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                <title>pm modi news - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>नरेंद्र मोदी के नाम दर्ज होने जा रहा एक नया रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। यहाँ जनता समय</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर अपने नेताओं का चयन करती है और सत्ता परिवर्तन के माध्यम से लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाती है। स्वतंत्रता के बाद से देश ने अनेक प्रधानमंत्रियों को देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ नेता ऐसे रहे जिन्होंने केवल शासन नहीं किया बल्कि भारतीय राजनीति की दिशा और स्वरूप को भी गहराई से प्रभावित किया। जवाहर लाल नेहरू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के बाद यदि किसी प्रधानमंत्री ने सबसे अधिक प्रभाव छोड़ा है तो वह नरेंद्र मोदी हैं। </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>2026</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180808/a-new-record-is-going-to-be-registered-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/178054939444.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। यहाँ जनता समय</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर अपने नेताओं का चयन करती है और सत्ता परिवर्तन के माध्यम से लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाती है। स्वतंत्रता के बाद से देश ने अनेक प्रधानमंत्रियों को देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ नेता ऐसे रहे जिन्होंने केवल शासन नहीं किया बल्कि भारतीय राजनीति की दिशा और स्वरूप को भी गहराई से प्रभावित किया। जवाहर लाल नेहरू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के बाद यदि किसी प्रधानमंत्री ने सबसे अधिक प्रभाव छोड़ा है तो वह नरेंद्र मोदी हैं। </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> का दिन इसी कारण राजनीतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसे रिकॉर्ड के साथ चर्चा के केंद्र में होंगे जो भारतीय राजनीति में उनके लंबे और प्रभावशाली सफर का प्रतीक माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नरेंद्र मोदी ने पहली बार </span>26<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उस समय भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत प्राप्त किया था। यह जीत इसलिए ऐतिहासिक थी क्योंकि लगभग </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों बाद किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत मिला था। उस दौर में देश भ्रष्टाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक सुस्ती और राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दों से जूझ रहा था। जनता एक ऐसे नेतृत्व की तलाश में थी जो निर्णायक दिखाई दे और देश को नई दिशा दे सके। नरेंद्र मोदी ने विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन और मजबूत नेतृत्व के नारों के साथ चुनाव अभियान चलाया और जनता ने उन्हें भारी समर्थन दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> की जीत केवल एक चुनावी विजय नहीं थी बल्कि भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत थी। लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहने वाली कांग्रेस पार्टी पहली बार इतनी कमजोर स्थिति में पहुँच गई। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय राजनीति की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी। नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व इस परिवर्तन का मुख्य केंद्र बन गया। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पहचान पहले से ही एक विकासवादी नेता की बन चुकी थी और उसी छवि को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार मिला।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके बाद </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> का लोकसभा चुनाव आया। सामान्यतः किसी सरकार के </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों के बाद सत्ता विरोधी लहर देखी जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पहले से भी अधिक सीटें जीत लीं। इस विजय ने यह स्पष्ट कर दिया कि मोदी केवल एक लोकप्रिय नेता नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व बन चुके हैं। </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> की जीत के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद </span>370<span lang="hi" xml:lang="hi"> हटाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तीन तलाक कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनकी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए जिनका व्यापक राजनीतिक प्रभाव पड़ा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। लगातार तीन बार सत्ता में लौटना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आसान नहीं होता। इसके लिए केवल चुनावी रणनीति ही नहीं बल्कि व्यापक जनसमर्थन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत संगठन और प्रभावी नेतृत्व की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि मोदी की तीसरी पारी को भारतीय राजनीति के बड़े घटनाक्रमों में गिना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन को लेकर चर्चा इसलिए तेज है क्योंकि वे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री बने रहने वाले नेताओं की सूची में और अधिक मजबूत स्थिति प्राप्त करेंगे। भारतीय राजनीति में लंबे कार्यकाल का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि लोकतंत्र में जनता हर चुनाव में सरकार को बदलने का अधिकार रखती है। ऐसे में यदि कोई नेता लगातार वर्षों तक जनता का समर्थन बनाए रखता है तो यह उसकी राजनीतिक क्षमता और जनस्वीकार्यता को दर्शाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू लगभग </span>16<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष </span>286<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन तक लगातार प्रधानमंत्री रहे। यह रिकॉर्ड आज भी सबसे लंबा लगातार प्रधानमंत्रित्व माना जाता है। नेहरू ने </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> से लेकर </span>27<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई </span>1964<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक देश का नेतृत्व किया। उनके सामने विभाजन की त्रासदी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक कमजोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्थाओं के निर्माण और अंतरराष्ट्रीय पहचान जैसी अनेक चुनौतियाँ थीं। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव मजबूत करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सार्वजनिक क्षेत्र के विकास और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का प्रयास किया। आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी ओर नरेंद्र मोदी ऐसे समय में प्रधानमंत्री बने जब भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका था। उनके सामने चुनौती थी कि भारत को आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामरिक और तकनीकी दृष्टि से और अधिक शक्तिशाली बनाया जाए। मोदी ने राष्ट्रवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक पहचान और मजबूत नेतृत्व को अपनी राजनीति का मुख्य आधार बनाया। उन्होंने विदेश नीति में भी सक्रियता दिखाई। अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फ्रांस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जापान और खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों को नई गति मिली। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली दिखाई देने लगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी सरकार के दौरान अनेक कल्याणकारी योजनाएँ भी शुरू की गईं। जन धन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोले गए। उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। आयुष्मान योजना के जरिए गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने का प्रयास हुआ। स्वच्छ भारत अभियान ने स्वच्छता को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया। कोरोना महामारी के दौरान मुफ्त राशन योजना ने करोड़ों लोगों को राहत दी। इन योजनाओं ने गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के बीच मोदी सरकार की लोकप्रियता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि विपक्ष लगातार सरकार की आलोचना भी करता रहा है। बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि संकट और सामाजिक तनाव जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की गई। कई विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक असमानता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराना आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे कठिन कार्यों में से एक होगा। किसान आंदोलन ने भी यह दिखाया कि बड़े जनसमूह सरकार की नीतियों का विरोध कर सकते हैं। लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद नरेंद्र मोदी की राजनीतिक लोकप्रियता लंबे समय तक बनी रही।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक शक्ति भी मोदी की सफलता का एक बड़ा कारण रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा का विशाल कार्यकर्ता तंत्र बूथ स्तर तक सक्रिय रहता है। चुनाव प्रबंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रचार अभियान और मतदाताओं तक सीधा संपर्क भाजपा की विशेषता बन चुके हैं। इसके अलावा विपक्ष की एकजुटता की कमी ने भी भाजपा को लाभ पहुँचाया। कई राज्यों में विपक्षी दल आपसी मतभेदों के कारण मजबूत चुनौती प्रस्तुत नहीं कर सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक राजनीति में संचार माध्यमों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। नरेंद्र मोदी ने डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया। सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता ने उन्हें युवाओं और नए मतदाताओं से सीधे जोड़ने में सहायता की। रेडियो कार्यक्रमों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीडियो संदेशों और विशाल जनसभाओं के माध्यम से उन्होंने लगातार जनता के साथ संवाद बनाए रखा। यह शैली पहले के प्रधानमंत्रियों से अलग मानी जाती है। नेहरू के समय में संचार के साधन सीमित थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि आज राजनीति का बड़ा हिस्सा डिजिटल मंचों पर भी संचालित होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास केवल आँकड़ों से नहीं बनता बल्कि जनमानस की स्मृतियों से भी बनता है। जवाहर लाल नेहरू को आधुनिक भारत की संस्थाओं के निर्माण के लिए याद किया जाता है। इंदिरा गांधी को निर्णायक नेतृत्व और राजनीतिक साहस के लिए जाना जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी को संवाद और सहमति की राजनीति का प्रतीक माना जाता है। नरेंद्र मोदी की छवि एक ऐसे नेता की बनी है जिसने भारतीय राजनीति को अत्यधिक केंद्रीकृत नेतृत्व की दिशा दी और राष्ट्रवाद को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में स्थापित किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह दिन भारतीय राजनीति में नेतृत्व की निरंतरता और बदलते जनादेश दोनों का प्रतीक बन रहा है। लोकतंत्र में लंबे समय तक सत्ता में बने रहना असाधारण उपलब्धि माना जाता है। यह केवल चुनावी जीत नहीं बल्कि जनता के विश्वास का संकेत भी होता है। नरेंद्र मोदी के समर्थक इसे मजबूत नेतृत्व की विजय मानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि आलोचक इसे भारतीय राजनीति में व्यक्तित्व आधारित राजनीति के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखते हैं। लेकिन दोनों पक्ष इस बात से सहमत दिखाई देते हैं कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारतीय राजनीति का केंद्र नरेंद्र मोदी ही रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य में इतिहास नरेंद्र मोदी के कार्यकाल का मूल्यांकन कई आधारों पर करेगा। आर्थिक विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक समरसता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेश नीति की उपलब्धियाँ और आम नागरिक के जीवन में आए बदलाव इन सबके आधार पर उनके शासन को परखा जाएगा। यदि आने वाले वर्षों में भारत आर्थिक और तकनीकी शक्ति के रूप में और मजबूत होता है तो मोदी के कार्यकाल को विशेष महत्व दिया जाएगा। वहीं यदि बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई और सामाजिक असंतोष जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं तो आलोचनाएँ भी तेज होंगी। यही लोकतंत्र की विशेषता है कि किसी भी नेता का अंतिम मूल्यांकन इतिहास और जनता दोनों मिलकर करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रकार </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल एक तारीख नहीं बल्कि भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण दौर का प्रतीक बनने जा रही है। यह दिन उस राजनीतिक यात्रा की याद दिलाता है जिसमें एक साधारण परिवार से निकला व्यक्ति देश का सबसे प्रभावशाली नेता बनता है और लगातार वर्षों तक सत्ता में बना रहता है। नेहरू से मोदी तक की यह यात्रा भारतीय लोकतंत्र की शक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनता के बदलते विश्वास और नेतृत्व की निरंतर बदलती परिभाषा को भी दर्शाती है। भारतीय राजनीति में रिकॉर्ड बनते और टूटते रहेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ क्षण ऐसे होते हैं जो इतिहास में स्थायी रूप से दर्ज हो जाते हैं। </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को लेकर चल रही चर्चा भी भारतीय लोकतंत्र के ऐसे ही एक ऐतिहासिक क्षण की ओर संकेत करती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:18:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सांसदों के 'अपमान' पर पीएम के ख़िलाफ़ प्रिविलेज नोटिस- ‘सत्ता का खुला दुरुपयोग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रिविलेज नोटिस यानी विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। विशेषाधिकार हनन का मतलब है कि संसद के सदस्य के अधिकारों का अपमान किया गया या गलत आरोप लगाया गया। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में सांसदों की स्वतंत्रता और ईमानदारी पर उंगली उठाई और उनकी वोटिंग पर गलत मंशा बताई, जो संसद के नियमों का साफ़-साफ़ उल्लंघन है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को यह नोटिस भेजा। नोटिस में कहा गया है कि प्रधानमंत्री का 18 अप्रैल को राष्ट्र</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177021/privilege-notice-against-pm-for-insulting-mps-blatant-abuse"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(2)6.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रिविलेज नोटिस यानी विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। विशेषाधिकार हनन का मतलब है कि संसद के सदस्य के अधिकारों का अपमान किया गया या गलत आरोप लगाया गया। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में सांसदों की स्वतंत्रता और ईमानदारी पर उंगली उठाई और उनकी वोटिंग पर गलत मंशा बताई, जो संसद के नियमों का साफ़-साफ़ उल्लंघन है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को यह नोटिस भेजा। नोटिस में कहा गया है कि प्रधानमंत्री का 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम 29 मिनट का संबोधन 'सत्ता का खुला दुरुपयोग' है और यह संसद की गरिमा को ठेस पहुँचाता है।लोकसभा में 17 अप्रैल को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पर वोटिंग हुई। यह विधेयक महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण जल्द लागू करने और लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने से जुड़ा था। लेकिन इसे दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला। 528 सांसदों में से 298 ने पक्ष में और 230 ने विपक्ष में वोट किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत ज़रूरी दो-तिहाई बहुमत न मिलने से विधेयक पास नहीं हो सका। इसके अगले दिन यानी 18 अप्रैल की रात प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दलों पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों की ‘भ्रूण हत्या’ कर दी है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने संकीर्ण राजनीति के कारण महिलाओं के सपनों को कुचल दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस प्रिविलेज नोटिस को एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है, 'मेरे लोकसभा में वरिष्ठ सहयोगी के.सी. वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। प्रधानमंत्री ने लोकसभा में अपनी बुरी योजना के विफल होने के बाद राष्ट्र के नाम संबोधन दिया था। उन्हें इस हार की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। हार की वजह थी- पूरे विपक्ष का एकजुट होकर साथ खड़ा होना। प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को संबोधन हमेशा सिर्फ देश की एकता और लोगों में विश्वास बढ़ाने के लिए ही दिया जाता रहा है। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में खुलेआम पक्षपातपूर्ण और भड़काऊ भाषण दिया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर 59 बार अलग-अलग हमले किए। यह उनके प्रधानमंत्री काल पर एक और स्थायी दाग होगा।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">के.सी. वेणुगोपाल ने नोटिस में लिखा, 'प्रधानमंत्री ने विपक्षी सांसदों के वोटिंग पैटर्न पर सीधा टिप्पणी की और उनकी मंशा पर सवाल उठाया। सांसदों पर यह कहना कि उन्होंने संविधान की रक्षा नहीं की, बल्कि महिलाओं के साथ अन्याय किया– यह सांसदों की स्वतंत्रता और ईमानदारी पर अस्पष्ट टिप्पणी है।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने आगे कहा, 'संसद की पुरानी परंपरा और अनुच्छेद 105 के तहत किसी भी सदस्य के आचरण या वोटिंग पर बाहर से टिप्पणी नहीं की जा सकती है, खासकर प्रधानमंत्री जैसे उच्च पद वाले व्यक्ति द्वारा। यह संसद की गरिमा और सांसदों के स्वतंत्र रूप से काम करने के अधिकार का उल्लंघन है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:11:46 +0530</pubDate>
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                <title>काशी में पीएम मोदी और योगी के रोड शो से लोगों की उमड़ी भीड़ </title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मौजूदा सांसद और वाराणसी से उम्मीदवार ने अपने रोड शो की पूर्व संध्या पर पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह तब हुआ पीएम मोदी मंगलवार को चल रहे लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए वाराणसी में भारी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक एकत्र हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के लंका चौक से अपना रोड शो शुरू किया। उनके साथ उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद हैं। </p>
<p>पीएम मोदी वाराणसी से मौजूदा सांसद और उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141233/crowd-of-people-gathered-due-to-pm-modi-and-yogis"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/pm-modi_large_1724_8.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मौजूदा सांसद और वाराणसी से उम्मीदवार ने अपने रोड शो की पूर्व संध्या पर पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह तब हुआ पीएम मोदी मंगलवार को चल रहे लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए वाराणसी में भारी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक एकत्र हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के लंका चौक से अपना रोड शो शुरू किया। उनके साथ उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद हैं। </p>
<p>पीएम मोदी वाराणसी से मौजूदा सांसद और उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने यूपी पार्टी प्रमुख अजय राय को वाराणसी से मैदान में उतारा है। प्रधानमंत्री और वाराणसी के सांसद नरेन्द्र मोदी 14 मई को तीसरी बार वाराणसी से नामांकन करेंगे। यहां से उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है, बस देखना यह होगा कि जीत का अंतर कितना बड़ा होता है।</p>
<p>वाराणसी लोकसभा चुनाव की खास बात जहां प्रधानमंत्री मोदी की उम्मीदवारी है तो चर्चा इस बात की भी है कि पूरे देश में घूम-घूम कर मोदी को गाली देने वाले नेताओं की फौज में क्या कोई ऐसा नेता मौजूद नहीं हैं जो वाराणसी में आकर मोदी को चुनौती दे सके। </p>
<p>भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नामांकन के लिए चार प्रस्तावकों के नाम तय कर लिए हैं। इसमें सर्व प्रमुख नाम गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ का है। आचार्य गणेश्वर शास्त्री ने ही अयोध्या श्रीरामजन्मभूमि पर रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का मुहुर्त निकाला था। प्राण प्रतिष्ठा में मुख्य पुजारी भी थे।</p>
<p>पार्टी सूत्रों के अनुसार इसके अलावा दूसरा प्रस्तावक माझी समाज से तो एक पद्म अलंकृत विभूति को भी शामिल किया गया है। इसमें पद्मश्री डा. राजेश्वर आचार्य के नाम की चर्चा है। इसके अलावा प्रस्तावकों में एक महिला भी होंगी। इस दृष्टि से पद्मश्री डा. सोमा घोष का नाम भी सूची में माना जा रहा है। वैसे पूर्व कुलपति और पद्मश्री डा. सरोज चूड़ामणि गोपाल का नाम भी प्रमुखता में है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 May 2024 17:33:30 +0530</pubDate>
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