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                <title>Un - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Un RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चीन ने फिर बताया अपना हिस्सा;  अरुणाचल की 30 जगहों के चीन ने बदले नाम </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>चीन ने अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताकर वहां की 30 जगहों के नाम बदल दिए हैं। चीन की सिविल अफेयर मिनिस्ट्री ने इसकी जानकारी दी। हांगकांग मीडिया हाउस साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, इनमें से 11 रिहायशी इलाके, 12 पर्वत, 4 नदियां, एक तालाब और एक पहाड़ों से निकलने वाला रास्ता है। हालांकि, इन जगहों के नाम क्या रखे गए हैं, इस बारे में जानकारी नहीं दी गई। इन नामों को चीनी, तिब्बती और रोमन में जारी किया।</p>
<p>पिछले 7 सालों में ऐसा चौथी बार हुआ है जब चीन ने अरुणाचल की जगहों का नाम बदला</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139976/china-again-revealed-its-share-china-changed-the-names-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-04/asfgd.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>चीन ने अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताकर वहां की 30 जगहों के नाम बदल दिए हैं। चीन की सिविल अफेयर मिनिस्ट्री ने इसकी जानकारी दी। हांगकांग मीडिया हाउस साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, इनमें से 11 रिहायशी इलाके, 12 पर्वत, 4 नदियां, एक तालाब और एक पहाड़ों से निकलने वाला रास्ता है। हालांकि, इन जगहों के नाम क्या रखे गए हैं, इस बारे में जानकारी नहीं दी गई। इन नामों को चीनी, तिब्बती और रोमन में जारी किया।</p>
<p>पिछले 7 सालों में ऐसा चौथी बार हुआ है जब चीन ने अरुणाचल की जगहों का नाम बदला हो। चीन ने अप्रैल 2023 में अपने नक्शे में अरुणाचल प्रदेश की 11 जगहों के नाम बदल दिए थे। चीन ने पिछले 5 साल में तीसरी बार ऐसा किया था। इसके पहले 2021 में चीन ने 15 जगहों और 2017 में 6 जगहों के नाम बदले थे।</p>
<p><strong>नाम बदलने के पीछे चीन का क्या दावा है...</strong><br />दरअसल, चीन ने कभी अरुणाचल प्रदेश को भारत के राज्य के तौर पर मान्यता नहीं दी। वो अरुणाचल को ‘दक्षिणी तिब्बत’ का हिस्सा बताता है। उसका आरोप है कि भारत ने उसके तिब्बती इलाके पर कब्जा करके उसे अरुणाचल प्रदेश बना दिया है। चीन अरुणाचल के इलाकों के नाम क्यों बदलता है इसका अंदाजा वहां के एक रिसर्चर के बयान से लगाया जा सकता है।</p>
<p>इसके अलावा इलाके के जातीय समुदाय जैसे तिब्बती, लाहोबा, मोंबा भी अपने अनुसार जगहों के नाम बदलते रहते थे। जब जैंगनेम पर भारत ने गैर कानूनी तरीके से कब्जा जमाया तो वहां की सरकार ने गैर कानूनी तरीकों से जगहों के नाम भी बदल दिए।' झांग ने ये भी कहा था कि अरुणाचल के इलाकों के नाम बदलने का हक केवल चीन को होना चाहिए।</p>
<p>2015 में चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंस के रिसर्चर झांग योंगपान ने ग्लोबल टाइम्स को कहा था, 'जिन जगहों के नाम बदले गए हैं वो कई सौ सालों से हैं। चीन का इन जगहों का नाम बदलना बिल्कुल जायज है। पुराने समय में जांगनान ( चीन में अरुणाचल को दिया नाम) के इलाकों के नाम केंद्रीय या स्थानीय सरकारें ही रखती थीं।</p>
<p><strong>भारत हमेशा कहता है- अरुणाचल हमारा हिस्सा था, है और रहेगा</strong><br />अरुणाचल में बढ़ते चीनी दखल और यहां की जगहों के नाम बदले जाने पर भारत कहता आया है कि अरुणाचल हमारा हिस्सा है। अप्रैल 2023 में विदेश मंत्रालय ने कहा था- हमारे सामने चीन की इस तरह की हरकतों की रिपोर्ट्स पहले भी आई हैं। हम इन नए नामों को सिरे से खारिज करते हैं। अरुणाचल प्रदेश भारत का आतंरिक हिस्सा था, हिस्सा है और रहेगा। इस तरह से नाम बदलने से हकीकत नहीं बदलेगी।</p>
<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-04/asfgd.jpg" alt="asfgd"></img></strong></p>
<p><strong>अरुणाचल प्रदेश को चीन इतना अहम क्यों मानता है?</strong><br />अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा राज्य है। नॉर्थ और नॉर्थ वेस्ट में तिब्बत, वेस्ट में भूटान और ईस्ट में म्यांमार के साथ यह अपनी सीमा साझा करता है। अरुणाचल प्रदेश को पूर्वोत्तर का सुरक्षा कवच कहा जाता है। चीन का दावा तो पूरे अरुणाचल पर है, लेकिन उसकी जान तवांग जिले पर अटकी है। तवांग अरुणाचल के नॉर्थ-वेस्ट में हैं, जहां पर भूटान और तिब्बत की सीमाएं हैं।</p>
<p><strong>क्या सच में देश के नाम बदल जाएंगे?</strong><br />इसका जवाब है- नहीं। दरअसल, इसके लिए तय रूल्स और प्रॉसेस है। अगर किसी देश को, किसी जगह का नाम बदलना है तो उसे UN ग्लोबल जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट को पहले से जानकारी देनी होती है।</p>
<p>इसके बाद, UN के जियोग्राफिक एक्सपर्ट उस इलाके का दौरा करते हैं। इस दौरान प्रस्तावित नाम की जांच की जाती है। स्थानीय लोगों से बातचीत की जाती है। तथ्य सही होने पर नाम बदलने को मंजूरी दी जाती है और इसे रिकॉर्ड में शामिल किया जाता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Apr 2024 16:18:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Israel Hamas War: UN महासभा में युद्ध रोकने का प्रताव हुआ पास, पक्ष में पड़े कुल 120 वोट </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International News:</strong> संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष सत्र में गाजा में मानवीय आधार पर संघर्ष विराम के लिए पेश प्रस्ताव भारी बहुमत से पास हो गया। प्रस्ताव के पक्ष में 120 वोट पड़े, जबकि विरोध में सिर्फ 14 वोट पड़े। भारत, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी समेत 45 देशों ने मतदान से खुद को अलग कर लिया।</p>
<p>प्रस्ताव में इजरायल और हमास के बीच मानवीय आधार पर तत्काल संघर्ष विराम का आह्वान किया गया है। साथ ही बिना किसी रुकावट के गाजा तक मानवीय सहायता पहुंचाने की अपील भी की है। इसमें पानी, बिजली और वस्तुओं के वितरण को फिर से शुरू</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136315/israel-hamas-war-un-the-proposal-to-stop-the-war"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/un-general-assembly_large_1301_19.webp" alt=""></a><br /><p><strong>International News:</strong> संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष सत्र में गाजा में मानवीय आधार पर संघर्ष विराम के लिए पेश प्रस्ताव भारी बहुमत से पास हो गया। प्रस्ताव के पक्ष में 120 वोट पड़े, जबकि विरोध में सिर्फ 14 वोट पड़े। भारत, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी समेत 45 देशों ने मतदान से खुद को अलग कर लिया।</p>
<p>प्रस्ताव में इजरायल और हमास के बीच मानवीय आधार पर तत्काल संघर्ष विराम का आह्वान किया गया है। साथ ही बिना किसी रुकावट के गाजा तक मानवीय सहायता पहुंचाने की अपील भी की है। इसमें पानी, बिजली और वस्तुओं के वितरण को फिर से शुरू करना शामिल है। भारत गाजा में मानवीय संघर्ष विराम के लिए जॉर्डन द्वारा शुरू किए गए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव से दूर रहा। </p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासभा ने गाजा में युद्धविराम से जुड़े एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। ये प्रस्ताव जॉर्डन समेत अरब देशों की तरफ से पेश किया गया था। जिसे भारी बहुमत से अपनाया गया। इस प्रस्ताव पर भारत का वोटिंग में भाग न लेने की वजह पर विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि बीते 10 सालों से भारत सरकार की कूटनीति आतंकवाद के खिलाफ रही है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय मंचों से भी भारत के बयान ने उसके इस रुख की पुष्टि की है। इजरायल हमास संघर्ष शुरू होने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत के दौरान भारत के पीएम मोदी ने कहा था कि हम हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ हैं।  </p>
<p>संयुक्त राष्ट्र की 193 सदस्यीय महासभा ने उस प्रस्ताव को अपनाया, जिसमें तत्काल, टिकाऊ और निरंतर मानवीय संघर्ष-विराम का आह्वान किया गया है, ताकि शत्रुता समाप्त हो सके। प्रस्ताव के पक्ष में 121 देशों ने मत किया, 44 सदस्य मतदान से दूर रहे और 14 सदस्यों ने इसके खिलाफ वोट दिया। प्रस्ताव में पूरी गाजा पट्टी में आम नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं का तत्काल, निरंतर, पर्याप्त और निर्बाध प्रावधान करने की मांग की गई थी। </p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने मतदान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि ऐसी दुनिया में जहां मतभेदों और विवादों को बातचीत से हल किया जाना चाहिए, इस प्रतिष्ठित संस्था को हिंसा का सहारा लेने की घटनाओं पर गहराई से चिंतित होना चाहिए। पटेल ने कहा कि हिंसा जब इतने बड़े पैमाने और तीव्रता पर होती है, तो यह बुनियादी मानवीय मूल्यों का अपमान है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Oct 2023 13:13:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UN में जयशंकर ने कनाडा को दिया मुहतोड़ जवाब, बोले विदेशी दखल के कारण लोकतंत्र खतरे में  </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>इंटरनेशनल न्यूज़ </strong></p>
<p><strong>UN</strong> हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत और कनाडा के संबंधों में  तनाव चरम पर है।  संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी कनाडा-भारत विवाद छाया रहा।  विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में  कनाडा से लेकर चीन और पाकिस्तान तक पर निशाना साधा  और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की हिदायत दी। जयशंकर ने जब कहा कि राजनीति के लिए आतंकवाद को बढ़ावा देना गलत है तो कनाडा तिलमिला उठा और पलटवार करते हुए कहा है कि विदेशी ताकतों के दखल की वजह से लोकतंत्र खतरे में है । </p>
<p>  हम</p>
<p>संयुक्त</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135198/in-un-jaishankar-gave-a-befitting-reply-to-canada-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/2023_9image_12_16_087933441jaishankar.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>इंटरनेशनल न्यूज़ </strong></p>
<p><strong>UN</strong> हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत और कनाडा के संबंधों में  तनाव चरम पर है।  संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी कनाडा-भारत विवाद छाया रहा।  विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में  कनाडा से लेकर चीन और पाकिस्तान तक पर निशाना साधा  और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की हिदायत दी। जयशंकर ने जब कहा कि राजनीति के लिए आतंकवाद को बढ़ावा देना गलत है तो कनाडा तिलमिला उठा और पलटवार करते हुए कहा है कि विदेशी ताकतों के दखल की वजह से लोकतंत्र खतरे में है । </p>
<p> हम किसी के राजनीतिक फायदे के लिए झुक नहीं सकते  क्योंकि ऐसा देखा जा रहा है कि विदेशी दखल की वजह से लोकतंत्र खतरे में हैं। सच्चाई ये है कि अगर हम उन नियमों का पालन नहीं करते हैं, जिन पर हम सहमत हुए हैं तो हमारे उन्मुक्त समाजों का ताना-बाना टूटने लगेगा। </p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में कनाडा के राजदूत बॉब रे ने कहा कि विदेशी हस्तक्षेप की वजह से लोकतंत्र खतरे में हैं इसलिए राजनीतिक फायदे के लिए झुका नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब हम समानता के महत्व पर जोर देते हैं,हमें निष्पक्ष और लोकतांत्रिक समाजों के मूल्यों को बनाए रखना होगा। </p>
<p>हालांकि  विदेश मंत्री जयशंकर ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि सियासी सहूलियत के लिए आतंकवाद पर एक्शन सही नहीं है  जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कनाडा का नाम लिए बगैर कहा कि अब वो दिन बीत चुके हैं, जब कुछ देश एजेंडा सेट करते थे जबकि दूसरे देश उसी पर चलने की उम्मीद करते थे।</p>
<p> आज भी कुछ देश ऐसे हैं, जो एजेंडा सेट करते हैं लेकिन अब यह नहीं चल सकता कि सियासी सहूलियत के लिए आतंकवाद, चरमपंथ और हिंसा पर एक्शन नहीं लेना चाहिए।  अभी भी कुछ देश ऐसे हैं, जो एक तय एजेंडे पर काम करते हैं लेकिन ऐसा हमेशा नहीं चल सकता और इसके खिलाफ आवाज उठाई जानी चाहिए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/135198/in-un-jaishankar-gave-a-befitting-reply-to-canada-and</link>
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                <pubDate>Wed, 27 Sep 2023 17:30:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>  UN में बोला भारत,आतंकियों को काली सूची में डालने के प्रस्ताव को रोकना चीन का दोहरापन </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा</strong> भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC)  में चीन और पाकिस्तान के परोक्ष संदर्भ देते हुए कहा  कि बिना कोई कारण बताए विश्व स्तर पर स्वीकृत आतंकवादियों को काली सूची में डालने के साक्ष्य-आधारित प्रस्तावों को रोकना अनुचित है और इस तरह के कदम से ‘‘दोहरेपन की बू'' आती है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि राजदूत रुचिरा कंबोज ने मंगलवार को यहां कहा, ‘‘यूएनएससी प्रतिबंध समितियों की कार्यप्रणाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रही है।'' काम करने के तरीकों पर सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कंबोज ने कहा, ‘‘वैश्विक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134400/india-said-in-un-chinas-duplicity-in-stopping-the-proposal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/india-in-unc.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा</strong> भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC)  में चीन और पाकिस्तान के परोक्ष संदर्भ देते हुए कहा  कि बिना कोई कारण बताए विश्व स्तर पर स्वीकृत आतंकवादियों को काली सूची में डालने के साक्ष्य-आधारित प्रस्तावों को रोकना अनुचित है और इस तरह के कदम से ‘‘दोहरेपन की बू'' आती है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि राजदूत रुचिरा कंबोज ने मंगलवार को यहां कहा, ‘‘यूएनएससी प्रतिबंध समितियों की कार्यप्रणाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रही है।'' काम करने के तरीकों पर सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कंबोज ने कहा, ‘‘वैश्विक स्तर पर स्वीकृत आतंकवादियों के लिए वास्तविक, साक्ष्य-आधारित सूची प्रस्तावों को बिना कोई उचित कारण बताए रोकना अनावश्यक है और जब आतंकवाद की चुनौती से निपटने में परिषद की प्रतिबद्धता की बात आती है तो दोहरेपन की बू आती है।''</p>
<p>कंबोज ने कहा  कि UNSC के आठ बार निर्वाचित सदस्य भारत को सुरक्षा परिषद के कामकाज के तरीकों में सुधार की आवश्यकता के बारे में कुछ प्रमुख चिंताएं हैं। उन्होंने कहा, “हमें... एक ऐसी सुरक्षा परिषद की आवश्यकता है जो आज संयुक्त राष्ट्र की भौगोलिक और विकासात्मक विविधता को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करे। ऐसी सुरक्षा परिषद जहां अफ्रीका, लैटिन अमेरिका तथा एशिया और प्रशांत के विशाल बहुमत सहित विकासशील देशों और गैर-प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों की आवाजों को इस मेज पर उचित स्थान मिले।'' दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत ने इस बात पर जोर दिया कि सदस्यता की दोनों श्रेणियों में परिषद का विस्तार नितांत आवश्यक है।</p>
<p> उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिबंध समितियों के कामकाज के तरीकों में पारदर्शिता और सूचीबद्ध करना तथा सूची से हटाने में निष्पक्षता पर जोर दिया जाना चाहिए और यह राजनीतिक विचारों पर आधारित नहीं होना चाहिए। कंबोज की टिप्पणी चीन और उसके सदाबहार दोस्त पाकिस्तान के परोक्ष संदर्भ में थी। चीन ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने के भारत और उसके सहयोगियों के प्रयासों में बार-बार रुकावट डाली है। ताजा उदाहरण इस साल जून का है जब चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति के तहत लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी साजिद मीर को एक वैश्विक आतंकवादी के तौर पर नामित करने के लिए भारत और अमेरिका के एक प्रस्ताव में अड़ंगा डाला था, जो 26/11 मुंबई आतंकी हमले में शामिल होने के आरोप में वांछित था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Sep 2023 15:42:53 +0530</pubDate>
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                <title>चीन ने UN में की मानवाधिकार हनन को लेकर बहस, हांगकांग-शिनजियांग मुद्दे पर किया बचाव</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>चीनी राजदूतों ने संयुक्त राष्ट्र की बैठक में मानवाधिकार के पैरोकारों के साथ एक असामान्य सार्वजनिक बहस में हांगकांग और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के साथ चीन के व्यवहार का बचाव किया है। आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र की समिति की बैठक के दौरान अधिकारियों ने उन शिकायतों को भी खारिज कर दिया कि चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने जानकारी छिपाकर कोविड-19 पर वैश्विक कार्रवाई में बाधा डाली।</p>
<p>चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की सरकार पर आरोप लगाए जाते रहे हैं कि उसने हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन को कुचलने की कोशिश की, बड़े पैमाने पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127443/china-defends-hong-kong-xinjiang-issue-in-un-debate-on-human"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-02/152.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>चीनी राजदूतों ने संयुक्त राष्ट्र की बैठक में मानवाधिकार के पैरोकारों के साथ एक असामान्य सार्वजनिक बहस में हांगकांग और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के साथ चीन के व्यवहार का बचाव किया है। आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र की समिति की बैठक के दौरान अधिकारियों ने उन शिकायतों को भी खारिज कर दिया कि चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने जानकारी छिपाकर कोविड-19 पर वैश्विक कार्रवाई में बाधा डाली।</p>
<p>चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की सरकार पर आरोप लगाए जाते रहे हैं कि उसने हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन को कुचलने की कोशिश की, बड़े पैमाने पर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को हिरासत में लिया और मजदूरों, महिलाओं के अधिकारों तथा अन्य कार्यकर्ताओं को चुप करा दिया। चीन की सरकार ने पूर्व में आरोपों को खारिज कर दिया था, लेकिन जिनेवा में बृहस्पतिवार को समाप्त हुई दो दिनों की सुनवाई ने कार्यकर्ताओं को चीनी अधिकारियों की उपस्थिति में आलोचना करने का एक असामान्य अवसर दिया। हांगकांग में 2019 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की शुरुआत के बाद दमन की कार्रवाई शुरू की गई।</p>
<p>हांगकांग के सुरक्षा ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि 2020 के सुरक्षा कानून से वैधानिक अधिकारों पर प्रभाव नहीं पड़ा है। हालांकि, ब्यूरो में प्रमुख सहायक सचिव साइमन वोंग ने कहा कि अधिकार और स्वतंत्रता बिना शर्त नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यदि अवैध कार्य किए जाते हैं, तो उन्हें कानून द्वारा प्रतिबंधित किया जा सकता है।'' कोविड-19 पर, एक स्वास्थ्य अधिकारी हे किंगहुआ ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अन्य सरकारों के साथ चीन का सहयोग ‘‘खुला और पारदर्शी था, और सहयोग भी प्रभावी है।''</p>
<p>चीन के सत्तारूढ़ दल के संयुक्त मोर्चा कार्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि चीन के शिनजियांग क्षेत्र में ‘‘कट्टरता से मुक्त कराने का कदम'' किसी भी क्षेत्र, जातीय समूह या किसी धार्मिक आस्था को लक्षित नहीं करता है। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से लाखों उईगुर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यक रहते हैं। संयुक्त राष्ट्र की समिति छह मार्च को चीन के लिए अपने निष्कर्षों और सिफारिशों के साथ एक रिपोर्ट जारी करने वाली है।  </p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Feb 2023 14:43:50 +0530</pubDate>
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