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                <title>UPSC exam - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>UPSC exam RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>'यूपीएससी में कभी नहीं हुआ पेपर लीक, एनटीए को सीखने की जरूरत' : सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">नीट-यूजी  2026 परीक्षा रद्द किए जाने और पेपर लीक विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि जब तक स्पष्ट और व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं की जाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आती रहेंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ एनटीए को भंग करने और उसकी संरचना में व्यापक बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि एनटीए को उन संस्थाओं से सीखने की जरूरत है जो बड़े</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180331/there-was-never-any-paper-leak-in-upsc-nta-needs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/supream-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">नीट-यूजी  2026 परीक्षा रद्द किए जाने और पेपर लीक विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि जब तक स्पष्ट और व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं की जाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आती रहेंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ एनटीए को भंग करने और उसकी संरचना में व्यापक बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि एनटीए को उन संस्थाओं से सीखने की जरूरत है जो बड़े पैमाने पर परीक्षाएं बिना किसी पेपर लीक के सफलतापूर्वक आयोजित करती हैं।जस्टिस नरसिम्हा ने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">यूपीएससी की परीक्षाओं में कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी। एनटीए को उससे सीखने की जरूरत है।”</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आगे कहा कि वास्तविक समाधान तभी संभव है जब यह स्पष्ट हो कि किसी विफलता की जिम्मेदारी किस व्यक्ति पर है। केवल संस्थागत जिम्मेदारी तय करना पर्याप्त नहीं होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर बताए कि एनटीए में “संस्थागत निरंतरता” विकसित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि भविष्य में एजेंसी के पास परीक्षाएं निष्पक्ष और सुरक्षित ढंग से आयोजित करने की क्षमता और विशेषज्ञता उपलब्ध रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान 2024 में गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष और पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन भी अदालत में उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि समिति ने 35 दीर्घकालिक और लगभग 60 अल्पकालिक सिफारिशें दी थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से अधिकांश को लागू किया जा चुका है। हालांकि अदालत ने पूछा कि यदि सुधार लागू किए गए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो फिर इस वर्ष पेपर लीक जैसी स्थिति कैसे उत्पन्न हुई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष के विवाद के बाद परीक्षा प्रक्रिया की पूरी श्रृंखला की समीक्षा की गई और नई कमजोरियों की पहचान कर सुधारात्मक उपाय तैयार किए गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने लाखों छात्रों पर पड़े प्रभाव का भी उल्लेख किया। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि परीक्षा की तैयारी में वर्षों का समय और भावनाएं लगाने वाले छात्रों के लिए ऐसी घटनाएं बेहद पीड़ादायक और आघातकारी होती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि एनटीए को विश्वविद्यालयों और विशेषज्ञ संस्थानों के साथ स्थायी सहयोग विकसित करना चाहिए ताकि परीक्षा प्रणाली को लगातार बेहतर बनाया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गौरतलब है कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इसके बाद कई डॉक्टर संगठनों और छात्र समूहों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए एनटीए को भंग करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी जगह एक वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण गठित करने और भविष्य की परीक्षाओं की न्यायिक निगरानी की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे पर विचार किया जाएगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:19:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UPSC Result: हरियाणा के छोरे ने रचा इतिहास, UPSC में हासिल की तीसरी रैंक </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="relative basis-auto flex-col -mb-(--composer-overlap-px) [--composer-overlap-px:28px] grow flex">
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<p>UPSC Result: यूपीएससी परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी हो गया है। इस बार हरियाणा के पंचकूला के रहने वाले एकांश ढुल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक 3 हासिल की है। एकांश ढुल पंचकूला के सेक्टर 12A में अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनकी मां निर्मला एक स्कूल में प्रिंसिपल हैं, जबकि पिता <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Krishan Dhull</span></span> भाजपा से जुड़े नेता हैं। एकांश की इस बड़ी सफलता से पूरे हरियाणा में खुशी का माहौल है।</p>
<p>एकांश ढुल ने इससे पहले भी दो बार सिविल सेवा परीक्षा पास की थी। साल 2024 में उन्हें 342वीं रैंक मिली थी, जबकि</p></div></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172594/upsc-result-haryanas-boy-created-history-got-third-rank-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/upsc-result.jpg" alt=""></a><br /><div class="relative basis-auto flex-col -mb-(--composer-overlap-px) [--composer-overlap-px:28px] grow flex">
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<div class="markdown prose dark:prose-invert w-full wrap-break-word light markdown-new-styling">
<p>UPSC Result: यूपीएससी परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी हो गया है। इस बार हरियाणा के पंचकूला के रहने वाले एकांश ढुल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक 3 हासिल की है। एकांश ढुल पंचकूला के सेक्टर 12A में अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनकी मां निर्मला एक स्कूल में प्रिंसिपल हैं, जबकि पिता <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Krishan Dhull</span></span> भाजपा से जुड़े नेता हैं। एकांश की इस बड़ी सफलता से पूरे हरियाणा में खुशी का माहौल है।</p>
<p>एकांश ढुल ने इससे पहले भी दो बार सिविल सेवा परीक्षा पास की थी। साल 2024 में उन्हें 342वीं रैंक मिली थी, जबकि 2025 में उनकी रैंक 295 रही। हालांकि वे इससे संतुष्ट नहीं हुए और बेहतर प्रदर्शन के लक्ष्य के साथ तैयारी जारी रखी। तीसरे प्रयास में उन्होंने जबरदस्त सफलता हासिल करते हुए देशभर में तीसरी रैंक प्राप्त कर ली। फिलहाल वह शिमला में ट्रेनिंग के लिए गए हुए हैं।</p>
<p>रिजल्ट आने के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एकांश के पिता कृष्ण ढुल को फोन कर बेटे की इस उपलब्धि पर बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि एकांश ढुल ने अपनी मेहनत और लगन से पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है और यह हरियाणा के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।</p>
<p>एकांश ढुल की शुरुआती पढ़ाई चंडीगढ़ से हुई। उन्होंने 10वीं कक्षा भवन विद्यालय चंडीगढ़ (सेक्टर-27) से पास की। इसके बाद 12वीं की पढ़ाई संत कबीर पब्लिक स्कूल चंडीगढ़ (सेक्टर-26) से पूरी की। स्कूलिंग के बाद वह दिल्ली चले गए और वहां <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Shri Ram College of Commerce</span></span> से बीए ऑनर्स की डिग्री हासिल की।</p>
<p>ग्रेजुएशन के बाद एकांश ने दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी की और कोचिंग भी वहीं से ली। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि आत्म-अध्ययन, अनुशासन और लगातार मेहनत ही सफलता की असली कुंजी हैं। उनका कहना था कि पहली बार परीक्षा पास करने के बाद उन्हें लगा कि वे और बेहतर कर सकते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने खुद से वादा किया और अगली कोशिशों में लगातार सुधार करते हुए आखिरकार टॉप-3 में जगह बना ली।</p>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 16:39:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: अंकिता चौधरी ने मां के सपने को सच कर रचा इतिहास, दूसरे प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिल कोई भी क्यों न हो, उसे पाया जा सकता है। इस कहावत को सच कर दिखाया है हरियाणा की आईएएस अफसर अंकिता चौधरी ने। कभी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जिसने उन्हें तोड़कर रख दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गिरकर भी उठीं और ऐसा मुकाम पाया कि अब हर युवा के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।</p>
<p><strong>दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई</strong></p>
<p>अंकिता चौधरी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही वे पढ़ाई में बेहद होशियार थीं और उनका सपना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165769/ias-success-story-ankita-chaudhary-created-history-by-making-her"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-ankita-chaudhary.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिल कोई भी क्यों न हो, उसे पाया जा सकता है। इस कहावत को सच कर दिखाया है हरियाणा की आईएएस अफसर अंकिता चौधरी ने। कभी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जिसने उन्हें तोड़कर रख दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गिरकर भी उठीं और ऐसा मुकाम पाया कि अब हर युवा के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।</p>
<p><strong>दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई</strong></p>
<p>अंकिता चौधरी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही वे पढ़ाई में बेहद होशियार थीं और उनका सपना था कि वे आईएएस अफसर बनकर देश की सेवा करें। ग्रेजुएशन पूरी करते ही उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।</p>
<p><img src="https://static.clmbtech.com/c1e/client/128336/uploaded/3a16f671cbfadb65fc8e22a5f123666c.jpg" alt="ias ankita choudhary" width="900" height="473"></img></p>
<p><strong>2017 में टूटा दुखों का पहाड़</strong></p>
<p>साल 2017 अंकिता की जिंदगी का सबसे कठिन साल साबित हुआ। जब वे दिन-रात यूपीएससी की तैयारी में जुटी थीं, तभी उनकी मां का निधन हो गया। मां ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थीं। यह सदमा इतना गहरा था कि अंकिता अंदर से टूट गईं। उसी साल वे परीक्षा में असफल रहीं, लेकिन उनके पिता ने हिम्मत नहीं टूटने दी।</p>
<p><strong>पिता ने बढ़ाया हौसला</strong></p>
<p>अंकिता के पिता ने उन्हें संभाला और याद दिलाया कि उनकी मां का सपना था कि अंकिता एक आईएएस अफसर बने। पिता के इन शब्दों ने अंकिता को फिर से ऊर्जा दी। उन्होंने खुद से वादा किया कि अब मां का सपना किसी भी हाल में पूरा करना है।</p>
<p><img src="https://static.clmbtech.com/c1e/client/128336/uploaded/be8059f04c5f377f356993314f33d2b7.jpg" alt="ias ankita choudhary" width="900" height="506"></img></p>
<p><strong>2018 में हासिल की ऑल इंडिया 18वीं रैंक</strong></p>
<p>अगले ही साल, यानी 2018 में, अंकिता ने दोबारा यूपीएससी परीक्षा दी और इस बार उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 18 हासिल कर इतिहास रच दिया। उनकी सफलता ने न सिर्फ परिवार को गर्व से भर दिया, बल्कि यह साबित कर दिया कि कठिनाइयाँ सफलता की राह में केवल परीक्षा लेती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 11:16:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: चार असफलताओं के बाद सौम्या मिश्रा बनीं IAS, 18वीं रैंक हासिल कर रचा इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। IAS, IPS और IFS जैसे प्रतिष्ठित पदों तक पहुंचने के लिए उम्मीदवारों को लंबा संघर्ष, कड़ा अनुशासन और मजबूत मानसिकता की जरूरत होती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है सौम्या मिश्रा की, जिन्होंने कई असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और आखिरकार UPSC में 18वीं रैंक हासिल कर अपने IAS बनने के सपने को साकार किया।</p>
<h3><strong>आसान नहीं रहा सफलता का सफर</strong></h3>
<p>सौम्या मिश्रा के लिए यह उपलब्धि आसान नहीं थी। उन्होंने कुल चार बार UPSC सिविल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165309/ias-success-story-after-four-failures-soumya-mishra-became-ias"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(18).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। IAS, IPS और IFS जैसे प्रतिष्ठित पदों तक पहुंचने के लिए उम्मीदवारों को लंबा संघर्ष, कड़ा अनुशासन और मजबूत मानसिकता की जरूरत होती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है सौम्या मिश्रा की, जिन्होंने कई असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और आखिरकार UPSC में 18वीं रैंक हासिल कर अपने IAS बनने के सपने को साकार किया।</p>
<h3><strong>आसान नहीं रहा सफलता का सफर</strong></h3>
<p>सौम्या मिश्रा के लिए यह उपलब्धि आसान नहीं थी। उन्होंने कुल चार बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा दी। पहले प्रयास में असफल रहीं, दूसरे प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचीं लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। तीसरे प्रयास में वह प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर पाईं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और चौथे प्रयास में सफलता हासिल कर ली।</p>
<h3><strong>SDM रहते हुए की IAS की तैयारी</strong></h3>
<p>UPSC में सफलता से पहले सौम्या मिश्रा ने साल 2001 में PCS परीक्षा दी थी, जिसमें उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया था। इसके बाद वह SDM (सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट) बनीं। प्रशासनिक सेवा में रहते हुए भी उन्होंने अपने बड़े लक्ष्य को नहीं छोड़ा और लगातार मेहनत करते हुए IAS बनने की तैयारी जारी रखी।</p>
<h3><strong>लक्ष्य के प्रति अडिग रहीं सौम्या</strong></h3>
<p>SDM का पद मिलने के बावजूद सौम्या मिश्रा का सपना IAS बनने का था। नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ UPSC की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अनुशासन और निरंतर मेहनत के दम पर खुद को साबित किया। दिन-रात की मेहनत का नतीजा आखिरकार उनके पक्ष में आया।</p>
<h3><strong>परिवार का सपना भी किया पूरा</strong></h3>
<p>उत्तर प्रदेश के उन्नाव की रहने वाली सौम्या मिश्रा ने अपनी पढ़ाई दिल्ली से की। उनके पिता राघवेंद्र मिश्रा, दिल्ली सरकार में हिंदी प्रोफेसर हैं। परिवार की भी यही इच्छा थी कि सौम्या IAS बनें। उनकी सफलता ने न सिर्फ उनका सपना पूरा किया, बल्कि पूरे परिवार को गर्व का अवसर भी दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 12:43:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: संघर्ष और मेहनत की मिसाल है IAS ममता यादव, दो बार पास की UPSC परीक्षा </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: हर किसी की जिंदगी में सपने होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो विपरीत हालातों से लड़कर अपने सपनों को साकार कर दिखाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है हरियाणा के छोटे से गांव बसई की रहने वाली ममता यादव की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयासों के बल पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (</span><span class="cf1">IAS) </span><span class="cf0">में जगह बनाई। उनकी सफलता आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो साधारण परिवार से आते हैं लेकिन बड़े सपने देखते हैं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">सीमित संसाधन, लेकिन सपने बड़े</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव का सफर आसान नहीं रहा। गांव</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164939/ias-success-story-ias-mamta-yadav-is-an-example-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-mamta-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: हर किसी की जिंदगी में सपने होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो विपरीत हालातों से लड़कर अपने सपनों को साकार कर दिखाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है हरियाणा के छोटे से गांव बसई की रहने वाली ममता यादव की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयासों के बल पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (</span><span class="cf1">IAS) </span><span class="cf0">में जगह बनाई। उनकी सफलता आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो साधारण परिवार से आते हैं लेकिन बड़े सपने देखते हैं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">सीमित संसाधन, लेकिन सपने बड़े</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव का सफर आसान नहीं रहा। गांव का माहौल, सीमित संसाधन और देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी</span><span class="cf2">—</span><span class="cf0">इन सभी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहीं ममता के मन में कुछ बड़ा करने की चाह थी। उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें आईएएस अधिकारी बनना है और इसी लक्ष्य को लेकर उन्होंने लगातार चार साल तक यूपीएससी की तैयारी की।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">दिल्ली से हुई पढ़ाई, यहीं पक्का हुआ </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने का सपना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता की शुरुआती शिक्षा दिल्ली के बलवंत राय मेहता स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दिनों में ही उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना पूरी तरह स्पष्ट हो गया था, जिसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।</span></p>
<p><span class="cf0">साल 2019 में ममता ने पहली बार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की। उस समय उनकी ऑल इंडिया रैंक 556 आई थी। यह एक बड़ी उपलब्धि जरूर थी, लेकिन इस रैंक पर उन्हें आईएएस सेवा नहीं मिल पाई। जहां कई उम्मीदवार इस मोड़ पर रुक जाते हैं, वहीं ममता ने इसे असफलता नहीं, बल्कि सीख माना और खुद को और बेहतर बनाने का फैसला किया।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">दूसरी कोशिश में मिली शानदार कामयाबी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">अगले साल ममता ने दोबारा यूपीएससी परीक्षा दी। इस बार उनका आत्मविश्वास कहीं ज्यादा मजबूत था और तैयारी पहले से कहीं अधिक सटीक। उन्होंने पूरे समर्पण के साथ पढ़ाई की और हर दिन खुद को बेहतर बनाने पर काम किया। नतीजा यह रहा कि उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 5 हासिल की। यह न सिर्फ उनकी निजी जीत थी, बल्कि पूरे गांव और परिवार के लिए गर्व का क्षण बन गया। ममता अपने गांव की पहली </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी बनीं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">कड़ी मेहनत और सही रणनीति को देती हैं सफलता का श्रेय</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव वर्तमान में </span><span class="cf1">AGMUT </span><span class="cf0">कैडर की </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी हैं। एक छोटे से गांव से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे कोई बाधा टिक नहीं सकती। ममता अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, सही रणनीति और अनुशासन को देती हैं।</span></p>
<p><span class="cf0">उन्होंने बताया कि यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्होंने कोचिंग के साथ-साथ सेल्फ स्टडी पर भी बराबर ध्यान दिया। वह रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं, जबकि परीक्षा के नजदीक यह समय 10 से 12 घंटे तक पहुंच जाता था। ममता ने </span><span class="cf1">NCERT </span><span class="cf0">की किताबों को अपनी तैयारी की नींव बनाया और इसके साथ जरूरी स्टैंडर्ड बुक्स व नोट्स का सहारा लिया।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">युवाओं के लिए प्रेरणा बनी ममता यादव</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव की कहानी यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो साधारण पृष्ठभूमि भी असाधारण सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। उनकी सफलता आज देशभर के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आईएएस बनने का सपना देखते हैं।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 12:02:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: अनाथालय में बीते 13 साल, अब्दुल नासर बने IAS अफसर, पढ़ें सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान खुद पर भरोसा रखे और पूरी मेहनत व लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती। ऐसी ही मिसाल हैं आईएएस बी. अब्दुल नासर, जिन्होंने संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं होता।</p>
<p>केरल के कन्नूर जिले के रहने वाले बी. अब्दुल नासर की जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन रही। महज 5 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार पर जिम्मेदारियों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164005/ias-success-story-abdul-nassar-spent-13-years-in-orphanage"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-abdul-nasar.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान खुद पर भरोसा रखे और पूरी मेहनत व लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती। ऐसी ही मिसाल हैं आईएएस बी. अब्दुल नासर, जिन्होंने संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं होता।</p>
<p>केरल के कन्नूर जिले के रहने वाले बी. अब्दुल नासर की जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन रही। महज 5 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार पर जिम्मेदारियों का बोझ आ गया। हालात ऐसे बने कि अब्दुल को अपने भाई-बहनों के साथ करीब 13 साल तक अनाथालय में रहना पड़ा। उनकी मां घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थीं, लेकिन सीमित आमदनी में परिवार चलाना आसान नहीं था।</p>
<p>बचपन से ही अब्दुल नासर ने संघर्ष को अपना साथी बना लिया। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने होटलों में बर्तन धोने, घरों में अखबार बेचने, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने और यहां तक कि फोन ऑपरेटर के तौर पर भी काम किया। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को कभी बीच में नहीं छोड़ा।</p>
<p>कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने थालास्सेरी के सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन भी हासिल किया। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें केरल स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी मिली, जिससे उनके करियर की औपचारिक शुरुआत हुई।</p>
<p>सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होंने लगातार बेहतर काम किया और 2006 के बाद राज्य सिविल सेवा में डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुंचे। अपने उत्कृष्ट कार्यों के चलते 2015 में उन्हें केरल का बेस्ट डिप्टी कलेक्टर घोषित किया गया। इसी उपलब्धि के आधार पर वे 2017 में बिना UPSC परीक्षा दिए IAS बनने के योग्य बने।</p>
<p>इसके बाद 2019 में उन्हें कोल्लम जिले का डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर नियुक्त किया गया। आज बी. अब्दुल नासर न सिर्फ एक सफल आईएएस अधिकारी हैं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा भी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को सच करने का हौसला रखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/164005/ias-success-story-abdul-nassar-spent-13-years-in-orphanage</link>
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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 11:56:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: अनाथालय में बीते 13 साल, अब्दुल नासर बने IAS अफसर, पढ़ें सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान खुद पर भरोसा रखे और पूरी मेहनत व लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती। ऐसी ही मिसाल हैं आईएएस बी. अब्दुल नासर, जिन्होंने संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं होता।</p>
<p>IAS Success Story: केरल के कन्नूर जिले के रहने वाले बी. अब्दुल नासर की जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन रही। महज 5 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार पर जिम्मेदारियों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163577/ias-success-story-abdul-nassar-spent-13-years-in-orphanage"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-abdul-nasar.jpg" alt=""></a><br /><p>कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान खुद पर भरोसा रखे और पूरी मेहनत व लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती। ऐसी ही मिसाल हैं आईएएस बी. अब्दुल नासर, जिन्होंने संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं होता।</p>
<p>IAS Success Story: केरल के कन्नूर जिले के रहने वाले बी. अब्दुल नासर की जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन रही। महज 5 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार पर जिम्मेदारियों का बोझ आ गया। हालात ऐसे बने कि अब्दुल को अपने भाई-बहनों के साथ करीब 13 साल तक अनाथालय में रहना पड़ा। उनकी मां घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थीं, लेकिन सीमित आमदनी में परिवार चलाना आसान नहीं था।</p>
<p>बचपन से ही अब्दुल नासर ने संघर्ष को अपना साथी बना लिया। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने होटलों में बर्तन धोने, घरों में अखबार बेचने, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने और यहां तक कि फोन ऑपरेटर के तौर पर भी काम किया। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को कभी बीच में नहीं छोड़ा।</p>
<p>कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने थालास्सेरी के सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन भी हासिल किया। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें केरल स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी मिली, जिससे उनके करियर की औपचारिक शुरुआत हुई।</p>
<p>सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होंने लगातार बेहतर काम किया और 2006 के बाद राज्य सिविल सेवा में डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुंचे। अपने उत्कृष्ट कार्यों के चलते 2015 में उन्हें केरल का बेस्ट डिप्टी कलेक्टर घोषित किया गया। इसी उपलब्धि के आधार पर वे 2017 में बिना UPSC परीक्षा दिए IAS बनने के योग्य बने।</p>
<p>इसके बाद 2019 में उन्हें कोल्लम जिले का डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर नियुक्त किया गया। आज बी. अब्दुल नासर न सिर्फ एक सफल आईएएस अधिकारी हैं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा भी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को सच करने का हौसला रखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 11:48:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: डॉक्टरी छोड़ 2 बार पास की UPSC परीक्षा, कड़ी मेहनत से पहले IPS और फिर बनीं IAS</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>IAS Success Story:</strong> यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। इसी तरह, पूर्व IPS अधिकारी मुद्रा गैरोला जो बाद में आईएएस अफसर बनीं। अपने पिता का सपना पूरा करते हुए सिविल सेवा में अपना करियर बनाने के लिए मेडिकल करियर छोड़ दिया।</p>
<p>IAS मुद्रा गैरोला, मूल रूप से उत्तराखंड के चमोली के कर्णप्रयाग की रहने वाली हैं। हालांकि, अब वह अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती हैं। कम उम्र से ही पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए, उन्होंने लगातार अपनी कक्षा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163322/ias-success-story-left-medicine-and-passed-upsc-exam-twice"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-mudra-gairola-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>IAS Success Story:</strong> यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। इसी तरह, पूर्व IPS अधिकारी मुद्रा गैरोला जो बाद में आईएएस अफसर बनीं। अपने पिता का सपना पूरा करते हुए सिविल सेवा में अपना करियर बनाने के लिए मेडिकल करियर छोड़ दिया।</p>
<p>IAS मुद्रा गैरोला, मूल रूप से उत्तराखंड के चमोली के कर्णप्रयाग की रहने वाली हैं। हालांकि, अब वह अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती हैं। कम उम्र से ही पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए, उन्होंने लगातार अपनी कक्षा में टॉप रैंक हासिल की। उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करते हुए, मुद्रा ने अपनी कक्षा 10वीं की परीक्षा में 96% और कक्षा 12वीं में 97% अंक प्राप्त किए। उन्हें भारत की पहली महिला IPS अधिकारी किरण बेदी से उनकी उपलब्धियों के लिए पुरस्कार भी मिला था।</p>
<p>अपनी स्कूली शिक्षा के बाद, उन्होंने मुंबई के एक मेडिकल कॉलेज में बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की पढ़ाई की, जहां उन्होंने गोल्ड मेडल भी जीता। इसके बाद, अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद, वह मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी (MDS) का कोर्स करने के लिए दिल्ली चली गईं।</p>
<p>उनके पिता अरुण गैरोला, जिन्होंने 1973 में यूपीएससी परीक्षा दी थी, लेकिन सफल नहीं हो पाए थे, वह चाहते थे कि उनकी बेटी भी सिविल सेवा परीक्षा दे और आईएएस अधिकारी का प्रतिष्ठित पद हासिल करे।</p>
<p>अपने पिता की आजीवन आकांक्षा को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए, मुद्रा गैरोला ने अपनी मास्टर की पढ़ाई बीच में ही छोड़ने और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए खुद को समर्पित करने का साहसी निर्णय लिया। साल 2018 में अपने पहले प्रयास में इंटरव्यू राउंड तक पहुंचने के बावजूद, 2019 और 2020 में असफल प्रयासों के बावजूद, मुद्रा ने हार नहीं मानी।</p>
<p>उनके अटूट दृढ़ संकल्प ने 2021 में उन्हें सफलता दिलाई। उन्होंने परीक्षा में सफलतापूर्वक 165वीं रैंक हासिल की, जिससे उनका आईपीएस अधिकारी बनने का सपना पूरा हुआ। लेकिन वह आईपीएस के पद से संतुष्ट नहीं थी, इसलिए साल 2022 में मुद्रा ने यूपीएससी परीक्षा फिर से दी और इस बार 53वीं रैंक हासिल करते हुए आईएएस अधिकारी का प्रतिष्ठित पद प्राप्त किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Dec 2025 15:24:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: डॉक्टरी छोड़ 2 बार पास की UPSC परीक्षा, कड़ी मेहनत से पहले IPS और फिर बनीं IAS</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>IAS Success Story:</strong> यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। इसी तरह, पूर्व IPS अधिकारी मुद्रा गैरोला जो बाद में आईएएस अफसर बनीं। अपने पिता का सपना पूरा करते हुए सिविल सेवा में अपना करियर बनाने के लिए मेडिकल करियर छोड़ दिया।</p>
<p>IAS मुद्रा गैरोला, मूल रूप से उत्तराखंड के चमोली के कर्णप्रयाग की रहने वाली हैं। हालांकि, अब वह अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती हैं। कम उम्र से ही पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए, उन्होंने लगातार अपनी कक्षा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162775/success-story-left-medicine-and-passed-upsc-exam-twice-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-mudra-gairola-(2).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>IAS Success Story:</strong> यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। इसी तरह, पूर्व IPS अधिकारी मुद्रा गैरोला जो बाद में आईएएस अफसर बनीं। अपने पिता का सपना पूरा करते हुए सिविल सेवा में अपना करियर बनाने के लिए मेडिकल करियर छोड़ दिया।</p>
<p>IAS मुद्रा गैरोला, मूल रूप से उत्तराखंड के चमोली के कर्णप्रयाग की रहने वाली हैं। हालांकि, अब वह अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती हैं। कम उम्र से ही पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए, उन्होंने लगातार अपनी कक्षा में टॉप रैंक हासिल की। उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करते हुए, मुद्रा ने अपनी कक्षा 10वीं की परीक्षा में 96% और कक्षा 12वीं में 97% अंक प्राप्त किए। उन्हें भारत की पहली महिला IPS अधिकारी किरण बेदी से उनकी उपलब्धियों के लिए पुरस्कार भी मिला था।</p>
<p>अपनी स्कूली शिक्षा के बाद, उन्होंने मुंबई के एक मेडिकल कॉलेज में बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की पढ़ाई की, जहां उन्होंने गोल्ड मेडल भी जीता। इसके बाद, अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद, वह मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी (MDS) का कोर्स करने के लिए दिल्ली चली गईं।</p>
<p>उनके पिता अरुण गैरोला, जिन्होंने 1973 में यूपीएससी परीक्षा दी थी, लेकिन सफल नहीं हो पाए थे, वह चाहते थे कि उनकी बेटी भी सिविल सेवा परीक्षा दे और आईएएस अधिकारी का प्रतिष्ठित पद हासिल करे।</p>
<p>अपने पिता की आजीवन आकांक्षा को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए, मुद्रा गैरोला ने अपनी मास्टर की पढ़ाई बीच में ही छोड़ने और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए खुद को समर्पित करने का साहसी निर्णय लिया। साल 2018 में अपने पहले प्रयास में इंटरव्यू राउंड तक पहुंचने के बावजूद, 2019 और 2020 में असफल प्रयासों के बावजूद, मुद्रा ने हार नहीं मानी।</p>
<p>उनके अटूट दृढ़ संकल्प ने 2021 में उन्हें सफलता दिलाई। उन्होंने परीक्षा में सफलतापूर्वक 165वीं रैंक हासिल की, जिससे उनका आईपीएस अधिकारी बनने का सपना पूरा हुआ। लेकिन वह आईपीएस के पद से संतुष्ट नहीं थी, इसलिए साल 2022 में मुद्रा ने यूपीएससी परीक्षा फिर से दी और इस बार 53वीं रैंक हासिल करते हुए आईएएस अधिकारी का प्रतिष्ठित पद प्राप्त किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Dec 2025 10:49:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: अंकिता चौधरी ने मां के सपने को सच कर रचा इतिहास, दूसरे प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिल कोई भी क्यों न हो, उसे पाया जा सकता है। इस कहावत को सच कर दिखाया है हरियाणा की आईएएस अफसर अंकिता चौधरी ने। कभी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जिसने उन्हें तोड़कर रख दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गिरकर भी उठीं और ऐसा मुकाम पाया कि अब हर युवा के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।</p><p><strong>दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई</strong></p><p>अंकिता चौधरी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही वे पढ़ाई में बेहद होशियार थीं और उनका सपना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162487/ias-success-story-ankita-chaudhary-created-history-by-making-her"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-ankita-chaudhary.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिल कोई भी क्यों न हो, उसे पाया जा सकता है। इस कहावत को सच कर दिखाया है हरियाणा की आईएएस अफसर अंकिता चौधरी ने। कभी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जिसने उन्हें तोड़कर रख दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गिरकर भी उठीं और ऐसा मुकाम पाया कि अब हर युवा के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।</p><p><strong>दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई</strong></p><p>अंकिता चौधरी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही वे पढ़ाई में बेहद होशियार थीं और उनका सपना था कि वे आईएएस अफसर बनकर देश की सेवा करें। ग्रेजुएशन पूरी करते ही उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।</p><p><img src="https://static.clmbtech.com/c1e/client/128336/uploaded/3a16f671cbfadb65fc8e22a5f123666c.jpg" alt="ias ankita choudhary" width="900" height="473"></img></p><p><strong>2017 में टूटा दुखों का पहाड़</strong></p><p>साल 2017 अंकिता की जिंदगी का सबसे कठिन साल साबित हुआ। जब वे दिन-रात यूपीएससी की तैयारी में जुटी थीं, तभी उनकी मां का निधन हो गया। मां ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थीं। यह सदमा इतना गहरा था कि अंकिता अंदर से टूट गईं। उसी साल वे परीक्षा में असफल रहीं, लेकिन उनके पिता ने हिम्मत नहीं टूटने दी।</p><p><strong>पिता ने बढ़ाया हौसला</strong></p><p>अंकिता के पिता ने उन्हें संभाला और याद दिलाया कि उनकी मां का सपना था कि अंकिता एक आईएएस अफसर बने। पिता के इन शब्दों ने अंकिता को फिर से ऊर्जा दी। उन्होंने खुद से वादा किया कि अब मां का सपना किसी भी हाल में पूरा करना है।</p><p><img src="https://static.clmbtech.com/c1e/client/128336/uploaded/be8059f04c5f377f356993314f33d2b7.jpg" alt="ias ankita choudhary" width="900" height="506"></img></p><p><strong>2018 में हासिल की ऑल इंडिया 18वीं रैंक</strong></p><p>अगले ही साल, यानी 2018 में, अंकिता ने दोबारा यूपीएससी परीक्षा दी और इस बार उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 18 हासिल कर इतिहास रच दिया। उनकी सफलता ने न सिर्फ परिवार को गर्व से भर दिया, बल्कि यह साबित कर दिया कि कठिनाइयाँ सफलता की राह में केवल परीक्षा लेती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 11:47:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: अंकिता चौधरी ने मां के सपने को सच कर रचा इतिहास, दूसरे प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिल कोई भी क्यों न हो, उसे पाया जा सकता है। इस कहावत को सच कर दिखाया है हरियाणा की आईएएस अफसर अंकिता चौधरी ने। कभी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जिसने उन्हें तोड़कर रख दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गिरकर भी उठीं और ऐसा मुकाम पाया कि अब हर युवा के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।</p>
<p><strong>दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई</strong></p>
<p>अंकिता चौधरी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही वे पढ़ाई में बेहद होशियार थीं और उनका सपना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161603/ias-success-story-ankita-chaudhary-created-history-by-making-her"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-ankita-chaudhary.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिल कोई भी क्यों न हो, उसे पाया जा सकता है। इस कहावत को सच कर दिखाया है हरियाणा की आईएएस अफसर अंकिता चौधरी ने। कभी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जिसने उन्हें तोड़कर रख दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गिरकर भी उठीं और ऐसा मुकाम पाया कि अब हर युवा के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।</p>
<p><strong>दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई</strong></p>
<p>अंकिता चौधरी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही वे पढ़ाई में बेहद होशियार थीं और उनका सपना था कि वे आईएएस अफसर बनकर देश की सेवा करें। ग्रेजुएशन पूरी करते ही उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।</p>
<p><img src="https://static.clmbtech.com/c1e/client/128336/uploaded/3a16f671cbfadb65fc8e22a5f123666c.jpg" alt="ias ankita choudhary" width="900" height="473"></img></p>
<p><strong>2017 में टूटा दुखों का पहाड़</strong></p>
<p>साल 2017 अंकिता की जिंदगी का सबसे कठिन साल साबित हुआ। जब वे दिन-रात यूपीएससी की तैयारी में जुटी थीं, तभी उनकी मां का निधन हो गया। मां ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थीं। यह सदमा इतना गहरा था कि अंकिता अंदर से टूट गईं। उसी साल वे परीक्षा में असफल रहीं, लेकिन उनके पिता ने हिम्मत नहीं टूटने दी।</p>
<p><strong>पिता ने बढ़ाया हौसला</strong></p>
<p>अंकिता के पिता ने उन्हें संभाला और याद दिलाया कि उनकी मां का सपना था कि अंकिता एक आईएएस अफसर बने। पिता के इन शब्दों ने अंकिता को फिर से ऊर्जा दी। उन्होंने खुद से वादा किया कि अब मां का सपना किसी भी हाल में पूरा करना है।</p>
<p><img src="https://static.clmbtech.com/c1e/client/128336/uploaded/be8059f04c5f377f356993314f33d2b7.jpg" alt="ias ankita choudhary" width="900" height="506"></img></p>
<p><strong>2018 में हासिल की ऑल इंडिया 18वीं रैंक</strong></p>
<p>अगले ही साल, यानी 2018 में, अंकिता ने दोबारा यूपीएससी परीक्षा दी और इस बार उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 18 हासिल कर इतिहास रच दिया। उनकी सफलता ने न सिर्फ परिवार को गर्व से भर दिया, बल्कि यह साबित कर दिया कि कठिनाइयाँ सफलता की राह में केवल परीक्षा लेती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/161603/ias-success-story-ankita-chaudhary-created-history-by-making-her</link>
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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 22:36:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: मां की मौत के सदमे को बनाया ताकत, हरियाणा की बेटी बनीं देश की टॉप IAS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: कहा जाता है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी मुश्किल मंजिल को पाने से नहीं रोक सकती। इस बात को सच कर दिखाया है IAS अंकिता चौधरी ने। जिनकी जिंदगी में एक समय ऐसा मोड़ आया जब उनका सब कुछ टूटने के कगार पर था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने हौसलों को अपना हथियार बनाया और देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC पास कर IAS अधिकारी बनीं।</p>
<p>अंकिता चौधरी हरियाणा की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई में शुरू से ही होशियार रहीं अंकिता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160496/ias-success-story-haryanas-daughter-turns-the-shock-of-mothers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/56c6cd944c07f969cdebe06466214d14.webp" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कहा जाता है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी मुश्किल मंजिल को पाने से नहीं रोक सकती। इस बात को सच कर दिखाया है IAS अंकिता चौधरी ने। जिनकी जिंदगी में एक समय ऐसा मोड़ आया जब उनका सब कुछ टूटने के कगार पर था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने हौसलों को अपना हथियार बनाया और देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC पास कर IAS अधिकारी बनीं।</p>
<p>अंकिता चौधरी हरियाणा की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई में शुरू से ही होशियार रहीं अंकिता का सपना था कि वे एक दिन IAS अफसर बनें और देश की सेवा करें। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने तुरंत UPSC की तैयारी शुरू कर दी। IAS Success Story</p>
<p>साल 2017 में अंकिता अपना पहला अटेंप्ट देने वाली थीं, लेकिन उसी साल उनकी जिंदगी में एक बहुत बड़ा दुख आ गया। उनकी मां का निधन हो गया, जो उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत थीं। इस गहरे सदमे के चलते न केवल अंकिता का पहला UPSC अटेंप्ट असफल रहा, बल्कि वे मानसिक रूप से भी काफी कमजोर हो गईं। लेकिन उनके पिता ने उस कठिन समय में उनका पूरा साथ दिया और उन्हें बार-बार यह याद दिलाया कि उनकी मां का सपना था कि वे IAS बनें। IAS Success Story</p>
<p>अपने पिता की बातों और मां के सपने को पूरा करने के संकल्प ने अंकिता को फिर से खड़ा कर दिया। उन्होंने एक साल तक खुद को पूरी तरह से तैयारी में झोंक दिया और साल 2018 में UPSC की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 18 हासिल की। यह सिर्फ एक परीक्षा पास करना नहीं था, यह एक टूटे हुए सपने को दोबारा संजोने और उसे हकीकत में बदलने का प्रतीक था। IAS Success Story</p>
<p>आज अंकिता चौधरी IAS अधिकारी हैं और गुरुग्राम नगर निगम में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर तैनात हैं। वे ना सिर्फ अपने परिवार के लिए बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो जीवन की कठिनाइयों से हार मान लेते हैं। IAS Success Story</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Nov 2025 13:27:31 +0530</pubDate>
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