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                <title>hindi lekh swatantra vichar - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>एक नासमझ की नस्ली टिप्पणी से पूर्वोत्तर तक पीड़ा </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल</strong>  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नई दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में अरुणाचल प्रदेश की तीन लड़कियों के साथ कथित नस्लीय टिप्पणी और अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। एयर कंडीशनर  लगाने को लेकर शुरू हुआ एक मामूली पड़ोसी विवाद देखते ही देखते गंभीर आरोपों में बदल गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है यह कोई पहली बार नहीं है कि पूर्वोत्तर भारत के लोगों के साथ उनकी शारीरिक बनावट व संस्कृति को लेकर कहीं शेष देश में अभद्रता की गई हो। यहां तक कि एक बार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171694/an-idiots-racist-comment-brings-pain-to-the-northeast"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/hindi-divas48.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल</strong> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नई दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में अरुणाचल प्रदेश की तीन लड़कियों के साथ कथित नस्लीय टिप्पणी और अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। एयर कंडीशनर  लगाने को लेकर शुरू हुआ एक मामूली पड़ोसी विवाद देखते ही देखते गंभीर आरोपों में बदल गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है यह कोई पहली बार नहीं है कि पूर्वोत्तर भारत के लोगों के साथ उनकी शारीरिक बनावट व संस्कृति को लेकर कहीं शेष देश में अभद्रता की गई हो। यहां तक कि एक बार तो पूर्वोत्तर के एक मुख्यमंत्री प्रेस वार्ता में यह कहते रो पड़े थे कि उन्हें भारतीय तक नहीं समझा जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बीते साल मई में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर को 'हमारे विविधता के राष्ट्र में सबसे विशिष्ट क्षेत्र' बताया था। लेकिन दुखद तथ्य यह है कि कुछ ताकतें इन टिप्पणी को तूल देकर बात का बतंगड़ बना कर पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के दिलों में विष वमन करने के लिए लगी रहती है । हालांकि कई बार  इन राज्यों के लोग अक्सर नस्लीय भेदभाव का शिकार होते  हैं लेकिन यह राज्य की कानून व्यवस्था से जुड़े मामले होते हैं जिन्हें नस्लीय भेदभाव से जोड़ कर अलगाव की फसल पैदा करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। कुछ समय पूर्व देहरादून में त्रिपुरा के छात्र अंजेल चकमा की हत्या कर दी गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना के दो महीने से भी कम समय बाद, अब दिल्ली में अरुणाचल प्रदेश की तीन महिलाओं को उनके पड़ोसियों ने कुत्सित शब्द ' धंधेवाली' से संबोधित किया और मोमो बेचने को कहा। यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि उन्हें अपने ही देश में, और वह भी देश की राष्ट्रीय राजधानी में बेगाना करार दे दिया गया। विडंबना यह है कि यह अभद्रता किसी झगड़े या आवेश की प्रतिक्रिया नहीं थी बल्कि यह पहचान और जातीयता पर लक्षित हमला था। इस घटनाक्रम के बाद एक व्यक्ति और उसकी पत्नी पर धर्म, जाति व जन्मस्थान आदि के आधार पर कटुता फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा अन्य आरोप भी लगाए गए हैं। निस्संदेह, इस दंपति के आपत्तिजनक व्यवहार ने एक गहरे जख्म को ही उजागर किया है, जो 'सबका साथ, सबका विकास' की अवधारणा को सिरे से खारिज करने वाली सोच है। साल 2014 में नीदो तानिया की हत्या से लेकर 2025 में अंजेल चकमा की हत्या तक, यह दुराग्रहों का सिलसिला साफ नजर आता है। अक्सर आरोप लगाये जाते रहे हैं कि पूर्वोत्तर के छात्रों व श्रमिकों को उनकी शारीरिक बनावट, खान-पान और भाषा के आधार पर निशाना बनाया जाता है। यह विडंबना ही है कि कुछ संकीर्ण लोग भारत की समृद्ध विविधता की विरासत का मर्म नहीं पहचानते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसी राज्य की भौगोलिक स्थिति, जलवायु व सदियों से चली आ रही संस्कृति हमारे रूप-रंग-भाषा व व्यवहार का निर्धारण करती है। कोस-कोस पर भाषा-पानी बदलने वाले देश की यह विविधता इसकी खूबसूरती भी है। इसके मर्म का सम्मान करना व अंगीकार करना हर भारतीय का दायित्व भी है। पर्वतीय इलाकों का परिवेश व जलवायु व्यक्ति के सरल, सहज, सौम्य व्यवहार व कद-काठी का भी निर्धारण करती है। पूर्वोत्तर समाज में स्त्री प्रधान पारिवारिक व्यवस्था तथा सार्वजनिक जीवन में उसकी महती भूमिका को शेष देश के लोगों द्वारा संशय से देखा जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फलत परस्पर विश्वास की इस सामाजिक व्यवस्था में स्त्री की भूमिका को लेकर नकारात्मक धारणाएं गढ़ ली जाती हैं। यही वजह है कि पूर्वोत्तर के लोगों द्वारा आरोप लगाया जाता कि उनकी महिलाओं को शक की नजर से देखा जाता है और उन पर बिना किसी आधार के अनैतिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप तक लगाए जाते हैं। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी क्षेत्रीय पहचान को लेकर किए जाने वाले किसी भेदभाव के प्रति अक्सर चेताया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मौजूदा घटना क्रम में अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली तीन युवतियां अपने किराए के फ्लैट में एसी लगवा रही थीं। इंस्टॉलेशन के दौरान ड्रिलिंग से उठी धूल-मिट्टी नीचे वाले फ्लैट की ओर गिर गई। नीचे रहने वाली पड़ोसी महिला ने इस पर आपत्ति जताई। शुरुआत में यह सामान्य पड़ोसी विवाद जैसा प्रतीत हो रहा था, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आरोप है कि महिला ने गुस्से में युवतियों के खिलाफ नस्लीय और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इसी दौरान किसी ने पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।वायरल वीडियो में आरोपी महिला को कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए सुना और देखा जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने इसे नस्लीय भेदभाव का मामला बताते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। पूर्वोत्तर भारत के नागरिकों के साथ भेदभाव को लेकर पहले भी बहस होती रही है, और इस घटना ने इस संवेदनशील मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।घटना के बाद पीड़ित युवतियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। शुरुआती जांच में वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि मामले में अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी लागू हो सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद केस में इन प्रावधानों को जोड़ा गयाजांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने आरोपी महिला, जिसकी पहचान रूबी जैन के रूप में हुई है, को गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली पुलिस ने जांच के दौरान एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं आरोपी के खिलाफ जोड़ी हैं.पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद पूछताछ जारी है और मामले की जांच एसीपी स्तर के अधिकारी की निगरानी में की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो के अलावा अन्य साक्ष्यों की भी बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जा सके।इस मामले में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू समेत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी मामले में प्रतिक्रिया व्यक्त कर दुख जताया है। सब समूचे सभ्य समाज की अवधारणा कुछ इने गिने नासमझ लोगों की टिप्पणी से नहीं आंकी जानी चाहिए हम उत्तर से पूर्वोत्तर दक्षिण से पश्चिम तक एक है एक रहेंगे और भविष्य में ऐसी कोई घटना नहीं होनी चाहिए। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 18:37:16 +0530</pubDate>
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                <title>विज्ञान कोई मंजिल नहीं, यह यात्रा है</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" align="center"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">[जहाँ सवाल होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं विज्ञान जन्म लेता है]</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" align="center"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">[विश्व विज्ञान दिवस: ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास और नवाचार का उत्सव]</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक अंधेरी रात में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सदियों पहले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई इंसान आकाश की ओर देखता है और मन में सवाल उठता है – </span><span lang="hi" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ये</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तारे</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्यों</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">टिमटिमाते</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">ये ग्रह क्यों घूमते हैं</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">यही सवाल गैलीलियो को दूरबीन थामने के लिए प्रेरित करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यूटन को सेब गिरते देखने के लिए मजबूर करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आज हम मंगल पर मानव बस्तियाँ बसाने का सपना देख रहे हैं। विज्ञान केवल किताबों या डिग्रियों तक सीमित नहीं है</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159482/science-is-not-a-destination-it-is-a-journey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/विज्ञान-कोई-मंजिल-नहीं, यह-यात्रा-है.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" align="center"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">[जहाँ सवाल होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं विज्ञान जन्म लेता है]</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" align="center"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">[विश्व विज्ञान दिवस: ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास और नवाचार का उत्सव]</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक अंधेरी रात में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सदियों पहले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई इंसान आकाश की ओर देखता है और मन में सवाल उठता है – </span><span lang="hi" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ये</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तारे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्यों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">टिमटिमाते</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">ये ग्रह क्यों घूमते हैं</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">यही सवाल गैलीलियो को दूरबीन थामने के लिए प्रेरित करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यूटन को सेब गिरते देखने के लिए मजबूर करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आज हम मंगल पर मानव बस्तियाँ बसाने का सपना देख रहे हैं। विज्ञान केवल किताबों या डिग्रियों तक सीमित नहीं है – यह वह अंतहीन जिज्ञासा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इंसान को इंसान बनाती है। हर साल </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">नवंबर को जब हम विश्व विज्ञान दिवस मनाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम उस अविचलित जिज्ञासा को नमन करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अज्ञानता के अंधकार से प्रकाश की ओर हमारी राह खोलती है और हमारी सोच की सीमाओं को पीछे छोड़ देती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यूनेस्को ने इस दिवस की शुरुआत </span>2001 <span lang="hi" xml:lang="hi">में की थी और इसका नाम रखा था –</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">”</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस नाम में ही एक संदेश छिपा है: विज्ञान न किसी देश का गुलाम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न किसी धर्म का विरोधी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब दुनिया परमाणु बम की धमकियों से कांप रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी समय विज्ञान ने इंसुलिन खोजकर मधुमेह से पीड़ित लोगों को जीवन दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पोलियो को जड़ से उखाड़ फेंका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इंटरनेट जैसी क्रांति से ज्ञान की सीमाओं को तोड़ा। विज्ञान ने हमेशा यह साबित किया है कि उसके हाथों में शक्ति है –</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विनाश की भी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रचना की भी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दिशा तय करना हमारा काम है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज जलवायु संकट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक महामारी या अंतरिक्ष में नई दुनिया की खोज – हर चुनौती में विज्ञान सबसे आगे खड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारा मार्गदर्शन करता है और मानवता को उज्जवल भविष्य की ओर ले जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की मिट्टी में विज्ञान की जड़ें गहरी हैं। हजारों साल पहले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब आर्यभट्ट ने पृथ्वी के घूमने की बात कही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग हँसे। आज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चंद्रयान-</span>3 <span lang="hi" xml:lang="hi">के जरिए चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की खोज कर रहे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोविड के सबसे कठिन दिनों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब पूरी दुनिया वैक्सीन के लिए तरस रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत ने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोविशील्ड और कोवैक्सीन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विकसित कर एक अरब से ज्यादा डोज़ दुनिया को दीं। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसरो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का बजट तो किसी हॉलीवुड फिल्म से भी कम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी उसने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>104 <span lang="hi" xml:lang="hi">सैटेलाइट्स एक साथ लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड बनाया।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह कमाल पैसों का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जुनून का</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और यही जुनून आज के छोटे वैज्ञानिकों में भी दिखता है – राजस्थान की एक लड़की जो सौर ऊर्जा से पानी शुद्ध करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार का एक लड़का जो पुराने फोन से वेंटिलेटर बनाता है। ये बच्चे कल के वैज्ञानिक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज के हीरो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन रास्ते में काँटे भी हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अंधविश्वास आज भी सिर ऊँचा किए घूम रहा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वैक्सीन को लेकर फैल रही अफवाहें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलवायु परिवर्तन को झुठलाने वाले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्योतिष को विज्ञान बताने वाले – ये सभी विज्ञान के असली विरोधी हैं। विज्ञान सवाल करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाब माँगता है। और जो सवाल से डरते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे विज्ञान से डरते हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हमें चाहिए:</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूलों में प्रयोगशालाएँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गाँवों में इंटरनेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सबसे ज्यादा – ऐसा माहौल जहाँ सवाल पूछने पर डाँट न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि तारीफ हो।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सपना देखिए: दस साल बाद का भारत। हर गाँव में सौर ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर खेत में ड्रोन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर बच्चे के हाथ में टैबलेट और दिमाग में सवाल। कैंसर का इलाज सस्ता और सुलभ हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हवा साफ हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्र का पानी पीने लायक हो। अंतरिक्ष में हमारा अपना भारतीय स्टेशन हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तिरंगा गर्व से लहराता हो।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सपना कोई कविता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह विज्ञान का</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वादा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है। बस जरूरत है – नीति की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेश की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सबसे बड़ी बात:</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व विज्ञान दिवस कोई केवल त्योहार नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह एक पुकार है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पुकार है उस बच्चे की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पहली बार दूरबीन से चाँद देखता है और उसकी आँखें विस्मय से चौड़ी हो जाती हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पुकार है उस माँ की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वैक्सीन लगवाकर अपने बच्चे की सुरक्षा महसूस करती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पुकार है उस किसान की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो मौसम की सटीक जानकारी से अपनी फसल बचा लेता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारा सबसे बड़ा दुश्मन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अज्ञान</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सबसे बड़ा साथी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञान।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक किताब उठाइए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक सवाल पूछिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक प्रयोग कीजिए। क्योंकि जिस दिन हम सवाल पूछना बंद कर देंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी दिन हम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इंसान होना</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी बंद कर देंगे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञान कोई मंजिल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक यात्रा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है – और यह यात्रा अभी शुरू ही हुई है। चलिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ चलें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सवालों के साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खोज के साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उज्जवल भविष्य की ओर कदम बढ़ाते हुए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन </span></strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">“</span></strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरिजीत</span></strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">”</span></strong><strong>,</strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> बड़वानी</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचारधारा</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Nov 2025 18:42:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>धनकड की गति, धनकड जानें, और न जाने कोय</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पू्र्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड जब तक खुद नहीं बोलेंगे तब तक किसी को भी ' धनकड गति ' की हकीकत का पता नहीं चलेगा, और मेरा पक्का यकीन है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड साहब तब तक अपना मुँह नहीं खोलेंगे जब तक  कि माननीय नरेंद्र दामोदर दास मोदी पद पर मौजूद हैं.<br />देश के इतिहास में ' धनकड गति ' कोई नयी घटना नहीं है. हर राजनीतक दल में ' धनकड गति ' प्राप्त माननीयों की एक लंबी फेहरिस्त है लेकिन भाजपा ने उपराष्ट्रपति पद पर बैठे अपने कार्यकर्त्ता को ' धनकड गति ' प्रदान कर नया कीर्तिमान बनाया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153414/know-the-speed-of-dhankad-dhankad-and-dont-know"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-07/धनकड-की-गति,-धनकड-जानें,-और-न-जाने-कोय.jpg" alt=""></a><br /><p>पू्र्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड जब तक खुद नहीं बोलेंगे तब तक किसी को भी ' धनकड गति ' की हकीकत का पता नहीं चलेगा, और मेरा पक्का यकीन है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड साहब तब तक अपना मुँह नहीं खोलेंगे जब तक  कि माननीय नरेंद्र दामोदर दास मोदी पद पर मौजूद हैं.<br />देश के इतिहास में ' धनकड गति ' कोई नयी घटना नहीं है. हर राजनीतक दल में ' धनकड गति ' प्राप्त माननीयों की एक लंबी फेहरिस्त है लेकिन भाजपा ने उपराष्ट्रपति पद पर बैठे अपने कार्यकर्त्ता को ' धनकड गति ' प्रदान कर नया कीर्तिमान बनाया है. इससे पहले  कि भाजपा में ' धनकड गति ' प्राप्त नेताओं की शिनाख्त की जाए  हमें जनसंघ को भी देखना होगा. जनसंघ के संस्थापक बलराज मधोक का नाम आता है. वे अतीत में ' धनकड गति ' को पाने वाले शायद पहले नेता थे. 1980 में भाजपा के गठन के बाद तमाम नेता और संघ प्रचारक ' धनकड गति ' को प्राप्त हुए. इनमें मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केसूभाई पटेल का नाम सबसे पहले आता है.</p>
<p><br />सत्तारूढ भाजपा में राज्य स्तर पर ' धनकड गति ' पाने वालों की फेहरिस्त बहुत लंबी है. इसलिए राष्ट्रीय स्तर की बात करते हैं.<br />भाजपा में 2014 के बाद ' धनकड गति ' पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और प्रोफेसर मुरली मनोहर जोशी प्रमुख है्.उनके बाद जिसने भी प्रधानमंत्री माननीय मोदी जी के खिलाफ मुँह खोला वो ' धनकड गति'  को प्राप्त हुआ. पू्र्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा, सुब्रहमणियम स्वामी, सतपाल मलिक, बसुंधरा राजे सिंधिया भी ' धनकड गति'  को प्राप्त हो चुकी हैं. नेता ही नही आईएएस और आईपीएस अधिकारी और न्यायाधीश भी इस फेहरिस्त में शामिल हैं. एक जमाने में भाजपा के अल्पसंख्यक चेहरे मुख्तार अब्बास नकबी, और शाहनवाज़ खां का कोई अता पता नहीं है. विहिप के प्रवीण तोगडिया, साध्वी ऋतंभरा, साध्वी प्रज्ञा तक ' धनकड गति ' को प्राप्त हो चुकी हैं.<br />' धनकड गति ' पाने वालों में धुर संघी भी शामिल हैं. गोविंदाचार्य हों या पूर्व राज्यपाल प्रो कप्तान सिंह सोलंकी का नाम आप इस फेहरिस्त में शामिल कर सकते हैं. लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा ताई भी ' धनकड गति ' को प्राप्त हो चुकी है संघ के संजय कहाँ हैं आजकल?  वे भी ' धनकड गति'  को प्राप्त हो चुके हैं.<br />दर असल जो नेता ' धनकड गति ' को प्राप्त हुए वे मोदी के खिलाफ मुखर होने का दुस्सास कर बैठे. कुछ ने ' धनकड गति'  से बचने के लिए या तो मौन साध लिया या फिर चारण -भाट बन गये. रक्षा मंत्री हों या भूतल परिवहन मंत्री सबके सब मौन साधकर बैठे हैं. इस समय सभी मोदी जी की निर्ममता से आतंकित हैं. मोदी पार्टी के भीतर हो या बाहर अपनी मुखालफत बर्दास्त नहीं करते. जो उनके खिलाफ खडा होता है उसे ' लोया गति'  या ' धनकड गति'  प्रदान कर दी जाती है. ये सिलसिला थमा नहीं है. कल किस नेता को ' धनकड ' बना दिया जाए, ये कोई नहीं जानता.</p>
<p><br />धनकड गति पहले भी दी जाती थी लेकिन कांग्रेस शासन में इसका नाम कुछ और रहा होगा. भाजपा में जितने भी बिभीषण शामिल किए गये उनमे से अपवादों को छोड अधिकांश को ' धनकड गति' दे दी गई है.जो ' धनकड गति' को प्राप्त नहीं हुए हैं  उनकी सूची भाजपा के धनकडों से बडी हो सकती है. लेकिन कांग्रेस के पास माननीय जगदीप धनकड जैसा कोई सर्वविदित नाम नहीं है जो राजनीतिक कारणों से 'धनकड गति ' को प्राप्त हुआ हो.<br />राजनीति में धनकड गति पाने वाले लोगों की आत्मा भटकती रहती है. धनकड गति को आप राजनीतिक मोक्ष भी कह सकते हैं. जिन्हें मोक्ष नहीं मिला उनकी आत्माएं सौरमंडल में भटक रहीं हैं. राजनीति में भटकती आत्माओं का अलग महत्व  है. जो बरसों तक मोक्ष को प्राप्त नहीं होते.. राजनीतिक दलों में रणछोड लोगो की  कीमत दो कौडी की है जाती है. हम ऐसे तमाम ' धनकड गति'  प्राप्त नेताओं को जानते हैं जो आजकल महफिलें सजाने  के लिए  तरसते हैं. ' धनकड गति 'में किसी को भी, कभी भी, किसी समय शामिल किया जा सकता हैँ. 'धनकड गति ' में शामिल होने के बाद कौन, कहां, किस हाल में रहेगा ये हकीकत कोई नहीं जानता.</p>
<p><br />राजनीति में जिसे धनकड नहीं बनाना होता उसके लिए ढोल नहीं पीटे जाते. जो व्यक्ति धनकड व्यक्ति बनाया जाता है वो खुद ही गाल बजाकर धनकड गति के लिए खुद को होम कर देता है.कांग्रेस में अर्जुन सिंह से लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे नेताओं की लंबी फेहरिस्त है जो अपने समय में ' धनकड गति,' को प्राप्त हुए. माधवराव सिंधिया को भी कुछ समय के लिए ' धनकड गति' से गुजरना पडा.इसलिए आप कह सकते हैं कि-' धनकड की गति धनकड जानें, और न जाने कोय '. आप अपनी याददाश्त के बल पर देश में समय- समय पर<br />' धनकड गति' पाने वालों की फेहरिस्त को छोटा, बडा कर सकते हैं.मुझसे इसमें भूल-चूक हो सकती है.हमारे बुंदेलखंड में 'धनकड गति 'को ' बर्फ में लगाना ' भी कहते हैं. अंग्रेजी में इसे शायद 'फ्रीज़ करना 'कहा जाता है. </p>
<p><strong>राकेश अचल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Jul 2025 18:33:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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                <title>जागो युवा देश के ऊर्जावान नौजवानों भविष्य को मुट्ठी में कर लो l</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वैश्विक स्तर पर भारत देश को युवा जनसंख्या का सरताज देश माना जाता है। भारत के नौजवानों की क्षमता का लोहा अमेरिका, ब्रिटेन,फ्रांस, कनाडा, इजरायल और अन्य पश्चिमी देश मानते हैं। विश्व में ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं जहां भारत की युवा जनसंख्या ने अपना परचम ना फैलाया हो। इसीलिए नेपथ्य के परिदृश्य में यह आवाज सदैव बुलंद होती है कि युवा देश के युवा नागरिकों आगे बढ़ो दुनिया को मुट्ठी में कर लो, भविष्य हमेशा तुम्हारा है और रहेगा। किसी भी राष्ट्र को बड़ा बनाने या समृद्ध बनाने के लिए वर्षों की मेहनत अथक प्रयास और सकारात्मक सोच के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141737/wake-up-the-energetic-youth-of-the-country-take-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/dsdfg.webp" alt=""></a><br /><p>वैश्विक स्तर पर भारत देश को युवा जनसंख्या का सरताज देश माना जाता है। भारत के नौजवानों की क्षमता का लोहा अमेरिका, ब्रिटेन,फ्रांस, कनाडा, इजरायल और अन्य पश्चिमी देश मानते हैं। विश्व में ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं जहां भारत की युवा जनसंख्या ने अपना परचम ना फैलाया हो। इसीलिए नेपथ्य के परिदृश्य में यह आवाज सदैव बुलंद होती है कि युवा देश के युवा नागरिकों आगे बढ़ो दुनिया को मुट्ठी में कर लो, भविष्य हमेशा तुम्हारा है और रहेगा। किसी भी राष्ट्र को बड़ा बनाने या समृद्ध बनाने के लिए वर्षों की मेहनत अथक प्रयास और सकारात्मक सोच के साथ संयम एवं उच्च मनोबल की आवश्यकता होती है, तब जाकर ही राष्ट्र एक मजबूत तथा विकासवान राष्ट्र बन पाता है।</p>
<p>हमें सदैव वर्तमान में जीना चाहिए, इतिहास से शिक्षा लेनी चाहिए और भविष्य के प्रति सकारात्मक सोच के साथ आगे सदैव अग्रसर होते रहना चाहिए। आजादी के 75 वर्ष के बाद भारत ने विकास की गति को बहुत मजबूती के साथ थामा हुआ है। 135 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में युवा जनसंख्या का प्रतिशत बहुत ज्यादा है, आने वाले भविष्य में देश की बागडोर इन्हीं युवा हाथों में होने वाली है। एक बहुत अच्छी कहावत है कि "आशाओं पर आकाश टिका हुआ है" और निसंदेह आशा,उम्मीद, संभावना बहुत ही सारगर्भित एवं चमत्कारिक शब्द भी हैं।</p>
<p>उम्मीद जो इतिहास में कई बार चमत्कार करती आई है। यह आशा एवं उम्मीद का ही प्रतिफल है कि हम सकारात्मक होकर उच्च मनोबल के साथ किसी लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ते है। फिर यदि लक्ष्य मेडिकल साइंस में किसी नई दवा को इजाद करना हो या स्पेस रिसर्च में नई टेक्नोलॉजी लाना हो या देश मे विकास की नई धारा को प्रवाहित करना हो, तो सकारात्मक ऊर्जा हमें इस संदर्भ में मदद करने वाला तत्व होता है। अच्छी और सही सोच हमेशा अच्छे परिणाम देने वाला होती है, पर बिना सकारात्मक सोच के और बिना किसी सार्थक परिणाम की कल्पना किए हुए उस पर पसीना बहाना बड़ा ही दुष्कर कार्य प्रतीत होता है। अच्छे पद अथवा अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए विद्यार्थी सकारात्मक सोच और उच्च मनोबल तथा संयम को लेकर ही आगे अपनी तैयारी करता है एवं उच्चतम अंक या उच्च पद की प्राप्ति करता है। कोई भी खिलाड़ी ओलंपिक में बिना पदक की लालसा के तैयारी नहीं कर सकता और पदक को लक्ष्य मानकर जब वह पूर्ण मनोबल के साथ आशाओं की लकीरों के मध्य वह जब अपना पसीना मैदान में बहाता है तो वह लक्ष्य प्राप्ति की ओर लगातार अग्रसर होता है और उसे अंत में अपनी सकारात्मक ऊर्जा के कारण वह पदक अवश्य प्राप्त होता है।</p>
<p>दार्शनिक भी कहते हैं कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए एक बेहतर और अच्छी शुरुआत सफलता का बहुत बड़ा हिस्सा होती है। हम संभावनाओं के दम पर जो हमें निरंतर प्रेरित करती है अपना पहला कदम उठाकर सफलता सुनिश्चित करते हैं। जीवन की कटु सच्चाई तथा जिंदगी के उतार-चढ़ाव को झेलने के लिए एवं सफलता की ओर अग्रसर होने के लिए हमें आशा एवं सकारात्मक सोच की सदैव मदद करती इसके बिना किसी सफलता के बारे में सोचना भी बेमानी होगा। संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए हमें अपने संपूर्ण मनोबल के साथ उस कार्य को अंजाम देने के लिए अपनी तरफ से पूरी पूरी कोशिश करनी होगी एवं लक्ष्य के साथ दे तथा साधनों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर उस के संदर्भ में उसके अंतर्निहित हर तत्व को भलीभांति पहचान कर उस पर मेहनत करनी होगी</p>
<p>अन्यथा बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए यदि मेहनत और कठोर श्रम न किया जाए तो असफलता ही हाथ लगती है ।यही वजह है कि जिन भी बड़े लोगों ने बड़ी सफलता प्राप्त की है निसंदेह उन्होंने कठिन परिश्रम अपने लक्ष्य के लिए किया था, है और करेंगे। हर बड़े कार्य को करने के लिए अच्छी योजना ,अच्छा आकलन एवं उस सफलता को अपना बनाने के लिए सही विचार तथा नीतियां बनानी होगी एवं अपने उपलब्ध संसाधनों का विश्लेषण तथा अवलोकन कर उसकी क्षमता का आकलन करना होगा। केवल हवा में सकारात्मक सोच और मनोबल के दम पर किसी बड़े लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। उत्तम एवं बड़े सकारात्मक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एक बड़ी सोच अथक मेहनत एक सुनियोजित नीति एवं पृष्ठभूमि में शांत चित्त मस्तिष्क की आवश्यकता होती है।</p>
<p><br />सर्वप्रथम हमारे सामने जो उपलब्ध वर्तमान का समय है वर्तमान के अवसर संपूर्ण सदुपयोग कर भविष्य की तमाम सफलताओं को सुनिश्चित किया जा सकता है। हमें सदैव चौकन्ना रहकर जो हमारे सामने समय सीमा है एवं समय के अवसर हैं उन्हें पहचान कर उसका संपूर्ण दोहन कर उपलब्ध संसाधनों का परीक्षण कर समेकित रूप से सब का समुचित उपयोग कर लक्ष्य की प्राप्ति की ओर जागृत होना चाहिए। जैसा कि हमारे प्रधानमंत्री ने कहा की करोना काल में हमें आपदा में अवसर की तलाश करनी चाहिए और अवसर ही हमें किसी भी विकट परिस्थिति से लड़ने एवं उस पर नियंत्रण रखने की शक्ति एवं ऊर्जा प्रदान करते हैं। यह सकारात्मक सोच का ही परिणाम है की कोविड-19 के संक्रमण में भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में उस पर प्रभावी नियंत्रण किया एवं उस पर विजय प्राप्त की है। यह आसान काम नहीं था किंतु पूरे देश के नागरिकों एवं अग्रिम नेताओं की सकारात्मक सोच तैयारी एवं संसाधनों के समुचित प्रयोग से ही संभव हो पाया।</p>
<p>आज हमारे सामने समाज में जो भी हमारे प्रेरणा स्रोत हैं, वे कभी चुनौतियों के सामने झुके नहीं और ना ही उन्हें किसी प्रकार की समाजिक कठिनाई अथवा चुनौती झुका पाई और यही कारण है की वह हमारे प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। इस संदर्भ में हर व्यक्ति को सकारात्मक सोच रख कर अपने मौजूदा संसाधनों का संपूर्ण दोहन कर सटीक नीति और भविष्य की योजनाएं बनाकर उस पर मेहनत करनी होगी और मेहनत से उपजे आत्मबल तथा संयम के साथ किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संपूर्ण ऊर्जा समेकित रूप से केंद्रित कर उस लक्ष्य की प्राप्ति करनी होगी। नागरिकों के समेकित प्रयास अच्छी सोच और कड़ी मेहनत से ही संपूर्ण राष्ट्र वैश्विक स्तर पर एक आदर्श तथा प्रेरणादायक राष्ट्र बनने की क्षमता की ओर आगे बढ़ सकता है।</p>
<p><strong>संजीव ठाकुर, </strong></p>
<p><strong>(विश्व रिकार्ड भारत लेखक), चिंतक, स्तंभकार,</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 May 2024 16:58:26 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली अस्पताल अग्निकांड जिम्मेदार कौन </title>
                                    <description><![CDATA[<div>अक्सर हमारी नींद जब टूटती है जब हदसा हो जाता है। उससे पहले जिम्मेदार आराम फरमाते रहते हैं। दिल्ली के एक अस्पताल में सात नवजात जिंदा जल गए। हंगामा काटा गया और अस्पताल मालिक को हिरासत में ले लिया गया। यहां पर प्रशासन और सरकार की इतिश्री हो गई। हमारा प्रशासन किस लिए है। मोटी-मोटी तनख्वाह पाने वाले अधिकारी क्या करते रहते हैं। क्या हादसा होने के बाद ही इनकी नींद खुलती है। हम पहले से ही मानक के अनुसार कार्य क्यों नहीं करते क्यों हम केवल कागजी कार्रवाई करते रहते हैं। इन अस्पतालों की मोनीटरिंग क्यों नहीं की जाती।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141650/who-is-responsible-for-delhi-hospital-fire%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/screenshot_20240526_143048_dainik-bhaskar1.jpg" alt=""></a><br /><div>अक्सर हमारी नींद जब टूटती है जब हदसा हो जाता है। उससे पहले जिम्मेदार आराम फरमाते रहते हैं। दिल्ली के एक अस्पताल में सात नवजात जिंदा जल गए। हंगामा काटा गया और अस्पताल मालिक को हिरासत में ले लिया गया। यहां पर प्रशासन और सरकार की इतिश्री हो गई। हमारा प्रशासन किस लिए है। मोटी-मोटी तनख्वाह पाने वाले अधिकारी क्या करते रहते हैं। क्या हादसा होने के बाद ही इनकी नींद खुलती है। हम पहले से ही मानक के अनुसार कार्य क्यों नहीं करते क्यों हम केवल कागजी कार्रवाई करते रहते हैं। इन अस्पतालों की मोनीटरिंग क्यों नहीं की जाती। प्राइवेट अस्पताल बिना मकान के इतनी संख्या में खुल गये हैं जैसे परचून की दुकानें। आखिर मानक विहीन इन अस्पतालों को लाइसेंस कैसे हासिल हो जाता है।</div>
<div> </div>
<div>और हादसे के बाद किस तरह इन अस्पतालों की सील टूट जाती है किसी से छिपा नहीं है। इसमें अस्पताल मालिक ही नहीं उनके ऊपर बैठे अफसर भी जिम्मेदार हैं जो कि नाममात्र को जांच की खानापूर्ति करके अपनी जेब गर्म करके चले आते हैं। ऐसे ऐसे नर्सिंग होम चल रहे हैं जिनमें मानक के अनुसार कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है बस उनको मरीजों का इंतजार रहता है। अस्पताल के असली मालिकों के पास कोई स्वस्थ्य की डिग्री नहीं होती डाक्टर सभी केस के अनुसार बाहर से बुलाए जाते हैं। अन्य समय में पूरा अस्पताल अप्रशिक्षित लोगों की देखरेख में रहता है। एक स्वीपर भी इंजेक्शन लगाना, ग्लूकोज चढ़ाना अन्य तमाम काम कर लेता है। क्यों नहीं इनकी जांच होती है। जब कोई बड़ा केस हो जाता है तो अस्पताल मालिक को हिरासत में ले लिया जाता है लेकिन उन लोगों का क्या कुसूर जिन्होंने अपने परिवारजनों को खो दिया है। आज की सरकारी व्यवस्था पर यह बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है।</div>
<div> </div>
<div> हम बात कर रहे हैं दिल्ली के शाहदरा जिले के विवेक विहार स्थित  बेबी केयर अस्पताल की जहां शनिवार को भीषण आग लग गई थी इस हादसे में सात नवजात शिशुओं की दर्दनाक मौत हो गई थी इस घटना में पांच अन्य घायल हुए शिशुओं का इलाज दूसरे अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने अस्पताल के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है, उसके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। घटनाक्रम की बात करें तो चाइल्ड केयर सेंटर पहली मंजिल पर चल रहा था। शुरुआती जांच के अनुसार वहीं अस्पताल के भूतल पर अवैध तरीके से आक्सीजन के सिलेंडरों की रिफिलिंग का काम होता था। यहीं सिलेंडर में विस्फोट हुआ और आग फैल गई। एक के बाद एक करीब आठ सिलेंडर फटे। इसमें आग आसपास की दो अन्य इमारतों में भी फैल गई। यह एक बहुत बड़ी दुर्घटना है जिससे सबक लेकर हमें मंथन करना होगा। जिम्मेदार विभाग को भी इसके दायरे में लाया जाना चाहिए। जब हम एक छोटा सा काम शुरू करते हैं तो उसके लिए तमाम मानक होते हैं। हम उन मानकों को पूरा कर भी लें तो बिना लिए दिए हमें परमीशन नहीं मिलती। यहां पर जो भ्रष्टाचार होता है वही मानवता की जान से खिलवाड़ करता है।</div>
<div> </div>
<div> दिल्ली हो या उत्तर प्रदेश हर रोड पर नर्सिंग होम, अस्पताल की लाइन लगी है लेकिन यहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। अस्पतालों की स्थिति ऐसी है यदि वहां कोई हादसा होता है तो फिर निकल कर बचना मुश्किल है। दिल्ली का यह हादसा हम सभी के लिए एक सबक है। और हमें इस पर सख्ताई करनी होगी। 100-100 गज में नर्सिंग होम चल रहे हैं। यह किस तरह मानक को पूरा करेंगे। इन नर्सिंग होम के एजेंट गांव और कस्बों में फैले रहते हैं जो यहां तक मरीजों को भेजते हैं जिनका कमीशन सैट होता है। आज हमारे देश में स्वास्थ्य व्यवस्था का मजाक बना रखा है। स्वस्थ्य विभाग में हर तरफ घोटाला ही घोटाला नजर आता है। एक डाक्टर की लिखी दवा या तो उसके बगल के मेडीकल पर मिलेगी या फिर उनके नर्सिंग होम में। वह दवा पास के किसी दूसरे मेडिकल स्टोर पर नहीं मिल सकती क्योंकि इसके लिए उन्हें मोटा कमीशन मिलता है। सरकारी अस्पतालों में भी आपरेशन बिना पैसा दिये नहीं हो रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>आपरेशन की मेडिसिन तो स्वयं मरीज़ को लानी ही है इसके अतिरिक्त भी सर्जन को हमें अलग से पैसा देना पड़ता है। यहां तक कि भारत सरकार की एक बड़ी योजना आयुष्मान कार्ड धारकों को भी इलाज कराने से पहले कई अन्य मदों के लिए पैसा देना होता है। यह भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है। बिना बीफार्मा, डीफार्मा किये लोग मेडिकल स्टोर चला रहे हैं। बस किसी बीफार्मा, डीफार्मा वालों से किराए पर उनकी डिग्री डिप्लोमा ले लिया और उनको चलाने का काम शुरू हो गया। यदि जांच की जाए तो 75 फीसदी ऐसे मेडीकल स्टोर निकलेंगे जहां कोई फार्मेसिस्ट नहीं मिलेगा। जिनके नाम से मेडीकल स्टोर चल रहे हैं वह कुछ अन्य काम कर रहे हैं और अपना डिप्लोमा या डिग्री किराए पर उठाए हुए हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं है। यह सभी लाइसेंस सीएमओ आफिस से बनते हैं जिसमें लंबी घूस चलती है। लेकिन हमारा स्वास्थ्य मंत्रालय सब कुछ जानते हुए भी खामोश है।</div>
<div> </div>
<div>बीएएमएस की डिग्री हासिल किए हुए आयुर्वेद के डाक्टर भी धड़ल्ले से नर्सिंग होम चला रहे हैं और उनके यहां ओपीडी, आप्रेशन, एनआईसीयू, तथा आईसीयू की सारी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। कभी कभी सर्जन के न होने पर नान सर्जन डाक्टर भी सर्जरी कर देते हैं। मामला जब फंसता है जब किसी मरीज की हालत बिगड़ती है या उसकी मृत्यु हो जाती है। तब डाक्टर को हिरासत में लिया जाता है और अस्पताल सील कर दिया जाता है लेकिन कुछ समय बाद उसी अस्पताल की सील खुल जाती है और फिर पहले की तरह ही वह चलने लगते हैं। हमारे देश की बहुत सी आबादी अभी भी ऐसी है कि वह यह नहीं समझती कि हम जिस डाक्टर से इलाज करा रहे हैं क्या यह इस मर्ज के लिए उपर्युक्त है।</div>
<div> </div>
<div>स्वास्थ्य विभाग एक बहुत ही महत्वपूर्ण विभाग है यहां पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। एक सीएमओ के अंडर में जिले की सारी चिकित्सा व्यवस्थाएं आती हैं। लेकिन यदि पैसा खर्च कर दिया जाए तो आपको किसी चीज की अनुमति बिना मानक के ही मिल जाती है। क्या सरकार और जिला प्रशासन इस पर ध्यान देगा। या जनता इसी तरह इन हादसों का शिकार होती रहेगी। किसी भी देश की सबसे बड़ी आवश्यकताएं स्वास्थ्य, शिक्षा और और रोजगार होती हैं। और सबसे ज्यादा कमियां स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग में ही देखने को मिलती हैं। इन पर सरकार भी कोई अंकुश लगाने में लाचार नजर आती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 May 2024 15:38:20 +0530</pubDate>
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