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                <title>Supreme Court News - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Supreme Court News RSS Feed</description>
                
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                <title>बांग्लादेश डिपोर्ट किए गए कुछ लोगों को वापस भारत लाया जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179984/some-people-deported-to-bangladesh-will-be-brought-back-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260523-wa0013-960x640.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की सदस्यता वाली पीठ से कहा कि सरकार उन्हें वापस लाएगी और उसके बाद उनकी स्थिति की जांच करेगी। परिणाम के आधार पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम तदनुसार कदम उठाएंगे। शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा कि इन व्यक्तियों को भारत वापस लाने में 8-10 दिन लग सकते हैं। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख जुलाई में तय की है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उच्चतम न्यायालय केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के 26 सितंबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उच्च न्यायालय ने सुनाली खातून और अन्य को बांग्लादेश निर्वासित करने के केंद्र सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था और इसे ‘अवैध’ करार दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले साल तीन दिसंबर को शीर्ष अदालत ने ‘मानवीय आधार’ पर खातून और उनके आठ वर्षीय बच्चे को बांग्लादेश भेजे जाने के महीनों बाद भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी।अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को बच्चे की देखभाल करने का निर्देश दिया था और बीरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को गर्भवती खातून को मुफ्त प्रसव की सुविधा सहित हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायालय ने 24 अप्रैल को केंद्र सरकार को अंतिम अवसर दिया और उसके अधिवक्ता को इस मामले में निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराने को कहा। खातून के पिता भोदु शेख की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े ने कहा कि केंद्र सरकार का यह रवैया ‘कुछ हद तक अनुचित’ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने इस मामले में न्यायालय को अपने विचार नहीं बताए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">क्षेत्र के सेक्टर 26 में दो दशकों से अधिक समय से दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे इन परिवारों को पिछले साल 18 जून को बांग्लादेशी होने के संदेह में पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में 27 जून को सीमा पार धकेल दिया। कि निर्वासित किए गए छह नागरिकों को एक महीने के भीतर भारत वापस लाया जाए और आदेश पर अस्थायी रोक लगाने की सरकार की अपील को खारिज कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:31:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एक ओर यूएपीए में जमानत,दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद का मामला बड़ी पीठ को भेजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक ओर यूएपीए में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत के मामले पर अब बड़ी बेंच फैसला करेगी। इस मामले में शुक्रवार को दिन में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने ज़ोर देकर कहा था कि इस मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेजा जाए। दूसरी ओर एक दूसरे मामले में अन्य बातों के अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साढ़े चार साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी साज़िश</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले में यूएपीए के आरोपी सुहैल अहमद ठोकर को ज़मानत दे दी। यह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179982/on-one-hand-bail-in-uapa-on-the-other-hand"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images10.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक ओर यूएपीए में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत के मामले पर अब बड़ी बेंच फैसला करेगी। इस मामले में शुक्रवार को दिन में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने ज़ोर देकर कहा था कि इस मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेजा जाए। दूसरी ओर एक दूसरे मामले में अन्य बातों के अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साढ़े चार साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी साज़िश</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले में यूएपीए के आरोपी सुहैल अहमद ठोकर को ज़मानत दे दी। यह मामला संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद सामने आया था। सीजेआई सूर्यकांत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह आदेश पारित किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बीच अब सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आतंकवाद और यूएपीए यानी गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामलों में जमानत देने के नियमों पर अहम फ़ैसला सुना दिया। कोर्ट ने दिल्ली दंगे मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न देने वाले अपने पुराने फैसले पर सवाल उठाते हुए मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने यह आदेश दिया। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों- तसलीम अहमद और खालिद सैफी को 6 महीने की अंतरिम जमानत भी दे दी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में फरवरी 2020 में </span>CAA <span lang="hi" xml:lang="hi">विरोधी प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। इन दंगों में 50 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने कई लोगों पर आरोप लगाया कि उन्होंने दंगों की साज़िश रची थी। उमर खालिद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरजील इमाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तसलीम अहमद और खालिद सैफी समेत कई लोग यूएपीए के तहत गिरफ्तार किए गए थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट से कहा कि यूएपीए मामलों में जमानत के नियमों पर दोबारा विचार होना चाहिए। उन्होंने हाल के एक फ़ैसले पर सवाल उठाया। इससे पहले न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने नार्को-टेरर मामले में स्येद इफ्तिखार अंदरबी को जमानत देते हुए कहा था कि यूएपीए मामलों में भी </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">जमानत नियम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जेल अपवाद</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">। उन्होंने उमर खालिद वाले पुराने फ़ैसले पर संदेह जताया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एसजी राजू ने कहा कि यूएपीए जैसे गंभीर मामलों में सभी आरोपियों को एक जैसी छूट नहीं दी जा सकती है। हर मामले को अलग-अलग देखना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बहरहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि के ए नजीब वाले पुराने फैसले में दिए गए सिद्धांतों को लेकर अब भ्रम है। खासकर यूएपीए की धारा 43</span>D(<span lang="hi" xml:lang="hi">5) यानी जमानत के सख्त नियम और अनुच्छेद 21 यानी जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह तय करना जरूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि एक बेंच दूसरे बराबर की बेंच के फ़ैसले को आसानी से नहीं बदल सकती। क़ानून में स्पष्टता होनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए यह मुद्दा मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा जा रहा है ताकि बड़ी बेंच बने और अंतिम फैसला दे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तसलीम अहमद और खालिद सैफी को 6 महीने के लिए अंतरिम जमानत मिल गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले इनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बता दें कि उमर खालिद और शरजील इमाम को अभी जमानत नहीं मिली है। उनका मामला अब बड़ी बेंच तय करेगी।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच 2020 दिल्ली दंगे के दो आरोपियों- तसलीम अहमद और खालिद सैफी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे पहले शुक्रवार को दिन में सुनवाई के दौरान आतंकवाद और </span>UAPA <span lang="hi" xml:lang="hi">मामलों में जमानत को लेकर मतभेद के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इस मुद्दे को बड़ी बेंच को भेज दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि अलग-अलग दो-जज की बेंचों के फैसले एक-दूसरे से उलट हैं। केंद्र सरकार ने सवाल उठाया कि क्या </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बेल नियम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जेल अपवाद है</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">वाला सिद्धांत आतंकवाद जैसे गंभीर मामलों में भी लागू होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर ट्रायल में देरी हो रही हो</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने 26/11 मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब और लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद का उदाहरण दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू और वकील रजत नायर ने कोर्ट में कहा</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">अगर अजमल कसाब 7-8 साल जेल में रहने के बाद बेल मांगता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या उसे बेल दे देते</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सैकड़ों गवाह हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सबूत इकट्ठा करने में समय लगता है। इसी तरह अगर हाफिज सईद पाकिस्तान से आकर ट्रायल में 5 साल जेल में रह जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या सिर्फ देरी के आधार पर उसे बेल दे देंगे</span>?' <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का कहना है कि हर केस के तथ्यों को देखकर बेल देनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि सिर्फ जेल में कितना समय बीता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस आधार पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह फ़ैसला आने वाले समय में आतंकवाद और यूएपीए से जुड़े सभी जमानत मामलों पर असर डालेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए जमानत क़ानून को और साफ़ करने के लिए बड़े फ़ैसले की तैयारी कर ली है। दो आरोपियों को राहत मिल गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उमर खालिद समेत बड़े सवाल अब बड़ी बेंच के सामने हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक अन्य मामले में  सीजेआई सूर्यकांत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने  अन्य बातों के अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साढ़े चार साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने आज जम्मू-कश्मीर के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी साज़िश</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले में यूएपीए के आरोपी सुहैल अहमद ठोकर को ज़मानत दे दी।पीठ ने यह भी कहा कि अगर अपीलकर्ता चल रहे मुक़दमे में सहयोग करने में नाकाम रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसे दी गई राहत का दुरुपयोग माना जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">खास बात यह है कि कोर्ट ने पहले समय-समय पर आदेश जारी किए थे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि याचिकाकर्ता के खिलाफ गवाही देने वाले अहम/सुरक्षित गवाह बिना किसी डर के अपने बयान दर्ज करा सकें (याचिकाकर्ता की रिहाई से पहले)। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज की सुनवाई के दौरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने बताया कि हालांकि कुछ अहम/सुरक्षित गवाहों की जांच अभी बाकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनके बयान सह-आरोपी की भूमिका से जुड़े हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि याचिकाकर्ता से।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह देखते हुए कि कुछ सह-आरोपियों को ज़मानत मिल चुकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कि मुक़दमे के पूरा होने में समय लग सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हिरासत में पहले ही बिताई जा चुकी अवधि को ध्यान में रखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने याचिकाकर्ता को ज़मानत दे दी। ज़मानत बांड संबंधित </span>NIA <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमा करने का निर्देश दिया गया। उक्त अदालत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">याचिकाकर्ता की संबंधित पुलिस थाने में उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी मर्ज़ी के अनुसार शर्तें लगाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके वकील के अनुरोध पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने याचिकाकर्ता को </span>NIA <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत से वर्चुअली (सह-आरोपियों की तरह) पेश होने की अनुमति मांगने की भी छूट दी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">इस अनुरोध पर अदालत द्वारा कानून के अनुसार विचार किया जाएगा। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> बड़ी साज़िश का मास्टरमाइंड विभिन्न आतंकवादी संगठनों के बड़े नेता थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें लश्कर-ए-तैयबा (</span>LeT), <span lang="hi" xml:lang="hi">हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन (</span>HM), <span lang="hi" xml:lang="hi">अल-बद्र और पाकिस्तान में मौजूद अन्य संगठन शामिल थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चार्जशीट में आगे आरोप लगाया गया है कि यह साज़िश अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद रची गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका मकसद जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ भारत के अन्य हिस्सों में भी आतंकवाद की घटनाओं को फिर से भड़काना था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य एजेंसी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आतंकवादी समूह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान में मौजूद अपने मददगारों और नेताओं के साथ-साथ भारत के भीतर मौजूद अपने ओवर-ग्राउंड वर्करों (</span>OGWs) <span lang="hi" xml:lang="hi">के सहयोग से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आसानी से प्रभावित होने वाले स्थानीय युवाओं को अपने प्रभाव में लेने और उन्हें कट्टरपंथी बनाने में शामिल थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि उन्हें आतंकवाद की घटनाओं में शामिल होने के लिए भर्ती और प्रशिक्षित किया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">STF <span lang="hi" xml:lang="hi">ने बताया कि यह गैंग केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सचिवालय सुरक्षा बल और  ब राइफल्स की भर्ती परीक्षाओं में धांधली कर रहा था. आरोपियों ने ऑनलाइन परीक्षा सिस्टम को तकनीकी तरीके से प्रभावित कर उम्मीदवारों तक सही जवाब पहुंचाने की व्यवस्था बना रखी थी. बताया गया कि प्रत्येक उम्मीदवार से परीक्षा पास कराने के लिए करीब 4 लाख रुपये वसूले जाते थे.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सीधे </span>SSC <span lang="hi" xml:lang="hi">के सर्वर को हैक नहीं किया था. इसके बजाय परीक्षा केंद्र पर प्रॉक्सी सर्वर इंस्टॉल किया गया था. स्क्रीन शेयरिंग एप्लिकेशन के जरिए प्रश्नपत्र बाहर बैठे सॉल्वरों तक पहुंचाया जाता था. वहां से सवाल हल कर उम्मीदवारों को सही जवाब भेजे जाते थे.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस ने बताया कि अरुण कुमार तकनीकी काम संभालता था और वही प्रॉक्सी सर्वर सिस्टम को ऑपरेट करता था. </span>STF <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है. एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इसी तरीके का इस्तेमाल अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी किया गया था.</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:29:21 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बंगाल में उन सीटों पर पुनर्मतदान हो जहां जीत का अंतर हटाए गए वोटों की संख्या से कम है: कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में उन सीटों पर फिर से मतदान कराया जाना चाहिए जहां जीत का अंतर एसआईआर के तहत मतदाता सूची से हटाए गए वोटों की संख्या से कम है। खेड़ा ने यह उम्मीद भी जताई कि उच्चतम न्यायालय इस मामले का संज्ञान लेगा और न्याय करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस लड़ाई में ‘इंडिया’ गठबंधन तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के साथ खड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में बीजेपी पर बड़े पैमाने पर जनादेश की चोरी करने,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178551/re-polling-should-be-held-in-bengal-on-those-seats-where"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/tasuezpp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में उन सीटों पर फिर से मतदान कराया जाना चाहिए जहां जीत का अंतर एसआईआर के तहत मतदाता सूची से हटाए गए वोटों की संख्या से कम है। खेड़ा ने यह उम्मीद भी जताई कि उच्चतम न्यायालय इस मामले का संज्ञान लेगा और न्याय करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस लड़ाई में ‘इंडिया’ गठबंधन तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के साथ खड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में बीजेपी पर बड़े पैमाने पर जनादेश की चोरी करने, 100 से अधिक सीटों पर परिणामों में हेरफेर करने का आरोप है। यह संस्थागत चुनावी लूट है। लोकतांत्रिक संकट के इस निर्णायक क्षण में ‘इंडिया’ गठबंधन स्पष्ट रूप से ममता बनर्जी के साथ खड़ा है। ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने का उनका संकल्प सुनियोजित हेराफेरी के खिलाफ संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा को दर्शाता है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, "...ज़रा उनके टूलकिट पर नज़र डालिए: पहले कीचड़ फैलाया जाता है; फिर कमल खिलता है। अगर आप और मैं सही समय पर नहीं जागे तो ठीक यही होगा।" खेड़ा ने आगे कहा, "...इलेक्शन कमीशन का काम था कि इस कीचड़ को फैलने से रोके, हेट स्पीच का सख्ती से जवाब दे, एक्शन ले, और शिकायतों पर ध्यान दे। इसके बजाय, खुद उसी कीचड़ में लोटकर, इलेक्शन कमीशन ने डेमोक्रेसी को तार-तार कर दिया है।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन इसको लेकर एकमत है कि पश्चिम बंगाल में जो कुछ हुआ वह चुनाव परिणाम नहीं है, बल्कि हेरफेर के माध्यम से थोपा गया एक मनगढ़ंत जनादेश है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जैसे महाराष्ट्र में लक्षित करके लाखों वोट जोड़े गए थे, वैसे ही पश्चिम बंगाल और असम में 'टारगेट' कर लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में जिन मतदाताओं को वोट के अधिकार से वंचित रखा गया, उन सीटों पर जीत का अंतर एसआईआर के तहत हटाए गए वोटों की संख्या से कम है। यानी सबकुछ सामने है, दूध का दूध और पानी का पानी।’’ खेड़ा ने कहा, ‘‘ऐसे में हमें लगता है कि उन सीटों पर दोबारा मतदान होना चाहिए, क्योंकि इनमें से बहुत से लोग अभी भी वोट के अधिकार का इंतजार कर रहे हैं। हमें उच्चतम न्यायालय पर पूरा भरोसा है कि वो संविधान को ध्यान में रखते हुए न्याय करेगा।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 22:14:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के फैसले पर रोक लगा दी है। यह मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा ने यह एफआईआर दर्ज कराई थी।पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को रिंकी भुइयां सरमा पर तीन आलग-अलग देशों का पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चांदुरकर की बेंच ने पवन खेड़ा और अन्य लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176303/supreme-court-bans-anticipatory-bail-of-pawan-kheda"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/114185-pawan-khera-supreme-court.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के फैसले पर रोक लगा दी है। यह मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा ने यह एफआईआर दर्ज कराई थी।पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को रिंकी भुइयां सरमा पर तीन आलग-अलग देशों का पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चांदुरकर की बेंच ने पवन खेड़ा और अन्य लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी।सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ असम सरकार द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया।असम सरकार की ओर से पेश होते हुए भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि पवन खेड़ा की याचिका में इस बात का कोई जिक्र नहीं था कि तेलंगाना में यह अधिकार क्षेत्र कैसे बनता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तुषार मेहता ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट इस तथ्य को नजरअंदाज कर गया कि इनमें से एक अपराध के लिए अधिकतम 10 साल की जेल की सजा का प्रावधान है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा की तरफ से पेश किए गए नोट में बताया गया था कि उनकी पत्नी हैदराबाद में रहती हैं। लेकिन सॉलिसिटर जनरल ने इसके खिलाफ दलील दी कि उनकी पत्नी के आधार कार्ड में उन्हें दिल्ली का निवासी दिखाया गया है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अगर ऐसा है, तो कोई भी व्यक्ति पूरे देश में कहीं भी प्रॉपर्टी खरीद सकता है और अपनी पसंद की जगह से अग्रिम जमानत मांग सकता है। उन्होंने कहा कि यह 'फोरम-शॉपिंग' है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 'प्रिया इंदोरिया' मामले में अपने फैसले में ऐसी हरकतों को गलत ठहराया था।सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह प्रक्रिया का पूरी तरह से दुरुपयोग है। उन्होंने यह नहीं बताया है कि वह असम क्यों नहीं जा सकते।  सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि याचिका में उन्होंने यह भी नहीं कहा है कि उनकी पत्नी की हैदराबाद में कोई संपत्ति है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश से हैरान हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत की अवधि बढ़ाने के लिए एक अर्जी दाखिल की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">10 अप्रैल को तेलंगाना हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा को कुछ शर्तों के साथ एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। पवन खेड़ा के खिलाफ केस गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। यह एफआईआर पवन खेड़ा की 5 अप्रैल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों के आधार पर दर्ज की गई थी। पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया था कि सीएम हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं। साथ ही विदेशों में उनकी प्रॉपर्टी है। सीएम हिमंत ने चुनावी हलफनामे में इन तथ्यों के बारे में जानकारी नहीं दी है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 21:23:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>यह डरावना है कि 7.95 लाख से ज़्यादा एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं 6 महीने से ज़्यादा समय से लंबित हैं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पाया कि पूरे देश में लगभग 8 लाख एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जो छह महीने से ज़्यादा पुरानी हैं। इस स्थिति को "बहुत डरावना और निराशाजनक" बताया। कोर्ट ने कहा, "आज की तारीख़ में स्थिति बहुत डरावनी और निराशाजनक लगती है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि आज की तारीख़ में पूरे देश में 7,95,981 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जो छह महीने पुरानी हैं।" </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वे एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के जल्द निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176301/it-is-scary-that-more-than-795-lakh-execution-petitions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/supream-court4.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पाया कि पूरे देश में लगभग 8 लाख एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जो छह महीने से ज़्यादा पुरानी हैं। इस स्थिति को "बहुत डरावना और निराशाजनक" बताया। कोर्ट ने कहा, "आज की तारीख़ में स्थिति बहुत डरावनी और निराशाजनक लगती है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि आज की तारीख़ में पूरे देश में 7,95,981 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जो छह महीने पुरानी हैं।" </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वे एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के जल्द निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई व्यवस्था के बारे में उन्हें जानकारी दें।कोर्ट ने आदेश दिया, "अगली सुनवाई की तारीख़, यानी 07.10.2026 तक, हर हाईकोर्ट हमें संक्षेप में बताएगा कि एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के प्रभावी और जल्द निपटारे के लिए उन्होंने क्या व्यवस्था बनाई या अपने-अपने ज़िला न्यायालयों को किस तरह के निर्देश जारी किए।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट ऐसे मामलों के समय-सीमा के भीतर निपटारे के लिए दिए गए अपने निर्देशों के पालन की निगरानी कर रहा था। 16 अक्टूबर, 2025 तक पूरे देश में 8.82 लाख से ज़्यादा एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित थीं। उस समय कोर्ट ने इन आंकड़ों को बेहद निराशाजनक और चिंताजनक बताया था। हाईकोर्ट से छह महीने के भीतर निपटारा सुनिश्चित करने और प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाने का आग्रह किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने ताज़ा आदेश में कोर्ट ने पाया कि निपटारे में प्रगति के बावजूद, लंबित मामलों की संख्या अभी भी बहुत ज़्यादा है। कोर्ट ने पाया कि मौजूदा आंकड़े दिखाते हैं कि 7,95,981 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं अभी भी छह महीने से ज़्यादा समय से लंबित हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट ने पाया कि 6 मार्च, 2025 से जब उसने एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के समय-सीमा के भीतर निपटारे का निर्देश दिया था, तब से 10 अप्रैल, 2026 तक कुल 7,69,731 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं का फ़ैसला किया गया और उनका निपटारा किया गया। इसमें 6 मार्च, 2025 के निर्देशों के बाद पहले चरण में निपटाए गए 3,38,685 मामले और 16 अक्टूबर, 2025 के बाद निपटाए गए 4,31,046 अन्य मामले शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट ने राज्य-वार आंकड़ों पर प्रकाश डाला, जो यह दिखाते हैं कि मामले अभी भी लंबित हैं। उत्तर प्रदेश में 26,943 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें से 3,057 मामलों में कार्यवाही ऊपरी अदालतों द्वारा रोक दी गई। महाराष्ट्र में, 3,95,960 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें से 11,966 मामलों पर रोक लगी हुई है। पश्चिम बंगाल में 28,192 लंबित एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं में से 1,008 मामलों में कार्यवाही पर रोक है। मध्य प्रदेश में, 50,579 लंबित एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं में से 2,537 मामले रोक के अंतर्गत हैं</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट  ने इलाहाबाद हाईकोर्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट, कलकत्ता हाईकोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वे उन मामलों की जांच करें, जिनमें कार्यवाही पर रोक लगी हुई और यह सुनिश्चित करें कि ऐसे मामलों को जल्द-से-जल्द उठाया जाए ताकि एग्ज़ीक्यूशन की कार्यवाही में देरी न हो। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 21:19:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>'हरियाणा पुलिस ने 4 साल की बच्ची के रेप केस में आरोपी को बचाने की कोशिश की': सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी बनाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची के रेप के मामले में जांच को भटकाने के लिए हरियाणा पुलिस को कड़ी फटकार लगाई, और जांच अपने हाथ में लेने के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाई। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने अपराध की गंभीरता को कम करने की कोशिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा (पाक्सो) एक्ट की धारा 6 के तहत 'गंभीर यौन हमला' के अपराध का संकेत देने वाले शुरुआती सबूत मौजूद थे, फिर भी पुलिस ने FIR सिर्फ धारा 10 के तहत 'गंभीर यौन हमला' के लिए दर्ज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174304/haryana-police-tried-to-save-the-accused-in-the-rape"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/supream-court5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची के रेप के मामले में जांच को भटकाने के लिए हरियाणा पुलिस को कड़ी फटकार लगाई, और जांच अपने हाथ में लेने के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाई। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने अपराध की गंभीरता को कम करने की कोशिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा (पाक्सो) एक्ट की धारा 6 के तहत 'गंभीर यौन हमला' के अपराध का संकेत देने वाले शुरुआती सबूत मौजूद थे, फिर भी पुलिस ने FIR सिर्फ धारा 10 के तहत 'गंभीर यौन हमला' के लिए दर्ज की, जो कि एक कम गंभीर अपराध है।कोर्ट ने कहा, "यह एक ऐसा साफ मामला है, जिसमें पुलिस ने आरोपी को बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की है।"</p>
<p style="text-align:justify;">"कमिश्नर से लेकर सब-इंस्पेक्टर तक, पूरी पुलिस फोर्स ने यह साबित करने की हर कोशिश की कि बच्ची के पास कोई सबूत नहीं है या उसके माता-पिता की बातों में कोई दम नहीं है। रिकॉर्ड में इस बात की कोई गुंजाइश नहीं है कि पाक्सो की धारा 6 के तहत कोई अपराध नहीं हुआ था। हालांकि, पुलिस ने FIR दर्ज की, लेकिन कुछ अज्ञात कारणों से अपराध को धारा 10 के तहत कम गंभीर बना दिया।"</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक एसआईटी का गठन किया है, जिसमें हरियाणा कैडर की आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया गया है।सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि जल्द से जल्द एसआईटी को नोटिफाई किया जाए और गुरुग्राम पुलिस को गुरुवार तक जांच से जुड़े दस्तावेज एसआईटी को सौंपने का निर्देश दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 20:49:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>IMA के अध्यक्ष डॉ. अशोकन को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, बाबा रामदेव को राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी द्वारा बनाई गई दवाओं के भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित एक मामले में पतंजलि आयुर्वेद के प्रमोटर योग गुरु रामदेव और प्रबंध निदेशक (एमडी) बालकृष्ण के खिलाफ फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत ने उन्हें उन दवाओं के विज्ञापनों को वापस लेने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में हलफनामा दायर करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। इसके साथ ही कोर्ट की तरफ से उन्हें फिलहाल व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कोर्ट के आदेश पर प्रेस को इंटरव्यू देने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ.</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141275/supreme-court-reprimands-ima-president-dr-ashokan-relief-to-baba"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/109337821.webp" alt=""></a><br /><p>सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी द्वारा बनाई गई दवाओं के भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित एक मामले में पतंजलि आयुर्वेद के प्रमोटर योग गुरु रामदेव और प्रबंध निदेशक (एमडी) बालकृष्ण के खिलाफ फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत ने उन्हें उन दवाओं के विज्ञापनों को वापस लेने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में हलफनामा दायर करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। इसके साथ ही कोर्ट की तरफ से उन्हें फिलहाल व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कोर्ट के आदेश पर प्रेस को इंटरव्यू देने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ. अशोकन को फटकार भी लगाई। अदालत ने कहा कि डॉ. अशोकन की हरकतें पतंजलि की तरह हैं और उन्होंने एसोसिएशन के 3.5 लाख डॉक्टरों के लिए स्थापित उदाहरण पर चिंता व्यक्त की।</p>
<p>इससे पहले, पतंजलि के वकीलों ने अदालत को सूचित किया कि कंपनी ने अपने उत्पादों के बारे में झूठे दावे करने वाले विज्ञापनों पर अखबारों में 322 बार माफी मांगी है। अदालत ने प्रबंधन के रवैये में उल्लेखनीय सुधार को स्वीकार किया और रामदेव और बालकृष्ण के नाम वाली माफी की सराहना की।</p>
<p>पिछली सुनवाई में अदालत ने कंपनी के विज्ञापनों की तुलना में सार्वजनिक माफी के आकार पर सवाल उठाया था और जानबूझकर अवज्ञा का हवाला देते हुए उनकी माफी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने 2018 से हरिद्वार के सभी जिला आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारियों को उनके द्वारा की गई कार्रवाई प्रस्तुत करने का आदेश दिया।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 May 2024 16:01:15 +0530</pubDate>
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