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                <title>जेपीएस किड्स प्ले पब्लिक स्कूल में मनाया गया 80 वा स्वतंत्रता दिवस</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>रायबरेली l गुरुबक्शगंज </strong>स्थित सीएस सी बाल विद्यालय ( *जेपीएस किड्स प्ले पब्लिक स्कूल*) में आज 80वा स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्षौल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय के संरक्षक अशोक शुक्ला , प्रबन्धक मोहित शुक्ला , डायरेक्टर रोहित शुक्ला तथा इस आयोजन में उपस्थित गुरुबक्सगंज थाना अध्यक्ष संजय सिंह जी साथ ही अन्य गणमान्य लोगों द्वारा झंडारोहण किया गया उसके पश्चात माता सरस्वती की पूजा अर्चना व वीर शहीदों को माल्यार्पण करते हुए इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्ले ग्रुप, नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी के बच्चों द्वारा विभिन्न प्रकार के नृत्य, देशभक्ति गीत, प्रस्तुत किए गए। अत्यंत उत्साह से भरकर</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185372/80th-independence-day-celebrated-at-jps-kids-play-public-school"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260815-wa0441.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>रायबरेली l गुरुबक्शगंज </strong>स्थित सीएस सी बाल विद्यालय ( *जेपीएस किड्स प्ले पब्लिक स्कूल*) में आज 80वा स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्षौल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय के संरक्षक अशोक शुक्ला , प्रबन्धक मोहित शुक्ला , डायरेक्टर रोहित शुक्ला तथा इस आयोजन में उपस्थित गुरुबक्सगंज थाना अध्यक्ष संजय सिंह जी साथ ही अन्य गणमान्य लोगों द्वारा झंडारोहण किया गया उसके पश्चात माता सरस्वती की पूजा अर्चना व वीर शहीदों को माल्यार्पण करते हुए इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्ले ग्रुप, नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी के बच्चों द्वारा विभिन्न प्रकार के नृत्य, देशभक्ति गीत, प्रस्तुत किए गए। अत्यंत उत्साह से भरकर बच्चों ने इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर को मनाया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विद्यालय के डायरेक्टर रोहित शुक्ला ने बताया कि प्रत्येक वर्ष इस राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस पर बच्चों द्वारा अनेकों प्रस्तुतियां दर्शाई जाती हैं जिसका उद्देश्य बच्चों को देश के बलिदानों तथा महापुरुषों के बारे में जानकारी देना है व सभी को 80वे स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कार्यक्रम में उपस्थित विद्यालय की प्रधानाचार्या छवि बाजपेई ने बताया कि यह दिन हमें स्वतंत्रता, समानता और न्याय का महत्व सिखाता है। हमारे संविधान ने हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की भी याद दिलाई है। प्रतियोगिताएं हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो हमें एक दिन ऊंचाइयों तक ले जाती है तथा स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी। साथ ही इस आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित विद्यालय की शिक्षिकाएं अर्चना,आस्था ,आकृति, हर्षिता, रेहा,सिमरन,दामिनी, पूजा शर्मा, भावना, किरन, पूजा दीक्षित,रंजना, नाजिया आदि समस्त स्टॉफ उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
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</div>
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<div class="WhmR8e"></div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 19:54:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>न्यू एंजिल्स स्कूल में सीबीएसई ईस्ट जोन बॉक्सिंग चैंपियनशिप का रंगारंग शुभारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">न्यू एंजिल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कटरा रोड में सीबीएसई ईस्ट जोन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 का भव्य शुभारंभ शनिवार को सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा ने किया। उद्घाटन समारोह में रंगारंग प्रस्तुतियों और मार्च पास्ट ने माहौल को देशभक्ति से भर दिया।चैंपियनशिप के लिए कल से ही उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड सहित 3 राज्यों की लगभग 400 बालिका खिलाड़ी विद्यालय पहुंचना शुरू हो गई थीं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीएसई ने इस चैंपियनशिप के सफल आयोजन के लिए ऑब्जर्वर के रूप में पुनेश सिंह, एनआईएस ,डीएवी पब्लिक स्कूल, देहरादून, उत्तराखंड तथा टेक्निकल डेलीगेट के रूप में सोमेश दुबे, कर्नलस ब्राइटलैंड पब्लिक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185370/colorful-inauguration-of-cbse-east-zone-boxing-championship-in-new"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260816-wa0146.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">न्यू एंजिल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कटरा रोड में सीबीएसई ईस्ट जोन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 का भव्य शुभारंभ शनिवार को सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा ने किया। उद्घाटन समारोह में रंगारंग प्रस्तुतियों और मार्च पास्ट ने माहौल को देशभक्ति से भर दिया।चैंपियनशिप के लिए कल से ही उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड सहित 3 राज्यों की लगभग 400 बालिका खिलाड़ी विद्यालय पहुंचना शुरू हो गई थीं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीएसई ने इस चैंपियनशिप के सफल आयोजन के लिए ऑब्जर्वर के रूप में पुनेश सिंह, एनआईएस ,डीएवी पब्लिक स्कूल, देहरादून, उत्तराखंड तथा टेक्निकल डेलीगेट के रूप में सोमेश दुबे, कर्नलस ब्राइटलैंड पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी को नियुक्त किया है।इस अवसर पर विद्यालय की चेयरपर्सन डॉ. शाहिदा ने कहा कि हमारे विद्यालय के लिए यह गर्व की बात है कि सीबीएसई ने हमें ईस्ट जोन बॉक्सिंग चैंपियनशिप की मेजबानी का अवसर दिया। खिलाड़ियों के लिए सभी खेल सुविधाएं, आवास और भोजन की उत्तम व्यवस्था की गई है। हमें उम्मीद है कि प्रतापगढ़ की धरती पर बालिकाएं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगी और क्षेत्र का नाम रोशन करेंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विद्यालय के प्रिंसिपल विपिन कुमार सोनी ने सभी आगंतुक खिलाड़ियों, कोच और अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि खेल से अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने बेटियों से खेल भावना से खेलने की अपील की।उद्घाटन के बाद हुए पहले मुकाबले में अंडर-17 वर्ग में आर्मी पब्लिक स्कूल, वाराणसी की हिमांशी पटेल का मुकाबला सी.एम.के.पी, कटिहार, बिहार की ध्रुवी सिंह से हुआ। रोमांचक मुकाबले में ध्रुवी सिंह विजेता घोषित हुईं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में स्कूल के प्रबंधन, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में खेल प्रेमी उपस्थित रहे। प्रतियोगिता कार्यक्रम अगले तीन दिन चलेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 19:51:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>एसजेएस लालगंज में हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया स्वतंत्रता दिवस </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, रायबरेली।</strong> शहर के बहु चर्चित अंग्रेजी माध्यम के अग्रणी शिक्षण संस्थान एसजेएस पब्लिक स्कूल लालगंज में बड़े ही हर्षोल्लास एवं धूमधाम से 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक अग्रज सिंह ने ध्वजारोहण किया तथा तथा राष्ट्रगान के साथ तिरंगे को सलामी दी। उन्होंने अपने संबोधन में आए हुए सभी अतिथियों, क्षेत्र वासियों व छात्र-छात्राओं को स्वतंत्रता दिवस की शुभ शुभकामनाएं दी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही यह भी बताया कि यह आजादी तभी सार्थक है जब हम सभी अपने कार्यों का दायित्व कर्तव्य निष्ठा व ईमानदारी के साथ पूर्ण करें। उन्होंने यह भी समझाने का प्रयास किया</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185367/independence-day-celebrated-with-enthusiasm-in-sjs-lalganj"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/17868885445532.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, रायबरेली।</strong> शहर के बहु चर्चित अंग्रेजी माध्यम के अग्रणी शिक्षण संस्थान एसजेएस पब्लिक स्कूल लालगंज में बड़े ही हर्षोल्लास एवं धूमधाम से 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक अग्रज सिंह ने ध्वजारोहण किया तथा तथा राष्ट्रगान के साथ तिरंगे को सलामी दी। उन्होंने अपने संबोधन में आए हुए सभी अतिथियों, क्षेत्र वासियों व छात्र-छात्राओं को स्वतंत्रता दिवस की शुभ शुभकामनाएं दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही यह भी बताया कि यह आजादी तभी सार्थक है जब हम सभी अपने कार्यों का दायित्व कर्तव्य निष्ठा व ईमानदारी के साथ पूर्ण करें। उन्होंने यह भी समझाने का प्रयास किया कि हम वर्तमान समय में सीमा में जाकर के अपने देश की सेवा तो नहीं कर सकते लेकिन हम जहां पर हैं वहां पर हम शिक्षा के माध्यम से अपने देश के सम्मान को साथ ही अपने जिले के सम्मान को बढ़ा सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हमें अपने जीवन में यह शपथ लेनी चाहिए कि हम वैसे ही सच्चे सिपाही बने जैसे कि मातृभूमि की रक्षा के लिए वीरों ने अपना बलिदान दिया।कार्यक्रम की इसी कड़ी में विद्यालय की प्रधानाचार्या अंजू सिंह ने अपने संदेश में समस्त नगर वासियों, आए हुए अतिथियों व छात्र-छात्राओं को स्वतंत्रता दिवस की शुभ शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर बच्चों ने बढ़-चढ़कर अनेक मनमोहक व देशभक्ति से प्रेरित करने वाले रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। जिससे समूचा विद्यालय प्रांगण देश भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। विद्यालय की अंग्रेजी शिक्षिका आरती सिंह ने विद्यालय में आए हुए सभी अतिथियों व छात्र-छात्राओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त छात्र-छात्राएं तथा शिक्षक उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 19:50:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा नेता नितेश शर्मा के नेतृत्व में भानपुर में उमड़ा जनसैलाब, निकाली भव्य ‘तिरंगा यात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर देश के प्रति प्रेम और एकता का संदेश देने के लिए भानपुर के उकड़ा हनुमान मंदिर से सोनहा बाजार तक भव्य ‘तिरंगा यात्रा’ का आयोजन भाजपा नेता नितेश शर्मा एवं लक्ष्मीकांत पांडेय पप्पू के संयुक्त संयोजन में किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह यात्रा बस्ती डुमरियागंज मार्ग पर उकड़ा से भानपुर कस्बा होते हुए सोनहा बाजार पहुंची, जहाँ जगह-जगह पर नागरिकों ने फूलों की वर्षा कर इसका स्वागत किया।  हाथों में तिरंगा थामे युवाओं और स्थानीय लोगों ने 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के गगनभेदी नारे लगाए, जिससे पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185363/people-gathered-in-bhanpur-under-the-leadership-of-bjp-leader"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260816-wa0042-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर देश के प्रति प्रेम और एकता का संदेश देने के लिए भानपुर के उकड़ा हनुमान मंदिर से सोनहा बाजार तक भव्य ‘तिरंगा यात्रा’ का आयोजन भाजपा नेता नितेश शर्मा एवं लक्ष्मीकांत पांडेय पप्पू के संयुक्त संयोजन में किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह यात्रा बस्ती डुमरियागंज मार्ग पर उकड़ा से भानपुर कस्बा होते हुए सोनहा बाजार पहुंची, जहाँ जगह-जगह पर नागरिकों ने फूलों की वर्षा कर इसका स्वागत किया।  हाथों में तिरंगा थामे युवाओं और स्थानीय लोगों ने 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के गगनभेदी नारे लगाए, जिससे पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आयोजकों ने बताया कि यह तिरंगा यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से हमारे अमर शहीदों के बलिदान को याद करने और देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने का संकल्प लेने के लिए किया गया सोनहा बाजार स्थित लोक निर्माण विभाग के डाकबंगले पर यात्रा के समापन पर आयोजित संक्षिप्त सभा में भाजपा नेता लक्ष्मीकांत पांडेय, नितेश शर्मा, सत्येंद्र शुक्ल जिप्पी, चंद्रभान गुप्ता, राकेश शर्मा, सुजीत सोनी, विजय तिवारी, राकेश उपाध्याय, रामनेवास गिरी, ओमप्रकाश शुक्ल, उमाकांत शुक्ल, मनोज पांडेय, प्रधान संघ अध्यक्ष सोनू मिश्र, इंद्रसेन उपाध्याय, सत्यप्रकाश मिश्र, अन्नू उपाध्याय, मिंडर भट्ट सहित अनेक वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा हमारी शान और देश के गौरव का प्रतीक है। सभी क्षेत्रवासियों से अपील की गई कि वे अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर गर्व के साथ तिरंगा फहराएं तथा राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। कार्यक्रम के अंत में सभी ने देश की एकता और सुरक्षा की शपथ ली।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 19:48:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>धमकी से नहीं चलेगा पानी का रिश्ता, पाकिस्तान को आतंकवाद का हिसाब देना होगा</title>
                                    <description><![CDATA[<div>पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर भारत को सिंधु जल समझौते के मुद्दे पर धमकी देने की कोशिश की है। उनका कहना है कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी में कोई कमी करने या उसे रोकने की कोशिश हुई तो पाकिस्तान इसका मुंहतोड़ जवाब देगा। साथ ही उन्होंने कश्मीर पर पाकिस्तान के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि इस मुद्दे पर उनका देश कभी पीछे नहीं हटेगा। अपने भाषण में उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की प्रशंसा करते हुए यह दावा भी किया कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने भारत को पराजित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185260/water-relations-will-not-work-through-threats-pakistan-will-have"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002151168.jpg" alt=""></a><br /><div>पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर भारत को सिंधु जल समझौते के मुद्दे पर धमकी देने की कोशिश की है। उनका कहना है कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी में कोई कमी करने या उसे रोकने की कोशिश हुई तो पाकिस्तान इसका मुंहतोड़ जवाब देगा। साथ ही उन्होंने कश्मीर पर पाकिस्तान के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि इस मुद्दे पर उनका देश कभी पीछे नहीं हटेगा। अपने भाषण में उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की प्रशंसा करते हुए यह दावा भी किया कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने भारत को पराजित किया। शहबाज शरीफ के इन बयानों से साफ है कि पाकिस्तान आज भी वास्तविकता को स्वीकार करने के बजाय धमकी, दुष्प्रचार और भावनात्मक नारों का सहारा लेकर अपनी जनता को भ्रमित करना चाहता है।</div><div><br /></div><div>सबसे बड़ा सवाल यह है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को आज अचानक सिंधु नदी का पानी इतना याद क्यों आ रहा है? क्या वे यह भूल गए हैं कि भारत ने दशकों तक एक अंतरराष्ट्रीय समझौते का सम्मान करते हुए पाकिस्तान को उसके हिस्से का पानी दिया? क्या वे यह भूल गए हैं कि भारत ने हमेशा यह माना कि पड़ोसी देशों के साथ संबंध केवल सीमा और सुरक्षा से नहीं, बल्कि मानवता, सहयोग और आपसी विश्वास से भी चलते हैं? लेकिन पाकिस्तान ने बार-बार उस विश्वास को चोट पहुंचाई है। जब पाकिस्तान की धरती से प्रशिक्षित आतंकवादी भारत में निर्दोष नागरिकों का खून बहाते हैं और उसके बाद पाकिस्तान पानी के सवाल पर भारत को धमकी देता है, तो यह उसकी दोहरी नीति का सबसे बड़ा उदाहरण बन जाता है।</div><div><br /></div><div>पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों को निशाना बनाकर की गई आतंकवादी घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। नाम पूछकर लोगों की हत्या करने जैसी अमानवीय घटना का दर्द केवल उन परिवारों का दर्द नहीं है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया। यह पूरे भारत की पीड़ा है। किसी व्यक्ति की मौत गोली से हो, आतंकवादी हमले में हो या किसी अन्य कारण से, उसके परिवार के लिए उसका दुख समान होता है। ऐसे में पाकिस्तान यदि आतंकवादियों को संरक्षण देने के आरोपों से स्वयं को अलग नहीं करता और दूसरी तरफ भारत से पानी की मांग भी धमकी के स्वर में करता है, तो उसके रवैये पर सवाल उठना स्वाभाविक है।</div><div><br /></div><div>सिंधु जल समझौता भारत की उदारता और दूरदर्शिता का भी प्रतीक रहा है। वर्ष 1960 में हुए इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के पानी का बंटवारा निर्धारित किया गया। पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज के पानी के उपयोग का अधिकार भारत को मिला, जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के लिए निर्धारित किया गया। इतने वर्षों तक भारत ने इस समझौते का सम्मान किया। लेकिन परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। जब कोई देश लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप झेलता है और भारत की सुरक्षा तथा नागरिकों को निशाना बनाने वाली गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तो भारत के सामने अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की समीक्षा करना स्वाभाविक है।</div><div><br /></div><div>पाकिस्तान को यह समझना होगा कि पानी कोई धमकी देकर हासिल करने वाली वस्तु नहीं है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में समझौते तभी मजबूत रहते हैं, जब उनके पीछे आपसी विश्वास और जिम्मेदारी की भावना हो। पाकिस्तान यदि भारत से अच्छे संबंध चाहता है तो उसे सबसे पहले आतंकवाद के मुद्दे पर गंभीरता दिखानी होगी। भारत के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वालों पर कार्रवाई करनी होगी और यह भरोसा पैदा करना होगा कि पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। केवल भाषण देने और भारत को धमकाने से दोनों देशों के बीच विश्वास पैदा नहीं हो सकता।</div><div><br /></div><div>कश्मीर को लेकर भी पाकिस्तान को वास्तविकता समझने की जरूरत है। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भारत अपनी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जितनी बार चाहें कश्मीर पर पुराने बयान दोहरा सकते हैं, लेकिन इससे जमीन पर वास्तविकता नहीं बदलेगी। कश्मीर के नाम पर दशकों तक आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति ने पाकिस्तान को क्या दिया, यह पाकिस्तान की आर्थिक और सामाजिक स्थिति देखकर समझा जा सकता है। यदि कश्मीर वास्तव में पाकिस्तान की चिंता का विषय है तो उसे आतंकवाद और हिंसा का रास्ता छोड़कर शांतिपूर्ण संबंधों की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।</div><div><br /></div><div>शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में चीन-पाकिस्तान दोस्ती को हिमालय से भी ऊंचा बताया। पाकिस्तान को यह समझ लेना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति भावनाओं पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों पर चलती है। चीन और पाकिस्तान के बीच भले ही रणनीतिक और आर्थिक संबंध हों, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि चीन भारत के साथ अपने व्यापक हितों को छोड़कर पाकिस्तान की हर नीति का समर्थन करेगा। चीन एक बड़ी आर्थिक शक्ति है और भारत भी विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक संबंधों का महत्व पाकिस्तान से कहीं अधिक व्यापक है। इसलिए केवल चीन का नाम लेकर भारत को धमकाने की कोशिश पाकिस्तान की कमजोर रणनीति को ही उजागर करती है।</div><div><br /></div><div>पाकिस्तान को यह भी समझना चाहिए कि किसी देश की शक्ति केवल हथियारों से तय नहीं होती। आर्थिक क्षमता, तकनीकी सामर्थ्य, राजनीतिक स्थिरता, कूटनीतिक प्रभाव, मजबूत संस्थाएं और जनता का विश्वास किसी राष्ट्र की वास्तविक ताकत बनते हैं। भारत इन सभी क्षेत्रों में लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। इसके विपरीत पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता, आतंकवाद, महंगाई और जल संकट जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में भारत को धमकी देने के बजाय पाकिस्तान को अपनी ऊर्जा अपने देश की समस्याओं के समाधान में लगानी चाहिए।</div><div><br /></div><div>पाकिस्तान में जल संकट गहराता जा रहा है तो उसका समाधान भारत को धमकी देना नहीं है। पाकिस्तान को अपनी सिंचाई व्यवस्था में सुधार करना होगा, पानी की बर्बादी रोकनी होगी, जल संरक्षण बढ़ाना होगा और अपने राज्यों के बीच पानी के बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था करनी होगी। सिंध और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में पानी की कमी की शिकायतें केवल भारत के कारण नहीं समझी जा सकतीं। पाकिस्तान की आंतरिक जल प्रबंधन व्यवस्था, बढ़ती आबादी, कृषि पर दबाव और जलवायु परिवर्तन भी इसके महत्वपूर्ण कारण हैं। अपनी नाकामी का दोष भारत पर डाल देना आसान है, लेकिन इससे पाकिस्तान की समस्या हल नहीं होगी।</div><div><br /></div><div>भारत के लिए भी यह समय भावनाओं में बहने के बजाय दृढ़ और संतुलित नीति अपनाने का है। भारत को अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति में किसी प्रकार की कमजोरी नहीं दिखानी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का पक्ष तथ्यों, कानून और जिम्मेदार राष्ट्र की छवि के साथ मजबूती से रखा जाए। भारत ने दुनिया को कई बार दिखाया है कि वह शांति चाहता है, लेकिन शांति को कमजोरी नहीं समझता।</div><div><br /></div><div>शहबाज शरीफ को यह याद रखना चाहिए कि धमकियों से रिश्ते नहीं सुधरते। यदि पाकिस्तान सचमुच भारत के साथ अच्छे संबंध चाहता है तो उसे पहले आतंकवाद की नीति छोड़नी होगी। भारत के नागरिकों के जीवन और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करके पाकिस्तान एक ओर आतंकवाद को बढ़ावा दे और दूसरी ओर पानी के अधिकार की दुहाई दे, यह दोहरा रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता।</div><div><br /></div><div>भारत ने वर्षों तक पड़ोसी होने के नाते उदारता दिखाई है। लेकिन उदारता का अर्थ कमजोरी नहीं होता। भारत शांति का पक्षधर है, पर अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से समझौता नहीं कर सकता। पाकिस्तान चाहे जितनी धमकियां दे, भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेने में सक्षम है। उसे यह समझना होगा कि पानी मांगने से पहले विश्वास अर्जित करना पड़ता है और विश्वास के लिए आतंकवाद का रास्ता छोड़ना पड़ता है। पाकिस्तान यदि सच में शांति चाहता है तो उसे बंदूक, आतंकवाद और धमकी की भाषा छोड़कर बातचीत, सहयोग और जिम्मेदारी की भाषा अपनानी होगी। यही उसके लिए भी बेहतर है और पूरे उपमहाद्वीप के भविष्य के लिए भी।</div><div>         *कांतिलाल मांडोत*</div><div><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 17:19:41 +0530</pubDate>
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                <title>संपादकीय पेज के लिए आलेख </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बेरोजगारी गरीबी असमानता भ्रष्टाचार से दबा लोकतंत्र ! </strong></div>
<div>  </div>
<div><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div>  </div>
<div>  इन दिनों देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ का जशन मना रहा है। हुक्मरानों के आह्वान पर देश में घर घर तिरंगा फहराया गया । राजपथ से लेकर जनपथ तक रोशनी की झालर जगमगा रही हैं लेकिन इस खुशहाल भारत के पीछे एक और हकीकत भी छिपी है यह है मुफलिसी, बेरोजगारी, गरीबी, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता व सस्ते सुलभ न्याय से महरूम हिंदुस्तान, जिसमें आज भी  भूख है, बेगार करने और अन्याय सहने की मजबूरी है, पूंजीवाद के हाथों में जकड़ती लोकतांत्रिक व्यवस्था है इन सबसे इतर नारे हैं</div>
<div>बेरोजगारी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185256/article-for-editorial-page"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img_20260727_151239.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बेरोजगारी गरीबी असमानता भ्रष्टाचार से दबा लोकतंत्र ! </strong></div>
<div> </div>
<div><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div> </div>
<div> इन दिनों देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ का जशन मना रहा है। हुक्मरानों के आह्वान पर देश में घर घर तिरंगा फहराया गया । राजपथ से लेकर जनपथ तक रोशनी की झालर जगमगा रही हैं लेकिन इस खुशहाल भारत के पीछे एक और हकीकत भी छिपी है यह है मुफलिसी, बेरोजगारी, गरीबी, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता व सस्ते सुलभ न्याय से महरूम हिंदुस्तान, जिसमें आज भी  भूख है, बेगार करने और अन्याय सहने की मजबूरी है, पूंजीवाद के हाथों में जकड़ती लोकतांत्रिक व्यवस्था है इन सबसे इतर नारे हैं उम्मीद हैं और इनके बीच बेरोजगारी महंगाई भ्रष्टाचार से कराहता आम आदमी है।</div>
<div>बेरोजगारी </div>
<div> </div>
<div>हालिया आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में बेरोजगारी दर लगभग 5.5% है, जो वैश्विक औसत (4.9%) के आसपास और कई प्रमुख जी-20 अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में स्थिर स्थिति में है, हालांकि युवाओं के बीच यह दर तुलनात्मक रूप से अधिक बनी हुई है।आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार देश में कुल बेरोजगारी दर स्थिस्थिर है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र की दर लगभग 5.1% और शहरी क्षेत्र की दर लगभग 6.4% से 6.6% के बीच दर्ज की गई है।युवा बेरोजगारी की समस्या चुनौती बनकठभारत में 15 से 29 आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक (लगभग 15% से 16% के बीच) है, जो कौशल अंतराल और तकनीक-आधारित बदलावों को दर्शाती है। वैश्विक और भारतीय बाजारों में अनौपचारिक रोजगार और गुणवत्तापूर्ण पूर्णकालिक नौकरियों की उपलब्धता एक बड़ी चिंता बनी हुई है।</div>
<div> गरीबी की अंतहीन समस्या </div>
<div> </div>
<div>भारत में आज भी गरीबी की समस्या विकराल बनी हुई है। भारत में 20 करोड़ से भी ज्यादा लोग ऐसे हैं, जो गरीबी रेखा से नीचे हैं और काफी मुश्किल से अपना जीवन यापन कर रहे हैं। गरीबी से जुड़े कई ऐसे आंकड़े हैं, जो वाकई डराने वाले हैं। </div>
<div> </div>
<div>विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, भारत में अभी भी लगभग 23.4 करोड़ लोग गरीबी के स्तर पर जीवन जीने को मजबूर हैं। यह संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि गरीबी को मापने के लिए किस मानक या पैमाने का उपयोग किया जा रहा है। बहुआयामी गरीबी सूचकांक के संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर जैसे संकेतकों के आधार पर भारत में लगभग 23.4 करोड़ लोग घोर या बहुआयामी गरीबी में जी रहे हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक है।विश्व बैंक के अत्यधिक गरीबी के आंकड़े बता रहे हैं कि विश्व बैंक के मानकों ($2.15 प्रतिदिन आय) के अनुसार, भारत में अत्यधिक गरीबी में जीने वाले लोगों की संख्या घटकर लगभग 7.5 करोड़ (75 मिलियन) रह गई है। पिछले एक दशक में लगभग 26.9 से 27 करोड़ लोग इस अत्यधिक गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। यदि उच्च स्तर यानी लगभग $4.20 प्रतिदिन के मानक को देखा जाए, तो भारत की लगभग 23.9% आबादी (करीब 34.2 करोड़ लोग) आर्थिक सुरक्षा के उस दायरे से नीचे आती है।</div>
<div> </div>
<div><strong>                                                                                   भुखमरी </strong></div>
<div> </div>
<div>नवीनतम ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2025 रिपोर्ट के अनुसार, कुल 123 देशों की सूची में भारत को 102वां स्थान मिला है। इस सूचकांक में भारत का कुल स्कोर 25.8 है, जो देश में भूख और कुपोषण की स्थिति को 'गंभीर' श्रेणी में रखता है। 123 देशों की पड़ताल में भारत का स्थान 102 वां है इस के अनुसार 25.8श्रेणी गंभीर प्रमुख स्वास्थ्य व पोषण 12.0%बाल बौनापन उम्र के हिसाब से कम लंबाई 32.9%बाल कमज़ोरी लंबाई के हिसाब से कम वजन 18.7% रिपोर्ट में दूसरी सबसे अधिक बाल मृत्यु दर 2.8% है। </div>
<div> भुखमरी सूचकांक वर्ष 2020 में भारत 94वें स्थान पर था।भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाली वैश्विक भुखमरी सूचकांक की वेबसाइट के अनुसार चीन, ब्राजील और कुवैत सहित अठारह देशों ने पांच से कम के जीएचआई स्कोर के साथ अग्रिम पंक्ति में है। </div>
<div> </div>
<div><strong>                                                                     भ्रष्टाचार </strong></div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2025 में भारत 182 देशों में 91वें स्थान पर है। भारत का कुल स्कोर 39 (100 में से) है, जो पिछले वर्ष (2024 में 96वीं रैंक) की तुलना में पाँच स्थानों का सुधार दर्शाता है। यह रिपोर्ट ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी की जाती है।डेनमार्क, फिनलैंड और सिंगापुर सबसे कम भ्रष्ट देशों में शामिल हैं। भारत का प्रदर्शन (101रैंक)पाकिस्तान (136वीं रैंक), श्रीलंका (107वीं रैंक), और नेपाल (109वीं रैंक) से बेहतर है, लेकिन चीन (76वीं रैंक) और भूटान (18वीं रैंक) से पीछे है।</div>
<div> </div>
<div><strong>                                                                 गरीब अमीर के बीच खाई </strong></div>
<div> </div>
<div>विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 (तीसरा संस्करण) पेरिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के द्वारा जारी की गई है। यह रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के शीर्ष 10% सबसे अमीर लोगों के पास वैश्विक संपत्ति का तीन-चौथाई (लगभग 75%) हिस्सा है, जबकि सबसे निचले 50% हिस्से के पास केवल 2% संपत्ति है।भारत में शीर्ष 10% लोगों के पास राष्ट्रीय आय का 58% हिस्सा है, जबकि निचले 50% लोगों को केवल 15% ही मिलता है।देश के शीर्ष 1% अमीरों के पास कुल संपत्ति का लगभग 40% हिस्सा है, और शीर्ष 10% के पास करीब 65% संपत्ति है।भारत में केवल 15.7% महिलाएं नौकरी कर रही हैं, और कुल श्रम आय में उनका हिस्सा महज 20% के आसपास है।</div>
<div> </div>
<div>भारत में असमानता गहराई से जड़ें जमा चुकी है, जहाँ शीर्ष 10% राष्ट्रीय आय का 58% हिस्सा अर्जित करते हैं और शीर्ष 1% के पास देश की कुल संपत्ति का 40% हिस्सा है। इसे महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर के 15.7% पर स्थिर बने रहने से और बढ़ावा मिलता है।</div>
<div>जलवायु असमानता के लिए सबसे धनी 10% लोग निजी पूंजी से होने वाले उत्सर्जन के 77% के लिये उत्तरदायी हैं; केवल शीर्ष 1% अकेले 41% योगदान करते हैं, जो असमान ज़िम्मेदारी और जोखिम को दर्शाता है।</div>
<div>                               न्याय बना अन्याय</div>
<div>देश में अदालतों में न्याय के लिए लम्बी लाइन लगीं है अगली पेशी अगले साल के चलते लाखों की संख्या में वादी व पीड़ित तारीख पर चक्कर काटते हुए दुनिया से चले जाते हैं पर न्याय नहीं मिलता। स्थिति यह है कि देशभर की अदालतों में निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कुल 5.64 करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित (पेंडिंग) हैं।अदालत के स्तर पर लंबित मामलों का विवरणसुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च अदालत): लगभग 96,000 से अधिक केस पेंडिंग हैं।हाई कोर्ट (उच्च न्यायालय): देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में लगभग 63.76 लाख मामले पेंडिंग हैं।जिला और अधीनस्थ अदालतें (निचली अदालतें): कुल पेंडिंग मामलों का सबसे बड़ा हिस्सा यानी करीब 4.98 करोड़ से अधिक मामले निचली अदालतों में अटके हैं, जो कुल लंबित मामलों का लगभग 85% से अधिक है।</div>
<div>साइबर अपराध </div>
<div>देश में अपराध की स्थिति भी बदतर है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अंतिम उपलब्ध आंकड़े बताते हैं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की नवीनतम "क्राइम इन इंडिया" रिपोर्ट के अनुसार, पारंपरिक शारीरिक और हिंसक अपराधों में मामूली कमी दर्ज की गई है, जबकि डिजिटल व वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। देश में समग्र अपराध दर घटकर लगभग 418.9 प्रति लाख जनसंख्या पर आ गई है। विभिन्न डिजिटल और ऑनलाइन धोखाधड़ी में लगभग 17% से 18% की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल साइबर मामलों में से लगभग 72% से अधिक का उद्देश्य वित्तीय ठगी रहा है महिलाओं के विरुद्ध मामलों में आंशिक (लगभग 1.5%) कमी आई है, जबकि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में लगभग 7.8% की वृद्धि देखी गई है। हत्या के मामलों में लगभग 2.4% की गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि अपहरण और अन्य विवादित मामलों की संख्या में क्षेत्रीय भिन्नता बनी हुई है। वित्तीय गबन और धोखाधड़ी से जुड़े आर्थिक अपराधों में करीब 4.6% की वृद्धि हुई है।</div>
<div>राष्ट्रीय चरित्र में गिरावट </div>
<div>भारतीयों के राष्ट्रीय चरित्र में गिरावट के प्रमुख लक्षणों में अनियंत्रित भ्रष्टाचार, सार्वजनिक संपत्ति के प्रति लापरवाही, नागरिक अनुशासन का अभाव और राष्ट्रहित की तुलना में व्यक्तिगत स्वार्थ को प्राथमिकता देना शामिल है। समाज में नैतिक मूल्यों और सहिष्णुता की कमी भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।</div>
<div>कभी भारतीय लोगों का राष्ट्रीय चरित्र विविधता में एकता, सहिष्णुता, आतिथ्य-सत्कार, परिवार के प्रति अटूट जुड़ाव और कठिन परिस्थितियों में भी उच्च सहनशक्ति (लचीलेपन) पर आधारित है। यहाँ के समाज में धर्म, आध्यात्मिकता और सामूहिक जीवन की भावना गहराई तक समाई हुई है।लेकिन अब स्थिति भिन्न हो चली है। समाज में नैतिक और सामाजिक पतन की शुरुआत हो गई है। भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं बल्कि एक सामान्य और स्वीकृत बात बन गई है। लोग अपने अधिकारों के प्रति अत्यधिक जागरूक हैं, लेकिन अपने मूल कर्तव्यों को भूल रहे हैं। विभिन्न समूहों के बीच सहनशीलता घट रही है और असहिष्णुता बढ़ रही है। 'मेरा क्या फायदा' की सोच ने सामूहिक कल्याण और देशभक्ति की भावना को पीछे छोड़ दिया है।सरकारी संपत्तियों, पार्कों और धरोहरों को गंदा करना या नुकसान पहुँचाना आम हो गया है। यातायात नियमों और सामान्य कानूनों का पालन न करने को शान की बात समझा जाता है। अपराध या दुर्घटना के समय मदद करने के बजाय लोग वीडियो बनाने में व्यस्त रहते हैं।</div>
<div>भारत में राजनीतिक दलों की आपसी प्रतिद्वंद्विता अब इतना बढ़ गया है कि पिछले एक दशक में देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद में सबसे कम समय का उपयोग किया जाता है विपक्ष संसद को अखाड़ा बनाने पर तुला है और सत्ता धारी विपक्ष के साथ सूक्ष्मता आम सहमति बनाने में नाकाम रहे हैं। देश ने नीट पेपर लीक के मुद्दे पर हुए प्रदर्शन में जैनजी के भीतर आक्रोश को देखा वहीं जैनजी के कंधे का इस्तेमाल करने की राजनीति को भी देखा वहीं आंदोलन की आड़ में अराजकता अभद्रता असंयमित गालीबाजी को भी सहन किया। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 17:13:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>हर घर तिरंगा अभियान के तहत निकली विशाल तिरंगा यात्रा, तिरंगे के रंग में रंगा शहर </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत बुधवार को सरसैया घाट से ग्रीन पार्क स्टेडियम तक भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। हाथों में आन-बान-शान से लहराता तिरंगा और चेहरों पर देश के प्रति गर्व का भाव लिए हजारों कदम एक साथ आगे बढ़े तो पूरा यात्रा मार्ग राष्ट्रप्रेम के रंग में रंग गया। जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों, युवाओं, सुरक्षाबलों के जवानों, विभिन्न विभागों के कार्मिकों और आमजन ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता का संदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यात्रा के साथ चल रहे विद्यार्थियों और स्काउट के बैंड ने देशभक्ति की धुनें बजाकर समा बांध दिया। बच्चों और युवाओं का</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185150/under-the-har-ghar-tricolor-campaign-a-huge-tiranga-yatra"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002194420.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत बुधवार को सरसैया घाट से ग्रीन पार्क स्टेडियम तक भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। हाथों में आन-बान-शान से लहराता तिरंगा और चेहरों पर देश के प्रति गर्व का भाव लिए हजारों कदम एक साथ आगे बढ़े तो पूरा यात्रा मार्ग राष्ट्रप्रेम के रंग में रंग गया। जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों, युवाओं, सुरक्षाबलों के जवानों, विभिन्न विभागों के कार्मिकों और आमजन ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता का संदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यात्रा के साथ चल रहे विद्यार्थियों और स्काउट के बैंड ने देशभक्ति की धुनें बजाकर समा बांध दिया। बच्चों और युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। भारत माता की जय के उद्घोष के साथ अमर शहीदों को नमन करते नारे लगातार गूंजते रहे। हाथों में लहराते राष्ट्रध्वज, बैंड की देशभक्ति से ओतप्रोत धुनों और नारों ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति से सराबोर कर दिया। तिरंगा यात्रा में विधायक सुरेंद्र मैथानी, विधायक सरोज कुरील, विधायक नीलिमा कटियार, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन और प्रशिक्षु आईएएस संदीप कुमार शामिल हुए। स्कूली छात्र-छात्राओं, आईटीबीपी एवं अन्य सुरक्षा बलों के जवानों, एनसीसी कैडेटों, स्काउट, विभिन्न विभागों के कार्मिकों और बड़ी संख्या में शहरवासियों की भागीदारी ने यात्रा को जनोत्सव का स्वरूप प्रदान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तिरंगा यात्रा का विशेष आकर्षण भारत माता की झांकी रही। इसमें छात्राओं ने भारत माता के साथ वैज्ञानिक, अधिवक्ता, पुलिसकर्मी और प्रशासक की भूमिका निभाई। झांकी के माध्यम से वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से वर्ष 1950 में देश का संविधान लागू होने तक की उपलब्धि तथा इसके बाद निरंतर प्रगति करते हुए विकसित भारत की ओर बदलती तस्वीर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत की गई। झांकी ने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से लेकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते आधुनिक भारत की गौरवगाथा को जीवंत कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि तिरंगा देश के गौरव, स्वाभिमान और एकता का प्रतीक है। उन्होंने जनपदवासियों से अपने घरों, प्रतिष्ठानों एवं संस्थानों पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराने और हर घर तिरंगा अभियान को व्यापक जनभागीदारी का स्वरूप देने की अपील की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:35:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>डिजिटल भारत और साइबर अपराध</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184896/digital-india-and-cyber-crime"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas3.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या हमारे कानून और जांच एजेंसियां साइबर अपराधियों की गति के साथ कदम मिला पा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या अपराधी कानून से आगे निकल चुके हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल क्रांति ने सुविधाएं बढ़ाई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अपराधियों के लिए भी नए रास्ते खोल दिए हैं। पहले अपराध किसी एक शहर या क्षेत्र तक सीमित होते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब एक व्यक्ति हजारों किलोमीटर दूर बैठकर किसी भी राज्य के नागरिक को कुछ ही मिनटों में अपना शिकार बना सकता है। अपराधी नकली वेबसाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी मोबाइल ऐप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एआई आधारित आवाज की नकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक वीडियो और सोशल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं। कई मामलों में पीड़ित को तब तक पता नहीं चलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक उसके खाते से लाखों रुपये गायब नहीं हो जाते। भारत में साइबर अपराधों के लिए कानूनी ढांचा मौजूद है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम</span>, 2000<span lang="hi" xml:lang="hi"> और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधान डिजिटल अपराधों पर कार्रवाई की अनुमति देते हैं। हाल के वर्षों में सरकार ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हेल्पलाइन </span>1930, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर और डिजिटल भुगतान सुरक्षा से जुड़े कई कदम उठाए हैं। इन प्रयासों से हजारों मामलों में धनराशि फ्रीज कर पीड़ितों को राहत भी मिली है। फिर भी वास्तविक चुनौती यह है कि अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कानून से कहीं अधिक तेज़ी से कर रहे हैं। कानून बनने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन में समय लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि साइबर अपराधी कुछ ही दिनों में नए तरीके विकसित कर लेते हैं। एआई ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है। आज किसी की आवाज की हूबहू नकल कर फोन किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी का नकली वीडियो तैयार किया जा सकता है और फर्जी पहचान बनाकर आर्थिक अपराध किए जा सकते हैं। इन परिस्थितियों में पारंपरिक जांच प्रणाली कई बार अपर्याप्त साबित होती है। साइबर अपराध की एक बड़ी समस्या इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रकृति भी है। अनेक गिरोह भारत के बाहर से संचालित होते हैं। उनके सर्वर दूसरे देशों में होते हैं और धन कई देशों के बैंक खातों या क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल साक्ष्य और कानूनी प्रक्रियाएं जांच को लंबा और जटिल बना देती हैं। अपराधी इसी देरी का लाभ उठाते हैं। दूसरी ओर नागरिकों में डिजिटल जागरूकता की कमी भी अपराधियों की सफलता का बड़ा कारण है। आज भी अनेक लोग अनजान लिंक पर क्लिक कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओटीपी साझा कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नकली निवेश योजनाओं के झांसे में आ जाते हैं या सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी सार्वजनिक कर देते हैं। तकनीकी सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतनी ही आवश्यक डिजिटल साक्षरता भी है। यदि नागरिक सतर्क हों तो बड़ी संख्या में साइबर अपराधों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है। भारत को अब साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बहुस्तरीय रणनीति अपनानी होगी। सबसे पहले कानूनों को तकनीकी बदलावों के अनुरूप लगातार अद्यतन करना होगा। एआई आधारित अपराध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेटा चोरी और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों के लिए स्पष्ट और प्रभावी कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं। दूसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस और जांच एजेंसियों को आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर विशेषज्ञों और अत्याधुनिक उपकरणों से सशक्त बनाना होगा। तीसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों के बीच और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान को और तेज़ करना होगा। बैंकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरसंचार कंपनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान कंपनियों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। संदिग्ध लेनदेन की तुरंत पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत सत्यापन प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी खातों पर त्वरित कार्रवाई और उपयोगकर्ताओं को समय-समय पर सुरक्षा संबंधी चेतावनी देना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। निजी क्षेत्र और सरकार के बीच समन्वय जितना मजबूत होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराध पर नियंत्रण उतना ही प्रभावी होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा व्यवस्था में भी डिजिटल सुरक्षा को शामिल करने का समय आ गया है। स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और कार्यस्थलों पर साइबर सुरक्षा का बुनियादी प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए। जिस प्रकार सड़क सुरक्षा के नियम सिखाए जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार डिजिटल सुरक्षा के नियम भी नागरिक जीवन का हिस्सा बनने चाहिए। डिजिटल भारत की सफलता केवल इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने से नहीं मापी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इस बात से तय होगी कि नागरिक डिजिटल दुनिया में कितने सुरक्षित हैं। यदि कानून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और समाज मिलकर साइबर अपराध के विरुद्ध मजबूत व्यवस्था विकसित नहीं करते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो डिजिटल प्रगति का लाभ अपराधियों को अधिक मिलेगा और आम नागरिक असुरक्षित महसूस करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि कानून पूरी तरह अपराधियों से पीछे छूट गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह भी सच है कि साइबर अपराधियों की गति और नवाचार कहीं अधिक तेज़ है। आवश्यकता केवल नए कानून बनाने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें समय के अनुरूप अद्यतन करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वरित क्रियान्वयन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी क्षमता बढ़ाने और नागरिकों में डिजिटल जागरूकता विकसित करने की है। डिजिटल भारत तभी सशक्त होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसकी डिजिटल सुरक्षा भी उतनी ही मजबूत होगी। हालांकि भारतीय पुलिस व्यवस्था में अब साईबर फ्राड को लेकर काफी चर्चाएं की जा रही हैं और उनपर क्रियान्वयन भी हो रहा है लेकिन अभी भी हम साईबर अपराधियों की पहुंच से पीछे छूटे जा रहे हैं। हमें इसकी रोकथाम के लिए संसाधन बढ़ाने होंगे ताकि आम आदमी साईबर अपराधियों से निजात पा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 17:27:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फर्जी मुकदमों की बढ़ती चुनौती: एससी-एसटी और पॉक्सो कानूनों के कथित दुरुपयोग पर उठे गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी तो है ही पर इसके साथ बहुत से मामले ऐसे हैं जिनका दुरुपयोग बड़ी तेजी से हो रहा है। हम बात कर रहे हैं एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो मामलों की जिनमें आदमी अगर सतर्क नहीं रहा तो बहुत बुरी तरह से घिर जाता है। एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के बढ़ते मुकदमे इसकी गवाही दे रहे हैं। कुछ ऐसे संगठित गिरोह भी हैं जो महिलाओं के द्वारा आदमियों को फंसवाते देखे गए हैं। हालांकि उन गिरोहों का पर्दाफाश होता है लेकिन तब तक आरोपी को सज़ा काटनी ही पड़ती है। इसी तरह एससी-एसटी एक्ट के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184359/growing-challenge-of-fake-cases-serious-questions-raised-on-alleged"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/rajeev.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी तो है ही पर इसके साथ बहुत से मामले ऐसे हैं जिनका दुरुपयोग बड़ी तेजी से हो रहा है। हम बात कर रहे हैं एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो मामलों की जिनमें आदमी अगर सतर्क नहीं रहा तो बहुत बुरी तरह से घिर जाता है। एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के बढ़ते मुकदमे इसकी गवाही दे रहे हैं। कुछ ऐसे संगठित गिरोह भी हैं जो महिलाओं के द्वारा आदमियों को फंसवाते देखे गए हैं। हालांकि उन गिरोहों का पर्दाफाश होता है लेकिन तब तक आरोपी को सज़ा काटनी ही पड़ती है। इसी तरह एससी-एसटी एक्ट के कानून का दुरुपयोग वर्षों से हो रहा है लेकिन आज तक कितनी ही सरकारें आईं हों इनमें संसोधन नहीं हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान न्याय का अधिकार देता है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे विशेष कानून बनाए गए जो समाज के कमजोर और संवेदनशील वर्गों को सुरक्षा प्रदान कर सकें। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और पॉक्सो कानून भी इसी सोच का परिणाम हैं। इन कानूनों ने अनेक पीड़ितों को न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है और समाज में अपराधियों के विरुद्ध कठोर संदेश दिया है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक दूसरा पक्ष भी लगातार चर्चा में रहा है। कई लोग आरोप लगाते हैं कि व्यक्तिगत दुश्मनी, संपत्ति विवाद, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या पारिवारिक संघर्ष में इन कानूनों का दुरुपयोग कर झूठे मुक़दमे दर्ज कराए जाते हैं। यह मुद्दा अदालतों, विधि विशेषज्ञों और समाज के बीच लगातार बहस का विषय बना हुआ है। क्या सचमुच फर्जी मुकदमों की बाढ़ है?</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यह कहना कि अधिकांश एससी-एसटी या पॉक्सो के मामले फर्जी हैं, उपलब्ध आधिकारिक आँकड़ों के आधार पर उचित नहीं होगा। कई मामलों में जांच के बाद आरोप सिद्ध नहीं हो पाते, लेकिन इसका कारण हमेशा झूठा मुकदमा नहीं होता। कमजोर जांच, पर्याप्त साक्ष्यों का अभाव, गवाहों का मुकर जाना, समझौते का दबाव या लंबी न्यायिक प्रक्रिया भी इसके कारण हो सकते हैं। हालाँकि, विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने अलग-अलग मामलों में यह भी स्वीकार किया है कि कुछ मामलों में कानूनों का दुरुपयोग होने की शिकायतें सामने आई हैं। इसलिए यह विषय संतुलित दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। निर्दोष व्यक्ति पर मुकदमे का प्रभाव- यदि कोई व्यक्ति वास्तव में झूठे मुकदमे में फँस जाता है, तो उसका प्रभाव केवल अदालत तक सीमित नहीं रहता। उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, नौकरी पर संकट आ सकता है, आर्थिक बोझ बढ़ जाता है और पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजरता है। वर्षों तक मुकदमा चलने के बाद यदि वह निर्दोष साबित भी हो जाए, तब भी खोया हुआ समय और सम्मान आसानी से वापस नहीं आता। दूसरी ओर यह भी नहीं भूलना चाहिए कि एससी-एसटी कानून और पॉक्सो अधिनियम लाखों वास्तविक पीड़ितों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। भारत में जातीय उत्पीड़न और बच्चों के साथ यौन अपराध आज भी गंभीर समस्या हैं। यदि इन कानूनों को कमजोर किया जाए या हर शिकायत को संदेह की दृष्टि से देखा जाए, तो वास्तविक पीड़ित न्याय पाने से वंचित हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसलिए चुनौती यह नहीं है कि कानून समाप्त कर दिए जाएँ, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका सही और निष्पक्ष उपयोग हो। देश की अदालतों में करोड़ों मुकदमे लंबित हैं। विशेष कानूनों के अंतर्गत दर्ज मामलों की संख्या बढ़ने से न्यायिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सुनवाई में देरी के कारण न तो पीड़ित को समय पर न्याय मिल पाता है और न ही निर्दोष व्यक्ति को शीघ्र राहत। तेज और वैज्ञानिक जांच, पर्याप्त न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा समयबद्ध सुनवाई इस समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सरकार की जिम्मेदारी केवल कठोर कानून बनाना नहीं है, बल्कि उनकी निष्पक्ष क्रियान्वयन व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है। यदि कहीं झूठे मुकदमे दर्ज होते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं यदि वास्तविक पीड़ित न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं तो उन्हें भी समय पर न्याय मिलना चाहिए। इस विषय पर कई विधि विशेषज्ञ निम्न सुधारों की आवश्यकता बताते हैं— निष्पक्ष और वैज्ञानिक पुलिस जांच। फॉरेंसिक साक्ष्यों का अधिक उपयोग। विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाना।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण। यदि अदालत यह पाए कि शिकायत जानबूझकर झूठी और दुर्भावनापूर्ण थी, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई। पुलिस और अभियोजन अधिकारियों का नियमित प्रशिक्षण। "सरकार और अदालतें धृतराष्ट्र बनी हुई हैं" जैसी अभिव्यक्ति एक राजनीतिक और भावनात्मक टिप्पणी हो सकती है, लेकिन वास्तविक समाधान तथ्यों और संस्थागत सुधारों में निहित है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में दो सिद्धांत समान रूप से महत्वपूर्ण हैं—दोषी को दंड मिले और निर्दोष को अनावश्यक दंड या उत्पीड़न न झेलना पड़े। इसलिए आवश्यकता न तो कानूनों को कमजोर करने की है और न ही हर शिकायत को झूठा मानने की। आवश्यकता ऐसी न्याय व्यवस्था की है जो वास्तविक पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाए, निर्दोष लोगों के अधिकारों की रक्षा करे और न्याय प्रणाली पर जनता का विश्वास मजबूत बनाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 22:55:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वन नेशन, वन इलेक्शन: जेपीसी पहुंचेगी पणजी और लखनऊ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित <strong>संविधान (एक सौ उनतीसवाँ संशोधन) विधेयक, 2024</strong> तथा <strong>संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024</strong> के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श के उद्देश्य से <strong>'एक राष्ट्र, एक चुनाव'</strong> विषय पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) 10 से 15 जुलाई, 2026 तक गोवा की राजधानी पणजी और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का अध्ययन दौरा करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति के अध्यक्ष <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">पी. पी. चौधरी</span></span></strong> के नेतृत्व में होने वाले इस दौरे का उद्देश्य प्रस्तावित विधेयकों के देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, चुनाव प्रणाली और शासन व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का व्यापक अध्ययन करना तथा विभिन्न हितधारकों से सुझाव प्राप्त</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182820/one-nation-one-election-jpc-will-reach-panaji-and-lucknow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/image-38-1024x612.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित <strong>संविधान (एक सौ उनतीसवाँ संशोधन) विधेयक, 2024</strong> तथा <strong>संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024</strong> के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श के उद्देश्य से <strong>'एक राष्ट्र, एक चुनाव'</strong> विषय पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) 10 से 15 जुलाई, 2026 तक गोवा की राजधानी पणजी और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का अध्ययन दौरा करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति के अध्यक्ष <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">पी. पी. चौधरी</span></span></strong> के नेतृत्व में होने वाले इस दौरे का उद्देश्य प्रस्तावित विधेयकों के देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, चुनाव प्रणाली और शासन व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का व्यापक अध्ययन करना तथा विभिन्न हितधारकों से सुझाव प्राप्त करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">अध्ययन दौरे के दौरान समिति क्षेत्रीय स्तर पर संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए उच्च संवैधानिक पदाधिकारियों, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, वित्तीय एवं शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, राज्य बार परिषदों, संबंधित उच्च न्यायालयों के अधिवक्ता संघों, विभिन्न पेशेवर संगठनों तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत परामर्श करेगी। इन बैठकों में चुनाव प्रणाली में संभावित बदलावों, प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय प्रभाव, संवैधानिक पहलुओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर पड़ने वाले प्रभावों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति का यह अध्ययन दौरा देशभर में आयोजित किए जा रहे क्षेत्रीय परामर्शों की श्रृंखला का अगला चरण है। इससे पहले समिति मुंबई, देहरादून, चंडीगढ़, शिमला, बेंगलुरु और गांधीनगर में भी इसी प्रकार के अध्ययन दौरे और परामर्श बैठकें आयोजित कर चुकी है। इन बैठकों में विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों, विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारियों, राजनीतिक दलों के नेताओं, बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा विभिन्न नियामक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व में आयोजित इन परामर्श बैठकों में महाराष्ट्र, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, चंडीगढ़ तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई थी। इसके अलावा <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भारतीय रिज़र्व बैंक</span></span>, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड</span></span> तथा <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक</span></span> जैसी प्रमुख संस्थाओं के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने भी समिति के समक्ष अपने विचार रखे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति को उम्मीद है कि पणजी और लखनऊ में होने वाले आगामी अध्ययन दौरे के दौरान भी विभिन्न वर्गों से उपयोगी सुझाव प्राप्त होंगे। इन सुझावों के आधार पर समिति प्रस्तावित <strong>संविधान (एक सौ उनतीसवाँ संशोधन) विधेयक, 2024</strong> और <strong>संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024</strong> पर अपनी रिपोर्ट को और अधिक व्यापक तथा व्यावहारिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की अवधारणा को लेकर देशभर में विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है। ऐसे में संयुक्त संसदीय समिति का यह अध्ययन दौरा विभिन्न पक्षों की राय को समाहित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 18:17:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बराक घाटी में स्थायी हाईकोर्ट बेंच की मांग को मिला जनसमर्थन, श्रीभूमि में 300 से अधिक लोगों ने किए हस्ताक्षर।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>  श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात :</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">            असम के गुवाहाटी हाईकोर्ट की एक स्थायी बेंच बराक घाटी के किसी उपयुक्त स्थान पर स्थापित किए जाने की मांग के समर्थन में आज 27 जून शनिवार को श्रीभूमि जिले के बिपिन पाल स्मृति भवन में एक महत्वपूर्ण जन-जागरूकता सभा आयोजित की गई। रवींद्र सदन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सब्यसाची राय की पहल पर आयोजित इस बैठक में बराक घाटी में स्थायी हाईकोर्ट बेंच की संवैधानिक आवश्यकता, न्याय तक समान पहुंच तथा इस मांग को एक संगठित जनआंदोलन का रूप देने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक की शुरुआत हाईकोर्ट बेंच</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182146/the-demand-for-a-permanent-high-court-bench-in-barak"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001579962.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong> श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात :</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      असम के गुवाहाटी हाईकोर्ट की एक स्थायी बेंच बराक घाटी के किसी उपयुक्त स्थान पर स्थापित किए जाने की मांग के समर्थन में आज 27 जून शनिवार को श्रीभूमि जिले के बिपिन पाल स्मृति भवन में एक महत्वपूर्ण जन-जागरूकता सभा आयोजित की गई। रवींद्र सदन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सब्यसाची राय की पहल पर आयोजित इस बैठक में बराक घाटी में स्थायी हाईकोर्ट बेंच की संवैधानिक आवश्यकता, न्याय तक समान पहुंच तथा इस मांग को एक संगठित जनआंदोलन का रूप देने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक की शुरुआत हाईकोर्ट बेंच मांग कार्यान्वयन समिति के महासचिव निखिल पाल के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए डॉ. सब्यसाची राय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बराक घाटी के लोगों की लंबे समय से चली आ रही इस न्यायसंगत मांग को पूरा करने के लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की जागरूकता सभाएं जनमत तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सभा में पूर्व सांसद मिशन रंजन दास, करीमगंज महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य राधिका रंजन चक्रवर्ती, बंग साहित्य एवं संस्कृति सम्मेलन की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष सतु राय, सांस्कृतिक हस्ती सुलेखा दत्त चौधरी, प्रोफेसर विश्वतोष चौधरी, शिक्षाविद विभाष देव, महासचिव निखिल पाल, रसराज दास, धर्मानंद देव, अधिवक्ता देवोमिता चक्रवर्ती, अधिवक्ता तुहिना शर्मा, अधिवक्ता दुर्गा पुरकायस्थ, अधिवक्ता अर्चना दत्त सहित जिले के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और नाट्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी चर्चा में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वक्ताओं ने कहा कि बराक घाटी के लाखों लोगों को न्याय के लिए गुवाहाटी तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जो अत्यंत महंगा, समय लेने वाला और कठिन है। आर्थिक तथा भौगोलिक बाधाओं के कारण अनेक लोग प्रभावी रूप से न्याय प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं। इसलिए बराक घाटी के किसी उपयुक्त स्थान पर गुवाहाटी हाईकोर्ट की स्थायी बेंच की स्थापना समय की मांग है और यह संविधान में निहित समानता एवं न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई क्षेत्रीय या राजनीतिक मांग नहीं है, बल्कि नागरिकों के संवैधानिक न्याय के अधिकार को सुनिश्चित करने की एक उचित मांग है। इस मांग को बराक घाटी के सभी वर्गों का व्यापक समर्थन प्राप्त है और सरकार तथा संबंधित अधिकारियों से इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक कदम उठाने की अपील की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">सभा के अंत में गुवाहाटी हाईकोर्ट की स्थायी बेंच की स्थापना के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया, जिसमें लगभग 300 से अधिक नागरिकों ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दर्ज कराया। यह इस मांग के प्रति जनता के व्यापक समर्थन का प्रमाण माना गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में सर्वसम्मति से बराक घाटी में शीघ्र स्थायी हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की मांग दोहराई गई तथा समाज के सभी वर्गों से लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से इस जनआंदोलन को और मजबूत बनाने का आह्वान किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182146/the-demand-for-a-permanent-high-court-bench-in-barak</link>
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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 19:49:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोशल मीडिया की बढ़ती दखल से रिश्तों में दरार, टूटती शादियों की नई वजह बन रहा डिजिटल संसार</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात स्पेशल रिपोर्ट</strong><br /><strong>जितेंद्र कुमार "राजेश"</strong></p>
<p style="text-align:justify;">बिहार। तकनीक के इस दौर में सोशल मीडिया लोगों को जोड़ने का एक बड़ा माध्यम बन गया है, लेकिन इसका दूसरा पहलू पारिवारिक और वैवाहिक रिश्तों पर भी दिखाई देने लगा है। पहले जहां शादियां टूटने के पीछे दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, आर्थिक तंगी, पारिवारिक हस्तक्षेप और आपसी मतभेद प्रमुख कारण माने जाते थे, वहीं अब सोशल मीडिया भी वैवाहिक विवादों की एक बड़ी वजह बनता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पारिवारिक परामर्श केंद्रों और वैवाहिक मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पति-पत्नी के बीच सोशल मीडिया को लेकर बढ़ता संदेह, ऑनलाइन मित्रता,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181118/due-to-the-increasing-interference-of-social-media-the-digital"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/file_00000000237472068f5244e947a5173e.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात स्पेशल रिपोर्ट</strong><br /><strong>जितेंद्र कुमार "राजेश"</strong></p>
<p style="text-align:justify;">बिहार। तकनीक के इस दौर में सोशल मीडिया लोगों को जोड़ने का एक बड़ा माध्यम बन गया है, लेकिन इसका दूसरा पहलू पारिवारिक और वैवाहिक रिश्तों पर भी दिखाई देने लगा है। पहले जहां शादियां टूटने के पीछे दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, आर्थिक तंगी, पारिवारिक हस्तक्षेप और आपसी मतभेद प्रमुख कारण माने जाते थे, वहीं अब सोशल मीडिया भी वैवाहिक विवादों की एक बड़ी वजह बनता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पारिवारिक परामर्श केंद्रों और वैवाहिक मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पति-पत्नी के बीच सोशल मीडिया को लेकर बढ़ता संदेह, ऑनलाइन मित्रता, पुराने संबंधों से दोबारा संपर्क, निजी जीवन को सार्वजनिक करना तथा घंटों मोबाइल और सोशल मीडिया पर व्यस्त रहना रिश्तों में तनाव पैदा कर रहा है। कई मामलों में यह तनाव इतना बढ़ जाता है कि बात अलगाव और तलाक तक पहुंच जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के वर्षों में भारत के विभिन्न राज्यों और जिलों में ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं, जहां सोशल मीडिया पर हुई बातचीत, पोस्ट, लाइक, कमेंट, फोटो शेयरिंग या ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद उत्पन्न हुआ। परिवार परामर्श केंद्रों में भी ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जहां सोशल मीडिया से जुड़ी गलतफहमियां वैवाहिक जीवन को प्रभावित कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया स्वयं समस्या नहीं है, बल्कि उसका अनियंत्रित उपयोग और उससे पैदा होने वाला अविश्वास रिश्तों को कमजोर करता है। कई बार लोग वास्तविक जीवन की अपेक्षा आभासी दुनिया में अधिक समय बिताने लगते हैं, जिससे पति-पत्नी के बीच संवाद कम होने लगता है और गलतफहमियां बढ़ने लगती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">समाजशास्त्रियों के अनुसार, मजबूत वैवाहिक रिश्तों के लिए आपसी विश्वास, खुला संवाद और डिजिटल संतुलन बेहद आवश्यक है। यदि सोशल मीडिया का उपयोग संयम और समझदारी के साथ नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह पारिवारिक और वैवाहिक संबंधों के लिए और बड़ी चुनौती बन सकता है।</p>
<hr />
<p style="text-align:justify;"><strong> स्वतंत्र प्रभात की सलाह</strong></p>
<p style="text-align:justify;">✔ सोशल मीडिया के उपयोग की समय सीमा तय करें।</p>
<p style="text-align:justify;">✔ पति-पत्नी एक-दूसरे से बातें छिपाने के बजाय खुलकर संवाद करें।</p>
<p style="text-align:justify;">✔ ऑनलाइन मित्रता और चैटिंग में पारदर्शिता बनाए रखें।</p>
<p style="text-align:justify;">✔ किसी पोस्ट, लाइक या कमेंट को लेकर तुरंत निष्कर्ष पर न पहुंचें।</p>
<p style="text-align:justify;">✔ रिश्तों को मोबाइल स्क्रीन से ज्यादा समय दें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>सोशल मीडिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 11:32:06 +0530</pubDate>
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