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                <title>  swatantra vichar - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>  swatantra vichar RSS Feed</description>
                
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                <title>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ केवल संगठन नहीं एक परिवार है</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज शताब्दी वर्ष मना रहा है संघ को जो लोग समाचार पत्रों से टेलीविजन से एवं अन्यान्य लोगों से सुनते और समझते हैं उन्हें संघ केवल एक हिन्दुओं का संगठन समझ में आता होगा लेकिन जब आप संघ में आकर, जुड़कर साथ मिलकर काम करेंगे तो ध्यान में आएगा कि मैं एक संगठन से ही नहीं बल्कि एक परिवार से भी जुड़े हैं। इस विषय में मैं अपना स्वयं का अनुभव भी साझा कर रहा हूं - मेरी संघ आयु लगभग 20 वर्ष हो रही है मैं संघ में सामान्य स्वयंसेवक, गटनायक, गणशिक्षक, मुख्य शिक्षक से लेकर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159116/rashtriya-swayamsevak-sangh-is-not-just-an-organization-but-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/राष्ट्रीय-स्वयंसेवक-संघ-केवल-संगठन-नहीं-एक-परिवार-है1.jpg" alt=""></a><br /><p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज शताब्दी वर्ष मना रहा है संघ को जो लोग समाचार पत्रों से टेलीविजन से एवं अन्यान्य लोगों से सुनते और समझते हैं उन्हें संघ केवल एक हिन्दुओं का संगठन समझ में आता होगा लेकिन जब आप संघ में आकर, जुड़कर साथ मिलकर काम करेंगे तो ध्यान में आएगा कि मैं एक संगठन से ही नहीं बल्कि एक परिवार से भी जुड़े हैं। इस विषय में मैं अपना स्वयं का अनुभव भी साझा कर रहा हूं - मेरी संघ आयु लगभग 20 वर्ष हो रही है मैं संघ में सामान्य स्वयंसेवक, गटनायक, गणशिक्षक, मुख्य शिक्षक से लेकर विस्तारक और जिला प्रचारक तक के सघन दायित्वों का निर्वहन करते हुए आज भी सक्रिय दायित्व में रहकर काम कर रहा हूं। हमको जब कभी जहां संघ का कार्य करने का अवसर मिला, नए - नए क्षेत्रों में गया, नए - नए स्वयंसेवकों से मिला हमे सभी जगह अपनापन मिला, एक परिवार जैसा भाव मिला।</p>
<p>संघ में एक व्यवस्था के नाते कोई अधिकारी है तो कोई सामान्य कार्यकर्ता बस वास्तव में है तो सभी भाई साहब ही। संघ में प्रत्येक स्वयंसेवक की संभाल व देखरेख, शारीरिक और बौद्धिक , चारित्रिक प्रशिक्षण परिवार भावना से किया जाता है। मेरा आठ वर्ष का प्रचारक जीवन रहा है मै नए स्थानों पर काम करने गया। नए पुराने स्वयंसेवकों से मिला सभी ने मुझे पुत्रवत, भातृत्व स्नेह दिया, कभी यह नहीं लगा कि हम अपने परिवार से दूर हैं। संघ में अधिकारी और स्वयंसेवक के बीच कोई अंतर नहीं रहता बस यही लगता है कि भाई साहब हमारे परिवार के मुखिया हैं। स्वयंसेवक का परिवार बिल्कुल अपना परिवार जैसा ही लगता है।</p>
<p>मैं यहां एक घटना की भी चर्चा करूंगा - इसी लखनऊ पश्चिम भाग में मै मालवीय नगर में विस्तारक था एक दिन शाम को शाखा के बाद रात्रि भोजन पर नगर कार्यवाह श्री विनय जी के यहां भोजन पर गया उसी समय मुझे तेज बुखार आ गया, भोजन करना भी कठिन हो गया तुरन्त नगर कार्यवाह जी ने बुखार नापा और दवाई दी अपने यहां ही रुकने का आग्रह किया मैने कहा कि कार्यालय ही रुकेंगे उन्होंने रात में ही कार्यालय भारती भवन राजेन्द्र नगर में छोड़ गए और प्रातः ही आकर फिर हाल चाल लिया व दवाई इत्यादि की व्यवस्था की। अब यह भाव केवल संघ में ही देखने को मिलते हैं।  सन २०२० में प्रचारक जीवन से वापस लौट आने के बाद भी हमारे सभी स्वयंसेक परिवारिक वातावरण के साथ आज भी मिलते हैं।</p>
<p>हम जब बाहर के अन्य संगठनों को देखते हैं तो वहां कहीं न कहीं स्वार्थ, राजनैतिक महत्वाकांक्षा, पद का मोह दिखाई पड़ता है लेकिन संघ विशुद्ध पारिवारिक संगठन है। अभी ९ माह पूर्व मेरी मेरी धर्म पत्नी शिविल हॉस्पिटल लखनऊ में एडमिट थी मैने संकोच बस किसी को नहीं बताया कि सभी परेशान होंगे, लेकिन किसी तरह हमारे स्वयंसेवकों को पता चला तो सभी कार्यकर्ताओं ने हाथों हांथ लिया। भोजन आदि की व्यवस्था भी किया रोज कोई न कोई स्वयंसेवक दोनों समय का भोजन हॉस्पिटल पहुंचा जाता।</p>
<p>अब यही भाव ही परिवार भाव है। संघ में हम लोग गीत भी गाते हैं कि शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है..... मेरा समाज के लोगों से आग्रह है कि संघ को साहित्य से पढ़कर नहीं समझा जा सकता संघ जानना है तो शाखा में आइए। संघ जैसा दुनियां में कोई नहीं.... संघ के अपने अनुभव को शब्दों में लिख पाना बहुत मुश्किल है। अबिगत- गति कछु कहत न आवै। ज्यों गूँगे मीठे फल कौ रस अंतरगत ही भावै।।</p>
<p><strong>बालभास्कर मिश्र</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचारधारा</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Nov 2025 18:05:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जंगलराज और बाहुबलियों के भय से मुक्त होता - बिहार </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बि</strong>हार में चार दशक पूर्व जब भी चुनावों का जिक्र होता था तो बरबस आँखो के सामने जंगलराज  की तस्वीर ही उभर जाया करती हे जिसमें चुनाव का मतलब या तो जीत होता था और चुनाव की हार का मतलब सिर्फ मौत ही होता था! देश के राजनीतिक दलों के नेताओं की बिहार में  सत्ता स्वार्थ की लालसा ने धनबल ,बाहुबल और आपराधिक प्रवृति के दाग दार लोगों को राजनीति में जब से शरण दी हे तब से सता का अर्थ ही बदल गया हे ! </div>
<div>  </div>
<div>बिहार में कभी सत्ता का मतलब भय भूख और बंदूक बन गया था</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158776/would-have-been-free-from-the-fear-of-jungle-raj"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/rajneeti.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बि</strong>हार में चार दशक पूर्व जब भी चुनावों का जिक्र होता था तो बरबस आँखो के सामने जंगलराज  की तस्वीर ही उभर जाया करती हे जिसमें चुनाव का मतलब या तो जीत होता था और चुनाव की हार का मतलब सिर्फ मौत ही होता था! देश के राजनीतिक दलों के नेताओं की बिहार में  सत्ता स्वार्थ की लालसा ने धनबल ,बाहुबल और आपराधिक प्रवृति के दाग दार लोगों को राजनीति में जब से शरण दी हे तब से सता का अर्थ ही बदल गया हे ! </div>
<div> </div>
<div>बिहार में कभी सत्ता का मतलब भय भूख और बंदूक बन गया था जहां राज्य का विकास सता के इदगिर्द रह रहे नेताओं तक ही सिमट कर रह जाता था ! बाहुबलियों के आसरे राज्य सरकार के चलने का नतीजा बिहार में यह हुआ कि क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों ने जातिवाद के नाम पर राज्य के जनमानस में अपना दबदबा अन्दर तक बना लिया था जिसके चलते वर्षों तक क्षेत्रीय दल राज्य की सत्ता में दशकों तक हावी रहे जिसकी वजह से बिहार विकास की राह से निरंतर पिछड़ता चला गया ! बिहार में इस बार के विधानसभा चुनाव में बिहारियों का जनमानस एकदम  बदला बदला सा नजर आ रहा हे !</div>
<div> </div>
<div>इक्कीसवीं सदी के बिहार के नौजवान युवा मतदाता जात पात से ऊपर उठकर अपना और बिहार का विकास चाहते हे इसलिए वह जंगलराज के नेताओं और बाहुबलियों के भय से जरा भी खौफ जदा नहीं हे ! दशको बाद पहली बार बिहार में बिना बंदूक के भय से इस बार विधानसभा के चुनावो का होना न केवल बिहार की पूरी एक पीढ़ी के लिए बल्कि समूचे देश की जनता के लिए यह अच्छा शुभ सन्देश भी हे कि बिहार का जनमानस और  बिहार का मतदाता अब राजनेताओ की बपोती नही रहा हे जो बाहुबलियों की बंदूक के भय से अपना मत बदल दे !</div>
<div> </div>
<div>बिहार का युवा मतदाता अब भयमुक्त विकासशील सरकार राज्य में लाना चाहते हे जो राज्य के बिहारी युवाओं के सपनों को साकार कर सकें ! बिहार को अपने स्वर्ण युग की और वापस लौटना हे तो हर बिहारवासी को जंगलराज और बाहुबलियों के भय से मुक्त होना ही होगा ! </div>
<div> </div>
<div>
<p><strong>अरविंद रावल</strong></p>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Nov 2025 21:52:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिहार चुनाव से लागू होंगे नए ईवीएम बैलेट पेपर डिज़ाइन, तस्वीरें होंगी रंगीन</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से जुड़े नियमों में एक अहम बदलाव करते हुए मतदाताओं की सुविधा और मतदान प्रक्रिया की स्पष्टता बढ़ाने के लिए बैलेट पेपर के डिजाइन और प्रिंटिंग से संबंधित दिशानिर्देशों में संशोधन किया है। इस बदलाव के तहत अब पहली बार उम्मीदवारों की तस्वीरें रंगीन रूप में ईवीएम बैलेट पेपर पर छापी जाएंगी। उम्मीदवार का चेहरा तस्वीर के तीन-चौथाई हिस्से को घेरेगा ताकि वह साफ और आसानी से पहचाना जा सके। यह कदम मतदाताओं को मतदान के समय सही उम्मीदवार को पहचानने में मदद करेगा और चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाएगा। चुनाव आयोग</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155242/68c97372b829f"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/बिहार-चुनाव-से-लागू-होंगे-नए-ईवीएम-बैलेट-पेपर-डिज़ाइन,-तस्वीरें-होंगी-रंगीन.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से जुड़े नियमों में एक अहम बदलाव करते हुए मतदाताओं की सुविधा और मतदान प्रक्रिया की स्पष्टता बढ़ाने के लिए बैलेट पेपर के डिजाइन और प्रिंटिंग से संबंधित दिशानिर्देशों में संशोधन किया है। इस बदलाव के तहत अब पहली बार उम्मीदवारों की तस्वीरें रंगीन रूप में ईवीएम बैलेट पेपर पर छापी जाएंगी। उम्मीदवार का चेहरा तस्वीर के तीन-चौथाई हिस्से को घेरेगा ताकि वह साफ और आसानी से पहचाना जा सके। यह कदम मतदाताओं को मतदान के समय सही उम्मीदवार को पहचानने में मदद करेगा और चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाएगा। चुनाव आयोग ने इस बदलाव की शुरुआत बिहार से करने का निर्णय लिया है। बिहार विधानसभा चुनाव की तारीख़ों की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">लेकिन संभावना है कि चुनाव अक्टूबर या नवंबर </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">2025</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi"> के पहले या दूसरे सप्ताह में कराए जाएं। इस समय-सारिणी को दिवाली और छठ जैसे प्रमुख त्यौहारों को ध्यान में रखकर तय किया जाएगा। वर्तमान बिहार विधानसभा का कार्यकाल </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">22</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi"> नवंबर </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">2025</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi"> को समाप्त हो रहा है</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">इसलिए चुनाव प्रक्रिया इससे पहले पूरी कर ली जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार ईवीएम बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों और नोटा के सीरियल नंबर अब अंतरराष्ट्रीय भारतीय अंकों के रूप में छापे जाएंगे। इन अंकों का आकार </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">30</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi"> पॉइंट फॉन्ट में बोल्ड होगा ताकि मतदाताओं को आसानी से दिखाई दे। इसके अलावा सभी उम्मीदवारों और नोटा के नाम एक ही फॉन्ट प्रकार और एक ही फॉन्ट आकार में बड़े अक्षरों में छापे जाएंगे। इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी नाम समान रूप से स्पष्ट और आसानी से पढ़ने योग्य हों</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिससे मतदाताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। बैलेट पेपर को </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">70</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi"> जीएसएम के कागज़ पर छापा जाएगा</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जो अधिक मजबूत और स्पष्ट प्रिंट प्रदान करेगा। विधानसभा चुनावों के लिए इन बैलेट पेपरों का रंग गुलाबी होगा और इसके लिए विशेष आरजीबी मान तय किए गए हैं</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ताकि सभी बैलेट पेपर एकसमान दिखें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">चुनाव आयोग ने यह संशोधन चुनाव संचालन नियम</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, 1961</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi"> के नियम </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">49</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बी के तहत किया है। आयोग का कहना है कि मतदान प्रक्रिया को सरल</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">पारदर्शी और मतदाताओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के प्रयासों के तहत यह कदम उठाया गया है। पिछले छह महीनों में आयोग ने चुनाव प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के लिए </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">28</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi"> अहम सुधार किए हैं</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">और यह बदलाव उसी श्रृंखला का हिस्सा है। आयोग का मानना है कि जब मतदाता ईवीएम पर उम्मीदवार का नाम और उसका चेहरा स्पष्ट रूप से देखेंगे</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तो मतदान के दौरान भ्रम की संभावना कम होगी और गलतियों की गुंजाइश भी घटेगी। यह खास तौर पर उन इलाकों के लिए महत्वपूर्ण होगा</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जहां साक्षरता दर कम है या जहां समान नाम वाले उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हों।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बिहार विधानसभा चुनाव इस नई व्यवस्था को लागू करने का पहला अवसर होगा। इसके बाद इसे देश के अन्य राज्यों के चुनावों में भी लागू किया जाएगा। आयोग का मानना है कि यह सुधार ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों के मतदाताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगा</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जहां कई बार उम्मीदवारों की पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती है। रंगीन तस्वीरें इस भ्रम को दूर करने में अहम भूमिका निभाएंगी। इसके साथ ही स्पष्ट और बोल्ड नंबरिंग तथा समान फॉन्ट का प्रयोग चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को और मज़बूत करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ईवीएम बैलेट पेपर में किए गए इन सुधारों का एक और लाभ यह है कि मतदाता मतदान केंद्र पर कम समय लेंगे</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">क्योंकि उन्हें सही उम्मीदवार को पहचानने में ज्यादा समय नहीं लगाना पड़ेगा। इससे मतदान की गति तेज होगी और लंबी कतारों की समस्या भी कुछ हद तक कम हो सकती है। चुनाव आयोग का कहना है कि इस तरह के सुधार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और सुदृढ़ बनाते हैं और मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">इस बदलाव का एक व्यावहारिक पहलू यह भी है कि बैलेट पेपर के लिए चुना गया </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">70</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi"> जीएसएम का गुलाबी कागज़ न केवल आकर्षक दिखेगा</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि टिकाऊ भी होगा</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिससे प्रिंट की गुणवत्ता बनी रहेगी और बैलेट पेपर पर छपी जानकारी आसानी से पढ़ी जा सकेगी। चुनाव आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सभी नाम और नंबर एकसमान शैली में प्रस्तुत किए जाएं ताकि किसी भी उम्मीदवार को कोई अनुचित लाभ न मिले।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">इन सुधारों को लागू करने से चुनाव आयोग की यह कोशिश साफ झलकती है कि वह मतदान प्रक्रिया को न केवल तकनीकी रूप से बेहतर बनाना चाहता है</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि मतदाताओं के लिए अधिक उपयोगकर्ता-मित्रवत भी बनाना चाहता है। रंगीन तस्वीरें</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">स्पष्ट नंबर और उच्च गुणवत्ता वाले बैलेट पेपर जैसी पहलें मतदाताओं के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। बिहार से शुरू होकर यह सुधार देशभर के चुनावों में पारदर्शिता और स्पष्टता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। चुनाव आयोग को उम्मीद है कि इन बदलावों से मतदाता न केवल अधिक सहजता से मतदान कर पाएंगे</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><span lang="en-in" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;line-height:normal;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Sep 2025 15:01:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: भक्ति, संस्कृति और जीवन का उत्सव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं में कृष्ण जन्माष्टमी का स्थान अत्यंत विशेष है। यह केवल भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण का पर्व ही नहीं, बल्कि भक्ति, आनंद और नैतिक मूल्यों के पुनर्स्मरण का भी अवसर है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, आधी रात के समय, मथुरा की कारागार में देवकी और वसुदेव के घर श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। यह समय धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पावन माना जाता है, क्योंकि इसी क्षण धर्म की पुनर्स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए विष्णु के आठवें अवतार का पृथ्वी पर आगमन हुआ।<br /><strong>ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि</strong><br />महाभारत, भागवत पुराण, विष्णु</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153962/sri-krishna-janmashtami-celebration-of-devotional-culture-and-life"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/shri-krishna.png" alt=""></a><br /><p>भारत की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं में कृष्ण जन्माष्टमी का स्थान अत्यंत विशेष है। यह केवल भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण का पर्व ही नहीं, बल्कि भक्ति, आनंद और नैतिक मूल्यों के पुनर्स्मरण का भी अवसर है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, आधी रात के समय, मथुरा की कारागार में देवकी और वसुदेव के घर श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। यह समय धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पावन माना जाता है, क्योंकि इसी क्षण धर्म की पुनर्स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए विष्णु के आठवें अवतार का पृथ्वी पर आगमन हुआ।<br /><strong>ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि</strong><br />महाभारत, भागवत पुराण, विष्णु पुराण और हरिवंश पुराण जैसे ग्रंथों में श्रीकृष्ण की जन्मकथा विस्तार से वर्णित है। कथा के अनुसार, मथुरा के राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और उनके पति वसुदेव को बंदीगृह में डाल दिया, क्योंकि भविष्यवाणी हुई थी कि देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा। सात संतानों का अंत करने के बाद, आठवें पुत्र के जन्म के समय चमत्कारिक घटनाएं घटित हुईं—कारागार के द्वार स्वतः खुल गए, पहरेदार निद्रा में चले गए और यमुना नदी वसुदेव के मार्ग से हट गई। इस प्रकार बालक कृष्ण को गोकुल में यशोदा और नंद के घर पहुंचाया गया।<br />यह कथा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक भी है।<br /><strong>पूजा और व्रत की परंपराएं</strong><br />कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भक्तजन प्रातः स्नान कर, व्रत का संकल्प लेते हैं। पूरे दिन उपवास रखा जाता है और रात्रि में निशीथ काल (मध्य रात्रि) में भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है। मंदिरों और घरों में झांकी सजाई जाती है, जिसमें बालक कृष्ण को पालने में विराजमान किया जाता है। माखन-मिश्री, पंचामृत, तुलसी पत्र, और विभिन्न प्रकार के फल भोग स्वरूप अर्पित किए जाते हैं।<br /><strong>मुख्य धार्मिक अनुष्ठान</strong><br />झूलन सेवा – भगवान कृष्ण की प्रतिमा को पालने में झुलाया जाता है।<br />अभिषेक – दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है।<br />भजन-कीर्तन – मंदिरों में अखंड भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।<br />भागवत कथा – श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों का वाचन और श्रवण किया जाता है।<br />सांस्कृतिक उत्सव और ‘दही-हांडी’<br />कृष्ण जन्माष्टमी का एक अत्यंत लोकप्रिय सांस्कृतिक पहलू है दही-हांडी, जो विशेषकर महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। यह आयोजन श्रीकृष्ण के बाल्यकाल की उस चंचलता को जीवंत करता है, जब वे अपने मित्रों संग माखन और दही चुराने की लीलाएं करते थे। ऊंचाई पर लटकाई गई मटकी को मानव पिरामिड बनाकर फोड़ना, टीम भावना, साहस और उत्साह का प्रतीक बन चुका है।<br /><strong>भक्ति और दर्शन</strong><br />श्रीकृष्ण का जीवन केवल चमत्कारों से भरा हुआ नहीं, बल्कि गहन दार्शनिक और व्यावहारिक शिक्षाओं से भी परिपूर्ण है। गीता का उपदेश, जो उन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में अर्जुन को दिया, आज भी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रासंगिक है—<br />कर्म का महत्व – "कर्मण्येवाधिकारस्ते"<br />असक्ति का भाव – फल की चिंता छोड़ कर कर्म करना।<br />धर्म की रक्षा – अन्याय और अधर्म के विरुद्ध खड़े होना।<br />कृष्ण भक्ति का आधार प्रेम है—ऐसा प्रेम जो न तो जाति-धर्म से बंधा है, न लाभ-हानि से। गोपियों की निस्वार्थ भक्ति इसका श्रेष्ठ उदाहरण है।<br /><strong>ग्रामीण और शहरी परिवेश में उत्सव</strong><br />ग्रामीण भारत में जन्माष्टमी पर मेलों का आयोजन होता है। गांव के चौपाल या मंदिर में रातभर भजन-कीर्तन, रास-लीला और लोकनृत्य होते हैं। महिलाएं घरों में रंगोली बनाती हैं, दीप जलाती हैं और छोटे-छोटे पदचिह्न सजाकर भगवान के आगमन का स्वागत करती हैं।<br />शहरी क्षेत्रों में मंदिरों में विशेष सजावट, रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी भजन, प्रवचन और लाइव दर्शन का प्रसार होता है, जिससे दूर-दराज के भक्त भी इस उत्सव में भाग ले पाते हैं।<br /><strong>संदेश और आधुनिक प्रासंगिकता</strong><br />आज के दौर में, जब समाज में भौतिकता, प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत स्वार्थ बढ़ रहे हैं, कृष्ण जन्माष्टमी हमें यह याद दिलाती है कि जीवन का सार प्रेम, करुणा और सत्य में है। श्रीकृष्ण का जीवन हमें यह सिखाता है कि संकट के समय धैर्य रखना, परिस्थिति के अनुसार बुद्धिमानी से कार्य करना और धर्म के मार्ग पर अडिग रहना ही सच्ची सफलता है।<br />उनका बालरूप मासूमियत का प्रतीक है, यौवन रचनात्मकता और साहस का, और गीता के उपदेश आध्यात्मिक परिपक्वता का।<br /><strong>निष्कर्ष-</strong> कृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक सां</p>
<p>स्कृतिक महोत्सव है जो भारत की विविधता को एक सूत्र में पिरोता है। इसमें भक्ति की गहराई, संस्कृति की समृद्धि और जीवन मूल्यों की प्रेरणा एक साथ समाहित हैं। यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि अन्याय के अंधकार में भी, यदि विश्वास और धर्म का दीप जलाया जाए, तो विजय निश्चित है।<br /><strong>भगवान कृष्ण की वाणी में —</strong> "जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं अवतार लेता हूं।"<br />इस विश्वास के साथ, हर वर्ष जन्माष्टमी हमें अपने भीतर के कृष्ण को खोजने और जीवन को प्रेम, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलाने की प्रेरणा देती है।</p>
<p><strong>महेन्द्र तिवारी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Aug 2025 18:48:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है</title>
                                    <description><![CDATA[<p>शीर्षक पढ़कर चौंकिए बिलकुल मत। मै आज आपसे ये फिल्मी गीत गाने या सुनने के लिए बिल्कुल कहने वाला नहीं हूँ। ये गीत तो मुझे बरबस याद आ   गया जब मैंने सुना/पढ़ा कि देश के मुख्य न्यायाधीश ने 'मार्निग वाक् ' यानि सुबह की सैर करना बंद कर दी है ,क्योंकि दिल्ली की हवा अब जानलेवा हो चुकी है। मुझे जिस देश में गंगा बहती है गीत लिखने वाले कवि शैलेन्द्र की किस्मत पर गर्व है कि  वे ये गीत लिखते समय आज हमारे साथ नहीं हैं,अन्यथा आज यदि यही गीत  उन्हें लिखने को कहा जाता तो मुमकिन है कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145758/we-are-residents-of-the-country-where-ganga-flows"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/cji-2.webp" alt=""></a><br /><p>शीर्षक पढ़कर चौंकिए बिलकुल मत। मै आज आपसे ये फिल्मी गीत गाने या सुनने के लिए बिल्कुल कहने वाला नहीं हूँ। ये गीत तो मुझे बरबस याद आ   गया जब मैंने सुना/पढ़ा कि देश के मुख्य न्यायाधीश ने 'मार्निग वाक् ' यानि सुबह की सैर करना बंद कर दी है ,क्योंकि दिल्ली की हवा अब जानलेवा हो चुकी है। मुझे जिस देश में गंगा बहती है गीत लिखने वाले कवि शैलेन्द्र की किस्मत पर गर्व है कि  वे ये गीत लिखते समय आज हमारे साथ नहीं हैं,अन्यथा आज यदि यही गीत  उन्हें लिखने को कहा जाता तो मुमकिन है कि  वे कुछ और लिखते।</p>
<p>बात दिल्ली की आवो-हवा की है लेकिन मुझे तो पूरे देश की आवो-हवा में जहर घुला महसूस होता है।  पहले ये हवा कम से कम सांस लेने लायक तो थी ,लेकिन अब दो ये दमघोंटू हो गयी है। मुख्य न्यायाधीश क्या खुद भगवान भी दिल्ली और देश की आवो-हवा में सांस नहीं ले सकते।  हमारे यहां खासकर दिल्ली में प्रदूषण हवा का भी है और सियासी हवा का भी। इस प्रदूषण के लिए जिम्मेवार लोग भी हमारे अपने हैं इसलिए उनके खिलाफ न हम कुछ कर सकते हैं और न मुख्य न्यायाधीश। हमारे पास एक ही विकल्प है कि  हम अपने घर में खुद को नजरबंद कर लें।</p>
<p>कुछ साल पहले मैं चीन गया था । वहां मैंने शंघाई और बीजिंग में भी कमोवेश यही हालात देखे थे जो आज हमारे देश की राजधानी दिल्ली में आज हैं। सीजेआई या दूसरे लोग तो अपने आपको अपने बंगलों में नजरबंद कर प्रदूषण से बच सकते हैं किन्तु वो आम आदमी कैसे अपना बचाव कर सकता है जो खुद दड़बेनुमा फ्लैटों या झुग्गियों में रहता है ? उसके पास तो रोज  कुआ  खोदने और रोज पानी  पीने की मजबूरी है।  उसकी जान तो उसकी हथेली पर रखी हुई। उसे हथेली लगाने वाला कौन है ? दिल्ली और देश की आवो-हवा खराब करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत  न विधायका के पास है न  कार्यपालिका के पास और अब तो न्यायपालिका भी हथियार डाले हुए दिखाई दे रही है। सबके सब श्टुतमुर्ग़ी मुद्रा में हैं। इससे जाहिर है की हमारे देश में इंसान की जिंदगी किसी कीड़े-मकोड़े की जिंदगी से ज्यादा अहम नहीं है।</p>
<p> चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ किस्मत वाले हैं। उन्होंने  अनौपचारिक बातचीत में पत्रकारों से कहा कि दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के चलते उन्होंने मॉर्निंग वॉक पर जाना बंद कर दिया है। सीजेआई ने ये फैसला उनके डॉक्टर की सलाह के बाद किया है। आम आदमी को तो डाक्टर  की सलाह  भी मयस्सर नहीं है। आपको पता ही होगा कि  दिल्ली का औसत एक्यूआई 340 पहुंच गया। सामान्य स्थिति में यह 50 के आसपास रहता है। 50 से ज्यादा एक्यूआई वाली हवा सेहत के लिए नुकसानदेह होती है। 300 एक्यूआई वाली हवा बेहद खतरनाक होती है। इससे लोगों को गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।</p>
<p>जानलेवा आवो-हवा की वजह से दिल्ली के अस्पतालों में श्वास संबंधी मामलों में 30 से 40 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। श्वास रोग विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चे और बुजुर्ग प्रदूषण के दुष्प्रभावों के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं। उन्होंने लोगों को घर से बाहर नहीं निकलने और धूल के संपर्क में आने से बचने की सलाह दी। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पिछले एक हफ्ते से अधिक समय से ‘खराब’ श्रेणी में है। लेकिन कोई राजनीतिक दल, कोई सत्ता आम जनता को शुद्ध हवा मुहैया करने की गारंटी लेने या देने को राजीनहीं है। आप ने देखा ही होगा की दिल्ली में यमुना फसूकर डाल रही है।</p>
<p>आप ये जानकर शायद चौंके कि  भारत के दस सबसे बड़े शहरों में सात फीसदी मौतों के लिए वायु प्रदूषण जिम्मेदार है।   एक विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में दसियों हजारों लोगों की जानें बचाने के लिए फौरन कदम उठाए जाने की जरूरत है। बड़े पैमाने पर हुए शोध के बाद वैज्ञानिकों ने कहा है कि दिल्ली समेत तमाम बड़े शहरों की जहरीली हवा लोगों के फेफड़ों को बुरी तरह प्रभावित कर रही है और आने वाले समय में स्वास्थ्य के लिए यह और बड़ा खतरा बन सकता है। देश कि अनेक संवेदनशील भारतीय वैज्ञानिकों के साथ मिलकर किए गए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अहमदाबाद, बेंगलुरू, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, पुणे, शिमला और वाराणसी में पीएम 2.5 माइक्रोपार्टिकल के स्तर का अध्ययन किया. यह पार्टिकल कैंसर के लिए जिम्मेदार माना गया है।</p>
<p>चर्चित लांसेट प्लेनेटरी हेल्थ' पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक  2008 से 2019 के बीच कम से कम 33 हजार लोगों की जान इसी पीएम 2.5 पार्टिकल के कारण गई।  यह इस अवधि में इन दस शहरों में हुईं कुल मौतों का 7.2 फीसदी है. वैज्ञानिकों ने इन शहरों में हुईं लगभग 36 लाख मौतों का विश्लेषण किया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पीएम 2.5 पार्टिकल का प्रति घन मीटर 15 माइक्रोग्राम से ज्यादा का स्तर सेहत के लिए खतरनाक है. लेकिन भारत में यह स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रखा गया है जो डब्ल्यूएचओ की सिफारिश से चार गुना है। लेकिन भारत सरकार हो या दिल्ली सरकार या पंजाब या हरियाणा सरकार, सबके सब बेफिक्र हैं। उन्हें तो सिर्फ वोट चाहिए  और सत्ता भी।</p>
<p>इस खतरनाक मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल या तो मौन हैं या फिर एक दूसरे  के ऊपर आरोप -प्रत्यारोप लगाने में मशगूल है।  समस्या का हल खोजने में किसी की दिलचस्पी नहीं है। सभी की दिलचस्पी चुनावों में है।  गठबंधन करने में है। सीटें बांटने में  है। जबकि मौतों के मामले में सबसे ज्यादा खतरनाक दिल्ली  हो चुकी है  यहां  सालाना लगभग 12 हजार यानी 11.5 फीसदी लोगों की जान वायु प्रदूषण के कारण हुई। हम इस बात पर गर्व करें या शर्म की हमारी प्यारी दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है। वैसे भी  भारत को पिछले साल दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में से एक आंका गया था।</p>
<p><br />प्रदूषण के कारण पूरे देश में लोग मर रहे हैं।अहमदाबाद में 2,495, बेंगलुरू में 2,102, चेन्नई में 2,870, दिल्ली में 11,964, हैदराबाद में 1,597, कोलकाता में 4,678, मुंबई में 5,091, पुणे में 1,367, शिमला में 59 और वाराणसी में 831 लोगों की जान गयी ।  ग्वालियर जैसे मझोले  शहर में प्रदूषण जानलेवा है लेकिन यहां ' महारजियत ' जिंदाबाद है। शहर की आवो-हवा को सुधारने की वजाय यहां के भाग्यविधाता भारतीय गणराज्य में 78  साल पहले विलीन हो चुके सिंधिया स्टेट के  राजवंश के  चिन्हों से शहर को चमकाने में लगे हुए हैं। फिर भी बकौल शैलेन्द्र हम गाते नहीं थकते की -<br />होठों पे सच्चाई रहती है, जहाँ दिल में सफ़ाई रहती है, हम उस देश के वासी हैं, जिस देश में गंगा बहती है।।<br />हमारे देश में गंगा जरूर बाह रही है लेकिन उसका जल यानि गंगाजल भी जानलेवा है। गंगा अपने जीवन के लिए खुद संघर्ष कर रही है और गंगापुत्र को कुछ दिखाई या सुनाई नहीं दे रहा। हमारे भाग्यविधाता जनता की मानसिकता से वाकिफ ai।  उन्हें पता ही की हमारे देश की जनता तो अलग ही स्वभाव की है।  वो गाते हुए नहीं थकती की- मेहमां जो हमारा होता है, वो जान से प्यारा होता है, ज़्यादा की नहीं लालच हमको, थोड़े में गुज़ारा होता है।।</p>
<p>कवि शैलेन्द्र ने इंसान को पहचानने में पूरब वालों पर तंज कैसा था लेकिन उन्होंने भी माना था की पूरब वाले हर जान की कीमत जानते हैं ,लेकिन पश्चिम वालों के लिए जान की कोई कीमत है ही नहीं।  किसी की जान यदि यहां १० हजार रूपये है तो किसी की १० लाख रूपय। कोई किस्मत वाला है तो उसके परिजनों को उसकी जान की कीमत एक करोड़ रूपये भी मिल सकती है ,लेकिन ' जान की अमान ' कोई नहीं दे सकता। अब गेंद न सरकार के पीला में है और न अदलात के पाले मे।  अब गेंद जनता के पीला में ह।  जनता को खुद ही प्रदूषण के दैत्य के खिलाफ खड़ा होना होग।  जो प्रदूषण फ़ैलाने वाले हैं उनकी गार्डन पकड़ना hog। अन्यथा शौक से मरिये ,क्योंकि हम जिस देश के वासी हैं ,उस देश में गंगा तो बह ही रही है।  </p>
<p><strong>राकेश अचल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Oct 2024 17:45:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रदूषण के खतरे। आगामी पीढ़ी की दुर्दशा से बेखबर ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>महात्मा गांधी ने खुद कहा है कि पृथ्वी पर सभी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संसाधन है, किंतु मानव की लालच को पूरा करने का कोई साधन नहीं है। आजादी हमें मिली है यानी कि मानव को परंतु प्रकृति आजादी से अछूती रही है। अमूमन हमारी जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान और जल की थी कि हमको उद्योग धंधे का विकास तीव्र गति से करना पड़ा। मशीनें जितनी बड़ी से बड़ी होती गई आदमी उतना ही बौना होता गया। आने वाली पीढ़ी इस प्रकृति और पर्यावरण के साथ मानवीय छेड़छाड़ और खिलवाड़ के परिणाम की दुर्दशा झेलने वाली है</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144856/dangers-of-pollution"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/environment_day04_4669006-m.webp" alt=""></a><br /><div>
<div>महात्मा गांधी ने खुद कहा है कि पृथ्वी पर सभी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संसाधन है, किंतु मानव की लालच को पूरा करने का कोई साधन नहीं है। आजादी हमें मिली है यानी कि मानव को परंतु प्रकृति आजादी से अछूती रही है। अमूमन हमारी जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान और जल की थी कि हमको उद्योग धंधे का विकास तीव्र गति से करना पड़ा। मशीनें जितनी बड़ी से बड़ी होती गई आदमी उतना ही बौना होता गया। आने वाली पीढ़ी इस प्रकृति और पर्यावरण के साथ मानवीय छेड़छाड़ और खिलवाड़ के परिणाम की दुर्दशा झेलने वाली है यकीनन हम और हमारा समाज इस बात से अनभिज्ञ और बेखबर है। कृषि में नई नई तकनीक ट्रैक्टर, रसायनिक उर्वरक, कीटनाशकों के प्रयोग से भूमि बंजर होकर हताहत होगई है।</div>
<div> </div>
<div>विकास का सही मायने माननीय शक्तियों के साथ ऊर्जा और उसकी शक्ति तथा सामर्थ्य का सही उपयोग ही होगा। जब से हमने विकास के पथ पर उड़ान भरी है उद्योगों की चिमनियों को ऊपर उठाया मोबाइल क्रांति का बटन दबाया ई-मेल पर सवार होकर विश्व संदेश को सुना तब से हमारे झरनों का कल-कल स्वर और संगीत बंद हो गया, पक्षियों का कलरव बंद हो गया पक्षी अब चीत्कार कर रहे हैं। नदी नाले सूखकर मृतप्राय हो गए हैं। समुद्र की लहरों की झंकार विलुप्त हो गई है और पानी खारा और खारा हो गया है। अब हमें यह सोचना है कि विकास के नाम पर हमें ग्रीन इंडिया चाहिए या इंटरनेट की सवारी पर डिजिटल इंडिया चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>बच्चों की झोली में इंटरनेट को डालकर डिजिटल जेनरेशन का सपना देखना चाहिए या प्रकृति की गोद में सुगंधित वायु की लहरों में खो जाना चाहिए। झरनों में बैठकर नौका विहार का आनंद लेना चाहिए या कंप्यूटर में बैठकर नेट खोल कर नन्हे मुन्ने की आंखों पर जोर डालकर उन्हें चश्में वाला बनाना चाहिए। हरा भरा हिंदुस्तान यानी कि ग्रीन इंडिया और डिजिटल इंडिया का सपना नदी के दो कभी ना मिलने वाले किनारे हैं। विकास के नाम पर असीमित उद्योग धंधों की बाढ़ आ गई है। भूमि समाप्त हो रही है साथ ही हमारी वायु विषैली हो गई है। रात में शहरी मकानों में बिजली के झालरों के सामने आकाश में रात्रि में चांद तारों की चमक फीकी पड़ गई है। जंगलों को हम ऐसे साफ करते गए जैसे वनों के विनाश की हमने शपथ ली है।</div>
<div> </div>
<div>नगर बने महानगर बने ,मकान बने किंतु अब घर गायब होते गए हमें तब अक्ल आई जब चिड़िया चुग गई खेत, हमें विकास के नाम पर मानवीय सभ्यता से जुड़ी जमीन पानी, हरियाली,पक्षी जानवर सब चाहिए केवल अंधाधुन्ध कंक्रीट का विकास या इंटरनेट की रफ्तार नहीं चाहिए। इसके लिए हमें संसाधनों के अंधाधुंध प्रयोग पर अंकुश लगाना होगा। संसाधनों का इस्तेमाल अतिरेक में नहीं होना चाहिए । हम प्राकृतिक परियोजना तथा परिस्थितिकी की परियोजनाओं का स्वागत करना होगा सम्मान करना होगा। हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सौर, पवन, बायोगैस, ज्वार तरंग लहरों को ऊर्जा का आधार बनाना होगा।</div>
<div> </div>
<div>भारत में परिस्थितियां बड़ी विषम है एक तरफ बड़े-बड़े चमचमाते लाइटों से नहाती दिल्ली ,मुंबई ,बेंगलुरु जैसे महानगरों की रंगीन सड़कें हैं, ऊंची ऊंची इमारतें हैं, तेज गति की मेट्रो है,वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का लुफ्त उठाते हुए युवक युवतियां है, दूसरी तरफ पसीने तरबतर किसान हैं कैरोसिन की चिमनी में बच्चों को शिक्षा देतीं माताएं हैं यानी कि इतनी डिजिटल विषमताएं भारत के अलावा विश्व के किसी भी कोने में नहीं है। भारत में विकास के नाम पर डिजिटलाइजेशन करने की आवश्यकता जरूर है पर गांव जंगलों नदियों और प्राकृतिक संसाधनों के निरस्तीकरण और विनाश की कीमत पर नहीं।</div>
<div> </div>
<div>हमें यह निर्णय करना होगा कि भारत के विकास की हरित क्रांति के साथ-साथ डिजिटल इंडिया भी विकास की गति को बढ़ा रहे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत कि हरित क्रांति का विकास ही डिजिटल इंडिया का स्वप्न को भी पूरा करेगा। इसके लिए स्वच्छ साफ-सुथरे संसाधन जैसे जल, खनिज, यूरेनियम ,थोरियम नहीं होगा तब तक नाभिकीय रिएक्टर की भट्टीयां कैसे चलेंगी। किसी कवि ने कहा है, "जो घर बनाओ तो एक पेड़ भी लगा लेना, पंछी सारे उपवन के चहचहा उठेंगे"</div>
<div>विकास का जो भी राजपथ हम तैयार करेंगे निश्चित तौर पर वह मार्ग हरित क्रांति या हरित विकास से होकर गुजरेगा, जिससे हम अपनी 141 करोड़ जनसंख्या को स्वच्छ पर्यावरण दे पाएंगे और एक नवीन भारत की संकल्पना को मूर्तरूप दे पाएंगे।</div>
<div> </div>
<div><strong>संजीव ठाकुर, स्तंभकार, चिंतक, लेखक,</strong></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Sep 2024 17:28:03 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राहुल विदेश में जाकर भारत के खिलाफ विषवमन क्यों करते हैं? </title>
                                    <description><![CDATA[<div>कांग्रेस नेता एवं लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर से विदेशी धरती पर भारत के खिलाफ जमकर उगला है । वह हाल ही में अमेरिका के दौरे पर थे और  वहां वे भारत के विरोध में बोलते हुए चीन के गुणगान कर रहे थे , जबकि यह सभी जानते हैं कि चीन भारत का कभी भी मित्र नहीं रहा है। अमेरिका में बैठकर राहुल भारत से बेहतर चीन को बता रहे हैं और भाजपा संघ को निशाना बना रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने विदेशी धरती से भारत के खिलाफ बोला हो,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144821/why-does-rahul-go-abroad-and-spew-venom-against-india%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/fdsgh.webp" alt=""></a><br /><div>कांग्रेस नेता एवं लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर से विदेशी धरती पर भारत के खिलाफ जमकर उगला है । वह हाल ही में अमेरिका के दौरे पर थे और  वहां वे भारत के विरोध में बोलते हुए चीन के गुणगान कर रहे थे , जबकि यह सभी जानते हैं कि चीन भारत का कभी भी मित्र नहीं रहा है। अमेरिका में बैठकर राहुल भारत से बेहतर चीन को बता रहे हैं और भाजपा संघ को निशाना बना रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने विदेशी धरती से भारत के खिलाफ बोला हो, इससे पहले भी कई बार  अपने विदेशी दौरे के दौरान भारत के खिलाफ बयान बाजी कर चुके हैं। उनके इस रवैए को क्या कहा जाए, क्या यह देशद्रोह नहीं है? क्या उन्हें अपने देश से प्रेम नहीं है। भारत में रहकर सरकार की खिंचाई करना तो समझ में आता है लेकिन विदेशी धरती पर भारत के खिलाफ बोलना कहां तक न्यायसंगत है। भारत में रहकर सरकार की बुराई करते करते वे यह भूल जाते हैं, उन्हें विदेशी धरती पर भारत को लेकर क्या बोलना है। राहुल गांधी अब एक जिम्मेदार नेता है।</div>
<div> </div>
<div>वे सांसद तो हैं ही, साथ ही संसद में विपक्ष के नेता भी हैं। विपक्ष के नेता को यह समझना चाहिए कि उन्हें कब, कहां क्या बोलना है। उनकी इसी हरकत के कारण भारत की जनता उन्हें कई नामों से पुकारती है। जब उन्हें पप्पू कहा जाता है तो उनकी बहन प्रियंका वाड्रा कहती हैं कि वे पप्पू नहीं है। उन्हें पप्पू कहकर उनकी छवि को धूमिल करना बताया जाता है। </div>
<div> राहुल गांधी बार-बार विदेश में जाकर बिना सिर-पैर की बातें करते हैं। ऐसे-ऐसे बयान देते हैं जो देश के खिलाफ तो होता ही है लेकिन साथ ही सचाई से भी दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रहता। राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं, संसदीय लोकतंत्र में विपथ का प्रथम चेहरा हैं। नेता प्रतिपक्ष के पद पर आसीन होने के बावजूद राहुल गांधी के व्यवहार में संसद के भीतर भी परिपक्वता और जिम्मेदारी भरे व्यवहार की समस्या बनी रहती है लेकिन यह नितान्त असहनीय और गैरजिम्मेदाराना हरकत है कि राहुल गांधी विदेशी दौरे के. दौरान तमाम प्रोटोकाल को दर किनारे कर देश की प्रतिष्ठा को धूमिल करें।</div>
<div> </div>
<div>यह राहुल गांधी की राजनीति है अथवा वह वाकई भारत को कमतर साबित करने पर आमादा रहते हैं, लेकिन यह तय है कि वह अक्सर गलत, भ्रामक और अनावश्यक तथ्य पेश करते हैं। ताजा संदर्भ सिखों का है। अमरीकी प्रवास के दौरान उन्होंने मंच से एक सिख नौजवान का नाम पूछा और फिर आशंका जताई कि सिख भारत में पगड़ी और कड़ा पहन पाएंगे या नहीं। वे गुरुद्वारे में प्रवेश पा सकेंगे या नहीं? राहुल की यह सवालिया आशंका निर्मूल है, क्योंकि भारत में ऐसी स्थिति नहीं है। कहीं भी पगड़ी या फिर सिखों के किसी भी धार्मिक प्रतीकों पर पाबंदी नहीं है। राहुल ने दावा किया कि वह यह लड़ाई लड़ रहे हैं। सवाल है कि किसके खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि ऐसे हालात ही नहीं हैं। सिखों को भारत में ठीक उतनी ही आजादी और अधिकार हासिल है, जितना किसी दूसरे धर्म के नागरिक को हासिाल है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और इसलिए वहां व्यक्ति को आजादी और अधिकार धर्म देखकर न मिलते हैं और न ही धर्म के आधार पर छिनते हैं। ऐसे राहुल गांधी ऐसे बनान क्यों दे रहे हैं नह समझ से परे है?</div>
<div> </div>
<div>यही नहीं अमेरिका में उनके साथ गये उनके सलाहकार सैम पित्रोदा भी उनका यह कहकर बचाव कर रहे हैं कि सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी पप्पू नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का एजेंडा कुछ बड़े मुद्दे को संबोधित करना है। जो करोड़ों रुपये खर्च करके बनाए गए भाजपा के विजन से बिल्कुल अलग है। वह उच्च शिक्षित हैं। वह किसी भी विषय पर गहरी सोच रखने वाले रणनीतिकार हैं। सैम पित्रोदा भले ही उनका बचाव करें लेकिन जिस तरह से वे विदेश में जाकर भारत के खिलाफ बोलने लगते हैं, उसे एक परिपक्व नेता का बयान नहीं कहा जा सकता है। इससे एक बार फिर यह सिद्ध होता है कि राहुल गांधी, आज भी देश को बांटने वाले तत्वों के साथ मिले हुए हैं और टुकड़े-टुकड़े गिरोह का नेतृत्व कर रहे हैं। राहुल गांधी चीन के चंदे पर पलने वाले भारत विरोधी एक मोहरे से अधिक और कुछ भी नहीं हैं। इससे यह भी साबित होता है कि वे टुकड़े टुकड़े कहने वाले गैंग के सरगना हैं।</div>
<div> </div>
<div>राहुल गांधी का यह कहना कि भारत में सबकुछ मेड इन चाइना है। यह भारत के उन लोगों का अपमान है जो आज देश को आत्मनिर्भर बनाने में लगे जी जान से जुटे हुए हैं। आज भारत न केवल अन्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है बल्कि सैन्य क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर चुका है। भारत के कुशल श्रमिक और कर्मचारी स्वदेशी तरीके से बहुत सी चीजें बना रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी उनका अपमान कर रहे हैं। इससे साबित होता है कि राहुल की जड़ें भारत की मिट्टी से जुड़ी नहीं हैं। उनका भारतीय लोगों, उनकी संस्कृति और परंपराओं से कोई लेना-देना नहीं है। राहुल गांधी को तो इस बात का गर्व होना चाहिए कि भारत आज कई मामलों में आत्मनिर्भर हो चुका है। इसकी उन्हें विदेश में जाकर न केवल प्रचार करना चाहिए बल्कि सीना फुलाकर कहना चाहिए कि आज भारत सभी तरह से संपन्न होता जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>दुनिया की निगाहें भारत की ओर हैं। यूक्रेन और रुस जैसे देश यह मानने लगे हैं कि उनका युद्ध भारत ही खत्म करा सकता है। मोदी के नेतृत्व में आज भारत आत्मनिर्भर' बनने की ओर है और जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।इतना ही नहीं अमेरिका दौरे के दौरान एक वरिष्ठ पत्रकार द्वारा बंग्लादेश के हिन्दू उत्पीड़न के मामले में एक सवाल पूछने पर राहुल की टीम के लोगों ने जिस तरह एक पत्रकार को आधा घंटा तक एक कमरे में बंद कर प्रताड़ित किया वह भी बहुत शर्मनाक और दंडनीय हरकत है। ऐसे समय में जब कुछ विदेशी ताकतों के विस्तारवाद के कारण भारत की प्रगति उन्हे रास नहीं आ रही है तब राहुल गांधी की इस तरह की हरकत निश्चित रूप से शर्मनाक है। ऐसे नेता को जनता इसी कारण से नकार देती है।</div>
<div> </div>
<div><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div><strong> (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Sep 2024 17:12:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिंदुत्व और सनातन संस्कृति को समझने का समयl</title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारत का सांस्कृतिक, सनातनी, वैदिक इतिहास सदैव गौरवपूर्ण रहा है। वेदों, शास्त्रों ,पुराणों और सनातन संस्कृति एवं संस्कार में इतनी शक्ति है कि भारतीय संस्कृति अनंत काल तक कभी नष्ट नहीं हो सकती है। भारतीय संस्कृति का लचीलापन एवं व्यापक ग्राह्यता इतनी विशाल है कि ईस सभ्यता ने कई सभ्यताओं को अपने में समाहित कर एक विशाल धर्मनिरपेक्ष वातावरण निरूपित कर वृहद वट वृक्ष की तरह अपनी शाखाएं वैश्विक स्तर पर प्रचारित, प्रसारित की है।</div>
<div>  </div>
<div>यह वैदिक अध्यात्म योग और संस्कृति का ही प्रतिफल है कि भारत के नागरिक विश्व में चहुंओर निवास कर रहे हैं और अब समय आ</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142851/time-to-understand-hindutva-and-sanatan-culture"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/हिंदुत्व-और-सनातन-संस्कृति-को-समझने-का-समयl.jpg" alt=""></a><br /><div>भारत का सांस्कृतिक, सनातनी, वैदिक इतिहास सदैव गौरवपूर्ण रहा है। वेदों, शास्त्रों ,पुराणों और सनातन संस्कृति एवं संस्कार में इतनी शक्ति है कि भारतीय संस्कृति अनंत काल तक कभी नष्ट नहीं हो सकती है। भारतीय संस्कृति का लचीलापन एवं व्यापक ग्राह्यता इतनी विशाल है कि ईस सभ्यता ने कई सभ्यताओं को अपने में समाहित कर एक विशाल धर्मनिरपेक्ष वातावरण निरूपित कर वृहद वट वृक्ष की तरह अपनी शाखाएं वैश्विक स्तर पर प्रचारित, प्रसारित की है।</div>
<div> </div>
<div>यह वैदिक अध्यात्म योग और संस्कृति का ही प्रतिफल है कि भारत के नागरिक विश्व में चहुंओर निवास कर रहे हैं और अब समय आ गया है कि भारत को अपनी संस्कृति आध्यात्मिक तथा संस्कारों के आत्म बल के दम पर विश्व का नेतृत्व करना होगा एवं विश्व गुरु बनने की प्रक्रिया में नए नए सोपान निर्मित करने होंगे । प्रारंभ से ही शांति तथा मानवता को लेकर भारत में अपनी विकास यात्रा प्रारंभ की है आध्यात्मिक चिंतन और सनातनी इतिहास इस बात का गवाह है कि भारत विश्व शांति की बहाली के लिए विश्व को मार्गदर्शन देने का हौसला तथा क्षमता दोनों रखता है। अब यह समय आ चुका है कि भारत को विश्व का मार्गदर्शी प्रणेता बन जाना चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>जिंदगी का कैनवास जन्म से लेकर मृत्यु तक समुद्र की तरह विराट और गहराई लिए हुए होता है। जीवन में वयक्तिक, पारिवारिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक विकास की संभावनाओं के साथ मनुष्य अपना जीवन प्रारंभ कर विकास प्रगति तथा ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है,बशर्ते उसके व्यक्तित्व में जीवन के प्रति जीजिविषा, संघर्ष करने की क्षमता, अनंत आत्म विश्वास और संयम के घटक मौजूद हो। ऐतिहासिक तौर पर भारतीय विकास सांस्कृतिक संरचना एवं संस्कार के मूलभूत तत्वों को लेकर दुनिया में अभूतपूर्व रहा है। वैसे भी भारतवर्ष सभ्यता से लेकर संस्कृति की प्रकृति के मामले में वैभवशाली इतिहास को समेटे हुए हैं।</div>
<div> </div>
<div>विकास और प्रगति के सोपान को कोई एक दिन वर्ष अथवा दशक में रेखांकित नहीं किया जा सकता, यह एक निरंतर, सतत एवं समय के साथ चलने वाली क्रिया की प्रतिक्रिया है। और प्रकृति सभ्यता तथा मानव जीवन में परिवर्तन एक अकाट्य सत्य और शाश्वत अभिक्रिया है। व्यक्ति के जीवन तथा समाज या देश में विकास के संदर्भ में एवं घटकों को प्रारंभ से आदमी का धन उपार्जन, गरीबी भुखमरी से लड़ाई भूतकाल की कुरीतियों की विडंबना से संघर्ष का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन सब से समाज की प्रगति और विकास में राजाओं, सम्राटों की कूटनीति ,राजनीति सर्वोपरि रही है इतिहास से लेकर अब तक मनुष्य देश और विश्व के विकास में राजनैतिक नीति निर्देशक तत्व ही देश को बलवान,शक्तिहीन,भौगोलिक रूप से बड़ा या छोटा बनाते आए हैं।</div>
<div> </div>
<div>किसी भी राष्ट्र के राजा, सम्राट या राष्ट्र प्रमुख की अपनी क्षमता ,शक्ति, ऊर्जा और उसके विवेक से उस राष्ट्र की प्रगति विशाल या न्यूनतम होती देखी गई है। भूतकाल में कई संघर्षशील एवं उत्साह से लबरेज यात्रियों के वृतांत हमारी नजरों में आए हैं यथा कोलंबस और वास्कोडिगामा जैसे अत्यंत ऊर्जावान संघर्षशील और साहसिक यात्रियों द्वारा लगभग नामुमकिन रास्तों की खोज कर एक मिसाल कायम की है। नेपोलियन का एक बड़ा सूत्र वाक्य था कुछ भी असंभव नहीं है।</div>
<div> </div>
<div>बिस्मार्क जर्मनी के एक ऐसे सम्राट रहे हैं जिनके बारे में कहा जाता है की उनके हाथों में दो गेंद तथा 3 गेंदें हवा में होती थी, यूरोप का जादूगर भी कहलाता था, पूर्व से ही समुद्रगुप्त ,कनिष्क, सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य, शेरशाह सूरी जैसे शासकों का अदम्य आत्मविश्वास एवं संघर्ष करने की क्षमता के फल स्वरुप भी भारत आज इस स्वरूप में विद्यमान है। अर्थशास्त्रीय दृष्टिकोण से भी किसी भी राष्ट्र में सदैव विकास वैभव और आर्थिक तंत्र को मजबूत करने की संभावनाएं अवस्थित रहती हैं। भारत की विशाल जनसंख्या को देखते हुए भारत में गरीबी, भुखमरी ,बाढ़ तथा अन्य विभीषिका सदैव आती जाती रहती हैं।</div>
<div> </div>
<div>विशाल जनसंख्या के होने के कारण भारत में ही भारत की बड़ी जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है और केवल भारत के कुछ नागरिकों को ही सारी जीवन की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, बाकी लोग इन सुविधाओं से वंचित भी हैं। हमारा देश स्वतंत्रता के बाद से ही आवाज की कमी भूख गरीबी भ्रष्टाचार काला धन हवाला कुपोषण बेरोजगारी की बड़ी समस्याओं से जूझ रहा है। भारत की विशाल जनसंख्या के बावजूद ऐतिहासिक तौर पर देश सांस्कृतिक वैचारिक और संस्कारी ग्रुप से सदैव समृद्ध रहा है और धार्मिक रूप से भी देश में ज्ञान की जड़े बहुत गहराई तक हैं। भारत को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करने के लिए वेद, पुराण, उपनिषद, गीता ,रामायण ,महाभारत महा ग्रंथों की पृष्ठभूमि बड़ी ही शक्तिशाली है।</div>
<div> </div>
<div>देश में अनेक साधु संत ज्ञानी जिनमें मोहम्मद मूसा कबीर, रैदास, नामदेव, तुकाराम चैतन्य, तुलसीदास शंकरदेव जैसे महापुरुषों ने देश के सांस्कृतिक आध्यात्मिक विकास मैं अभूतपूर्व योगदान दिया है। भारत में अनेक विदेशी आक्रमणों को झेल कर उन्हें आत्मसात किया है किंतु हमारी संस्कृत पाली एवं प्राकृत भाषा अन्य भाषाओं के साथ आज भी समृद्ध है। भारत में अनेक भाषा क्षेत्र एवं बोलियां हैं किंतु हिंदी, पंजाबी, गुजराती, बांग्ला, मराठी ,असमिया भाषाएं उसी तरह पल्लवित पुष्पित हो रही हैं जैसे की संस्कृत और प्राकृत पाली भाषा होती रही है।</div>
<div> </div>
<div>भारत में स्वाधीनता के बाद विकास के प्रगति के पथ पर वैज्ञानिक क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास किया और पृथ्वी से लेकर नभ तक हर क्षेत्र में मानव की अतीव उत्कंठा ,जीजिविषा के कारण हमने चांद पर भी अपने वायुयान भेजें हैं। देश के नागरिकों की भौतिकवादी सुविधा के लिए भी हमने वतानुकुलित यंत्र ,वायुयान तेज चलने वाली ट्रेनें और वायुमंडल में अनेक ऐसे तथ्यों को जो आज तक छुपे हुए थे उजागर कर अपने महत्व के लिए इसका उपयोग करना शुरू किया है। यह कहावत आशाओं पर आकाश टिका हुआ है और आकाश का कोई अंत नहीं यानी मनुष्य की इच्छाओं का कोई अंत नहीं है मनुष्य पर सही प्रतीत होती है।</div>
<div> </div>
<div>इसी तरह प्रगति और विकास का भी कोई अंत या अनंत नहीं है। भारत देश में वैश्विक स्तर पर राजनैतिक सामाजिक वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर काफी प्रगति की एवं विश्व में योग अध्यात्म दर्शन का लोहा भी मनवाया है। मनुष्य की अभिलाषा का कोई निश्चित लक्ष्य नहीं है, मनुष्य मूल रूप से अत्यंत महत्वकांक्षी,लोलुप एवं इच्छाओं का दास हुआ करता है, ऐसे में पूर्व में किए गए कार्यों को निरंतर सुधार कर उसे नए रूप में प्राप्त करना मनुष्य की अभिलाषा हो सकती है,</div>
<div> </div>
<div>पर इसके लिए अथक मेहनत संघर्ष आत्मविश्वास एवं संयम की आवश्यकता होगी तभी जाकर हम अपने नए-नए लक्ष्यों को विकास तथा प्रगति के पैमाने पर टटोलकर आगे बढ़ा सकते हैं। पर लक्ष्य की प्राप्ति के साधन जरूर सच्चे ,पवित्र और मानव कल्याण की ओर अग्रेषित होने चाहिए, तब ही विकास प्रगति चाहे वह आध्यात्मिक, सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक अथवा वैज्ञानिक ही क्यों ना हो सफल हो सकती है।</div>
<div> </div>
<div><strong>संजीव ठाकुर, स्तंभकार, चिंतक, वर्ल्ड रिकॉर्ड लेखक,</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jul 2024 16:06:17 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>क्या बदलेगी कानून व्यवस्था तीन नए कानूनों से?</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>(नीरज शर्मा'भरथल')</strong></div>
<div>रविवार रात 12 बजे से पूरे देश में तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं। अब देश में 51 साल पुराने सीआरपीसी 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों ने ले ली है। भारतीय दंड संहिता 1860 का स्थान भारतीय न्याय अधिनियम (बीएनएस) लेगा और इंडियन एविडेंस एक्ट 1872  की जगह अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) के कानूनी प्रावधानों  के तहत कार्रवाई होगी। उम्मीद है नए कानून लागू होने के बाद आम लोगों का विश्वास पुलिस पर बढ़ेगा और पुलिस की आम लोगों तक पहुंच आसान होगी। पूरा सिस्टम ऑनलाइन होगा।</div>
<div>  </div>
<div>उम्मीद की जा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142750/will-the-law-and-order-change-with-the-three-new"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/sfdsdf.webp" alt=""></a><br /><div><strong>(नीरज शर्मा'भरथल')</strong></div>
<div>रविवार रात 12 बजे से पूरे देश में तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं। अब देश में 51 साल पुराने सीआरपीसी 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों ने ले ली है। भारतीय दंड संहिता 1860 का स्थान भारतीय न्याय अधिनियम (बीएनएस) लेगा और इंडियन एविडेंस एक्ट 1872  की जगह अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) के कानूनी प्रावधानों  के तहत कार्रवाई होगी। उम्मीद है नए कानून लागू होने के बाद आम लोगों का विश्वास पुलिस पर बढ़ेगा और पुलिस की आम लोगों तक पहुंच आसान होगी। पूरा सिस्टम ऑनलाइन होगा।</div>
<div> </div>
<div>उम्मीद की जा रही है कि नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद देश में कानून का राज की धारणा को और अधिक बल मिलेगा। नए कानून विधेयक को 2023 में संसद के दोनों सदनों में ध्वनिमत से पारित किया गया था। इस विधेयक को दोनों सदनों से पास करते समय मात्र पाँच घंटे की बहस की गई थी और ये वो समय था जब संसद से विपक्ष के 140 से अधिक सांसद निलंबित कर दिए गए थे। उस समय विपक्ष और कानून के जानकारों ने कहा था कि जो कानून देश की न्याय व्यवस्था को बदल कर रख देगा, उस पर संसद में मुकम्मल बहस होनी चाहिए थी। नए भारतीय न्याय संहिता में नए अपराधों को शामिल किया गया है।</div>
<div> </div>
<div>जैसे- शादी का वादा कर धोखा देने के मामले में 10 साल तक की जेल, नस्ल, जाति- समुदाय, लिंग के आधार पर मॉब लिंचिंग के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा, छिनैती के लिए तीन साल तक की जेल। यूएपीए जैसे आतंकवाद-रोधी क़ानूनों को भी इसमें शामिल किया गया है। 1 जुलाई की रात 12 बजे से देश की उच्चतम न्यायालय, 25 उच्च न्यायालयों, 688 जिला न्यायालयों और 16,671 पुलिस थानों को ये नई व्यवस्था अपनानी है। सरकार का कहना है नये कानूनों से एक आधुनिक न्याय प्रणाली स्थापित होगी जिसमें ‘जीरो एफआईआर’, पुलिस में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराना, ‘एसएमएस’ (मोबाइल फोन पर संदेश) के जरिये समन भेजने जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम और सभी जघन्य अपराधों के वारदात स्थल की अनिवार्य वीडियोग्राफी जैसे प्रावधान शामिल होंगे।</div>
<div> </div>
<div>इसके अलावा महिलाओं, पंद्रह वर्ष की आयु से कम उम्र के लोगों, 60 वर्ष की आयु से अधिक के लोगों तथा दिव्यांग या गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को पुलिस थाने आने से छूट दी जाएगी और वे अपने निवास स्थान पर ही पुलिस सहायता प्राप्त कर सकते हैं। नये कानूनों के तहत अब कोई भी व्यक्ति पुलिस थाना जाए बिना इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यम से घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज करा सकता है। इससे मामला दर्ज कराना आसान और तेज हो जाएगा तथा पुलिस द्वारा तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी। नये कानूनों के तहत आपराधिक मामलों में फैसला मुकदमा पूरा होने के 45 दिन के भीतर आएगा और पहली सुनवाई के 60 दिन के भीतर आरोप तय किए जाएंगे।</div>
<div> </div>
<div>दुष्कर्म पीड़िताओं का बयान कोई महिला पुलिस अधिकारी उसके अभिभावक या रिश्तेदार की मौजूदगी में दर्ज करेगी और मेडिकल रिपोर्ट सात दिन के भीतर देनी होगी। नये कानूनों में संगठित अपराधों और आतंकवाद के कृत्यों को परिभाषित किया गया है, राजद्रोह की जगह देशद्रोह लाया गया है और सभी तलाशी तथा जब्ती की कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराना अनिवार्य कर दिया गया है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर एक नया अध्याय जोड़ा गया है, किसी बच्चे को खरीदना और बेचना जघन्य अपराध बनाया गया है और किसी नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के लिए मृत्युदंड या उम्रकैद का प्रावधान जोड़ा गया है।</div>
<div> </div>
<div>नये कानूनों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच को प्राथमिकता दी गयी है जिससे मामले दर्ज किए जाने के दो महीने के भीतर जांच पूरी की जाएगी। नये कानूनों के तहत पीड़ितों को 90 दिन के भीतर अपने मामले की प्रगति पर नियमित रूप से जानकारी पाने का अधिकार होगा। इसके अलावा महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अपराध पीड़ितों को सभी अस्पतालों में निशुल्क प्राथमिक उपचार या इलाज मुहैया कराया जाएगा। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि पीड़ित को आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल तुरंत मिले। शादी का झूठा वादा करने, नाबालिग से दुष्कर्म, भीड़ द्वारा पीटकर हत्या करने, झपटमारी आदि मामले दर्ज किए जाते हैं लेकिन मौजूदा भारतीय दंड संहिता में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं थे।</div>
<div> </div>
<div>‘जीरो एफआईआर’ से अब कोई भी व्यक्ति किसी भी पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज करा सकता है, भले ही अपराध उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं हुआ हो। इससे कानूनी कार्यवाही शुरू करने में होने वाली देरी खत्म होगी और मामला तुरंत दर्ज किया जा सकेगा। नये कानून में जुड़ा एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि गिरफ्तारी की सूरत में व्यक्ति को अपनी पसंद के किसी व्यक्ति को अपनी स्थिति के बारे में सूचित करने का अधिकार दिया गया है। इससे गिरफ्तार व्यक्ति को तुरंत सहयोग मिल सकेगा। इसके अलावा, गिरफ्तारी विवरण पुलिस थानों और जिला मुख्यालयों में प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा जिससे कि गिरफ्तार व्यक्ति के परिवार और मित्र महत्वपूर्ण सूचना आसानी से पा सकेंगे।</div>
<div> </div>
<div>आरोपी और पीड़ित दोनों को अब प्राथमिकी, पुलिस रिपोर्ट, आरोपपत्र, बयान, स्वीकारोक्ति और अन्य दस्तावेज 14 दिन के भीतर पाने का अधिकार होगा। अदालतें समय रहते न्याय देने के लिए मामले की सुनवाई में अनावश्यक विलंब से बचने के वास्ते अधिकतम दो बार मुकदमे की सुनवाई स्थगित कर सकती हैं। नये कानूनों में सभी राज्य सरकारों के लिए गवाह सुरक्षा योजना लागू करना अनिवार्य है ताकि गवाहों की सुरक्षा व सहयोग सुनिश्चित किया जाए और कानूनी प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता व प्रभाव बढ़ाया जाए। अब ‘लैंगिकता’ की परिभाषा में ट्रांसजेंडर भी शामिल हैं जिससे समावेशिता और समानता को बढ़ावा मिलता है।</div>
<div> </div>
<div>पीड़ित को अधिक सुरक्षा देने तथा दुष्कर्म के किसी अपराध के संबंध में जांच में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए पीड़िता का बयान पुलिस द्वारा ऑडियो-वीडियो माध्यम के जरिए दर्ज किया जाएगा। सरकारी अधिकारी या पुलिस ऑफिसर के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए संबंधित अथॉरिटी 120 दिनों के अंदर अनुमति देगी। यदि इजाजत नहीं दी गई तो उसे भी सेक्शन माना जाएगा। इन के अलावा इस तरह के और भी सुधारों का दावा सरकार कर रही है। उम्मीद करते हैं कि इन नए कानूनों से भारतीय कानून व्यव्स्था में सुधार आएगा, पीडित व्यक्ति को इंसाफ समय पर आसानी से मिलेगा और अपराधी को उसके किए की कड़ी सजा जल्द से जल्द मिलेगी।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jul 2024 17:17:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा के मन मोहन सिंह हैं अपने मोदी जी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अठरहवीं लोकसभा का सत्र आषाढ़ के दुसरे दिन से शुरू हो रहा है ।  आषाढ़ यानि मानसून, यानि ये संसद का पहला  मानसून सत्र है ।  इस सत्र में एक-दो दिन तो नए सदस्यों के शपथ ग्रहण में ही खर्च हो जायेंगे। बाकी फिर सरकार पर विपक्ष और विपक्ष  पर सरकार बरसेगी। कभी प्रोटेम स्पीकर के चयन को लेकर,कभी लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष  के चुनाव को लेकर ।  नीट का लीकेज और शेयर बाजार में सियासत के मुद्दे तो बाद में विमर्श में आएंगे।<br />नई लोकसभा 'पुरानी बोतल में नयी शराब ' जैसी है ,केवल बोतल पर लगा लेबल बदला</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142449/bjps-heart-is-mohan-singh-its-modi-ji"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/parliament-session-modi.webp" alt=""></a><br /><p>अठरहवीं लोकसभा का सत्र आषाढ़ के दुसरे दिन से शुरू हो रहा है ।  आषाढ़ यानि मानसून, यानि ये संसद का पहला  मानसून सत्र है ।  इस सत्र में एक-दो दिन तो नए सदस्यों के शपथ ग्रहण में ही खर्च हो जायेंगे। बाकी फिर सरकार पर विपक्ष और विपक्ष  पर सरकार बरसेगी। कभी प्रोटेम स्पीकर के चयन को लेकर,कभी लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष  के चुनाव को लेकर ।  नीट का लीकेज और शेयर बाजार में सियासत के मुद्दे तो बाद में विमर्श में आएंगे।<br />नई लोकसभा 'पुरानी बोतल में नयी शराब ' जैसी है ,केवल बोतल पर लगा लेबल बदला है।</p>
<p> प्रधानमंत्री ,रक्षा मंत्री,वित्तमंत्री,भूतल-सड़क मंत्री और यहां तक कि गृहमंत्री  तक पुराने हैं। फर्क ये है  कि अब सियासत   की इस बोतल पर अकेले मोदी जी नहीं बल्कि साथ में टीडीपी और जदयू के नेताओं  के चेहरे भी नमूदार हो रहे हैं। विपक्ष की बोतल में लेबल भी नया है और शराब भी नयी है। बड़ी संख्या में विपक्ष में नए चेहरे जीतकर आये है।  नई संसद में पुरानी स्मृति ईरानी की याद बहुत सताएगी। लेकिन नयी संसद में अब हमारे प्रधानमंत्री जी यदाकदा पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मन मोहन सिंह की कमी को जरूर पूरा कर देंगे। क्योंकि उन्होंने पिछले दस साल में मौन रहने की साधना को सिद्ध कर लिया है।</p>
<p>कांग्रेस के मनमोहन सिंह अब सियासत से एक तरह से निवृर्ति ले चुके है।  ऐसे में संसद को एक तो मन मोहन सिंह  चाहिए था। भाजपा के भाग्यविधाता और तीसरी बार प्रधानमंत्री बने श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी डॉ मन मोहन सिंह की जगह लेने जा रहे हैं।  वे न मणिपुर के मामले पर बोलते थे और न अब नीट परीक्षा  के लीकेज के मामले में कुछ बोल रहे है।  वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख डॉ मोहन भगवत की सीख के बाद भी नहीं बोले। वे बोलेंगे,  लेकिन तब बोलेंगे जब बहुत जरूरी होगा। खैर संसद में तो उन्हें बोलना ही होगा । राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के वक्त तो वे अपना मौन तोड़ेंगे ही।</p>
<p>मै सदन में नए मनमोहन को उपलब्ध कराने के लिए काशी की जनता के साथ ही भाजपा को भी बधाई देना चाहता हूँ। पूर्व प्र्धानमनी  डॉ मन मोहन सिंह ने मौन रहकर अपनी सरकार को एक   दशक चलाया था।  भाजपा के मनमोहन ने भी उनकी परम्परा को कायम रखा ,न सिर्फ कायम रखा बल्कि वे तीसरी बार भी सरकार चलने के लिए कमर कसकर मैदान में है।  हालाँकि इस तीसरे मौके पर उनके साथ बैशाखियाँ भी हैं । लेकिन वे बैशाखियों पर भी दौड़ते नजर आ रहे हैं उनकी चाल,चरित्र और चेहरे में कोई तब्दीली इस देश को नहीं दिखाई दे रही ।  वे भीतर से भी बदले होंगे इस बात कभी कोई गारंटी नहीं है।</p>
<p>मोदी जी देश को गारंटिड सरकार देने वाले कोई पहले प्रधानमंत्री नहीं है।  उससे पहले देश को पहली गारंटी कांग्रेस के तत्कालीन नेता और प्रधानमंत्री  राजीव गाँधी ने देश की जनता को साल में 100  दिन के रोजगार की गारंटी दी थी। इस योजना का नाम था महात्मा गाँधी  राष्ट्रीय रोजगार योजना। ये योजना आज भी जारी है ।  गनीमत है कि हमारे मोदी जी की सरकार ने अब तक शहरों ,स्टेशनों और दंड संहिताओं  के नाम बदलने की सूची में मनरेगा को शामिल नहीं किया है। वे इसे अब तक बदल देते लेकिन शायद इस योजना को महात्मा गाँधी ने बचा लिया। महात्मा गाँधी के नाम पर हमारी सरकार,भाजपा और संघ सब सकुचा जाते हैं।भले ही महात्मा   गाँधी इस परिवार की आँख की सबसे बड़ी किरकिरी हों।</p>
<p>मुझे लगता है कि भाजपा के मौजूदा नेतृत्व और नयी सरकार के ऊपर अभी तक संघ के प्रमुख डॉ मोहन भगवत और उनके कनिष्ठ इंद्रेश जी के उपदेशों का कोई असर नहीं  हुआ है। सरकार का ' अहंकार ' आज भी पहले की तरह ठाठें मार रहा है।अहंकार आज भी सातवें-आठवें आसमान पर है।  अहंकार आसानी से मरता भी तो नहीं है ।  नारद का अंहकार समाप्त करने के लिए विष्णु को माया रचना पड़ी थी। आज के संघी नेतृत्व में शायद इतनी तथा बची नहीं है कि वो मौजूदा पार्टी और सरकार के नेतृत्व का अहंकार समाप्त करने के लिए कोई माया रच पाए। संघ के पास ऐसा कोई शिवदूत भी नहीं है जो सरकार को आइना दिखने का दुस्साहस कर पाए। चंद्र बाबू नायडू और नीतीश कुमार की तो हैसियत ही क्या है ? ये शिव के गण हो सकते थे लेकिन ये दोनों तो पहले दिन से ही मोदी जी के चरणों में लंबलेट नजर आ रहे हैं।</p>
<p>देश की जनता ने जो जनदेश दिया है वो पूरे पांच साल के लिए दिया है।  ये अहंकारी ही सही लेकिन मौजूदा सत्तारूढ़ गठबंधन का दायित्व है कि वो नयी सरकार को पूरे पांच साल चलाये ,लेकिन लोकसभा के अस्थाई अध्यक्ष के मनोनयन से लेकर स्थायी अध्यक्ष के लिए प्रत्याशी चयन और विपक्ष को उपाध्यक्ष का पद देने के मुद्दे पर सरकार का रुख ये दर्शाता है कि वो सरकार को पांच साल चलने के मूड में नहीं है। भाजपा अपने पूर्व के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बीच में ही चुनाव मैदान में उतरने का दुस्साहस कर सकती है। वैसे भी भाजपा देश और दुनिया की अकेली ऐसी पार्टी है जो चौबीस घण्टे चुनावी मोड में रहती है। ये बुरी बात भी है और अच्छी बात भी। बुरी इसलिए की चौबीस घंटे चुनावी नाव पर सवार रहने की वजह से भाजपा की सरकार न ढंग से विकास कार्य कर पाती है और न देश के भाईचारे की सुरक्षा  कर पाती है। भाजपा को सोते-जागते अपने तख्त की चिंता सताती रहती है।</p>
<p>बहरहाल हमें देखना होगा कि हमारी नई विकलांग सरकार क्या नियत के मुद्दे पर युवाओं के साथ भी ठीक वैसा ही व्य्वहार करेगी जैसा कि उसने अतीत में किसानों के साथ किया था। हमें देखना होगा कि हमारी नयी सरकार अपने पुराने कार्यकाल में 700  से ज्यादा किसानों की बलि ले चुकी है वो क्या नीट के मामले पर भी युवाओं   का बलिदान लेगी या फिर सीधे-सीधे समस्या का निराकरण करेगी ? सरकार जो चाहे कर सकती है ।  सरकार सम्प्रभुता सम्पन्न होती है ।  तमाम शक्तियां उसके हाथों में निहित होती  है।  उसके सामने दो ही विकल्प हैं। पहला ये कि वो नीट के साथ ही देश के तमाम राज्यों में पिछले दस साल में पनपे नकल माफिया को जमीदोज करे,दोषियों को सींखचों के पीछे भेजे भले वे लोग भाजपा  और उनकी सहयोगी पार्टियों से ही क्यों  न जुड़े हों। दूसरा रास्ता ये है कि वो अपनी बुलडोजर संहिता से देश के किसानों की तरह ही युवाओं के आंदोलन को भी कुचल दे। चीन के नेतृत्व ऐसा कर चुका है ।  उसने वर्षों पहले सरकार के खिलाफ बीजिंग के थ्यानमन चौक पर जमा हजारों युवाओं पर टैंक चढ़ा दिए थे।</p>
<p>देश की अठारहवीं   संसद और नयी सरकार का भविष्य अब जनता के हाथों में नहीं है ।  अब संसद ,सरकार का भविष्य सरकार और विपक्ष के हाथ में है। जनता तो जनादेश देकर घर में बैठी है ।  उसे मंहगाई से कोई शिकायत नहीं ,उसे विंभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक होने कोई शिकायत नहीं। जनता तो ' शाक-प्रूफ  ' हो चुकी   है । जनता के मौन का मतलब ये नहीं है कि अब देश की संसद भी मौन रहे ।  जनता के मौन का ये मतलब भी नहीं है कि सरकार हर   मसले पर गुड़ खाकर बैठ जाये।  अब सरकार को उत्तरदायी बनना पड़ेगा।   हर सवाल का उत्तर देना पडेगा और यदि ऐसा नहीं होगा  तो स्थितियां तेजी से बदलेंगी। क्योंकि अब सवाल भाजपा,कांग्रेस या संघ का नहीं बल्कि देश के भविष्य का है । देश की प्रतिष्ठा  का है। अब पढ़े-लिखों पर अनपढ़ों का राज नहीं चलने वाला,।अब देश की महिला बाल विकास मंत्री को हिंदी की वर्तनी लिखना सीखना ही होगा।</p>
<p><strong>राकेश अचल  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jun 2024 16:36:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>कर्ज और भुखमरी से डूबता-उतरता पाकिस्तान।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>पिछले 5 सालों से पाकिस्तान की हालत बहुत खस्ता है। पाकिस्तान आवाम भुखमरी और कर्ज की बेतहाशा शिकार हो गई है। पाकिस्तानी नागरिकों को आटा, दाल,चीनी,बिजली और पेट्रोल पहले से लगभग चार गुना महंगी दरों में लेना पड़ रहा है। शरीफ सरकार दोबारा आने के बाद पूरी तरह विफल हो गई, प्रधानमंत्री शरीफ की चीन यात्रा पूरी तरह विफल रही है अब शरीफ सरकार ने भारत और भारत के प्रधानमंत्री का नाम लेने पर देशद्रोह की कार्रवाई का फरमान जारी कर दिया है। कई मीडिया एजेंसियों पर इस संदर्भ में भारत से संबंधित किसी भी जानकारी प्रसारित करने पर प्रतिबंध</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142347/pakistan-is-sinking-due-to-debt-and-hunger"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/sdfsdf.jpg" alt=""></a><br /><div>पिछले 5 सालों से पाकिस्तान की हालत बहुत खस्ता है। पाकिस्तान आवाम भुखमरी और कर्ज की बेतहाशा शिकार हो गई है। पाकिस्तानी नागरिकों को आटा, दाल,चीनी,बिजली और पेट्रोल पहले से लगभग चार गुना महंगी दरों में लेना पड़ रहा है। शरीफ सरकार दोबारा आने के बाद पूरी तरह विफल हो गई, प्रधानमंत्री शरीफ की चीन यात्रा पूरी तरह विफल रही है अब शरीफ सरकार ने भारत और भारत के प्रधानमंत्री का नाम लेने पर देशद्रोह की कार्रवाई का फरमान जारी कर दिया है। कई मीडिया एजेंसियों पर इस संदर्भ में भारत से संबंधित किसी भी जानकारी प्रसारित करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। केवल भारत के विरोध के मुद्दे को छोड़कर चीन ने पाकिस्तान का आर्थिक हालातो को सुधारने में कोई मदद करने का आश्वासन नहीं दिया है।पाकिस्तान अभी भी जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों को आर्थिक मदद कर घटनाओं का अंजाम देने में लगा है। ऐसे में वैश्विक नशे में पाकिस्तान के मानचित्र का विनष्ट होना निश्चित माना जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>पाकिस्तान पहले से ही परेशान, कर्ज में डूबा हुआ और महंगाई, बेरोजगारी से बुरी तरह त्रस्त रहा हैl शहबाज शरीफ सरकार के पास शासन चलाने के लिए पर्याप्त धनराशि भी नहीं हैl शरीफ के पास सरकार चलाने का पर्याप्त अनुभव भी नहीं हैl 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद पाकिस्तान सरकार में 19 प्रधानमंत्रियों में से एक प्रधानमंत्री भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है ।करेला ऊपर से नीम चढ़ा पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके समर्थकों ने पाकिस्तानी सेना और शाहबाज शरीफ सरकार की नाक में दम कर रखा है। रावलपिंडी में इमरान खान पर गोली दागने से क्रोधित समर्थकों ने कई जगह सेना पर आक्रमण कर मेजर जनरल, गृहमंत्री राणा और प्रधानमंत्री के निवास को घेरकर तोड़फोड़ की थी। 1947 से स्वतंत्रता के बाद यह पहली बार हुआ जब सेना के विरुद्ध पाकिस्तानी आवाम खुलकर विद्रोह करने पर आमादा है। ऐसा लगता है कि वहां सरकार तथा सेना के विरुद्ध आम नागरिकों का विद्रोह हो जाएगा। पहली बार कमर जावेद की सेना आवाम से डरी दिखाई दे रही है, पाकिस्तान विद्रोह की ज्वालामुखी कर बैठा है कभी भी विस्फोटक स्थिति बन सकती है।</div>
<div> </div>
<div>यह तथ्य सार्वजनिक है कि पाकिस्तान चीन का सबसे बड़ा शागिर्द देश है। अमेरिका ने इसी के फल स्वरुप पाकिस्तान को सबसे संदिग्ध एवं खतरनाक आतंकवादी देश घोषित कर दिया है। इस बात से तिलमिलाकर शहबाज शरीफ चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं वहां वह आपसी संबंधों को फिर से सुधारने तथा देश चलाने के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगाने जाएंगे। पाकिस्तान की हालत बहुत ज्यादा खराब एवं पतली है। पाकिस्तान में रोजमर्रा के खर्चे के लिए पैसे नहीं है और उस पर इमरान खान के समर्थक लगातार सड़कों पर मार्च कर रहे हैं । उन्होंने रावलपिंडी से लेकर इस्लामाबाद तक आंदोलन कर दिया है। चीन ने पाकिस्तान को पूरी तरह से आर्थिक रूप से गुलाम बनाकर अपना शिकंजा कस लिया है। पाकिस्तान की सरकार चीन के रहमों करम पर पूरी तरह से पलती आ रही है। चीन पाकिस्तान को अरबों डॉलर का कर्जा देकर उसे अपने गुलाम की तरह बना कर रख दिया है। पाकिस्तान की हुकूमत भले ही चाइना की जी हुजूरी करती आ रही है और उसके हां में हां मिलाती हो पर पाकिस्तानी जनता को न तो चीनी भक्ति पसंद है, ना चीन की कोई उपभोक्ता वस्तु ही पसंद है।</div>
<div> </div>
<div>पाकिस्तान की आवाम देश में चीन की मौजूदगी और उसकी कई परियोजनाओं से बेहद परेशान होकर आंदोलन के जरिए सड़क पर आ गई है।इसका जमकर विरोध किया जा रहा है। चीन द्वारा संचालित बेल्ट एंड रोड परियोजना पाकिस्तान की आवाम को फूटी आंख नहीं भा रही है। हाल ही में चीन ने पाकिस्तान के महत्वपूर्ण इलाके ग्वादर में एक परियोजना चला कर वहां जगह जगह पर चेकिंग चौकियां स्थापित कर दी है, जिससे पाकिस्तान की जनता को अनावश्यक चेकिंग की परेशानी को झेलना पड़ रहा है। पाकिस्तान में ग्वादर के इलाके में जहां पर चौकियां स्थापित की गई हैं पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की भारी किल्लत हो गई और अवैध मछली पकड़ने से आजीविका पर खतरा आ गया है, जिस कारण आम जनता का जीना मुश्किल हो गया है, इसके विरोध में पाकिस्तान के दक्षिण पश्चिम बलूचिस्तान प्रांत के तटीय शहर ग्वादर में कोर्ट रोड के हवाई चौक पर कुछ राजनीतिक दलों, नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं, मछुआरों और संबंधित नागरिक कार्यकर्ताओं द्वारा विगत 1 सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी कर दिया गया है। पाकिस्तानी अखबार जंग के अनुसार प्रदर्शन अनावश्यक सुरक्षा चौकियों को हटाने, पीने के पानी और बिजली की उपलब्धता बढ़ाने मकरान तट पर मछली पकड़ने वाली नौकाओं को हटाने और पञ्चगुर से ग्वादर तक ईरान के साथ सीमा को फिर से खोलने की मांग कर रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>एक समाचार के अनुसार अधिकार रैली के प्रमुख मौलाना हिदायतउर रहमान ने बताया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि यहां के निवासियों के लिए यह अपमानजनक है कि चौकियों पर उन्हें जगह-जगह रोका जाए और उनके पते, ठिकानों के बारे में सख्ती से पूछताछ की जाए,यह चीनी हरकत किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आंदोलन को अनवरत जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय लोगों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है वह इसमें टालमटोल कर रही है ऐसी चीजें ना काबिले बर्दाश्त है जिसे किसी भी हद तक सहन नहीं किया जाएगा। क्षेत्र के लोगों ने ग्वादर के लोगों की बुनियादी समस्याओं का हल नहीं निकलने के कारण सरकार की किरकिरी हो रही है। मूलतः चीन की बलूचिस्तान में उपस्थिति पाकिस्तान के आवाम की बड़ी बेइज्जती ही मानी जा रही है। गौरतलब है कि चीन की कई परियोजनाएं पाकिस्तान में वहां की जनता के विरोध के बावजूद चल रही है ।</div>
<div> </div>
<div>बलूचिस्तान के कई क्षेत्रों में पाकिस्तान की जनता और इमरान सरकार के नुमाइंदों के बीच खुलकर विरोधाभास दिखाई देने लगा है। पाकिस्तान सरकार के हाथ चीन के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से हाथ बंधे हुए हैं चीन का पाकिस्तान पर इतना ज्यादा कर्जा है कि पाकिस्तान एक तरह से चीन का आर्थिक गुलाम हो चुका है और वह कहीं से भी चीन का विरोध करने की स्थिति में नहीं है ऐसे में आम जनता शरीफ सरकार को बर्खास्त करने के लिए सड़क में उतरने की योजना बना रही है। यह तो विदित है पाकिस्तान में शरीफ सरकार के खिलाफ वहां का पूरा मीडिया विपक्षी दल एकजुट होकर शरीफ सरकार को अपदस्थ कर चुनाव कराने या नए प्रधानमंत्री की तलाश कर रहा है,यह पूरी संभावना बन रही है कि आने वाले समय में सरकार को अपदस्थ कर चुनाव की घोषणा की जाएगी। कुल मिलाकर सरकार के खिलाफ आवाम, मीडिया, विपक्षी दलों की विरोधी कार्रवाइयों के चलते पाकिस्तान की स्थिति बहुत ज्यादा नाजुक एवं खराब है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गया है, केवल चीन ही उसके साथ है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तानी सरकार का चलना नामुमकिन दिखाई दे रहा है।</div>
<div> </div>
<div><strong>संजीव ठाकुर, चिंतक, लेखक, </strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Jun 2024 17:55:55 +0530</pubDate>
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                <title>आओ गंगा नहाएं हम और आप भी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राजनीति से हटकर आइये आज गंगा की बात  करते हैं। गंगा हमारे लिए केवल एक नदी नहीं है बल्कि संस्कृति का एक जीवंत प्रतीक है। हम गंगा का पुत्र होने में अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं। गंगा की सौगंध खाते हैं,अपनी सच्चाई को प्रमाणित करने के लिए गंगाजल उठाते है।  पाप निवारण के लिए गंगा स्नान करते हैं। और जब कोई बड़ा काम सम्पन्न  करने में कामयाब हो जाते हैं तो राहत की सांस लेते हुए कहते हैं -' चलिए हमने तो गंगा नहा ली। 'गंगा के बारे में हर भारतीय जानता है। पूरब का हो ,चाहे पश्चिम का,उत्तर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142277/come-lets-take-a-bath-in-the-ganga-you-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/ganga-dussehra-pooja-date-time-calendar-696x497.jpg" alt=""></a><br /><p>राजनीति से हटकर आइये आज गंगा की बात  करते हैं। गंगा हमारे लिए केवल एक नदी नहीं है बल्कि संस्कृति का एक जीवंत प्रतीक है। हम गंगा का पुत्र होने में अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं। गंगा की सौगंध खाते हैं,अपनी सच्चाई को प्रमाणित करने के लिए गंगाजल उठाते है।  पाप निवारण के लिए गंगा स्नान करते हैं। और जब कोई बड़ा काम सम्पन्न  करने में कामयाब हो जाते हैं तो राहत की सांस लेते हुए कहते हैं -' चलिए हमने तो गंगा नहा ली। 'गंगा के बारे में हर भारतीय जानता है। पूरब का हो ,चाहे पश्चिम का,उत्तर का हो या दक्षिण का,सबके लिए गंगा का महत्व है। ये बात अलग है कि सबकी गंगा अलग-अलग है। गंगा दरअसल प्रयाग या हरिद्वार में ही नहीं बहती,बल्कि हर व्यक्ति के मन में बहती है। समस्या ये है कि  इन तमाम गंगाओं का मिलन होना सुनिश्चित नहीं है।</p>
<p> आपने राजकपूर की फिल्म ' संगम ' तो देखी ही होगी। इस फिल्म का शीर्षक गीत है ये सवाल खड़े करता है कि  ' तेरे मन की और मेरे मन की गंगा का मिलन होगा या नहीं ? गीतकार शैलेन्द्र ने जब ये गीत लिखा और शंकर   -जयकिशन ने इसे संगीतबद्ध  कर मुकेश से गवाया था तब ये सोचा भी न होगा कि गंगा एक समय में ' यक्ष -प्रश्न बन जाएगी और कोई भी इस सवाल का जबाब नहीं दे पायेगा कि  हमारे-आपके मन की गंगा का मिलन आज की सियासत होने देगी या नहीं ?</p>
<p>ईश्वर के वजूद को लेकर अक्सर मेरे मन में प्रश्न रहते हैं किन्तु गंगा को लेकर मेरे मन में कभी कोई दुविधा नहीं रही ।  मैंने जब से होश सम्हाला है गंगा को विभिन्न रूपों में देखा है। गंगा के प्रति अपने पूर्वजों के मन में अगाध शृद्धा  देखी है। हम भारतीयों में से बहुत से आज भी किसी क़ानून से,किसी अदालत से भले ही न डरते हों लेकिन गंगा से डरते हैं। उनका डर सम्मान की वजह से है। हर भारतीय आज भी गंगा को पाप-नाशिनी मानता है । पतित-पावन मानता है। और ये मान्यता कोई एक दिन में या 2014  के बाद नहीं बनी ।  ये सदियों,युगों और कल्पों  के बाद बनी है। हर भारतीय के घर में गंगा मौजूद  मिलेगी । शीशी  में ,कंटेनर  में।आखिरी वक्त में सभी को मोक्ष पाने के लिए गंगाजल की दरकार होती है ,भले  ही  उसने  जीवन  में कभी  गंगा स्नान  किया  हो  या   न  किया  हो।  </p>
<p>भगवान शिव को किसी ने नहीं देखा,भगीरथ को किसी ने नहीं देखा लेकिन गंगा को सबने देखा है। सबको गंगावतरण की पौराणिक कथा का ज्ञान है। सब मानते हैं  कि यदि रघुवंशी भगीरथ हठ न करते तो गंगा भूलोक में शायद न आती। शिव यदि गंगा को अपनी जटाओं में धारण करने का साहस न दिखाते तो गंगा धरती पर या तो आती ही नहीं और यदि आ भी जाती तो समूची सृष्टि को अपने आवेग के साथ बहा ले जाती। गंगा दुनिया कि किसी दूसरे  देश में नहीं है। अमेरिका में नहीं ,चीन में नहीं ,जापान में नहीं ,रूस में नहीं। गंगा सिर्फ भारत में है और हम शान  से गर्व से कहते हैं कि  -' हम उस देश कि वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है। यानि गंगा हमारा आइडेंटिटी कार्ड है ,परिचय  पत्र  है। दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश हो जहाँ कि नागरिक अपने परिचय कि तौर पर अपने  देश की किसी नदी का इस्तेमाल करते हैं।</p>
<p>चूंकि 16  जून को गंगा दशहरा है ,इसलिए मै आपके सामने  गंगा -पुराण लेकर बैठ गया। वरना किसे  फुरसत है गंगा पर बात करने की। गंगा को लेकर हम आम भारतीय ही नहीं बल्कि हमारी सरकारें भी बहुत संवेदनशील दिखाई देतीं हैं लेकिन असल में होती नहीं हैं। वे दुनिया कि पाप धोने वाली गंगा कि शुद्धिकरण और उसके पुनर्जीवन कि लिए ' नमामि गंगे  ' प्रोजेक्ट तो बना लेते हैं किन्तु उसे भी सियासत के  रंग में रंग देते है।  भ्र्ष्टाचार की भेंट चढ़ा देते हैं। भारत कि भाग्यविधाता चूंकि खुद को गंगा पुत्र कहते हैं इसलिए देश में नमामि गंगे प्रोजेक्ट को उनका दिव्यस्वप्न माना जाता है। भाग्यविधाता को गंगा ने तीसरा अवसर दे दिया लेकिन इस प्रोजेक्ट को आज तक पूरा नहीं किया जा सका मुमकिन है कोई मजबूरी रही हो। इस परियोजना पर हम भी बात नहीं करना चाहते ,अन्यथा कहा जाएगा की हम फिर सियासत  पर आ गए!</p>
<p>हम और आप साधारण इंसान हैं इसलिए हम और आप ऐसी  कोई  बात नहीं कर सकते  जो  असाधारण  हो। असाधारण बात करने का हक  असाधारण लोगों को ही है। बल्कि असाधारण बातें आजकल केवल अविनाशी लोगों का एकाधिकार माना जाता है। साधारण बात ये है कि हम गंगा को पूजते  हैं लेकिन उसकी  फ़िक्र  नहीं करते। हमें गंगा कि प्रति फिक्रमंद  होने कि लिए उन देशों से सीखना होगा जिनके पास गंगा  तो नहीं है लेकिन उनकी नदियाँ गंगा से सौ गुना  ज्यादा  स्वच्छ  हैं। विदेशी अपनी नदियों  कि लिए किसी सरकार पर निर्भर नहीं होते । वे ये कामखुद करते हैं ,लेकिन हम ये सब नहीं करते ।  हम गंगा दशहरे  पर गंगा को पूजेंगे,उसकी आरती उतारेंगे ,दान-पुण्य करेंगे  लेकिन उसकी कोख को गंदगी से भर आएंगे।</p>
<p>हमारी नब्बे साल की दादी फूलकुंवर अनपढ़ थीं  लेकिन जानतीं  थीं  कि   ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर गंगा दशहरा मनाया जाता है। इस दिन गंगा जी की पूजा, गंगाजल से स्नान जरुर करना चाहिए. मान्यता है इससे व्यक्ति के कई जन्मों के पाप धुल जाते है। वे गांव के पास बहने वाली बेतवा  को ही गंगा मानकर  उसमें  डुबकी  लगा  लेतीं  थी।उनके मायके कि पास भी गंगा नहीं थी,वहां जमुना थी । वे उसे भी गंगा मानतीं थीं।  हमारे पास भी गंगा नहीं बल्कि चंबल है । हम चंबल को ही अपनी गंगा मानते हैं। गंगा को बचाने  का मतलब हर नदी को बचाने से होना  चाहिए  तब तो गंगा को पूजने  का,उसमें नहाने  का कोई अर्थ  सार्थक  हो सकता  है।</p>
<p><br />हमने संविधान , भाईचारा,मंगलसूत्र,मुजरा ,आरक्षण आदि  मुद्दों पर हाल ही में चुनाव देखा है। हमारे राजनितिक दलों और नेताओं ने तो चुनाव कराकर गंगा नहा ली ,लेकिन  गंगा का  जिक्र  एक  बार  भी  नहीं  किया।  कोई सत्ता पक्ष में पहुँच गया तो कोई प्रतिपक्ष  में। जो कहीं नहीं पहुंचा वो निर्दलीय  है,जहाँ ज्यादा चारा मिलेगा  ,वहां  पहुँच जायेगा । लेकिन आप तो अपनी सोचिये। अपनी  गंगा की सोचिये। आप  गंगा दशहरा के दिन तुलसी के पत्तों को गंगाजल से धोकर , फिर इन्हें एक लाल कपड़े में बाधकर तिजोरी में रख  कर अपनी  दरिद्रता दूर करने और घर  में लक्ष्मी रोकने कि फेर में न पड़ें। तुलसी में जल अर्पित कर श्री तुलसी स्तोत्रम्‌ का पाठ करें या न करें  ,इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला गंगा की सेहत पर।  </p>
<p>अंत  में भले ही गंगा जू  मां गंगा धरती पर सागर के 60 हजार पुत्रों को मोक्ष देने के लिए आई थी ,लेकिन वे देश कि करोड़ों  हिन्दू -मुसलमानों  को मोक्ष  दिला  सकतीं  है। शर्त एक ही है कि आप देश की गंगा-जमुनी  संस्कृति  के खिलाफ  खड़े लोगों को पहचानकर  उनके खिलाफ  खड़े हो जाएँ। आपका  गंगा स्नान हुआ  मान  लिया  जाएगा। आपकी  गंगा  दशहरे की पूजा  को गंगा जी स्वीकार कर लेंगी। गंगा ने आजतक  हिंदू - मुसलमान  नहीं किया । तब भी जब मुगलों  ने उसका   नाम  अल्लाहाबाद   रख  दिया था  और आज भी जब उसे दोबारा  प्रयाग  कहा जाने  लगा है। शुभकामनाओं  सहित।</p>
<p><strong>राकेश  अचल  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Jun 2024 17:10:40 +0530</pubDate>
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