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                <title>smart city - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>smart city RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अतिक्रमण और जाम से कराहते शहर: फुटपाथ गायब, सड़कें सिकुड़ीं, वक्त बर्बाद</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुम्बई</span>,</strong>  <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु व कोलकाता की तरह अब उत्तर प्रदेश के लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आगरा और इलाहाबाद जैसे शहर जाम से जूझ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथों पर दुकानदारों व स्ट्रीट वैंडर ने कब्जा कर लिया है आखिर अब पैदल चलने वाले लोग कहां चलें और वाहनों को चलाने वाले कहां वाहन चलायें। नतीजा सड़कों पर जाम आधा घंटे का रास्ता दो घंटे में पूरा हो रहा है और हमारे शहरों के नगर निगम व यातायात विभाग कुछ भी कर पाने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। देश के नगर निगमों ने इंदौर नगर निगम से कुछ भी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181534/cities-groaning-due-to-encroachment-and-traffic-jams-footpaths-disappearing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas4.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुम्बई</span>,</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु व कोलकाता की तरह अब उत्तर प्रदेश के लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आगरा और इलाहाबाद जैसे शहर जाम से जूझ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथों पर दुकानदारों व स्ट्रीट वैंडर ने कब्जा कर लिया है आखिर अब पैदल चलने वाले लोग कहां चलें और वाहनों को चलाने वाले कहां वाहन चलायें। नतीजा सड़कों पर जाम आधा घंटे का रास्ता दो घंटे में पूरा हो रहा है और हमारे शहरों के नगर निगम व यातायात विभाग कुछ भी कर पाने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। देश के नगर निगमों ने इंदौर नगर निगम से कुछ भी नहीं सीख पाया। सुबह </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे  लखनऊ का आलमबाग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर का टाटमील चौराहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आगरा की एमजी रोड और इलाहाबाद का चौक व सिविल लाइंस हर जगह एक ही तस्वीर - सड़कें गाड़ियों से पैक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथ पर ठेले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुकानों का सामान बाहर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और लोग सड़क पर चलने को मजबूर। भारत के शहर तेजी से बढ़ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सड़कें उतनी ही रहीं। नतीजा: अतिक्रमण और ट्रैफिक जाम ने शहरों की सांस रोक दी है। अतिक्रमण: फुटपाथ पर कब्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़क पर हक। व्यावसायिक अतिक्रमण- दुकानदार शटर से </span>5-10<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट बाहर सामान रख देते हैं। कपड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैकेनिक का सामान सब सड़क पर। आवासीय अतिक्रमण- कॉलोनियों में लोग घर के आगे पार्किंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाउंड्री वॉल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीढ़ियां निकाल लेते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अस्थायी कब्जा-  ठेले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेहड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेंट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक आयोजन। एक बार लग गया तो हटाना मुश्किल। जगह की कमी- जमीन महंगी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो लोग सार्वजनिक जगह को निजी समझ लेते हैं। राजनीतिक संरक्षण- चुनाव के समय हटाने की हिम्मत कोई नहीं करता। वोट बैंक बन जाते हैं। प्रशासन की निष्क्रियता तोड़फोड़ होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में वही स्थिति। जुर्माना वसूलने का सिस्टम कमजोर है। जाम: सिर्फ देरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक नुकसान- कितना बुरा है हाल</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति आयोग के मुताबिक बेंगलुरु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में लोग औसतन सालाना </span>100-120<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे जाम में फंसते हैं। यानी </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन सिर्फ गाड़ी में बैठे-बैठे। आर्थिक: ईंधन बर्बादी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिलीवरी में देरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोडक्टिविटी गिरना। दिल्ली में हर साल </span>60,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रु का नुकसान सिर्फ ट्रैफिक जाम से होता है। स्वास्थ्य-  गाड़ी में बैठे-बैठे </span>PM 2.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> और </span>CO <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस में जाता है। एम्स की स्टडी कहती है कि ट्रैफिक पुलिस और ऑटो ड्राइवरों में फेफड़े की बीमारी </span>40%<span lang="hi" xml:lang="hi"> ज्यादा है। मानसिक तनाव- रोज </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटा जाम में फंसने वाले लोगों में एंग्जाइटी और रोड रेज के केस </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> गुना ज्यादा हैं। अतिक्रमण और जाम एक-दूसरे को फीड करते हैं। सड़क </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट पर दुकानों का सामान</span>, 10<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट पर पार्किंग। बच गई </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट। </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट पर </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लेन की जगह </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लेन बनती है। एक गाड़ी खराब हुई नहीं कि पूरी सड़क ब्लॉक। लोग फुटपाथ पर नहीं चल सकते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सड़क पर चलते हैं। इससे ट्रैफिक स्लो होता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>10%<span lang="hi" xml:lang="hi"> सड़क पर कब्जा होने से ट्रैफिक की स्पीड </span>40%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक गिर जाती है। कुछ शहरों ने क्या किया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदौर का सिस्टम - बात जब स्मार्ट सिटी की होती है तो सबसे पहले इंदौर का नाम आता है क्योंकि इंदौर नगर निगम ने कई ऐसे प्रावधान किए हैं जिनसे अन्य नगर निगमों को सीख लेनी चाहिए। इंदौर नगर निगम ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत </span>80%<span lang="hi" xml:lang="hi"> फुटपाथ खाली कराए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रीट वेंडर को वेंडिंग जोन में शिफ्ट किया। अब शहर स्वच्छता में नंबर </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> है और ट्रैफिक फ्लो बेहतर है। भुवनेश्वर </span>ITMS <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम लगाया। कैमरे और </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">से जाम का रियल टाइम एनालिस होता है। सिग्नल खुद एडजस्ट होते हैं। अहमदाबाद </span>BRTS <span lang="hi" xml:lang="hi">और फुटपाथ डेमार्केशन ने पैदल यात्रियों को जगह दी। अतिक्रमण पर जुर्माना सख्त किया। वेंडिंग जोन बनाओ-  हर </span>500<span lang="hi" xml:lang="hi"> मीटर पर स्ट्रीट वेंडर के लिए जगह तय करो। दिल्ली में ये कानून </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> में बना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लागू नहीं हुआ। रियल टाइम एक्शन-  शिकायत पर </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे में कार्रवाई। </span>Noida <span lang="hi" xml:lang="hi">का "हटाओ ऐप" इसका उदाहरण है। पार्किंग पॉलिसी-  रेजिडेंशियल एरिया में ऑन-स्ट्रीट पार्किंग को महंगा करो। ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग को सस्ता करो। मास ट्रांजिट- मेट्रो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइकिल लेन बढ़ाओ। जब लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज करेंगे तो गाड़ी कम होगी। मास्टर प्लान में बदलाव-  नई कॉलोनियों में </span>30%<span lang="hi" xml:lang="hi"> जगह सड़क और फुटपाथ के लिए रिजर्व हो। जवाबदेही तय करो-  अतिक्रमण हटाने का टार्गेट म्यूनिसिपल कमिश्नर के दायरे में हो। हर </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने में ऑडिट हो। नागरिक क्या कर सकते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">फोटो खींचो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिपोर्ट करो- </span>MCD, BMC, BBMP <span lang="hi" xml:lang="hi">के पास ऐप हैं। </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> शिकायत पर एक्शन होता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थानीय दुकानदारों से बात करो- </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दुकानदार मिलकर तय करें कि सामान अंदर रखेंगे। एकता काम करती है। पैदल चलो-  </span>1-2 km <span lang="hi" xml:lang="hi">के काम के लिए गाड़ी मत निकालो। साइकिल और मेट्रो यूज करो। शहर सिर्फ सीमेंट और कंक्रीट नहीं होते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो लोगों के चलने-फिरने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस लेने की जगह हैं। जब फुटपाथ गायब हो जाएं और सड़कें पार्किंग बन जाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शहर रहता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ ट्रांजिट पॉइंट रह जाता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिक्रमण हटाना सिर्फ बुलडोजर का काम नहीं है। ये पॉलिसी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पॉलिटिक्स और पब्लिक के तीनों के बदलने से होगा। वरना अगले </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल में हमारे शहर सिर्फ गूगल मैप पर लाल रंग के दिखेंगे - जाम का रंग।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:53:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घनी आबादी के बीच स्मार्ट सिटी की कल्पना केवल परिकल्पना ना हो</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">आज के युग में हमारे देश-देश के मध्यम कद के शहरों का पुनरूत्थान, उन्हें स्मार्ट सिटी की मनोनीत परिकल्पना के अनुरूप विकसित करने का विचार न सिर्फ दूरदर्शिता की निशानी है बल्कि तत्काल आवश्यकता भी बन चुका है। माना गया है कि ऐसे शहर जहाँ निवासियों की सभी सामान्य जरूरतें शुद्ध पानी-बिजली-धूल-प्रदूषण-मुक्त सड़कें-घर-संचार-इंटरनेट-सोशल मीडिया-प्रशासनिक सुविधाएँ-सुरक्षा-शिक्षा-मनोरंजन-यातायात-स्वास्थ्य तेज और सहज रूप में उपलब्ध हों, वहां के नागरिक जीवनशैली में सहजता, शांति और संतुलन महसूस कर सकें।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">ऐसी अवस्था जहाँ हर आम-व्यक्ति को गुणवत्ता-पूर्ण सुविधा कम सेवा मूल्य पर आसानी से मिल सके, वहाँ के जीवन-यापन के तरीके इतने सुलभ व संतुलित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161095/balance-of-justice-between-legislature-and-executive"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download-(1)6.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">आज के युग में हमारे देश-देश के मध्यम कद के शहरों का पुनरूत्थान, उन्हें स्मार्ट सिटी की मनोनीत परिकल्पना के अनुरूप विकसित करने का विचार न सिर्फ दूरदर्शिता की निशानी है बल्कि तत्काल आवश्यकता भी बन चुका है। माना गया है कि ऐसे शहर जहाँ निवासियों की सभी सामान्य जरूरतें शुद्ध पानी-बिजली-धूल-प्रदूषण-मुक्त सड़कें-घर-संचार-इंटरनेट-सोशल मीडिया-प्रशासनिक सुविधाएँ-सुरक्षा-शिक्षा-मनोरंजन-यातायात-स्वास्थ्य तेज और सहज रूप में उपलब्ध हों, वहां के नागरिक जीवनशैली में सहजता, शांति और संतुलन महसूस कर सकें।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">ऐसी अवस्था जहाँ हर आम-व्यक्ति को गुणवत्ता-पूर्ण सुविधा कम सेवा मूल्य पर आसानी से मिल सके, वहाँ के जीवन-यापन के तरीके इतने सुलभ व संतुलित हों कि धूल-प्रदूषण-मुक्त सड़कें हों, पानी-बिजली सहज रूप से उपलब्ध हो, घर पहुँच घर-बैठे इंटरनेट-सोशल मीडिया-प्रशासनिक कार्य संपन्न हों। आम नागरिक, जो स्वतंत्रता-उपरांत जन-सुविधाओं के अभाव में अब तक जूझ रहे थे, उनके लिए इसका त्वरित निराकरण संचार-माध्यमों से संभव हो सके। इस प्रकार एक स्मार्ट-शहर की स्थापना केंद्र सरकार का लक्ष्य बन गया है।परंतु यह प्रश्न उठता है कि क्या हमारा भारत, अपनी विशाल जनसंख्या और मेट्रोपॉलिटन शहरों की घनी-संघन संरचना को देखते हुए, व मध्यम-कद-शहरों की संख्या को भी ध्यान में रखते हुए, वास्तव में इस स्मार्ट-सिटी की परिकल्पना को यथार्थ रूप दे सकता है? यदि सरकार व आम नागरिकों का संकल्प दृढ़ हो जाए, आपसी सहयोग व सामंजस्य बेहतर रूप से काम कर जाए, तो निःसंदेह भारत में स्मार्ट-सिटी की परिकल्पना यथार्थ रूप ले सकती है।<br /><br />स्मार्ट-शहर के मानदंड स्पष्ट हो सकते हैं पर्याप्त बिजली-पानी-भोजन-घर आदि उपलब्ध हों; स्वास्थ्य-सुरक्षा-शिक्षा-मनोरंजन-यातायात की सुविधाएं सरलता से मिले; जीवन-आराम के संदर्भ में सभी आर्थिक गतिविधियाँ सुचारू रूप से चलें। ऐसी स्मार्ट-शहर यदि भारत में बन पाती है, तो निसंदेह वह देश के समग्र विकास को गति दे सकती है। लेकिन इसे मात्र दृढ़ संकल्प या नारेबाजी के आधार पर नहीं देखा जा सकता  यहाँ सार्थक मेहनत, रणनीति-निर्माण, निष्पादन-प्रक्रिया और जनता-सहयोग की समान जरूरत है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center"> वास्तव में देश के प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता-दिवस पर घोषणा की कि भारत में एक सैकड़ा से अधिक-शहरों को स्मार्ट-सिटी बनाने की पहल होगी, तथा इसके लिए लगभग नौ-हजार करोड़ रुपये बजट का प्रावधान भी किया गया। इसके अंतर्गत केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा एक मैनुअल जारी भी किया गया है। इस परियोजना को आने वाले वर्षों में मूर्त रूप देना है। योजना के अनुसार- 40 लाख से अधिक आबादी वाले 9 शहर, 10 लाख-40 लाख आबादी वाले 44 शहर, 5 लाख-10 लाख आबादी वाले 20 शहर, प्रत्येक राज्य एवं केंद्र-शासित प्रदेश की राजधानी-शहरों के अंतर्गत लगभग 37 शहर तथा पर्यटन/धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लगभग 15 शहर सम्पूर्ण रूप से स्मार्ट-सिटी के प्रावधान में लाये जाने का प्रस्ताव है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">प्रारंभ में केंद्र सरकार द्वारा इस दिशा में चयनित शहरों में शामिल हैं-इलाहाबाद (अब प्रयागराज), कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, देहरादून, हरिद्वार, बोधगया, भोपाल, इंदौर, कोच्चि, जयपुर, अजमेर आदि। विदेशी राष्ट्रों ने भी इस पहल में रुचि दिखाई है-- जापान ने वाराणसी को स्मार्ट-सिटी के रूप में विकसित करने में शामिल होने का प्रस्ताव रखा है, दिल्ली को स्मार्ट-सिटी बनाने के लिए कतर देश के प्रिंस ने बड़ी निवेश-राशि का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है, तथा चेन्नई-बैंगलोर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के निकट “लिटिल सिंगापुर” विकसित करने की चर्चा भी है। सरकार ने इस दिशा में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को प्राथमिकता देने का निर्णय भी लिया है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">परंतु स्मार्ट-सिटी बनने के मार्ग में अनेक चुनौतियाँ भी हैं। उदाहरणस्वरूप- भारत में इस प्रकार की परियोजनाओं के कार्यान्वयन में कई फंसे हैं: आधुनिकीकरण-पूर्व आधारभूत संरचनाओं , पुरानी सड़क-नाली को स्मार्ट रूप देना कठिन है; वित्तीय संसाधनों की कमी और वित्तीय सततता की समस्या है। इसके अतिरिक्त, नगरीय स्थानीय निकायों की प्राविधिक एवं नियोजन-क्षमता सीमित है; भूमि अधिग्रहण-स्वीकृति-अनुमति प्रक्रियाओं में विलम्ब और ओवरलैपिंग संस्थागत जिम्मेदारियों की समस्या भी सामने आई है। और सबसे बड़ी चुनौती बड़े विदेशी-शहरों के अनुरूप मॉडल को भारत की विविध जनसंख्या-स्थितियों, आर्थिक-सामाजिक-मानदण्डों, कमजोर-शहरी-इन्फ्रास्ट्रक्चर व घनी जनसंख्या वाले नगरों में प्रत्यक्ष ले जाना आसान नहीं है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">  इसलिए यदि स्मार्ट-सिटी की परिकल्पना मात्र आकार-आधारित, तकनीकी-उपकरणों-प्रचुरता पर आधारित हो जाए, तो संभावना है कि यह केवल हवा की बातें बनकर रह जाएँ। लेकिन यदि इसके पीछे ठोस योजना, समावेशी दृष्टिकोण, नागरिक भागीदारी, पारदर्शिता, स्थानीय क्षमता-निर्माण हो जाए, तो यह यथार्थ स्वरूप ले सकती है। उदाहरणत भारत के कई स्मार्ट-सिटी परियोजनाओं में यह देखा गया है कि अधिकांश फंड “एरिया-बेस्ड डेवलपमेंट” के अंतर्गत कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रह जाते हैं, जिससे पूरे नगरवासियों तक लाभ नहीं पहुंच पाता। इसके साथ ही डिजिटल विभाजन यानी इंटरनेट-कनेक्टिविटी-तकनीकी पहुँच का असमान वितरण भी बड़ी बाधा है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">अतः निष्कर्षतः कह सकते हैं कि यदि देश का प्रत्येक नागरिक, इस सोच से प्रेरित होकर, सरकार की इस परियोजना में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपना योगदान देने का संकल्प ले जाए, यदि नीति-निर्माण से लेकर कार्यान्वयन-प्रक्रिया तक नागरिक-भागीदारी व पारदर्शिता सुनिश्चित हो जाए, और स्थानीय निकाय-प्रशासन-निजी-क्षेत्र-सहयोग यथोचित रूप से हो जाए, तो निश्चित ही अगले दो दशकों में भारत में सैकड़ों स्मार्ट-शहर निर्मित हो सकते हैं। और तब आम नागरिकों को जन-सुविधाओं का सामान्य-स्वीकरण मिलेगा तथा भारत एक विकसित राष्ट्र की श्रेणी में तेज़ी से आ जाएगा। सिर्फ लक्ष्य-घोषणा-ही पर्याप्त नहीं लक्ष्य के पीछे मेहनत-संकल्प-लोक-भागीदारी-निरंतरता-अभ्यास ज़रूरी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Nov 2025 17:03:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>शर्मनाक ! स्मार्ट सिटी कानपुर की सड़क पर सीवर का पानी </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>कानपुर।</strong> देश की चुनिंदा स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल कानपुर शहर में एक शर्मनाक दृश्य सामने आया है। सड़क पर बह रहा सीवर का पानी जल निगम की लापरवाही को दर्शा रहा है, और कानपुर को स्मार्ट सिटी बनाने में रोड़ा बन रहा है।</div>
<div>  </div>
<div>देवकी चौराहा से रावतपुर जाने वाले मुख्य मार्ग पर गलत तरीके से नई सीवर लाइन डाल कर जल निगम ने इतिश्री कर ली है। लेकिन उसका खामियाजा वहां के निवासियों व वहां से गुजरने वाले कानपुर राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। जागरुक क्षेत्रीय निवासियों ने जब इसकी शिकायत जल निगम से की तो केवल आश्वासन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147669/sewer-water-on-the-road-of-shameful-smart-city-kanpur%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/img_20250122_125404.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>कानपुर।</strong> देश की चुनिंदा स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल कानपुर शहर में एक शर्मनाक दृश्य सामने आया है। सड़क पर बह रहा सीवर का पानी जल निगम की लापरवाही को दर्शा रहा है, और कानपुर को स्मार्ट सिटी बनाने में रोड़ा बन रहा है।</div>
<div> </div>
<div>देवकी चौराहा से रावतपुर जाने वाले मुख्य मार्ग पर गलत तरीके से नई सीवर लाइन डाल कर जल निगम ने इतिश्री कर ली है। लेकिन उसका खामियाजा वहां के निवासियों व वहां से गुजरने वाले कानपुर राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। जागरुक क्षेत्रीय निवासियों ने जब इसकी शिकायत जल निगम से की तो केवल आश्वासन के अतिरिक्त कुछ नहीं मिला। समस्या जस की तस बनी हुई है।</div>
<div> </div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-01/img-20250121-wa0370.jpg" alt="IMG-20250121-WA0370" width="1152" height="864"></img>जागरुक क्षेत्रीय नागरिकों ने स्वतंत्र प्रभात को यह तस्वीरें भेज कर समस्या को अधिकारियों तक पहुंचाने की अपेक्षा की है। यह समस्या पिछले छै माह से चल रही है। इसके अलावा जो वाटर लाइन पड़ी है वह भी कहीं से रिसाव कर रही है जिससे पीने का हजारों लीटर पानी भी प्रतिदिन बर्बाद हो रहा है। इस तरह से जल निगम सरकार के स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटी परियोजना पर पलीता लगा रहा है। काम पूरा करके उसकी गुणवत्ता देखने में आखिरी क्यों कतराते हैं अधिकारी क्षेत्रीय जनता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की वजह से यह समस्या उत्पन्न हो रही है उनपर कार्यवाही की जाए।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jan 2025 16:35:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने रांची स्मार्ट सिटी में गौतम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की रखी आधारशिला , राज्य का होगा तीसरा निजी मेडिकल कॉलेज </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>रांची </strong>राज्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली मजबूत बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।  इस दिशा में स्वास्थ्य संरचनाओं को बेहतर करने का प्रयास निरंतर जारी है । मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने रांची स्मार्ट सिटी परिसर में गौतम  मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए राज्यवासियों को अच्छी  चिकित्सा  सुविधा उपलब्ध कराने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में इस मेडिकल कॉलेज का खुलना स्वास्थ्य व्यवस्था के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है।</div>
<div>  </div>
<div>इस पहल से निश्चित तौर पर राज्य के विकास को एक नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142583/chief-minister-champai-soren-laid-the-foundation-stone-of-gautam"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/news-81.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>रांची </strong>राज्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली मजबूत बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।  इस दिशा में स्वास्थ्य संरचनाओं को बेहतर करने का प्रयास निरंतर जारी है । मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने रांची स्मार्ट सिटी परिसर में गौतम  मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए राज्यवासियों को अच्छी  चिकित्सा  सुविधा उपलब्ध कराने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में इस मेडिकल कॉलेज का खुलना स्वास्थ्य व्यवस्था के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है।</div>
<div> </div>
<div>इस पहल से निश्चित तौर पर राज्य के विकास को एक नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में स्वास्थ्य से संबंधित आवश्यकताओं को देखते हुए ज्यादा से ज्यादा मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल खोले जाने की जरूरत है। इस राज्य में आज भी देश के मानक स्तर से काफी कम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल हैं। ऐसे में यहां नए मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले दिनों में यहां निजी अथवा पीपीपी मोड पर कई मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खुलेंगे, जिसका फायदा यहां के लोगों को मिलेगा।</div>
<div> </div>
<div>मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य समेत किसी भी क्षेत्र में जो निवेशक यहां निवेश करने के इच्छुक हैं,  उन्हें सरकार की ओर से पूरा सहयोग किया जाएगा। वे  अपना प्रस्ताव दें, सरकार पूरी गंभीरता से विचार करेगी। निवेशकों को सरकार की नीति के अनुरूप इंसेंटिव भी दिया जाएगा।  मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विकास की गति तेज करने के लिए यह कदम उठाए जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div><strong> इलाज के लिए राज्य के बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़े</strong></div>
<div>मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी बेहतर इलाज के लिए लोग दूसरे राज्यों और बड़े शहरों का रुख करते हैं । वहां महंगा इलाज होने की वजह से उनके आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है। सरकार की कोशिश है कि यहां के लोगों को अपने ही राज्य में बेहतर और आधुनिक चिकित्सीय जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध करा सकें। इस दिशा में मेडिकल कॉलेज तथा विभिन्न अस्पतालों को अपग्रेड किया जा रहा है। जांच की आधुनिकतम मशीन उपलब्ध कराने के साथ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है । मुख्यमंत्री ने कहा  नए अस्पतालों के खुलने से लोगों को इलाज करने के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी ।</div>
<div> </div>
<div><strong> ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने पर सरकार का विशेष जोर</strong></div>
<div>मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के ग्रामीण और सुदूर इलाकों से लेकर शहरों तक लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करना हमारी प्रतिबद्धता है। इस दिशा में स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत कर रहे है। सरकार इसके लिए तो कार्य कर ही रही  है लेकिन निजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों को भी इसके लिए आगे आना होगा।  वे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करें ताकि ग्रामीणों को इलाज के लिए अन्यत्र इधर-उधर जाना नहीं पड़े। सभी के सहयोग से हम राज वासियों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में सफल होंगे।</div>
<div> </div>
<div>शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अजय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव अरवा राजकमल, रांची यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ अजीत कुमार सिंह, राइट पाथ फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ  अभिजीत कुमार विशेष रूप से मौजूद थे। </div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Jun 2024 16:45:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>झकरकटी झोपड़पट्टी में चला प्रशासन का बुलडोजर </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>कानपुर।</strong> कानपुर में मतदान समाप्त हो चुका है और अब जिला प्रशासन ने अपने प्रशासनिक कार्य करने प्रारंभ कर दिए हैं। वैसे तो अतिक्रमण हटाने का यह कार्य काफी समय से चल रहा था लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए फिलहाल रोक दिया गया था। कानपुर में मतदान 13 मई को हो चुका है। अब जिला प्रशासन अपने काम पर लग गया है।</div>
<div>  </div>
<div>वैसे तो स्मार्ट सिटी के नाम पर कई जगह केवल खानापूर्ति ही हो रही है। लेकिन अतिक्रमण को लेकर प्रशासन का रवैया स्पष्ट है। थाना बाबू पुरवा के अंतर्गत आज झकरकटी बस अड्डा के बगल में उन झोपड़पट्टी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141322/administrations-bulldozer-runs-in-jharkatti-slum"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/img_20240515_143952.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>कानपुर।</strong> कानपुर में मतदान समाप्त हो चुका है और अब जिला प्रशासन ने अपने प्रशासनिक कार्य करने प्रारंभ कर दिए हैं। वैसे तो अतिक्रमण हटाने का यह कार्य काफी समय से चल रहा था लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए फिलहाल रोक दिया गया था। कानपुर में मतदान 13 मई को हो चुका है। अब जिला प्रशासन अपने काम पर लग गया है।</div>
<div> </div>
<div>वैसे तो स्मार्ट सिटी के नाम पर कई जगह केवल खानापूर्ति ही हो रही है। लेकिन अतिक्रमण को लेकर प्रशासन का रवैया स्पष्ट है। थाना बाबू पुरवा के अंतर्गत आज झकरकटी बस अड्डा के बगल में उन झोपड़पट्टी को हटा दिया गया जहां लोग पचास वर्षों से रह रहे थे। इन गरीबों के पास कोई रहने के लिए जगह भी नहीं है। अच्छा होता कि पहले इनके रहने का इंतजाम कर दिया जाता।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 May 2024 16:14:51 +0530</pubDate>
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