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                <title>Swati maliwal - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>आप में सियासी भूचाल दलबदल कानून के घेरे में 7 राज्यसभा सांसदों का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है जिसने संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी में आई इस बड़ी टूट ने न केवल पार्टी के आंतरिक हालात को उजागर किया है बल्कि दलबदल विरोधी कानून की प्रासंगिकता और उसकी सीमाओं पर भी नई बहस छेड़ दी है। राज्यसभा के कई सांसदों द्वारा पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा के बाद अब यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या ये सांसद अपनी सदस्यता बनाए रख पाएंगे या उन्हें अयोग्य घोषित किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177385/political-turmoil-in-aap-future-of-7-rajya-sabha-mps"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/indian-politics-defection-crisis-jaychand-mirjafar-analysis.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है जिसने संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी में आई इस बड़ी टूट ने न केवल पार्टी के आंतरिक हालात को उजागर किया है बल्कि दलबदल विरोधी कानून की प्रासंगिकता और उसकी सीमाओं पर भी नई बहस छेड़ दी है। राज्यसभा के कई सांसदों द्वारा पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा के बाद अब यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या ये सांसद अपनी सदस्यता बनाए रख पाएंगे या उन्हें अयोग्य घोषित किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे मामले के केंद्र में हैं राघव चड्ढा जिनके साथ कई अन्य सांसदों ने भी पार्टी छोड़ने का दावा किया है। इनके साथ संदीप पाठक अशोक मित्तल विक्रम साहनी हरभजन सिंह स्वाति मालीवाल और नरेंद्र गुप्ता जैसे नामों का भी उल्लेख किया जा रहा है। इन सभी के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने आम आदमी पार्टी से अलग होकर भाजपा का रुख किया है। इस दावे ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर संजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन को याचिका सौंपकर इन सात सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन सांसदों ने संविधान की दसवीं अनुसूची का स्पष्ट उल्लंघन किया है जो दलबदल को रोकने के लिए बनाई गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में दलबदल विरोधी कानून जिसे दसवीं अनुसूची के नाम से जाना जाता है वर्ष 1985 में 52वें संविधान संशोधन के जरिए लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य राजनीतिक दलों में स्थिरता बनाए रखना और निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पार्टी बदलने की प्रवृत्ति को रोकना था। इस कानून के तहत यदि कोई सांसद या विधायक स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कानून में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान है जो पार्टी व्हिप से जुड़ा हुआ है। यदि कोई सांसद सदन में अपनी पार्टी के निर्देशों के खिलाफ वोट करता है या मतदान से अनुपस्थित रहता है तो भी उसे अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पार्टी अनुशासन बना रहे और सरकार या विपक्ष की रणनीति प्रभावित न हो।</div>
<div style="text-align:justify;">निर्दलीय सदस्यों के लिए भी इस कानून में स्पष्ट नियम हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि कोई निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है तो उसे तुरंत अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि मतदाता जिस स्वतंत्र उम्मीदवार को चुनते हैं वह बाद में किसी दल का हिस्सा बनकर उनकी अपेक्षाओं के साथ समझौता न करे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि इस कानून में एक महत्वपूर्ण अपवाद भी है जिसे विलय का प्रावधान कहा जाता है। इसके अनुसार यदि किसी दल के दो तिहाई या उससे अधिक सदस्य एक साथ किसी अन्य दल में शामिल हो जाते हैं तो इसे दलबदल नहीं बल्कि वैध विलय माना जाता है और ऐसे सदस्यों को अयोग्यता से छूट मिल जाती है। यही वह बिंदु है जिस पर इस पूरे मामले का भविष्य काफी हद तक निर्भर करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब सवाल यह है कि क्या आम आदमी पार्टी के इन सांसदों की संख्या दो तिहाई के आंकड़े तक पहुंचती है या नहीं। यदि यह संख्या पूरी होती है तो ये सांसद अपनी सदस्यता बचा सकते हैं अन्यथा इन्हें अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि दोनों पक्ष अपने अपने दावे कर रहे हैं और राजनीतिक गणित तेजी से बदल रहा है।इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार राज्यसभा के सभापति के पास होता है। वर्तमान में यह जिम्मेदारी उपराष्ट्रपति के पास है जो इस मामले की सुनवाई करेंगे और तथ्यों के आधार पर फैसला देंगे। उनका निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण होगा क्योंकि वही तय करेगा कि संबंधित सांसद संसद में बने रहेंगे या नहीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि यह भी ध्यान देने वाली बात है कि सभापति का निर्णय अंतिम होने के बावजूद न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि दलबदल से जुड़े मामलों में सभापति के फैसले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। इसका मतलब है कि यदि किसी पक्ष को निर्णय से असंतोष होता है तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक पार्टी तक सीमित नहीं है बल्कि इसका प्रभाव पूरे देश की राजनीति पर पड़ेगा। यदि बड़ी संख्या में सांसद दलबदल कर बिना अयोग्यता के बच जाते हैं तो यह अन्य दलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। वहीं यदि कड़ी कार्रवाई होती है तो यह संदेश जाएगा कि दलबदल कानून अभी भी प्रभावी है और उसका उल्लंघन करने पर सख्त परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दलबदल विरोधी कानून अपने उद्देश्य को पूरी तरह से पूरा कर पा रहा है या इसमें सुधार की आवश्यकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून का उपयोग कई बार राजनीतिक हथियार के रूप में भी किया जाता है जिससे विधायकों और सांसदों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति प्रभावित होती है। वहीं दूसरी ओर यह भी तर्क दिया जाता है कि यदि यह कानून न हो तो राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है और सरकारें गिरने का खतरा बना रह सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। दोनों पक्ष अपने अपने तर्कों के साथ जनता और संवैधानिक संस्थाओं के सामने अपनी बात रखेंगे। इस पूरे मामले पर देश की नजर बनी हुई है क्योंकि यह केवल सात सांसदों का मुद्दा नहीं है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती से जुड़ा हुआ प्रश्न है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि दलबदल कानून भारतीय लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि इसका उपयोग निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो ताकि लोकतंत्र की मूल भावना बनी रहे। आने वाले समय में सभापति का निर्णय इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत देगा और यह तय करेगा कि राजनीति में दल बदल की प्रवृत्ति पर कितना नियंत्रण संभव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:18:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>बेचारा आप का केजरीवाल?</title>
                                    <description><![CDATA[<div>दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल चुनावी समर के बीच एक बार फिर से अपनी 'बेचारा' वाली छवि जनता के सामने उभारने की कोशिश में लग गए हैं। केजरीवाल ने रविवार को बीजेपी कार्यकर्ताओं पर आप स्वयंसेवकों और समर्थकों को धमकाने और उन पर हमला करने का आरोप लगाया है। कुछ दिन पहले आप ने केजरीवाल की गाड़ी पर पत्थर से हमले का दावा करते हुए इसे बीजेपी की साजिश बताया था। केजरीवाल पर पानी फेंके जाने पर उसे तेजाब बता जनता की सहानुभूति लूटने की कोशिश सब ने टीवी पर देखी ही थी।</div>
<div>  </div>
<div>आप विधायक और रिठाला से आप</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148122/poor-aap-ke-kejriwal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download.jpg" alt=""></a><br /><div>दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल चुनावी समर के बीच एक बार फिर से अपनी 'बेचारा' वाली छवि जनता के सामने उभारने की कोशिश में लग गए हैं। केजरीवाल ने रविवार को बीजेपी कार्यकर्ताओं पर आप स्वयंसेवकों और समर्थकों को धमकाने और उन पर हमला करने का आरोप लगाया है। कुछ दिन पहले आप ने केजरीवाल की गाड़ी पर पत्थर से हमले का दावा करते हुए इसे बीजेपी की साजिश बताया था। केजरीवाल पर पानी फेंके जाने पर उसे तेजाब बता जनता की सहानुभूति लूटने की कोशिश सब ने टीवी पर देखी ही थी।</div>
<div> </div>
<div>आप विधायक और रिठाला से आप के प्रत्याशी मोहिंदर गोयल के साथ जनसभा में मारपीट हुई। इसके कुछ समय बाद मोहिंदर गोयल पट्टी और प्लास्टर बांधे व्हीलचेयर पर  रिठाला में अरविंद केजरीवाल की जनसभा में शामिल हुए और स्टेज पर केजरीवाल के साथ नजर आए। केजरीवाल ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मोहिंदर गोयल की यह हालत देखकर मुझे रोना आ रहा है। दिल्ली की जनता इस तरह की गुंडागर्दी का समर्थन नहीं करती।</div>
<div> </div>
<div>बीजेपी हिंसा कर रही है और पुलिस उन्हें बचा रही है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनावों में निर्णायक जीत की ओर बढ़ रही है। जिससे बीजेपी नेता खासतौर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह परेशान और हताश हैं। दिल्ली चुनावों के लिए प्रचार कर रहे आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दिल्ली चुनावों में लगातार चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हो रहा है लेकिन चुनाव आयोग कोई एक्शन नहीं ले रहा है।</div>
<div> </div>
<div>उधर मुख्य चुनाव आयोग का इस पर कहना है कि ज्यादातर मामलों में कोई लिखित शिकायत ही नहीं मिली है। दिल्ली के मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा केजरीवाल को लिखे गए एक पत्र में कहा गया कि आयोग आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन पर कानूनों और ईसीआई मानदंडों के अनुसार कार्रवाई करेगा और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ एक्शन लेगा। चीफ इलेक्शन कमिशनर के दफ्तर ने बताया है कि नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में सात जनवरी से अब तक 115 शिकायतों पर 100 मिनट के भीतर कार्रवाई की गई है।</div>
<div> </div>
<div>दिल्ली के सभी निर्वाचन क्षेत्रों में 642 एफएसटी और 633 एसएसटी तैनात किए गए हैं।केजरीवाल को लिखे पत्र में चुनाव आयोग के अधिकारी ने कहा है कि जहां तक स्वतंत्र पर्यवेक्षक के मुद्दे का सवाल है तो यह सूचित किया जाता है कि नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र सहित सभी निर्वाचन क्षेत्रों के लिए सामान्य पर्यवेक्षक, व्यय पर्यवेक्षक तथा पुलिस पर्यवेक्षक पहले ही तैनात किए जा चुके हैं। गौरतलब है कि आज ही केजरीवाल ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि बीजेपी कार्यकर्ता आप समर्थकों को धमका रहे हैं। केजरीवाल ने यह आरोप भी लगाया था कि चुनाव आयोग इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।</div>
<div> </div>
<div>केजरीवाल के आरोपों पर सीईओ ने कहा है कि कार्यालय में उपलब्ध रिकार्डों की जांच से पता चला है कि अधिकांश मामलों में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली। चुनाव आयोग की तरफ से बताया गया कि जब भी किसी राजनीतिक दल से ऐसे आरोपों का हवाला देते हुए लिखित शिकायतें प्राप्त होती हैं, तो ऐसे सभी मामलों की जांच अनिवार्य रूप से कानूनों और ईसीआई मानदंडों के अनुसार की जाती है और ऐसे सभी मामलों में ईसीआई मानदंडों के अनुसार उचित कार्रवाई या तो शुरू की जाती है या सिफारिश की जाती है।</div>
<div> </div>
<div>केजरीवाल ने चुनाव आयोग से नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की मांग की थी। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने भी केजरीवाल को कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है, क्योंकि केजरीवाल ने रविवार को शिकायत की थी कि कुछ लोगों ने आप के प्रचार वाहन को घेर लिया और पार्टी के पोस्टर फाड़ दिए। केजरीवाल के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए नई दिल्ली के डीसीपी ने दावा किया कि पुलिस स्टेशन में कोई पीसीआर कॉल या शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शीर्ष पुलिस अधिकारी ने औपचारिक शिकायत दर्ज होने के बाद सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया।</div>
<div> </div>
<div>केजरीवाल ने कहा कि आप कार्यकर्ताओं को बीजेपी कार्यकर्ताओं और दिल्ली पुलिस द्वारा उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में यह भी लिखा था कि मैं चुनाव के दिन से पहले नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी कार्यकर्ताओं और दिल्ली पुलिस द्वारा हमारे जमीनी स्तर के स्वयंसेवकों को दी जा रही धमकी और उत्पीड़न पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं। इन चुनावों में केजरीवाल कई मुद्दों पर बुरी तरह फंसे हुए दिखाई दे रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>केजरीवाल शीशमहल मामले में बुरी तरह घिरे हुए दिखाई दे रहे हैं। अपनी ही पार्टी की तत्कालीन राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल की पिटाई उनके घर पर होने के मामले पर उनके पास कोई जबाव नही है। शीशमहल के मुद्दे के कारण उनका सुरक्षा और गाड़ी ना लेने का शुरूआती वादा उनके गले की हड्डी बन गया है। यमुना साफ नही हुई, दिल्ली की गंभीर समस्या पीने योग्य पानी लोगों तक वो अपने दो कार्यकाल में भी नही पहुंचा पाए। दिल्ली में हवा स्वच्छ करने का उनका वादा हवा हो गया।</div>
<div> </div>
<div>दिल्ली से कूडे के पहाड नही हटा पाए। दिल्ली की समस्या पानी भराव का वो कोई हल नही ढूंढ पाए। दिल्ली में ट्रैफिक जाम भयंकर समस्या है उसकी और उन्होने कोई ध्यान नही दिया। इनके अलावा और भी बहुत सी समस्याए हैं दिल्ली की जिनका वो कुछ हल नही दे पाए। अब इसी लिए केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने अपना पुराना हथियार पिटकर सहानुभूति लेना फिर से अपने तुनीर से निकाल लिया है। अब देखना होगा यह हथियार चुनावी रणभूमि में उनकी कितनी मदद करता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2025 16:35:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>स्वाति मालीवाल से जुड़ा बवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी की ख़ास नेत्री सुश्री स्वाति मालीवाल   के साथ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निज सचिव द्वारा की गयी मारपीट की घटना अब रोचक हो गयी है। इस घटना की तह में जाने से पहले आपको स्वाति का अर्थ और स्वाति का महत्व समझना चाहिए। स्वाति का अर्थ है सरस्वती। स्वाति का अर्थ है तलवार। स्वाति हिन्दू धर्म से जुड़ा बहुत ही मन मोहने वाला नाम है। स्वाति सरस्वती है और एक नक्षत्र भी। स्वाती नाम की राशि कुंभ है। इस राशि की लड़कियां स्वभाव से बेहद ईमानदार होती हैं। यह किसी भी परिस्थिति के हिसाब से अपने आप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141380/controversy-related-to-swati-maliwal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/6641b24d9801b-aap-leader-swati-maliwal-alleges-assault-at-delhi-cm-kejriwals-residence-132516388-16x9.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी की ख़ास नेत्री सुश्री स्वाति मालीवाल   के साथ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निज सचिव द्वारा की गयी मारपीट की घटना अब रोचक हो गयी है। इस घटना की तह में जाने से पहले आपको स्वाति का अर्थ और स्वाति का महत्व समझना चाहिए। स्वाति का अर्थ है सरस्वती। स्वाति का अर्थ है तलवार। स्वाति हिन्दू धर्म से जुड़ा बहुत ही मन मोहने वाला नाम है। स्वाति सरस्वती है और एक नक्षत्र भी। स्वाती नाम की राशि कुंभ है। इस राशि की लड़कियां स्वभाव से बेहद ईमानदार होती हैं। यह किसी भी परिस्थिति के हिसाब से अपने आप को ढाल लेती हैं। स्वाती नाम की लड़कियां अक्सर दोस्ती करने से पहले सामने वाले व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से परखती है। इस राशि की स्वाती नाम की लड़कियों के करियर की बात करें तो यह फोटोग्राफर, वैज्ञानिक, लेखिका, मनोवैज्ञानिक व वकील सफलतापूर्वक बन सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />आप की नेता और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष के साथ जो कुछ हुआ वो विस्मयकारी,पीड़ादायक और निंदनीय है । लेकिन सवाल ये है कि सामाजिक आंदोलन से होते हुए आम आदमी पार्टी से जुड़ी स्वाति के साथ मुख्यमंत्री के निज सचिव को इतनी बदतमीजी करने का साहस अचानक आ कहाँ से गया ? स्वाति न मुक्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए नई हैं और न उनके निज सचिव के लिये ।  आप ने स्वाति  को महिला आयोग का अध्यक्ष भी बनाया और राज्य सभा  भी भेजा,जाहिर है कि वे पार्टी के लिए महत्वपूर्ण रहीं हैं ,लेकिन अचानक उनके साथ मुख्यमंत्री के निज सचिव का दुर्व्यवहार ये जाहिर करता है कि स्वाति के किसी क्रियाकलाप से मुख्यमंत्री के निज सचिव अवगत  थे और उन्होंने इसीलिए स्वाति को मुख्यमंत्री से मिलने से रोका और जब नहीं रुकीं तो जो किया सो सब सीसीटीवी में कैद है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br /> इस घटना के बाद स्वाति आप में रहेंगीं इसमें  मुझे संदेह है। मुझे आशंका है कि वे आजकल में ही भाजपा के शरणार्थी शिविर में आश्रय ले सकतीं है।मामला पुलिस के पास पहुँच चुका है और पुलिस मुख्यमंत्री आवास के कार्यालय तक। भाजपा बहुत पहले से वहां पहुंचना चाहती थी ,लेकिन रास्ता अब बना ,वो भी स्वाति के जरिये। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भाजपा की आँखों की सबसे बड़ी किरकिरी हैं,और शायद इसीलिए केजरीवाल की जमानत का भाजपा निविरोध किय।  गनीमत है कि बड़ी अदालत ने जमानत की आलोचना को दरियादिली के साथ लिया और कुछ कहा नहीं। आखिर में स्वाति भाजपा के काम आयीं और उन्होंने जानबूझकर एक तय पटकथा के तहत जो करना था सो किया। उन्हें इसका फल मिलेगा ,न्याय भी मिलेगा लेकिन उन्होंने अपने आपको समाप्त भी कर लिया। अब वे सरस्वती नहीं रहीं। सचमुच की स्वाति से हटकर उनका व्यक्तित्व  शून्य बन गया है।  </p>
<p style="text-align:justify;"><br /> आपको बता दें की स्वाति नक्षत्र आकाश मंडल में 15वाँ नक्षत्र होकर इसका स्वामी राहु यानि अधंकार है।स्वाति मालीवाल भी मुमकिन है कि आम आदमी पार्टी का 15  वां  नक्षत्र ही हों और उनका स्वामी भी कोई अन्धकार ही  हो।  कहावत भी है कि जब स्वाति नक्षत्र में ओस की बूँद सीप पर गिरती है तो मोती बनता है। इस बूँद के लिए चातक भी तरसता है और सीप भी। मुमकिन है कि आप भी स्वाति को इतना ही महत्वपूर्ण मानता हो। लेकिन अब आम आदमी पार्टी के लिए स्वाति पहले वाली स्वाति नहीं रही। आम आदमी पार्टी की मंत्री आतिशी ने कहा कि स्वाति मालीवाल के लगाए सारे आरोप झूठे और निराधार है।  साजिश के तहत स्वाति को बीजेपी ने भेजा था।  स्वाति सीएम हाउस में जबरदस्ती घुसी थी।  बीजेपी ने पूरे मामले की साजिश रची है।  बिभव पर झूठे आरोप लगाए गए हैं। बिभव कुमार ने स्वाति मालीवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।  </p>
<p style="text-align:justify;"><br />स्वाति हर पार्टी में है।  हर पार्टी का अपनी महिला नेत्रियों के प्रति एक जैसा रवैया होता है। मैंने अपने पांच दशक के पत्रकारिता के जीवन में निकट से जाना है कि चाहे कांग्रेस हो,भाजपा हो,वामपंथी हों ,समाजवादी हों या फिर और कोई विचारधारा के दल महिलाओं का केवल इस्तेमाल करते हैं और वक्त आने पर उन्हें दूध में पड़ी मख्खी कीतरह निकाल भी फेंकते है।  उन्हें संरक्षण  कोई नहीं देता ।  स्वाति ने भी इस हकीकत को शायद समझा नहीं या समझ लिया तो कुछ ज्यादा ही समझ लिया। स्वाति आम चुनाव के पांचवें चरण के पहले सत्तापक्ष की और से चली गयी एक गोटी भर हैं। जिन्हें उनका इस्तेमाल करना था वे  कर चुके हैं और स्वाति को पता भी नहीं चला ।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> अब पुलिस और अदालत स्वाति को जितना न्याय दिला सकती है शायद दिला भी दे किन्तु स्वाति का जो नुक्सान होना था उसकी भरपाई कोईनहीं कर सकता ,न भाजपा और न आप। स्वाति को कांग्रेस के जमाने के स्त्री उत्पीड़न के मामले शायद याद नहीं है।वे तंदूर कांड भूल गयीं   वे भाजपा के दस साल के कार्यकाल में हुए स्त्री उत्पीड़न की घटनाओं को भी शायद याद नहीं रख पायी। वे मप्र का हनीट्रैप कांड और कर्नाटक का ताजा रेमन्ना कांड भी याद नहीं रख सकीं , और उस पार्टी के खिलाफ इस्तेमाल कर ली गयीं जिस पार्टी ने उन्हें पहचान,रूतबा,पद और पैसा उपलब्ध कराया। वे पीड़िता हैं इसलिए मैं उनके साथ हूँ किन्तु उन्होंने जिस तरह से अपना इस्तेमाल होने दिया उसे देखते हुए मैं उनके साथ नहीं भी हू।  वे अब स्वाति नक्षत्र की उस बूँद जैसी हैं जो किसी सीप में पड़े कच्चे माल को मोती में तब्दील नहीं कर सकतीं। वे किस अतृप्त चातक के लिए जीवनदायनी भी साबित नहीं हो सकती।  वे द्रोपदी की तरह अपमानित भी हुईं और महाभारत भी नहीं करा पायीं,क्योंकि उनके होने या न होने से अब आप का कोई नुक्सान होने वाला नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />बहरहाल अब आने वाले दिनों   में स्वाति को न्याय मिलेगा या नहीं ? भाजपा उन्हें शरण देगी या नहीं ? आप उन्हें अपनाएगी या नहीं ? ऐसे सवाल हैं जिनका जबाब कोई नहीं दे सकता। बस प्रतीक्षा कीजिये की आने वाले दिनों में राजनीति कितनी और बदसूरत हो सकती है। हर दल की स्वातियों को सावधान हो जाना चाहिए और अपने आपको इस्तेमाल होने से बचना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong> राकेश अचल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 May 2024 17:59:29 +0530</pubDate>
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                <title>स्वाती मालीवाल की केजरीवाल से बेरूखी का बदला लिया सीएम आवास पर की बदसलूकी,पहुंची थाने</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।  एसडी सेठी।</strong></p>
<p>आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद एवं पूर्व दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष रही स्वाती मालीवाल सोमवार को सिविल लाईंस थाने पहुंची और बेहद गंभीर आरोप लगाया, कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के आवास पर उनके साथ बदसलूकी की गई।  उन्होने केजरीवाल के पर्सनल स्टाफ पर आरोप लगाया। एक पुलिस अधिकारी ने मीडिया ऐजेंसी (पीटीआई) को यह जानकारी दी।    हालांकि खबर लिखे जाने तक पुलिस को लिखित में शिकायत नहीं मिली थी। </p>
<p>अधिकारी ने बताया कि स्वाती माॅलीवाल ने बाकायदा दो बार पीसीआर काॅल भी की थी। काॅल में झगडे का आरोप लगाया था। उन्होने बताया कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141298/draft-add-your-title-swati-maliwal-took-revenge-for-kejriwals"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/img-20240513-wa0058.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात।  एसडी सेठी।</strong></p>
<p>आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद एवं पूर्व दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष रही स्वाती मालीवाल सोमवार को सिविल लाईंस थाने पहुंची और बेहद गंभीर आरोप लगाया, कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के आवास पर उनके साथ बदसलूकी की गई।  उन्होने केजरीवाल के पर्सनल स्टाफ पर आरोप लगाया। एक पुलिस अधिकारी ने मीडिया ऐजेंसी (पीटीआई) को यह जानकारी दी।    हालांकि खबर लिखे जाने तक पुलिस को लिखित में शिकायत नहीं मिली थी। </p>
<p>अधिकारी ने बताया कि स्वाती माॅलीवाल ने बाकायदा दो बार पीसीआर काॅल भी की थी। काॅल में झगडे का आरोप लगाया था। उन्होने बताया कि सुबह करीब 10 बजे दो काॅल आई थी। सिविल लाइन थाने की एक टीम मुख्यमंत्री के आवास पर जांच के लिए पहुंची। फिलहाल दिल्ली पुलिस स्वाति मालीवाल ,आम आदमी पार्टी या, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल  की ओर से कोई बयान जारी  नहीं किया गया है। बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओ ने जरूर सोशल मीडिया पर अरविंद केजरीवाल  की घेराबंदी शुरू कर दी है। </p>
<p>भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा , आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के पीए ने उन पर हमला किया। दिल्ली सीएम आवास से फोन किया । उल्लेखनीय है कि सीएम केजरीवाल की गिरफ्तारी पर स्वाति मालीवाल चुप रही थी। वास्तव में उस समय वह भारत मे भी नहीं थी। और लंबे समय तक नहीं लौटी। उसी चुप्पी का बदला उनके साथ बदसलूकी की शक्ल में बाहर आया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 May 2024 17:03:31 +0530</pubDate>
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