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                <title>UGC - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) का नया निर्देश 45 दिनों से अधिक अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[भारत सरकार की आरक्षण नीति (एससी 15%, एसटी 7.5%, ओबीसी 27%) लागू होगी। यह नियम सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और विधि विश्वविद्यालयों पर लागू है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170974/university-grants-commissions-new-instruction-makes-reservation-mandatory-in-temporary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img_20260223_133812.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अस्थायी नियुक्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आयोग ने सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और विधि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखकर कहा है कि 45 दिनों या उससे अधिक अवधि की अस्थायी नियुक्तियों में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण नीति का कड़ाई से पालन किया जाए। यह निर्देश कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के 2018 और 2022 के कार्यालय ज्ञापनों पर आधारित है, जिसे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और शिक्षा मंत्रालय ने भी मजबूती से दोहराया है।</p>
<p> </p>
<blockquote class="format1">यूजीसी के सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी द्वारा 16 फरवरी 2026 को जारी इस पत्र में कहा गया है कि यह निर्देश सितंबर 2024 के पूर्व संचार का अनुवर्ती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि शिक्षण, गैर-शिक्षण और प्रशासनिक पदों पर संविदा आधारित नियुक्तियां यदि 45 दिनों से अधिक की हों, तो उनमें भारत सरकार की आरक्षण नीति लागू होगी। संस्थानों को 2023-24 और 2024-25 के दौरान की गई ऐसी नियुक्तियों का विवरण यूजीसी के यूएएमपी पोर्टल पर जमा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि अनुपालन की जांच की जा सके।</blockquote>
<p> </p>
<p>यह कदम एससी-एसटी और ओबीसी संगठनों से प्राप्त शिकायतों के बाद उठाया गया है, जहां आरोप लगाया गया था कि कई संस्थान अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्देश आरक्षण को बाईपास करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाएगा, खासकर उन मामलों में जहां स्थायी पदों की भर्ती में देरी के कारण अस्थायी व्यवस्था की जाती है। एक वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "यह नीति दशकों से मौजूद है, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, जो सामाजिक न्याय की दिशा में सकारात्मक कदम है।"</p>
<p> </p>
<p>हालांकि, इस निर्देश पर विवाद भी उत्पन्न हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि पत्र में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं है। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, "यूजीसी ने ओबीसी, एससी और एसटी का जिक्र किया, लेकिन ईडब्ल्यूएस को क्यों छोड़ दिया? क्या यह जानबूझकर किया गया है?" वहीं, कुछ ने इसे निजी विश्वविद्यालयों पर अनुचित दबाव बताया। एक अन्य पोस्ट में कहा गया, "अस्थायी नौकरियां भी जाति से विभाजित? योग्यता मौसमी नहीं होनी चाहिए।" दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि यह मौजूदा डीओपीटी दिशानिर्देशों का सख्त प्रवर्तन मात्र है, न कि कोई नई नीति।</p>
<p> </p>
<p>शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह निर्देश सभी उच्च शिक्षा संस्थानों पर लागू होगा, जिसमें डीम्ड विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। इससे पहले, 2018 के डीओपीटी ज्ञापन ने स्पष्ट किया था कि 45 दिनों से अधिक की अस्थायी नियुक्तियां आरक्षण के दायरे में आएंगी। यूजीसी ने इसकी निगरानी के लिए पोर्टल शुरू किया है, जो अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद करेगा।</p>
<p> </p>
<p>यह विकास ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा में आरक्षण को लेकर बहस तेज है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे हजारों अस्थायी पदों पर प्रभाव पड़ेगा, जो मुख्य रूप से गेस्ट लेक्चरर, रिसर्च असिस्टेंट और प्रशासनिक भूमिकाओं में हैं। सरकार का लक्ष्य सामाजिक समावेश को मजबूत करना है, लेकिन आलोचक इसे नौकरशाही बढ़ावा मानते हैं। आने वाले दिनों में संस्थानों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 13:39:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sachin Bajpai]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में अधिवक्ताओं का प्रदर्शन, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के अधिवक्ता संघ एवं बार एसोसिएशनके पदाधिकारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा प्रस्तावित नए नियमों के समर्थन में शनिवार को आज्ञाराम यादव एडवोकेट, प्रदीप यादव एडवोकेट, संदीप गोयल एडवोकेट, बुद्धि प्रकाश एडवोकेट, सत्येंद्र यादव, रवि यादव एडवोकेट के नेतृत्व में जनपद के अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र होकर यूजीसी बिल 2026 को शीघ्र लागू किए जाने की मांग उठाई।</div>
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<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन के उपरांत अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिला अधिकारी के माध्यम से सौंपा। प्रदर्शन कर रहे महिपाल पटेल, मयंक चौरसिया एडवोकेट, राम प्रसाद चौरसिया एडवोकेट का कहना था कि</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168522/advocates-demonstrate-in-support-of-new-ugc-rules-submit-memorandum"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20260207-wa0286.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के अधिवक्ता संघ एवं बार एसोसिएशनके पदाधिकारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा प्रस्तावित नए नियमों के समर्थन में शनिवार को आज्ञाराम यादव एडवोकेट, प्रदीप यादव एडवोकेट, संदीप गोयल एडवोकेट, बुद्धि प्रकाश एडवोकेट, सत्येंद्र यादव, रवि यादव एडवोकेट के नेतृत्व में जनपद के अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र होकर यूजीसी बिल 2026 को शीघ्र लागू किए जाने की मांग उठाई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन के उपरांत अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिला अधिकारी के माध्यम से सौंपा। प्रदर्शन कर रहे महिपाल पटेल, मयंक चौरसिया एडवोकेट, राम प्रसाद चौरसिया एडवोकेट का कहना था कि यूजीसी के नए नियम उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम हैं। इन नियमों के लागू होने से शिक्षा में पारदर्शिता आएगी, शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार होगा और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ स्वार्थी तत्व इन सुधारों का विरोध कर रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार द्वारा यूजीसी बिल 2026 को शीघ्र लागू नहीं किया गया तो वे बृहद आंदोलन करने को बाध्य होंगे। एडवोकेट भालचंद्र यादव, विजय चौधरी एडवोकेट, देवेंद्र कुमार एडवोकेट, आलोक प्रसाद एडवोकेट ने कहा कि यह आंदोलन केवल अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें शिक्षाविदों और समाज के अन्य वर्गों को भी जोड़ा जाएगा।प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने यूजीसी के समर्थन में नारे लगाए और सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा राष्ट्र की रीढ़ है और उसमें सुधार के लिए लाए गए किसी भी सकारात्मक कदम का समर्थन किया जाना चाहिए। प्रदर्शन में मुकेश कुमार प्रजापति, रवि चंद्र यादव, ईश्वर लाल चौधरी वा अन्य अधिवक्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 17:41:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>#UGC यूजीसी के नए नियम के विरोध में सौंपा गया ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जलालपुर, अम्बेडकरनगर।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">यूजीसी  (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग)(UGC) के नए नियमों से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को लेकर महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जलालपुर के उपजिलाधिकारी को सौंपा गया। यह ज्ञापन संत प्रसाद पांडे के नेतृत्व एवं अतेंद्र त्रिपाठी के संयोजन में दिया गया। ज्ञापन के माध्यम से यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों के कारण छात्रों, शिक्षकों एवं शैक्षणिक संस्थानों को होने वाली परेशानियों की ओर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया तथा संबंधित बिल को वापस लिए जाने की मांग की गई।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इस अवसर पर अतेंद्र त्रिपाठी, संत प्रसाद पांडे, अधिवक्ता महेंद्र सिंह, अधिवक्ता सत्य प्रकाश मिश्रा, अधिवक्ता आशुतोष,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167501/ugc-memorandum-submitted-in-protest-against-new-rules-of-ugc"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img-20260127-wa0351_copy_903x756.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जलालपुर, अम्बेडकरनगर।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">यूजीसी  (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग)(UGC) के नए नियमों से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को लेकर महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जलालपुर के उपजिलाधिकारी को सौंपा गया। यह ज्ञापन संत प्रसाद पांडे के नेतृत्व एवं अतेंद्र त्रिपाठी के संयोजन में दिया गया। ज्ञापन के माध्यम से यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों के कारण छात्रों, शिक्षकों एवं शैक्षणिक संस्थानों को होने वाली परेशानियों की ओर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया तथा संबंधित बिल को वापस लिए जाने की मांग की गई।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इस अवसर पर अतेंद्र त्रिपाठी, संत प्रसाद पांडे, अधिवक्ता महेंद्र सिंह, अधिवक्ता सत्य प्रकाश मिश्रा, अधिवक्ता आशुतोष, विमलेश दुबे, ब्रह्म प्रकाश तिवारी, मंजुल, जीवन प्रकाश, हरि मोहन चतुर्वेदी सहित दर्जनों लोगों ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दर्ज कराया। ज्ञापन सौंपने वालों ने कहा कि यदि यूजीसी के नए नियमों पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 22:38:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ambedkarnagar Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एमएमटीटीसी से देशभर के हजारों लाभार्थी लाभान्वित</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अलीगढ़।</strong> भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 1987 में स्थापित यूजीसी अकादमिक स्टाफ कॉलेज, जिसका 2015 में नाम बदल कर यूजीसी मानव संसाधन केंद्र कर दिया गया था, को यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) में अपग्रेड किया गया है। केंद्रीय शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने 5 सितंबर 2023 को एमएमटीटीसी का शुभारंभ किया, जिसमें 116 ऐसे केंद्रों का अनावरण किया गया, जिनमें 66 एचआरडीसी और पीएमएमएमएनएमटीटी के तहत अन्य केंद्र शामिल हैं। एएमयू में सेंटर फॉर एकेडमिक लीडरशिप एंड एजुकेशन मैनेजमेंट (सीएएलईएम) का भी यूजीसी एमएमटीटीसी में विलय हो गया है।</p>
<p>यूजीसी एमएमटीटीसी,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141906/thousands-of-beneficiaries-across-the-country-benefited-from-mmttc"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/01pli05-(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अलीगढ़।</strong> भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 1987 में स्थापित यूजीसी अकादमिक स्टाफ कॉलेज, जिसका 2015 में नाम बदल कर यूजीसी मानव संसाधन केंद्र कर दिया गया था, को यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) में अपग्रेड किया गया है। केंद्रीय शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने 5 सितंबर 2023 को एमएमटीटीसी का शुभारंभ किया, जिसमें 116 ऐसे केंद्रों का अनावरण किया गया, जिनमें 66 एचआरडीसी और पीएमएमएमएनएमटीटी के तहत अन्य केंद्र शामिल हैं। एएमयू में सेंटर फॉर एकेडमिक लीडरशिप एंड एजुकेशन मैनेजमेंट (सीएएलईएम) का भी यूजीसी एमएमटीटीसी में विलय हो गया है।</p>
<p>यूजीसी एमएमटीटीसी, एएमयू की निदेशक डॉ फायजा अब्बासी ने बताया कि अपने नए संस्करण में यह केंद्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 पर आठ दिवसीय ऑनलाइन ओरिएंटेशन और सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम हर पखवाड़े आयोजित कर रहा है और एएमयू की कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून ने 2024-25 के कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है, जिसमें 12 फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम (एफआईपी), सब्जेक्ट रिफ्रेशर कोर्स (एसआरसी) और शॉर्ट टर्म कोर्स (एसटीसी) शामिल हैं।</p>
<p>यह केंद्र 24 ऑनलाइन एनईपी ओएसपी, एक ऑनलाइन एफआईपी और शिक्षक शिक्षा, पर्यावरण अध्ययन और सतत विकास एवं जैव विविधता संरक्षण में तीन एसआरसी भी संचालित करेगा। इसके अतिरिक्त, तीन एसटीसी प्रभावी एमओओसी डिजाइन करना, शिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग और प्रेजेंटेशन स्किल्स को कवर करेंगे।</p>
<p>डॉ. अब्बासी ने पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता बनाए रखने और बड़ी संख्या में प्रतिभागियों को आकर्षित करने में उनके सहयोग के लिए पाठ्यक्रम समन्वयकों और संसाधन व्यक्तियों की प्रशंसा की। उन्होंने भारत के लगभग सभी राज्यों के विश्वविद्यालय और कॉलेज के शिक्षकों को उनके निरंतर व्यावसायिक विकास के लिए एएमयू के एचआरडीसी को चुनने के लिए भी धन्यवाद दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jun 2024 17:26:55 +0530</pubDate>
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