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                <title>Pok - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Pok RSS Feed</description>
                
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                <title>एक ऑपरेशन जिसने बदल दी युद्ध की तस्वीर: ऑपरेशन सिंदूर और दो सेनाओं के बीच तकनीकी अंतर</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>भारत </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुधांशु कुमार द्वारा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> </strong>7 मई 2025 की रात भारत ने सिर्फ 23 मिनट में ऐसा सैन्य अभियान पूरा किया जिसने पूरे क्षेत्र की रणनीतिक सोच बदल दी। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए। इन हमलों में आधुनिक मिसाइलें, सैटेलाइट-निर्देशित हथियार और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। सबसे अहम बात यह रही कि भारत ने पाकिस्तान की चीनी तकनीक वाली एयर डिफेंस प्रणाली को निष्क्रिय करते हुए मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दो दिन के भीतर दुनिया के सामने सैटेलाइट तस्वीरें आ गईं। Maxar, KawaSpace और MizarVision जैसी कंपनियों द्वारा जारी तस्वीरों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178485/an-operation-that-changed-the-face-of-war-operation-sindoor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/whatsapp-image-2026-05-07-at-19.11.42.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>भारत </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुधांशु कुमार द्वारा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> </strong>7 मई 2025 की रात भारत ने सिर्फ 23 मिनट में ऐसा सैन्य अभियान पूरा किया जिसने पूरे क्षेत्र की रणनीतिक सोच बदल दी। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए। इन हमलों में आधुनिक मिसाइलें, सैटेलाइट-निर्देशित हथियार और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। सबसे अहम बात यह रही कि भारत ने पाकिस्तान की चीनी तकनीक वाली एयर डिफेंस प्रणाली को निष्क्रिय करते हुए मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दो दिन के भीतर दुनिया के सामने सैटेलाइट तस्वीरें आ गईं। Maxar, KawaSpace और MizarVision जैसी कंपनियों द्वारा जारी तस्वीरों में साफ दिखा कि किन ठिकानों को निशाना बनाया गया और कितना नुकसान हुआ। शाहबाज एयरबेस का हैंगर पूरी तरह तबाह दिखाई दिया, जबकि कई एयरबेस की रनवे और रडार सिस्टम भी क्षतिग्रस्त मिले। इन तस्वीरों ने भारत के दावों को मजबूत प्रमाण दे दिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फर्क सिर्फ हमले का नहीं, सोच का था</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">भारत ने अपने हर हमले का प्रमाण दुनिया के सामने रखा। यही सबसे बड़ा अंतर था। आधुनिक युद्ध में केवल हमला करना काफी नहीं होता, यह भी जरूरी है कि दुनिया देख सके कि हमला किस पर हुआ और क्यों हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ पाकिस्तान की प्रतिक्रिया अलग थी। सीमा पार से भारी गोलाबारी हुई, जिसमें मंदिर, गुरुद्वारे और नागरिक इलाके प्रभावित हुए। पुंछ, राजौरी और कश्मीर के कई इलाकों में आम नागरिकों को निशाना बनाया गया। कई लोगों की जान गई और घर तबाह हुए। इन हमलों का कोई स्पष्ट सैन्य लक्ष्य दिखाई नहीं दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यहीं से दोनों देशों की सैन्य क्षमता और तकनीकी सोच का अंतर साफ हो गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत का युद्ध मॉडल पूरी तरह तकनीक आधारित था</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन से पहले भारत की कई एजेंसियों ने मिलकर काम किया। सैटेलाइट निगरानी, ड्रोन सर्विलांस, इंटरसेप्टेड कम्युनिकेशन और रियल टाइम इंटेलिजेंस को एक साथ जोड़कर लक्ष्य तय किए गए। हर जानकारी सीधे सेना और वायुसेना के कमांडरों तक पहुंच रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह केवल पारंपरिक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि आधुनिक तकनीक और इंटेलिजेंस का संयुक्त इस्तेमाल था। भारत ने भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि डेटा और सटीक जानकारी के आधार पर कार्रवाई की।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>स्वदेशी रक्षा तकनीक की ताकत</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुए कई हथियार और ड्रोन भारत में बने या भारत के सहयोग से विकसित किए गए थे। ब्रह्मोस, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, स्काईस्ट्राइकर और नागास्त्र जैसे सिस्टम भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता का उदाहरण बने।</p>
<p style="text-align:justify;">इन हथियारों का सफल इस्तेमाल केवल सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग के लिए भी बड़ी सफलता है। इससे आने वाले समय में रिसर्च और निवेश दोनों बढ़ेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके विपरीत पाकिस्तान का रक्षा ढांचा बड़े पैमाने पर विदेशी हथियारों पर निर्भर है। ऐसे में किसी बड़े नुकसान के बाद उसकी भरपाई आसान नहीं होती।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सैटेलाइट तस्वीरों ने बदल दिया प्रचार का खेल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान ने दावा किया कि भारत ने नागरिक इलाकों पर हमला किया, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों ने इन दावों को कमजोर कर दिया। आधुनिक दौर में अब केवल बयान देकर सच नहीं बदला जा सकता। कुछ ही घंटों में सैटेलाइट तस्वीरें पूरी दुनिया के सामने वास्तविक स्थिति ला देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यही आधुनिक तकनीक की सबसे बड़ी ताकत है — पारदर्शिता।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>परमाणु हथियारों की रणनीति पर असर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कई वर्षों तक पाकिस्तान की रणनीति यह रही कि परमाणु हथियारों के डर से भारत बड़े सैन्य कदम नहीं उठाएगा। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने यह धारणा बदल दी।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने यह दिखाया कि सीमित, सटीक और नियंत्रित सैन्य कार्रवाई संभव है, बिना युद्ध को बड़े स्तर तक ले जाए। भारत ने केवल आतंकी ढांचे को निशाना बनाया, न कि पाकिस्तानी सेना या नागरिकों को।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पाकिस्तान की पुरानी रणनीतिक बढ़त कमजोर पड़ती दिखाई दी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ड्रोन युद्ध का नया दौर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार था जब दो परमाणु संपन्न देशों के बीच इतने बड़े स्तर पर ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। भारत ने सटीक निशाना लगाने वाले ड्रोन इस्तेमाल किए, जबकि पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में ड्रोन भेजकर दबाव बनाने की कोशिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की एयर डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश ड्रोन को रास्ते में ही रोक दिया। इससे साफ हुआ कि भविष्य के युद्धों में केवल हथियारों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और तकनीकी क्षमता ज्यादा मायने रखेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बदलते युद्ध का नया संदेश</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि आने वाले समय में युद्ध केवल ताकत से नहीं, बल्कि तकनीक, सटीकता और जवाबदेही से तय होंगे। भारत ने दुनिया को दिखाया कि आधुनिक युद्ध में पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सैन्य क्षमता।</p>
<p style="text-align:justify;">सैटेलाइट लगातार देख रहे हैं, तकनीक सब रिकॉर्ड कर रही है और अब सच को लंबे समय तक छिपाना आसान नहीं रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 19:17:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कश्मीर पर कोई भी मध्यस्थता स्वीकार नहीं, कश्मीर है हमारा PoK को खाली करे पाकिस्तान… भारत का सख्त संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत और पाकिस्तान के बीच हुए हालिया सीजफायर के बाद अब भारत सरकार की ओर से विदेश मंत्रालय ने औपचारिक बयान जारी किया है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच सभी मुद्दों का समाधान केवल द्विपक्षीय वार्ता के जरिए ही किया जाएगा और जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा. विदेश मंत्रालय ने कहा कि हालिया सैन्य कार्रवाइयों ने पाकिस्तान को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है. भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उसे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) को खाली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151869/no-arbitration-on-kashmir-is-not-accepted-kashmir-pakistan-should"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-05/670fec254c97d8ebfad48c16_indian-army-35e82zy24xfm0pgi.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत और पाकिस्तान के बीच हुए हालिया सीजफायर के बाद अब भारत सरकार की ओर से विदेश मंत्रालय ने औपचारिक बयान जारी किया है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच सभी मुद्दों का समाधान केवल द्विपक्षीय वार्ता के जरिए ही किया जाएगा और जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा. विदेश मंत्रालय ने कहा कि हालिया सैन्य कार्रवाइयों ने पाकिस्तान को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है. भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उसे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) को खाली करना होगा.</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमारा लम्बे अरसे से यही राष्ट्रीय पक्ष रहा है कि भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर से संबंधित किसी भी मुद्दे को भारत और पाकिस्तान को द्विपक्षीय तरीके से ही हल करना है. इस नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. जैसा कि आप जानते हैं, लंबित मामला केवल पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए भारतीय क्षेत्र को खाली करना है.</p>
<h3><strong>विदेश मंत्रालय ने न्यूक्लियर वॉर की संभावनाओं को खारिज किया</strong></h3>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से परमाणु युद्ध की अटकलों पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से पारंपरिक क्षेत्र में थी. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी 10 मई को बैठक करेगी, लेकिन बाद में उन्होंने इसका खंडन किया. पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने खुद रिकॉर्ड पर परमाणु पहलू से इनकार किया है. जैसा कि आप जानते हैं, भारत का दृढ़ रुख है कि वह परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा या इसका हवाला देकर सीमा पार आतंकवाद को संचालित करने की अनुमति नहीं देगा.</p>
<p> </p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-05/bharat3.jpg" alt="bharat कश्मीर पर कोई भी मध्यस्थता स्वीकार नहीं, कश्मीर है हमारा PoK को खाली करे पाकिस्तान… भारत का सख्त संदेश" width="978" height="508"></img></p>
<h3><br /><strong>पाकिस्तानी उच्चायोग ने विदेश मंत्रालय से किया था संपर्क</strong></h3>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच 10 मई 2025 को 15.35 बजे शुरू होने वाली फोन कॉल पर समझौते की विशिष्ट तिथि, समय पर काम किया गया. इस कॉल के लिए विदेश मंत्रालय को पाकिस्तानी उच्चायोग से 12.37 बजे अनुरोध प्राप्त हुआ. तकनीकी कारणों से पाकिस्तानी पक्ष को भारतीय पक्ष से हॉटलाइन कनेक्ट करने में शुरुआती कठिनाइयां हुईं. इसके बाद 15.35 बजे भारतीय डीजीएमओ की उपलब्धता के आधार पर समय तय किया गया.</p>
<h3><strong>पाकिस्तान गोलीबारी रोकने पर मजबूर हुआ</strong></h3>
<p>उन्होंने आगे कहा कि आप निश्चित रूप से इस बात को समझेंगे कि 10 तारीख की सुबह हमने पाकिस्तानी वायुसेना के प्रमुख ठिकानों पर बेहद प्रभावी हमला किया था. यही कारण था कि वे अब गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई रोकने को तैयार थे. मैं स्पष्ट कर दूं यह भारतीय हथियारों की ताकत थी जिसने पाकिस्तान को अपनी गोलीबारी रोकने पर मजबूर किया.</p>
<p> </p>
<h3><strong>पाकिस्तानी विदेश मंत्री के दावों पर क्या बोला भारत?</strong></h3>
<p>पाकिस्तानी विदेश मंत्री द्वारा सीएनएन को दिए गए दावों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पिछले हफ्ते ऑपरेशन सिंदूर के परिणामस्वरूप पाकिस्तान ने बहावलपुर, मुरीदके, मुजफ्फराबाद और अन्य स्थानों पर अपने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट होते देखा है. उसके बाद, हमने उसकी सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक कम कर दिया और प्रमुख एयरबेसों को प्रभावी रूप से निष्क्रिय कर दिया. अगर पाकिस्तानी विदेश मंत्री इसे उपलब्धियों के रूप में पेश करना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 18:55:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PoK की एक-एक इंच जमीन पर है भारत का हक़: अमित शाह </title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से संबंधित मुद्दे पर "सवालिया निशान उठाने" को लेकर कांग्रेस की आलोचना की और कहा कि इसकी एक-एक इंच जमीन भारत की है तथा इसे कोई भी ताकत नहीं छीन सकती।</p>
<p>अमित शाह ने झारखंड के खूंटी में एक चुनावी रैली में कहा, ‘‘मणिशंकर अय्यर हमसे कह रहे हैं कि पाकिस्तान का सम्मान करें क्योंकि उसके पास परमाणु बम है। कुछ दिन पहले ‘इंडिया' गठबंधन के नेता फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि पीओके के बारे में बात मत करो क्योंकि पाकिस्तान के पास परमाणु बम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141090/india-has-the-right-on-every-inch-of-pok-land"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/2024_5image_16_18_416893220modi-ll.jpg" alt=""></a><br /><p>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से संबंधित मुद्दे पर "सवालिया निशान उठाने" को लेकर कांग्रेस की आलोचना की और कहा कि इसकी एक-एक इंच जमीन भारत की है तथा इसे कोई भी ताकत नहीं छीन सकती।</p>
<p>अमित शाह ने झारखंड के खूंटी में एक चुनावी रैली में कहा, ‘‘मणिशंकर अय्यर हमसे कह रहे हैं कि पाकिस्तान का सम्मान करें क्योंकि उसके पास परमाणु बम है। कुछ दिन पहले ‘इंडिया' गठबंधन के नेता फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि पीओके के बारे में बात मत करो क्योंकि पाकिस्तान के पास परमाणु बम है। मैं कांग्रेस और ‘इंडिया' गठबंधन को बताना चाहता हूं कि पीओके भारत का है और इसे कोई भी ताकत नहीं छीन सकती।''</p>
<p>उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, "मुझे नहीं पता कि कांग्रेस को क्या हो गया है। संसद में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया था कि पीओके भारत का हिस्सा है। आप (कांग्रेस) अब परमाणु बम के बारे में बात करके पीओके पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। भाजपा का रुख स्पष्ट है कि पीओके की एक-एक इंच जमीन भारत की है और यह भारत का ही रहेगा।''</p>
<p>लोगों से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को वोट देने का आग्रह करते हुए शाह ने कहा कि झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाला गठबंधन आकंठ भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है। उन्होंने कहा, "झामुमो नीत गठबंधन 300 करोड़ रुपए के भूमि घोटाले, 1,000 करोड़ रुपए के खनन घोटाले, 1,000 करोड़ रुपए के मनरेगा घोटाले और 40 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में शामिल है। हम झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन को गरीबों का पैसा हजम नहीं करने देंगे।"</p>
<p>उन्होंने झामुमो और कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। अमित शाह ने कहा, "कांग्रेस ने 70 साल तक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में बाधाएं पैदा कीं, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने पांच साल में मंदिर का निर्माण किया...राहुल बाबा राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में नहीं गए क्योंकि उन्हें अपने 'वोट बैंक' का डर था।" उन्होंने कहा, "मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि कांग्रेस ने अपने शासन के दौरान किसी आदिवासी को राष्ट्रपति क्यों नहीं बनाया।" </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 May 2024 16:49:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय क्षेत्र सीमा के अंदर आखिर कैसे चीन बना रहा है सड़कें </title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत ने गुरुवार को कहा कि उसने शक्सगाम घाटी में निर्माण कार्य को लेकर चीन के समक्ष कड़ी शिकायत दर्ज कराई है, जिसे उसने जमीन पर स्थिति को बदलने का "अवैध" प्रयास बताया है। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि शक्सगाम घाटी भारत का हिस्सा है।</p>
<p>जयसवाल ने मीडिया को अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान उन रिपोर्टों के बारे में एक सवाल के जवाब में अपनी टिप्पणी दी कि चीन रणनीतिक रूप से स्थित क्षेत्र शक्सगाम घाटी में बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है, जो अब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141037/how-is-china-building-roads-inside-indian-territory"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/shaksgam_large_1533_21.webp" alt=""></a><br /><p>भारत ने गुरुवार को कहा कि उसने शक्सगाम घाटी में निर्माण कार्य को लेकर चीन के समक्ष कड़ी शिकायत दर्ज कराई है, जिसे उसने जमीन पर स्थिति को बदलने का "अवैध" प्रयास बताया है। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि शक्सगाम घाटी भारत का हिस्सा है।</p>
<p>जयसवाल ने मीडिया को अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान उन रिपोर्टों के बारे में एक सवाल के जवाब में अपनी टिप्पणी दी कि चीन रणनीतिक रूप से स्थित क्षेत्र शक्सगाम घाटी में बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है, जो अब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का हिस्सा है।</p>
<p>जयसवाल ने कहा कि भारत ने 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी स्वीकार नहीं किया, जिसके तहत पाकिस्तान ने अवैध रूप से इस क्षेत्र को चीन को सौंपने की कोशिश की थी। जयसवाल ने कहा, "शक्सगाम घाटी भारत के क्षेत्र का एक हिस्सा है। हमने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी स्वीकार नहीं किया है, जिसके माध्यम से पाकिस्तान ने अवैध रूप से इस क्षेत्र को चीन को सौंपने का प्रयास किया था।"</p>
<p>जयसवाल ने कहा, "हमने चीन के साथ जमीन पर तथ्यों को बदलने के अवैध प्रयासों के खिलाफ विरोध जताया है।" उन्होंने कहा, "हम अपने हितों की रक्षा के लिए कोई भी आवश्यक उपाय करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।" जयसवाल ने यह भी कहा कि भारत ने शक्सगाम घाटी पर "बहुत कड़ा" रुख अपनाया है।</p>
<p>क्षेत्र में चीनी निर्माण भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में साढ़े तीन साल से अधिक समय से चले आ रहे सीमा विवाद के बीच हो रहा है। व्यापक कूटनीतिक और सैन्य चर्चा के बाद दोनों पक्षों ने कई क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी पूरी कर ली है, इसके बाद भी पूर्वी लद्दाख में कुछ घर्षण बिंदुओं पर भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने हैं। भारत का कहना है कि सीमा पर शांति के बिना चीन के साथ सामान्य संबंध असंभव हैं।</p>
<p>शक्सगाम घाटी या ट्रांस काराकोरम ट्रैक्ट, पीओके के हुंजा-गिलगित क्षेत्र का हिस्सा है। उत्तर में इसकी सीमा पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के झिंजियांग प्रांत से लगती है। पीओके का उत्तरी इलाका इसके पश्चिम और दक्षिण में है। </p>
<p>1963 में, पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी चीन को सौंप दी जब उसने अपने सीमा विवादों को निपटाने के लिए बीजिंग के साथ एक सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए। लेकिन, 1963 के समझौते के अनुच्छेद 6 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि "दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर विवाद के निपटारे के बाद, संबंधित संप्रभु प्राधिकरण सीमा पर पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार के साथ बातचीत फिर से शुरू करेगा।</p>
<p>जैसा कि वर्तमान समझौते के अनुच्छेद दो में वर्णित है, ताकि वर्तमान समझौते को बदलने के लिए एक औपचारिक सीमा संधि पर हस्ताक्षर किया जा सके। इस समझौते ने काराकोरम राजमार्ग के निर्माण की नींव रखी, जिसे 1970 के दशक के दौरान चीनी और पाकिस्तानी इंजीनियरों ने संयुक्त रूप से बनाया था।</p>
<p>जब अंग्रेजों ने 1936 में कश्मीर के महाराजा के जागीरदार मीर ऑफ हुंजा से तगदुंबश पामीर और रस्कम घाटी पर अपने अधिकार छोड़ने के लिए कहा, तो दक्षिण-पश्चिम में शक्सगाम घाटी उनके कब्जे में रही। यह आजादी तक ब्रिटिश भारत की पारंपरिक सीमा बनी रही और 1947 में जम्मू और कश्मीर के विलय के बाद भारत को विरासत में मिली। और, यह वह सीमा थी जिसे पाकिस्तान ने चीन के साथ 1963 के समझौते में समझौता किया था।</p>
<p><br />पाकिस्तान ने 1951 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए। उस समय, संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में दो कम्युनिस्ट विरोधी सैन्य संधियों - सीटो और सेंटो - में सदस्यता के कारण पाकिस्तान को गैर-सोवियत ब्लॉक के सदस्य के रूप में देखा जाता था।</p>
<p>राज्य. चीन विपरीत दिशा में था. 'बुद्धाज वॉरियर्स' में लेखक और इतिहासकार मिकेल डनहम ने लिखा है कि 1950 में चीनी सैनिकों द्वारा तिब्बत पर आक्रमण करने के बाद, पाकिस्तान ने अमेरिकी विमानों को पारगमन सुविधाएं भी प्रदान कीं ताकि वे तिब्बती विद्रोहियों को उपकरण की आपूर्ति कर सकें।</p>
<p>भारत के विभाजन के बाद चीनी सैनिक पूर्वी हुंजा में सीमा पार करने लगे। इसकी शुरुआत 1953 में हुई। 1959 में वे कुछ पशुओं को क्षेत्र से बाहर ले गए। इससे पाकिस्तान की ओर से उग्र प्रतिक्रिया हुई, जो अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध था। हालाँकि, पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान को 1950 के दशक के अंत में चीनियों को खुश करने का एक अवसर मिला क्योंकि भारत-चीन संबंध तेजी से बिगड़ रहे थे।</p>
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                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 May 2024 16:39:42 +0530</pubDate>
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