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                <title> 2024 lok sabha chunav - Swatantra Prabhat</title>
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                <description> 2024 lok sabha chunav RSS Feed</description>
                
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                <title>लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व निर्वाचित शक्ति का सिर्फ 13.63फीसद ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आ चुके हैं और इसी के साथ संसद में बैठने वाले 543 सांसदों की तस्वीर भी साफ हो गई है।इन चुनावों में भारत की आधी आबादी यानी महिलाओं की उम्मीदवारी भी अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी थी। ये पहला ऐसा मौका था, जब सबसे ज्यादा 797 महिला प्रत्याशी मैदान पर थीं.हालांकि सिर्फ 75 महिलाएं ही चुनाव जीत सकीं, जो पिछले 2019 लोकसभा चुनाव से तीन कम हैं।तब 78 महिलाएं संसद पहुंची थीं।</div>
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<div><strong>इन राज्यों में एक भी महिला प्रत्यासी नही जीत सकी।</strong></div>
<div>चुनाव के नतीज़ों पर गौर करें तो, इस बार देश के 8</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142328/womens-representation-in-lok-sabha-is-only-1363-percent-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/img_20240614_170626.jpg" alt=""></a><br /><div>लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आ चुके हैं और इसी के साथ संसद में बैठने वाले 543 सांसदों की तस्वीर भी साफ हो गई है।इन चुनावों में भारत की आधी आबादी यानी महिलाओं की उम्मीदवारी भी अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी थी। ये पहला ऐसा मौका था, जब सबसे ज्यादा 797 महिला प्रत्याशी मैदान पर थीं.हालांकि सिर्फ 75 महिलाएं ही चुनाव जीत सकीं, जो पिछले 2019 लोकसभा चुनाव से तीन कम हैं।तब 78 महिलाएं संसद पहुंची थीं।</div>
<div> </div>
<div><strong>इन राज्यों में एक भी महिला प्रत्यासी नही जीत सकी।</strong></div>
<div>चुनाव के नतीज़ों पर गौर करें तो, इस बार देश के 8 राज्यों- केरल, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड, मिजोरम और सिक्किम से एक भी महिला प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सकी है. वहीं, पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 10 सीटों पर महिला उम्मीदवारों को जीत मिली है। इस बार राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक पार्टियों की बात करें, तो 2024 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 16 प्रतिशत महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था, वहीं कांग्रेस की ओर से 13 प्रतिशत उम्मीदवार महिलाएं थीं। आम आदमी पार्टी ने किसी भी महिला उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा था।</div>
<div> </div>
<div>चुनाव नतीज़ों में भाजपा की 69 महिला उम्मीदवारों में से 31 ने जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस की 41 महिला उम्मीदवार मैदान में थीं, जिनमें से 13 को जीत मिली। वहीं अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की 12 महिला उम्मीदवारों में से 10 ने जीत हासिल की। समाजवादी पार्टी की ओर से 5 महिलाएं इस बार सांसद  चुनी गई हैं।</div>
<div>आरक्षित सीटों की बात करें, तो इस बार कुल 131 आरक्षित सीटों में से 18 पर महिला उम्मीदवार चुनी गई हैं। इसमें अनुसूचित जाति (एससी) समुदायों के लिए आरक्षित 84 सीटों में से 13 प्रतिशत सीटों पर महिलाओं ने जीत हासिल की, जबकि 47 अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षित सीटों में से 15 प्रतिशत सीटें महिला उम्मीदवारों के खाते में गईं।</div>
<div> </div>
<div><strong>इस बार 74 महिला सांसद चुनी गई।किंतु कई देशों से अभी भी पीछे।</strong></div>
<div>लोकसभा2024 के चुनाव में  74 महिला सांसद चुनी गयी  है, जो 2019 की तुलना में चार कम और 1952 में भारत के पहले चुनावों की तुलना में 52 अधिक हैं। ये 74 महिलाएं निचले सदन की निर्वाचित शक्ति का सिर्फ 13.63% हिस्सा बनाती हैं, जो अगले परिसीमन अभ्यास के बाद महिलाओं के लिए आरक्षित 33% से बहुत कम है।</div>
<div> </div>
<div>1952 में निचले सदन में महिलाओं की संख्या सिर्फ़ 4.41% थी। एक दशक बाद हुए चुनाव में यह संख्या बढ़कर 6% से ज़्यादा हो गई, लेकिन 1971 में भारत की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में फिर से 4% से नीचे आ गई । तब से, महिलाओं के प्रतिनिधित्व में धीमी, लेकिन स्थिर वृद्धि हुई है (कुछ अपवादों के साथ), जो 2009 में 10% के आंकड़े को पार कर गई और 2019 में 14.36% पर पहुंच गई। भारत अभी भी कई देशों से पीछे है - दक्षिण अफ्रीका में 46% सांसद, यूनाईटेड किंगडम  में 35% और अमेरिका  में 29% महिलाएँ हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>बीजेपी से 31 कांग्रेस से 13 तो टीएमसी से 10महिला सांसद चुनी गई।</strong></div>
<div>2024 में, महिला लोकसभा सांसद 14 पार्टियों से चुनी गयी  हैं। 31 महिला सांसदों के साथ भाजपा इस सूची में सबसे आगे है, उसके बाद कांग्रेस (13), टीएमसी (11), एसपी (5), डीएमके (3), और चिराग पासवान के नेतृत्व वाली एलजेपीआरवी और जेडी(यू) दोनों में से दो-दो हैं। सात पार्टियों में से प्रत्येक में एक महिला सांसद हैं। लोकसभा में दोहरे अंकों वाली महिला सांसदों वाली 3 पार्टियों में, टीएमसी का अनुपात सबसे अधिक (37.93%) है, उसके बाद कांग्रेस (13.13%) और बीजेपी (12.92%) हैं। निर्वाचित 74 महिला सांसदों में से 43 पहली बार सांसद बनी हैं, और एक (राजद की मीसा भारती) पहली बार लोकसभा सांसद बनी हैं। यह सदन में नए लोगों के कुल प्रतिशत (59% बनाम 52%) से अधिक है।</div>
<div> </div>
<div><strong> 2024 में लगभग 10प्रतिसत महिला उम्मीदवार थी।</strong></div>
<div>2024 के लोकसभा चुनाव में खड़े हुए कुल 8,360 उम्मीदवारों में से लगभग 10% महिलाएँ थीं। समय के साथ यह संख्या भी बढ़ी है - 1957 में यह 3% थी। यह पहली बार है जब महिला उम्मीदवारों का अनुपात 10% तक पहुँच गया है। भाजपा के लगभग 16% उम्मीदवार महिलाएँ थीं, जबकि कांग्रेस के 13% उम्मीदवार महिलाएँ थीं - दोनों ही कुल औसत से ज़्यादा हैं।</div>
<div>गौरतलब है कि मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के आखिरी समय में संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था।जिसके अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटों पर आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि ये कब से लागू होगा इसकी अभी कोई ठोस जानकारी नहीं है।</div>
<div> </div>
<div>ये हमारे समाज की विडंबना ही है कि आधी आबादी को राजनीतिक पार्टियां चुनाव में उम्मीदवार बनाने से कतराती हैं। कई जगह दिग्गजों के खिलाफ सिर्फ नाम के लिए उन्हें खड़ा कर दिया जाता है। पार्टियां महिलाओं को लेकर तमाम वादे तो करती हैं, लेकिन जब अमल की बात आती है, तो इससे कोसों दूर नज़र आती हैं।</div>
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<div> </div>
<div><strong>पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना भी महिलाओ के लिए बाधा।</strong></div>
<div>भारतीय राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की कमी का एक प्रमुख कारण पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना में गहराई से समाया हुआ है। इसने एक धारणा को जन्म दिया है कि राजनीति एक "पुरुषों का काम" है और महिलाएँ नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए उपयुक्त नहीं हैं। इसके अतिरिक्त, महिलाओं से अक्सर घर की देखभाल और बच्चों की परवरिश जैसी अपनी पारंपरिक भूमिकाओं पर ध्यान केंद्रित करने की अपेक्षा की जाती है, जिससे उनके लिए राजनीतिक करियर बनाने के लिए बहुत कम जगह बचती है।</div>
<div> </div>
<div>महिलाओं के सामने एक और महत्वपूर्ण बाधा वित्तीय संसाधनों तक पहुँच की कमी है। महिला उम्मीदवारों के लिए अभियान वित्तपोषण अक्सर एक बड़ा मुद्दा होता है, क्योंकि उन्हें अक्सर पुरुषों के समान वित्तपोषण के अवसर नहीं मिल पाते हैं। इससे उनके लिए प्रभावी अभियान शुरू करना और चुनाव जीतना मुश्किल हो जाता है। भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी की यात्रा एक लंबी और जटिल यात्रा रही है, जिसमें प्रगति और असफलता दोनों ही शामिल हैं।</div>
<div> </div>
<div>भारत में, 73वें और 74वें संविधान संशोधन के तहत पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण प्रदान किया गया है। ये संशोधन 1992 में पारित किए गए थे और इनका उद्देश्य स्थानीय सरकार को सशक्त बनाना और महिलाओं को उनके समुदायों के शासन में अधिक अधिकार देना था।</div>
<div> </div>
<div>73वें संविधान संशोधन के तहत, पंचायतों (ग्राम परिषदों) को गांव, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर महिलाओं के लिए सभी सीटों में से एक तिहाई सीटें आरक्षित करनी होती हैं। इसका मतलब है कि प्रत्येक पंचायत में कुल सीटों की कम से कम एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, और इन सीटों पर केवल महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकती हैं।</div>
<div> </div>
<div>इसी तरह, 74वें संविधान संशोधन के तहत नगर पालिकाओं (नगर परिषदों) को भी वार्ड स्तर पर महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करनी होंगी। इसका मतलब है कि प्रत्येक नगर पालिका में कुल सीटों में से कम से कम एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं और इन सीटों पर केवल महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकती हैं।</div>
<div>इन आरक्षणों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि महिलाओं की आवाज़ सुनी जाए और उनकी ज़रूरतों को ध्यान में रखा जाए।</div>
<div> </div>
<div><strong>गौरतलब है कि संवैधानिक जनादेश के बावजूद, कुछ राज्यों में व्यवहार में आरक्षण का कार्यान्वयन अपर्याप्त रहा है। </strong></div>
<div>धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध अधिनियम, 1955 का उद्देश्य चुनावों के दौरान महिला उम्मीदवारों के खिलाफ भेदभाव को रोकना है। महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मामले में भारत का खराब रिकॉर्ड विश्व आर्थिक मंच के वैश्विक लैंगिक अंतर सूचकांक 2021 से स्पष्ट रूप से उजागर होता है, जहाँ यह 156 देशों में 28 पायदान नीचे खिसककर 140वें स्थान पर आ गया है। भारत दक्षिण एशिया में तीसरा सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला देश है, जो केवल पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान से आगे है, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, मालदीव और भूटान से पीछे है। सबसे बड़ी गिरावट राजनीतिक सशक्तिकरण उप-सूचकांक में है, जहाँ भारत पिछले साल के 18वें स्थान से गिरकर 51वें स्थान पर आ गया है।</div>
<div> </div>
<div>यह विफलता राजनीति से आगे बढ़कर समुदाय के दृष्टिकोण तक भी जाती है। पितृसत्तात्मक मानसिकता अभी भी स्पष्ट है, और उदाहरण के लिए, राजनीति में महिलाओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियाँ सोशल मीडिया पर आम हैं। </div>
<div>पिछले साल प्रकाशित एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में महिला राजनेताओं को ट्विटर पर किस तरह के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। चुनाव लड़ने वाली महिलाओं पर अक्सर लैंगिक भेदभाव वाली टिप्पणियाँ की जाती हैं , चाहे वे उनके रूप-रंग, पहनावे या अनुभव के बारे में हों।इसके अलावा राजनीति में आने वाली महिलाओं को अक्सर यौन शोषण का भी शिकार होना पड़ता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Jun 2024 16:43:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बदले बदले मेरे सरकर नज़र आते हैं,एक अकेला सब पर भारी की बेचारगी ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>जे.पी.सिंह</strong></div>
<div>  </div>
<div style="text-align:center;"><strong>फिल्म चौदहवी का चांद में शकील बदायुनी का लिखा और लता मंगेशकर का गया ये गीत </strong></div>
<div style="text-align:center;"><strong>“बदले बदले मेरे सरकर नज़र आते हैं,घर की बरबादी के आसार नज़र आते हैं” </strong></div>
<div>  </div>
<div>आपने सुना होगा। रविवार को जब नरेन्द्र मोदी ने तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली तो मोदी जी का व्यवहार बदला हुआ दिखाई दिया और नरेन्द्र मोदी विनम्रता की प्रतिमूर्ति बने दिखाई पड़े। मोदी ने विनम्र लहजे में तीसरे कार्यकाल की शपथ ली।</div>
<div>  </div>
<div>पिछले हफ़्ते समाप्त हुए चुनावों ने श्री मोदी को संसदीय बहुमत से वंचित कर दिया और सत्ता में बने रहने के लिए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142134/instead-my-government-seems-to-be-alone-and-helpless-outweighing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/rajneeti1.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>जे.पी.सिंह</strong></div>
<div> </div>
<div style="text-align:center;"><strong>फिल्म चौदहवी का चांद में शकील बदायुनी का लिखा और लता मंगेशकर का गया ये गीत </strong></div>
<div style="text-align:center;"><strong>“बदले बदले मेरे सरकर नज़र आते हैं,घर की बरबादी के आसार नज़र आते हैं” </strong></div>
<div> </div>
<div>आपने सुना होगा। रविवार को जब नरेन्द्र मोदी ने तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली तो मोदी जी का व्यवहार बदला हुआ दिखाई दिया और नरेन्द्र मोदी विनम्रता की प्रतिमूर्ति बने दिखाई पड़े। मोदी ने विनम्र लहजे में तीसरे कार्यकाल की शपथ ली।</div>
<div> </div>
<div>पिछले हफ़्ते समाप्त हुए चुनावों ने श्री मोदी को संसदीय बहुमत से वंचित कर दिया और सत्ता में बने रहने के लिए उन्हें विभिन्न गठबंधन सहयोगियों की ओर रुख करना पड़ा। जब तक मोदी के राजनितिक प्रबन्धक अन्य दलों के सांसदों को प्रलोभित करके आना पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर लेते तब तक उन्हें जदयू और चन्द्र बाबु नायडू की टीडीपी की धुन पर नाचना पड़ेगा। </div>
<div> </div>
<div>उनके नेताओं को मोदी के समक्ष अपनी मांगें और नीतिगत राय रखने के लिए जाते समय टीवी कर्मियों द्वारा घेर लिया गया है। उनके विरोधियों को भी अधिक प्रसारण समय मिल रहा है, क्योंकि स्टेशन उनके समाचार सम्मेलनों का सीधा प्रसारण कर रहे हैं, जो हाल के वर्षों में लगभग अनसुना है।</div>
<div> </div>
<div>मोदी में ही सबसे बड़ा बदलाव देखा जा सकता है। फिलवक्त एक अकेला सब पर भारी और 56 इंच के सीने वाला दम्भ तिरोहित हो गया  है। वे खुद को विनम्रता की प्रतिमूर्ति के रूप में पेश कर रहे हैं। मोदी ने शपथ ग्रहण से पहले शुक्रवार को अपने गठबंधन के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा, "सरकार चलाने के लिए बहुमत ज़रूरी है। लेकिन देश चलाने के लिए आम सहमति ज़रूरी है।" "लोग चाहते हैं कि हम पहले से बेहतर प्रदर्शन करें।"</div>
<div> </div>
<div>मोदी का संदेश था कि वे अगले दस साल तक प्रधानमंत्री रहेंगे (हालांकि उन्होंने यह नहीं कहा कि यह उन्हें कैसे पता है), लेकिन हां उन्होंने यह बात सरसरे तौर पर कही थी । असली संदेश तो सहयोगी दलों के लिए यह था कि वे खबरों और सूचनाओं पर ध्यान न दें।</div>
<div> </div>
<div>संदेश था कि शपथ ग्रहण के साथ ही उनकी सरकार के बारे में खबरें तो आना शुरु ही ही जाएंगी, लेकिन सहयोगी दल इनकी अनदेखी करें और बिना पुष्टि किसी बात पर भरोसा न करें। आखिर उन्हें यह सब कहने की जरूरत क्यों थी? निश्चित रूप से इसलिए क्योंकि अब सरकार के बारे में उस तरह लिखा जाएगा जैसा कि पिछले एक दशक में नहीं लिखा गया। हम अभी एक पूर्ण गोपनीयता वाले काल से बाहर आए हैं।</div>
<div> </div>
<div>पिछले दो कार्यकाल यानि दस साल  को देखें  तो मोदी की कैबिनेट के मंत्रियों को नोटबंदी की हवा तक नहीं थी। बाद में यह सामने आया था कि नोटबंदी के ऐलान से चंद घंटे पहले ही कैबिनेट की बैठक बुलाई गई थी जिसमें नोटबंदी को मंजूरी दिलाई गई थी। लेकिन इस बैठक से पहले सभी मंत्रियों को उनके मोबाइल फोन बाहर ही छोड़ने की हिदायत दी गई थी और ऐसा इसलिए किया गया था कि नोटबंदी की खबर बाहर न चली जाए। चूंकि मंत्रियों को भी नहीं पता था, इसलिए उनके मंत्रालयों को भी कोई खबर नहीं थी। ऐसी ही स्थिति 2020 में लागू किए गए देशव्यापी लॉकडाउन को लेकर भी थी जिसके बाद सरकार में शामिल लोग तक सकते में आ गए थे।</div>
<div> </div>
<div>दरअसल अभी तक नरेंद्र मोदी की अति-केंद्रीकृत निर्णय-प्रक्रिया रही है ऐसे में  यह उम्मीद कम ही है कि वे गठबंधन सरकार चलने  के लिए 'सामूहिक' निर्णय-प्रक्रिया की शैली अपनाएंगे। संसदीय लोकतंत्र में मोदी ने लगभग 'राष्ट्रपति' प्रणाली की कार्यशैली अपना राखी थी ,इसका उल्लेख समय-समय पर होता रहा है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि उनके शासन में 'ब्रांड मोदी' को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है, तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने सभी चुनावों में उन्हें ही आगे करके चुनाव लड़ती रही है। </div>
<div> </div>
<div>मोदी की 2019 की विशाल जीत को राजनितिक विश्लेषकों  ने भारत के लोकतंत्र के लिए खतरनाक माना, क्योंकि यह जनादेश प्रधानमंत्री मोदी और विपक्षी दलों के एक गैर-मौजूद दावेदार के बीच चुनाव की दौड़ को राष्ट्रपति शैली में परिवर्तित करके हासिल किया गया था। पिछले पांच सालों पर नज़र डालने पर ऐसा लगता है कि इस जनादेश ने मोदी सरकार की राष्ट्रपति शैली की सरकार को बढ़ावा दिया है - जिसका केंद्रबिंदु पीएमओ है। यह शैली तब और भी स्पष्ट होती है जब आप 2019 की जीत के बाद मोदी सरकार को कुछ असफलताओं और चिंताओं का सामना करना पड़ा। </div>
<div> </div>
<div>प्रधानमंत्री होने के नाते मोदी कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) के प्रमुख हैं, जबकि दूसरे सदस्य उनके डिप्टी गृह मंत्री</div>
<div>अमित शाह हैं। पिछले पांच सालों में, पीएमओ में महत्वपूर्ण पदों पर काम करने वाले कुछ अधिकारियों को सरकार की महत्वपूर्ण चिंताओं को संभालने के लिए एसीसी द्वारा भेजा गया था। शायद चिंता यह थी कि वे नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं और इस तरह एक मजबूत नेता के रूप में प्रधानमंत्री की छवि को धूमिल कर सकते हैं।</div>
<div> </div>
<div>एसीसी द्वारा कुछ अन्य अधिकारियों को भी मोदी के कार्यालय में काम करने के लिए बुलाया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एक प्रणाली जिसे केवल प्रधानमंत्री पर ध्यान केंद्रित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, सुचारू रूप से चले। लेकिन, जबतक इस बार गठबंधन सरकार है अब ऐसा कुछ होता नहीं दिखता । सहयोगी दलों की मौजूदगी के चलते अब कैबिनेट की जिम्मेदारी और अधिकार सिर्फ एक ही व्यक्ति के पास अब नहीं रहेंगे। यह लोकतंत्र के लिए एक अच्छा संकेत है।</div>
<div> </div>
<div>पिछले एक दशक से  मोदी के नेतृत्व की पहचान यह रही है कि वे अपने विरोधियों को तोड़ने और उन्हें अपने पक्ष में लाने के लिए पुलिस मामलों के दबाव से लेकर सत्ता में हिस्सेदारी और उसके लाभों के लालच तक अपने पास मौजूद सत्ता के हथकंडों का इस्तेमाल करते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि एक कमजोर सत्तारूढ़ पार्टी शीर्ष पर अपनी जगह मजबूत करने के लिए कुछ सांसदों को अपनी तरफ खींचने के लिए इस तरह की रणनीति अपना सकती है।</div>
<div> </div>
<div>प्रश्न यह है कि क्या श्री मोदी सचमुच वह बन पाएंगे जो वे अपने निर्वाचित पद पर दो दशक से अधिक समय के दौरान नहीं बन पाए: आम सहमति बनाने वाले। अपने दो दशक से ज़्यादा के कार्यकाल में पहली बार मोदी सत्ता में बने रहने के लिए गठबंधन की राजनीति में हैं। अब तक, जब से वे सत्ता में हैं - चाहे गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य स्तर पर या राष्ट्रीय स्तर पर - उनकी भारतीय जनता पार्टी को हमेशा बहुमत मिला है। </div>
<div> </div>
<div>जब वे 13 साल बाद गुजरात से बाहर निकले, तो उन्होंने इतनी मज़बूत पकड़ बना ली थी और विपक्ष को इस कदर परास्त कर दिया था कि राज्य प्रभावी रूप से एक पार्टी के शासन वाला राज्य बन गया था। 2014 में उनकी पहली राष्ट्रीय जीत, जिसमें उनकी भाजपा को बहुमत मिला, ने भारत में दशकों से चली आ रही गठबंधन सरकार को समाप्त कर दिया, जिसमें कोई भी पार्टी संसद में बहुमत के लिए आवश्यक 272 सीटें हासिल नहीं कर पाई थी। 2019 में, वे और भी बड़े बहुमत के साथ फिर से चुने गए।</div>
<div> </div>
<div>मोदी को मिले आसुरी बहुमत  ने उनकी दक्षिणपंथी पार्टी के दशकों पुराने एजेंडे को तेजी से पूरा करने में मदद की, जिसमें एक लंबे समय से विवादित स्थल पर एक भव्य हिंदू मंदिर का निर्माण शामिल था , जहां कभी मस्जिद हुआ करती थी, और कश्मीर के मुस्लिम बहुल क्षेत्र को लंबे समय से प्राप्त विशेष दर्जे को समाप्त करना शामिल था।</div>
<div> </div>
<div>मोदी के शासन की पहचान संसदीय प्रक्रियाओं और कानून पर बहस के प्रति उपेक्षा थी। 2016 में उनके अप्रत्याशित, रातोंरात विमुद्रीकरण - जिसने भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के प्रयास में भारत की मुद्रा को अमान्य कर दिया - ने देश को अराजकता में डाल दिया और अभी भी नकदी-संचालित अर्थव्यवस्था को झटका दिया। इसी तरह, कृषि बाजार में सुधार के उद्देश्य से कानून बनाने की जल्दबाजी के परिणामस्वरूप एक साल तक दिल्ली में विरोध प्रदर्शन हुए, जिससे मोदी को पीछे हटना पड़ा ।</div>
<div> </div>
<div>चुनाव परिणाम आने से पहले, मोदी की पार्टी ने भविष्यवाणी की थी कि उनका गठबंधन भारत की 543 सीटों वाली संसद में 400 सीटें जीतेगा। श्री मोदी ने कहा कि विपक्ष "दर्शकों की गैलरी में" बैठने के लिए सिमट जाएगा। उनकी सरकार के अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया था कि अपने नए कार्यकाल में वह अपनी पार्टी के एजेंडे में बचे एकमात्र मुख्य मुद्दे को लागू करने का प्रयास करेंगे: इस विविधतापूर्ण देश में " समान नागरिक संहिता " लागू करना, जो वर्तमान में विवाह और विरासत जैसे मुद्दों पर शासन करने वाले विभिन्न धर्मों के अलग-अलग कानूनों को प्रतिस्थापित करेगा। उनकी पार्टी के नेताओं ने मोदी को न केवल वर्तमान कार्यकाल के लिए बल्कि 2029 में अगले चुनाव के लिए भी अपना नेता बताया, जब वे 78 वर्ष के हो जाएंगे। बेमेल गठबंधन इसलिय कहा जा रहा है क्योंकि जिन दो मुख्य गठबंधन दलों ने उन्हें सरकार बनाने के लिए संसद में न्यूनतम सीटें हासिल करने में मदद की, वे मोदी की हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा के विपरीत धर्मनिरपेक्ष हैं।</div>
<div> </div>
<div>एन. चंद्रबाबू नायडू, जिनकी पार्टी के पास 16 सीटें हैं, मुस्लिम अल्पसंख्यकों के साथ मोदी के व्यवहार की आलोचना करते हुए अतीत में भी तीखी आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने अपने विरोधियों को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करने और "सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट करने के लिए कदम उठाने" के लिए भी खुले तौर पर मोदी की आलोचना की है।यही नहीं नायडू की पार्टी ने आन्ध्र में मुस्लिमों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण को अपने घोषणा पत्र में शामिल किया है। चंद्रबाबू नायडू हमेशा से ही राजनीति के शातिर खिलाड़ी रहे हैं और अपने राज्य और इसकी राजधानी अमरावती के लिए वित्तीय पैकेज की तलाश कर रहे हैं। </div>
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<div>पहली बार गठबंधन सरकार चलाने की संभावना का सामना कर रहे प्रधानमंत्री को तीन मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा: एनडीए सहयोगी, मजबूत विपक्ष, और पार्टी-आरएसएस संबंधों को लेकर तालमेल बिठाना।</div>
<div>अटल बिहारी वाजपेयी ने 1996, 1998 और 1999 में अपने प्रधानमंत्रित्व काल में गठबंधन सरकारें चलाईं। दूसरी ओर मोदी ने हमेशा गुजरात (2001 से 2014) और पिछले 10 वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर बहुमत वाली सरकारें चलाई हैं। 4 जून को आए नतीजे बिल्कुल भी प्रधानमंत्री की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे। </div>
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<div>मोदी को तीन मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें सहयोगियों को साथ लेकर चलना होगा - मंत्रिमंडल में जगह पाना कहानी का सिर्फ़ एक हिस्सा है। सहयोगियों ने अग्निपथ योजना की समीक्षा पर ज़ोर दिया है, जो उत्तरी राज्यों में एक भावनात्मक चुनावी मुद्दा बनकर उभरी है, और इसमें बदलाव की संभावना है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को ठंडे बस्ते में डालने की संभावना है, जबकि "एक राष्ट्र, एक चुनाव" को लागू करना मुश्किल होता जा रहा है। भाजपा राष्ट्रीय जाति जनगणना की नीतीश कुमार की मांग से कैसे निपटती है, यह देखना बाकी है।</div>
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<div>हिंदू-मुस्लिम बयानबाजी भी कम से कम फिलहाल के लिए पीछे रह सकती है। टीडीपी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि उसका आंध्र प्रदेश में मुसलमानों के लिए मौजूद 4% आरक्षण (ओबीसी कोटे के तहत) को छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। अभियान के दौरान, भाजपा ने धार्मिक आधार पर मुसलमानों के लिए आरक्षण के खिलाफ तीखा हमला किया।</div>
<div> </div>
<div>मोदी के लिए दूसरी चुनौती लोकसभा में मजबूत विपक्ष से आएगी। सदन में 232 सदस्यों के साथ, यह जोरदार, शोरगुल वाला, झगड़ालू होगा और सरकार को मुश्किल में डाल सकता है। और बिना चर्चा के विधेयक पारित करना या सदस्यों को अयोग्य ठहराना और निलंबित करना अधिक कठिन होगा, जैसा कि पिछले कार्यकाल के दौरान हुआ था।</div>
<div> </div>
<div>लेकिन मोदी को जिस सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में आगे बढ़ना होगा, वह है उनकी पार्टी और आरएसएस। पिछले कुछ दिनों में वरिष्ठ भाजपा नेताओं और संघ के शीर्ष नेतृत्व के बीच बैठकें हुई हैं और आरएसएस नेतृत्व की आंतरिक बैठकें हुई हैं, जिसमें भाजपा की 60 से अधिक सीटों की गिरावट के कारणों पर चर्चा की गई है। लेकिन भाजपा और आरएसएस के वरिष्ठ नेता चुप हैं और इस साल के अंत में महाराष्ट्र , हरियाणा और झारखंड में होने वाले राज्य चुनावों और शायद अगले साल दिल्ली और बिहार में होने वाले चुनावों के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। इन सभी राज्यों में, भारत गठबंधन एनडीए के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करने की संभावना  है। मोदी को इन राज्यों में राजनीतिक पहल को फिर से हासिल करने और जहां आवश्यक हो, वहां सही दिशा में काम करने के लिए कहा जाएगा।</div>
<div> </div>
<div>जब सत्ता की बात आती है, तो राजनेता व्यावहारिक होते हैं, चाहे उसे छीनना हो या बनाए रखना हो। वे दीवार पर लिखी इबारत को पढ़ने और नई परिस्थिति के हिसाब से खुद को ढालने में माहिर होते हैं और मोदी भी इसका अपवाद नहीं हैं। लेकिन, इसमें कोई संदेह नहीं है कि मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में अपने लिए काम तय करेंगे। समय ही बताएगा कि उनकी सरकार एक संक्रमणकालीन व्यवस्था साबित होगी या वे नए जोश के साथ वापसी कर पाएंगे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jun 2024 16:44:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सासंद प्रतिनिधि राजेश रमाशंकर व कमलेश पांडे के कुशल नेतृत्व की हो रही प्रशंसा। </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>ब्यूरो गोन्डा।</strong> किसी भी राजनेता का  प्रतिनिधी यदि जनता के दुख दर्द मे सम्मिलित होकर जनता के बीच समर्पण होकर रहता है तो उस राजनेता को उसकी राजनीतिक रणनीति मे ज्यादा कठिनाई नही होती है।सासंद गोन्डा के पास ऐसा ऐसा  तीन  प्रतिनिधि है जिसका नाम राजेश सिंह रमाशंकर मिश्रा और कमलेश पांडे  है।जो सासंद गोंडा के हर कार्य को सुलभ व सरल बनाने मे हर क्षण मौजूद रहा करते है। वही सासंद कीर्तिवर्धन सिंह के गैर मौजूदगी मे जनता के हर समस्या पर तत्परता से उसका निदान करने का कार्य किया करते है।</div>
<div>  </div>
<div>वैसे तो सासंद के पास कार्यकर्ता कयी</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142041/the-efficient-leadership-of-mps-rajesh-ramashankar-and-kamlesh-pandey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/1003390296.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>ब्यूरो गोन्डा।</strong> किसी भी राजनेता का  प्रतिनिधी यदि जनता के दुख दर्द मे सम्मिलित होकर जनता के बीच समर्पण होकर रहता है तो उस राजनेता को उसकी राजनीतिक रणनीति मे ज्यादा कठिनाई नही होती है।सासंद गोन्डा के पास ऐसा ऐसा  तीन  प्रतिनिधि है जिसका नाम राजेश सिंह रमाशंकर मिश्रा और कमलेश पांडे  है।जो सासंद गोंडा के हर कार्य को सुलभ व सरल बनाने मे हर क्षण मौजूद रहा करते है। वही सासंद कीर्तिवर्धन सिंह के गैर मौजूदगी मे जनता के हर समस्या पर तत्परता से उसका निदान करने का कार्य किया करते है।</div>
<div> </div>
<div>वैसे तो सासंद के पास कार्यकर्ता कयी है लेकिन केवल नाम के पाये जाते है जिन्हे लोग मजबूरी मे देखना पसंद करते है। थोड़ा कहा जाए ज्यादा समझा जाए बेहतर होगा। इस लोक सभा चुनाव मे सासंद प्रतिनिधि राजेश सिंह ने चुनाव के एक सप्ताह पहले समूचे जनपद मे सोसल मीडिया के साथीयों के द्वारा जबरदस्त तरीके से चुनाव अभियान चलाया जिसके माध्यम से सासंद को पुनः चुनाव जीतने मे मदद मिली। जिसकी प्रशंसा क्षेत्र मे हो रही है।</div>
<div> </div>
<div>सासंद प्रतिनिधि राजेश सिंह के मेहनत व कार्यकर्ताओं के मनोबल को हर क्षण बनाये रखना यह भी चुनाव जीत का हिस्सा रहा। जिस कार्य के लिए सासंद वही रमाशंकर मिश्रा गोंडा विधानसभा में हर कार्यकर्ताओं से मिलकर सांसद गोंडा के पक्ष में मतदान करने की अपील किया जनपद मुख्यालय पर हमेशा मौजूद रहने का फायदा कहीं ना कहीं सांसद गोंडा को मिलता दिखाई दिया यही हाल कमलेश पांडे का है जो मनकापुर राजमहल में रहकर मनकापुर उतरौला से आने वाले हर लोगों का मदद करते हुए मनकापुर से काफी लिड लेकर के चले यह सराहनीय पहला कमलेश पांडे का था वैसे तो सांसद प्रतिनिधि राजेश सिंह पूरे गोंडा लोकसभा क्षेत्र के हर व्यक्ति की मदद करने के लिए तात्पर रहते थे उसी का फायदा है की संसद गोंडा को कब मेहनत करते हुए जीत हासिल हुई है</div>
<div> </div>
<div>प्रतिनिधि को क्षेत्र लोगो ने पवन सिंह संतोष तिवारी संदीप मिश्रा इमलिया मिश्र संतोष शुक्ला भरत सिंह, शिवमगल शुक्ल, कृष्ण कुमार शुक्ल, राज मंगल शुक्ल, रामचंद्र गुप्ता,हफीजुल रहमान, श्याम प्रकाश, रवि शुक्ल, महेश शुक्ल, वैभव सिंह, रामकुमार, श्याम सुंदर ,अभिषेक पाठक, अंकु उपाध्याय संतोष पांडे, रिंकू तिवारी, सुरेंद्रनाथ मिश्रा आदि सैकडो लोगो ने हार्दिक बधाई दी है।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jun 2024 17:42:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चरण-पादुका की नहीं बैशाखी की सत्ता</title>
                                    <description><![CDATA[<p>त्रेता में राम राज की स्थापना से पहले 14  साल तक चरण-पादुका की सत्ता थी ।  कलियुग में एक बार फिर ऐसी ही सत्ता जनता के सामने आ रही है,लेकिन इस सत्ता में चरण-पादुकाएं नहीं बल्कि बैशाखियाँ इस्तेमाल की जा रहीं हैं। नयी सरकार आजकल में वजूद में आ जाएगी। मजे की बात ये है कि  ये सरकार भले ही अकेले भाजपा या मोदीकी सरकार नहीं है लेकिन इसका झंका-मंका पहले की ही तरह किया जाने वाला है। यानि कि  नए पंत प्रधान के रूप में जो भी शपथ लेगा पूरी भव्यता और दिव्यता के साथ लेगा ताकि चेहरे पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142005/the-power-of-the-crutches-not-of-the-feet-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/dsgdf.jpg" alt=""></a><br /><p>त्रेता में राम राज की स्थापना से पहले 14  साल तक चरण-पादुका की सत्ता थी ।  कलियुग में एक बार फिर ऐसी ही सत्ता जनता के सामने आ रही है,लेकिन इस सत्ता में चरण-पादुकाएं नहीं बल्कि बैशाखियाँ इस्तेमाल की जा रहीं हैं। नयी सरकार आजकल में वजूद में आ जाएगी। मजे की बात ये है कि  ये सरकार भले ही अकेले भाजपा या मोदीकी सरकार नहीं है लेकिन इसका झंका-मंका पहले की ही तरह किया जाने वाला है। यानि कि  नए पंत प्रधान के रूप में जो भी शपथ लेगा पूरी भव्यता और दिव्यता के साथ लेगा ताकि चेहरे पर पड़ीं शिकन किसी को नजर न आएं।</p>
<p>पूरी दुनिया की तरह हम भी देश की भावी बैशखी सरकार के नेताओं और भावी पंत प्रधान को अपनी शुभकामनाएं देते हैं कि  वे पूरे पांच साल अबाध सत्ता में रहकर जनता की सेवा करें। लेकिन हमारी शुभकामनाओं से क्या होना जाना है ।  होगा तो वो ही जो राम जी ने रच रखा है। राम जी की लिखावट हम जैसे आम लोग कैसे समझ सकते हैं ? राम जी की लिखावट तो उन्हें अयोध्या लाने का दम्भ  दिखने वाले लोग ही नहीं पढ़ पाए और ठीक नए मंदिर के आसपास ही जीत का परचम नहीं फहरा पाए।</p>
<p>देश में गठबंधन की सरकार कोई पहली बार नहीं बन रही है ।  देश के पास इसका पर्याप्त तजुर्बा है ,लेकिन जनता के पास भी इस बात का खासा तजुर्बा है कि गठबंधन की सरकारें कैसे काम करतीं हैं और उनकी उम्र कितनी होती है ? गठबंधन की सरकार कायदे से जनता की सरकार होती है क्योंकि इसमें  एक नहीं बल्कि अनेक दल शामिल होते हैं ,लेकिन गठबंधन की सरकार चलाना आसान नहीं होता। कुछ नेता इसमें कामयाब होते हैं तो कुछ नहीं। गठबंधन की सरकार कि ऊपर हमेशा अनिश्चय कि बादल मंडराते रहते हैं। ये कब गरजें और कब बरस जाएँ कोई नहीं जानता।</p>
<p>बहुत पीछे न भी जाएँ तो देश में आपातकाल के बाद बनी गठबंधन की सरकार ढाई साल में ही अपने ही बोझ से गिर गयी थी। जनता ने जिस कथित तानाशाही कि खिलाफ जनादेश देकर गठबंधन की सरकार बनाने का रास्ता दिया था उसी जनता ने ढाई साल बाद गठबंधन में शामिल दलों और उसके नेताओं को धूल भी चटा दी थी। अटल बिहारी बाजपेयी और डॉ मन मोहन सिंह जैसे बिरले ही नेता हुए हैं जिन्होंने ढंग से गठबंधन की सरकार को चलाया। डॉ मन मोहन सिंह ने तो पांच नहीं बल्कि दस साल तक गठबंधन की सरकार चलाई। 2024  में भी जनादेश भाजपा सरकार की तानाशाही कि खिलाफ आया है लेकिन संयोग से जनता ने पार्टी को तो सत्ता से हटा दिया लेकिन जिस व्यक्ति को लेकर आक्रोश था वो नया चेहरा  लगाकर बैशाखियों  कि सहारे फिर सत्ता के शीर्ष पर है।</p>
<p>चूंकि ये नई सरकार बैशाखियों के सहारे चलने वाली सरकार है इसलिए इस बार तानाशाही के सर उठाने के अवसर तो कम आएंगे ,लेकिन कहते हैं कि चोर चोरी छोड़ सकता है हेराफेरी नहीं ,इसलिए ये सरकार कब गिर जाये ,कोई नहीं जानता। खुद भाजपा और टीडीपी तथा जेडीयू को भी इसका पता नहीं है। नयी सरकार की उम्र देशकाल तथा परिस्थितयां तय करेंगीं। नयी सरकार का एजेंडा भी पहले की तरह हिंदुत्व ,सनातन , एक राष्ट्र-एक चुनाव या सीएए जैसे मुद्दों क लेकर विवादास्पद नहीं होगा। नई सरकार तीन बड़े और बाकी के छोटे दलों की मंशा के अनुरूप  साझा कार्यक्रम [कॉमन मिनिमम प्रोग्राम ] और एजेंडे के अनुरूप चलेगी । नए पंत प्रधान में इतनी कूबत नहीं है कि  वो परदे के पीछे से अपना एजेंडा चला सके।</p>
<p>आपको याद दिला दूँ कि  नयी सरकार के नए दूल्हे राजा ने 2002  में भी राजधर्म नहीं निभाया था और न पिछले एक दशक में। 2002  में तो टोकने  वाले अटल बिहारी बाजपेयी भी थे  लेकिन बीते एक दशक में किसी ने भी अटल जी की तरह राजधर्म की याद दिलाने का दुस्साहस नहीं दिखाया। सबके सब पंत प्रधान के सामने भीगी बिल्ली बने रहे। नए जनादेश के बाद भी सबसे बड़ी पार्टी के संसदीय दल की बैठक में कोई एक महावीर उठकर खड़ा नहीं हुआ जो पार्टी का बंटाधार करने वाले अपने नेता से प्रश्न या प्रतिप्रश्न कर सके।प्रश्न करने की मनाही पहले भी  थी और आगे भी शायद रहेगी। बावजूद इसके समाज की प्रश्नाकुलता समाप्त नहीं होती। लोग स्वाभाविक रूप से सवाल करते हैं। उन्हें पता नहीं होता कि  प्रश्न करना भी आजकल अपराध की श्रेणी में शामिल कर दिया गया है।</p>
<p> 2024  में पूरा देश चाहता है कि केंद्र की सरकार एक लोकतान्त्रिक सरकार साबित हो। एक ऐसी सरकार जिसके एजेंडे में मंगलसूत्र,मुर्गा-मछली,मुजरा और मुसलमान शीर्ष पर न हो ।  देश को नई सरकार से एक ही दरकार है कि  वो देश की सियासत से अदावत का खात्मा कर   समाज में सद्भाव की पुनर्स्थापना करे। समाज में व्याप्त भय के वातावरण को निर्मूल करे। ये कोई कठिन काम नहीं है ,लेकिन इसे कठिन बना दिया गया है। पुरानी सरकार समझती थी कि ' भय बिन प्रीत ' हो ही नहीं सकती,किन्तु जनता ने साबित कर दिया कि  भय से भय ही पैदा होता है लेकिन प्रीति नहीं। ये त्रेता नहीं कलियुग है । इस युग  में हर  चीज  कि मायने  बदल गए हैं। भारत को उन देशों की नकल भूलकर भी नहीं करना चाहिए जहाँ भय दिखाकर प्रीति करने कि लिए बाध्य किया जा रहा है। हम तो बचपन से सुनते आ रहे हैं कि -' है प्रीति यहां की रीति सदा ,मै गीत वहां कि गाता हूँ, भारत का रहने वाला हूँ,भारत की बात सुनाता हूँ। '</p>
<p>देश की अठारहवीं संसद का स्वरूप भी सरकार की तरह बदला हुआ नजर आएगा ।  नई संसद में अब शायद ही कोई सत्तारूढ़  दल का सदस्य अल्पसंख्यक सांसद को बिधूड़ी की भाषा में धमका पाए  ,क्योंकि नई संसद में भाजपा की लाख  कोशिशों कि बावजूद कम से कम 23  अल्पसंख्यक मुसलमान सांसद भी चुनकर आये हैं ,नई संसद में हाथी का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। भाजपा की ' बी '  टीम माने जाने वाले कुछ दलों की ताकत भी इस बार सदन में कम दिखाई देगी।संसद में संतुलन साफ़ दिखाई देगा। अब सत्तारूढ़  दल विपक्ष की न अनदेखी कार पाएंगे और न ध्वनिमत से विधेयक पारित  करने  का दुस्साहस दिखा पाएंगे ।  संसद में अब व्यक्ति विशेष कि नारे भी शायद ही लगाए जायें।</p>
<p> नयी सरकार और नयी संसद कि बारे में आज ही सब कुछ लिख देना उचित  नहीं है। हमारे यहां ' नई बहू की पालागन ' का रिवाज है ,इसलिए नई बहू से भी ज्यादा उम्मीदें  नहीं है।  नई बहू पहले चलना,उठना-बैठना तथा  घूंघट सम्हालना सीख ले ,बाद में सब कुछ देखा जाएगा।  सत्ता की सीता के हांथों में अभी  तो मेंहदी  का रंग  सुर्ख भी नहीं हुआ है। हमें नयी सरकार को वक्त देना पड़ेगा ।  पहले छह महीने में पूत  के पांव  पालने  में दिखाई देने  लगेंगे । अभी तो सवाल ये है कि<br />-कन्हैया ! किसको कहेगा तू मैया ?<br />एक ने तुझको जन्म दिया<br /> और एक ने तुझको पाला। रे कन्हैया !</p>
<p><strong> राकेश अचल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jun 2024 16:51:41 +0530</pubDate>
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                <title>कानपुर में दिन भर होती रही राष्ट्रीय राजनीति की चर्चा </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>कानपुर। </strong>इस बार लोकसभा के परिणाम कुल ऐसे मिल रहे हैं कि स्थानीय प्रत्याशी पर चर्चा न करके हर व्यक्ति राष्ट्रीय राजनीति की चर्चा करते नजर आया। काउंटिंग जारी थी लेकिन भारतीय जनता पार्टी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार अकेले बहुमत से दूर रही। लेकिन एनडीए को बहुमत मिला। </div>
<div>  </div>
<div>पिछले लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में भले ही सरकार एनडीए की थी लेकिन भारतीय जनता पार्टी अकेले बहुमत से अधिक थी ये भारतीय जनता पार्टी के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात रही। उत्तर प्रदेश में उससे भी चिंतनीय प्रश्न यह यहा कि इंडिया गठबंधन एनडीए से आगे</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141997/national-politics-was-discussed-throughout-the-day-in-kanpur%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/pm_modi__nitish_kumar__chandrababu_naidu.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div><strong>कानपुर। </strong>इस बार लोकसभा के परिणाम कुल ऐसे मिल रहे हैं कि स्थानीय प्रत्याशी पर चर्चा न करके हर व्यक्ति राष्ट्रीय राजनीति की चर्चा करते नजर आया। काउंटिंग जारी थी लेकिन भारतीय जनता पार्टी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार अकेले बहुमत से दूर रही। लेकिन एनडीए को बहुमत मिला। </div>
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<div>पिछले लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में भले ही सरकार एनडीए की थी लेकिन भारतीय जनता पार्टी अकेले बहुमत से अधिक थी ये भारतीय जनता पार्टी के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात रही। उत्तर प्रदेश में उससे भी चिंतनीय प्रश्न यह यहा कि इंडिया गठबंधन एनडीए से आगे जा रहा था और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी भारतीय जनता पार्टी से आगे जा रही थी। अचानक ऐसा कैसे हो गया। शायद ऐसा किसी ने नहीं सोचा था।</div>
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<div>भारतीय जनता पार्टी अब पूरी तरह से अपने सहयोगी दलों पर निर्भर है जिससे सहयोगी दलों की अहमियत बढ़ चुकी है। लेकिन इसमें से चन्द्र बाबू नायडू की टीडीपी और नितीश कुमार की जेडीयू की अहमियत बढ़ गई है। लेकिन क्या नितीश कुमार और चन्द्र बाबू नायडू पक्का एनडीए के साथ बने रहेंगे। अब सारा दारोमदार घटक दलों पर ही निर्भर है कि कहीं वह पलट न जाएं। मामला मात्र 30 सीटों पर फंस रहा है। और राजनीतिक दलों का इतिहास बताता है कि यहां कुछ भी संभव है और कुछ भी असंभव नहीं है।</div>
<div> </div>
<div> हालांकि कानपुर में दोनों सीटों पर भाजपा प्रत्याशी आगे चल रहे थे लेकिन चर्चा यही चल रही थी कि अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गठबंधन की सरकार चलानी होगी। लेकिन अब जितने भी घटक दल हैं इनको बहुत ही सम्मान देना होगा नहीं तो कभी भी मामला इधर से उधर हो सकता है। एक चर्चा और चलती दिखी कि यदि एनडीए की सरकार बनी भी तो क्या वह अपना कार्यकाल पूरा कर पायेगी। इस चुनाव ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा सभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ा ही चिंता लगा दी है। क्यों कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभरी है और भारतीय जनता पार्टी दूसरे नंबर पर आई है। </div>
<div> </div>
<div>एक और चर्चा थी कि अब बहुजन समाज पार्टी का क्या होगा क्या बसपा का खत्मा हो चुका है। चन्द्रशेखर आजाद की नगीना से जीत यह बताती है कि चन्द्रशेखर बहुजन समाज के अगले नेता बनने जा रहे हैं। क्यों कि बसपा का स्कोर शून्य जा रहा है।</div>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Jun 2024 16:43:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नरेन्द्र मोदी को तीसरी बार पीएम बनाने, हरीश की जीत के लिये विश्व हिन्दू महासंघ ने किया यज्ञ, हवन</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में मतगणना से पूर्व सोमवार को विश्व हिन्दू महासंघ जिलाध्यक्ष अखिलेश सिंह के संयोजन में पदाधिकारियोें, कार्यकर्ताओं ने विधि विधान से कड़र शिव मंदिर पर हवन, यज्ञ प्रार्थना कर नरेन्द्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाने और बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी के तीसरी बार विजय की कामना किया।प्रेस को जारी विज्ञप्ति के माध्यम से विश्व हिन्दू महासंघ जिलाध्यक्ष अखिलेश सिंह ने कहा कि चुनाव पूर्व अनुमानों में भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की तीसरी बार भारी बहुमत की सरकार बन रही है।</div>
<div>  </div>
<div>निश्चित रूप से चुनाव परिणाम भाजपा गठबंधन के पक्ष में आयेंगे और नरेन्द्र मोदी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141974/vishwa-hindu-mahasangh-performed-yagya-havan-for-the-victory-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/img-20240603-wa0128-(1).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में मतगणना से पूर्व सोमवार को विश्व हिन्दू महासंघ जिलाध्यक्ष अखिलेश सिंह के संयोजन में पदाधिकारियोें, कार्यकर्ताओं ने विधि विधान से कड़र शिव मंदिर पर हवन, यज्ञ प्रार्थना कर नरेन्द्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाने और बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी के तीसरी बार विजय की कामना किया।प्रेस को जारी विज्ञप्ति के माध्यम से विश्व हिन्दू महासंघ जिलाध्यक्ष अखिलेश सिंह ने कहा कि चुनाव पूर्व अनुमानों में भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की तीसरी बार भारी बहुमत की सरकार बन रही है।</div>
<div> </div>
<div>निश्चित रूप से चुनाव परिणाम भाजपा गठबंधन के पक्ष में आयेंगे और नरेन्द्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनकर देश की जनता की आंकाक्षाओें को पूरा करेंगे।हवन यज्ञ और कड़र शिव मंदिर पर पूजा पाठ करने वालों में मुख्य रूप से प्रदेश मंत्री दिग्विजय सिंह राना, जिला पंचायत सदस्य अमृता सिंह, बाबा जयप्रकाश दास, राजकुमार उर्फ मंटू चौधरी, आशीष उर्फ कल्लू बाबा, हरिश्चन्द्र पटेल, सौरभ त्रिपाठी, संतोष अग्रहरि, अमरदीप श्रीवास्तव, बद्री प्रसाद पाण्डेय, किशन गुप्ता, वेद प्रकाश त्रिपाठी, मनीष पाण्डेय, राजेश गुप्ता, प्रवीण आहूजा, यश गुप्ता, राकेश सिंह, अमरजीत सिंह, बृजनन्दन त्रिपाठी, जमुना प्रसाद, दीपक गुप्ता मोहंटी गुप्ता के साथ ही विश्व हिन्दू महासंघ के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
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                <pubDate>Tue, 04 Jun 2024 17:09:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आज होगी मतगणना, किसके सर पर सजेगी ताज....</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong> बरही </strong>28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के सभी 543 लोकसभा क्षेत्रों के लिए सात चरणों का मतदान शनिवार 1 जून को समाप्त हुआ और अब सभी को देश के सबसे बड़े चुनाव के नतीजों का बेसब्री से इंतजार है। वहीं 20 मई को हजारीबाग लोकसभा चुनाव को लेकर मतदान संपन्न हो चुका है। आज चार जून को वोटों की गिनती होगी। प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के लिए बीती रात कयामत की रात रही। आज किस्मत का पिटारा खुला रहेगा। सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हो जाएगी।</div>
<div>  </div>
<div>हालांकि, उससे पहले फैसले की घड़ी ने प्रत्याशियों की नींद उड़ा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141972/counting-of-votes-will-take-place-today-who-will-be"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/rajneeti.jpg" alt=""></a><br /><div><strong> बरही </strong>28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के सभी 543 लोकसभा क्षेत्रों के लिए सात चरणों का मतदान शनिवार 1 जून को समाप्त हुआ और अब सभी को देश के सबसे बड़े चुनाव के नतीजों का बेसब्री से इंतजार है। वहीं 20 मई को हजारीबाग लोकसभा चुनाव को लेकर मतदान संपन्न हो चुका है। आज चार जून को वोटों की गिनती होगी। प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के लिए बीती रात कयामत की रात रही। आज किस्मत का पिटारा खुला रहेगा। सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हो जाएगी।</div>
<div> </div>
<div>हालांकि, उससे पहले फैसले की घड़ी ने प्रत्याशियों की नींद उड़ा रखी है। लोग अपने अपने हिसाब से जीत का समीकरण तय कर रहे हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों का मानना है कि इस बार एनडीए भारी मतों के अंतर से जीत दर्ज कराएंगी। दावा किया कि चार जून को जब चुनाव परिणाम आएगा तो विपक्ष के तमाम दुष्प्रचार और साजिशों की हवा निकल जाएगी और विकसित भारत का नया सूर्योदय होगा। वहीं इंडी पार्टी के समर्थकों ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों से आहत लोगों ने इंडिया गठबंधन के समर्थन में बढ़-चढ़कर अपना आशीर्वाद दिया है। आज शाम तक सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।  </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jun 2024 17:04:17 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आखिर भाजपा के साथ मोदी भी हारे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आम चुनाव के नतीजे आने से पहले मैंने कहा था कि  ये चुनाव 400  पार का नहीं बल्कि आर-पार का है। आज 4  जून 2024  को आये नतीजे ये प्रमाणित कर रहे हैं की मेरा अनुमान गलत नहीं था। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी होते हुए भी इस बार अकेले बहुमत हासिल नहीं कर सके । 400  पार का नारा तो दूर की बात रही। भाजपा 370  धारा के सहारे प्रति बूथ 370  वोट बढ़कर अकेले दम पर 370  सीटें जितने के लिए खून पसीना बहाया था। देश में नयी सरकार  भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की बनेगी या कांग्रेस के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141959/after-all-modi-also-lost-along-with-bjp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/665c30a2e570a-rahul-gandhi-and-modi-024313898-16x9.webp" alt=""></a><br /><p>आम चुनाव के नतीजे आने से पहले मैंने कहा था कि  ये चुनाव 400  पार का नहीं बल्कि आर-पार का है। आज 4  जून 2024  को आये नतीजे ये प्रमाणित कर रहे हैं की मेरा अनुमान गलत नहीं था। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी होते हुए भी इस बार अकेले बहुमत हासिल नहीं कर सके । 400  पार का नारा तो दूर की बात रही। भाजपा 370  धारा के सहारे प्रति बूथ 370  वोट बढ़कर अकेले दम पर 370  सीटें जितने के लिए खून पसीना बहाया था। देश में नयी सरकार  भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की बनेगी या कांग्रेस के  नेतृत्व वाले  गठबंधन की, ये आज मै नहीं कहने वाला। आज मै सिर्फ इतना कहता हूँ कि  निवर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को देश की जनता ने ख़ारिज कर दिया है। भाजपा को जी कुछ हासिल हुआ है वो मोदी जी के नाम या चेहरे की वजह से नहीं बल्कि उन नेकरधारियों के श्रम की वजह से हासिल हुआ है जिन्हें  नतीजे आने से ठीक पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्ढा ने कहा था कि  भाजपा  को संघ की जरूरत नहीं है।</p>
<p>देश के अभूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में तीसरी बार सरकार बनेगी यी नहीं ये भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों को तय करना है। देश की जनता ने अपना मत दे दिया है कि  उसे मोदी जी का न चेहरा देखना और न उनकी गारंटियों की उसे जरूरत है। इस चुनाव में मोदी जी हारे सो हारे बल्कि हिंदुत्व और सनातन की दरियादिली  भी हारी। मोदी जी ने इस खासियत को संकीर्णता में बदलने की कोशिश की थी। कांग्रेस के राहुल गांधी की मोहब्बत की दूकान का शटर नीचे नहीं गिरा ।  उनकी  दूकान खूब चली। 2024  के जनादेश ने भाजपा और मोशा की जोड़ी को पुन : मूषक बनने   पर विवश कर दिया। आम चुनाव  में नतीजे अप्रत्याशित आते रहते हैं लेकिन वे इतने अप्रत्याशित नहीं होते की उत्तर प्रदेश जैसे बुलडोजर संहिता वाले राज्य में ही मतदाताओं ने बुलडोजर चला दिया। भाजपा की दाढ़ से ज्यादा मोशे की दाढ़ में सत्ता का खून लग चुका है इसलिए भाजपा और मोशा आसानी से सत्ता छोड़ने वाले नहीं है। वे चंद्र बाबू नायडू के साथ ही वे किसी भी क्षेत्रीय दल के साथ गठजोड़ कर सकते हैं।</p>
<p>मुझे निवर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति पूरी सहानुभूति है ,क्योंकि वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी है।  वे कामयाब अभिनेता है।  वक्ता हैं, बहुरूपिये हैं ,मदारी हैं। उनके जैसा कोई दूसरा नहीं है। लेकिन वे पंडित जवाहर लाल नेहरू बनते-बनते रह गए। चुनाव नतीजों ने बता दिया कि  उनकी लोकप्रियता सातवें आसमान को नहीं छू  पायी है।  मुझे लगता है कि  आम चुनाव के नतीजों के बाद अब एक बार फिर भाजपा की चाल,चरित्र और चेहरा फिर से बदलेगा। भाजपा को और संघ को ये करना ही पड़ेगा । भाजपा के रणनीतिकार यदि ऐसा नहीं करेंगे तो आप देखेंगे कि  आने वाले दिनों में भाजपा की हालत ठीक वैसी ही होगी जैसी पिछले दशक में कांग्रेस की हुई थी।<br />वर्ष 2024  के आम चुनाव में कांग्रेस के अलावा देश के अनेक क्षेत्रीय दलों ने कुछ खोया नहीं है बल्कि हासिल ही किया है।  ओडिशा की बीजू जनता दल इसका अपवाद है। भाजपा को न दो-दो मुख्यमंत्रियों को जेल में डालने कोई लाभ नहीं मिला। भाजपा को पंजाब में कुछ नहीं मिला । वहां कांग्रेस फिर से अंकुरित हो गयी। भाजपा का नुक्सान दिल्ली में भी हुआ और पंजाब में भी। लेकिन आम आदमी की भूमिका देश का राजनैतिक माहौल बदलने में कम नहीं हो जाती। बिहार में भले ही राजद अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके लेकिन उनका हौसला आईएनडीआईऐ के काम आया।</p>
<p><br />नयी सरकार में कौन प्रधानमंत्री होगा या नहीं ये अलग मुद्दा है ,लेकिन ये साफ़ हो गया है कि देश मोदी जी मनमानी यानि तानाशाही से फिलहाल बच गया है। देश का संविधान बच गया है ।  अल्पसंख्यकों का आरक्षण  बच गया। देश का 20  करोड़ मुसलमान बन बच गया। देश का भाईचारा बच गया। देश मंदिर -मस्जिद के विवाद  से बच गया। अब भाजपा को राम का नहीं कृष्ण का आसरा लेकर भविष्य की राजनीति  करना पड़ेगी। अपना नेता बदले बिना भविष्य की राजनीति नहीं कर सकती। भाजपा यदि माननीय नरेंद्र मोदी के नाम पर अड़ी रही तो भाजपा का भट्टा बैठ जाएगा। भाजपा ने पिछले दस साल में भाजपा ने जिस तरह से आपरेशन लोटस और आपरेशन झाडू चलाया उससे भाजपा को लाभ होने के बजाय नुक्सान हुआ।</p>
<p>अगले 48  घंटे में देश की राजनीति का ऊँट किस करवट बैठेगा कोई नहीं बता सकता। मै भी नहीं बता सकता। लेकिन ये तय है कि भाजपा के नेतृत्व  में यदि नयी सरकार बनती है तो उसकी उम्र और शक्ति पहले जैसी  नहीं होगी। भाजपा की जो दुर्दशा आज हुई है उससे ज्यादा दुर्दशा कांग्रेस की अतीत में हो चुकी है। तमाम विसंगतियों कि बावजूद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है इसलिए जाहिर है कि  राष्ट्रपति सबसे पहले भाजपा और उसके नेतृत्व वाले गठबंधन को सरकार बनाने का निमंत्रण देगीं। मुमकिन है की तोड़फोड़ में माहिर भाजपा आखिर तक हार न माने और सरकार बनाने लायक संख्या जुटा ले ,लेकिन भाजपा की सरकार अब न 2029  का सपना पूरा कर पायेगी और न 2047  का भारत बना पाएगी। क्योंकि अब नयी सरकार में मोदी जी की गरज पहले जैसी नहीं होगी। वे प्रधानमंत्री बनेगें या नहीं ये भगवान जानता है ,लेकिन मै ये जानता हूँ कि अब मोदी जी अविनाशी नहीं रह पाएंगे। उनके अवतार को आज नहीं तो कल चुनौतियाँ मिलेंगी।</p>
<p>जब आप ये आलेख पढ़ रहेंगे होंगे तब तक अंतिम चुनाव परिणाम आ चुके होंगे। इसलिए जो कुछ बदलेगा वो आज नहीं बल्कि अगले 48  घंटे में बदलेगा। नयी सरकार अब देश का अतीत नहीं बदल पायेगी ।  भूगोल नहीं बदल पाएगी ,अर्थशास्त्र नहीं बदल पायेगी ऐसे में भविष्य कैसे बदलेगी कहना कठिन है। ये चुनाव परिणाम इस बात के भी द्योतक हैं की इस देश में न कोई पप्पू है और न कोई शाहजादा और न उसकी भाषा नक्सलियों की भाषा है। विपक्ष के हर नेता की भाषा देश की जनता समझती है। यदि राहुल की भाषा नक्सलियों जैसी होती तो वे भी उसी तरह ख़ारिज कर दिए जाते जिस तरह मोदी जी को खारिज किया गया है।</p>
<p>नयी सरकार में जो भी प्रधानमंत्री बने उसे हमारी और से अग्रिम शुभकामनायें। नई सरकार से एक ही अपेक्षा है कि वो देश को उस तरह से न हाँके जैसे की माननीय मोदी जी हाँक रहे थे। मोदी जी भी यदि सचमुच तीसरी बार प्रधानमंत्री बनें तो अपने आपको बदल लें। यही उनके हित में है। उनकी पार्टी कि हित में है ।  उनके गठबंधन कि हित में है। क्योंकि इस देश में न तानाशाही कि लिए गुंजाईश है और न हिटलरशाही के लिये । यहां लोकशाही ही चलेगी ।  यहां गांधीवाद ही चलेगा। यहां मंदिर बनाकर जनता की आँखों में धूल नहीं झोंकी जा सकती। ये बात खुद अयोध्या ने ही प्रमाणित कर दी है। राम जी ने भी भाजपा की तरफ से मुंह मोड़ लिया है।</p>
<p><br />इस आम चुनाव में बीजद भी हारी  और बसपा भी ,लेकिन समाजवादी पार्टी आगे बढ़ी है ।  राजद बढ़ी है।  कांग्रेस आगे बढ़ी है। एनसीपी और शिवसेना [ठाकरे ग्रुप ] भी आगे बढ़ा है देश कि तमाम राजाओं ने जहाँ की भाजपा की डबल इंजिन की सरकारें हैं ने भी भाजपा को अस्वीकार कर दिया है। दिल्ली ने जरूर भाजपा का साथ दिया। इसके लिए दिल्ली को साधुवाद देना चाहिए। साधुवाद तो ओडिशा को भी देना चाहिए क्योंकि यहां भाजपा कि प्रवक्ता संविद पात्रा ने मोदी जी की तुलना में भगवान जगन्नाथ को छोटा बता दिया था ,लेकिन लगता है की भगवान जगन्नाथ ने भाजपा को माफ़ कर दिया। इस चुनाव में सबसे बड़ी बात ये हुई की गोदी मीडिया कि चेहरे पर सबसे करारा तमचा पड़ा। गोदी मीडिया कि तमाम एक्जिट पोल औंधे  गिर गए।</p>
<p><strong>राकेश अचल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jun 2024 16:39:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मतगणना हेतु 15 अतिरिक्त सहायक रिटर्निंग आफिसर की गई नियुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बस्ती ।</strong> लोकसभा सामान्य निर्वाचन के अन्तर्गत 61-बस्ती संसदीय क्षेत्र की मतगणना हेतु 15 अतिरिक्त सहायक रिटर्निंग आफिसर की नियुक्ति की गयी है। उक्त जानकारी देते हुए जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी अंद्रा वामसी ने बताया है कि ये ईटीपीबीएस एवं पोस्टल बैलेट की गणना का कार्य सम्पादित करेंगे।</div>
<div>  </div>
<div>उन्होने बताया कि टेबल संख्या 1 के लिए खण्ड विकास अधिकारी परसरामपुर, 2 के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी कप्तानगंज, 3 के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी हर्रैया, 4 के लिए खण्ड विकास अधिकारी सल्टौआ गोपालपुर, 5 के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी बस्ती सदर, 6 के लिए खण्ड विकास अधिकारी सॉऊघाट, 7 के लिए खण्ड</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141919/15-additional-assistant-returning-officers-appointed-for-counting-of-votes"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/img-20240602-wa0096-(1).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बस्ती ।</strong> लोकसभा सामान्य निर्वाचन के अन्तर्गत 61-बस्ती संसदीय क्षेत्र की मतगणना हेतु 15 अतिरिक्त सहायक रिटर्निंग आफिसर की नियुक्ति की गयी है। उक्त जानकारी देते हुए जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी अंद्रा वामसी ने बताया है कि ये ईटीपीबीएस एवं पोस्टल बैलेट की गणना का कार्य सम्पादित करेंगे।</div>
<div> </div>
<div>उन्होने बताया कि टेबल संख्या 1 के लिए खण्ड विकास अधिकारी परसरामपुर, 2 के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी कप्तानगंज, 3 के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी हर्रैया, 4 के लिए खण्ड विकास अधिकारी सल्टौआ गोपालपुर, 5 के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी बस्ती सदर, 6 के लिए खण्ड विकास अधिकारी सॉऊघाट, 7 के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी दुबौलिया, 8 के लिए खण्ड विकास अधिकारी बहादुरपुर, 9 के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी रूधौली तथा 10 के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी कप्तानगंज की नियुक्ति की गयी है। उन्होने बताया की समस्त टेबल के लिए खण्ड विकास अधिकारी विक्रमजोत को नियुक्ति किया गया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jun 2024 15:49:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकसभा चुनाव के सातवें चरण में बूथों पर मतदाताओं की कतार</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>खजनी गोरखपुर। </strong>क्षेत्र में गोरखपुर सदर संसदीय सीट के लिए हो रहे अंतिम सातवें चरण के मतदान में कुल 62 मतदान केंद्रों के 94 बूथों पर दोपहर 1 बजे तक 33 फीसदी मतदान की सूचना दी गई। इसके पहले सबेरे 11 बजे तक 26 फीसदी मतदान हुआ। अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए बूथों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतार लगी रही। शाम 5 बजे तक 52.53 फीसदी मतदान की जानकारी दी गई।</div>
<div>  </div>
<div>उनवल नगर पंचायत, कूंड़ा भरथ, लमतीं, विश्वनाथपुर, भरवलियां, रामपुर मलौली, रेक्शानारा, छताईं, सतुआभार,बसियाखोर,रावतडांड़ी, डोंड़ों, खुटभार,मंझरियां,देड़ारतुला, पल्हीपार बाबू आदि गांवों में मतदान केंद्रों के सभी बूथों पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141901/queue-of-voters-at-booths-in-the-seventh-phase-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/3---,,,-(2).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>खजनी गोरखपुर। </strong>क्षेत्र में गोरखपुर सदर संसदीय सीट के लिए हो रहे अंतिम सातवें चरण के मतदान में कुल 62 मतदान केंद्रों के 94 बूथों पर दोपहर 1 बजे तक 33 फीसदी मतदान की सूचना दी गई। इसके पहले सबेरे 11 बजे तक 26 फीसदी मतदान हुआ। अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए बूथों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतार लगी रही। शाम 5 बजे तक 52.53 फीसदी मतदान की जानकारी दी गई।</div>
<div> </div>
<div>उनवल नगर पंचायत, कूंड़ा भरथ, लमतीं, विश्वनाथपुर, भरवलियां, रामपुर मलौली, रेक्शानारा, छताईं, सतुआभार,बसियाखोर,रावतडांड़ी, डोंड़ों, खुटभार,मंझरियां,देड़ारतुला, पल्हीपार बाबू आदि गांवों में मतदान केंद्रों के सभी बूथों पर शांतिपूर्ण मतदान होने की सूचना दी गई।</div>
<div> </div>
<div>दोपहर में 1 बजे पुलिस कंट्रोल रूम से पल्हीपार बाबू गांव के स्कूल पर बने बूथ पर मतदाताओं को प्रभावित करने की झूठी सूचना पर दल बल के साथ मतदान केंद्र पर पहुंचे थानाध्यक्ष खजनी गौरव आर कन्नौजिया ने अनावश्यक भीड़ को दूर हटाया। सबेरे रेक्शानारा और टेकवार में ईवीएम मशीन काम न करने पर कुछ देर तक मतदान नहीं हो पाया, हालांकि कतार में खड़े मतदाताओं ने ईवीएम ठीक होने तक अपनी बारी का इंतजार किया।</div>
<div> </div>
<div>वही खजनी तहसील क्षेत्र बिधान सिबह सहजनवा के बसियाखोर बूथ संख्या 952 पर 101 वर्षीय बागेश्वरी पांडेय ने मतदान की । </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jun 2024 17:05:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> अठारह हजार पुलिस और सशस्त्र बल के जवान 37 लाख मतदाताओं का कराएंगे मतदान_एसएसपी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>गोरखपुर।</strong> 64 गोरखपुर लोकसभा 67 बासगाव लोकसभा का मतदान  सप्तम चरण में एक जून 2024 को  चुनाव सम्पन्न  होगा पुलिस लाइन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर गौरव ग्रोवर  पुलिस अधिकारियों सशस्त्र बल के राजपत्रिक अधिकारियों और जवानों को ब्रीफ करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए बताया कि गोरखपुर जनपद में दो लोकसभा क्षेत्र पड़ता है जिसको  29 जोन तथा 252 सेक्टर में विभाजित किया गया है प्रत्येक थाना क्षेत्र को 02-02 क्यूआरटी टीम उपलब्ध करायी गयी है गोरखपुर की बाहरी सीमाओं पर 32 स्थानों पर अन्तर्जनपदीय बैरियर की व्यवस्था की गयी है। </div>
<div>  </div>
<div>इसके अतिरिक्त 50 स्थानों पर आन्तरिक पिकेट</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141795/eighteen-thousand-police-and-armed-forces-personnel-will-conduct-voting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/1---,,--.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>गोरखपुर।</strong> 64 गोरखपुर लोकसभा 67 बासगाव लोकसभा का मतदान  सप्तम चरण में एक जून 2024 को  चुनाव सम्पन्न  होगा पुलिस लाइन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर गौरव ग्रोवर  पुलिस अधिकारियों सशस्त्र बल के राजपत्रिक अधिकारियों और जवानों को ब्रीफ करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए बताया कि गोरखपुर जनपद में दो लोकसभा क्षेत्र पड़ता है जिसको  29 जोन तथा 252 सेक्टर में विभाजित किया गया है प्रत्येक थाना क्षेत्र को 02-02 क्यूआरटी टीम उपलब्ध करायी गयी है गोरखपुर की बाहरी सीमाओं पर 32 स्थानों पर अन्तर्जनपदीय बैरियर की व्यवस्था की गयी है। </div>
<div> </div>
<div>इसके अतिरिक्त 50 स्थानों पर आन्तरिक पिकेट (चेक पोस्ट) की व्यवस्था की गयी है सप्तम चरण में कुल 1773 मतदान केन्द्रों तथा 3271 मतदेय स्थलों पर मतदान किया जाना है। इसमें से लोकसभा क्षेत्र 64 गोरखपुर में 140 मतदान केन्द्र व 214 बूथ क्रिटिकल है।लोकसभा क्षेत्र 67 – बांसगांव में 96 मतदान केन्द्र व 186 बूथ क्रिटिकल जिन पर विशेष निगरानी की आवश्यकता है। लोकसभा क्षेत्र 64 – गोरखपुर में बल्नरेबिल मजरों की संख्या - 05 है।लोकसभा क्षेत्र 67 - बांसगांव में बल्नरेबिल मजरों की संख्या 02 है।</div>
<div> </div>
<div>गोरखपुर बांसगांव लोकसभा में कुल 3667756 वोटर है जिनमे 1972307 पुरुष  1695198 महिला 251 जेंडर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे जिनकी सुरक्षा व्यवस्था के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने चुनाव आयोग के निर्देश पर 966 उप निरीक्षक  7478 हेड कांस्टेबल/ कांस्टेबल  जिनमें शस्त्र के साथ 4788 बिना शस्त्र के साथ 2690 महिला आरक्षी 352 होमगार्ड 5468 इसके साथ 24 सेक्शन पीएसी 218.5 सेक्शन सीपीएमएफ अपने दायित्व का निधन करते हुए सज सकुशल चुनाव संपन्न करने में अपना अहम योगदान देंगे।</div>
<div> </div>
<div>कोई भी मतदाता मतदान केंद्र तक मोबाइल नहीं ले जा सकता कोई भी जनप्रतिनिधि अगर उनके साथ है सशस्त्र जवान नियुक्त है तो 100 मीटर पहले ही रहेगा। नमस्कार क्या हाल-चाल है प्रत्याशी पोलिंग पार्टियां 200 मीटर पहले ही बैठेंगे कोई भी पुलिस का जवान मतदान देने जा रही महिलाओं का परिचय पत्र और चेहरा मिलान नहीं करेंगे पुलिस जवान सिर्फ सकुशल चुनाव संपन्न कराने जा रही है ना की पार्टी बनकर वहां किसी के पक्ष में काम करने के लिए चुनाव में लगाए गए सशस्त्र बल के जवान व सिविल पुलिस के जवान अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए चुनाव संपन्न कराएंगे।</div>
<div> </div>
<div>ब्रीफिंग के दौरान चुनाव नोडल अधिकारी एसपी ट्रैफिक  संजय कुमार जॉइंट मजिस्ट्रेट/ एसडीएम सदर   मृणाली अविनाश जोशी पुलिस अधीक्षक मंदिर सुरक्षा अनुराग सिंह सहायक पुलिस अधीक्षक  अंशिका वर्मा सहायक पुलिस अधीक्षक  आलोक भाटी सहित सशस्त्र बल  अधिकारी व गोरखपुर के सभी राजपत्रित अधिकारी मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 May 2024 15:38:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गोपालगंज संसदीय चुनाव मे NDA की जीत सुनिश्चित कार्यकर्ताओ एवं मतदाताओं को धन्यवाद - प्रमोद कुमार पटेल प्रदेश महासचिव</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>गोपालगंज, ( बिहार )</strong> जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश महासचिव सह पूर्व जिला अध्यक्ष प्रमोद कुमार पटेल ने गोपालगंज मे लोकतंत्र के महापर्व संसदीय लोकसभा चुनाव मे वोट के माध्यम से अपना बहुमूल्य योगदान करने के लिए गोपालगंज की महान जनता जनार्दन, एवं NDA की देव दुर्लभ कार्यकर्ता भाइयों बहनों को हिर्दय से धन्यवाद और बधाई देता हूँ,  मै आप लोगों के लगन,उत्साह, धैर्य, साहस, और उदारता की सराहना करता हूँ की जिसतरह से आप सभी लोगों ने उमंग और उत्साह के साथ अपने मत रूपी अधिकार को राष्ट्र हित मे देश के विकास के लिए EVM का बटन दबाकर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141762/thanks-to-the-workers-and-voters-ndas-victory-was-ensured"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/img_20240529_151840.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>गोपालगंज, ( बिहार )</strong> जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश महासचिव सह पूर्व जिला अध्यक्ष प्रमोद कुमार पटेल ने गोपालगंज मे लोकतंत्र के महापर्व संसदीय लोकसभा चुनाव मे वोट के माध्यम से अपना बहुमूल्य योगदान करने के लिए गोपालगंज की महान जनता जनार्दन, एवं NDA की देव दुर्लभ कार्यकर्ता भाइयों बहनों को हिर्दय से धन्यवाद और बधाई देता हूँ,  मै आप लोगों के लगन,उत्साह, धैर्य, साहस, और उदारता की सराहना करता हूँ की जिसतरह से आप सभी लोगों ने उमंग और उत्साह के साथ अपने मत रूपी अधिकार को राष्ट्र हित मे देश के विकास के लिए EVM का बटन दबाकर किया है उसके लिए मै आप सभी के प्रति आभार ब्यक्त करता हूँ और धन्यवाद देता हूँ l</div>
<div> </div>
<div>मै देश के यशश्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार के विकास पुरुष मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार , पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी  उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी , विजय कुमार सिन्हा  मुख्यमंत्री जी के सलाहकार  मनीष कुमार वर्मा सांसद सह पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष  राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह ,प्रदेश अध्यक्ष  उमेश सिंह कुशवाहा, सांसद  चिराग पासवान,  संजय झाँ  मंत्री  मंगल पांडेय,  विजय कुमार चौधरी श्रीमती लेशी सिंह  जनक राम सुनील कुमार,</div>
<div> </div>
<div>बिधान पार्षद  राजीव कुमार ऊर्फ गप्पू बाबू, विधायक  अमरेंद्र कुमार पांडेय ऊर्फ पप्पू पांडेय का तहे दिल से आभार ब्यक्त करते हुए धन्यवाद देता हूँ की आप सभी ने गोपालगंज की जनता एवं कार्यकर्ताओ पर भरोसा एवं विश्वास किया इसके लिए गोपालगंज की जनता एवं कार्यकर्ता भी आप सभी के विश्वास पर पूरा खरा उतरने का प्रयास किया है, साथ ही भविष्य मे गोपालगंज की चौमुखी विकास हो ये उम्मीद किया है l</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 May 2024 16:21:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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