच्चे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि लड़कों को अक्सर मुखबिर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही हथियार और गोला-बारूद का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है और पुलिस के खिलाफ संघर्ष में तैनात किया जाता है। इसमें मिशेल नाम के एक अनाथ लड़के के मामले का हवाला दिया गया है। उसे छह साल पहले भर्ती किया गया था जब वह 8 साल का था और सड़कों पर रह रहा था और उसे एक लोडेड कलाश्निकोव दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि लड़कियों के साथ बलात्कार किया जाता है और उन्हें गिरोह के सदस्यों के लिए खाना पकाने और साफ-सफाई करने के लिए मजबूर किया जाता है और जब वे गर्भवती हो जाती हैं तो अक्सर उन्हें छोड़ दिया जाता है।</p>
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                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Oct 2024 16:58:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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                <title>मोहमद मुइज़्ज़ु 7 अक्टूबर को पीएम मोदी से मिलने दिल्ली आएंगे, भारत ने ऐसे कम की मालदीव की अकड़</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>International Desk </strong></p>
<p style="text-align:justify;">मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू 7 अक्टूबर को द्विपक्षीय यात्रा के लिए भारत आने की उम्मीद है। भारत और मालदीव सितंबर की शुरुआत से ही मुइज्जू की अपेक्षित यात्रा की तैयारी कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए 9 जून को नई दिल्ली की यात्रा के बाद मुइज्जू की दूसरी भारत यात्रा होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति कार्यालय की मुख्य प्रवक्ता हीना वलीद ने जिस दिन मुइज्जू के भारत यात्रा के बारे में जानकारी दी, ठीक उसी दिन पीएम मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले दो मंत्रियों से इस्तीफा भी ले लिया गया।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145311/mohammed-muizzu-will-come-to-delhi-to-meet-pm-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/मोहमद-मुइज़्ज़ु-7-अक्टूबर-को-पीएम-मोदी-से-मिलने-दिल्ली-आएंगे,-भारत-ने-ऐसे-कम-की-मालदीव-की-अकड़.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>International Desk </strong></p>
<p style="text-align:justify;">मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू 7 अक्टूबर को द्विपक्षीय यात्रा के लिए भारत आने की उम्मीद है। भारत और मालदीव सितंबर की शुरुआत से ही मुइज्जू की अपेक्षित यात्रा की तैयारी कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए 9 जून को नई दिल्ली की यात्रा के बाद मुइज्जू की दूसरी भारत यात्रा होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति कार्यालय की मुख्य प्रवक्ता हीना वलीद ने जिस दिन मुइज्जू के भारत यात्रा के बारे में जानकारी दी, ठीक उसी दिन पीएम मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले दो मंत्रियों से इस्तीफा भी ले लिया गया। मालदीव के राष्ट्रपति ने भी कहा था कि उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अपमान करने के लिए उपमंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। </p>
<p style="text-align:justify;">भारत और मालदीव के बीच संबंध पिछले साल नवंबर से ही तनावपूर्ण हो गए थे, जब चीन के प्रति झुकाव रखने वाले मुइज्जू ने मालदीव के राष्ट्रपति का पदभार संभाला था। मुइज्जू ने भारत से कहा था कि वह देश द्वारा उपहार में दिए गए तीन विमानन प्लेटफॉर्म का संचालन कर रहे लगभग 90 भारतीय सैन्य कर्मियों को वापस बुला ले। भारत ने 10 मई तक अपने सैन्य कर्मियों को वापस बुला लिया और उनकी जगह डोर्नियर विमान और दो हेलीकॉप्टरों के संचालन के लिए असैन्य कर्मियों को तैनात कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस साल की शुरुआत में मालदीव के युवा मंत्रालय के उप मंत्रियों को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट करने की वजह से निलंबित कर दिया गया था। नई दिल्ली ने माले के समक्ष इस मामले को जोरदार ढंग से उठाया था। मोदी की लक्षद्वीप की यात्रा के बाद सोशल मीडिया एक्स पर उनके पोस्ट को लेकर मालदीव के उपमंत्रियों ने भारतीय प्रधानमंत्री की आलोचना की थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Oct 2024 16:56:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इजराइल का डर, हसन नसरल्लाह को चुपचाप हिजबुल्लाह ने गुप्त स्थान पर दफनाया, नहीं निकला जनाजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk</strong></p>
<p>इजरायली हमले में मारे गए हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह को सार्वजनिक अंतिम संस्कार होने तक एक गुप्त स्थान पर अस्थायी रूप से दफनाया गया है। हिजबुल्लाह ने अभी तक नसरल्लाह के अंतिम संस्कार की योजना की घोषणा नहीं की है। विरोधाभासी रिपोर्टों से पता चलता है कि उनका अंतिम विश्राम स्थान या तो लेबनान या इराक में हो सकता है। इराकी प्रधान मंत्री मोहम्मद शिया अल सुदानी के सलाहकार अब्दुल अमीर अल तेइबान ने ट्वीट किया कि नसरल्लाह को इराक में इमाम हुसैन के बगल में कर्बला में दफनाया जाएगा। ये स्थान शिया मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145308/fear-of-israel-hassan-nasrallah-was-quietly-buried-by-hezbollah"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/इजराइल-का-डर-,-हसन-नसरल्लाह-को-चुपचाप-हिजबुल्लाह-ने-गुप्त-स्थान-पर-दफनाया,-नहीं-निकला-जनाजा.webp" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk</strong></p>
<p>इजरायली हमले में मारे गए हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह को सार्वजनिक अंतिम संस्कार होने तक एक गुप्त स्थान पर अस्थायी रूप से दफनाया गया है। हिजबुल्लाह ने अभी तक नसरल्लाह के अंतिम संस्कार की योजना की घोषणा नहीं की है। विरोधाभासी रिपोर्टों से पता चलता है कि उनका अंतिम विश्राम स्थान या तो लेबनान या इराक में हो सकता है। इराकी प्रधान मंत्री मोहम्मद शिया अल सुदानी के सलाहकार अब्दुल अमीर अल तेइबान ने ट्वीट किया कि नसरल्लाह को इराक में इमाम हुसैन के बगल में कर्बला में दफनाया जाएगा। ये स्थान शिया मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत महत्व रखता है।</p>
<p>बेरूत में समूह के केंद्रीय मुख्यालय को निशाना बनाकर किए गए एक बड़े इजरायली हवाई हमले में मारा गया था। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि जिस बंकर पर नसरल्लाह और वरिष्ठ हिजबुल्लाह नेता बैठक कर रहे थे, उस पर हमला करने के लिए 80 टन बंकर-विस्फोट बमों का इस्तेमाल किया गया था। नसरल्ला की संभवतः दम घुटने से मौत हो गई। उनके शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं दिखी, जिससे पता चलता है कि विस्फोट के कारण बने जहरीले वातावरण में उनका दम घुट गया होगा। </p>
<p>इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व में शुक्रवार को नसरल्लाह का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार होने की उम्मीद है। खामेनेई, जिन्होंने तेहरान में पांच साल में अपना पहला दुर्लभ शुक्रवार का उपदेश दिया, ने नसरल्लाह की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया। तेहरान में भी जुलूस निकाले जाने की संभावना है। नेता को देखने के लिए हजारों ईरानी राजधानी में एकत्र हुए, मुख्य मंच पर नसरल्ला की तस्वीर के साथ खामेनेई की तस्वीर भी प्रदर्शित की गई।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Oct 2024 16:48:22 +0530</pubDate>
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